‘यह त्योहार अभी भी उल्लास नहीं देता लेकिन एक उम्मीद अवश्य है- वह सुबह कभी तो आएगी’

दीपावली लंबे समय तक मुझे उदास करती थी। अमावस की यह रात घिरने से पहले से मुझे वे विंब और मुखड़े याद आने लगते, जो घोर दरिद्रता की चलती-फिरती मुनादी हुआ करते थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 15 November, 2023
Last Modified:
Wednesday, 15 November, 2023
Shashi Shekhar


शशि शेखर, एडिटर-इन-चीफ, हिन्दुस्तान।। दीपावली लंबे समय तक मुझे उदास करती थी। अमावस की यह रात घिरने से पहले से मुझे वे विंब और मुखड़े याद आने लगते,...
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