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सफल रहा पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा, रणनीतिक भागीदारी नई ऊंचाई पर: अशोक श्रीवास्तव
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्हाइट हाउस पहुंचे तो राष्ट्रपति जो बाइडेन अपनी पत्नी के साथ भारत के प्रधानमंत्री की आगवानी करने के लिए अपने घर के दरवाजे पर खड़े थे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
अशोक श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार और एंकर, डीडी न्यूज़।
लगभग 50 साल पहले अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भारत के लोगों पर टिपण्णी करते हुए कहा था कि भारतीय दयनीय हैं l 1971 में जब भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने व्हाइट हॉउस पहुंचीं तो मुलाकात का समय तय होने के बावजूद राष्ट्रपति निक्सन ने भारत की प्रधानमंत्री को 45 मिनट तक इंतजार कराया।
अमेरिका तब सुपर पॉवर था, अमेरिका आज भी सुपर पॉवर है लेकिन आज जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्हाइट हाउस पहुंचे तो राष्ट्रपति जो बाइडेन अपनी पत्नी के साथ भारत के प्रधानमंत्री की अगुवानी करने के लिए अपने घर के दरवाजे पर खड़े थे।
भारत के प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गयी, भारत के प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए व्हाइट हाउस ने रेड कारपेट तो बिछाया ही था, साथ ही साथ पहली बार भारतवंशियों के लिए अपने दरवाजे भी खोल दिए l व्हाइट हॉउस में जब हल्की बूंदाबांदी के बाद भारत के प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा रहा था तो व्हाइट हॉउस के साऊथ लॉन में मौजूद हजारों भारतीय तिरंगे के साथ हाथ में अमेरिकी झंडा लिए ‘भारत माता की जय’...’वन्दे मातरम’ और मोदी..मोदी के नारे लगा रहे थे l
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 4 दिन अमेरिका में रहे और इन चार दिनों में इतिहास सिर्फ व्हाइट हॉउस के लॉन में ही नहीं बना, बल्कि राष्ट्रपति भवन के ओवल हॉउस में भी बना, जहां प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन ने भारत अमेरिका के बीच न सिर्फ कई संधियों की मुहर लगा दी, बल्कि दोनों देशों के आपसी रिश्तों की एक नई इबारत भी लिख दी l
अमेरिका के राष्ट्रपति ने तो भारत और अमेरिका के संबंधों को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण संबंध बता दिया l मोदी के 4 दिन के दौरे में भारत के साथ अमेरिका ने 8 समझौते कर डाले l इनमें लडाकू विमानों के जेट इंजन बनाने से लेकर, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, रेलवे से लेकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में समझौते शामिल हैं l दोनों देश 6 व्यापारिक बाधाओं को सुलझाने पर भी सहमत हो गए और मोदी बाइडन प्रशासन को एच-1बी वीजा में ढील देने पर भी राजी करने में कामयाब हो गए, जिसका अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को बहुत फायदा होगा l दरअसल अमेरिकी कंपनियां एच-1बी वीजा के तहत ही विदेशों से स्किल्ड कामगारों को नौकरी देती हैं और अमेरिका ने जितने भी एच-1बी वीजा जारी किये हैं उनमें से 70 फीसदी से ज्यादा वीजा भारतीयों को मिले हैं l
इसीलिए वॉशिंगटन के रीगन सेंटर में दौरे के अपने अंतिम कार्यक्रम में मोदी ने जब इसका ऐलान किया कि एच-1बी वीजा के नवीकरण के लिए अमेरिका में रहकर ही स्टाम्पिंग करवाई जा सकेगी तो खचाखच भरे सभागार में लोग ख़ुशी के मारे खड़े हो गए और ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के नारे लगाने लगे l
रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों में जो समझौते हुए हैं उनके भी बहुत ख़ास मायने हैं, क्योंकि ये समझौते विक्रेता और खरीददार के रूप में नहीं बल्कि सहयोगी के रूप में हुए हैं l प्रोडक्ट के साथ- साथ अमेरिका भारत को टेक्नोलोजी भी देगा और दोनों देश मिलकर उत्पादन करेंगे l
इससे रक्षा के क्षेत्र में मोदी के आत्मनिर्भर भारत की मुहीम को बल मिलेगा l आमतौर पर अमेरिका टेक्नोलोजी ट्रांसफर अपने करीबी नाटो देशों को भी नहीं देता l इस लिहाज से अब भारत और अमेरिका की रणनीतिक भागीदारी नई ऊंचाई पर पहुंच गयी है l सेमीकंडक्टर के क्षेत्र हुआ समझौता भी बेहद अहम हैं, इससे भारत आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर का बड़ा हब बन जायेगा और दुनिया के देशों के लिए चीन का एक बड़ा विकल्प बन जायेगा l
साभार-नवोदय टाइम्स
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