IBF ने उठाया ‘पस्त’ हो रही मीडिया इंडस्ट्री का मुद्दा, सरकार के सामने रखीं ये मांगें

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे ब्रॉडकास्ट सेक्टर की मदद के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ ने सरकार से मदद की गुजारिश की है।

Last Modified:
Monday, 20 April, 2020
IBF

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे ब्रॉडकास्ट सेक्टर की मदद के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) ने सरकार से मदद की गुजारिश की है। इस बारे में ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ की ओर से सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर आर्थिक राहत और प्रोत्साहन पैकेज समेत तमाम मांग उठाई गई हैं।

इस बारे में ‘आईबीएफ’ के प्रेजिडेंट एनपी सिंह का कहना है, ‘कोरोना का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए देशभर में किए गए लॉकडाउन के कारण टेलिविजन सेक्टर के सामने तमाम चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। तमाम टीवी शो का प्रॉडक्शन रुक गया है। कई स्पोर्टिंग इवेंट्स और विज्ञापन कैंसल हो गए हैं। एडवर्टाइजिंग बुकिंग भी काफी घट गई है। विज्ञापन एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं की ओर से पेमेंट भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में ब्रॉडकास्ट सेक्टर मंदी का सामना कर रहा है।’

एनपी सिंह का यह भी कहना है, ‘सरकार द्वारा 15 अप्रैल को जारी अधिसूचना के तहत दी गई वैधानिक छूट का हम स्वागत करते हैं, इसके साथ ही सरकार से ब्रॉडकास्टर सेक्टर के लिए प्रोत्साहन पैकेज की मांग करते हैं ताकि सभी ब्रॉडकास्टर्स खासकर छोटे बिजनेस को पटरी पर लाने में मदद की जा सके।’

‘आईबीएफ’ का कहना है कि ब्रॉडकास्टिंग बिजनेस में डिमांड और सप्लाई दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। इससे न सिर्फ नकदी (cash flow) की समस्या उत्पन्न हुई है, बल्कि ‘आईबीएफ’ के कई सदस्यों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में आईबीएफ ने यह मांग भी उठाई है कि ‘विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय’ (डीएवीपी)  व राज्यों के स्वामित्व वाली अन्य इकाइयों द्वारा उनके विज्ञापन बिलों का तुरंत भुगतान किया जाए, जिससे आईबीएफ के सदस्यों के सामने नकदी की समस्या न हो।

‘आईबीएफ’ द्वारा प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर सरकार के समक्ष रखी गई मांगों को आप यहां पढ़ सकते हैं।

1- Regulatory moratorium for the sector for at least the next 18 months.
2- Phased resumption of production activities.
3- Extension of moratorium period for GST payment.
4- Mandating Digital Payments of Subscription and Advertising dues to Broadcasters.
5- Advisory to DPOs in respect of the release of payment of subscription fees for the period up to 29th Feb 2020
6- Waiver of Processing Fee and Temporary live uplinking fee for live sporting events for a period of one year from the resumption of normal business activities.
7- Increase in the time period of one year to two years for operationalization of new channels which have been granted permission.
8- Suspension of the requirement of Performance Bank Guarantees in respect of channels sought to be launched for a period of one year.
9- Waiver of Carriage Fee due to Prasar Bharati for 3 months (April, May and June) for FTA Channels on Prasar Bharati’s Free Dish Platform.
10- Deferment of payment due to Prasar Bharati for Free Dish carriage by 31 March 2020 be deferred until July 2020.
11- All pending refunds even exceeding Rs. 5 Lacs should be urgently processed.
12- The 1st instalment of advance tax (due on 15 June 2020) should be done away with and taxpayers be allowed to pay the 2nd instalment (due on 15 September 13- 2020) directly without any interest liability
13- The due date for deposit of TDS for the months of March and April 2020 should be extended to 31 May 2020 without any interest liability.
14- Extension /waiver of permission for FX payments for foreign satellite transponder hiring.
15- Lower rate of TDS from 10% to 2% on subscription revenues
16- Payment of stamp duty on agreements should be deferred up to expiry of ninety (90) days’ from the date of the lifting of nation-wide lockdown.
17- Allow discharge of GST reverse charge obligation through GST input credit rather than paying in cash.
18- Extend all existing stay of income tax demand for the next 6 months without any new hearing.

 

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न्यूज की रेटिंग जारी करने के लिए BARC ने MIB से मांगा समय, उठे सवाल

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने जब से देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल से तत्काल प्रभाव से न्यूज व्युअरशिप डेटा जारी करने के लिए कहा है

Last Modified:
Monday, 17 January, 2022
News Channel

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने जब से देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) से तत्काल प्रभाव से न्यूज व्युअरशिप डेटा जारी करने के लिए कहा है, तब से अब तक हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, BARC ने अक्टूबर 2020 से बंद पड़े न्यूज चैनल्स के दर्शकों की संख्या के आंकड़े जारी करने से पहले सूचना-प्रसारण मंत्रालय से 10 सप्ताह का समय मांगा है।

इस खबर ने प्रसारण क्षेत्र में सभी को हैरान कर दिया है कि BARC इंडिया को 10 सप्ताह के समय की आवश्यकता क्यों पड़ी है? जब वह पहले से ही न्यूज डेटा एकत्रित कर रहा है और न्यूज व आला चैनलों के लिए चार सप्ताह के औसत रोलिंग डेटा की रिपोर्टिंग की संशोधित प्रणाली के अनुसार इसका परीक्षण कर रहा है।

एक अनुभवी मीडिया व ऐडवर्टाइजिंग एग्जिक्यूटिव (जो मीडिया मेटरमेंट डोमेने विशेषज्ञ हैं) के मुताबिक,  वैसे तो काउंसिल दो सप्ताह में ही न्यूज चैनल्स के आंकड़े जारी कर सकती है, लेकिन ऐसा करने से पहले इसे कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। सबसे पहले, BARC इंडिया को संशोधित प्रारूप के बारे में सभी न्यूज व आला चैनलों से संवाद करना होगा और पुराने डेटा के उपचार पर उनकी सहमति लेनी होगी। एक बार जब इसे सहमति मिल जाती है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी चैनल नई प्रणाली से जुड़े गए हैं।

नाम न छापने की शर्त पर एग्जिक्यूटिव ने कहा, ‘उन्हें सभी ब्रॉडकास्टर्स को लिखना होगा और कई प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। यह ब्रॉडकास्टर्स और स्टेकहोल्डर्स को संरेखित (aligning) करने को लेकर को होगा। वास्तविक रेटिंग दो सप्ताह में जारी की जा सकती है, क्योंकि वे पहले से ही रोलिंग एवरेज पर काम कर रहे थे। लिहाजा रोलिंग एवरेज डेटा का परिक्षण पहले ही किया जा चुका है। BARC को अब अलग-अलग ब्रॉडकास्टर्स से सहमति लेनी होगी कि क्या पुराने डेटा को दबाया जाए या नहीं और वे अपने चैनलों के लिए वास्तव में क्या चाहते हैं। इसके बाद  वे एक साल में कौन-कौन से 15 कार्यक्रमों के बारे जानकारी चाहते हैं, ताकि उन्हें लगभग 15 कार्यक्रमों के लिए अनरोल डेटा मिल सके।

एग्जिक्यूटिव ने आगे कहा कि यह मुद्दा प्रक्रियात्मक (procedural) यानी एक प्रक्रिया के तहत चलने वाला और तकनीकी (technical) दोनों से जुड़ा हैं। लिहाजा उन्हें सभी की सहमति लेनी होगी और फिर यह देखना होगा कि हर कोई उस तंत्र का हिस्सा है। कुछ चैनल कहेंगे कि ये 15 कार्यक्रम हैं, कुछ कहेंगे कि मेरे अन्य 15 अनरोल डेटा को स्पष्ट किया जाए क्योंकि यह मैन्युअल रूप से नहीं किया जा सकता है। इसके बाद उन्हें न्यूज व अन्य आला चैनलों से पूछना पड़ेगा, जिसमें बहुत समय लगेगा क्योंकि 300-400 से अधिक चैनल हैं। एक बार जब उन्हें सभी की प्रतिक्रिया मिल जाएगी, तो वे उस डेटा को स्पष्ट कर देंगे और फिर एक ट्रायल रन करेंगे।

एक मीडिया प्रफेशनल, जो BARC इंडिया की प्रणालियों और प्रक्रियाओं से अवगत है, ने कहा कि BARC को यह समझाने की जरूरत है कि डेटा जारी करने के लिए उसे 10 सप्ताह की जरूरत क्यों है, खासकर तब, जब उसका यूजर इंटरफेस न्यूज व अन्य आला चैनलों के चार हफ्ते के रोलिंग एवरेज डेटा को जारी करने में सक्षम है।  

एग्जिक्यूटिव ने कहा कि उनके पास डेटा है और यदि यूजर इंटरफेस चार सप्ताह का रोलिंग एवरेज डेटा प्रदान कर सकता है, तो BARC में किसी को यह बताना होगा कि आप 10 सप्ताह में क्या करना चाहते हैं और सिर्फ 10 सप्ताह ही क्यों? 15 सप्ताह या 6 महीने क्यों नहीं? BARC से यह सवाल भी पूछा जाए कि 'आप 10 सप्ताह में ऐसा क्या कर सकते हैं, जो आप अभी नहीं कर सकते?' उन्होंने कहा कि हमें उन पर विश्वास करना ही है, क्योंकि डेटा तो उनके पास है और उन्होंने कहा है यूजर इंटरफेस चार सप्ताह का रोलिंग एवरेज डेटा ही जारी कर सकता है जोकि न्यूज व अन्य चैनल के डेटा की रिपोर्टिंग के लिए नया प्रारूप है।

उन्होंने यह भी कहा कि डेटा जारी करने का तकनीकी पहलू सॉफ्टवेयर को अपडेट करने और यह सुनिश्चित करने तक सीमित है कि यह बिना किसी रुकावट के काम करे। उन्होंने कहा, ‘हर दिन जब सब्सक्राइबर्स अपने BARC के यूजर इंटरफेस पर जाते हैं, तो इसका सॉफ्टवेयर भी कभी-कभी किसी अन्य सॉफ्टवेयर की तरह अपडेट करने को कहता है। इसलिए सवाल नए सॉफ्टवेयर इंस्टाल करने और टेस्ट करने को लेकर है कि क्या यह सही तरीके से काम कर रहा है? यदि सब्सक्राइबर्स जिस सिस्टम पर काम कर रहे हैं वह नया यूजर इंटरफेस को संभाल पा रहा है, तभी आगे जाना सही होगा।’

मीडिया प्रफेशनल ने कहा कि BARC को पूरे सिस्टम की अखंडता (integrity) की रक्षा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा,  ‘मीजरमेंट सिस्टम में एकमात्र यह होना चाहिए कि डेटा को सख्ती से सावधानीपूर्वक और अखंडता के साथ तैयार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि डेटा 10 सप्ताह के बाद जारी किया जाता है तो वित्तीय वर्ष और विधानसभा चुनाव दोनों ही समाप्त हो जाएंगे।  

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चर्चा में आए CM योगी के चुनाव लड़ने को लेकर आशुतोष के ये वीडियो, यूजर्स ने उठाए सवाल

यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है और सभी पार्टियों ने चुनाव के लिए कमर कस ली है।

Last Modified:
Sunday, 16 January, 2022
YOGI ADITYANATH ASHUTOSH

यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है और सभी पार्टियों ने चुनाव के लिए कमर कस ली है। इसी बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। बीजेपी ने गोरखपुर की सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उम्मीदवार बनाया है, हालांकि इससे पहले मीडिया में ये कयास लगाए जा रहे थे कि सीएम योगी अयोध्या से चुनाव लड़ सकते हैं।

दरअसल, उम्मीद ये जताई जा रही थी कि राम मंदिर निर्माण कार्य को लेकर हिंदुओं में जो उत्साह है, उसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है, लेकिन पार्टी ने सीएम योगी को उन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर से विधानसभा का टिकट दिया है, जहां से वह सांसद रहे हैं।

इसी बीच स्वतंत्र पत्रकार और ‘सत्यहिंदी’ (Satyahindi)’ नामक यूट्यूब चैनल के संपादक आशुतोष के दो वीडियो चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, दो दिन पहले ‘आशुतोष की बात‘ में उन्होंने एक चर्चा का आयोजन किया जिसका टाइटल था ‘गोरखपुर से क्यों भाग रहे हैं योगी‘।

इस चर्चा की शुरुआत में आप उन्हें यह कहते हुए सुन सकते हैं कि गोरखपुर में उनके लिए कोई सुरक्षित सीट नहीं है और आलोचकों की मानें तो वो गोरखपुर से भाग रहे हैं। आगे वो कहते हैं कि वर्तमान में धर्म और राजनीति की बुलंदी पर होते हुए भी वो गोरखपुर से क्यों नहीं लड़ रहे?

उनका ये वीडियो तब का है, जब भाजपा ने टिकट का ऐलान नहीं किया, लेकिन जैसे ही पार्टी ने ऐलान किया कि वो गोरखपुर से लड़ेंगे, तब उन्होंने एक और चर्चा का आयोजन किया और उसका टाइटल था, ‘गोरखपुर से ही क्यों लड़ेंगे योगी?’

इस वीडियो की शुरुआत में वह सवाल खड़ा करते हुए आशुतोष कह रहे हैं, ‘अब देखते हैं कि गोरखपुर उनके लिए कितनी मुफीद सीट साबित होगी‘ जबकि पहले वीडियो में वह कह रहे हैं कि इस वक्त योगी राजनीति की बुलंदी पर हैं तो वह गोरखपुर से क्यों नहीं लड़ रहे, जहां से वह पांच बार सांसद रहे?

दरअसल उनकी इन दो चर्चाओं का टाइटल देखकर लोग उनके राजनीतिक विमर्श को लेकर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं। अगर हम दो टाइटल को एक साथ देखें तो यह समझना बेहद मुश्किल हो जाता है कि जब उनके अयोध्या से लड़ने की बात उठी तो आशुतोष कह रहे हैं कि वो भाग रहे हैं और जैसे ही यह ऐलान हुआ कि वह गोरखपुर से ही लड़ रहे हैं तो चर्चा अब इस बात पर हो रही है कि वह गोरखपुर से ही क्यों लड़ रहे हैं।

आप उनके इन दोनों वीडियो को ‘सत्यहिंदी‘ के यूट्यूब चैनल के अलावा यहां भी देख सकते हैं।

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अब इस बड़े पद पर News Nation पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ (AAJTAK) से पिछले दिनों इस्तीफा देने के बाद वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र ने अपने नए सफर की शुरुआत की है।

Last Modified:
Sunday, 16 January, 2022
Vikas Mishra

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ (AAJTAK) से पिछले दिनों इस्तीफा देने के बाद वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र ने अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने अब हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज नेशन’ (News Nation) में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर जॉइन किया है।

बता दें कि गोरखपुर के मूल निवासी विकास ने करीब एक दशक पूर्व ‘आजतक’ में बतौर सीनियर प्रड्यूसर जॉइन किया था और इन दिनों डिप्टी एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। ‘आजतक’ के साथ यह उनकी दूसरी पारी थी। इससे पहले भी वह इस चैनल में करीब सवा साल तक अपनी भूमिका निभा चुके थे।

‘आईआईएमसी’ के छात्र रहे विकास मिश्र दो दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। इससे पहले वह ‘महुआ न्यूज’, ‘न्यूज 24’, ‘आजतक’ और ‘चैनल7’ (पूर्व में आईबीएन-7)  में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। प्रिंट में भी विकास ने ‘अमर उजाला’ और ‘दैनिक जागरण’ के साथ काम किया है।

समाचार4मीडिया की ओर से विकास मिश्र को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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चुनावी दौर में ABP न्यूज लाया 'मुख्यमंत्री', यह है खासियत

'मुख्यमंत्री' का प्रीमियर 60 मिनट के प्राइमटाइम शो के रूप में रविवार 16 जनवरी को रात नौ बजे किया जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 January, 2022
Last Modified:
Saturday, 15 January, 2022
Mukhyamantri

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होते ही राजनीतिक सरगर्मियां एकाएक तेज हो गई हैं। अब चूंकि चुनावों में महज कुछ ही हफ्तों का समय रह गया है, ऐसे में तमाम टीवी चैनल्स भी अपनी कवरेज में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। इन सबके बीच ‘एबीपी न्यूज’ इस चुनावी मौसम के लिए अपना प्रमुख चुनावी कार्यक्रम 'मुख्यमंत्री' शुरू करने के लिए तैयार है।

अपने पिछले अवतारों की तरह, यह शो एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत तमाम महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तियों की जीवन यात्रा को प्रमुखता से अपने दर्शकों तक पहुंचाएगा। 'मुख्यमंत्री' का प्रीमियर 60 मिनट के प्राइमटाइम शो के रूप में रविवार 16 जनवरी को रात नौ बजे होगा और उसके बाद के एपिसोड अगले कुछ हफ्तों में उसी टाइम स्लॉट के दौरान प्रसारित किए जाएंगे।

'एबीपी न्यूज' की ओर से इस शो के बारे में कहा गया है कि प्रीमियर एपिसोड में ही राजनीतिक रूप से ऐसे बड़े खिलाड़ी शामिल होंगे, जो निवर्तमान मुख्यमंत्री हैं अथवा इन चुनावों में उन्हें चुनौती देने जा रहे हैं। 'मुख्यमंत्री' का उद्देश्य केवल एक स्टोरी सुनाना नहीं है, बल्कि एक विशेष सार्वजनिक व्यक्तित्व की कहानी को चित्रित करना है, जो अपनी पहचान को और मजबूती दे रहे हैं।

'मुख्यमंत्री' एबीपी न्यूज की लोकप्रिय चुनावी प्रॉपर्टी 'कौन बनेगा मुख्यमंत्री' के तहत आता है, जो दर्शकों को भारत में व्यापक चुनावी कवरेज प्रदान करता है, जिसमें लाइव ऑन-द-ग्राउंड डिबेट, राज्य की राजनीति और इतिहास पर सावधानीपूर्वक तैयार किए गए कंटेंट, एक यात्रा वृत्तांत, ओपिनियन सर्वे, एग्जिट पोल्स, मतगणना के दिन की पूरी कवरेज आदि शामिल हैं।

'मुख्यमंत्री' की लॉन्चिंग के बारे में 'एबीपी नेटवर्क' के सीईओ अविनाश पांडेय का कहना है, ' हमें अपने चुनावी कवरेज के हिस्से के रूप में अपने व्युअर्स के लिए नई पेशकश पेश करते हुए काफी खुशी हो रही है। यह अपनी तरह का अनूठा शो है, क्योंकि इसमें लोगों से जुड़ाव की एक अलग शैली का इस्तेमाल किया गया है। हम यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि व्युअर्स इस न्यूज डॉक्यूमेंट्री स्टाइल को किस तरह लेते हैं। हालांकि, हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि दर्शकों की वरीयताओं और हमारी अनूठी कंटेंट क्रिएशन की क्षमताओं के कारण हमारा यह शो एक बार फिर लाखों लोगों की कल्पनाओं पर साकार उतरेगा और उनके दिलों पर राज करेगा।'

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ZEE बिजनेस ने दर्शकों को किया सावधान, दी ये सलाह

देश में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद भी ये जालसाज अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं

Last Modified:
Friday, 14 January, 2022
Zeebusiness4784

देश में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद भी ये जालसाज अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं और लोगों को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में फंसाकर बैंक खातों को खाली कर देते हैं। हाल ही में इसी तरह के एक मामले में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘टेलीग्राम’ पर चल रहे 'बुल रन' नाम के एक चैनल पर शिकंजा कसा है।

सेबी के मुताबिक, टेलीग्राम पर ‘बुल रन’ चलाने वाले लोग पहले खुद कुछ शेयर खरीदते थे, फिर लोगों को भ्रामक जानकारी देकर इन शेयरों को बढ़े हुए दामों में बेच देते थे। ऐसा करके चैनल से जुड़े 6 लोगों ने 2.84 करोड़ रुपए का अवैध लाभ (Unlawful Profit) कमाया है। सेबी ने इन 6 लोगों के खिलाफ ऑर्डर पास किया है।

अब इसी तरह का ही एक अन्य मामला सामने आया है, जो 'जी बिजनेस' और उसके मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी से जुड़ा है। दरअसल, शेयर बाजार में सही जगह पैसा लगाकर अमीर बनाने का सपना दिखाने वाले लोगों ने 'जी बिजनेस' और इसके मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी के नाम से टेलीग्राम पर कई चैनल बना रखे हैं, जिनमें लोगों को अलग-अलग जगह पैसा लगाने की टिप्स दिए जाते हैं। ऐसे में 'जी बिजनेस' और मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने अपने दर्शकों को सलाह दी है कि 'जी बिजनेस' या इससे जुड़े किसी भी एंकर का टेलीग्राम पर कोई भी चैनल नहीं है। इसलिए लोगों को जी बिजनेस या इससे मिलते-जुलते नाम वाले टेलीग्राम चैनलों से सावधान रहना चाहिए।

'जी बिजनेस' ने लोगों से सभी जानकारियों को केवल ऑफिशियल सोर्स से ही प्राप्त करने की सलाह दी है।

 

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‘सूर्या समाचार’ को अलविदा कह युवा पत्रकार मनोरंजन सिंह ने इस दिशा में बढ़ाए कदम

‘सूर्या समाचार’ में करीब तीन साल की अपनी पारी को विराम देने के बाद युवा पत्रकार मनोरंजन सिंह ने नए साल पर अपने नए सफर की शुरुआत की है।

Last Modified:
Friday, 14 January, 2022
Manoranjan Singh

‘सूर्या समाचार’ में करीब तीन साल की अपनी पारी को विराम देने के बाद युवा पत्रकार मनोरंजन सिंह ने नए साल पर अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने सरकारी संस्था ‘विज्ञान प्रसार‘ के तहत प्रसारित होने वाले एजुकेशनल चैनल ‘इंडिया साइंस’ की टीम में बतौर सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट जॉइन किया है।

‘सूर्या समाचार‘ से पहले मनोरंजन सिंह ‘भारत समाचार‘ न्यूज चैनल में सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। यहां चैनल की टेक्निकल टीम में करीब एक साल रहकर उन्होंने कई शो कवर किए।  

मनोरंजन सिंह को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 16 साल का अनुभव है। ‘भारत समाचार‘ से पहले वह करीब छह साल ‘पी7 न्यूज‘ में रहे, जहां देश में कई इलेक्शन कवर करने के साथ वर्ष 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स और कई रैलियां कवर कीं। इसके लिए चैनल से उन्हें अवार्ड भी मिला। इसके अलावा वह ‘स्टार न्यूज‘ में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

मूलतः बिहार के अररिया जिला के जयनगर गांव निवासी मनोरंजन दिल्ली सरकार में मान्यता प्राप्त पत्रकारों की लिस्ट में भी शामिल हैं। वह पत्रकारिता के साथ एक एनजीओ ‘नारी शक्ति संगठन’ से भी जुड़े हुए हैं। समाचार4मीडिया की ओर से मनोरंजन सिंह को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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नहीं रहे NDTV के वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान, तमाम नेताओं-पत्रकारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

दिल का दौरा पड़ने से गई जान। तमाम जाने-माने लोगों ने कमाल खान के निधन पर दुख व्‍यक्‍त करते हुए इसे पत्रकारिता जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया है।

Last Modified:
Friday, 14 January, 2022
Kamal Khan

‘एनडीटीवी’ (NDTV) के वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। कमाल खान गुरुवार को यूपी चुनाव का टीवी पर राजनीतिक विश्लेषण कर रहे थे और आज सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। करीब 61 वर्षीय कमाल खान ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

इस बारे में एनडीटीवी की ओर से जारी एक स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘आज एनडीटीवी परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है। हमारे लखनऊ ब्यूरो के दिल, अनुभवी पत्रकार कमाल खान का आज सुबह अप्रत्याशित रूप से निधन हो गया है। काम के प्रति उनके जज्बे के साथ-साथ वह एक बेहतरीन इंसान थे, जो अपनी काबिलियत से लोगों के दिलों को छू लेते थे। उनके परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदना है और हम दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।’

बता दें कि कमाल खान इन दिनों 'एनडीटीवी' के उत्तर प्रदेश ब्यूरो में कार्यकारी संपादक थे। पत्रकारिता में उनके उल्लेखनीय योगदान के मद्देनजर उन्हें तमाम प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स से नवाजा जा चुका था।पत्रकारिता के क्षेत्र में देश के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक रामनाथ गोयनका पुरस्कार के साथ उन्हें राष्ट्रपति द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार भी मिल चुका था।

कमाल खान के निधन पर तमाम पत्रकारों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुःख की घड़ी को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने कमाल खान के निधन को पत्रकारिता जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया है।

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कमाल खान के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है। कमाल खान के निधन को पत्रकारिता जगत के लिए बड़ा नुकसान बताते हुए अपने ट्वीट में आलोक मेहता ने लिखा है, ‘यह खबर काफी हैरान और दुखी करने वाली है। वह बहुत ही ईमानदार और पेशेवर पत्रकार थे। पत्रकारिता में बेहतरीन योगदान के लिए उन्हें पिछले साल एक्सचेंज4मीडिया समूह द्वारा सम्मानित किया गया था। कमाल खान का निधन पत्रकारिता के लिए बड़ा नुकसान है।’

'एबीपी न्यूज' में हेड ऑफ मार्केटिंग और एक जमाने में 'एनडीटीवी इंडिया' से जुड़े रह चुके बहुचर्चित एंकर मेहराज दुबे ने कमाल खान को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए लिखा है, 'कमाल खान एक अच्छे सहयोगी और बेहतरीन इंसान थे। किसी भी शो में उनकी उपस्थिति मात्र दर्शकों को आकर्षित करती थी। उन्होंने जो कुछ भी किया उसमें सर्वश्रेष्ठ दिया। वह बड़े दिल वाले पत्रकार थे और जीवन के अंतिम दिन तक काम करते रहे। श्रद्धांजलि।'

वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने ट्वीट किया है, ‘दुखद…बेहद दुखद..स्तब्ध करने वाली सुबह मित्र… बंधु…कमाल खान की मौत।’ 

वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश मिश्रा ने कमाल खान के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया है, 'मशहूर पत्रकार कमाल खान जी का निधन बेहद कष्टप्रद है। पत्रकारिता जगत के लिए बहुत क्षति है उनका न रहना। देर रात तक वो दायित्वों का निर्वहन करते रहे। सबसे वरिष्ठ होने के बाद भी फील्ड रिपोर्टिंग कभी नही छोड़ी। खबर पेश करने का उनका अंदाज देशभर में पत्रकारों को प्रेरित करता था। अलविदा।'

कमाल खान के निधन पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती और अन्य नेताओं ने भी दुख जाहिर किया है। सीएम योगी ने कहा कि उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना है। पत्रकारिता की यह अपूरणीय क्षति है। कमाल चौथे स्तंभ और निष्पक्ष पत्रकारिता के एक मजबूत प्रहरी थे। वहीं समाजवादी पार्टी की तरफ से ट्वीट कर शोक जताया गया है।

सपा ने लिखा- 'अत्यंत दुखद! एनडीटीवी के वरिष्ठ संवाददाता जनाब कमाल खान साहब का इंतकाल, अपूरणीय क्षति। दिवंगत आत्मा को शांति दें भगवान। शोकाकुल परिजनों के प्रति गहन संवेदना। भावभीनी श्रद्धांजलि।'

वहीं, कमाल खान के निधन पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, 'वरिष्ठ पत्रकार श्री कमाल खान जी के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। कुछ दिनों पहले ही उनसे मुलाकात के दौरान ढेर सारी बातें हुई थीं। उन्होंने पत्रकारिता में सच्चाई व जनहित जैसे मूल्यों को जिंदा रखा। श्री कमाल खान जी के परिजनों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदनाएं। विनम्र श्रद्धांजलि।'

कमाल खान के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। अपने ट्वीट में मायावती ने लिखा है, 'मायावती ने ट्वीट किया, 'एनडीटीवी से जुड़े प्रतिष्ठित व जाने-माने टीवी पत्रकार कमाल ख़ान की अचानक ही निधन के ख़बर अति-दुःखद तथा पत्रकारिता जगत की अपूर्णीय क्षति। उनके परिवार व उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत सबको इस दुःख को सहन करने की शक्ति दे, ऐसी कुदरत से कामना।'

वहीं कई अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने भी ट्वविटर के जरिए याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की-

 

 

 

 

 

 

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NBDA ने न्यूज रेटिंग प्रणाली में BARC के उठाए कदमों और MIB के फैसले का यूं किया स्वागत

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने गुरुवार को कहा है कि वह सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के हालिया रुख के साथ खड़ा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 January, 2022
Last Modified:
Thursday, 13 January, 2022
NBDA

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) ने गुरुवार को कहा है कि वह सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के हालिया रुख के साथ खड़ा है, जिसके तहत एमआईबी ने सुधार की आवश्यकता को पहचानते हुए कमियों को स्वीकार किया है और सैंपल साइज बढ़ाने व प्रणाली सुधार बढ़ाने आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

साथ ही एनबीडीए BARC इंडिया में प्रक्रियाओं, प्रोटोकॉल और निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे सुधारों की भी सराहना की। एनबीडीए ने इस बात पर भी खुशी जताई कि सरकार ने टीवी न्यूज के लिए रेटिंग प्रणाली में कमियों को स्वीकार करते हुए दिए गए सुझावों पर ध्यान दिया। साथ ही एनबीडीए ने BARC बोर्ड द्वारा स्वतंत्र सदस्यों को शामिल करने की अनुमति देने, तकनीकी समिति के पुनर्गठन, स्थायी निरीक्षण समिति की स्थापना,  जैसे फैसलों को सही दिशा में उठाए गए कदम बताया है।

बता दें कि अक्टूबर 2020 में मुंबई पुलिस द्वारा टीआरपी घोटाले का खुलासा करने के बाद, एनबीडीए ने BARC इंडिया को टीवी न्यूज रेटिंग्स जारी करने से पहले अपने सिस्टम में बड़े परिवर्तन करने की सलाह दी थी।

एनबीडीए ने कहा कि हम सेट टॉप बॉक्स से रिटर्न पाथ डेटा (आरपीडी) का लाभ उठाने की क्षमता का अध्ययन करने के लिए प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पति की अध्यक्षता में एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने के मंत्रालय के निर्णय पर ध्यान देते हैं। हम आरपीडी के महत्वपूर्ण मुद्दे पर इसके साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। हमें उम्मीद है कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि दर्शकों की संख्या को मापने के लिए एकत्र किया गया डेटा अधिक प्रामाणिक और रियल टाइम है।

एनबीडीए का मानना है कि BARC में कई सुधार किए जा रहे हैं, फिर भी सिस्टम को अधिक पारदर्शी, मजबूत और विश्वसनीय बनाने की गुंजाइश है। BARC को डेटा सुरक्षा बढ़ाने के तरीकों का भी मूल्यांकन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रेटिंग प्रक्रिया के किसी भी चरण में कोई मानवीय हस्तक्षेप न हो।

एनबीडीए ने उम्मीद जतायी है कि किसी भी रेटिंग के जारी होने से पहले, ये उपाय लागू हों। एनबीडीए ने कहा कि हम सांख्यिकीय विसंगतियों को खत्म करने और डेटा की विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए सैंपल साइज बढ़ाने के लिए बाहरी नीति को परिष्कृत करने के लिए सभी हितधारकों के साथ काम करना जारी रखेंगे। 

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न्यूज चैनल्स ने MIB के फैसले पर मनाया जश्न, रेवेन्यू में वृद्धि की जतायी उम्मीद

यह फैसला BARC की उस घोषणा के बाद आया है, जब BARC ने अपनी प्रक्रियाओं, प्रोटोकॉल, निरीक्षण तंत्र को संशोधित करने की पहल की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 January, 2022
Last Modified:
Thursday, 13 January, 2022
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देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) द्वारा न्यूज चैनल्स के लिए TRP डेटा को लंबे समय तक निलंबित करने के बाद, सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने बुधवार को न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स को तुरंत प्रभाव से जारी करने का निर्देश दिया है। यह फैसला BARC की उस घोषणा के बाद आया है, जब BARC ने अपनी प्रक्रियाओं, प्रोटोकॉल, निरीक्षण तंत्र को संशोधित करने की पहल की है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने टेलीविजन निगरानी एजेंसी BARC से न्यूज चैनल्स की बीते तीन महीने की रेटिंग मासिक आधार पर भी जारी करने को कहा है, ताकि वास्तविक रुझान को निष्पक्ष व न्यायसंगत तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।

मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, नई व्यवस्था के अंतर्गत न्यूज और विशिष्ट वर्ग के लिए रेटिंग चार सप्ताह की रोलिंग औसत परिकल्पना पर आधारित होगी।  

न्यूज जॉनर के लिए टीआरपी डेटा का ब्लैकआउट ऐसे समय में किया गया था, जब ऐडवर्टाइजर्स पहले से ही कोविड-19 से पड़ने वाले प्रभाव से निपटने में लगे हुए थे और अपने विज्ञापन बजट को कम कर रहे थे। प्रासंगिक रेटिंग के अभाव में यह न्यूज चैनल्स और ऐडवर्टाइजर्स दोनों के लिए समान रूप से एक अंधा खेल था। न्यूज चैनल्स अब ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल को डेटा जारी करने के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय के फैसले का जश्न मना रहे हैं। उम्मीद है कि उनके स्थिर ऐड रेवेन्यू में वृद्धि होगी।

हमारी सहयोगी वेबसाइट 'एक्सचेंज4मीडिया' ने इस कदम पर न्यूज ब्रॉडकास्टिंग की दुनिया के हेड से बात की और उनकी प्रतिक्रिया जानी, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-

'रिपब्लिक टीवी' (Republic TV) के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने कहा कि यह न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के लिए एक बड़ी जीत है। उन्होंने कहा, 'यह न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (NBF) के लिए एक बड़ी जीत है। मुझे खुशी है कि NBF के सदस्य इसे पूरा करने के लिए चट्टान की तरह एक साथ खड़े रहे। मुझे NBF पर बहुत गर्व है, जिसका नेतृत्व करने और सेवा करने का मुझे सबसे बड़ा सौभाग्य मिला है।'

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क (Republic Media Network) के सीईओ विकास खनचंदानी ने कहा कि न्यूज डेटा को फिर से शुरू किए जाने से इस जॉनर में विज्ञापन राजस्व में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि रिपब्लिक नेटवर्क बेहद खुश है कि रेटिंग दोबारा से शुरू हो रही है। एनबीएफ टीम और उसके सदस्य कुछ समय से सभी हितधारकों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विज्ञापनदाताओं और एजेंसी पार्टनर्स को ट्रांसपेरेंसी देना जरूरी है और डेटा का अभाव एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। रेटिंग जारी होने से उन जॉनर के ब्रैंड्स से और ज्यादा बिजनेस लाने में मदद मिलेगी, जो विज्ञापनों में काफी निवेश करते हैं।

न्यूज नेशन नेटवर्क के सेल्स एंड मार्केटिंग के प्रेजिडेंट अभय ओझा सूचना-प्रसारण मंत्रालय के फैसले को  एक स्वागत योग्य कदम बताया है, खासकर इसलिए क्योंकि यह फैसला चुनावी मौसम के दौरान आया है। उन्होंने कहा, 'न्यूज नेशन नेटवर्क ने हमेशा ही न्यूज जॉनर के लिए रेटिंग को दोबारा शुरू करने की वकालत की है, जिसे पिछले डेढ़ साल से अनुचित तरीके से रोक दिया गया था। आगामी विधानसभा चुनावों के चलते जनवरी से मार्च 2022, न केवल एडिटोरियल के लिहाज से बल्कि फाइनेंशियल की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण समय है। वार्षिक डील की योजना और रेटिंग से हमें वास्तविक ROI का आकलन करने में मदद मिलेगी, फिर चाहे वह एडिटोरियल की दृष्टि से हो या फिर सेल्स की।’

बता दें कि गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं।

TV9 नेटवर्क के सीईओ बरुण दास का कहना है, 'मैं न्यूज जॉनर के लिए रेटिंग फिर से शुरू करने के सरकार के फैसले का स्वागत करता हूं। मैं लंबे समय से निलंबन के फैसले पर सवाल उठाते हुए रेटिंग बहाल करने की आवश्यकता की वकालत कर रहा हूं। इस दिशा में एनबीएफ के प्रयास अनुकरणीय हैं। चार-सप्ताह के रोलिंग एवरेज कॉन्सेप्ट पर अब रेटिंग देने का निर्णय समय की मांग है।

उन्होंने कहा कि जहां बड़े और पुराने मीडिया हाउस ऐडवर्टाइजर्स के भरोसे और वर्षों से विकसित संबंधों के कारण डेटा ब्लैकआउट से प्रभावित नहीं हुए, वहीं डेटा ब्लैकआउट के कारण छोटे चैनलों को एक बड़ा वित्तीय खामियाजा भुगतना पड़ा है। डेटा जल्द ही जारी होने की उम्मीद के बीच इंडस्ट्री अब राहत की सांस ले रही है।

‘राइटमेन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Writemen Media Private Ltd) [यह कंपनी कन्नड़ न्यूज चैनल ‘पब्लिक टीवी’ का संचालन करती है] के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर एच.आर. रंगनाथ ने कहा, ‘वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए न्यूज रेटिंग की बहाली पूरे इंडस्ट्री के लिए पॉजिटिव संकेत है। इतनी लंबी अवधि के लिए न्यूज रेटिंग को ब्लैकआउट करना स्वीकार्य नहीं था और इसे जारी रख पाना असंभव होता जा रहा था। मुझे इंडस्ट्री के मानक को बढ़ाने वाली नई प्रणाली से काफी उम्मीदें हैं। मेरा मानना ​​​​है कि आने वाला समय पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) के लिए उत्सुक और चुनौतीपूर्ण दोनों होगा और उम्मीद है कि जारी होने वाली रेटिंग्स ब्रॉडकास्टर्स की अपेक्षाओं से मेल खाती होगी।

न्यूजफर्स्ट कन्नड़ (Newsfirst Kannada) के बिजनेस हेड दिवाकर एस. ने छोटे चैनलों के लिए खड़े होने के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय और न्यूज ब्रॉडकास्ट फेडरेशन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ‘न्यूजफर्स्ट को खुशी है कि BARC की रेटिंग आखिरकार जारी की जाएगी। हम एक साल से इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रेटिंग जारी होने के बाद हम खुद को एक महत्वपूर्ण स्थिति में देखते हैं। यह हमें ऐडवर्टाइजर्स से अधिक आत्मविश्वास के साथ संवाद करने और मार्केट में हमारे चैनल की स्थिति के बारे में अस्पष्टता को खत्म करने में भी मदद करेगा।’ वैसे संयोग से, ‘न्यूजफर्स्ट’ के लॉन्च के दो हफ्ते बाद ही रेटिंग ब्लैकआउट को खत्म कर इसे दोबारा से शुरू करने की घोषणा की गई है।

हालांकि, दिवाकर एस. न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स साप्ताहिक की जगह मासिक आधार पर जारी करने के फैसले से खुश नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम चाहते थे कि रेटिंग्स पहले की तरह साप्ताहिक आधार पर हो। ऐसा इसलिए क्योंकि साप्ताहिक रेटिंग हमें अपने पैरों पर खड़ा होने, नियमित रूप से रणनीति बनाने और साप्ताहिक युद्धाभ्यास करने में मदद करती थी। वैसे निश्चित रूप से बिना रेटिंग से तो बेहतर है मासिक रेटिंग। हम आशा करते हैं कि अब से बिना ब्रेक के, निष्पक्ष तरीके से रेटिंग दी जाएगी।’

24 न्यूज (24 news) और फ्लावर्स टीवी ग्रुप (Flowers TV Group) के सीओओ अनिल अयरूर (Anil Ayroor) ने कहा, 'यह अच्छी खबर है कि न्यूज चैनल्स की रेटिंग जारी की जाएगी। यह छोटे और मझौले चैनल्स के लिए एक पॉजिटिव कदम है, विशेष रूप से हमारे जैसे क्षेत्रीय चैनल के लिए क्योंकि यह एकमात्र मानदंड है, जो नेटवर्क के वॉल्यूम को बढ़ाएगा। NBF के सदस्य के तौर पर, हमने डेटा जारी करने के लिए लड़ाई लड़ी और अब जाकर राहत मिली कि डेटा अंततः जारी किया जा रहा है।’

हालांकि, वह टीआरपी डेटा को मासिक आधार पर जारी किए जाने के पक्ष में हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘पहले के साप्ताहिक के मुकाबले भले ही रेटिंग मासिक रूप से जारी की जाएगी, लेकिन यह इंडस्ट्री में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करेगी और हम सभी अच्छे कंटें बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि रेटिंग जिस वजह से रोकी गई थी, उसका समाधान कर लिया गया होगा। रेवेन्यू के संदर्भ में, मासिक डेटा एक अच्छा कदम है क्योंकि पूरा रेवेन्यू RODP के टर्म में आता है और सेल्स टीम अब मासिक रेटिंग पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। इसे जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स के क्षेत्र के लिए भी लागू किया जाना चाहिए।’

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मार्कंड अधिकारी ने किया न्यूज रेटिंग की वापसी का स्वागत, कही ये बात

सब ग्रुप (SAB group) के चेयरमैन व एमडी मार्कंड अधिकारी ने टेलीविजन न्यूज रेटिंग को दोबारा शुरू किए जाने का स्वागत किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 January, 2022
Last Modified:
Thursday, 13 January, 2022
markandadhikari544

टेलीविजन न्यूज रेटिंग के निलंबन के एक साल से अधिक समय के बाद ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया से न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स को बुधवार को तुरंत प्रभाव से जारी करने के लिए कहा है। टीआरपी समिति की रिपोर्ट और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिश के मद्देनजर BARC ने अपनी प्रक्रियाओं, प्रोटोकॉल, निरीक्षण तंत्र में संशोधन किया है, जिसके बाद ही मंत्रालय ने इसे हरी झंडी दी है।

'सब ग्रुप' (SAB group) के चेयरमैन व एमडी मार्कंड अधिकारी ने इस घटनाक्रम का स्वागत किया है।

उन्होंने कहा, "यह एक लोकतांत्रिक और निष्पक्ष निर्णय है और मैं इसका स्वागत करता हूं। ऐडवर्टाइजर्स को एक एक्टिव करेंसी की जरूरत होती है, लिहाजा अब इससे सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। सभी ब्रॉडकास्टर्स के प्रदर्शन के अनुसार ही यह उनकी स्थिति के साथ न्याय करेगा।

अधिकारी ने आगे कहा कि रेटिंग को एक साल तक निलंबित नहीं किया जाना चाहिए था। इससे किसी को कोई फायदा नहीं हुआ।

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