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जीएसटी सुधार से अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्टर: पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

टीवी, फ़्रीज़, एसी जैसे आइटम 28% से 18% में आ सकते हैं। हमें अभी भी आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार करना चाहिए। यह प्रस्ताव पहले जीएसटी कौंसिल में जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल क़िले से घोषणा की है कि गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) में दीवाली तक बड़ा बदलाव किया जाएगा। इससे रेट कम होंगे, सामान और सर्विसेज़ सस्ती होंगी। 2017 में GST लागू होने से पहले केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग टैक्स वसूली करती थीं। केंद्र सरकार सामान बनाने वाली फ़ैक्ट्री पर एक्साइज ड्यूटी लगाती थी और रेस्टोरेंट में खाना खाने पर, फ़ोन बिल जैसी सर्विस पर टैक्स अलग से। फिर हर राज्य उस सामान को बेचने वाले पर सेल्स टैक्स लगाता था। नगर पालिका अपने शहर में सामान की एंट्री होने पर चुंगी यानी ऑक्ट्रॉय वसूलती थीं।

इस कारण किसी भी सामान या सर्विस के दाम देश के अलग-अलग इलाक़ों में अलग-अलग होते थे। अब सिर्फ़ शराब, पेट्रोल-डीज़ल GST के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इनके दाम देश भर में कम-ज़्यादा हैं। 2017 से GST लागू हुआ तो सरकार ने कहा कि एक देश में एक टैक्स होगा, लेकिन 2025 आते-आते एक देश में 50 तरह के टैक्स लग रहे हैं।

GST लागू होने से पहले अरविंद सुब्रमण्यम कमेटी ने कहा था कि तीन तरह के रेट होने चाहिए, लेकिन लागू हुए 7 रेट। ये रेट हैं 0%, 5%, 12%, 18% और 28%। इसके अलावा 0.25% और 3% का रेट है, जो मुख्य रूप से जेम्स-ज्वैलरी पर लगते हैं। यहाँ तक तो ठीक था, फिर इस पर सेस लगा दिया गया। GST के कारण जिन राज्यों को नुक़सान होना था उसकी भरपाई के लिए यह पाँच साल तक लगाया गया था। फिर कोरोनावायरस के कारण इसे मार्च 2026 तक बढ़ाया गया। अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि इसके चलते अब 50 तरह के रेट बन गए हैं।

GST की जटिलता के कारण व्यापारियों और कंपनियों को दिक़्क़त हो रही थी और लोगों को ज़्यादा टैक्स देना पड़ रहा था। अब सरकारी सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि सिर्फ़ तीन तरह के रेट होंगे — 5%, 18% और 40%। इसका मतलब 12% और 28% का रेट ख़त्म होगा। 40% में तंबाकू, सिगरेट और ऑनलाइन गेम को रखा जाएगा। इससे खाने-पीने की चीज़ें सस्ती होने की संभावना है, जैसे बटर, घी, जैम, फ़्रूट जूस, ड्राय फ़्रूट जैसे आइटम 12% से 5% में आ सकते हैं। टीवी, फ़्रीज़, एसी जैसे आइटम 28% से 18% में आ सकते हैं। हमें अभी भी आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार करना चाहिए।

यह प्रस्ताव GST कौंसिल में जाएगा, जहाँ राज्यों का बहुमत है और वहाँ पास होने पर ही यह दीवाली तक लागू हो सकता है। GST में बदलाव से सरकार को शुरू में सालाना 50 हज़ार करोड़ रुपये नुक़सान हो सकता है। 2018-19 में साल भर में टैक्स कलेक्शन क़रीब 12 लाख करोड़ रुपये हुआ था, अब 22 लाख करोड़ रुपये का कलेक्शन हो रहा है।

रेट घटने से अर्थव्यवस्था को फ़ायदा होगा क्योंकि चीज़ें सस्ती होंगी तो खपत बढ़ेगी। यह एक और बूस्टर डोज़ होगा अर्थव्यवस्था के लिए। इनकम टैक्स रेट कम करके सरकार ने एक डोज़ पहले दिया था, फिर रिज़र्व बैंक ने लोन सस्ता कर दिया। कुल मिलाकर सबके लिए अच्छी ख़बर है।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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