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'उदय जी से मिली परोक्ष प्रेरणा ने मुझे भी बाद में द्विभाषी पत्रकार बना दिया'
देश के पत्रकारिता जगत को भारी क्षति । वरिष्ठ पत्रकार व संपादक उदय सिन्हा नहीं रहे| नि:शब्द हूं|
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
देश के पत्रकारिता जगत को भारी क्षति। वरिष्ठ पत्रकार व संपादक उदय सिन्हा नहीं रहे। नि:शब्द हूं। वे मेरे बड़े भाई थे। ढाई दशकों का रिश्ता। 1993 में असम में मिले, तो पता चला कि वे भी आरा के हैं।तब वे ‘नॉर्थ ईस्ट टाइम’ अखबार के संपादक होकर गुवाहाटी आये थे।
मैं वहीं जीएल पब्लिकेशंस के हिंदी दैनिक ‘पूर्वांचल प्रहरी’ और उनके नये साप्ताहिक ‘सप्तसेतु’ में सह संपादक के रूप में काम करने के बाद राष्ट्रीय सहारा का पूर्वोत्तर ब्यूरो प्रमुख बन गया था। भाई संजय समर साथ थे। तब वे अंग्रेजी भाषा के पत्रकार थे और मैं हिंदी का। उनसे मिली परोक्ष प्रेरणा ने मुझे भी बाद में द्विभाषी पत्रकार बना दिया। तब से जो संबंध बना, वह दिल्ली तक कायम रहा। उनके निधन से मेरा निजी नुकसान हुआ है।
श्री उदय सिन्हा हमारे समय की पत्रकारिता जगत का एक बड़ा नाम रहे हैं। वे ऐसे पहले हिंदी संपादक रहे, जिनको अमरीकी राष्ट्रपति ने साक्षात्कार देने के लिए व्हाइट हाउस आमंत्रित किया था। वे दैनिक भास्कर, द पायनियर, सहारा समय, हरिभूमि और नॉर्थ ईस्ट टाइम जैसे अनेक हिंदी व अंग्रेजी अखबारों के संपादक तो रहे ही, टेलिविजन चैनल-'चैनल वन' के संपादक व एडवाइजर भी रहे।
उनके परिवार में उनकी पत्नी और उनके दोनों पुत्र अनुपम उर्फ हर्ष व अभिषेक (यश) तथा भाई रवि सिन्हा उनकी देखभाल कर रहे थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करें।
(वरिष्ठ पत्रकार ओंकारेश्वर पांडे की फेसबुक वॉल से साभार)
टैग्स निधन उदय सिन्हा श्रद्धांजलि ओंकारेश्वर पांडे