हिंदी साहित्य पर मार्क्सवाद लादने का षडयंत्र: अनंत विजय

हिंदी साहित्य पर मार्क्सवाद लादने की तुलना घोड़े के पीठ पर मेढक लादने से की गई। समय समय पर हिंदी के लेखकों ने इस खतरे के विरुद्ध आवाज उठाई पर उन आवाजों को दबा दिया गया।

Last Modified:
Monday, 08 September, 2025
anantvijay


अनंत विजय, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक। पिछले महीने स्वाधीनता दिवस के आसपास झारखंड से कवि चेतन कश्यप ने अमृलाल नागर का एक आलोचक को लिखे पत्र, जो पुस्तकाकार...
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