होम / विचार मंच / पढ़कर मुस्कराइए, क्योंकि हिंदी दिवस पर न्यूज चैनल ने की ऐसी जोरदारी तैयारी

पढ़कर मुस्कराइए, क्योंकि हिंदी दिवस पर न्यूज चैनल ने की ऐसी जोरदारी तैयारी

कुछ टिकटॉक से गाने निकाल लो...आजकल जो विडियो यूट्यूब पर नहीं मिलते, टिकटॉक पर मिलते हैं। हिंदी पर भी जरूर होंगे

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

पीयूष पांडे, व्यंग्यकार व वरिष्ठ पत्रकार।।

‘हमें भी हिंदी दिवस को सेलीब्रेट करना चाहिए।‘ संपादक ने फरमाया।

‘यस सर, बिलकुल करना चाहिए। ये हमारी रिस्बॉन्सिबिलिटी है।‘ मीटिंग में संपादक के सबसे खास एडवाइजर कम ‘कार साकी’ ने कहा।

‘अच्छा बुलाओ किसी को। हम समझाते हैं कि क्या करना है कैसे करना है।‘ संपादक ने स्वयं को लगभग बुद्ध की अवस्था में पाते हुए नया आदेश दिया।

मीटिंग में भगदड़ मच गई। एक साथ कई लोग उस एक शख्स को बुलाने के लिए भागे, जिसे बताया जाना था कि क्या करना है और कैसे करना है। दरअसल, हलकारा तो बहाना था, बॉस की नजर में खुद को 100 मीटर रेस का चैंपियन बताना था।

खैर, बुद्ध ज्ञान सुनने के लिए बंदा मीटिंग में हाजिर हो गया।

सुनो....

जी...

‘अच्छा...हिंदी दिवस है। एक प्रोग्राम बनाओ। हिंदी राष्ट्रभाषा-राजभाषा वगैरह जो भी है, उसका इतिहास वगैरह बता देना एक पैकेज में। हिंदी के दो-चार साहित्यकारों के कोट वगरैह डालकर उसमें तीन चार गाने घुसेड़ दो। अलग-अलग जगह से दो-चार सेलेब्रिटी की बाइट मंगा लो, जिसमें वो बताएं कि हिंदी के बिना उनका जीवन अधूरा है। और फिर एक धांसू सा नाम रखकर शाम को चला दो पांच बजे। हिंदी की सेवा करना हमारा धर्म है। हम हिंदी न्यूज चैनल हैं। हमें हिंदी दिवस पर कुछ खास करना ही चाहिए।

‘बिलकुल ये हमारा कर्तव्य है।‘ कार साकी ने फिर दोहराया।

‘लेकिन सर फिल्मों में हिंदी भाषा पर कौन से गाने बने हैं?’ कार्यक्रम बनाने वाले अज्ञानी बालक ने सवाल किया।

‘यार ढूंढो..मिलेंगे। दो-चार गाने जरूर बने होंगे। एक लाख गाने बने हैं फिल्मों में। दो गाने हिंदी पर नहीं होंगे क्या। गूगल करो। क्या मूर्खों जैसी बात करते हो।‘ अब संपादक बुद्ध की मुद्रा से बाहर आ रहा था।

‘कुछ टिकटॉक से गाने निकाल लो...आजकल जो विडियो यूट्यूब पर नहीं मिलते, टिकटॉक पर मिलते हैं। हिंदी पर भी जरूर होंगे।‘ कार साकी ने फिर ज्ञान बांटा।

‘जी सर’, अज्ञानी बालक ने जी पर अतिरिक्त जोर डालते हुए जवाब दिया। फिर पूछा-‘नाम सर’

नाम....रख दो ‘हिंद की हिंदी की जय जय'।

‘वाह सर, क्या नाम है।‘ कार साकी बोला।

चूंकि हर मीटिंग में एक-दो पथ विमुख, नौकरी से बेपरवाह लोग होते हैं। इस मीटिंग में भी थे। एक ने सवाल किया।

सर, हिंदी दिवस से अच्छा है कि हम मंदी पर एक जोरदार कार्यक्रम कर दें।

‘मंदी। कहां है मंदी? तुम्हें दो लाख रुपए सैलरी मिल रही है ना। बराबर मिल रही है ना? तो कहां है मंदी।‘ संपादक चिढ़कर बोला।

सर लेकिन...

‘कुछ लेकिन वेकिन नहीं। हिंदी दिवस पर ही कार्यक्रम बनेगा और धूमधाम से चैनल पर चलेगा।‘ संपादक ने आदेश दिया।

अब दूसरा अड़ंगेबाज बोला।

सर, लेकिन हिंदी दिवस पर कार्यक्रम से पहले मेरा एक सुझाव है।

बोलो?

सर, हमें भी चैनल के भीतर हिंदी को बढ़ावा देना चाहिए।

‘बिलकुल देना चाहिए।‘ संपादक बोला।

‘ तो सर एंकर को कल से क्या कहें।‘ अड़ंगेबाज बोला।

संपादक ने महिला एंकर का मुंह देखा। एंकर ने संपादक का। मीटिंग के बाकी लोगों ने उन दोनों का।

अड़ंगेबाज बोला- ‘सर प्रोड्यूसर को कल से निर्माता कह दें क्या?‘

संपादक फिर सोच में डूब गया।

अड़ंगेबाज फिर बोला-‘सर आउटपुट डेस्क, इनपुट डेस्क, असाइनमेंट डेस्क, रिपोर्टर का भी हिंदीकरण जरूरी है। आप सुझाएं क्या बोला जाना चाहिए?‘

संपादक अब सोच से आगे की अवस्था चिंता में चला गया।

अड़ंगेबाज को मजा आने लगा। बोला-‘सर ओबी वैन, कंप्यूटर, माइक, टेलीप्रॉम्पटर, स्टूडियो वगैरह की भी हिंदी लगे हाथ बता दीजिए ताकि एक बार में ही सारा चैनल हिंदीमय हो जाए।‘

संपादक अब चिंता से आगे की मुद्रा निद्रा में जाने को बेकरार दिखने लगा।

‘कार साकी’ भी चुप था। लेकिन जानता था कि ऐसे चुप रहा तो अगला इंक्रीमेंट नहीं हो पाएगा। क्योंकि उसका इंक्रीमेंट संपादक को मुश्किल वक्त से निकालने की उसकी कोशिशों पर ही निर्भर था।

‘सर, मुझे लगता है कि हिंदी दिवस पर कार्यक्रम की टीआरपी नहीं आएगी। और बिना टीआरपी के प्रोग्राम का कोई मतलब नहीं।‘ कार साकी बोला

संपादक ने हां में सिर हिलाया।

कार साकी ने आगे कहा-‘सर, हिंदू-मुसलमान खोज लेते हैं कोई.....उसी पर बना देते हैं कोई प्रोग्राम। हिंदी दिवस पर मिठाई मंगा लेंगे।’

संपादक निद्रा से बाहर आने लगा।

‘हां, अच्छा आइडिया है....टीआरपी इज मस्ट।  वी ऑल शुड कंसन्ट्रेट ऑन टीआरपी ओनली.....’ संपादक ने कहा और मीटिंग खत्म हो गई।


टैग्स पीयूष पांडे व्यंग्य हिंदी दिवस
सम्बंधित खबरें

गहरी खाई में क्यों गिरी टीम इंडिया की गाड़ी: नीरज बधवार

रिंकू को शुद्ध बल्लेबाज़ के रूप में टीम में रखा जाता है, लेकिन उन्हें सातवें क्रम पर तब भेजा जाता है जब या तो बहुत कम गेंदें बची होती हैं या साथ देने वाला कोई नहीं होता।

21 hours ago

साहित्य से छंटती व्यक्तिगत विवादों की धुंध: अनंत विजय

क्या लेखक सत्ता की कांता होती है या गांव की सीमा पर भूँकता हुआ कुकुर ? प्रगतिशीलता के ध्वजवाहकों ने महिलाओं और साहित्यकारों पर घटिया टिप्पणी क्यों की थी?

1 day ago

टैरिफ पर टैरिफ नहीं चलेगा! पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी ट्रंप के पास टैरिफ़ लगाने के रास्ते हैं। पहले उन्होंने उसी कानून के तहत 10% टैरिफ़ लगा दिया, फिर 24 घंटे के भीतर बढ़ाकर 15% कर दिया। यह टैरिफ़ अस्थायी है।

1 day ago

भारत मंडपम में कांग्रेस विरोध, लेकिन भूल गए अपने फर्जीवाड़े: आलोक मेहता

हाल में एआई सम्मेलन के दौरान “चीनी मॉडल” को अपना बताने के आरोपों पर विश्वविद्यालय ने सफाई दी कि संबंधित रोबोट शैक्षणिक प्रयोग के लिए खरीदा गया था और प्रस्तुति में चूक हुई।

1 day ago

AI पर नियंत्रण करना भी बेहद आवश्यक: रजत शर्मा

प्रधानमंत्री मोदी ने कम शब्दों में कई बड़ी बातें कहीं। भारत एआई में विश्व का अग्रणी बनना चाहता है, हमारे देश के पास दिमाग़ भी है, युवा शक्ति भी है और सरकार का समर्थन भी है।

3 days ago


बड़ी खबरें

'डीडी न्यूज' में नौकरी का मौका, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट के लिए मोटी सैलरी ऑफर

भारत के लोक सेवा प्रसारक प्रसार भारती ने 'डीडी न्यूज' के लिए बड़ी भर्ती का ऐलान किया है।

17 hours ago

फिल्म सर्टिफिकेशन की ‘प्रायोरिटी स्कीम’ बंद करने की तैयारी, सरकार ने मांगे सुझाव

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़ी ‘प्रायोरिटी स्कीम’ को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।

17 hours ago

ESOP के जरिए एम्प्लॉयीज को मिला फायदा, बालाजी टेलीफिल्म्स ने बढ़ाई पेड-अप कैपिटल

टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की जानी-मानी कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) ने अपने एम्प्लॉयीज को ESOP योजना के तहत 25,000 इक्विटी शेयर जारी किए हैं।

18 hours ago

SAIL बनी DD न्यूज के ‘डिकोड विद सुधीर चौधरी’ की स्पॉन्सर कंपनी

देश की बड़ी सरकारी स्टील कंपनी Steel Authority of India Limited (SAIL) अब डीडी न्यूज के चर्चित प्राइम टाइम शो ‘डिकोड विद सुधीर चौधरी’ की स्पॉन्सर कंपनी बन गई है

18 hours ago

निकुंज डालमिया ने लॉन्च किया नया बिजनेस प्लेटफॉर्म ‘The Broadview’

ET Now और ET Now Swadesh के एडिटर-इन-चीफ रह चुके निकुंज डालमिया अब अपना नया वेंचर ‘The Broadview’ लेकर आए हैं।

1 day ago