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‘कल्याण कर सिर्फ वरिष्ठ पत्रकार नहीं थे, बल्कि वह कई रूपों में हमारे जीवन का हिस्सा थे’
उनके साथ काम करने वाले लोग उन्हें एक सख्त लेकिन बेहद स्नेही संपादक के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने पत्रकारिता में उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को स्थापित किया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 year ago
पल्लवी गूढ़ा कश्यप, फाउंडर (PG Comm)।।
आज वॉट्सऐप पर मिले संदेश कि सभी के प्रिय कल्याण दा अब हमारे बीच नहीं रहे, ने मुझे झकझोर कर रख दिया। 7 फरवरी 2025 को अपने गृहनगर कोलकाता में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उनका निधन हुआ। यह खबर न केवल मुझे, बल्कि उन सभी को गहरा आघात देने वाली थी, जिन्होंने कभी उनके साथ काम किया था।
कल्याण कर सिर्फ वरिष्ठ पत्रकार नहीं थे, बल्कि वह कई रूपों में हमारे जीवन का हिस्सा थे। प्रिंट पत्रकारिता और नई डिजिटल पत्रकारिता के बीच वह एक सेतु, एक प्रेरणादायक मार्गदर्शक, तेज नजर वाले संपादक और हम जैसे युवा पत्रकारों को हमेशा प्रोत्साहित करने वाले नेतृत्वकर्ता थे।
उन्हें स्नेहपूर्वक कल्याण दा कहा जाता था, उनका यूं चले जाना न केवल न्यूज मीडिया इंडस्ट्री के लिए बड़ी क्षति है, बल्कि मेरे लिए भी यह एक व्यक्तिगत क्षति है। वह सिर्फ एक संपादक नहीं थे, बल्कि ऐसे मार्गदर्शक थे, जिन्होंने पत्रकारिता में मेरे प्रारंभिक वर्षों को आकार दिया।
‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media.com) में काम करने के दौरान मुझे उनके साथ काम करने और सीखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। समाचारों के प्रति उनकी गहरी लगन बेजोड़ थी। जब भी मैं इंडस्ट्री की कोई बड़ी स्टोरी या विज्ञापन की खबर लाती, तो उनका उत्साह देखने लायक होता। वह हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते, संपादकीय उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को स्थापित करते। काम को लेकर वह जितने अनुशासित थे, व्यक्तिगत रूप से उतने ही स्नेही और विनम्र थे।
कल्याण दा सिर्फ पत्रकारिता जगत के लीडर नहीं थे, बल्कि युवा प्रतिभाओं को निखारने वाले मार्गदर्शक भी थे। वह हमें बेहतरीन पत्रकार बनने के लिए प्रेरित करते थे और ब्रेकिंग न्यूज को लेकर उनकी प्रतिबद्धता बेजोड़ थी। इंडस्ट्री की किसी बड़ी खबर को लेकर उनकी उत्सुकता हम सभी के लिए प्रेरणादायक थी। उनके साथ काम करने वाले लोग उन्हें एक सख्त लेकिन बेहद स्नेही संपादक के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने पत्रकारिता में उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को स्थापित किया।
कल्याण दा को अंग्रेजी और कहानी कहने की कला यानी स्टोरीटैलिंग से बेहद प्रेम था। प्रिंट मीडिया में वर्षों के अनुभव के कारण उन्होंने इस कौशल को निखारा था। शब्दों पर उनकी पकड़ और संपादकीय समझ ने उन्हें पत्रकारिता जगत में प्रभावशाली हस्ती बना दिया था।
पत्रकारिता के अलावा कल्याण दा का जीवन के प्रति अनूठा उत्साह था। वह खाने के बहुत शौकीन थे और विभिन्न व्यंजनों को आजमाने में रुचि रखते थे। खासतौर पर मिठाइयों के प्रति उनकी दीवानगी जगजाहिर थी। उनकी उदारता सिर्फ न्यूजरूम तक सीमित नहीं थी, वह अक्सर अपनी टीम को लंच पर ले जाते, जिससे कार्यस्थल पर गर्मजोशी और सौहार्द का माहौल बनता था। वह पशुप्रेमी भी थे और और अपनी सात बिल्लियों को परिवार की तरह मानते थे।
कल्याण दा का निधन पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उन्होंने जिन अनगिनत पत्रकारों को प्रशिक्षित किया, उनकी लेखनी और विचारों में उनकी विरासत सदैव जीवित रहेगी। कल्याण दा की यादें, उनकी सीख और प्रेरणा हमें हमेशा आगे बढ़ने की शक्ति देती रहेंगी। अलविदा कल्याण दा। आपकी बातें, आपकी बुद्धिमत्ता और आपका स्नेह सदा याद रहेगा।
(यह लेखिका के निजी विचार हैं।)
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