विजय शाह जैसे नेता समाज और सियासत के लिए कलंक : समीर चौगांवकर

दरअसल हमारी राजनीति ही नहीं, हमारे समूचे सार्वजनिक विमर्श की भाषा बहुत सपाट, अश्लील और निरर्थक हो चुकी है। इस विमर्श में सिर्फ़ नफ़रत है और शब्द अपने अर्थ जैसे खो चुके हैं।

Last Modified:
Saturday, 17 May, 2025
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समीर चौगांवकर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक। विजय शाह जैसे नेता समाज और सियासत दोनों के लिए कलंक है। विजय शाह का बयान माफ़ी लायक़ नहीं है। समाज,सेना और देश क...
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