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प्रदूषण सियासत का नहीं, दिल्ली NCR के लोगों की जिंदगी का सवाल: रजत शर्मा
उत्तर की तरफ से जब दिल्ली की ओर हवा चलती है, तो पाकिस्तान से लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक से प्रदूषण साथ लाती हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
रजत शर्मा, चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ (इंडिया टीवी)
दिल्ली NCR में कई दिनों से लोगों को सूरज के दर्शन नहीं हो रहे हैं। प्रदूषण की धुंध ने सूरज को ढक लिया। दिल्ली NCR का इलाका गैस चैंबर में तब्दील हो गया। दिल्ली, फ़रीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में सांस लेना मुश्किल हो रहा है। हवा इतनी जहरीली है कि दिल्ली में स्कूल बंद करने पड़े, लोगों से मास्क लगाने को कहा गया है, डीजल गाड़ियों पर पाबंदी लगा दी गई है, गैरजरूरी निर्माण कार्यों पर रोक है, डीजल के जेनरेटर्स पर बैन है, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्ती की गई है। पूरी दिल्ली में पानी का छिड़काव किया जा रहा है, स्मॉग गन चल रही है, स्मॉग टावर्स को एक्टिव कर दिया गया है।
मतलब सरकार जो कर सकती है, वो सारे उपाय लागू कर दिए गए, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद भी जहरीली हवा लोगों की जान को खतरा बनी हुई है, आंखों में जलन हो रही है, सांस फूल रही है, मरीजों की तादाद बढ़ रही है और इससे भी बड़ी चिंता की बात ये है कि अगले 15 दिनों तक दिल्ली NCR के लोगों को साफ हवा मिलने की कोई उम्मीद भी नहीं है क्योंकि मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगले दो हफ्ते तक हवा की रफ्तार और दूसरे कारकों में किसी तरह के बदलाव के संकेत नहीं हैं।
सवाल ये है कि फिर क्या किया जाए? दिल्ली सरकार ने तो हाथ खड़े कर दिए हैं। दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि सरकार के साथ-साथ लोगों को भी मदद करनी पड़ेगी, तभी कुछ हो सकता है लेकिन गोपाल राय ने नहीं बताया कि लोग क्या करें। क्या घर से बाहर निकलना छोड़ दें? या सांस लेना छोड़ दें? डॉक्टर्स बता रहे हैं कि इस तरह की हवा में सांस लेने से कौन कौन सी खतरनाक बीमारियां हो रही है। बचाव के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए?
वैज्ञानिक बता रहे हैं कि ये हालात कब तक रहेंगे लेकिन कोई ये नहीं बता रहा है कि इस मौसम में हर साल दिल्ली NCR का ये हाल क्यों होता है? कोई कह रहा है कि पराली के कारण प्रदूषण है, कोई गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को जिम्मेदार ठहरा रहा है, कोई निर्माण गतिविधियों को इसके लिए जिम्मेदार बता रहा है। कोई दिल्ली की भौगोलिक स्थिति को प्रदूषण की वजह बताता है। लेकिन ठोस जवाब किसी के पास नहीं है और नेता इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। प्रदूषण के मुद्दे पर सियासत हो रही है, आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच जंग छिड़ी है और कांग्रेस ज्ञान दे रही है।
दिल्ली गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी है। शुक्रवार को दिल्ली के ज्यादातर इलाकों का एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार रहा, जबकि सांस लेने के लिए सबसे अच्छी हवा का AQI 50 से ज्यादा नहीं होना चाहिए, 100 AQI तक भी चल सकता है, लेकिन अगर उसके ऊपर AQI लेवल जाता है, तो हवा अच्छी नहीं मानी जाती। 150 से ऊपर AQI लेवल यानी रेड एलर्ट, लेकिन दिल्ली में तो ये 400 के पार है, और 500 तक पहुंचने वाला है।
दिल्ली के कुछ इलाकों में हवा जहरीली हो चुकी है। बुराड़ी में AQI 465, आनंद विहार में 441, जहांगीपुरी और वजीरपुर जैसे इंडस्ट्रियल एरिया में 491 पहुंच गया है। NCR के दूसरे शहरों का हाल तो और बुरा है। नोएडा में AQI लेवल 428, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद में 498 है, गाजियाबाद में 398 और गुरुग्राम में 372 दर्ज किया गया है। हालांकि लखनऊ, कानपुर और आगरा जैसे शहरों में भी प्रदूषण है लेकिन वहां हालात दिल्ली और नोएडा से बेहतर हैं। वैसे ये मुद्दा सियासत का नहीं है। ये दिल्ली NCR के लोगों की जिंदगी का सवाल है। इस वक्त सारे नेता प्रदूषण की बात कर रहे हैं, हर कोई प्रदूषण को काबू में करने का अपना अपना तरीका बता रहा है, लेकिन प्रदूषण हो क्यों रहा है, ये किसी को नहीं मालूम। दिल्ली में प्रदूषण की कई वजहें बताई जाती है।
सबसे पहली वजह है दिल्ली की भौगौलिक स्थिति, दिल्ली चारों तरफ से जमीन से घिरी हुआ है। इसलिए उत्तर की तरफ से जब हवा चलती है, तो पाकिस्तान से लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक से प्रदूषण साथ लाती हैं। दूसरी वजह है पंजाब और हरियाणा में पराली का जलना। इस वक्त बुआई का मौसम है, धान कट चुकी है, खेत तैयार करने के लिए पाकिस्तान से लेकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पराली जलाई जाती है। इसका धुआं दिल्ली का दम घोंटता है।
हालांकि दिल्ली के पॉल्यूशन में पराली के धुएं का 20 से 25 परसेंट होता है। तीसरी बड़ी वजह है, दिल्ली में गाड़ियों से निकलने वाला धुआं। दिल्ली को ‘कार कैपिटल ऑफ दि वर्ल्ड’ कहा जाता है। दिल्ली में करीब एक करोड़ गाड़ियां हैं। इनसे निकलने वाला धुआं भी दिल्ली में 17 परसेंट तक प्रदूषण बढ़ाता है। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन से उठने वाली धूल और फैक्ट्रियों और कारखानों से निकलने वाले केमिकल और धुआं भी दिल्ली की हवा को ख़राब करते हैं। प्रदूषण में उद्योगों का योगदान क़रीब 11 परसेंट है। रिहाइशी इलाकों में इंसानी गतिविधियों से दिल्ली के प्रदूषण में 13 परसेंट का इजाफा होता है।
लेकिन, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने जहरीली हवा के लिए पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने यूपी, राजस्थान और हरियाणा का नाम लिया लेकिन पंजाब का नाम नहीं लिया। जबकि दो साल पहले तक केजरीवाल सरकार, दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब और हरियाणा को ही जिम्मेदार ठहराती थी लेकिन, अब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। तो उस पर तो केजरीवाल की सरकार इल्ज़ाम नहीं लगा सकती। हालांकि, पंजाब में कितने बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है, उस पर नजर डालें। इस सीजन में पंजाब में पराली जलाने के करीब दस हज़ार मामले सामने आ चुके हैं। दो नवंबर को पंजाब में पराली जलाने के 1921 केस सामने आए जो इस सीजन में सबसे ज्यादा हैं।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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