अकेली हिंदी ही नहीं, सारी भारतीय भाषाओं में क्रमिक क्षरण की यह प्रक्रिया चल रही है लेकिन शायद हिंदी जैसी उदासीनता नहीं है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो