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मेरे जहन में हमेशा ताजा रहेगा राम जेठमलानी का वह इंटरव्यू

जेठमलानी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने न केवल लॉ की डिग्री हासिल की, बल्कि अपना पहला केस भी लड़ा

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

तरुण नांगिया, वरिष्ठ पत्रकार।।

आठ सितंबर 2019, रविवार, सुबह 7.45 बजे, राम जेठमलानी निचली अदालत यानी पृथ्वी छोड़कर भगवान की अदालत में बहस के लिए प्रस्थान कर गए। कई मौकों पर आपने मुझसे कहा था कि आप खुलकर और बेवाकी से अपनी बात रखते हैं, क्योंकि आप जीवन रूपी हवाईअड्डे के प्रतीक्षा कक्ष में बैठे हैं और विमान किसी भी समय उड़ान भर सकता है। आज आप उस विमान में सवार होकर भगवान की अदालत में बहस के लिए चले गए हैं, लेकिन आपके यूं जाने से जो एक खालीपन हमारे जीवन में आया है, उसे भरा नहीं जा सकता।

जेठमलानी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने न केवल लॉ की डिग्री हासिल की, बल्कि अपना पहला केस भी लड़ा। उस दौर में वकील बनने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष थी। जेठमलानी ने इसके खिलाफ अदालत में याचिका दायर की, जिसके बाद उन्हें कोर्ट से विशेष अनुमति मिल गई।

भारत-पाक बंटवारे के बाद जेठमलानी मुंबई में बस गए। ये उनकी जिंदगी का सबसे कठिन समय था। उन्होंने कई रातें रिफ्यूजी कैंप में गुजारीं, लेकिन मेहनत के बल पर वह अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे। सबसे पहले वह केएम नानावती केस हाथ में लेने के चलते सुर्खियों में आये, जिसे हाल ही में अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म ‘रुस्तम’ के माध्यम से बड़े पर्दे पर दिखाया गया है।

आपातकाल की खिलाफत में  जब करीब 1.5 लाख लोगों को बिना मुकदमे के जेलों में बंद कर दिया गया था। एडीएम जबलपुर बनाम एसएस शुक्ला मामले की सुनवाई के दौरान, जिसे बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले के रूप में भी जाना जाता है, उस समय के अटॉर्नी जनरल नीरेन डे ने अदालत को बताया कि जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत हैं। आपातकालीन शक्तियों के तहत हिरासत में लिए गए लोगों के पास कोई लोकल स्टैंडी नहीं है और उनकी याचिकाओं को खारिज करना होगा। इस पर न्यायमूर्ति एचआर खन्ना ने पूछा, ‘अनुच्छेद 21 में भी जीवन का उल्लेख है और क्या सरकार इसे भी इस हद तक आगे बढ़ाएगी?’ जिस पर डे ने जवाब दिया, ‘भले ही जीवन अवैध रूप से छीना गया हो, अदालतें असहाय हैं।‘

बहस पूरी होने के बाद अदालत को संबोधित करते हुए राम जेठमलानी ने कुछ ऐसा कहा, जिसने उनके समर्थकों की संख्या को एकाएक बढ़ा दिया। उन्होंने अदालत से कहा, ‘इस कोर्ट ने कभी भी किसी मामले को इतने महत्वपूर्ण तरीके से नहीं निपटाया। एक ऐसा मामला जिस पर कुछ लोगों को छोड़कर सभी की आजादी निर्भर करती है, यह कहना गलत नहीं होगा कि लोकतंत्र पहले से ही कॉफिन में हैं। सरकार अपने किये पर पर्दा डालना चाहती है, पूरी दुनिया की निगाहें आज अदालत पर हैं। लोग यह देखना चाहते हैं कि आप (न्यायाधीश) एक भयानक त्रासदी से जुड़े गंभीर मामले पर क्या रुख अख्तियार करते हैं। आप समकालीन राय के लिए तिरस्कारपूर्ण व्यवहार का सामना कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय बाद भावी पीढ़ी आपके फैसलों को पढ़ेगी और अपने निष्कर्ष निकालेगी।’

उन्होंने यह भी कहा, ‘अब आप इसे एक आदर्श उदाहरण की तरह सामने रखना चाहते हैं या अवमानना की तरह, यह आपको चुनना है। लेकिन याद रखें कि आपातकाल को उन लोगों द्वारा स्थायी किया जा सकता है जो खुद को स्थायी बनाने के लिए दृढ़ हैं।’

इसके बाद जेठमलानी, स्वत: निर्वासन पर कनाडा चले गए। आपातकाल हटने के बाद वह वापस लौटे और बंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अपने राजनीतिक करियर में उन्हें दो बार कानून मंत्री बनने का मौका मिला, लेकिन उनके जीवन का दूसरा पक्ष भी था। उन्हें पढ़ाना पसंद था और इसलिए उन्होंने नेशनल लॉ स्कूलों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग चार दशक पहले बार काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एनआर माधव मेनन को प्रभावित किया। फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में पहुंचकर भारतीय कानूनी शिक्षा में एक नया प्रयोग शुरू किया, जिसके बाद मेनन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से तीन साल का विश्राम लिया और बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जुड़ गए, जिसने राज्यों के लिए लॉ स्कूलों का एक नया मॉडल पेश किया। इसके आधार पर पहला लॉ स्कूल कर्नाटक में स्थापित किया गया, जिसे नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु के रूप में जाना जाता है।

एक बार जेठमलानी के निवास पर उनका साक्षात्कार करते हुए मैंने उनसे पूछा था कि आप किंग सोलोमन की बहुत प्रशंसा करते हैं? जिसके जवाब में उस समय 91 वर्षीय जेठमलानी ने कहा ‘यंग मैन, मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूं, आदमी जितना बूढ़ा होता जाता है, उसके साथी उतने ही जवान होने चाहिए’, इतना कहते ही उन्होंने एक बड़ी मुस्कान के साथ मुझे देखा। कुछ साल पहले लिया गया उनका यह इंटरव्यू आज भी मेरे जहन में ताजा है और हमेशा रहेगा।


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