‘ताकि कोई यह न कह सके कि हमने जमीर बेच दिया!’

अब कितने फैसले नजीर बन रहे हैं? जिनको कोई कानूनविद् अपनी बहस में हक से कोट करता हो। कारण साफ है, सत्ता का चारण करके पद-पैसा भले मिल जाये, आपकी शर्तों पर सम्मान नहीं मिल सकता

अजय शुक्ल by
Published - Saturday, 12 October, 2019
Last Modified:
Saturday, 12 October, 2019
Ajay Shukla


अजय शुक्ल, प्रधान संपादक, आईटीवी नेटवर्क।। पिछले साल जनवरी के दूसरे सप्ताह में देश की सर्वोच्च अदालत के चार न्यायमूर्तियों ने इतिहास में पहली बार म...
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