अरनब गोस्वामी बोले- BJP सरकार कांग्रेस से भी बड़ी गलती कर रही है

उन्होंने अपने हालिया शो के जरिए ये साबित किया है कि वह किसी पार्टी को नहीं, बल्कि मुद्दे को तवज्जो देते हैं, फिर भले ही उसका जुड़ाव किसी भी दल से क्यों न हो

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 09 December, 2019
Last Modified:
Monday, 09 December, 2019
Arnab Goswami

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी को अक्सर भाजपा समर्थक पत्रकार के रूप में देखा जाता है,लेकिन उन्होंने अपने हालिया शो के जरिए ये साबित किया है कि वह किसी पार्टी को नहीं, बल्कि मुद्दे को तवज्जो देते हैं, फिर भले ही उसका जुड़ाव किसी भी दल से क्यों न हो।

अरनब गोस्वामी ने अपने शो ‘द डिबेट’ में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर जमकर प्रहार किया। शो की शुरुआत अरनब ने इस अंदाज में की, मानो वह अपने विरोधियों को बता रहे हों कि उनके लिए क्या ज्यादा मायने रखता है।

उन्होंने कहा, ‘अमूमन लोग मुझसे पूछते हैं कि जब आप किसी मुद्दे को उठाते हैं तो उसका आधार क्या होता है? क्या भाजपा या कांग्रेस के आधार पर उठाते हैं? मेरा जवाब होता है ‘नहीं’। मेरे दिमाग में बस ब्लैक एवं व्हाइट, सही और गलत होता है और मैं अपनी पत्रकारिता को कभी कठिन नहीं बनाता। मेरे लिए जो सही है, वो सही है और जो गलत, वो गलत।’  इसके बाद अरनब ने भाजपा को भी सही-गलत का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि भाजपा को भी समझना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत। नागरिकता संशोधन बिल के मामले में भाजपा बड़ी गलती कर रही है।’

अरनब ने यह भी साफ किया कि बिल पर आपत्ति जताकर वह कांग्रेस के एजेंडे का समर्थन नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी नजर में असम में बांग्लादेशियों की घुसपैठ के लिए कांग्रेस ही सबसे बड़ी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, ‘मैं असम से हूं लेकिन मैं आज देश के नागरिक के रूप में अपनी बात रखना चाहूंगा। मैं असम के हाल के लिए कांग्रेस को कुसूरवार ठहराता रहा हूं, मगर भाजपा सरकार उससे भी बड़ी गलती कर रही है।’

उन्होंने बिल के उस प्रावधान पर एतराज जताया है, जिसके मुताबिक,अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बांग्लादेश से आए हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, सिख शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने में आसानी होगी। इसके अलावा अब भारत की नागरिकता पाने के लिए 11 साल नहीं, बल्कि 6 साल तक इस देश में रहना अनिवार्य होगा। वैसे, बिल को यदि धर्म का चश्मा उतारकर देखा जाये तो सवाल उठता है कि क्या इससे अवैध रूप से भारत में घुसने वालों पर लगाम लगाई जा सकेगी? मुस्लिमों को छोड़कर दूसरे देशों में रहने वालों को भारत का नागरिक बनाने से क्या समस्या हल हो पायेगी? यही सवाल अरनब गोस्वामी ने भी सरकार से पूछा है।

‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब ने आगे कहा, ‘मुद्दा हमेशा से अवैध प्रवासियों का रहा है, न कि उनके धर्म का। भाजपा बस संघ परिवार को खुश करने में लगी है। पाकिस्तान या बांग्लादेश में रहने वाले कहीं भी जाएं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन भारत ही क्यों? क्या हमारा देश धर्मशाला है? हम सभी को इस मुद्दे पर भाजपा से सवाल करना चाहिए।’

उन्होंने भाजपा सरकार की कवायद को सियासी नफे-नुकसान के तहत लिया गया फैसला भी बताया, साथ ही सरकार को इसके दूरगामी परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी। दरअसल, नागरिकता संशोधन बिल को लेकर अधिकांश मीडिया में सरकार जैसी ही राय है, यानी सबकुछ अच्छा है। मगर अरनब गोस्वामी ने इन बिंदुओं को उठाकर यह बताने का प्रयास किया है कि मीडिया का काम केवल अच्छे पर ही फोकस करना नहीं होता। अरनब के इस ‘डिबेट’ को भले ही किसी भी रूप में देखा जाये, लेकिन जो सवाल उन्होंने उठाये हैं, उनका जवाब तो भाजपा से मांगा ही जाना चाहिए। साथ ही यह भी उम्मीद की जानी चाहिए कि अरनब को लेकर गलतफहमी पालने वालों की गलतफहमी अब काफी हद तक दूर हो जाएगी।       

पूरी डिबेट आप यहां देख सकते हैं:

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न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर चैनल को मिली ये कड़ी सजा

न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल को भारी पड़ गया।

Last Modified:
Monday, 25 January, 2021
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न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल को भारी पड़ गया। अवमानना और जजों के अपमान के आरोप में पाकिस्तान की मीडिया की निगरानी करने वाली संस्था ने चैनल को 30 दिन के लिए बंद कर दिया है। यह कार्रवाई जिस चैनल पर की गई है उसका नाम ‘बोल टीवी’ है। वहीं, इस चैनल के ऊपर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

चैनल के खिलाफ इस कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की मीडिया निगरानी संस्था PEMRA ने बताया कि इस चैनल के एंकर सामी इब्राहिम (Sami Ibrahim) ने 13 जनवरी को प्रसारित कार्यक्रम में लाहौर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों पर नियुक्तियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी। एंकर ने संविधान के अनुच्छेद 68 और पीईएमआरए आचार संहिता 2015 के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन किया था और जजों के खिलाफ अपमानजनक बातें की थीं।  

संस्था ने कहा कि जब चैनल को नोटिस दिया गया तो उसने खेद व्यक्त करने के बजाय नोटिस वापस लेने पर जोर डाला। इससे पहले अप्रैल 2019 में लाहौर हाई कोर्ट ने जजों के संबंध में एक अन्य खबर के मामले में भी नोटिस दिया था। 2019 में इस एंकर का प्रधानमंत्री इमरान खान पर एक टॉक शो के कारण विज्ञान मंत्री फवाद चौधरी के साथ विवाद हो चुका है। फवाद चौधरी ने एंकर इब्राहिम को एक विवाह समारोह में थप्पड़ मार दिया था। 

वर्ष 2019 के अक्टूबर माह में जारी आदेश में PEMRA ने नियमित शो करने वाले एंकर्स को निर्देश दिया था कि वे अपने या दूसरे चैनलों के टॉक शो में 'विशेषज्ञ की तरह पेश न हों।'  साथ ही आदेश में मीडिया हाउसों को यह भी निर्देश दिया कि वे टॉक शो के लिए अतिथि का चयन बेहद सतर्कता से करें। चयन के दौरान उस खास विषय पर उनके ज्ञान और विशेषज्ञता का भी ध्यान रखें।

दरअसल, इस्लामाबाद हाई कोर्ट के 26 अक्टूबर के एक आदेश के बाद सभी सेटेलाइट टीवी चैनलों को यह आदेश जारी किया गया। कोर्ट ने शहबाज शरीफ बनाम सरकार के मामले में विभिन्न टीवी टॉक शो पर संज्ञान लिया, जहां एंकर्स ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए न्यायपालिका और उसके फैसलों की छवि खराब करने की कोशिश की। कोर्ट ने ऐसे उल्लंघनों पर PEMRA द्वारा की गई कार्रवाई और सजा पर रिपोर्ट भी मांगी।

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वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीप्ति सचदेवा की Republic TV में वापसी

दीप्ति सचदेवा इससे पहले लगभग तीन साल तक रिपब्लिक टीवी से जुड़ी रही हैं

Last Modified:
Sunday, 24 January, 2021
Deepti Sachdeva.

वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीप्ति सचदेवा ने ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) में वापसी की है। उन्होंने अक्टूबर 2019 में ‘रिपब्लिक टीवी’ में सीनियर एडिटर के पद से इस्तीफा दे दिया था। दीप्ति सचदेवा इससे पहले लगभग तीन साल तक ‘रिपब्लिक टीवी’ से जुड़ी रही हैं।

दीप्ति सचदेवा को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का काफी अनुभव है। 'रिपब्लिक टीवी' से पहले बतौर सीनियर एंकर वह करीब पांच साल 'टाइम्स नाउ' (Times Now) चैनल के साथ भी काम कर चुकी हैं।

इससे पहले करीब साढ़े छह साल तक वह 'एनडीटीवी' (NDTV) में एंकर/स्पेशल करेसपॉन्डेंट के अलावा करीब सवा दो साल तक 'जी न्यूज' (Zee News) में एंकर/करेसपॉन्डेंट के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।

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BARC के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है टाइम्स नेटवर्क

अब टाइम्स नेटवर्क/बेनेट कोलमैन ऐंड कंपनी लिमिटेड (बीसीसीएल) बार्क पर कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 23 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 23 January, 2021
TRP

टीआरपी हेरफेर के मामले में मुंबई पुलिस की ओर से ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) की भूमिका सवालों के घेरे में खड़े किए जाने के बाद अब टाइम्स नेटवर्क/बेनेट कोलमैन ऐंड कंपनी लिमिटेड (बीसीसीएल) बार्क पर कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है। साथ ही कंपनी टीआरपी मामले में शामिल रहे लोगों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई पर विचार किया कर रही है।

बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (बीसीसीएल) का अंग्रेजी न्यूज चैनल 'टाइम्स नाउ' टाइम्स नेटवर्क के तहत चल रहा है और इसके व्युअरशिप डेटा के लिए वह ब्रॉडकास्ट रिसर्च काउंसिल  (बार्क) की सब्सक्राइबर है। असल में साल 2017 से, जबसे रिपब्लिक टीवी लॉन्च हुआ था, यानी मई, 2017 से बीसीसीएल/टाइम्स नेटवर्क बड़े पैमाने पर टीआरपी में हेरफेर का शक जताती आयी है, जिसमें अवैध तरीके से रिपब्लिक की ओर से एक से ज्यादा लॉजिकल चैनल नंबर (LCNs) का इस्तेमाल, इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (EPG) से इतर इस्तेमाल शामिल है।

टाइम्स नेटवर्क का कहना है कि उसने मार्केट के लिहाज से भी उस चैनल की रेटिंग में गड़बड़ियां पाईं जो इस बात का संकेत था कि जमीनी स्तर पर मूल डेटा से छेड़छाड़ करके उस चैनल को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है।

नेटवर्क का कहना है कि वह लगातार दो साल तक बार्क से इन अनियमितताओं की शिकायत करता रहा, मगर कभी कोई समाधान नहीं निकाला गया, सिर्फ कोरे जवाब मिले।

नेटवर्क के मुताबिक, वहीं मुंबई पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) ने बार्क टीआरपी घोटाले के संबंध में 25 दिसंबर 2020 को प्रेस में जो बयान जारी किया, उससे साफ है कि 2017/18 में रिपब्लिक टीवी को फायदा पहुंचाने के लिए बार्क के अधिकारियों की हेराफेरी के सबूत सामने आ चुके हैं। बार्क की जुलाई 2020 की फरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट और उस दौर के कई ईमेल और वॉट्सऐप चैट जो पुलिस के हाथ लगे हैं, उनसे साफ होता है कि टाइम्स नाउ की टीआरपी को बार्क के अधिकारियों ने पब्लिश करने से पहले जानबूझकर इंसानी दखल के जरिए घटाया था।

नेटवर्क ने आगे कहा कि पार्थो दासगुप्ता और रोमिल रामगढ़िया की अगुआई वाले बार्क ने अंग्रेजी न्यूज चैनलों की श्रेणी में फर्जी तरीके से रिपब्लिक टीवी को फायदा पहुंचाया और उसे नंबर-1 घोषित किया। जबकि वास्तव में टाइम्स नाउ बराबर बड़े मार्जिन के साथ आगे बढ़ रहा था और अंग्रेजी न्यूज चैनलों में अविवादित रूप से नंबर वन पर था।

उसका कहना है कि इस पूरे घपले से टाइम्स नेटवर्क को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। इस पूरे मामले ने बार्क के मौजूदा बोर्ड और मैनेजमेंट के तौर तरीकों और नैतिकता पर सवाल खड़ा कर दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ऐसे बोर्ड और मैनेजमेंट को बने रहना चाहिए। टाइम्स नेटवर्क ने बीते कई हफ्तों में बार्क की ओर से इस मसले पर आधिकारिक बयान लेने की कोशिशें कीं मगर जवाब नहीं मिला। ऐसे में टाइम्स नेटवर्क/बीसीसीएल अपनी शिकायतों की अनसुनी होने और खुद को पहुंचे नुकसान के खिलाफ हर संभव कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।

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परवान चढ़ी डील तो इस भारतीय चैनल पर होगा पाकिस्तानी मैचों का प्रसारण

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (SPNI) और ‘पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड’ (PCB) तीन साल के लिए एक प्रसारण सौदे (broadcast deal) पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं।

Last Modified:
Friday, 22 January, 2021
Cricket

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (SPNI) और ‘पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड’ (PCB) तीन साल के लिए एक प्रसारण सौदे (broadcast deal) पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। क्रिकेट की खबरें देने वाली वेबसाइट ‘क्रिकवज’ (Cricbuzz) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस एग्रीमेंट के तहत ‘सोनी’ पाकिस्तान की घरेलू सरजमीं पर होने वाली टी-20 'पाकिस्तान सुपर लीग' (पीएसएल) के अलावा पाकिस्तान के घरेलू और विदेशी मैचों का प्रसारण करेगी।

‘पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड’ द्वारा पिछले साल ‘टेन स्पोर्ट्स’ (Ten Sports) के साथ अपनी दीर्घकालिक पारी समाप्त करने के बाद इन प्रसारण अधिकार को लेकर इन दोनों के बीच बातचीत चल रही थी। बता दें कि ‘टेन स्पोर्ट्स’ का अधिग्रहण सोनी द्वारा किया गया है।  

‘पीसीबी’ के चेयरमैन एहसान मनी (Ehsan Mani) का कहना है, ‘मैं इस तरह की बातों पर टिप्पणी नहीं करता। यह सच है कि ये मैच भारत में दिखाए जाएंगे। मैं इस तरह की डील नहीं करता, मेरा कॉमर्शियल डिपार्टमेंट ऐसी डीलिंग कर रहा है। हां, हम सोनी के साथ एक डील के करीब हैं।’

‘क्रिकवज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में सोनी के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा है कि आगामी पाकिस्तान-दक्षिण अफ्रीका सीरीज के साथ इसकी शुरुआत हो सकती है। सोनी के उक्त अधिकारी का कहना है, ‘हमने सैद्धांतिक रूप से सभी बातों पर सहमति जताई है और यदि सब कुछ सही रहता है तो हम 26 जनवरी को ही गेम्स दिखाना शुरू कर सकते हैं। उनके सभी खेल चाहे पाकिस्तान में हों या यूएई में, तीन साल तक सोनी स्पोर्ट्स पर दिखाए जाएंगे।’

बता दें कि वर्ष 2015 में ‘टेन स्पोर्ट्स’ ने पांच साल के लिए ‘पीसीबी’ के साथ अपनी डील रिन्यू की थी। ‘टेन स्पोर्ट्स’, जिसे अब ‘सोनी टेन’ के रूप में रीब्रैंड किया गया है, वर्ष 2003 से पीसीबी का ब्रॉडकास्ट पार्टनर है।

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ZEE से जुड़े अशोक नम्बूदरी, निभाएंगे यह बड़ी जिम्मेदारी

नम्बूदरी इससे पहले ब्रिटानिया, टाटा कंज्यूमर, कोका कोला और यूनिलीवर जैसे प्रतिष्ठित ब्रैंड्स के साथ जुड़े रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 21 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 21 January, 2021
Ashok Namboodiri

‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEE Entertainment Enterprises Ltd) ने अशोक नम्बूदरी को चीफ बिजनेस ऑफिसर (इंटरनेशनल बिजनेस) के पद पर नियुक्त किया है। इस भूमिका में अशोक के पास इंटरनेशनल मार्केट्स में टीम का नेतृत्व कर कंपनी की स्ट्रैटजिक ग्रोथ बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

अशोक इससे पहले ‘स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Star India Pvt. Ltd) के साथ जुड़े हुए थे और रीजनल स्पोर्ट्स बिजनेस के साथ-साथ कन्नड़ मार्केट में जनरल एंटरटेनमेंट बिजनेस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अपने दो दशक से ज्यादा के करियर में अशोक ‘ब्रिटानिया’, ‘टाटा कंज्यूमर’, ‘कोका कोला’ और ‘यूनिलीवर’ जैसे प्रतिष्ठित ब्रैंड्स के साथ जुड़े रहे हैं।

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सरकारी समिति ने की TV रेटिंग के लिए सैंपल साइज बढ़ाने की सिफारिश: रिपोर्ट्स

टीवी व्यूअरशिप/टीआरपी की समीक्षा के लिए सरकार द्वारा नवंबर में गठित की गई थी चार सदस्यीय समिति

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 January, 2021
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टीवी व्यूअरशिप/टीआरपी की समीक्षा के लिए सरकार द्वारा गठित की गई समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चार सदस्यीय इस समिति ने सुझाव दिया है कि व्युअरशिप डाटा की गणना के लिए कम से कम पांच लाख घरों से सैंपल लेने चाहिए। फिलहाल टीवी रेटिंग्स के लिए 50,000 घरों का सैंपल लिया जाता है।  

यह भी पढ़ें: टेलिविजन रेटिंग सिस्टम की समीक्षा के लिए गठित कमेटी ने सौंपी अपनी रिपोर्ट

रिपोर्ट्स के अनुसार, समिति ने कथित रूप से यह भी सुझाव दिया है कि सर्वे में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों (untapped areas) को ज्यादा शामिल करना चाहिए। बताया जाता है कि सरकार सिस्टम की सहायता के लिए तकनीकी समाधान (technological solutions) भी तलाश रही है। इसके अलावा यह मोबाइल पर टीवी देखने को भी ध्यान में रख रही है, जिसका इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग इन दिनों कंटेंट देखने के लिए कर रहे हैं।

गौरतलब है कि ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) द्वारा चार नवंबर 2020 को प्रसार भारती (Prasar Bharati) के सीईओ शशि शेखर वेम्पती की अध्यक्षता में यह कमेटी गठित की गई थी। रेटिंग के कथित रूप से हेरफेर को लेकर हंगामे के बाद इसे देश में टीआरपी सिस्टम को मजबूत करने के लिए नियुक्त किया गया था। इस समिति में तीन अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। समिति ने पिछले सप्ताह सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

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इस मामले में Maha Movie चैनल के CEO संजय वर्मा को पुलिस ने किया गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने ‘महा मूवी’ (Maha Movie) टेलीविजन चैनल के सीईओ संजय वर्मा को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 January, 2021
MahaMovie554

मुंबई पुलिस ने ‘महा मूवी’ (Maha Movie) टेलीविजन चैनल के सीईओ संजय वर्मा को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया, उन पर कथित कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप है। मंगलवार को मुंबई क्राइम ब्रांच ने उनसे थोड़ी देर पूछताछ की और उसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वह कथित टीआरपी घोटाले में भी एक वांछित आरोपी हैं।

मामले की जानकारी देते हुए  एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वर्मा को मुंबई पुलिस की अपराध खुफिया इकाई (सीआईयू) ने गिरफ्तार किया। कॉपीराइट मामलों का उल्लंघन करने की शिकायत संजय वर्मा के खिलाफ मुंबई के जुहू स्थित पुलिस स्टेशन दायर की गई थी। इसके बाद मामले की जांच सीआईयू को सौंपी गई थी। जांच में संजय वर्मा की कथित भूमिका सामने आई, जिसके बाद सीआईयू की टीम ने उनसे पूछताछ की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ के दौरान वर्मा ने अपराध शाखा के अधिकारियों को बताया कि महा मूवी चैनल ने 10 जून से 10 नवंबर 2020 के बीच अवैध रूप से 'जंजीर', 'लावारिस', 'जादूगर', 'मोहब्बत के दुश्मन', 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी फिल्मों का प्रसारण किया।

उन्होंने बताया कि इन फिल्मों के कॉपीराइट पुनीत मेहरा की कंपनी के पास हैं, जोकि प्रसिद्ध फिल्म निर्माता प्रकाश मेहरा के बेटे हैं। मेहरा ने कभी इन फिल्मों के कॉपीराइट किसी अन्य कंपनी या व्यक्ति को नहीं बेचे थे। अधिकारी ने बताया कि इस मामले में नौ और लोग वांछित हैं।

बता दें कि इससे पहले टीआरपी मामले में धांधली करने का भी मुकदमा संजय वर्मा के ऊपर चल रहा है। कथित टीआरपी से हेरफेर करने के मामले में हाल में दाखिल एक आरोप पत्र में कहा गया है कि हंसा रिसर्च एजेंसी के एक अधिकारी ने कुछ घरों को ‘महा मूवी’, ‘बॉक्स सिनेमा’, ‘फक्त मराठी’ और ‘रिपब्लिक टीवी’ चैनल देखने के लिए धन दिया था। 

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TRP Case: न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने उठाई अब ये मांग

टीआरपी से छेड़छाड़ के मामले को लेकर इन दिनों 'घमासान' मचा हुआ है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 19 January, 2021
Last Modified:
Tuesday, 19 January, 2021
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) में ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) की सदस्यता को निलंबित करने की मांग की है। ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पार्थो दासगुप्ता और ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी के बीच वॉट्सऐप चैट का हवाला देते हुए ‘एनबीए’ ने यह भी मांग की है कि जब तक इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक रिपब्लिक टीवी को BARC के रेटिंग सिस्टम से बाहर रखा जाए। 

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ का कहना है कि पार्थो दासगुप्ता और अरनब गोस्वामी के बीच कथित रूप से किए गए सैकड़ों वॉट्सऐप चैट को देखकर काफी झटका लगा है। ‘एनबीए’ के अनुसार, ‘इस मैसेजों को देखकर स्पष्ट रूप से पता चलता है कि रिपब्लिक टीवी की व्युअरशिप ज्यादा दिखाने और अन्य चैनल्स की व्युअरशिप को कम दिखाने के लिए मिलीभगत कर रेटिंग से छेड़छाड़ की गई। ये वॉट्सऐप मैसेज न सिर्फ रेटिंग्स में हेरफेर को दर्शाते हैं, बल्कि शक्ति के दुरुपयोग (Power Play) को भी दिखाते हैं। इससे पुष्टि होती है कि एनबीए की ओर से जो आरोप लगाए जाते रहे हैं कि बार्क के शीर्ष अधिकारियों की मिलीभगत से एनबीए के गैरसदस्य ब्रॉडकास्टर द्वारा रेटिंग्स में छेड़छाड़ की जा रही है, वह सही हैं।’

एनबीए ने मांग की है कि जब तक टीआरपी से छेड़छाड़ का मामला कोर्ट में है, तब तक रिपब्लिक टीवी की इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन की सदस्यता निलंबित कर देनी चाहिए।  एनबीए बोर्ड का यह भी विचार है कि रिपब्लिक टीवी द्वारा रेटिंग में हेरफेर ने ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री की प्रतिष्ठा को बहुत नुकसान पहुंचाया है और इसलिए इस मामले में अदालत के अंतिम आदेश तक इसे BARC की रेटिंग प्रणाली से बाहर रखा जाना चाहिए।

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न्यूज चैनल्स की रेटिंग पर लगी रोक को बढ़ा सकता है BARC: रिपोर्ट

टीवी चैनल्स की रेटिंग जारी करने वाली संस्थान बार्क (BARC) न्यूज चैनल्स की रेटिंग के लिए अपनी ब्लैकआउट अवधि को और तीन महीनें बढ़ा सकती है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
BARC India

टीवी चैनल्स की रेटिंग जारी करने वाली संस्था ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल ऑफ इंडिया (BARC) न्यूज चैनल्स की रेटिंग के लिए अपनी ब्लैकआउट अवधि को और तीन महीनें तक बढ़ा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स में इस तरह की खबर निकलकर सामने आई हैं।

टीआरपी से छेड़छाड़ (TRP manipulation) के मामले को लेकर मचे घमासान के बीच BARC  ने 15 अक्टूबर 2020 को 12 हफ्ते के लिए न्यूज चैनल्स की रेटिंग्‍स न जारी करने का फैसला लिया था, जिसकी समय-सीमा का आखिरी दिन 15 जनवरी (शुक्रवार) था। बताया जा रहा है कि इस ब्लैकआउट की समय-सीमा को मुंबई पुलिस द्वारा टीआरपी घोटाले की जांच के चलते बढ़ाया जा सकता है।  

वहीं दूसरी तरफ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन के विचारों में भिन्नता दिखाई दे रही है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार रजत शर्मा के नेतृत्व वाले ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया को सुझाव दिया है कि न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप रेटिंग जारी करने पर लगाए गए प्रतिबंध (blackout period) को कुछ महीनों तक और बढ़ा दिया जाए, जबकि वरिष्ठ टीवी पत्रकार अरनब गोस्वामी के नेतृत्व वाले ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) ने ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) से न्यूज चैनल्स की रेटिंग तुरंत प्रभाव से जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही एजेंसी से भविष्य के डाटा के लिए सुधारात्मक उपाय (corrective measures) करने का भी अनुरोध किया है।   

टीआरपी से छेड़छाड़ को लेकर जब पहली खबर सामने आई तो बार्क ने अपनी टेक्निकल टीम को इस मामले के जांच आदेश दिए थे और तब तक के लिए सभी हिंदी, अंग्रेजी और बिजनेस न्यूज चैनल्स के रेटिंग को यह कहते हुए सस्पेंड कर दिया था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक रेटिंग प्रकाशित नहीं की जाएगी और यह भी बताया था कि इस पूरी जांच में 8 से 12 सप्ताह लग सकता है।

 

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फर्जी निकला हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनने का ऑफर, यूं छलका निधि राजदान का 'दर्द'

पिछले साल जून में निधि राजदान ने 21 साल की पारी के बाद एनडीटीवी से इस्तीफा देने का फैसला लिया था। एक ट्वीट के जरिये उन्होंने इसकी वजह भी बताई थी।

Last Modified:
Friday, 15 January, 2021
Nidhi Razdan

वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान ने शुक्रवार को एक ट्वीट में चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस ट्वीट में निधि राजदान का कहना है कि वह प्रतिष्ठित ‘हार्वर्ड यूनिवर्सिटी’ के फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर अपनी पारी शुरू नहीं करने जा रही हैं। इस ट्वीट में निधि राजदान ने कहा है कि दरअसल, उन्हें ‘हार्वर्ड यूनिवर्सिटी’ ने इस तरह का कोई ऑफर दिया ही नहीं था। निधि राजदान का कहना है कि वह फिशिंग अटैक (ऑनलाइन धोखाधड़ी, जहां ईमेल के जरिये धोखा देकर सारी जानकारी ले ली जाती है) का शिकार हुई हैं।  

ट्वीट में निधि ने लिखा है, ' जून 2020 में मैंने यह कहते हुए 21 सालों की एनडीटीवी की नौकरी छोड़ने का फैसला लिया कि मैं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में जर्नलिज्म के एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में जॉइन करने जा रही हूं। मुझे बताया गया था कि मैं सितंबर 2020 में यूनिवर्सिटी जॉइन करूंगी। मैं अपने नए असाइनमेंट की तैयारी कर रही थी, इसी दौरान मुझे बताया गया कि महामारी की वजह से मेरी क्लासेज जनवरी 2021 में शुरू होंगी।'

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निधि का कहना है, 'लगातार हो रही देर के बीच शुरू में तो मैंने यह सोचकर इन बातों पर ध्यान नहीं दिया कि महामारी में ये सब नॉर्मल है पर हाल ही में जो कुछ हुआ, वो ज्यादा परेशान करने वाला था। मैंने सीधे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने के लिए संपर्क साधा और उनके आग्रह पर मैंने उनसे वे सारे कम्युनिकेशन्स शेयर किए जो तथाकथित रूप से यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए थे।’

यूनिवर्सिटी का पक्ष जानने के बाद मुझे पता चला कि मैं साइबर फ्रॉड की शिकार हुई हूं और दरअसल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने मुझे उनके जर्नलिज़्म डिपार्टमेंट की फैकल्टी बनने का कोई ऑफर भेजा ही नहीं था। राजदान का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अधिकारियों को लेटर लिखकर उनसे भी इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि पिछले साल जून में निधि राजदान का एक ट्वीट सामने आया था, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि वह एनडीटीवी में 21 साल की अपनी पारी को विराम देकर साल के अंत तक ‘हार्वर्ड यूनिवर्सिटी’ के फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर अपनी पारी शुरू करेंगी। निधि राजदान की ओर से उस समय किए गए ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स आप यहां देख सकते हैं।

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