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कश्मीर की खुशहाली के लिए अभी बहुत काम करना होगा: रजत शर्मा

कश्मीर में गुरुवार को जो भीड़ देखने को मिली, वहां के लोगों से मोदी के बारे में जो सुनने को मिला, ये वहां के लोगों के जज़्बात हैं। और ये जज़्बा पैदा करना आसान नहीं था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago

रजत शर्मा, इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ।

कश्मीर की तस्वीर बदल रही है। संविधान की धारा 370 खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को पहली बार श्रीनगर पहुंचे, कश्मीर के लोगों से मिले, उनकी बात सुनी, अपने दिल की बात कही और इस दौरान कश्मीरी अवाम में जो जज़्बा और जोश दिखा, वो वाकई हैरान करने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखने-सुनने पहुंचे हजारों लोगों की भीड़ की तस्वीरें जब सामने आईं, तो लोगों को यकीन नहीं हुआ कि ये वही कश्मीर है, जहां पहले लोग घर से निकलने में डरते थे। लेकिन अब कश्मीर में खौफ का खात्मा हो चुका है।

श्रीनगर के जिन इलाकों में पहले हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों की फौज और बख्तरबंद गाड़ियों के काफिले दिखते थे, गुरुवार को उन्हीं सड़कों पर हजारों लोग बेखौफ होकर चलते हुए दिखाई दिए। पहले कश्मीर में होने वाले राजनीतिक जलसों पर भी डर का साया रहता था लेकिन गुरुवार को श्रीनगर का पूरा बख्शी स्टेडियम लोगों से भर गया। प्रोग्राम खत्म होने के बाद भी हजारों लोग स्टेडियम के बाहर खड़े दिखाई दिए। लंबी-लंबी लाइनें लगीं, श्रीनगर की सड़कों पर ढोल नगाड़े बजाते हुए लोग उसी तरह मोदी के कार्यक्रम में पहुंचे जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या दूसरे शहरों में किसी राजनीतिक रैली में पहुंचते हैं।

कहने का मतलब ये है कि कश्मीर की फिज़ां बिल्कुल बदली हुई नज़र आई। बख्शी स्टेडियम में  बारह बजे सभा शुरू होनी वाली थी, लेकिन लोगों के पहुंचने का सिलसिला सुबह सात बजे से शुरू हो गया, वो भी सुबह दो डिग्री की ठंड में।  अनंतनाग, बारामूला, बडगाम, बांदीपोर, गांदरबल, कुपवाड़ा, कुलगाम, पुलवामा, शोपियां समेत हर इलाके से लोग श्रीनगर पहुंचे। सुबह दस बजे अच्छी धूप खिल गई, तापमान भी बढ़ गया और सियासी गर्मी भी। कुछ साल पहले तक कश्मीर की सड़कों पर आम लोग कम, सुरक्षाकर्मी ज्यादा दिखाई देते थे लेकिन गुरुवार को सुरक्षाकर्मी गिने-चुने थे और जनता हजारों में थी।

कश्मीर के लोगों ने कई दशकों बाद किसी कार्यक्रम में ऐसी भीड़ देखी। नोट करने वाली बात ये है कि मोदी के प्रोग्राम में हर वर्ग के लोग पहुंचे, बड़ी संख्या में मुस्लिम पुरुष-महिलाएं थीं, कश्मीरी युवा भी थे। मोदी के पहुंचने से पहले बख्शी स्टेडियम में पहुंच चुके लोगों ने कहा कि कश्मीर बदल चुका है, अब कश्मीर के हर हिस्से में तरक्की पहुंच रही है, धारा 370 हटने के बाद अमन लौटा है, नौजवानों के हाथों में अब पत्थर नहीं हैं, अब कश्मीरी यूथ जिंदगी की नई राह पर निकल चुका है, अब सैलानी आ रहे हैं, डल झील की रौनक और वादियों की खूबसूरती लौट आई है।

बख्शी स्टेडियम में मोदी का प्रोग्राम सरकारी था। 6400 करोड़ रुपये के 53 प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास होना था। मोदी ने कश्मीरी कारीगरों से बात की, उनके प्रोडक्ट्स देखे, मंच पर पहुंच कर 1000 नौजवानों को नौकरी के नियुक्ति पत्र बांटे और शोपियां, जम्मू, कुपवाड़ा, श्रीनगर, गांदरबल, बांदीपुरा, कठुआ और किश्तवाड़ में स्टार्टअप्स शुरू करने वाले नौजवानों और महिलाओं से बात की। मोदी ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर की तरक्की की बात की, और फिर विरोधियों पर निशाना साधा।

मोदी ने कहा कि दशकों तक धारा 370 के नाम पर कुछ राजनीतिक परिवारों ने देश को गुमराह किया लेकिन अब वो वक्त चला गया है, अब कश्मीर में वो बदलाव साफ दिख रहा है, जिसका इंतज़ार बरसों से था। मोदी ने परिवारवादी पार्टियों पर सीधा निशाना साधा। कहा कि परिवारवादी पार्टियों ने जम्मू-कश्मीर का बहुत नुकसान किया है लेकिन अब उन लोगों को समझ में आ गया है कि कश्मीरी लोगों के दिल में मोदी है, और मोदी के दिल में कश्मीर है।

कश्मीर में गुरुवार को जो भीड़ देखने को मिली, वहां के लोगों से मोदी के बारे में जो सुनने को मिला, ये वहां के लोगों के जज़्बात हैं। और ये जज़्बा पैदा करना आसान नहीं था। आर्टिकल 370 हटने के बाद कश्मीर में जिस तेजी से काम हुआ, ये उसका असर है। मैं आपको कुछ मोटी-मोटी बातें गिनवा सकता हूं। एक ज़माने में कश्मीर को फिल्मों की शूटिंग के लिए जाना जाता था। वहां मुंबई से लोग पहुंचते थे लेकिन धीरे-धीरे ये सिलसिला बंद हो गया। लेकिन पिछले कुछ सालों  में 400 से ज्यादा फिल्मों की शूटिंग की इजाज़त दी गई है। कश्मीर में अब सिनेमा हॉल खुल गए हैं, लोग बेखौफ होकर फिल्में देखने जाते हैं। इस बदलाव को कौन पसंद नहीं करेगा? कश्मीर की सबसे बड़ी ताकत वहां की tourism रही है।

अब एक बार फिर कश्मीर में टूरिस्ट की भीड़ दिखाई देती है। पिछले साल 1 करोड़ 84 लाख से ज्यादा टूरिस्ट आए जो कि एक रिकॉर्ड है। होटलों में जगह नहीं मिलती, फ्लाइट्स एडवांस में बुक करानी पड़ती है लेकिन टूरिस्ट के लिए लगातार सुविधाएं बढ़ी हैं। डल लेक में शिकारे फिर से चलने लगे हैं। 75 नए ट्रैकिंग रूट्स खोले गए हैं, जो नॉर्मल्सी का सबूत है। कश्मीर में शिक्षा हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। वहां के छात्रों को पढ़ने के लिए बाहर जाना पड़ता था। अब कश्मीर में 50 नए कॉलेज खोले गए हैं। जो colleges पहले थे उनमें 25 हजार सीटों का इजाफा किया गया है, जो पिछले 70 साल में नहीं हुआ। अब IIT, IIM और IIMC शुरु हो गई है। कश्मीर के लोगों को हमेशा इलाज के लिए परेशान होना पड़ता था, अच्छे अस्पताल नहीं थे। जो थे, वो कम पड़ते थे। अब दो नए AIIMS खोले गए हैं, 7 नए मेडिकल कॉलेज बने हैं, पांच नए नर्सिंग कॉलेज शुरू किए गए हैं।

कश्मीर के लोगों को हमेशा शिकायत रहती थी सड़कों की। पिछले 3 साल में 16 हजार 807 किलोमीटर नई सड़कें  बनाई गईं हैं। जम्मू से किश्तवाड़ जाना हो या श्रीनगर से जम्मू जाना हो या श्रीनगर से गुलमर्ग जाना हो, हर जगह ट्रैवल टाइम कम हुआ है। दिल्ली से कटरा अब पांच घंटे में पहुंचा जा सकता है। हर गांव के लिए सड़क बनाई जा रही है और पिछले तीन साल में 244 नए पुल बनाए गए हैं। उजाला स्कीम के तहत LED लाइट्स लगी हैं, साढ़े 3 लाख से ज्यादा घरों को बिजली पहुंची है। ऐसे कामों की फेहरिस्त बहुत लंबी है जिसका सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर हुआ है।

इनमें एक बड़ा काम बिजली का है। जाड़े के दिनों में बिजली की कमी से कश्मीर के लोग ठिठुरते थे लेकिन पिछले 70 साल में सिर्फ 3 हजार 500 मेगावॉट पावर का जेनेरेशन हुआ था। लेकिन तीन साल में पावर जेनेरेशन को डबल करने का प्लान है। ये सब वो काम है जो सीधे सीधे आम कश्मीरी की जिंदगी से ताल्लुक रखते हैं। इसीलिए लोगों के दिल में मोदी सरकार के प्रति सकारात्मक सोच का दौर शुरू हुआ है। लेकिन कश्मीर को पिछले 70 साल में जिस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, उसको देखते हुए ये बहुत कम है। शुरुआत अच्छी है लेकिन इसे अंजाम तक ले जाने के लिए कश्मीर को तरक्की और खुशहाली दिलाने के लिए अभी बहुत किया जाना बाकी है। अच्छी बात ये है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं और कश्मीर के लोगों के मन में भरोसा पैदा हो रहा है।

(यह लेखक के निजी विचार हैं)


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