क्या अब पुराने संस्कारों को छोड़ने का वक्त सचमुच आ गया हैं: समीर चौगांवकर

हिंसा, युद्ध, नरसंहार, दमन, यातना व गैर धर्मो के प्रति पूरी तरह अमानवीय होना, धार्मिक राष्ट्र की स्थापना, प्रसार व स्थायित्व के लिए आवश्यक होते हैं। हिंन्दू धर्म में इसे सदैव घृणा से देखा गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 December, 2024
Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2024
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समीर चौगांवकर, वरिष्ठ पत्रकार। अपने आधारभूत रूप में हिन्दू धर्म न एक पुस्तक का धर्म रहा न एक ईश्वर का धर्म रहा। किसी भी धार्मिक राष्ट्र की स्थापना...
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