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बीजेपी ने एकनाथ शिंदे को उनकी जगह बता दी: रजत शर्मा

मंगलवार के विज्ञापन में देवेन्द्र फडणवीस की तस्वीर नहीं थी, लेकिन बुधवार को जो विज्ञापन छपा उसमें बाला साहेब ठाकरे और फडणवीस की भी तस्वीरें थी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

रजत शर्मा, एडिटर-इन-चीफ, इंडिया टीवी ।

महाराष्ट्र में एक दूसरे किस्म का ड्राम चल रहा है। बुधवार को सीएम एकनाथ शिन्दे ने यू-टर्न ले लिया। असल में हुआ ये कि एकनाथ शिन्दे की शिवसेना की तरफ से बुधवार को फिर सारे अखबारों में एक विज्ञापन छपा। मंगलवार को जो विज्ञापन छपा था, उसमें एकनाथ शिन्दे को देवेन्द्र फडणवीस से ज्यादा लोकप्रिय मुख्यमंत्री बताया गया था। मंगलवार के विज्ञापन में देवेन्द्र फडणवीस की तस्वीर नहीं थी, लेकिन बुधवार को जो विज्ञापन छपा उसमें बाला साहेब ठाकरे और फडणवीस की भी तस्वीरें थी। इसमें कहा गया था कि एकनाथ शिन्दे और देवेन्द्र फडणवीस की सरकार को महाराष्ट्र की जनता पसंद कर रही है, 49 पर्सेंट से ज्यादा लोगों ने सरकार के काम पर संतोष जताया है।

दावा किया गया कि बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन अटूट है, दोनों पार्टियां मिलकर काम करती रहेंगी। जैसे ही ये विज्ञापन छपा, महाराष्ट्र के विरोधी दलों के नेताओं ने चुटकी ली। संजय राउत ने पूछा कि सिर्फ चौबीस घंटे में एकनाथ शिन्दे की हीरोगिरी खत्म कैसे हो गई? ऐसा क्या हुआ कि शिन्दे को फडणवीस की भी फोटो छापनी पड़ी?

राउत ने कहा है कि नए विज्ञापन में शिंदे की पार्टी के मंत्रियों की तस्वीरें तो हैं लेकिन बीजेपी के मंत्रियों की नहीं। उन्होंने कहा कि 40 विधायकों वाली पार्टी 105 विधायकों वाली पार्टी पर राज कर रही है, बीजेपी-शिंदे सरकार दो महीने से ज्यादा नहीं चलने वाली है। संजय राउत जो कह रहे हैं उसमें सच्चाई है। ये बात बिल्कुल सही है कि जिस तरह से एकनाथ शिन्दे की पार्टी ने बड़े बड़े विज्ञापन छपवाकर शिन्दे को देवेन्द्र फडणवीस से ज्यादा लोकप्रिय बताने का दावा किया, उससे बीजेपी में जबरदस्त नाराजगी है।

बीजेपी के नेताओं ने पार्टी के भीतर और सार्वजनिक मंचों पर भी इसको लेकर नाराजगी जाहिर की। बीजेपी के राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे ने कहा, मेंढक खुद को कितना भी फुला ले हाथी नहीं बन सकता, लगता है शिंदे को भी वैसी ही गलतफहमी हो गई है जैसी उद्धव ठाकरे को थी।

उधर, शिंदे की सरकार मे मंत्री शंभूराजे देसाई ने कहा कि जांच करके इस बात का पता करेंगे कि विज्ञापन किसने छपवाया। इस पर एनसीपी नेता अजित पवार ने कहा कि इसमें जांच की क्या जरुरत है, ये तो अखबार के दफ्तर से आसानी से पता लग सकता है, अजित पवार ने कहा कि असली बात ये है कि एकनाथ शिंदे को ये समझ में आ गया था कि अगर विज्ञापन से यू टर्न नहीं लिया था उनकी कुर्सी खतरे में आ जाएगी। अब बीजेपी के नेता थोड़ा नरम रूख अपना रहे हैं। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि  विज्ञापन को लेकर खटास जरुर थी लेकिन अब नए विज्ञापन के बाद सब कुछ ठीक हो गया है।

बावनकुले ने कहा कि परिवार में झगड़े होते रहते हैं, लेकिन अब मामला सुलझ गया है। बावनकुले भी जानते हैं कि एकनाथ शिन्दे ने जानबूझकर खुद को देवेन्द्र फडणवीस से बड़ा नेता साबित करने के लिए विज्ञापन छपवाया था। लेकिन जब बीजेपी के तेवर देखे तो यू-टर्न ले लिया और अब ये बहाना बनाया जा रहा है कि कल पता नहीं किसने विज्ञापन छपवा दिया। मैं अजित पवार की दाद देना चाहूंगा। उन्होंने कल ही कह दिया था कि कल सुबह देखिएगा दूसरा विज्ञापन छपेगा, जिसमें शिन्दे छोटे हो जाएंगे।

उनकी बात सही निकली। लेकिन ये कैसे हुआ? क्यों हुआ? इसकी हकीकत मैं आपको बता देता हूं। मुझे जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक, मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में बीजेपी के नेताओं ने शिन्दे को उनकी जगह दिखा दी। बैठक में देवेन्द्र फडणवीस भी मौजूद थे। जैसे ही बैठक में सरकारी कामकाज खत्म हुआ, अफसरों को बाहर जाने को कहा गया। इसके बाद बीजेपी के मंत्रियों ने शिन्दे से साफ पूछा कि वो आखिर क्या चाहते हैं? इस तरह का विज्ञापन क्यों छपवाया? शिन्दे के पास कोई जबाव नहीं था।

बीजेपी के नेताओं ने यहां तक कहा कि हकीकत ये है कि अगर बीजेपी मदद न करे तो शिन्दे की रैलियों में इतने लोग भी नहीं पहुंचते कि कुर्सियां भर जाएं। बीजेपी के कुछ मंत्रियों ने शिन्दे से कहा कि अगर इस तरह गलती को ठीक न किया गया तो बीजेपी दिखा देगी कि कौन कितने पानी में है। इसके बाद एकनाथ शिंदे बैकफुट पर आ गए। उन्होंने उसी वक्त वादा किया कि कल ही इस गलती को ठीक करेंगे, कल नया विज्ञापन देंगे। उसी के बाद रात में ही मैटेरियल तैयार हुआ, अखबारों को फुल पेज विज्ञापन दिया गया जो बुधवार को छपा।

हालांकि इससे देवेन्द्र फडणवीस की नाराजगी कम नहीं हुई है। बुधवार को  महाराष्ट्र राज्य परिवहन के प्रोग्राम में एकनाथ शिंदे और देवेन्द्र फडणवीस दोनों को शामिल होना था, लेकिन फडणवीस नहीं गए। उन्होंने तबीयत खराब होने की बात कही।

हालांकि जब ये कार्यक्रम चल रहा था उसी वक्त फडणवीस अपने घर में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात कर रहे थे। मतलब साफ है कि शिन्दे की हरकत से देवेन्द्र फडणवीस के दिल पर चोट लगी है, और इसे भरने में वक्त लगेगा।

(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

 


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