होम / विचार मंच / इन 10 वजहों पर टिकी है दक्षिण भारतीय मीडिया सेक्टर की सफलता की ‘नींव’: डॉ. अनुराग बत्रा

इन 10 वजहों पर टिकी है दक्षिण भारतीय मीडिया सेक्टर की सफलता की ‘नींव’: डॉ. अनुराग बत्रा

पिछले दिनों ‘सीआईआई दक्षिण-साउथ इंडिया मीडिया और एंटरटेनमेंट समिट को संबोधित कर रहे थे ‘बिजनेसवर्ल्ड’ समूह के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

डॉ. अनुराग बत्रा।।

करीब दो हफ्ते पहले मैंने ‘सीआईआई दक्षिण-साउथ इंडिया मीडिया और एंटरटेनमेंट समिट (CII Dakshin, South India Media and Entertainment Summit) को संबोधित किया। यहां मैंने इस मुद्दे पर बात की कि आखिर साउथ मीडिया क्यों लगातार आगे बढ़ता जा रहा है और इसकी सफलता का क्या राज है। ‘नाटू नाटू’ (Natu Natu) और ‘आरआरआर’ (RRR) की सफलता पूरी दुनिया के लिए दक्षिण भारतीय मीडिया सेक्टर के आगे बढ़ने का स्पष्ट संकेत है। मेरी नजर में दस कारण हैं, जिन पर साउथ इंडिया मीडिया इंडस्ट्री की 'नींव' टिकी है और यह लगातार सफलता के पथ पर आगे बढ़ रहा है।      

1. बढ़ता क्षेत्रीय मार्केट (Growing Regional Market): दक्षिण भारतीय मीडिया सेक्टर को यहां के बड़े और तेजी से बढ़ते रीजनल मार्केट का काफी फायदा मिल रहा है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु समेत दक्षिण भारतीय राज्यों की कुल मिलाकर आबादी 250 मिलियन से अधिक है, जो एक बड़ा और मजबूत उपभोक्ता आधार (consumer base) बना रही है। क्षेत्र में बढ़ती जनसंख्या, बढ़ता मध्यम वर्ग और खर्च योग्य आय के स्तर में वृद्धि ने मीडिया कंटेंट की मांग में वृद्धि की है, जिसके परिणामस्वरूप इंडस्ट्री के लिए उच्च विकास की क्षमता बढ़ रही है।

2. समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (Rich Cultural Heritage): दक्षिणी भारत की बात करें तो यहां की सांस्कृतिक विरासत काफी समृद्ध है और साहित्य, संगीत, नृत्य व सिनेमा का काफी लंबा इतिहास है। दक्षिण भारत में मीडिया इंडस्ट्री को इस तरह का कंटेंट तैयार करने में जो स्थानीय लोगों से जुड़ाव बढ़ाए, इस सांस्कृतिक विरासत का लाभ मिलता है।

दक्षिण भारत के लोगों के बीच गहरा सांस्कृतिक संबंध और गर्व की भावना इस तरह के मीडिया कंटेंट की मांग को बढ़ाती है, जो उनकी परंपराओं, मूल्यों और जीवन दर्शन को दर्शाती है। इससे मीडिया प्रॉडक्ट्स से जुड़ाव बढ़ता है और उसका उपभोग ज्यादा होता है।

3. भाषाई विविधता (Language Diversity): दक्षिण भारत को भाषाई विविधता के लिए भी जाना जाता है। यहां बोली जाने वाली तमाम भाषाओं में तेलुगू, तमिल, मलयालम और कन्नड़ शामिल हैं। यही भाषाई विविधता मीडिया इंडस्ट्री को स्थानीय ऑडियंस की विशिष्ट भाषाई प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए उनकी भाषाओं में कंटेंट तैयार करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करती है। इस भाषाई विविधता के कारण न सिर्फ मार्केट बढ़ता है, बल्कि कंटेंट की विस्तृत श्रंखला तैयार करने को लेकर प्रोत्साहन भी मिलता है, जिससे यहां के मीडिया सेक्टर की अच्छी ग्रोथ होती है।  

4. रीजनल फिल्म इंडस्ट्री की मजबूत  मौजूदगी (Strong Regional Film Industries): दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्रीज की बात करें तो देश में तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम आदि सबसे प्रमुख रीजनल फिल्म इंडस्ट्रीज हैं। इन फिल्म इंडस्ट्रीज का अपना बड़ा दर्शक वर्ग है। यहां हर साल बड़ी संख्या में फिल्मों का निर्माण होता है, जो दक्षिण भारत में मीडिया इंडस्ट्री के समग्र विकास में योगदान देता है।  

5. यूनिक कंटेंट और थीम्स (Unique Content and Themes): दक्षिण भारतीय मीडिया को अपने यूनिक कंटेंट और थीम्स के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र का साहित्य, लोककथाएं, इतिहास और सामाजिक मुद्दे अक्सर फिल्मों, टीवी शो और वेबसीरीज में स्टोरीज कहने के आधार के रूप में काम करते हैं। दक्षिण भारतीय मीडिया अक्सर ऐसे अपरंपरागत विषयों और सामाजिक मुद्दों को उठाता है, जिन्हें मुख्यधारा के मीडिया में प्रमुखता से जगह नहीं मिलती है। कंटेंट को लेकर यह विशिष्ट दृष्टिकोण इसे देश के अन्य मीडिया मार्केट्स से अलग करता है और स्टोरी कहने और रचनात्मक अभिव्यक्ति के मामले में इसे यूनिक बनाता है।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने दक्षिण भारतीय मीडिया इंडस्ट्री में कंटेंट के विविधीकरण को बढ़ाया है। ये इन्फ्लुएंसर विभिन्न जॉनर जैसे कि कॉमेडी, लाइफस्टाइल, फूड और ट्रैवल में अधिक कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे ऑडियंस के पास विकल्पों की लंबी श्रंखला होती है। इसकी वजह से दक्षिण भारतीय मीडिया के कंटेंट परिदृश्य का विस्तार हुआ है और इसने ऑडियंस की बढ़ती प्राथमिकताओं व रुचियों को पूरा किया है और इंडस्ट्री के समग्र विकास में योगदान दे रहा है।

6. इनोवेशन और नए प्रयोग (Innovation and Experimentation): साउथ इंडिया की मीडिया इंडस्ट्री को कंटेंट क्रिएशन में इनोवेशन और एक्सपेरिमेंटशन यानी नवाचार और प्रयोग के लिए जाना जाता है। दक्षिण भारतीय मूवीज, टीवी शोज और वेबसीरीज आमतौर पर अपरंपरागत विषयों, स्टोरीज और जॉनर की तलाश में रहती हैं और उन्हें पेश करती हैं। यह बात उन्हें मुख्यधारा के मीडिया से अलग करती है। यूनिक और कंटेंट में विविधता का यह गुणात्मक पहलू दक्षिण भारत में मीडिया इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

7. ओवर द टॉप प्लेटफॉर्म्स (Over-The-Top Platforms): ओवर द टॉप प्लेटफॉर्म्स (ओटीटी) जैसे-नेटफ्लिक्स, एमेजॉन प्राइम वीडियो, हॉटस्टार और रीजनल प्लेटफॉर्म्स जैसे Sun NXT, ZEE5 और MX Player ने दक्षिण भारत में काफी ज्यादा लोकप्रियता हासिल कर ली है। इन प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न स्थानीय भाषाओं में कंटेंट मिलता है, जिनमें मूवीज, वेबसीरीज और टीवी शोज आदि शामिल हैं, जिन्हें खासतौर पर दक्षिण भारतीय ऑडियंस को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। ऑन-डिमांड स्ट्रीमिंग की सुविधा और विकल्पों की विस्तृत रेंज ने ओटीटी प्लेटफार्म्स को तमाम दक्षिण भारतीय कंज्यूमर्स के लिए पसंदीदा विकल्प बना दिया है। 

8. कंज्यूमर्स के रूप में दक्षिण भारतीय प्रवासियों की बड़ी संख्या (South Indian NRI Diaspora as Consumers): बड़ी संख्या में दक्षिण भारतीय लोग विभिन्न देशों में बसे हुए हैं, इसकी वजह से भी दक्षिण भारतीय मीडिया मार्केट का एक मजबूत और प्रमुख कंज्यूमर बेस बना हुआ है। इन प्रवासी दक्षिण भारतीयों का अपनी मातृभूमि के साथ मजबूत भावनात्मक संबंध होता है और वे अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए दक्षिण भारतीय मीडिया का ज्यादा उपभोग (Consumption) करते हैं। दक्षिण भारतीय मीडिया इंडस्ट्री भी अक्सर इन एनआरआई ऑडियंस के लिए इस तरह का कंटेंट तैयार करता है, जो उनकी सांस्कृतिक संवेदनाओं और भावनाओं के रूप में परिलक्षित होता है। दक्षिण भारतीय प्रवासियों का यह यूनिक कंज्यूमर बेस इसे देश के अन्य क्षेत्रीय मीडिया मार्केट्स से अलग करता है और आगे बढ़ाता है।

9. ब्रैंड्स को बढ़ावा देना और विज्ञापन (Brand Endorsements and Advertising):  ब्रैंड्स को बढ़ावा देने और विज्ञापन के लिए दक्षिण भारतीय मीडिया इंडस्ट्री काफी अच्छी जगह मानी जाती है। इस क्षेत्र में लोकप्रिय अभिनेताओं, अभिनेत्रियों और अन्य मीडिया हस्तियों का व्यवहार लोगों पर काफी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है और लोग उनसे प्रेरित होते हैं। ऐसे में अक्सर तमाम ब्रैंड्स द्वारा विज्ञापनों के लिए उनकी मांग की जाती है। यह बड़ी वजह भी दक्षिण भारत में मीडिया इंडस्ट्री को विज्ञापनदाताओं और मार्केटर्स के लिए एक आकर्षक मार्केट तैयार करती है।

10. सांस्कृतिक महत्व (Cultural Significance): दक्षिण भारत में मीडिया इंडस्ट्री अपनी अनूठी परंपराओं, रीति-रिवाजों, कलाओं और लोककथाओं के साथ क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। दक्षिण भारत में जो मीडिया कंटेंट तैयार होता है, वह अक्सर स्थानीय ऑडियंस के साथ गहराई से जुड़ जाता है, जिसकी वजह से मजबूत भावनात्मक जुड़ाव उत्पन्न होता है। यही सांस्कृतिक महत्व मीडिया इंडस्ट्री में एक गुणात्मक पहलू जोड़ता है, जो इसे अन्य मार्केट्स से अलग बनाता है। 


टैग्स डॉ. अनुराग बत्रा सीआईआई कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री सीआईआई दक्षिण क्षेत्र भारतीय उद्योग परिसंघ
सम्बंधित खबरें

गहरी खाई में क्यों गिरी टीम इंडिया की गाड़ी: नीरज बधवार

रिंकू को शुद्ध बल्लेबाज़ के रूप में टीम में रखा जाता है, लेकिन उन्हें सातवें क्रम पर तब भेजा जाता है जब या तो बहुत कम गेंदें बची होती हैं या साथ देने वाला कोई नहीं होता।

14 hours ago

साहित्य से छंटती व्यक्तिगत विवादों की धुंध: अनंत विजय

क्या लेखक सत्ता की कांता होती है या गांव की सीमा पर भूँकता हुआ कुकुर ? प्रगतिशीलता के ध्वजवाहकों ने महिलाओं और साहित्यकारों पर घटिया टिप्पणी क्यों की थी?

1 day ago

टैरिफ पर टैरिफ नहीं चलेगा! पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी ट्रंप के पास टैरिफ़ लगाने के रास्ते हैं। पहले उन्होंने उसी कानून के तहत 10% टैरिफ़ लगा दिया, फिर 24 घंटे के भीतर बढ़ाकर 15% कर दिया। यह टैरिफ़ अस्थायी है।

1 day ago

भारत मंडपम में कांग्रेस विरोध, लेकिन भूल गए अपने फर्जीवाड़े: आलोक मेहता

हाल में एआई सम्मेलन के दौरान “चीनी मॉडल” को अपना बताने के आरोपों पर विश्वविद्यालय ने सफाई दी कि संबंधित रोबोट शैक्षणिक प्रयोग के लिए खरीदा गया था और प्रस्तुति में चूक हुई।

1 day ago

AI पर नियंत्रण करना भी बेहद आवश्यक: रजत शर्मा

प्रधानमंत्री मोदी ने कम शब्दों में कई बड़ी बातें कहीं। भारत एआई में विश्व का अग्रणी बनना चाहता है, हमारे देश के पास दिमाग़ भी है, युवा शक्ति भी है और सरकार का समर्थन भी है।

3 days ago


बड़ी खबरें

'डीडी न्यूज' में नौकरी का मौका, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट के लिए मोटी सैलरी ऑफर

भारत के लोक सेवा प्रसारक प्रसार भारती ने 'डीडी न्यूज' के लिए बड़ी भर्ती का ऐलान किया है।

10 hours ago

फिल्म सर्टिफिकेशन की ‘प्रायोरिटी स्कीम’ बंद करने की तैयारी, सरकार ने मांगे सुझाव

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़ी ‘प्रायोरिटी स्कीम’ को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।

10 hours ago

ESOP के जरिए एम्प्लॉयीज को मिला फायदा, बालाजी टेलीफिल्म्स ने बढ़ाई पेड-अप कैपिटल

टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की जानी-मानी कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) ने अपने एम्प्लॉयीज को ESOP योजना के तहत 25,000 इक्विटी शेयर जारी किए हैं।

10 hours ago

SAIL बनी DD न्यूज के ‘डिकोड विद सुधीर चौधरी’ की स्पॉन्सर कंपनी

देश की बड़ी सरकारी स्टील कंपनी Steel Authority of India Limited (SAIL) अब डीडी न्यूज के चर्चित प्राइम टाइम शो ‘डिकोड विद सुधीर चौधरी’ की स्पॉन्सर कंपनी बन गई है

11 hours ago

निकुंज डालमिया ने लॉन्च किया नया बिजनेस प्लेटफॉर्म ‘The Broadview’

ET Now और ET Now Swadesh के एडिटर-इन-चीफ रह चुके निकुंज डालमिया अब अपना नया वेंचर ‘The Broadview’ लेकर आए हैं।

22 hours ago