प्रसार भारती ने हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म 'Waves' लॉन्च किया है, जिसने केबल और डीटीएच ऑपरेटर्स के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो
प्रसार भारती ने हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म 'वेब्स' (Waves) लॉन्च किया है, जिसने केबल और डीटीएच ऑपरेटर्स के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
यह प्लेटफॉर्म वर्तमान में 60 से अधिक लीनियर टीवी चैनल्स की मेजबानी करता है, जिनमें प्रमुख न्यूज नेटवर्क भी शामिल हैं और इसे बिना किसी सब्सक्रिप्शन के मुफ्त में उपलब्ध कराया गया है।
हालांकि इसमें अभी तक शीर्ष चार ब्रॉडकास्टर्स के एंटरटेनमेंट चैनल शामिल नहीं हैं, फिर भी इसने केबल इंडस्ट्री में अशांति पैदा कर दी है।
'वेब्स' (Waves) पर लीनियर टीवी चैनल्स की उपलब्धता ने मौजूदा व्यवस्था को हिला दिया है। इस कदम से पारंपरिक टीवी ऑपरेटर्स ने आपत्ति जताई है, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह उनकी व्यावसायिक रणनीति को कमजोर करेगा और उनके बाजार हिस्से को और अधिक घटाएगा।
एक्सचेंज4मीडिया ने एक्सपर्ट्स की उन चिंताओं की रिपोर्ट दी है, जो Waves द्वारा लीनियर टीवी चैनल्स मुफ्त में उपलब्ध कराने को लेकर हैं।
"सब्सक्राइबर्स का बदलता रुझान
केबल और डीटीएच ऑपरेटर्स की चिंताओं की जड़ में पहले से ही प्रसार भारती के 'डीडी फ्री डिश' का दबाव है, जो मुफ्त सैटेलाइट टीवी सेवाएं प्रदान करता है और तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
नाम न बताने की शर्त पर एक ब्रॉडकास्ट एक्सपर्ट ने कहा, 'अधिकांश दर्शक अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रहे हैं, जो ऑन-डिमांड कंटेंट और अधिक लचीलापन चाहते हैं और ऐसे में पारंपरिक टीवी ऑपरेटर्स ने सब्सक्रिप्शंस में गिरावट देखी है। Waves पर टीवी चैनल्स की उपलब्धता इन चुनौतियों को और बढ़ा सकती है, क्योंकि यह उन सब्सक्राइबर्स को भी अपनी ओर खींच सकती है, जो पहले से ही डिजिटल और स्ट्रीमिंग विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।'
प्रसार भारती का ओटीटी प्लेटफॉर्म Waves अब लीनियर और ऑन-डिमांड कंटेंट का मिश्रण पेश कर रहा है, ऐसे में ऑपरेटर्स को चिंता है कि इससे ओटीटी की ओर बदलाव और तेज़ हो जाएगा, जिससे अंततः उनके सब्सक्राइबर बेस और मुनाफ़े में कमी आएगी।
केबल टीवी ऑपरेटर्स का कहना है कि ब्रॉडकास्टर्स के टीवी चैनल्स का उपयोग करके प्रसार भारती सूचना-प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्धारित डाउनलिंकिंग दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहा है। इंडस्ट्री के एक एक्सपर्ट ने कहा कि यह कदम मौजूदा नियमों के विपरीत है, जिसमें कहा गया है कि सैटेलाइट टीवी चैनल रिसेप्शन डिकोडर केवल केबल ऑपरेटर्स को ही दिए जाने चाहिए।
एक्सपर्ट ने कहा, "ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लीनियर चैनल पेश करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। यह न केवल अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है, बल्कि केबल ऑपरेटर्स के सामने आने वाली चुनौतियों को भी बढ़ाता है, जो पहले से ही हर साल ग्राहकों की संख्या में भारी कमी का सामना कर रहे हैं।"
नियमों के उल्लंघन को लेकर चिंता
इससे पहले, ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय को एक पत्र में कहा है कि प्रसार भारती ने अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लीनियर टीवी चैनल्स को शामिल करने के लिए आवेदन आमंत्रित करते समय, 2022 की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस के क्लॉज 11(3)(f) का उल्लंघन किया है।
क्लॉज 11(3)(f) के अनुसार टीवी चैनल सिग्नल रिसेप्शन डिकोडर्स केवल निम्नलिखित संस्थाओं को ही दिए जा सकते हैं:
- एमएसओ/केबल ऑपरेटर्स: जो केबल टेलीविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट 1995 के तहत पंजीकृत हैं।
- डीटीएच ऑपरेटर्स: जो भारत सरकार द्वारा जारी डीटीएच गाइडलाइंस के तहत पंजीकृत हैं।
- आईपीटीवी सेवा प्रदाता: जो मौजूदा टेलीकॉम लाइसेंस के तहत अधिकृत हैं या जिन्हें दूरसंचार विभाग द्वारा स्वीकृति मिली हुई है।
- एचआईटीएस ऑपरेटर्स: जिन्हें एचआईटीएस ऑपरेटरों के लिए मंत्रालय द्वारा जारी नीति दिशा-निर्देशों के तहत स्वीकृति दी गई है।
सितंबर में लिखे गए एक पत्र में, केबल इंडस्ट्री ने कहा था कि डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री ने पिछले 6 वर्षों में अपने सब्सक्राइबर संख्या में भारी उथल-पुथल देखी है, जिसमें 2018 में, केबल टीवी और डीटीएच इंडस्ट्री का संयुक्त सब्सक्राइबर बेस लगभग 180 मिलियन था, जो 2024 में काफी कम होकर 120 मिलियन रह गया है, जो कुल सब्सक्राइबर बेस का 33% कम है।
केबल टीवी ऑपरेटर, जैसे कि सिटी, हैथवे, डेन और जीटीपीएल, ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह प्रसार भारती को अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर निजी टीवी चैनलों को शामिल करने से रोकें। प्रसार भारती के ओटीटी प्लेटफॉर्म Waves पर फिलहाल लगभग 71 लीनियर चैनल उपलब्ध हैं।
इस मुद्दे पर एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट एक्सपर्स ने कहा, "प्रसार भारती 'प्रसार भारती एक्ट' के तहत कार्य करता है, इसलिए प्रसारक (ब्रॉडकास्टर्स) को अपने सैटेलाइट टीवी चैनल प्रसार भारती के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदान करने की अनुमति है।"
What’s on offer?
Prasar Bharati's much-anticipated OTT platform, Waves, was officially launched on Wednesday, marking the broadcaster's foray into the competitive streaming market.
Waves was launched at the 55th International Film Festival of India (IFFI) in Goa by Chief Minister Pramod Sawant, in the presence of Sanjay Jaju, Secretary, I&B Ministry.
The app has stories embracing Indian culture with an international outlook, in 12+ Languages - Hindi, English, Bengali, Marathi, Kannada, Malayalam, Telugu, Tamil, Gujarati, Punjabi, Assamese. It will be spread across 10+ Genres of Infotainment. It will provide Video on demand, free-to-play gaming, Radio streaming, Live TV streaming, 71 live Channels, several App in App integrations for video and gaming content, and online shopping through Open Network for Digital Commerce (ONDC) supported e-commerce platform.
The platform features a lineup of live channels, including entertainment networks like B4U, ABZY, SAB Group, and 9X Media, alongside major news channels such as India Today, News Nation, Republic, ABP News, News24, and NDTV India. It also offers all Doordarshan and Akashvani channels, according to sources.
However, some prominent broadcasters' channels are currently absent from the service.
क्या है खास?
प्रसार भारती के बहुप्रतीक्षित ओटीटी प्लेटफॉर्म Waves का आधिकारिक लॉन्च बुधवार को हुआ, जिससे प्रसार भारती ने प्रतिस्पर्धी स्ट्रीमिंग बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। Waves का उद्घाटन गोवा में आयोजित 55वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू की उपस्थिति में किया।
इस ऐप में भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने वाली कहानियां शामिल हैं। यह 12+ भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, मराठी, कन्नड़, मलयालम, तेलुगु, तमिल, गुजराती, पंजाबी, असमिया) में उपलब्ध है। यह 10+ शैलियों (Genres) में इन्फोटेनमेंट कंटेंट प्रदान करता है।
Waves पर मिलने वाली सेवाएं:
प्लेटफॉर्म में लाइव चैनल्स की सूची भी शामिल है, जिनमें एंटरटेनमेंट चैनल जैसे B4U, ABZY, SAB ग्रुप और 9X मीडिया हैं। प्रमुख न्यूज चैनल जैसे इंडिया टुडे, न्यूज नेशन, रिपब्लिक, एबीपी न्यूज, न्यूज24 और एनडीटीवी इंडिया भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा, इसमें सभी दूरदर्शन और आकाशवाणी चैनल शामिल हैं।
हालांकि, कुछ प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स के चैनल वर्तमान में इस सेवा में शामिल नहीं हैं।
'लिमिटेड ऑफर'
अपने लॉन्च को लेकर उत्साह के बावजूद इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स सतर्क हैं और शहरी दर्शकों के बीच इसके तात्कालिक प्रभाव को सीमित मान रहे हैं।
एक सीनियर ओटीटी एक्सपर्ट ने कहा, "यह प्लेटफॉर्म, न्यूज से जुड़े कुछ वर्गों को छोड़कर, सीमित पहुंच रखने वाला है।"
इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य पुराने जमाने की यादों को फिर से ताजा करना है, साथ ही आधुनिक डिजिटल रुझानों को अपनाते हुए क्लासिक और समकालीन कार्यक्रमों का समृद्ध मिश्रण प्रदान करना है।इसकी लाइब्रेरी में रामायण, महाभारत, शक्तिमान और हम लोग जैसे सदाबहार शोज शामिल हैं, जो उन दर्शकों को आकर्षित करते हैं जो भारत के सांस्कृतिक और भावनात्मक अतीत से जुड़ाव चाहते हैं। इसके अलावा, यह न्यू, डॉक्यूमेंट्री और रीजनल कंटेंट भी प्रदान करता है, जो समावेशिता और विविधता के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
लॉन्च के बाद मंत्रालय ने कहा था, "दूरदर्शन का ओटीटी प्लेटफॉर्म परंपरागत टीवी और आधुनिक स्ट्रीमिंग के बीच की खाई को पाटता है और अपनी दशकों पुरानी विरासत व राष्ट्रीय विश्वास का उपयोग करते हुए तकनीक-प्रेमी युवाओं और बुजुर्ग पीढ़ी दोनों तक पहुंच बनाता है।"
पहले, सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने पुष्टि की थी कि प्लेटफॉर्म का एक छोटा हिस्सा सब्सक्रिप्शन-आधारित होगा, जबकि बाकी कंटेंट देखने के लिए मुफ्त होगा।
अगस्त में, प्रसार भारती ने टीवी चैनल्स को अपने नए ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़ने का निमंत्रण दिया। यह कदम उसकी डिजिटल उपस्थिति को बढ़ाने और एक ऐसा राजस्व-साझाकरण मॉडल पेश करने का प्रतीक था, जो बाजार में विशिष्ट है।
इस मॉडल के तहत ब्रॉडकास्टर्स को विज्ञापन राजस्व का 65% मिलेगा, जबकि प्रसार भारती 35% रखेगा।
सितंबर में, एक्सचेंज4मीडिया को सूत्रों से पता चला कि प्रमुख चार टीवी नेटवर्क ने प्रसार भारती के आगामी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपने लिनियर चैनल को स्ट्रीम नहीं करने का निर्णय लिया है।
हालांकि सरकार ने आकर्षक राजस्व-साझाकरण मॉडल की पेशकश की थी, इन नेटवर्क्स ने शायद इसलिए भाग नहीं लिया क्योंकि उनकी पहले से ही अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत उपस्थिति है।
इन शीर्ष नेटवर्क्स के आवेदन न करने के बावजूद, मामले से परिचित सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया को बताया कि प्रसार भारती को विभिन्न शैलियों के 106 चैनल्स से आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 44 चैनल्स का चयन किया गया और 40 चैनल्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए सहमत हुए।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ने इंडिया टुडे तमिल (India Today Tamil) का यूट्यूब चैनल लॉन्च किया और कहा कि सच की आवाज सबसे मजबूत होनी चाहिए।
by
Samachar4media Bureau
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ने सोमवार को इंडिया टुडे तमिल (India Today Tamil) के नए यूट्यूब चैनल को लॉन्च किया। चेन्नई में आयोजित इंडिया टुडे तमिल राउंडटेबल (India Today Tamil Roundtable) के दौरान उन्होंने प्लेटफॉर्म से अपील की कि वह “सच को और मजबूती से बोलने दे।”
विजय ने राउंडटेबल का उद्घाटन ऐसे समय किया, जब उनकी टीवीके (TVK) सरकार ने सत्ता में 100 दिन पूरे किए हैं। मई में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनकी पहली मीडिया मौजूदगी भी रही। विधानसभा चुनाव में नई पार्टी टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतकर बड़ा प्रदर्शन किया और सत्तारूढ़ डीएमके को पीछे छोड़ दिया।
इंडिया टुडे तमिल राउंडटेबल में राजनीति, प्रशासन, उद्योग और मनोरंजन जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में सरकार के पहले 100 दिनों के कामकाज के साथ तमिलनाडु से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
पूर्व बीजेपी नेता के. अन्नामलाई (K Annamalai) ‘अन्नामलाई बियॉन्ड बीजेपी’ (Annamalai Beyond BJP) सत्र में अपने राजनीतिक सफर और भविष्य की योजनाओं पर बात करेंगे। वहीं खेल मंत्री आधव अर्जुन (Aadhav Arjuna) सरकार के पहले 100 दिनों की उपलब्धियों और प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे।
परिसीमन के मुद्दे पर एमडीएमके सांसद दुरई वाइको (Durai Vaiko), कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती (Praveen Chakravarty), बीजेपी नेता तमिलिसाई सौंदरराजन (Tamilisai Soundararajan) और डीएमके प्रवक्ता सलेम धरनीधरन (Salem Dharanidharan) चर्चा करेंगे।
कावेरी जल विवाद पर पीएमके सांसद अंबुमणि रामदॉस (Anbumani Ramadoss) के साथ विशेष सत्र होगा। डीएमके सांसद दयानिधि मारन (Dayanidhi Maran) भी राजनीतिक चर्चा में हिस्सा लेंगे। अभिनेता ध्रुव विक्रम (Dhruv Vikram) एक विशेष सत्र में नजर आएंगे।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) में ZEE और ZEE5 के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) कार्तिक महादेव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
by
Samachar4media Bureau
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) में ZEE और ZEE5 के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) कार्तिक महादेव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही कंपनी के साथ उनका साढ़े सात साल से ज्यादा लंबा जुड़ाव खत्म हो गया है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, वह अब संदीप मेहरोत्रा की टीम में एक नई सीनियर लीडरशिप भूमिका संभालेंगे।
महादेव सितंबर 2021 से ZEE के CMO की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान वह कंपनी के पे-टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग कारोबार के मार्केटिंग और ग्रोथ फंक्शन का नेतृत्व कर रहे थे। उनकी जिम्मेदारी में ऑडियंस बढ़ाना, कंटेंट की खोज और पहुंच को मजबूत करना और टीवी, ZEE5 समेत दूसरे डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म्स के लिए कंज्यूमर-केंद्रित रणनीति तैयार करना शामिल था।
CMO की जिम्मेदारी के साथ-साथ महादेव जून 2019 से ZEE Network के डिजिटल ग्रोथ का काम भी देख रहे थे। इस भूमिका में उन्होंने ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मार्केटिंग रणनीतियों को एक साथ लाने पर काम किया, खासकर ऐसे समय में जब दर्शकों के देखने का तरीका तेजी से बदल रहा था।
कार्तिक महादेव ने 2019 की शुरुआत में ZEEL जॉइन किया था। उन्होंने कंपनी में इंग्लिश एंटरटेनमेंट क्लस्टर के मैनेजिंग व कम्युनिकेशंस के हेड के तौर पर शुरुआत की थी। इस क्लस्टर में Zee Café, &flix और &PriveHD जैसे चैनल शामिल थे।
कुछ ही महीनों में उन्हें इंग्लिश प्रीमियम चैनल क्लस्टर के बिजनेस हेड की जिम्मेदारी दे दी गई। सितंबर 2021 तक उन्होंने इस भूमिका को संभाला और इसके बाद ZEE के बड़े मार्केटिंग फंक्शन की कमान उनके हाथ में आ गई।
अपने कार्यकाल के दौरान महादेव कंटेंट मार्केटिंग और ऑडियंस एंगेजमेंट में प्लेटफॉर्म-एग्नोस्टिक अप्रोच पर जोर देते रहे। उनका मानना रहा कि दर्शकों तक पहुंचने के लिए टीवी और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म्स को साथ लेकर चलना जरूरी है।
2024 में एक्सचेंज4मीडिया के बिजनेस लीडर रीट्रीट में भी उन्होंने टीवी की पहुंच और उसकी प्रासंगिकता पर बात की थी। साथ ही उन्होंने बदलती दर्शकों के बदलते व्यवहार के साथ ब्रॉडकास्टर्स को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत बताई थी।
ZEE से पहले महादेव Star India के साथ दो साल से ज्यादा समय तक जुड़े रहे। यहां उन्होंने स्टार स्पोर्ट्स में मार्केटिंग वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर काम किया। इस दौरान वह स्पोर्ट्स नेटवर्क की ब्रैंड रणनीति, कम्युनिकेशन और मीडिया प्लानिंग संभालते थे।
उन्होंने Khelo India School Games और Khelo India Youth Games जैसी पहलों पर भी काम किया। इससे पहले वह स्टार इंडिया में चैनल मार्केटिंग के वाइस प्रेजिडेंट के पद पर थे और Star Gold SELECT के लॉन्च से भी जुड़े रहे।
कार्तिक महादेव ने अपने करियर की शुरुआत 2005 में Cadbury India से मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर की थी। इसके बाद करीब एक दशक तक उन्होंने Cadbury और Mondelēz International में सेल्स, ब्रैंड और कैटेगरी से जुड़ी कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं।
वह भारत में Cadbury Bournvita Biscuits की ग्रोथ और उसकी लॉन्चिंग का अहम हिस्सा भी रहे।
अब ZEE और ZEE5 से उनके अलग होने के बाद उनकी अगली सीनियर लीडरशिप भूमिका को लेकर इंडस्ट्री की नजरें बनी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक, वह संदीप मेहरोत्रा की टीम में नई जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
टाइम्स ग्रुप (Times Group) से जुड़ी कंपनियों के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है।
by
Vikas Saxena
टाइम्स ग्रुप (Times Group) से जुड़ी कंपनियों के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने Bennett, Coleman & Company Limited (BCCL) से उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Times Horizon Private Limited (THPL) को 14 टीवी चैनल्स, 4 DSNG और 1 टेलीपोर्ट के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग परमिशन ट्रांसफर करने को मंजूरी दे दी है।
यह जानकारी 13 अगस्त 2026 को Entertainment Network (India) Limited (ENIL) की ओर से स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई सूचना के जरिए सामने आई। ENIL ने बताया कि उसे अपने प्रमोटर BCCL से यह अपडेट मिला है। BCCL के मुताबिक, MIB ने 12 अगस्त 2026 के पत्र के जरिए इन परमिशन के ट्रांसफर को मंजूरी दी है।
यह कदम BCCL और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी Times Horizon Private Limited के बीच प्रस्तावित Scheme of Arrangement के तहत होने वाले पुनर्गठन का हिस्सा है। ENIL ने इस प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर इससे पहले भी 26 सितंबर 2025, 5 फरवरी 2026, 19 फरवरी 2026 और 19 जून 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी थी।
ENIL ने अपनी फाइलिंग में कहा कि BCCL की ओर से मिले इस नए अपडेट को SEBI के Listing Regulations के Regulation 30 और 30A के तहत रिकॉर्ड में लिया गया है।
इस मंजूरी के तहत 14 टीवी चैनल्स, 4 DSNG और एक टेलीपोर्ट से जुड़े अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग परमिशन BCCL से Times Horizon Private Limited को ट्रांसफर किए जाएंगे। हालांकि, उपलब्ध फाइलिंग में इन 14 चैनल्स के नाम नहीं बताए गए हैं।
यह भी स्पष्ट है कि यह अपडेट ENIL के सीधे कारोबार या मालिकाना हक में बदलाव की घोषणा नहीं है। ENIL ने केवल अपने प्रमोटर BCCL और उसकी सहायक कंपनी Times Horizon के बीच प्रस्तावित पुनर्गठन से जुड़ा अपडेट एक्सचेंजों के साथ साझा किया है।
B.A.G. Films and Media Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए फंड के इस्तेमाल से जुड़ा स्टेटमेंट जारी किया है।
by
Vikas Saxena
B.A.G. Films and Media Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए फंड के इस्तेमाल से जुड़ा स्टेटमेंट जारी किया है। कंपनी ने बताया है कि फंड के इस्तेमाल में किसी तरह का कोई बदलाव या विचलन नहीं हुआ है। कंपनी ने यह जानकारी SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements (LODR) Regulations के तहत दी है।
कंपनी ने बताया कि उसने वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलने के लिए प्रेफरेंशियल बेसिस पर कुल ₹16.50 करोड़ जुटाए हैं। इसमें से ₹6.31 करोड़ की रकम 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के दौरान प्राप्त हुई। कंपनी के मुताबिक, इस फंड के इस्तेमाल को ऑडिट कमेटी ने भी रिव्यू किया है और किसी तरह का deviation या variation नहीं पाया गया है।
कंपनी के दस्तावेज के मुताबिक, कुल ₹16.50 करोड़ की रकम को तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाना है। इसमें बिजनेस के विस्तार के लिए ₹8.25 करोड़, प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए ₹4.125 करोड़ और जनरल कॉरपोरेट जरूरतों के लिए ₹4.125 करोड़ रखे गए हैं।
30 जून 2026 तक कंपनी ने कुल ₹10.19 करोड़ का इस्तेमाल कर लिया था। इसमें बिजनेस विस्तार के लिए ₹2.115 करोड़, प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए ₹4.125 करोड़ और जनरल कॉरपोरेट जरूरतों के लिए ₹3.9488 करोड़ खर्च किए गए हैं।
कंपनी के पास अभी करीब ₹6.31 करोड़ की रकम इस्तेमाल के लिए बाकी है। BAG Films ने बताया है कि इस बची हुई रकम का इस्तेमाल वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बिजनेस विस्तार और तय किए गए अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
वारंट से जुटाई गई रकम का पूरा हिसाब
कंपनी के मुताबिक, 19 मार्च 2026 को 2 करोड़ वारंट आवंटित किए गए थे। प्रत्येक वारंट को ₹8.25 की इश्यू कीमत पर इक्विटी शेयर में बदला जा सकता था। इन वारंट पर कुल इश्यू साइज का 25% यानी ₹4.125 करोड़ प्राप्त हुए।
इसके बाद 28 मार्च 2026 को 98 लाख इक्विटी शेयरों के आवंटन पर वारंट धारक से 75% की बाकी रकम के तौर पर ₹6.0638 करोड़ प्राप्त हुए।
वहीं, 27 जून 2026 को 1.02 करोड़ इक्विटी शेयरों में वारंट के कन्वर्जन के बाद 75% बैलेंस सब्सक्रिप्शन अमाउंट के रूप में ₹6.3112 करोड़ और प्राप्त हुए। इस तरह कुल रकम ₹16.50 करोड़ हो गई।
कंपनी की ओर से जारी स्टेटमेंट में साफ तौर पर कहा गया है कि फंड के इस्तेमाल में कोई deviation या variation नहीं हुआ है। ऑडिट कमेटी ने भी अपनी समीक्षा में इस बात की पुष्टि की है।
इसका मतलब है कि BAG Films ने फंड जुटाने के समय जिन उद्देश्यों के लिए रकम तय की थी, उसी के मुताबिक उसका इस्तेमाल किया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि बची हुई रकम का इस्तेमाल वित्त वर्ष 2026-27 में किया जाएगा।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) ने तमिल जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) के तौर पर अपने नए चैनल ‘Sony VIZHA’ के नाम और पहचान का ऐलान किया है।
by
Samachar4media Bureau
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) ने तमिल जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) के तौर पर अपने नए चैनल ‘Sony VIZHA’ के नाम और पहचान का ऐलान किया है। यह चैनल अक्टूबर 2026 में लॉन्च होगा। इसके साथ ही SPNI ने तमिल एंटरटेनमेंट सेक्टर में अपनी एंट्री की है। चैनल की क्रिएटिव सोच तमिल संस्कृति, भावनाओं, भाषा और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से गहराई से जुड़ी होगी।
‘Sony VIZHA’ के तहत ओरिजिनल फिक्शन, ग्लोबल रियलिटी फॉर्मेट्स, फिल्मों और बड़े मनोरंजन कार्यक्रमों को शामिल किया जाएगा। इन कार्यक्रमों को टेलीविजन और डिजिटल, दोनों प्लेटफॉर्म के लिए तैयार किया जाएगा। चैनल का उद्देश्य ऐसा कंटेंट पेश करना है, जो तमिल परिवारों को अपनी लगे और साथ ही अपनी व्यापक सोच और प्रस्तुति के जरिए बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच सके।
स्वतंत्रता दिवस पर हुआ नाम और लोगो का ऐलान: ‘Sony VIZHA’ के नाम और लोगो का ऐलान स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों द्वारा प्रस्तुत ‘तमिझ थाई वाझ्थु’ की प्रस्तुति के जरिए किया गया। तमिलनाडु में इसका विशेष महत्व है और राज्य में महत्वपूर्ण आयोजनों की शुरुआत में इसे गाया जाता है।
इस प्रस्तुति में तमिल गौरव के हर दिशा में खुशबू की तरह फैलने की भावना को ‘Sony VIZHA’ के वादे की प्रेरणा बताया गया। चैनल की कहानियां तमिलनाडु की मिट्टी से जुड़ी होंगी और उनमें यहां के लोगों की गर्मजोशी, यादें, आकांक्षाएं और सांस्कृतिक आत्मविश्वास दिखाई देगा। साथ ही इन्हें ऐसी प्रोडक्शन वैल्यू और भावनात्मक गहराई के साथ तैयार किया जाएगा, जिससे ये कहानियां व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकें।
‘विझा’ का मतलब है उत्सव: तमिल भाषा में ‘विझा’ का अर्थ उत्सव या त्योहार होता है। चैनल का नाम भी इसी भावना को दर्शाता है। ‘Sony VIZHA’ के जरिए तमिल कहानियों, प्रतिभा, संगीत, परिवार, आकांक्षाओं और लोकप्रिय मनोरंजन का जश्न मनाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाना है।
चैनल के लोगो में पीले और इलेक्ट्रिक ब्लू रंगों का इस्तेमाल किया गया है। पीला रंग तमिलनाडु में उत्सव से जुड़े रंगों से प्रेरित है, जिनमें हल्दी और गेंदे का फूल शामिल हैं। वहीं इलेक्ट्रिक ब्लू रंग ब्रैंड की पहचान को नया, आधुनिक और प्रीमियम रूप देता है। यह पहचान सांस्कृतिक रूप से जुड़ी, भावनात्मक रूप से प्रासंगिक और वैश्विक दृष्टि वाली ब्रैंड के तौर पर ‘Sony VIZHA’ को पेश करती है।
‘तमिल मनोरंजन में दिल से कदम रख रहे हैं’: सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के चीफ कंटेंट ऑफिसर (साउथ रीजनल) राजारमन सुंदरम ने कहा कि ‘Sony VIZHA’ के साथ कंपनी तमिल मनोरंजन की दुनिया में एक भावनात्मक कदम रख रही है। उनके मुताबिक तमिल बाजार की समृद्ध रचनात्मक विरासत, अभिव्यक्ति से भरपूर भाषा और ऐसे दर्शक हैं, जिन्होंने हमेशा भावनाओं, ईमानदारी और सांस्कृतिक गौरव से जुड़ी कहानियों को अपनाया है।
उन्होंने कहा कि SPNI इस क्षेत्र में विनम्रता, सम्मान और कुछ सार्थक जोड़ने की ईमानदार इच्छा के साथ आ रहा है। कंपनी ऐसी प्रीमियम कहानियां तैयार करना चाहती है, जो दर्शकों को अपने घर और आसपास की दुनिया से जुड़ी महसूस हों और नई पीढ़ी के तमिल दर्शकों के आत्मविश्वास और जिज्ञासा को भी सामने लाएं।
राजारमन सुंदरम के मुताबिक नई पीढ़ी के दर्शक ज्यादा तेज, ज्यादा समझदार, ज्यादा मजेदार और घर की चारदीवारी से बाहर की दुनिया को देखने से नहीं हिचकने वाले हैं। ऐसे में चैनल इन कहानियों को बड़े स्तर, बेहतर क्राफ्ट और महत्वाकांक्षी प्रोडक्शन के साथ पेश करना चाहता है, ताकि वे व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकें।
उन्होंने कहा कि ‘तमिझ थाई वाझ्थु’ तमिल गौरव के हर दिशा में फैलने की भावना को खूबसूरती से व्यक्त करता है और यही भावना ‘Sony VIZHA’ के पीछे भी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि नाम और लोगो का ऐलान कृतज्ञता के साथ किया गया है और चैनल को अक्टूबर में दर्शकों के सामने लाने की तैयारी है।
टेलीविजन रेटिंग्स को लेकर लंबे समय से चल रहे गतिरोध के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अब इस मामले को सुलझाने के लिए ज्यादा सीधा और रणनीतिक रुख अपनाया है।
by
Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
टेलीविजन रेटिंग्स को लेकर लंबे समय से चल रहे गतिरोध के बीच सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अब इस मामले को सुलझाने के लिए ज्यादा सीधा और रणनीतिक रुख अपनाया है। वह अलग-अलग ब्रॉडकास्टर्स या इंडस्ट्री संगठनों के बीच चल रही खींचतान में उलझने के बजाय सीधे उन मूल मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, जिनकी वजह से BARC रेटिंग्स की वापसी अटकी हुई है।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि मंत्री का फोकस किसी एक ब्रॉडकास्टर या संगठन के पक्ष में जाने के बजाय एक ऐसी रेटिंग्स व्यवस्था तैयार करने पर है, जिस पर पूरे टीवी इकोसिस्टम को भरोसा हो सके। कई इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव्स इसे ‘चाणक्य जैसी रणनीति’ बता रहे हैं, यानी धैर्य के साथ पूरे मामले को समझना और किसी दबाव में आए बिना समाधान तक पहुंचना।
एक वरिष्ठ टीवी इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि अगर यह मामला पूरी तरह इंडस्ट्री पर छोड़ दिया जाए तो अलग-अलग कंपनियों के व्यावसायिक हित सामने आते रहेंगे। किसी ब्रॉडकास्टर को एक फैसला अपने पक्ष में लग सकता है तो किसी दूसरे को दूसरा फैसला। लेकिन रेटिंग्स की करेंसी ऐसी होनी चाहिए, जिस पर पूरा इंडस्ट्री भरोसा कर सके। इसलिए मंत्री अलग-अलग पक्षों की लड़ाई में शामिल होने के बजाय मूल समस्या को सुलझाने पर ध्यान दे रहे हैं।
BARC की वापसी पर सरकार की नजर
भारत की टीवी इंडस्ट्री लंबे समय से BARC की रेटिंग्स का इंतजार कर रही है। ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां देश की प्रमुख टीवी ऑडियंस मेजरमेंट करेंसी के बिना काम कर रही हैं।
यह स्थिति ऐसे समय में बनी हुई है, जब Television Ratings Policy 2026 के लागू होने को लेकर कई सवाल हैं। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा ‘लैंडिंग पेज व्यूअरशिप’ का है।
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, अश्विनी वैष्णव BARC से जुड़े मुद्दों पर सीधे जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि वह तभी आगे का फैसला लेंगे, जब उन्हें भरोसा हो जाएगा कि पुराने विवादों और नए रेटिंग्स फ्रेमवर्क से जुड़े सभी जरूरी मुद्दों का समाधान हो चुका है।
इस रुख को इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों से समर्थन भी मिल रहा है। माना जा रहा है कि इससे मामला अलग-अलग ब्रॉडकास्टर्स और इंडस्ट्री बॉडीज के बीच बातचीत और खींचतान से निकलकर सीधे नियामकीय और तकनीकी समाधान की ओर जा सकता है।
लैंडिंग पेज बना सबसे बड़ा विवाद
BARC रेटिंग्स की वापसी में सबसे बड़ी अड़चन अभी भी लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को लेकर है।
लैंडिंग पेज को लेकर विवाद इसलिए है क्योंकि इससे टीवी ऑडियंस मेजरमेंट पर असर पड़ सकता है। सरकार की नई रेटिंग्स पॉलिसी का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रेटिंग्स वास्तविक टीवी व्यूइंग को दिखाएं और ऐसे व्यूइंग पैटर्न को रेटिंग्स में शामिल न किया जाए, जिससे ऑडियंस आंकड़े वास्तविकता से ज्यादा दिखाई दें।
इस मुद्दे पर ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री भी एकमत नहीं है।
Network18 पर लैंडिंग पेज के इस्तेमाल से जुड़े कारोबारी हित होने के कारण उसके इस व्यूअरशिप को रेटिंग्स करेंसी से बाहर रखने के प्रस्ताव पर अलग रुख होने की बात कही जा रही है। दूसरी तरफ Indian Broadcasting & Digital Foundation (IBDF), जिसमें JioStar जैसे बड़े ब्रॉडकास्टर्स शामिल हैं, संशोधित रेटिंग्स फ्रेमवर्क को लागू करने के समर्थन में है।
यही मतभेद BARC का मामला और जटिल बना रहे हैं।
एक अन्य वरिष्ठ मीडिया एग्जिक्यूटिव ने कहा कि दोनों पक्षों के अपने-अपने व्यावसायिक हित हैं। ऐसे में यह उम्मीद करना मुश्किल है कि इंडस्ट्री खुद पूरी तरह निष्पक्ष समाधान पर पहुंच जाएगी। इसलिए सरकार की भूमिका एक रेफरी जैसी हो जाती है। मौजूदा समय में वैष्णव का रुख भी कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है।
वैष्णव का संदेश साफ- पहले मुद्दे सुलझाएं
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वैष्णव ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि सरकार लंबे समय तक टीवी रेटिंग्स को रोके रखना चाहती है। उनका जोर सिर्फ इतना है कि पहले बाकी मुद्दों को सुलझाया जाए और BARC यह साबित करे कि वह नई व्यवस्था की सभी जरूरी शर्तों का पालन कर रहा है।
मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि मंत्री का रुख काफी साफ है। वह यह नहीं कह रहे हैं कि रेटिंग्स वापस नहीं आनी चाहिए। उनका कहना है कि पहले सरकार की चिंताओं का समाधान होना चाहिए। जब वह इस बात से संतुष्ट होंगे कि BARC ने सभी जरूरी शर्तों को पूरा कर लिया है, तब आगे का फैसला लिया जाएगा।
एक अन्य इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव ने इसे रणनीतिक और सोच-समझकर उठाया गया कदम बताया। उनके मुताबिक, मंत्री ने खुद को इंडस्ट्री के किसी एक पक्ष के साथ खड़ा करने के बजाय फैसला सरकार के पास रखा है और BARC से मूल समस्या का समाधान देने को कहा है।
यानी फिलहाल संदेश काफी सीधा है- BARC समाधान दे, नियमों के पालन का भरोसा दिलाए और सरकार उसके बाद अगला फैसला लेगी।
इंडस्ट्री संगठनों के बीच अलग-अलग राय
BARC का विवाद टीवी इंडस्ट्री के भीतर मौजूद मतभेदों को भी सामने लेकर आया है।
IBDF लगातार मंत्रालय के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रहा है और ऐसी रेटिंग्स व्यवस्था का समर्थन कर रहा है, जिसमें लैंडिंग पेज समेत दूसरे संभावित मापन संबंधी मुद्दों का समाधान हो।
देश के बड़े ब्रॉडकास्टिंग ग्रुप्स में शामिल JioStar भी संशोधित फ्रेमवर्क के तहत मजबूत और पारदर्शी रेटिंग्स सिस्टम को दोबारा शुरू करने के पक्ष में है।
दूसरी ओर, Network18 का लैंडिंग पेज के मुद्दे पर अलग रुख होने की बात कही जा रही है। इसकी एक वजह यह भी है कि नई रेटिंग्स व्यवस्था का असर हर ब्रॉडकास्टर के कारोबार पर एक जैसा नहीं होगा।
इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि अलग-अलग बिजनेस मॉडल और लैंडिंग पेज से जुड़े अलग-अलग कारोबारी हितों के कारण ब्रॉडकास्टर्स के बीच पूरी तरह सहमति बनना मुश्किल है।
एक इंडस्ट्री दिग्गज ने कहा कि हर ब्रॉडकास्टर अपने कारोबारी हितों की रक्षा करेगा। इसलिए सरकार को इस मामले में रेफरी की भूमिका निभानी होगी और वैष्णव फिलहाल यही करते दिखाई दे रहे हैं।
फेस्टिव सीजन से पहले बढ़ी चिंता
BARC रेटिंग्स की वापसी की जरूरत अब इसलिए भी ज्यादा महसूस की जा रही है क्योंकि इंडस्ट्री साल के दूसरे हिस्से में पहुंच चुकी है और फेस्टिव सीजन की शुरुआत होने वाली है।
टीवी ब्रॉडकास्टर्स के लिए रेटिंग्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर वे अपने विज्ञापन इन्वेंट्री की कीमत तय करते हैं, विज्ञापनदाताओं के साथ रेट पर बातचीत करते हैं और अपने कंटेंट की पहुंच और प्रभाव को साबित करते हैं।
BARC डेटा नहीं होने से विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां चैनल और प्रोग्राम के स्तर पर निवेश को लेकर जरूरी बेंचमार्क से वंचित हैं। वहीं ब्रॉडकास्टर्स के लिए भी यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि कौन सा प्रोग्राम या कंटेंट बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
एक इंडस्ट्री सूत्र ने कहा कि टीवी इंडस्ट्री कुछ समय तक रेटिंग्स के बिना चल सकती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना मुश्किल है। विज्ञापनदाताओं को एक भरोसेमंद करेंसी चाहिए, ब्रॉडकास्टर्स को बेंचमार्क और एजेंसियों को फैसले लेने के लिए डेटा चाहिए। हर कोई BARC की वापसी चाहता है, लेकिन रेटिंग्स ऐसी व्यवस्था के साथ वापस आनी चाहिए, जो सरकार की नियामकीय चिंताओं को भी दूर करे।
‘अब इंडस्ट्री को आपस में लड़ने की जरूरत नहीं’
इंडस्ट्री में अब यह उम्मीद बढ़ रही है कि सरकार अलग-अलग ब्रॉडकास्टर्स और संगठनों की राय के बीच फैसला करने के बजाय पूरे मामले को नियामकीय और तकनीकी नजरिए से देखेगी।
एक वरिष्ठ इंडस्ट्री लीडर के मुताबिक, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्री इस मुद्दे को अलग-अलग इंडस्ट्री बॉडीज के बीच राजनीतिक या कारोबारी मुकाबला नहीं बनने दे रहे हैं। वह यह देख रहे हैं कि रेटिंग्स देने वाली संस्था ने सरकार की तय शर्तों को पूरा किया है या नहीं। इससे समाधान का रास्ता ज्यादा साफ हो सकता है।
एक अन्य एग्जिक्यूटिव ने कहा कि अब इंडस्ट्री की तरफ से बहुत कुछ किया जाना बाकी नहीं है। सभी पक्ष अपनी बात सरकार के सामने रख चुके हैं। अब BARC की जिम्मेदारी है कि वह सरकार की चिंताओं का सही जवाब दे और जरूरी बदलावों को पूरा करे।
अब गेंद BARC के पाले में
फिलहाल टीवी इंडस्ट्री की नजरें BARC और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
अश्विनी वैष्णव ने जिस तरह अलग-अलग इंडस्ट्री गुटों के बीच चल रही खींचतान से खुद को अलग रखते हुए सीधे मूल मुद्दों पर ध्यान दिया है, उससे साफ है कि सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय ऐसी व्यवस्था चाहती है, जिस पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके।
अब BARC को सरकार की चिंताओं का समाधान देना होगा और यह साबित करना होगा कि वह नई रेटिंग्स पॉलिसी के मुताबिक काम करने के लिए तैयार है।
इसके बाद ही सरकार अगला कदम उठाएगी।
यानी फिलहाल गेंद पूरी तरह BARC के पाले में है। टीवी इंडस्ट्री को उम्मीद है कि जब रेटिंग्स वापस आएंगी तो वे सिर्फ दोबारा शुरू नहीं होंगी, बल्कि एक ऐसी भरोसेमंद, पारदर्शी और टिकाऊ व्यवस्था के साथ लौटेंगी, जिसे ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां सभी स्वीकार कर सकें।
B.A.G. Films and Media Limited ने चंदन कुमार जैन को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने का फैसला किया है।
by
Vikas Saxena
B.A.G. Films and Media Limited ने चंदन कुमार जैन को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने का फैसला किया है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 13 अगस्त 2026 को हुई बैठक में उनकी दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दी। हालांकि, इसके लिए कंपनी के सदस्यों की मंजूरी भी जरूरी होगी।
कंपनी के मुताबिक, चंदन कुमार जैन को 30 मई 2027 से 29 मई 2032 तक पांच लगातार वर्षों के दूसरे कार्यकाल के लिए स्वतंत्र निदेशक के तौर पर नियुक्त किया गया है। वह इस पद से तय अवधि के दौरान बारी-बारी से सेवानिवृत्त होने के नियम के तहत नहीं आएंगे।
उनकी दोबारा नियुक्ति का फैसला कंपनी की नामांकन और पारिश्रमिक समिति की सिफारिश के आधार पर लिया गया है। अब इस नियुक्ति को मंजूरी देने के लिए कंपनी की 33वीं सालाना आम बैठक में विशेष प्रस्ताव लाया जाएगा। कंपनी की यह बैठक 17 सितंबर 2026 को होगी।
जानिए, कौन हैं चंदन कुमार जैन
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 64 वर्षीय चंदन कुमार जैन सेवानिवृत्त भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी हैं और दिल्ली में वकालत करते हैं। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी की है।
उन्होंने वर्ष 1985 में एक राष्ट्रीयकृत बैंक में परिवीक्षाधीन अधिकारी के तौर पर अपना पेशेवर करियर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) में ग्रेड ‘A’ अधिकारी के तौर पर कुछ वर्षों तक काम किया।
वर्ष 1990 में चंदन कुमार जैन केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क विभाग में शामिल हुए। यह विभाग वित्त मंत्रालय के अधीन केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) के तहत काम करता था।
इसके बाद उन्होंने आयकर विभाग में करीब 30 साल तक सेवाएं दीं। वह संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
कंपनी के अनुसार, चंदन कुमार जैन को आयकर, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, कंपनी कानून और संचार कानून के क्षेत्र में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है।
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि चंदन कुमार जैन का कंपनी के किसी मौजूदा निदेशक, प्रवर्तक या प्रमुख प्रबंधकीय पदाधिकारी के साथ कोई संबंध नहीं है। यह जानकारी कंपनी कानून, 2013 और सेबी के लिस्टिंग नियमों में दी गई परिभाषा के आधार पर दी गई है।
इस तरह B.A.G. Films में चंदन कुमार जैन का स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरा कार्यकाल 30 मई 2027 से शुरू होकर 29 मई 2032 तक रहेगा, बशर्ते कंपनी के सदस्य आगामी सालाना आम बैठक में विशेष प्रस्ताव के जरिए उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दें।
न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) के अंग्रेजी न्यूज चैनल NDTV 24x7 का नाम बदलकर अब NDTV किया जाएगा।
by
Vikas Saxena
न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) के अंग्रेजी न्यूज चैनल NDTV 24x7 का नाम बदलकर अब NDTV किया जाएगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने चैनल का नाम और लोगो बदलने की मंजूरी दे दी है।
कंपनी ने 14 अगस्त 2026 को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 13 अगस्त 2026 को भेजे अपने पत्र के जरिए इस बदलाव की अनुमति दी है।
मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब कंपनी के अंग्रेजी न्यूज चैनल का नाम NDTV 24x7 से बदलकर NDTV हो जाएगा। इसके साथ ही चैनल का लोगो भी बदला जाएगा।
15 अगस्त शाम 7 बजे से नए नाम से प्रसारण
कंपनी के मुताबिक, यह बदलाव 15 अगस्त, या यूं कहें कि आज की शाम 7 बजे से प्रभावी होगा यानी 15 अगस्त को शाम 7 बजे के बाद चैनल NDTV 24x7 के बजाय NDTV नाम से संचालित होगा।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा है कि मंत्रालय से मिली मंजूरी के बाद चैनल नए नाम के तहत काम करेगा।
इस तरह NDTV के अंग्रेजी न्यूज चैनल के नाम में करीब एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। अब दर्शकों को NDTV 24x7 की जगह सिर्फ NDTV नाम दिखाई देगा और चैनल नए लोगो के साथ प्रसारित होगा।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के टीवी चैनलों के लिए मौजूदा 10+2 विज्ञापन सीमा को खत्म करने के फैसले का स्वागत किया है।
by
Samachar4media Bureau
इमरान फजनल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के टीवी चैनलों के लिए मौजूदा 10+2 विज्ञापन सीमा को खत्म करने के फैसले का स्वागत किया है। IBDF ने इसे एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील नीतिगत कदम बताया है। फाउंडेशन का कहना है कि इस फैसले से ब्रॉडकास्टर्स को विज्ञापन के मामले में ज्यादा लचीलापन मिलेगा।
यह घटनाक्रम ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के अलग-अलग संगठनों की ओर से सरकार के सामने लगातार की जा रही मांगों के बाद आया है। इंडस्ट्री लंबे समय से मौजूदा विज्ञापन व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रही थी।
सरकार के इस फैसले से विज्ञापन सीमा में सीमित या चरणबद्ध राहत देने के बजाय टेलीविजन विज्ञापन व्यवस्था ज्यादा बाजार आधारित होने की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। इंडस्ट्री के हितधारकों ने पहले विज्ञापन के लिए तय समय को बढ़ाकर एक घंटे में 15 मिनट करने से लेकर विज्ञापन की अवधि का फैसला पूरी तरह बाजार की ताकतों पर छोड़ने तक के विकल्प सुझाए थे।
बदलते मीडिया माहौल के मुताबिक विज्ञापन नियमों में बदलाव जरूरी: IBDF
एक्सचेंज4मीडिया को दिए अपने बयान में IBDF ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर सरकार और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में था और ब्रॉडकास्टर्स की ओर से इस मामले में लगातार अपनी बात रखता रहा।
फाउंडेशन ने कहा कि उसने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि मौजूदा विज्ञापन व्यवस्था ऐसे मीडिया माहौल को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, जो आज के समय से काफी अलग था। इसलिए अब इसे दोबारा देखने की जरूरत है।
IBDF ने कहा, “पिछले एक दशक में टेलीविजन का पूरा इकोसिस्टम बुनियादी तौर पर बदल गया है।” फाउंडेशन ने बताया कि आज ब्रॉडकास्टर्स को सिर्फ दूसरे टेलीविजन चैनलों से ही मुकाबला नहीं करना पड़ता, बल्कि दर्शकों का ध्यान और विज्ञापन बजट हासिल करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्ट्रीमिंग सर्विसेज और सोशल मीडिया से भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
IBDF के मुताबिक, डिजिटल प्लेटफॉर्म के पास अपनी कमर्शियल इन्वेंट्री तय करने में काफी लचीलापन है, जबकि लीनियर टेलीविजन अभी भी तय विज्ञापन नियमों के तहत काम कर रहा है।
फाउंडेशन का कहना है कि 10+2 व्यवस्था हटने से टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स के लिए ज्यादा समान अवसर वाला माहौल तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही ब्रॉडकास्टर्स बाजार की मांग और दर्शकों के बदलते व्यवहार के हिसाब से ज्यादा प्रभावी तरीके से फैसले ले सकेंगे।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पारंपरिक टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच विज्ञापन बजट हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। सरकार ने विज्ञापन व्यवस्था में बदलाव का फैसला लेने से पहले ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन एजेंसियों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत भी की थी। इसके बाद सरकार ने मौजूदा विज्ञापन सीमा को पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया।
‘रेगुलेटरी फोरबियरेंस की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव’
IBDF ने सरकार के इस फैसले को रेगुलेटरी फ्लेक्सिबिलिटी और फोरबियरेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
फाउंडेशन ने कहा कि टेलीविजन का बाजार काफी बदल चुका है। ब्रॉडकास्टर्स की लागत लगातार बढ़ रही है और उन्हें ऐसे प्लेटफॉर्म से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है, जिन पर टेलीविजन जैसी विज्ञापन सीमा लागू नहीं है।
IBDF ने कहा, “IBDF सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और माननीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करता है कि उन्होंने इंडस्ट्री की मांगों पर विचार किया और ऐसा फैसला लिया, जिससे ब्रॉडकास्टर्स को कामकाज और कमर्शियल स्तर पर ज्यादा लचीलापन मिलेगा।”
इस फैसले के बाद ब्रॉडकास्टर्स विज्ञापनदाताओं की मांग, दर्शकों के व्यवहार और अलग-अलग प्रोग्रामों की अर्थव्यवस्था के आधार पर अपनी विज्ञापन इन्वेंट्री को ज्यादा गतिशील तरीके से तय कर सकेंगे।
हालांकि, विज्ञापन सीमा खत्म होने का यह मतलब जरूरी नहीं है कि ब्रॉडकास्टर्स तुरंत विज्ञापनों की संख्या बढ़ा देंगे। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि बाजार की ताकतें खुद ही बहुत ज्यादा विज्ञापनों के खिलाफ एक संतुलन का काम करेंगी। अगर किसी चैनल पर जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दिखाए जाते हैं, तो दर्शक उस चैनल से दूर जा सकते हैं। वहीं, विज्ञापनदाता भी ऑडियंस के जुड़ाव में बदलाव के हिसाब से अपने फैसले बदल सकते हैं।
फेस्टिव विज्ञापन सीजन से पहले मिली राहत
सरकार के इस फैसले का समय ब्रॉडकास्टर्स के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि टेलीविजन इंडस्ट्री अब बेहद अहम फेस्टिव विज्ञापन सीजन में प्रवेश कर रही है।
अगस्त से दिसंबर तक का समय टेलीविजन विज्ञापन के लिए पारंपरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान ब्रॉडकास्टर्स प्रीमियम प्रोग्रामिंग, फेस्टिव स्पेशल, रियलिटी शो और बड़े एंटरटेनमेंट व स्पोर्ट्स प्रोग्रामों से ज्यादा कमाई करने की कोशिश करते हैं।
विज्ञापन की सीमा हटने से ब्रॉडकास्टर्स को विज्ञापनदाताओं के साथ कैंपेन और कमर्शियल इन्वेंट्री को लेकर बातचीत करते समय ज्यादा लचीलापन मिल सकता है।
टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए इस फैसले को ऐसे समय संभावित तौर पर रेवेन्यू बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है, जब ब्रॉडकास्टर्स को बंटी हुई ऑडियंस, बढ़ती ऑपरेशनल लागत और डिजिटल मीडिया से कड़ी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
यह फैसला इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स (ISA) की ओर से सुझाई गई एक घंटे में 15 मिनट की विज्ञापन सीमा बढ़ाने की मांग से भी आगे जाता है। वहीं, एडवर्टाइजिंग एजेंसियों एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने सरकार की ओर से विज्ञापन की अवधि तय करने के बजाय बाजार आधारित व्यवस्था की वकालत की थी। दूसरी ओर, ब्रॉडकास्टर्स पूरी तरह रेगुलेटरी फोरबियरेंस की मांग कर रहे थे।
BARC रेटिंग अब इंडस्ट्री की अगली बड़ी चिंता
10+2 विज्ञापन सीमा खत्म होने से ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री को एक बड़ी रेगुलेटरी राहत मिली है, लेकिन अब भी इंडस्ट्री की नजर टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट की बहाली पर है। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की रेटिंग दोबारा कब शुरू होगी, यह अब इंडस्ट्री की बड़ी चिंता बनी हुई है।
नई टेलीविजन रेटिंग व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रेशन पूरा होने तक MIB के निर्देश के बाद BARC ने रेटिंग जारी करना रोक रखा है। अप्रैल-जून तिमाही में सिर्फ 24वें हफ्ते तक की रेटिंग जारी की गई थी। इसके बाद रेटिंग का प्रकाशन रोक दिया गया।
फेस्टिव सीजन से पहले मौजूदा टेलीविजन रेटिंग उपलब्ध नहीं होना ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापनदाताओं दोनों के लिए बड़ी चिंता बन गया है, क्योंकि ऑडियंस मेजरमेंट मीडिया प्लानिंग, विज्ञापन इन्वेंट्री की कीमत तय करने और कैंपेन की परफॉर्मेंस जांचने के लिए बेहद जरूरी है।
इसलिए 10+2 विज्ञापन सीमा को खत्म करने के फैसले को जहां कमर्शियल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, वहीं अब इंडस्ट्री का ध्यान BARC रेटिंग की वापसी पर भी रहेगा।
ब्रॉडकास्टर्स के लिए विज्ञापन इन्वेंट्री पर ज्यादा आजादी और एक भरोसेमंद टेलीविजन रेटिंग करेंसी की बहाली, दोनों चीजें मिलकर आने वाले फेस्टिव विज्ञापन सीजन से कमाई करने की इंडस्ट्री की क्षमता पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
अब सरकार से उम्मीद है कि वह इस फैसले को लागू करने की व्यवस्था तैयार करेगी और इसे औपचारिक रूप से लागू करने के लिए जरूरी संशोधनों पर काम करेगी।
भारत की टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने टीवी चैनलों पर लागू मौजूदा 10+2 विज्ञापन सीमा को खत्म करने पर सहमति दे दी है।
by
Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत की टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने टीवी चैनलों पर लागू मौजूदा 10+2 विज्ञापन सीमा को खत्म करने पर सहमति दे दी है। इस फैसले से टीवी चैनलों को विज्ञापन दिखाने के मामले में पहले के मुकाबले ज्यादा आजादी मिल सकेगी।
ई4एम को मिली जानकारी के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (NBF) के एक प्रतिनिधिमंडल को सरकार के इस फैसले की जानकारी दी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व NBF के संस्थापक अध्यक्ष अर्नब गोस्वामी ने किया था। NBF के कई सदस्यों ने भी ई4एम से इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। हाल ही में NBA और IBDF के प्रतिनिधिमंडलों ने भी इस मुद्दे को लेकर मंत्री से मुलाकात की थी।
यह फैसला टेलीविजन विज्ञापन के नियमन को लेकर सरकार के रुख में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह ऐसे समय आया है जब ब्रॉडकास्टर्स कई सालों से सरकार से विज्ञापन के जरिए कमाई करने में ज्यादा लचीलापन देने की मांग करते रहे हैं।
NBF के प्रतिनिधिमंडल ने गोस्वामी के नेतृत्व में वैष्णव से मुलाकात कर टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स के सामने मौजूद विज्ञापन संबंधी पाबंदियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव पर चर्चा की। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन इन्वेंट्री को लेकर इस तरह की वैधानिक सीमा लागू नहीं है।
बैठक के दौरान मंत्री ने बताया कि सरकार मौजूदा विज्ञापन सीमा को खत्म करेगी। इससे ब्रॉडकास्टर्स को बाजार की स्थिति और दर्शकों के व्यवहार के आधार पर अपनी कमर्शियल इन्वेंट्री तय करने की ज्यादा आजादी मिलेगी।
इस फैसले का ब्रॉडकास्टर्स, खासकर न्यूज चैनलों की ओर से स्वागत किए जाने की उम्मीद है। न्यूज ब्रॉडकास्टर्स लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि मौजूदा व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म की तुलना में टेलीविजन को नुकसान पहुंचाती है। न्यूज चैनलों ने लाइव पत्रकारिता, लगातार न्यूज जुटाने और टेक्नोलॉजी व डिस्ट्रीब्यूशन में बढ़ते निवेश की लागत का भी मुद्दा उठाया है।
NBF लगातार रेगुलेटरी फोरबियरेंस की मांग करता रहा है। उसका कहना है कि विज्ञापन की अवधि कितनी होनी चाहिए, यह फैसला आखिरकार बाजार की ताकतों के आधार पर होना चाहिए। एसोसिएशन ने टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग की बदलती अर्थव्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म से विज्ञापन बजट हासिल करने के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा की ओर भी ध्यान दिलाया है।
यह मामला सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के पास काफी समय से विचाराधीन था। मंत्रालय मौजूदा व्यवस्था में संभावित बदलावों को लेकर ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन एजेंसियों से बातचीत कर रहा था।
हाल तक यह माना जा रहा था कि सरकार पूरी तरह से नियम खत्म करने के बजाय विज्ञापन सीमा में चरणबद्ध या सीमित राहत देने पर विचार कर रही है। इंडस्ट्री के हितधारकों ने कई विकल्प भी सुझाए थे। इनमें विज्ञापन के लिए तय समय बढ़ाना, अलग-अलग जॉनर के लिए अलग नियम लागू करना और ज्यादा लचीले रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की ओर बढ़ना शामिल था।
उदाहरण के लिए, इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स (ISA) ने विज्ञापन की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर एक घंटे के समय का 25 फीसदी करने का समर्थन किया था। इसका मतलब एक घंटे में 15 मिनट तक विज्ञापन दिखाने की अनुमति देना होता। वहीं, एडवर्टाइजिंग एजेंसियों एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने सरकार की ओर से विज्ञापन की अवधि तय करने के बजाय बाजार के आधार पर फैसला लेने की वकालत की थी।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) समेत इंडस्ट्री संगठनों के जरिए ब्रॉडकास्टर्स पूरी तरह से रेगुलेटरी फोरबियरेंस की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि अगर किसी चैनल पर विज्ञापन बहुत ज्यादा हो जाएंगे, तो दर्शक खुद दूसरे प्लेटफॉर्म या चैनल की ओर चले जाएंगे। ऐसे में बाजार अपने स्तर पर संतुलन बना लेगा।
इसलिए सरकार की ओर से विज्ञापन सीमा को पूरी तरह खत्म करने का फैसला उस सीमित राहत वाले रुख से एक बड़ा बदलाव है, जिस पर पहले चर्चा हो रही थी।
यह नीतिगत बदलाव ऐसे समय भी आया है जब मीडिया इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है। टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स अब उन्हीं विज्ञापन बजट के लिए स्ट्रीमिंग सर्विसेज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूसरे डिजिटल माध्यमों से मुकाबला कर रहे हैं। वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म के पास आम तौर पर विज्ञापनों की संख्या और उनकी प्लेसमेंट तय करने में ज्यादा लचीलापन होता है।
ब्रॉडकास्टर्स के लिए विज्ञापन सीमा हटने से अतिरिक्त विज्ञापन इन्वेंट्री उपलब्ध हो सकती है। इससे उनकी कमाई बढ़ने की संभावना भी है, खासकर ऐसे समय में जब टेलीविजन इंडस्ट्री को बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बंटी हुई ऑडियंस जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, इस फैसले के बाद दर्शकों के देखने के अनुभव और कंज्यूमर प्रोटेक्शन को लेकर भी चर्चा शुरू होने की संभावना है। विज्ञापन की सीमाएं मूल रूप से इसलिए लागू की गई थीं ताकि दर्शकों को बहुत ज्यादा कमर्शियल ब्रेक का सामना न करना पड़े और प्रोग्रामिंग और विज्ञापनों के बीच एक उचित संतुलन बना रहे।
इसलिए सरकार के इस फैसले पर विज्ञापनदाता, विज्ञापन एजेंसियां और कंज्यूमर ग्रुप भी करीब से नजर रखेंगे। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि ब्रॉडकास्टर्स मिलने वाली अतिरिक्त विज्ञापन इन्वेंट्री का इस्तेमाल किस तरह करते हैं।
वैष्णव के साथ NBF प्रतिनिधिमंडल की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि NBF लंबे समय से न्यूज ब्रॉडकास्टर्स से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता रहा है।
NBF राष्ट्रीय और क्षेत्रीय बाजारों में काम करने वाले ब्रॉडकास्टर्स का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन इससे पहले भी टेलीविजन इंडस्ट्री के सामने मौजूद रेगुलेटरी और स्ट्रक्चरल चुनौतियों को लेकर सरकार के साथ बातचीत करता रहा है। इससे पहले भी गोस्वामी के नेतृत्व में NBF के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत के ब्रॉडकास्ट न्यूज सेक्टर से जुड़े मुद्दों पर सरकार के साथ व्यापक बातचीत के दौरान वैष्णव से मुलाकात की थी।
अब विज्ञापन सीमा खत्म होने से टेलीविजन विज्ञापन व्यवस्था के ज्यादा बाजार-आधारित होने का रास्ता खुल सकता है। इसे भारत के ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में पिछले कई वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण रेगुलेटरी बदलावों में से एक माना जा सकता है।
अब इंडस्ट्री की नजर इस बात पर होगी कि सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए क्या व्यवस्था बनाती है और इसे प्रभावी करने के लिए किन नियमों में बदलाव या संशोधन किए जाते हैं। ब्रॉडकास्टर्स भी अब सरकार की ओर से इसके अमल की विस्तृत जानकारी और आगे की प्रक्रिया का इंतजार करेंगे।