न्यूज एंकर ने कुछ यूं कर दी इमरान खान की बेइज्जती, देखें विडियो

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सम्मेलन में शामिल होने न्यूयॉर्क गए इमरान खान एक चैनल पर कर रहे थे चर्चा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 03 October, 2019
Last Modified:
Thursday, 03 October, 2019
IMRAN KHAN

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के दिन लगता है कि इन दिनों कुछ अच्छे नहीं चल रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर पहले ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर वे अलग-थलग पड़ चुके हैं। अब अमेरिका के एक पत्रकार ने टीवी पर सरेआम उनकी बेइज्जती कर दी और उन्हें वेल्डर कह डाला।

दरअसल, पिछले दिनों इमरान खान संयुक्त राष्ट्र महासभा के सम्मेलन में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क में थे। यहां उन्होंने अमेरिका के टीवी चैनल 'एमएसएनबीसी ' (MSNBC) के एक कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क की सड़कों की बुराई कर दी।

न्यूयॉर्क के इंफ्रॉस्ट्रक्चर की शिकायत करते हुए इमरान खान का कहना था, ‘अफगानिस्तान में अमेरिका बेकार ही युद्ध में पैसा लगा रहा है, जबकि चीन दुनिया का बेहतरीन इंफ्रॉस्ट्रक्चर तैयार कर रहा है।‘

इस पर न्यूज एंकर का कहना था, ‘आप अभी पीएम की तरह बात नहीं कर रहे। ऐसा लग रहा है कि ब्रॉन्क्स (BRONX) कंपनी का कोई वेल्डर बोल रहा हो। इतना सुनते ही इमरान खान खुद पर हंसने लगे। बता दें कि ब्रॉन्क्स न्यूयॉर्क में एक वेल्डिंग कंपनी है।

इमरान खान का यह विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस विडियो को आप यहां देख सकते हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

MIB ने जारी की एडवाइजरी, केबल ऑपरेटर्स को अनिवार्य रूप से दिखाने होंगे ये चैनल्स

आदेशों का उल्लंघन होने की स्थिति में सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से की जाएगी कार्रवाई

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
MIB

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी मल्टीसिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) और केबल ऑपरेटर्स को अपने केबल टीवी नेटवर्क पर दूरदर्शन के 25 चैनल्स के साथ ही लोकसभा और राज्यसभा चैनल को अनिवार्य रूप से दिखाने के लिए कहा है।

एमआईबी की ओर से इस संबंध में जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने पर केबल एक्ट के सेक्शन 11, 12 और 18 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। मंत्रालय के अनुसार, आदेशों का उल्लंघन होने की दशा में एमएसओ को अनुमति देने के लिए तय नियम और शर्तों के तहत निर्धारित नियम लागू होंगे।

मंत्रालय के अनुसार, यदि दर्शकों को डीडी चैनल देखने को नहीं मिल रहा है तो वे निकटतम दूरदर्शन केंद्र पर जाकर स्टेशन हेड से शिकायत कर सकते हैं अथवा ddpb.inform@gmail.com पर ई-मेल भी कर सकते हैं।

 

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में ‘इंडिया टीवी’ ने भी कुछ यूं की मदद

कोविड-19 के खिलाफ देश की इस लड़ाई में ‘इंडिया टीवी’ भी सामने आया, जिसकी जानकारी इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए दी है।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
India TV

पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है, जिससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पीएम केयर फंड’ का ऐलान किया, तो इस लड़ाई को जीतने के लिए तमाम संगठन और निजी संस्थान आगे आ रहे हैं , जो पीएम केयर में दान कर रहे हैं। यही नहीं आमलोग भी स्वेच्छा से अपने हिसाब से पीएम केयर्स फंड में पैसे डोनेट कर रहे हैं। इसी कड़ी में अब ‘इंडिया टीवी’ (India Tv) भी सामने आया है।

बता दें कि ‘इंडिया टीवी’ ने एक करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड में डोनेट किए हैं। इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि कोविड-19 के खिलाफ देश की इस लड़ाई में मदद के लिए ‘पीएम केयर्स फंड’ में अब तक जिन लोगों ने अपना योगदान दिया, मैं उन सभी लोगों को सलाम करता हूं। मैं ‘पीएम केयर्स फंड’ में एक करोड़ रुपए का विनम्र सहयोग दे रहा हूं।

बता दें कि पीएम केयर्स फंड यानी ‘प्रधानमंत्री सिटिजन असिस्टेंड एंड रिलिफ इन इमरजेंसी सिचुएशन फंड’ (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) वो कोष है जिसमें आपातकालीन स्थिति में देश के नागरिकों के लिए राहत की राशि जमा की जाती है। इसमें छोटी-बड़ी राशि दान में दी जा सकती है। फिलहाल इस रकम का इस्‍तेमाल मौजूदा संकट से निपटने में किया जाएगा।  

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

टेलिविजन का गोल्डन एरा कुछ यूं लौटा दोबारा

देश में लॉकडाउन के चलते लोग अपने घरों में कैद हैं और तरह-तरह के कामों में खुद को व्‍यस्‍त रख रहे हैं। इस बीच अब टेलिविजन का गोल्डन एरा भी दोबारा लौट आया है

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
dd

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन है। लोग घरों में हैं। ऐसे में लोग घर से बाहर न निकलें, इसके लिए हर तरह की कोशिशें जारी हैं। इस बीच अब टेलिविजन का गोल्डन एरा भी दोबारा लौट आया है। दरअसल, सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक स्टेटमेंट में कहा है कि दूरदर्शन पर पांच शो प्रसारित किए जाएंगे।

‘रामायण’ और ‘महाभारत’ के बाद दूरदर्शन पर अब ‘शक्तिमान’, ‘चाणक्य’, ‘उपनिषद गंगा’, ‘कृष्णा काली’ और ‘श्रीमान श्रीमति’ जैसे धारावाहिकों का प्रसारण भी दोबारा शुरू हो रहा है। सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने दर्शकों की मांग के बाद यह फैसला लिया है।

इससे पहले सोशल मीडिया पर रामायण और महाभारत धारावाहिक को शुरू करने की मांग उठी थी जिसे मंत्रालय ने पूरा किया था। 

बता दें कि शक्तिमान अप्रैल के पहले हफ्ते से दोपहर 1 बजे प्रसारित किया जाएगा। शक्तिमान का टेलिकास्ट 1997 में शुरू हुआ था, जो 2005 तक चला। मुकेश खन्ना और वैष्णवी इसमें लीड रोल में थे। वहीं, ‘चाणक्य’ के 47 एपिसोड, जिसे डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने निर्देशित किया है, डीडी भारती पर अप्रैल के पहले हफ्ते से शुरू होगा। इसका प्रसारण दोपहर के समय में किया जाएगा। चाणक्य में डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने ही लीड रोल निभाया था। शो 1991 में शुरू हुआ था। 47 एपिसोड की यह सीरीज अगस्त 1992 में खत्म हुई थी।

वहीं, ‘उपनिषद गंगा’ के 52 एपिसोड, जिसे चिन्मया मिशन ट्रस्ट ने प्रड्यूस और चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने निर्देशित किया है, डीडी भारती पर अप्रैल के पहले हफ्ते में शुरू होगा। इसका प्रसारण भी दोपहर के समय में ही किया जाएगा। ‘श्रीमान श्रीमति’, जो कि एक कॉमेडी शो है, इसका प्रसारण दूरदर्शन नेशन चैनल पर दोपहर 2 बजे किया जाएगा। इसके अलावा ‘कृष्णा काली’ के 18 एपिसोड डीडी नेशनल पर रात 8 बजे प्रसारित किए जाएंगे।

बता दें कि देश में लॉकडाउन के चलते लोग अपने घरों में कैद हैं और तरह-तरह के कामों में खुद को व्‍यस्‍त रख रहे हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इन पुराने सीरियल्‍स को देखने की मांग उठी थी, जिसके बाद दूरदर्शन पर अभी तक रामानंद सागर के निर्देशन में बनी रामायण, बीआर चोपड़ा की महाभारत और ब्योमकेश बख्शी जैसे शो ही दिखाए जा रहे थे। लोगों की डिमांड थी कि शक्तिमान को भी टेलिकास्ट किया जाए। इस मांग को मानते हुए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इनका समय तय कर दिया है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

न्यूज ब्रॉडकासटर्स फेडरेशन ने MIB मिनिस्टर के सामने उठाया रेटिंग्स का मुद्दा, की ये अपील

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) के खौफ के बीच पत्रकारिता के जज्बे को बरकरार रखते हुए मुस्तैदी से अपने काम में जुटे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को एक पत्र लिखा है

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
NBF

देश में कोरोनावायरस (कोविड-19) के खौफ के बीच पत्रकारिता के जज्बे को बरकरार रखते हुए मुस्तैदी से अपने काम में जुटे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने देश के लिए इस मुश्किल दौर में सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से चैनल्स की रेटिंग न रोकने की मांग की है। न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) के प्रेजिडेंट और वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी ने प्रकाश जावड़ेकर को इस संबंध में एक पत्र लिखा है।

इस पत्र में अरनब गोस्वामी ने कहा है, ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (NBF) के सभी सदस्यों की ओर से मैं आपको यह लेटर लिख रहा हूं। जैसा कि हमारे संज्ञान में आया है कि अपने निहित स्वार्थों के लिए एक तबका मंत्रालय पर दबाव बनाकर बार्क द्वारा मापी गई चैनल्स की रेटिंग्स को रोकने की कोशिश में जुटा है। मुझे यह भी पता चला है कि जो तबका ऐसे समय में रेटिंग्स को रोकने का प्रयास कर रहा है, वह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए इस तरह का काम कर रहा है। ऐसे लोग खुद को देश की न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री का प्रतिनिधि होने का झूठा दावा कर रहे हैं। न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री इस समय वास्तव में जनसेवा में जुटी हुई है।’  

पत्र के अनुसार, ‘जैसा कि आपको पता ही है कि इस मुश्किल घड़ी में न्यूज चैनल्स द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सभी ने सराहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले दिनों देश के कई न्यूज चैनल्स के मालिकों और वरिष्ठ संपादकों के साथ हुई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान न्यूज चैनल्स के प्रयासों की सराहना की थी। इस मुश्किल घड़ी में जब कहीं आना-जाना और लोगों से संवाद करना कठिन हो गया है, लोगों को कोरोना वायरस से जुड़ी खबरें पहुंचाने के लिए हमारे हजारों प्रोफेशनल्स दिन रात अपने काम में जुटे हुए हैं और कोरोना को हराने के लिए इस ‘जंग’ में सबसे आगे मोर्चा संभाले हुए हैं।’

प्रकाश जावड़ेकर को लिखे इस पत्र में अरनब गोस्वामी का यह भी कहना है, ‘ऐसी स्थिति में यदि न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स रोक दी जाती है तो हम सब बर्बाद हो जाएंगे और हमारा संगठन संकट में आ जाएगा। कुछ चैनल्स अथवा निकाय हमारे बारे में बोलने का भले ही दावा करें, लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि वे अपने कुछ हितों की वजह से ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि इस समय वे अपनी प्रोग्रामिंग बंद कर सकते हैं, जबकि न्यूज चैनल्स लगातार अपने काम में जुटे हैं। अपने बिजनेस को चलाने के लिए हम पूरी तरह से टीवी रेटिंग्स के प्रकाशन पर निर्भर हैं। राष्ट्रीय आपदा के इस दौर में हम सावर्जनिक सेवा का प्रसारण कर रहे हैं।’

इस पत्र में अरनब गोस्वामी ने यह भी कहा है, ‘एनबीएफ के सभी सदस्यों की ओर से मैं आपसे अपील करता हूं कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और टीवी रेटिंग्स का प्रकाशन रोकने की दिशा में कुछ लोगों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को अपनी मंजूरी न दें। यदि यह मंजूरी दी जाती है तो देश की न्यूज ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री खतरे में आ जाएगी, जो इस महत्वपूर्ण समय में अविश्वसनीय काम कर रही है। मैं बार्क के अधिकारियों को उनकी जानकारी के लिए इस लेटर की एक कॉपी भेज रहा हूं। एक बार फिर हम आपसे गुजारिश करते हैं कि इस तरह के किसी भी आदेश को मंजूरी न दें। क्योंकि इससे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के बीच चिंता की भावना पैदा हो रही है और कोरोनावायरस को हराने के उनके लक्ष्य से ध्यान भटक रहा है, जो चाहते हैं हम सभी लोग मिलकर आगे आएं और लॉकडाउन को सफल बनाएं।’

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

LSTV के एडिटर-इन-चीफ आशीष जोशी के बारे में आयी ये बड़ी खबर

आशीष जोशी को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का लगभग 20 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1999 में हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ से की थी।

पंकज शर्मा by
Published - Monday, 30 March, 2020
Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
ashishjoshi

‘लोकसभा टीवी’ (LSTV) के एडिटर-इन-चीफ कम चीफ एग्जिक्यूटिव आशीष जोशी अभी अपने पद पर बने रहेंगे, क्योंकि लोकसभा सचिवालय के उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म किए जाने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। बता देंं कि यह निर्णय कोरोनावायरस के कारण देश भर में चल रहे लॉकडाउन के चलते लिया गया है। लोकसभा सचिवालय के डिप्टी सेक्रेटरी श्रीकांत. एस ने 30 मार्च को जारी पत्र में यह जानकारी दी है।

बता दें कि इससे पहले 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय के डायरेक्टर संतोष कुमार की ओर से जारी एक पत्र में आशीष जोशी के कॉन्ट्रैक्ट को 31 मार्च से खत्म किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, आशीष जोशी का कॉन्ट्रैक्ट 31 मई को खत्म होना था, लेकिन सचिवालय ने दो महीने पहले ही इसे खत्म करने के आदेश जारी किए थे।

आशीष जोशी को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का लगभग 20 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1999 में हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ से की थी। इसके बाद उन्होंने 'जी न्यूज' जॉइन किया और यहां वे 1999 से साल 2002 तक रहे। ‘जी न्यूज’ को अलविदा कहने के बाद उन्होंने पहले ‘डीडी न्यूज’ और फिर ‘आईबीएन7’ (अब न्यूज18 इंडिया) न्यूज चैनल जॉइन किया। डीडी न्यूज में वे लगभग एक साल तक रहे और ‘आईबीएन7’ में उन्होंने ढाई साल तक काम किया। इसके बाद वे एक बार फिर ‘आजतक’ तक चले गए और यहां सीनियर स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट की पारी संभाली।

लगभग तीन सालों तक यहां काम करने के बाद वे साल 2010 में भोपाल स्थित ‘माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जर्नलिज्म’ के साथ जुड़े और इसके बाद लोकसभा टीवी में बतौर एडिटर-इन-चीफ कम चीफ एग्जिक्यूटिव के पद पर कार्यरत थे। मूल रूप से मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले के रहने वाले आशीष जोशी देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान आईआईएमसी (IIMC) के 1999 बैच के छात्र रह चुके हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

कोरोना के बीच नजर आया अरनब गोस्वामी का जज्बा, दिखाई लॉकडाउन की 'हकीकत'

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने लॉकडाउन के दौरान गुरुवार को मुंबई की गलियों में जाकर वहां का जायजा लिया और वहीं से रिपोर्टिंग की।

Last Modified:
Sunday, 29 March, 2020
arnab

कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने तमाम कदम उठाए हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में 25 मार्च को 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है। इन सबके बीच ‘वरिष्ठ पत्रकार व रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने लॉकडाउन के दौरान गुरुवार को मुंबई की गलियों में जाकर वहां का जायजा लिया और वहीं से रिपोर्टिंग की। लॉकडाउन का यह दूसरा दिन था, जब कोरोनावायरस से जंग के लिए पूरा देश अपने घरों में बैठा हुआ था।

अरनब गोस्वामी देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के सबसे व्यस्ततम इलाकों में से एक लोअर परेल पहुंचे, जहां उन्हें इस दौरान कई खामियां देखने को मिलीं। इस दौरान अरनब ने देखा कि कुछ लोग लापरवाही बरत रहे थे। कई लोग यह मानकर भी चल रहे थे कि न तो उन्हें कोरोना हो सकता है और न ही वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। ऐसे में रिपोर्टिंग के साथ ही अरनब ने लोगों से अपील भी की कि वे  कोरोनावायरस की गंभीरता को समझें और लॉकडाउन को किसी छुट्टी की तरह न लें बल्कि सरकार का सहयोग करते हुए घरों से बाहर न निकलें।  

अरनब ने कहा, मैं एक बार फिर मुंबई के बहादुर, बुद्धिमान और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों से अपील करता हूं कि अपनी आदतों को बदलें और लॉकडाउन पूरी तरह लागू करें। लॉकडाउन को यहां प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया है। उद्धव ठाकरे सरकार और बाकी सभी को कड़ी मेहनत करने और इसे पूरी तरह लागू करने की जरूरत है।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण की बीच किस तरह अरनब गोस्वामी ने रिपोर्टिंग के प्रति अपना जज्बा दिखाते हुए जमीनी स्तर पर लॉकडाउन की हकीकत बयां की, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं।

गौरतलब कि महाराष्ट्र में तेजी से मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। यहां अब तक कोरोनो वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 193 हो गई है, जबकि मरने वाले लोगों की संख्या छह है। वहीं पूरे भारत में यह संख्या बढ़कर 1037 तक पहुंच गई है। अब तक पूरे देश में इस वायरस से 24 लोगों की जान जा चुकी है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

अरनब गोस्वामी बोले, न्यूज इंडस्ट्री को विज्ञापनदाताओं के समर्थन की जरूरत

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के प्रेजिडेंट अरनब गोस्वामी ने कहा, कोरोना वायरस से लड़ाई में लोगों तक तथ्यात्मक खबरें पहुंचाने के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स कड़ी मेहनत करना जारी रखेंगे

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Arnab Goswami

दुनिया भर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का कोहराम बढ़ता जा रहा है। कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने तमाम एहतियाती कदम उठाए हैं। इसके तहत जहां देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की गई है, वहीं लोगों की परेशानी को देखते हुए उन्हें तमाम रियायतें दी जा रही हैं। कोरोना के खिलाफ इस ‘जंग’ में देश के न्यूज ब्रॉडकास्टर्स भी अपना मोर्चा संभाले हुए हैं और लोगों को इस महामारी जुड़े पल-पल के अपडेट्स देने के साथ ही इससे बचाव के बारे में जागरूक भी कर रहे हैं।

देश में लॉकडाउन के दौरान चूंकि तमाम लोग अपने घरों पर ही हैं, ऐसे में उनके पास न्यूज अथवा इंफॉर्मेशन के लिए टीवी न्यूज सबसे बड़ा स्रोत बन गया है। देश भर में सभी भाषाओं के ब्रॉडकास्टर्स दिन-रात लगातार कोरोना से जुड़ी ज्यादा से ज्यादा जानकारी अपने दर्शकों को उपलब्ध करा रहे हैं और लॉकडाउन की सफलता सुनिश्चित करने में अपना योगदान दे रहे हैं। इस दौरान चैनल्स न सिर्फ कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या के ताजा आंकड़े और इस बीमारी की बढ़ते प्रकोप के बारे में लोगों को खबर दे रहे हैं, वहीं लोगों तक सही सूचनाएं पहुंचाने और फेक न्यूज को रोकने के लिए भी कई कदम उठा रहे हैं। इसके लिए चैनल्स ने अपनी प्रोग्रामिंग में कई एक्सपर्ट्स, डॉक्टर्स आदि को भी शामिल किया है, जो लोगों को जागरूक कर रहे हैं।    

न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) के प्रेजिडेंट अरनब गोस्वामी का कहना है, ‘ऐसे समय में जब तमाम मीडिया ने अपने संसाधनों और खर्चों को कम कर दिया है, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने अपने प्रयासों को और बढ़ा दिया है और जमीनी स्तर पर भी अपने संसाधनों में इजाफा कर रहे हैं। राष्ट्रीय संकट के दौरान देश भर के न्यूज ब्रॉडकास्टर्स खुद को एक सार्वजनिक, आपातकालीन और आवश्यक सेवा समझते हैं और इस बात को सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस खतरनाक वायरस के खतरे के बारे में बताएं और उन्हें जागरूक करें। मैं इस समय मीडिया इंडस्ट्री के अपने सभी दोस्तों और विभिन्न सेक्टर्स में अपने सहयोगियों से गुजारिश करता हूं कि वे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के प्रयासों में अपना योगदान दें और इस मुश्किल दौर में न्यूज चैनल्स को एडवर्टाइजिंग के रूप में सपोर्ट करें।’  

अरनब गोस्वामी का यह भी कहना है, ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन इस बात को भी बताना चाहता है कि बार्क और नील्सन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यूज चैनल्स में दर्शकों की रुचि काफी बढ़ गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और हिंदी न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप 67 प्रतिशत बढ़ गई। प्रादेशिक भाषा के न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में भी काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी जा रही है। दिलचस्प यह है कि बार्क के सीईओ सुनील लुल्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि  बच्चों की श्रेणी (kids' category) में भी न्यूज चैनल के इस्तेमाल में जबर्दस्त 87 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है, यह इस बात का साफ संकेत है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) से जूझ रहे न्यूज चैनल्स के बीच सूचनाप्रद और प्रासंगिक न्यूज प्रोग्रामिंग को सभी तरह के टीवी ऑडियंस द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है।’

अरनब गोस्वामी का यह भी कहना है, ‘न्यूज चैनल्स और इसके मेंबर्स को मिले सपोर्ट की एनबीएफ सराहना करता है और मीडिया इंडस्ट्री व शेयरधारकों को आश्वस्त करना चाहता है कि देश के न्यूज ब्रॉडकास्टर्स कोविड-19 के खिलाफ इस जंग को मजबूती देने और देश के लोगों तक सही व तथ्यात्मक सूचनाएं पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे।’

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

'इंडिया टुडे’ के सामाजिक सरोकार के साथ उसकी क्रिएटिविटी को दर्शाता यह विडियो

‘इंडिया टुडे’ समूह ने कोरोना से मुकाबले के लिए लोगों को जागरूक करने का अनोखा तरीका निकाला है।

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
sweta

अपनी भाषा में कुछ पढ़ने-सुनने का जो सुकून मिलता है, वो किसी दूसरी भाषा में नहीं मिल सकता। शायद इसीलिए मातृभाषा में मिलने वाली सूचनाएं जल्द समझ में आती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ‘इंडिया टुडे’ समूह ने कोरोना से मुकाबले के लिए लोगों को जागरूक करने का अनोखा तरीका निकाला है।

मीडिया हाउस से जुड़े लोकप्रिय पत्रकार जनता से लॉकडाउन का पालन करने की अपील कर रहे हैं। इस ‘अपील’ को जो अनोखा बनाता है, वह है इसकी भाषा। कहने का मतलब है कि सभी पत्रकार केवल हिंदी या अंग्रेजी में ही अपील नहीं करते हैं, बल्कि वह अपनी मातृभाषा इस्तेमाल करते हैं। इस विडियो संदेश की शुरुआत अंजना ओम कश्यप से होती है, वह भोजपुरी में कहती दिखाई देती हैं ‘बात इतनी है कि घर की चिंता दिमाग से आउट होती नहीं है’।

इसके बाद अन्य पत्रकार अपनी-अपनी भाषाओं में उनकी बात को आगे बढ़ाते हैं। खेल पत्रकार विक्रांत गुप्ता जहां पंजाबी बोलते हैं ‘मैं तुम्हारे वास्ते आऊंगा, क्योंकि तुम मेरा दूसरा परिवार हो। तुम्हारे तक हर खबर पहुंचाउंगा। तुम घर बैठो अपना ध्यान रखो’। वहीं राजदीप सरदेसाई मराठी में कहते हैं, ‘मेरी एक ज़िम्मेदारी है और तुम्हारी भी, घर पर रहें सुरक्षित रहें’।

वरिष्ठ पत्रकार श्वेता सिंह भी इस अपील में नजर आती हैं। वह हिंदी में कहती हैं, ‘आप घर बैठिये, जीते रहिये’। सबसे आखिरी में आते हैं ‘इंडिया टुडे’ के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल। जो अंग्रेजी भाषा में दर्शकों से घर में ही रहने की अपील करते हैं। ऐसे समय में जब देश कोरोना के संकट से जूझ रहा है और सरकार बार-बार लोगों से लॉकडाउन का पालन करने के लिए कह रही है।

‘इंडिया टुडे’ समूह की यह पहल सराहनीय है। एक ही विडियो संदेश में कई भाषाओं के लोगों तक पहुंचने का यह प्रयास ‘इंडिया टुडे’ के सामाजिक सरोकार के साथ-साथ उसकी क्रिएटिविटी को भी दर्शाता है। उम्मीद की जा सकती है कि अपनी भाषा में अपनापन महसूस करने वाले इस अपील की गंभीरता को समझेंगे और कोरोना वायरस से लड़ाई में अपनी जिम्मेदारी भी निभाएंगे।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

अखबार की खबर को प्रशासन ने बताया गलत, DM बोले- छापो खंडन, नहीं तो लेंगे एक्शन

कोरोना वायरस को लेकर देशभर में 21 दिन का लॉकडाउन है। लोग अपने घरों में हैं। लॉकडाउन के ऐलान के बाद सबसे ज्यादा अगर लोगों को डर है तो वो खुद की सुरक्षा को लेकर है।

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Newspaper

कोरोना वायरस को लेकर देशभर में 21 दिन का लॉकडाउन है। लोग अपने घरों में हैं। लॉकडाउन के ऐलान के बाद सबसे ज्यादा अगर लोगों को डर है तो वो खुद की सुरक्षा को लेकर है। इतना डर कोरोना से नहीं जितना अब भूखे मरने से लग रहा है। ऐसे में भुखमरी से जुड़ी एक खबर पब्लिश करने को लेकर एक अखबार खुद सुर्खियों में आ गया है।

हिंदी समाचार पत्र ‘जनसंदेश टाइम्स’ ने गुरुवार (26 मार्च, 2020) को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसकी हेडिंग थी- ‘बनारस के कोइरीपुर में घास खा रहे मुसहर’। इस रिपोर्ट में बताया गया कि बनारस के पिंडरा तहसील बड़ागांव थानांतर्गत कोइरीपुर गांव में मुसहरों के बच्चे लॉकडाउन के चलते खाने की कमी की वजह से अखरी घास खा रहे हैं। ‘जनसंदेश टाइम्स’ में यह खबर विजय विनीत और मनीष मित्र की संयुक्त बाईलाइन से छपी थी।  

 मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस का था, लिहाजा इस खबर से जुड़ी अखबार की कटिंग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी। जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया। खबर की जांच-पड़ताल के बाद उसने इस खबर को गलत बताया।

वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने अगले दिन यानी गुरुवार को अखबार के संपादक सुभाष राय और संवाददाताओं को कानूनी कार्यवाही का नोटिस थमा दिया। नोटिस में कहा गया है कि वे खबर का खंडन छापें अन्यथा उन पर कार्रवाई की जाएगी।

नोटिस में जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों के घास खाने को लेकर प्रकाशित समाचार व तथ्य वास्तविकता के विपरीत हैं। इस गांव में बच्चे फसल के साथ उगने वाली अंकरी दाल और चने की बालियां तोड़कर खाते हैं और ये बच्चे भी अंकरी दाल की बालियां खा रहे थे।

नोटिस में यह भी लिखा है, ‘घास खाना लिखकर मुसहर जाति के परिवारों पर लांछन लगाने का कुत्सित प्रयास किया गया है।’

वहीं, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि बच्चे घास या पौधे नहीं, बल्कि अंकरी दाल और हरे चने के पौधों से बालियां निकाल कर खा रहे थे। इनके परिवार के पास राशन कार्ड है और इस महीने के लिए इन लोगों को राशन भी मिला है। उन्होंने कहा कि यह तस्‍वीर सामने आने के बाद इन्हें अतिरिक्त राशन भी दिया गया है। डीएम ने सोशल मीडिया पर खुद अपने बेटे के साथ एक फोटो भी डाली है। इसमें वह अखरी दाल और हरे चने की बालियां खाते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि यह खाना सामान्‍य बात है और ये चीजें खाई जाती हैं।

हालांकि, इसके बाद नोटिस को लेकर ‘जनसंदेश टाइम्स’ ने अपना पक्ष भी छापा, जिसमें कहा गया, ‘कोरोना वायरस को लेकर हुए लॉकडाउन के दौरान भूख से बिलबिलाते मुसहर समुदाय की पीड़ा को उजाकर करना अखबार का धर्म था और वही किया भी। इस गांव के लोग भूख से बेहाल थे, तभी तो समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रसाशनिक मशीनरी हरकत में आयी और आनन-फानन कोईरीपुर पहुंचकर राशन बंटवाया। मौके पर मौजूद बड़ागांव थानाध्यक्ष ने मुसहर समुदाय से साफ-साफ कहा कि खाने का संकट था तो हमें खबर क्यों नहीं दी।’

अखबार में आगे लिखा गया है, ‘जनसंदेश टाइम्स किसी सियासी दल अथवा व्यक्ति का पक्षकार नहीं रहा है। अखबार समाज के आखिरी आदमी तक के आवाज को सरकार तक पहुंचाने का काम करता है। हमारे समाचार संपादक विजय विनीत ने कहा है कि गंवई प्रचलन में अखरी घास है। इसे मवेशियों को खिलाया जाता है। ग्रामीण इसे खाने खाना तो दूर, अपने फसलों की रक्षा के लिए उखाड़ने में कोताही नहीं बरतें। इस खर-पतवार को नष्ट करने के लिए सरकार भी अभियान चलाती है। समूचा कृषि महाकुमा अंकुरी घास को नष्ट करने का फार्मूला भी किसानों को बताता है। यह वही घास है जो गेहूं में हर साल बेवजह उग जाती है और 40 फीसदी उत्पादकता को चाट जाती है।

समाचार संपादक विजय विनीत ने आगे कहा है कि कोरोना महामारी में संयम और धैर्य बरतने की जरूरत है। कोई सियासी दल अखबार में छपी खबरों को मुद्दा ना बनाएं। अखबार का मकसद भूख से परेशान लोगों की आवाज बनना है। किसी को बदनाम करना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भूख से बिलबिलाते कोईरीपुर गांव के मुसहर समुदाय के बच्चे अपने पेट की भूख मिटाने के लिए अंकरी खा रहे थे। ऐसा करना उनकी मजबूरी थी। फोटो खिंचवाने के मकसद से मुसहर समुदाय के बच्चे अंकरी नहीं खा रहे थे।

विजय विनीत ने यह भी कहा कि अगर डीएम कौशल राज शर्मा अंकरी को दाल मानते हैं, तो हमारे पाठक घास के आगे अंकरी जोड़ लें अथवा घास को घास न पढ़कर अंकरी समझें। विनीत ने यह भी कहा कि जनसंदेश टाइम्स का 26 मार्च का संस्करण रात करीब 10:30 बजे छप गया था, जबकि जिलाधिकारी ने रात 1:30 बजे समाचार को निराधार बताने वाला मैसेज भेजा था। कहा कि जिलाधिकारी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना हमारा मकसद नहीं, अखबार का उद्देश्य लापरवाह कर्मचारियों की खामियों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है।

दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियां भी इस खबर को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास करने लगीं हैं। समाजवादी पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘बनारस में मुसहरों की बस्ती में लोग घास खाने को मजबूर! सैनिटाइजर और मास्क दूर की बात, हाथ धोने के लिए साबुन तक नही। सरकार से अपील तत्काल खाद्य पदार्थों के साथ अन्य जरूरी सामान मुसहर बस्तियों तक उपलब्ध कराया जाए।

वहीं, पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अजय राय ने जिलाधिकारी को गुरुवार को ही एक पत्र लिखा जिसमें यह बात दोहरायी कि कोइरीपुर के बच्चे असहाय स्थिति में अंकरी घास खाते दिखे। इसके बावजूद प्रशासन के नोटिस में अंकरी की घास को ‘दाल’ लिखा गया है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

ब्रिटिश टीवी चैनल की इस खबर से पाकिस्तान में मचा कोहराम, बाद में निकली गलत

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण ने पाकिस्तान में भी कोहराम मचा रखा है। लेकिन इस बीच एक ब्रिटिश टीवी चैनल ने एक खबर ऐसी खबर चला दी, जिसने पाकिस्तान में भूचाल मचा दिया।

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
arisenews

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण ने पाकिस्तान में भी कोहराम मचा रखा है। लेकिन इस बीच एक ब्रिटिश टीवी चैनल ने एक खबर ऐसी खबर चला दी, जिसने पाकिस्तान में भूचाल मचा दिया। लिहाजा इसके बाद खुद इमरान सरकार के मंत्री को सामने आकर इस खबर का खंडन करना पड़ा।

दरअसल खबर थी कि पाकिस्‍तान में बढ़ते कोरोना वायरस की चपेट में प्रधानमंत्री इमरान खान भी आ गए हैं और उनका टेस्‍ट पॉजिटिव आया है। लिहाजा इस खबर से लोगों में दहशत बढ़ गई और यह आग की तरह फैलने लगी। इस बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया, क्योंकि यह खबर राजनीतिक गलियारों तक भी जा पहुंची थी और जब इसकी चर्चा तेजी से हो रही थी, उस वक्‍त इमरान खान पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।

दरअसल हुआ यूं कि लंदन स्थित न्‍यूज चैनल ‘एराइज न्‍यूज’ (Arise News) को बतौर ब्रेकिंग न्‍यूज अपने टीकर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कोरोना वायरस का टेस्‍ट पॉजिटिव होने की पुष्टि की खबर चलानी थी। लेकिन, इस बीच एराइज न्‍यूज ने गलती से इमरान खान को लेकर भी खबर चला दी, जिसके बाद ब्रिटेन में रह रहे पाकिस्‍तान के नागरिकों ने इसको सोशल मीडिया पर डालना शुरू कर दिया और बढ़ते-बढ़ते यह खबर पाकिस्‍तान तक जा पहुंची, जिसके बाद इस तरह की अफवाहों पर विराम लगाने के लिए पाकिस्‍तान में इमरान सरकार की पार्टी पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को इस खबर का खंडन करना पड़ा, जिसके बाद एराइज न्यूज ने अपनी इस खबर को हटा लिया।

पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसद फैसल जावेद ने एक ट्वीट कर इस खबर का खंडन करते हुए कहा कि पीएम बिल्‍कुल सही हैं। फैसल ने अपने ट्वीट में अपील भी की कि इस तरह की झूठी और भ्रामक खबरों को न दिखाएं और लोग इन पर विश्‍वास न करें।

वहीं पार्टी के नेता डॉ. शहबाज गिल ने बताया है कि ब्रिटिश टीवी द्वारा अपने देश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कोरोना से संक्रमित होने की खबर चलाई जानी थी, लेकिन उन्होंने गलती से अपने प्रधानमंत्री के बजाय पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का नाम लिख दिया। उन्‍होंने आगे कहा कि 'अल्लाह के करम से इमरान खान साहब बिल्कुल ठीक हैं और अभी कुछ समय पहले ही दफ्तर से घर गए हैं।'

गौरतलब है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन में कोरोना वायरस होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद से उन्‍होंने खुद को क्‍वारंटाइन कर लिया है। वहीं उन्‍होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि वह विडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये कोरोना के खिलाफ राष्ट्रीय युद्ध का नेतृत्व करते रहेंगे।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए