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पदमपति पदम ने रायडू के कदम को कुछ इस तरह बताया ‘बाजारवाद’ पर प्रहार
33 वर्षीय हैदराबादी अंबाती रायडू इन दिनों बड़ौदा की ओर से घरेलू क्रिकेट खेल रहे थे
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
अंबाती रायडू का संन्यास बीसीसीआई, चयन समिति और भारतीय टीम के कप्तान-कोच के मुंह पर जोरदार तमाचा है। इंग्लैण्ड में चल रहे 2019 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में न चुने जाने से आहत अंबाती रायडू ने अपना बल्ला खूंटी पर लटकाने की घोषणा करते हुए देश की क्रिकेट में हावी 'बाजारवाद' पर भी करारा प्रहार किया है। बाजारवाद शब्द का यहां इसलिए प्रयोग करना जरूरी है कि अर्से से बीसीसीआई में अजब गजब खेल लगातार होते रहे हैं। इसी कड़ी में रायडू की उपेक्षा एक उदाहरण है।
33 वर्षीय हैदराबादी रायडू जो इन दिनों बड़ौदा की ओर से घरेलू क्रिकेट खेल रहे थे, अब से डेढ़ दशक पहले देश की सबसे होनहार प्रतिभा थे। हैदराबाद क्रिकेट संघ से मनमुटाव और जीटीवी की 20-20 क्रिकेट लीग से जुड़ जाने के चलते रायडू को काफी समय तक बोर्ड का कोपभाजन बनकर वनवास भोगना पड़ा था। बाद में इस बल्लेबाज ने भारतीय टीम में जबरदस्त वापसी की, लेकिन बोर्ड में कुछ बाजारू तत्व उनके पीछे तब भी पड़े हुए थे। फॉर्म के बावजूद एकबार उनको फिटनेस (योयो टेस्ट) के आधार पर टीम में शामिल नहीं किया गया था। यह जुझारू फिर लौटा और अपने दमदार खेल से उसने आलोचकों को एक बार फिर खामोश कर दिया।
जिसको भारतीय क्रिकेट की जरा सी भी समझ थी, वह यह मानकर चल रहा था कि विश्व कप में रायडू का चयन पक्का है, मगर जब 15 सदस्यीय टीम की घोषणा हुई, तब आजमाये हुए अश्व रायडू के स्थान पर एक औसत दर्जे के तथाकथित हरफनमौला विजय शंकर को इस चार वर्षीय 'क्रिकेट महाकुम्भ' के लिए चुन लिया गया।
ऋषभ पंत, अजिंक्य रहाणे और नवदीप आदि के साथ रायडू को स्टैंडबायी में रखा गया। शिखर धवन के चोटिल होने के बाद खैर, पंत को बुला लिया गया, लेकिन जब विजय शंकर को चोट के नाम पर स्वदेश भेजा गया, तब उसके स्थान पर रायडू या रहाणे, जो पहले से ही काउन्टी खेल रहे हैं, को नहीं बल्कि उस मयंक अग्रवाल को टीम मे शामिल किया गया, जिसने देश के लिए दो टेस्ट मैच जरूर खेले, मगर सीमित ओवरों का एक भी मैच अभी तक नहीं खेला है। मयंक का चयन यह जताता है कि चयन समिति की कोई औकात नहीं। आप लाखों रुपए महीना लीजिए और चुप रहिए।
जाहिर है कि यह फैसला भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री की मर्जी से बोर्ड ने लिया। मैं नहीं जानता कि मयंक को मौका मिलेगा या नहीं, क्योंकि टीम को, यदि फाइनल मे पहुंची तो कुल तीन मैच खेलने हैं। क्या चयन समिति मयंक को रोहित के बतौर साथी उतारेगी और बांग्लादेश के खिलाफ रोहित के साथ 180 रन की रिकॉर्ड साझेदारी निभाने वाले के. एल राहुल को चौथे क्रम पर भेजेगी? इसका जवाब तो आने वाला समय ही देगा, परन्तु मयंक को बुलाकर एक धाकड़ बल्लेबाज रायडू को असमय खेल छोड़ने पर विवश जरूर कर दिया गया, यह बेझिझक स्वीकार करना ही होगा।
(वरिष्ठ पत्रकार पदमपति पदम की फेसबुक वॉल से)
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