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'इंदु मां का आभामंडल ऐसा था, जैसे मां अपने बच्चों का ध्यान रखती है'
‘टाइम्स समूह’ की चेयरपर्सन इंदु जैन के निधन पर योरनेस्ट वेंचर कैपिटल के मार्केटिंग स्ट्रैटेजी एडवाइजर मोहित हीरा ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनसे जुड़ी यादों को साझा किया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
‘टाइम्स समूह’ (The Times Group) की चेयरपर्सन और देश की जानी-मानी मीडिया शख्सियत इंदु जैन के निधन पर योरनेस्ट वेंचर कैपिटल के मार्केटिंग स्ट्रैटेजी एडवाइजर मोहित हीरा ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनसे जुड़ी यादों को हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) के साथ साझा किया है। बता दें कि कोरोना के संक्रमण की चपेट में आकर गुरुवार की देर शाम इंदु जैन का निधन हो गया था। 84 वर्षीय इंदु जैन कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं।
मोहित हीरा का कहना है, ‘कॉन्ट्रैक्ट एडवर्टाइजिंग के कंफर्ट जोन में काम करने के 16 साल बाद 2003 में मेरी मुलाकात दिल्ली में 7, बहादुरशाह जफर मार्ग स्थित टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के मुख्यालय की चौथी मंजिल पर मैं उस लेडी से मिला, जिन्हें हम लोग 'चेयरमैन' कहते थे।’
कई लोगों ने श्रीमती इंदु जैन (यह पहली बार है, जब मैं उनका पूरा नाम ले रहा हूं) को ‘मां’ या ‘मम्मी’ के रूप में उद्धृत किया है। यह उन लोगों को अजीब लग सकता है, जिन्होंने उनसे मुलाकात अथवा बातचीत नहीं की है, लेकिन सच्चाई यह है कि जिस तरह एक मां अपने बच्चों का ध्यान रखती है, इसी तरह का आभामंडल उनका था। यह भी लोगों को अजीब लग सकता है कि मिस्टर समीर जैन और मिस्टर विनीत जैन हमेशा उन्हें चेयरमैन कहकर संबोधित करते थे। वहीं, वह भी उन्हें वीसी (वाइस चेयरमैन) और एमडी (मैनेजिंग डायरेक्टर) कहकर संबोधित करती थीं। यह उनका अपना तरीका था। वह ग्रुप में काम करने वाले सभी लोगों को लिए मां के साथ चेयरमैन भी थीं। वह काफी मृदु थीं, लेकिन जिस लक्ष्य को उन्होंने ठान लिया, उसके लिए वह काफी दृढ़ रहती थीं।
टाइम्स फाउंडेशन के हेड के रूप में मैंने अपने पहले असाइमेंट्स में से एक में उनके साथ मिलकर काम किया था। उनका शांतिमय चेहरा ऐसा था, जो उनके संपर्क में आने वालों को एकदम शांतचित्त कर देता था, जो समूह के मूल में निहित समाचार जुटाने की आपाधापी भरी दुनिया के बिल्कुल विपरीत था। यह मान लेना काफी आसान था कि चेयरमैन को सिर्फ आध्यात्मिक कार्यों में रुचि है, वह जिन लोगों पर भरोसा करती थीं, उनसे बिजनेस के मुद्दों पर दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देती थीं। वह काफी उदार थीं और लोगों पर आसानी से भरोसा कर लेती थीं।
वाइस चेयरमैन के साथ उनके घर पर तमाम लंच मीटिंग्स में से एक घटना मुझे अभी भी याद है। एक बार मैंने उनके द्वारा लाए गए गाजर के हलवे की तारीफ करने की ‘गलती’ कर दी थी, जिसे वह सरदार पटेल मार्ग पर अपने घर की रसोई से लाई थीं। वह उस दिन हमारे साथ थीं और उन्होंने मुझे अपने यह बात कहते हुए सुन लिया था कि गाजर का हलवा कितना स्वादिष्ट है। शाम को जब मैं घर जाने के लिए अपनी गाड़ी में बैठा तो सीट पर एक डिब्बा रखा हुआ था। इस डिब्बे में गाजर का हलवा था। (मुझे लगता है कि दो डिब्बे हलवा तैयार हुआ होगा, जिसमें से सिर्फ एक का सेवन हुआ था।) किचन के स्टाफ ने बाद में मुझे बताया कि परिवार के लिए ले जाने के लिए इसे अलग रखा गया था। यह बात मेरे दिल को छू गई, लेकिन शर्मिंदगी भी हुई। अगले दिन जब मैंने इस बात का हल्का सा विरोध किया तो उन्होंने मुस्कराहट के साथ सिर्फ यही पूछा, क्या बच्चों ने गाजर के हलवे का सेवन किया और उन्हें पसंद आया? मैंने जवाब दिया कि बच्चों को वह बहुत पसंद आया, यह सुनकर उनकी आंखों में चमक आ गई।
(मोहित हीरा ने वर्ष 2003 से 2008 के बीच टाइम्स ग्रुप में तमाम जिम्मेदारियां निभाई हैं)
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