साहित्य अकादमी में अब सभी विचारों के लेखकों का प्रवेश संभव हुआ: अनंत विजय

आज हालत ये है कि हिंदी में कोई सार्वजनिक बुद्धीजीवी बचा ही नहीं। अशोक वाजपेयी गाहे बगाहे पब्लिक इंटलैक्टुअल की पोजिशनिंग करने का प्रयत्न करते हैं।

Last Modified:
Monday, 15 April, 2024
anantvijay


अनंत विजय, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और स्तंभकार। कभी उपन्यास सम्राट प्रेमचंद ने कहा था कि साहित्य राजनीति के आगे चलनेवाली मशाल है। इस समय लोकसभा चुनाव...
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