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मिलिंद खांडेकर ने बताया, नकल चलेगी या असल! पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'
थ्रेड पर टेक्स्ट यानी लिखे हुए शब्दों पर जोर रहेगा। फोटो और वीडियो भी लगा सकते हैं, हालाँकि उसके लिए फेसबुक और इंस्टा पहले से ही है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
मिलिंद खांडेकर, मैनेजिंग एडिटर, तक चैनल्स, टीवी टुडे नेटवर्क।
ट्विटर की टीम ने पांच साल पहले ट्विटर और इंस्टाग्राम का फर्क समझाया था, वो आज तक मेरे दिमाग में बैठा हुआ है। इंस्टाग्राम का मतलब है कि मुझे देखो यानी मेरी फोटो, मेरी रील जबकि ट्विटर का मतलब है कि इसे देखो, ये क्या हो रहा है? अब पांच साल बाद इंस्टाग्राम ने ट्विटर जैसा थ्रेड ऐप लॉन्च कर दिया है। ये लॉन्च ऐसे वक्त हुआ है जब हम शिकायत कर रहे हैं कि सोशल मीडिया पर बहुत भीड़ है।
मेटा के पास फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉटसऐप पहले से ही है। थ्रेड फिलहाल इंस्टा के साथ काम करेगा, यानी इंस्टा अकाउंट होने पर ही थ्रेड चला पाएंगे। थ्रेड पर टेक्स्ट यानी लिखे हुए शब्दों पर जोर रहेगा। फोटो और वीडियो भी लगा सकते हैं, हालांकि उसके लिए फेसबुक और इंस्टा पहले से ही है। इसको लेकर दो तरह की थ्योरी मुझे पढ़ने को मिली हैं। ट्विटर में मची अफरातफरी में जुकरबर्ग अवसर खोज रहे हैं और AI यानी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के लिए लिखे हुई जानकारी का भंडार बनाना चाहते हैं।
ट्विटर में साल भर से अफरातफरी मची है। दुनिया के दूसरे सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क को ट्वीट करने के चक्कर में ट्विटर खरीदना पड़ गया। उन्होंने 44 बिलियन डॉलर (करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए) की बोली लगा दी। फिर उन्हें समझ आया कि ये महंगा सौदा है तो तोड़ने की कोशिश की। ट्विटर कोर्ट चला गया तो उन्हें सौदा करना पड़ा। ट्विटर घाटे में था तो उन्होंने 6 हजार लोगों की छंटनी कर दी। रोज बदलते नियमों से परेशान कंपनियों ने विज्ञापन देना कम कर दिया। ट्विटर ब्लू से यूजर्स से ही पैसे वसूलने लगे।
अब हर रोज आप कितने ट्विट पढ़ सकते हैं उसकी सीमा तय कर दी गई है। हालांकि मस्क का कहना है कि AI कंपनियां ट्विटर का डेटा चोरी कर रहीे थी, उन्हें रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। ट्विटर कभी पैसे नहीं बना पाया लेकिन गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों को हमेशा अफसोस रहा है कि ट्विटर जैसा ऐप उनके पास नहीं है। ट्विटर का प्रभाव दुनिया भर में है, सरकारें इससे परेशान रहती है और ये राजनीति का अखाड़ा बन गया है। थ्रेड इस कमी को पूरा करने की कोशिश है। इकनॉमिस्ट ने एक और थ्योरी पेश की है।
AI के बढ़ते प्रभाव में लिखे हुए शब्दों की कीमत बढ़ गई। Reditt जैसे प्लेटफॉर्म पर जो जानकारी है वो कई सौ बिलियन डॉलर के बराबर मानी गई है। इस रेस में बाकी कंपनियां आगे हैं, इस कारण जुकरबर्ग अपने लिए भंडार बना रहे हैं। सबके मन में सवाल है कि ट्विटर और थ्रेड में कौन कामयाब होगा? आप पीछे मुड़कर देखेंगे तो पाएंगे कि मार्क जुकरबर्ग नकल करते हुए आगे निकले हैं। इंस्टाग्राम, WhatsApp और फेसबुक पर जो स्टोरी फीचर आप देखते हैं वो Snapchat ने शुरू किया था।
Snapchat भारत में कभी कामयाब नहीं रहा, लेकिन अमेरिका में लोकप्रिय रहा है। TikTok ने इंस्टाग्राम को टक्कर दे रखी थी तो उसकी देखा देखी Reel लॉन्च कर दी। TikTok भारत में 2020 से बंद है पर बाकी दुनिया में टक्कर दे रहा है। थ्रेड भी ट्विटर की नकल है, आप ही बताइए कि नकल अच्छी लगी है या असल ही ठीक है?
(वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर 'टीवी टुडे नेटवर्क' के 'तक चैनल्स' के मैनेजिंग एडिटर हैं और हर रविवार सोशल मीडिया पर उनका साप्ताहिक न्यूजलेटर 'हिसाब किताब' प्रकाशित होता है।)
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