दरअसल हमारी राजनीति ही नहीं, हमारे समूचे सार्वजनिक विमर्श की भाषा बहुत सपाट, अश्लील और निरर्थक हो चुकी है। इस विमर्श में सिर्फ़ नफ़रत है और शब्द अपने अर्थ जैसे खो चुके हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।