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जानिए, रेटिंग एजेंसी कैसे समझती है किसने, क्या और कितनी देर देखा टीवी चैनल
TRP शब्द से अब टीवी न्यूज देखने वाला कुछ कुछ परिचित हो गया है। इसका मतलब टेलीविजन रेटिंग पॉइंट होता है। भारत में अमेरिकी कंपनी TAM Media Research ने TRP शब्द को जन्म दिया
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
भव्य श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार ।।
TRP शब्द से अब टीवी न्यूज देखने वाला कुछ कुछ परिचित हो गया है। इसका मतलब टेलीविजन रेटिंग पॉइंट होता है। भारत में अमेरिकी कंपनी TAM Media Research ने TRP शब्द को जन्म दिया, जो सप्ताह में एक बार टीवी चैनलों पर देखे जाने वाले कंटेंट का हिसाब देती थी। TAM कंपनी दो अंतरराष्ट्रीय कंपनियों- नील्सन और कैंटर मीडिया के साथ आने से बनी थी। भारत में ये बीस साल से सक्रिय हैं और टीवी चैनलों और एडवर्टाइजिंग कंपनियों के बीच जानकारी देने का काम करती आई है। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि इनके द्वारा दी गई सूचना से टीवी पर किसी कार्यक्रम में प्रचार के रेट तय होते है और स्पॉन्सर मिलते है। साथ चैनल नंबर एक और दो होने का महत्व पेश करते है।
अमेरिका में टीवी रेंटिंग देने में नील्सन कपंनी सबसे बड़ी है। वो टीवी पर देखे जाने वालों की संख्या Statistical Sampling से निकालती है। इसके लिए अमेरिका के एक लाख घरों में दो तरह के यंत्र लगाकर वे टीवी रेंटिंग निकालते है। पहला ब्लैकबॉक्स जैसे एक यंत्र और दूसरा पीपुल मीटर। ब्लैकबॉक्स यंत्र से टीवी चैनल की जानकारी रेटिंग एजेंसी को जाती है और पीपुल मीटर से कौन उसे देख रहा है इसकी। अमेरिका में 11 करोड़ से ज्यादा टीवी सेट है जिसे 30 करोड़ से ज्यादा लोग देखते हैं।
अब बात भारत की। टैम ने भारत में 1998 से काम शुरू किया। तब एक फीसदी लोग न्यूज देखते थे जो टैम के अनुसार 2018 में दस फीसदी पर आ गया था। यानि इस समय देश के सभी टीवी दर्शकों में से दस फीसदी निजी चैनलों पर खबर देखने लगे थे। देश में पहले मनोरंजन चैनलों ने खेल शुरू किया, स्टार, जी और सन टीवी पहले खिलाड़ी रहे। वैसे देश का पहला निजी लाइव बुलेटिन 30 सितंबर 1995 को शाम 730 बजे एशियानेट टीवी पर प्रसारित हुआ। ये फिलीपींस के एक स्टूडियो से प्रसारित किया गया और केरल में बीम हुआ।
न्यूज चैनलों का क्रम आपमें से बहुत से लोगों को पता ही है। न्यूजट्रैक, आजतक, एनडीटीवी, स्टार न्यूज फिर बहुत सारे... लेकिन चैनलों में होड़ तब शुरू हुई जब टैम पिक्चर में आया। इसने साप्ताहिक रेटिंग देकर और साथ में हर स्लॉट में कार्यक्रम को देखने वालों की संख्या बताकर एक युद्ध छेड़ दिया। इससे टीवी प्रोग्रामिंग में एकरूपता, खबरों में सनसनीखेज प्रस्तुति जैसे पक्ष आ गए। टैम द्वारा शुरू की गई इस सेवा का प्रभाव ऐसा है कि आज भी BARC के संग TAM मीटर मैनेजमेंट में काम करता है और देश के 34,000 मीटरों से आने वाले डेटा को भी प्रोसेस करता है।
भारत में वैसे इन 34,000 घरों में एक काला बॉक्स लगा है जिसके जरिए रेटिेग एजेंसी ये समझ पाती है कि कौन क्या और कितनी देर देख रहा है। वैसे ये जानना रोचक होगा कि कैसे आपके द्वारा देखे जाने वाली कंटेंट के केवल ऑडियो से ही रेटिंग एजेंसी ये जानती है कि आप क्या देख रहे है। ऐेसा पूरी दुनिया में होता है। बार्क ने टैम से एक कदम आगे बढ़ाते हुए ऑडियो में एक कोड लगाया है जिससे वो चैनल की जानकारी पाता है। ये कोड हर कुछ समय बाद आता है, पर ये दर्शकों को नहीं सुनाई देता है। 2012 में कई न्यूज कंपनियों ने टैम की रेटिंग पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उसकी सेवा कई हफ्तों के लिए बंद कर दी थी। इसके बाद ही ब्रॉ़डकास्टिंग उद्योग, प्रचार कंपनियों के साथ आने से BARC बनी थी।
भारत में एक बड़ा खेल MSO, केबल वालों का रहा है। पहले इनके जरिए शहरों में चैनलों को दिखाकर या नहीं दिखाकर उसकी लोकप्रियता तय की जाती थी। बाद में सराकर ने केबल से टीवी दिखाने वालों को MSO के अंदर लाकर इसे भी सैट टॉप बॉक्स से नियंत्रित किया है। आज देश में 1100 से अधिक MSO हैं, जिनमें से 15 बड़ों के पास 78 फीसदी केबल मार्केट है। बड़े MSO जैसे सिटी केवल, हैथवे, डेन, जीटीपीएल आदि। 2019 के हिसाब से सबसे बड़ा MSO था सिटी केबल जिसके 15 राज्यों में 1 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स थे। देश में अभी 1471 रजिस्टर्ड MSO हैं जिनमें से 1143 एक्टिव हैं।
आज टीआरपी को लेकर जंग इसलिए जारी है क्योंकि इससे ही आपका रसूख और पैसे कमाने की क्षमता तय होती है। आने वाले समय में हम विश्वसनीयता के लिए पारदर्शिता की मांग को उठता देख सकते है। मन-मानस को विचारों से बदलने की शक्ति रखने वाला टीवी अब डिजिटल दौर में उसकी तरीके से व्यवहार करना चाहता है। वो दर्शक को ज्यादा देर तक अपना बनाए रखने की जंग में है।
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