REPUBLIC TV के नाम जुड़ने जा रही है एक और बड़ी उपलब्धि

मई 2017 में शुरुआत के बाद से ही व्युअरशिप के मामले में अपने जॉनर में लगातार नंबर वन रहा है यह चैनल

Last Modified:
Friday, 02 August, 2019
Arnab Goswami

वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी के अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) ने अपने विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महीने के आखिरी तक चैनल को यूके में लॉन्च करने की तैयारी है।

माना जा रहा है कि यहां पर टेस्ट ट्रांसमिशन शुरू करने से पूर्व रिपब्लिक द्वारा मीडिया रेगुलेटर ‘ऑफकॉम’ (Ofcom) की ओर से लाइसेंस क्लीयरेंस का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस लॉन्चिंग की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। बता दें कि इस चैनल की शुरुआत छह मई 2017 को हुई थी और इसके बाद से लगातार इसकी व्युअरशिप नंबर वन रही है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

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नए रूप में और जमकर रंग बिखेर रहे हैं अभिज्ञान प्रकाश

अभिज्ञान ने टीवी पत्रकारिता से इतर सोशल मीडिया पर लगातार मुद्दों को लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और उनके इस प्रयोग को काफी पसंद किया जा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
Abhigyan Prakash

मशहूर व वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिज्ञान प्रकाश ने भले ही ‘एनडीटीवी’ को अलविदा कह दिया हो, लेकिन खबरों की दुनिया से उनका मजबूत नाता बना हुआ है। ‘एनडीटीवी’ पर अप्रैल के अंत में अपना आखिरी शो करने के कुछ दिनों बाद से ही वह न्यूज चैनल ‘एबीपी’ पर नेशनल एक्सपर्ट के तौर पर विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते नजर आने लगे हैं। हिंदी व अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में मजबूत पकड़ रखने वाले अभिज्ञान ‘एबीपी’ के साथ ही ‘सीएनएन न्यूज18’ और ‘सीएनबीसी आवाज’ के जरिये राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं।

दूसरी ओर,अभिज्ञान ने टीवी पत्रकारिता से इतर सोशल मीडिया पर लगातार मुद्दों को लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और उनके इस प्रयोग को काफी पसंद किया जा रहा है। लोकसभा चुनावों के दौरान जिस तरह से उन्होंने एक शहर से दूसरे शहर घूमकर जनता की नब्ज को टटोलने का प्रयास किया, वो काबिले तारीफ है। उत्तर प्रदेश की सियासत की बारीकियां को समझने वाले चुनिंदा पत्रकारों में अभिज्ञान ने लोकसभा चुनावों के दौरान ‘यूपी से यूपी तक’ नाम की जो सीरीज की, उसमें उन्होंने मौजूदा आकलनों से हटकर बीजेपी की बड़ी जीत का दावा किया था, जो उनकी राजनैतिक परिपक्वता को भी दर्शा रहा है। अपनी सीरीज के दौरान अमेठी के चुनावों को लेकर उन्होंने राहुल की हार और स्मृति ईरानी की जीत का आकलन भी किया था, जो दर्शाता है कि वह यूपी के लोगों का मन पढ़ना बखूबी जानते हैं।  

अभिज्ञान का अपना यूट्यूब चैनल है, जहां वह सियासी विश्लेषण से लेकर हर गंभीर मुद्दे पर अपनी बेवाक राय प्रस्तुत करते हैं। पॉइंट’ शो में उन्होंने कांग्रेस के हाल से लेकर दिल्ली के प्रदूषण तक पर बात की है। अभियान प्रकाश की सबसे खास बात यह है कि वो तथ्यों वाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। वह केवल बोलने के लिए नहीं बोलते, बल्कि इसलिए बोलते हैं कि उनके पास जनता को बताने के लिए वो सबकुछ है, जो जनता सुनना चाहती है। अभियान ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक अच्छा प्रयोग किया है। वो अपनी बात को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में रखते हैं। यानी एक ही विषय पर दो अलग-अलग विडियो स्टोरी बनाते हैं। इससे पता चलता है कि अपने काम और दर्शकों की सहूलियत को लेकर वह कितने संजीदा हैं।

यूट्यूब के अलावा, अभिज्ञान ट्विटर, लिंक्डइन और फेसबुक पर भी सक्रिय हैं। फेसबुक पर उन्होंने अपने नाम से एक पेज बनाया है, जहां हर रोज कुछ न कुछ नया मिलता है। इस पेज से अब तक चार लाख के आसपास लोग जुड़ चुके हैं। इसी तरह उनके यूट्यूब चैनल से भी लगातार हजारों सबस्क्राइबर्स जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही उनकी अपनी वेबसाइट भी है।‘एनडीटीवी’ के दौर में अभिज्ञान का शो ‘मुकाबला’ इसलिए बेहद पसंद किया जाता था कि वह निष्पक्षता का दामन थामे रहते थे। उन्हें कभी किसी पार्टी पर निशाना साधते या किसी का पक्ष लेते नहीं देखा गया। उनका यही अंदाज आज भी कायम है।

दिल्ली की जहरीली हवा पर ‘अभिज्ञान का पॉइंट’ देखने के बाद आपको इसका अहसास हो जाएगा। पिछले कुछ दिनों से अभिज्ञान इस विषय को उठाये हुए हैं और केवल सिस्टम की खामियां ही नहीं गिना रहे, बल्कि लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं कि उन्हें अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम बढ़ाने चाहिए। उदाहरण के लिए, केजरीवाल सरकार की ऑड-ईवन स्कीम पर भाजपा सवाल उठा रही है। कई पत्रकारों ने भी इस स्कीम को कठघरे में खड़ा किया है, लेकिन अभिज्ञान ने इसे बेहद संतुलित तरीके से पेश किया। उन्होंने न अतिरंजित बुराई की और न बेवजह बड़ाई की। उन्होंने आंकड़ों के हवाले से बताया कि प्रदूषण कम करने को लेकर ऑड-ईवन का इतिहास अच्छा नहीं रहा है। यानी इससे दिल्ली को जहरीली हवा से मुक्ति नहीं दिलाई जा सकती। साथ ही उन्होंने इसकी अच्छाई को भी रेखांकित किया कि सड़कों पर वाहनों का बोझ कम हो जाता है, जाम जैसी स्थितियों में भी कमी आती है और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलता है।

महाराष्ट्र के सियासी संग्राम पर भी अभिज्ञान ने जोरदार और सटीक विश्लेषण किया है। करीब दो दशकों से अधिक समय से सियासी गलियों में घूमकर खबर तलाशने वाले अभिज्ञान का राजनीतिक अनुमान अमूमन गलत नहीं जाता। कई विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों पर उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई है। महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच रिश्तों में अलगाव की बात अभिज्ञान लगातार कहते रहे, जो अंतत: सही साबित हुई। ऐसे में यदि अभिज्ञान भाजपा और शिवसेना के रिश्तों के बारे में कुछ कह रहे हैं, तो फिर उसे सुना जाना चाहिए।

यदि आप अभिज्ञान की पत्रकारिता के कद्रदान हैं, तो टीवी का रिमोट बदलने के बजाय अब किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लॉग इन कर उनके साथ जुड़ सकते हैं। अभिज्ञान प्रकाश के यूट्यूब चैनल से जुड़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं। 

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NDTV के लिए बजी खतरे की घंटी, जब सामने आई ये रिपोर्ट

30 सितंबर 2019 को समाप्त हुई तिमाही और छह महीने के अन-ऑडिट वित्तीय परिणामों ने बढ़ाई चिंता

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
NDTV

मीडिया समूह ‘एनडीटीवी’ (NDTV)  की आर्थिक स्थिति इन दिनों कुछ अच्छी नहीं चल रही है। 30 सितंबर 2019 को समाप्त हुई तिमाही और छह महीनों के अन-ऑडिट (un-audit) वित्तीय परिणामों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कंपनी को कुल 10.16 करोड़ और इस अवधि में1.17 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी की जितनी संपत्ति है, उससे लगभग 88.92 करोड़ रुपए ज्यादा तो देनदारियां हो गई हैं। ‘एनडीटीवी’ की ऑडिटिंग करने वाली फर्म ‘BSR & Associates LLP’ की रिपोर्ट बताती है, ‘कंपनी के लिए यह काफी चिंता की बात है। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि अनिश्चितता की स्थिति को दूर करने के लिए कंपनी की ओर से कुछ कदम उठाए गए हैं।’

इस ब्रॉडकास्टर की वित्तीय स्थिति के बारे में सीए मनीष मल्होत्रा का कहना है, ‘कंपनी की वर्तमान संपत्ति में कमी हो रही है और पिछले तीन महीनों की बैलेंस शीट के अनुसार कंपनी की देनदारियां बढ़ी हैं। ऑपरेटिंग कॉस्ट और सैलरी बढ़ने के साथ ही कंपनी की आय में कमी के कारण इसके प्रॉफिट में कमी आई है। कंपनी ने नुकसान दर्ज किया है और यदि ऐसा जारी रहा तो कंपनी को अपनी ऑपरेशनल कॉस्ट यानी परिचालन लागत को कम करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

मल्होत्रा के अनुसार,’पिछली वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के मुकाबले इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के ग्रॉस रेवेन्यू में करीब 28 प्रतिशत की कमी आई है और इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में यह करीब 38 प्रतिशत कम है।‘ उनका कहना है, ‘इस वित्तीय वर्ष के कुलछमाही रेवेन्यू को देखें तो पिछले वित्तीय वर्ष की छमाही के मुकाबले 13388 लाख रुपए से घटकर यह 11811 लाख रुपए रह गया है।’

इससे पहले एनडीटीवी’ उस समय चर्चाओं में आया था, जब ‘भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड’ (SEBI) ने ‘एनडीटीवी’ के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर मैनेजमेंट में दो साल तक कोई भी पद लेने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही दोनों पर दो साल के लिए प्रतिभूति मार्केट (securities market) से जुड़े रहने पर भी रोक लगा दी गई थी। इनके खिलाफ व्यापारिक नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में यह कार्रवाई की गई थी। इससे पहले 14 मार्च 2018 को तीनों प्रमोटर्स- प्रणॉय रॉय, राधिका रॉय और ‘आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड’ (RRPR Holdings Pvt. Ltd) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

इस मामले में 26 अगस्त 2017 और दिसंबर 2017 को शिकायतें मिलने के बाद सेबी की ओर से मामले का जांच की गई थी। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि ‘आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड’, ‘एनडीटीवी’ के प्रमोटर्स और डायरेक्टर प्रणॉय रॉय व राधिका राय ने ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’ (सेबी) अधिनियम 1992 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही एनडीटीवी के शेयरहोल्डर्स द्वारा लोन एग्रीमेंट के बारे में दी गई जानकारी में भी नियम-कायदों का पालन नहीं किया गया है। इस बारे में ‘एनडीटीवी’ प्रमोटर प्रणॉय राय से संपर्क किया है, पर फिलहाल उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

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जब जेएनयू के छात्रों को चैनल की रिपोर्टर ने बोला, 'फाड़ कर रख देंगे'

जेएनयू में बढ़ी हुई फीस और अन्य मांगों को लेकर जेएनयू के छात्रों ने संसद तक किया था प्रोटेस्ट मार्च

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
TV Reporter

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन जेएनयू में बढ़ी हुई फीस और अन्य मांगों को लेकर जेएनयू के छात्रों ने संसद तक प्रोटेस्ट मार्च किया और उसके बाद जो पुलिस लाठीचार्ज हुआ, उसको लेकर तमाम तरह की सोशल मीडिया पोस्ट, विडियोज और मीडिया रिपोर्ट्स आप सबने देखी होंगी। ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है एक ऐसे विडियो की, जिसमें जेएनयू के छात्रों से घिरी एक टीवी रिपोर्टर गुस्से में कह रही है, 'फाड़ के रख देंगे, बदतमीजी मत करना'।

‘जी न्यूज’ की दो रिपोर्टर जब जेएनयू पहुंची थीं, तब एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। तमाम लोगों ने इस बात पर सवाल उठाए थे कि ‘जी न्यूज’ की दुश्मनी उन महिला रिपोर्टरों से निकालने की क्या जरूरत थी। जेएनयू के छात्रों को महिलाओं से सभ्य तरीके से व्यवहार करना चाहिए था लेकिन अब ऐसा ही वाकया जेएनयू के बाहर दिल्ली की सड़कों पर जेएनयू के प्रोटेस्ट मार्च के दौरान हुआ तो मामला उलट गया। इस बार ‘जी न्यूज’ के बजाय ‘सुदर्शन चैनल’ की रिपोर्टर थीं, नाम था आंचल यादव। बैटलफील्ड भी बदल गया था, वह जेएनयू केंपस नहीं था, बल्कि लुटियन जोन की दिल्ली की सड़कें थीं।

जब बाकी रिपोर्टर्स की तरह आंचल यादव भी जेएनयू प्रोटेस्ट के दौरान छात्र-छात्राओं के बीच वॉक थ्रू करने लगीं,  बाइट्स लेने लगी तो जेएनयू के छात्रों ने ‘जी न्यूज’ वाला ‘फार्मूला’ आंचल यादव पर भी आजमाया लेकिन वह भूल गए कि वो‌ चारों तरफ से पुलिस के जवानों से घिरे हैं और वह जेएनयू केंपस में भी नहीं हैं। इस दौरान आंचल यादव ने वह किया, जिसकी उम्मीद नहीं थी।  जब एक छात्र ने आंचल को बुरी तरह से झटका तो वह एकदम आपा खो बैठी और ऑन कैमरा बोली, ‘'फाड़ के रख देंगे, बदतमीजी मत करना, हम सुदर्शन न्यूज के हैं।‘

इसके बाद ‘सुदर्शन न्यूज’ ने यह क्लिप निकालकर बाकायदा एक शो बना डाला,‌ इसका नाम रखा 'पंगा मत लेना, यह सुदर्शन न्यूज है'। ‘सुदर्शन न्यूज’ के सर्वेसर्वा सुरेश चाह्वाणके ने यह विडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया और लिखा, ‘सुदर्शन के शेरनी की दहाड़ से #JNU के बदमाशों का क्या हुआ देखिये। पंगा मत लेना, सुदर्शन है।‘ इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए आंचल यादव ने दिखा, 'आपके नेतृत्व में ये दहाड़ हमेशा बरकरार रहेगी सर। इन देशद्रोहियों को इन्हीं की भाषा में जवाब देना जरूरी था।

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धर्म की वजह से महिला पत्रकार को छोड़नी पड़ी नौकरी.

सहकर्मियों के व्यवहार से परेशान होकर आखिर महिला पत्रकार ने दे दिया इस्तीफा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
Female Journalist

आए दिन की मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर एक ईसाई महिला पत्रकार ने आखिरकार अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। यह मामला पाकिस्तान का है और 38 साल की इस महिला पत्रकार का नाम गोनिला गिल है। गोनिला गिल ‘दुनिया न्यूज’ में काम करती थीं। वह लाहौर प्रेस क्लब में इकलौती पंजीकृत ईसाई पत्रकार हैं।

बताया जाता है कि गोनिला गिल ने एक मुस्लिम हुसनैन जमील से शादी की थी, लेकिन इस्लाम धर्म नहीं अपनाया था। इस बात को लेकर कार्यस्थल पर सहयोगियों द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। यही नहीं, उन्हें उनके धर्म की आस्था को लेकर अपमानित भी किया जाता था। लगातार हो रहीं इस तरह की हरकतों से परेशान होकर आखिर गोनिला गिल ने इस्तीफा दे दिया।

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न्यूज नेशन के आउटपुट हेड का इस्तीफा, कई तरह की चर्चा

पिछले हफ्ते इस्तीफा देने के बाद से ही उन्होंने ऑफिस आना भी छोड़ दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
News Nation

हिंदी टीवी न्यूज में अपनी ही गति से चल रहे चैनल ‘न्यूज नेशन’ से खबर है कि वहां आउटपुट टीम की कमान संभाल रहे वरिष्ठ पत्रकार चंद्रभान सोलंकी ने संस्थान को अलविदा कह दिया है। बताया जा रहा है कि पिछले हफ्ते इस्तीफा देने के बाद से ही उन्होंने ऑफिस आना भी छोड़ दिया है। उल्लेखनीय है कि अर्थव्यवस्था के नजरिए से मीडिया के लिए ये मुश्किल समय है, ऐसे में अधिकांश मीडिया संस्थान कॉस्ट कटिंग के रास्ते खोजने की जुगत में हैं।

बताया जा रहा है कि ‘न्यूज नेशन’ में भी एक मीटिंग के अंतर्गत घटते रेवेन्यू पर चिंता जताई गई थी। इस मीटिंग के दूसरे दिन ही चंद्रभान ने इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि उनके पास किसी और संस्थान से अच्छा ऑफर है, इसलिए उन्होंने मुश्किल समय में संस्थान को अलविदा कहना ही उचित समझा है।

वैसे इससे पहले चैनल के असाइनमेंट हेड ब्रजमोहन भी संस्थान को अलविदा कह चुके हैं। बताया ये भी जा रहा है कि शायद चैनल में कोई बड़ा फेरबदल हो सकता है, जिसके चलते पुराने लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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मुशर्रफ जैसा 'दांव' चलाया कुरैशी ने लेकिन इस भारतीय पत्रकार ने यूं कर दिया फेल

करतारपुर कॉरिडोर के पाकिस्तान में उद्घाटन कार्यक्रम को कवर करने के लिए भारत से कई मीडिया समूहों के पत्रकार गए थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
journalist

आपको याद होगा परवेज मुशर्रफ का वह आगरा दौरा, जिसमें मुशर्रफ को अटल बिहारी बाजपेयी से मिलने से पहले भारतीय मीडिया के दिग्गजों से मिलना था और वह मीटिंग शुरू हुई कि अचानक मुशर्रफ की टीम ने वह मुलाकात पाकिस्तान के चैनलों पर लाइव दिखानी शुरू कर दी और यह बात केवल मुशर्रफ को पता थी। मुशर्रफ ने भारतीय मीडिया के दिग्गजों के सामने कश्मीर को लेकर भारतीय सरकार की खामियां और ज्यादतियां गिनानी शुरू कर दीं। मुशर्रफ विदेशी मेहमान थे और बड़े ओहदे पर थे तो भारतीय पत्रकार लिहाज कर गए और सुनते रहे। लेकिन वह मुशर्रफ की चालाकी को नहीं समझ पाए और पाकिस्तान के टीवी चैनल्स ने चलाया कि भारतीय मीडिया के दिग्गज भी कश्मीर में भारतीय सरकार की ज्यादतियों को बखूबी जानते हैं, तभी मुशर्रफ की बात का विरोध नहीं किया।

मुशर्रफ का यह दांव उस वक्त पाकिस्तकान की जनता व इंटरनेशनल मीडिया में काफी तारीफें बटोर गया, लेकिन करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन कार्यक्रम में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यही दांव आजमाया, जिसे एक भारतीय पत्रकार ने फेल कर दिया।

हालांकि, यह कहानी 9 नवंबर की है और ज्यादातर पत्रकारों को पता भी चल चुकी है, लेकिन इस हफ्ते की सबसे सुपरहिट कहानी है तो samachar4media एक पत्रकार की कूटनीतिक चतुराई को देश के कोने-कोने के पत्रकारों तक पहुंचाना चाहती है, पत्रकारिता के छात्रों तक पहुंचाना चाहती है। हम जिस पत्रकार की बात कर रहे हैं, उनका नाम है संजीव त्रिवेदी जो News24 से जुड़े हैं। वह लगभग दो दशक से नेशनल मीडिया में काम कर रहे हैं और अपनी ब्रेकिंग खबरों से ज्यादा खबरों के विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं। आमतौर पर संजीव त्रिवेदी को तीसरे फ्रंट की राजनीति को कवर करने के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी को जवाब दिया, उससे तमाम राष्ट्रवादी पत्रकार भी सीख ले सकते हैं।

दरअसल हुआ यूं कि करतारपुर कॉरिडोर के पाकिस्तान में उद्घाटन कार्यक्रम को कवर करने के लिए भारत से कई मीडिया समूहों के पत्रकार वहां गए थे। उन्हें गवर्नर हाउस में ठहराया गया था कि अचानक से वहां एंट्री होती है महमूद कुरैशी की। उनका यह दौरा अप्रत्याशित था, किसी भी भारतीय पत्रकार को उसकी जानकारी नहीं थी। अचानक से कुरैशी भारत सरकार पर आरोप लगाने लगे कि वह कैसे कश्मीरियों पर ज्यादती कर रही है, सारे भारतीय पत्रकार एकदम से सकते में आ गए। एक बार तो लगा कि कई फिर से आगरा जैसा कांड ना हो जाए, क्योंकि पाकिस्तानी चैनल्स के कैमरे चालू थे।

इसी बीच संजीव त्रिवेदी ने कमान संभाल ली और तमाम सिक्योरिटी गार्ड्स से घिरे कुरैशी से उल्टा सवाल पूछ डाला कि करतारपुर कॉरिडोर के कार्यक्रम में आप खालिस्तान को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं? अचानक हुए सवाल से कुरैशी सकपका गए। संजीव त्रिवेदी ने उनके सिक्योरिटी ऑफिसर्स की टेढ़ी निगाहों के बावजूद अपने सवाल जारी रखे। कुरैशी ने उन्हें उंगली दिखाते हुए गुस्से में कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन संजीव नहीं रुके।

फाइनली कुरैशी को वहां से जाना पड़ा, लेकिन बाद में संजीव त्रिवेदी ने यह विडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया तो भारत समेत दुनिया के तमाम पत्रकारों ने इसे शेयर किया और संजीव की तारीफ की। हजारों रिट्वीट और लाइक्स संजीव को इस विडियो के लिए मिल चुके हैं।

आप भी यह विडियो यहां देख सकते हैं-

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वरिष्ठ खेल पत्रकार नीरज झा ने इस बड़े पद पर शुरू किया नया सफर

पत्रकार विधांशु कुमार के साथ मिलकर 'विराट: द मेकिंग ऑफ ए चैम्पियन' नाम से एक किताब भी लिख चुके हैं नीरज झा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Neeraj Jha

‘डिस्कवरी कम्युनिकेशंस’ (इंडिया) से एक बड़ी खबर सामने आई है। खबर ये है कि खेल पत्रकार नीरज झा ने बतौर हेड (प्रोग्रामिंग और प्रॉडक्शन) के पद पर जॉइन किया है। एक टीवी जर्नलिस्ट/शो प्रड्यूसर और लाइव स्पोर्ट ब्रॉडकास्टर के रूप में विभिन्न देशों में काम करने का नीरज झा को करीब 20 साल का अनुभव है।

‘डिस्कवरी कम्युनिकेशंस’ (इंडिया) को जॉइन करने से पहले वह करीब दो साल से फ्रीलॉन्स स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर के रूप में काम कर रहे थे। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से रेडियो और टीवी जर्नलिज्म की पढ़ाई करने वाले नीरज झा ‘Seetalk' नामक एक एनजीओ के को-फाउंडर भी रह चुके हैं।

नीरज झा ने वर्ष 2001 में अपने करियर की शुरुआत ‘TRANS WORLD INTERNATIONAL’ के साथ की थी। यहां वह ‘Zee News’ के लिए आधा घंटे का न्यूज बुलेटिन प्रड्यूस करते थे। करीब 11 महीने बाद ही उन्होंने यहां से अलविदा कहकर वर्ष 2002 में ‘ईटीवी भारत’ का दामन थाम लिया और प्रड्यूसर व प्रोग्राम एग्जिक्यूटिव के तौर पर करीब दो साल काम किया। जून 2004 में यहां से बाय बोलकर वह करेसपॉन्डेंट/एसोसिएट प्रड्यूसर के तौर पर ‘Zee News’ से जुड़ गए।

इस मीडिया संस्थान में करीब सवा साल काम करने के बाद नीरज झा ‘TAJ TV’ (Ten Sports, Ten Cricket, Ten Action)  के साथ जुड़ गए। यहां उन्होंने करीब साढ़े 12 साल लंबी पारी खेली और फिर फ्रीलॉन्स स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर के रूप में काम शुरू कर दिया। अब उन्होंने अपनी नई पारी ‘डिस्कवरी कम्युनिकेशंस’ (इंडिया) के साथ शुरू की है। नीरज झा ने खेल पत्रकार विधांशु कुमार के साथ मिलकर  'विराट: द मेकिंग ऑफ ए चैम्पियन' नाम से एक किताब भी लिखी है।

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सोशल मीडिया पर घिरे दीपक चौरसिया को कुछ यूं मिला 'अपनों' का साथ

पहले ‘#arrestdeepakchaurasia’ टॉप 10 में ट्रेंड कर रहा था, अब ‘#indiawithdeepakchaurasia’ ऊपर आ गया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 15 November, 2019
Last Modified:
Friday, 15 November, 2019
Deepak Chaurasia

पत्रकार का काम होता है झूठ की परतों में छिपे सच को सबके सामने लाना और यदि इसके लिए उसे निशाना बनाया जाए, सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ अभियान चलाया जाए तो क्या कोई पत्रकार ईमानदारी से अपना काम कर पाएगा? दीपक चौरसिया और उनके जैसे पत्रकार आज यही सवाल पूछ रहे हैं। आसाराम बापू को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने में अहम किरदार निभाने वाले चौरसिया को आसाराम बापू के समर्थकों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।

हालांकि, उन पर शाब्दिक हमले पहले भी होते रहे हैं, उनके परिवार को धमकियां भी मिली हैं, लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर इस अभियान को जबरदस्त तरीके से चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर ‘अरेस्ट दीपक चौरसिया’ ट्रेंड कर रहा है। बापू समर्थक उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। ये बात अलग है कि दीपक पर इसका कोई असर नहीं है। उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि आसाराम बापू को जेल भिजवाने के लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा तो वह इसके लिए तैयार हैं।

दरअसल, दीपक चौरसिया के खिलाफ कुछ साल पहले आसाराम बापू के एक भक्त ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले की सुनवाई के बाद एकदम से बापू समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने सोशल मीडिया पर हमले शुरू कर दिए हैं।

आसाराम समर्थकों द्वारा पूछा जा रहा है कि जब वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के खिलाफ पास्को कानून के तहत मुकदमा दर्ज है तो फिर उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा?

यह मामला उस समय का है जब दीपक ‘इंडिया न्यूज’ में थे। आरोपों के मुताबिक, टीआरपी बढ़ाने के लिए दीपक ने गुरुग्राम निवासी आसाराम के भक्त के निजी विडियो से छेड़छाड़ कर चैनल पर दिखाया। विडियो के माध्यम से परिवार की 10 वर्षीय बच्ची और उसकी ताई के चरित्र को कलंकित करने का प्रयास किया गया। यह भी कहा गया है कि इंडिया न्यूज चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम ‘सलाखें’ के प्रदर्शन में तथ्यों को तोड़मरोड़कर प्रस्तुत किया गया। कुछ आपत्तिजनक क्लिपिंग दिखाई गईं, जो कि कानूनन अपराध है। इन आरोपों के बाद दीपक के खिलाफ गुरुग्राम पुलिस ने मामला दर्ज किया, जिसकी सुनवाई के बाद एक बार फिर से चौरसिया की गिरफ्तारी की मांग उठने लगी है।

हालांकि, दीपक चौरसिया के समर्थन में भी आवाज उठ रही है। पहले ‘#arrestdeepakchaurasia’ टॉप 10 में ट्रेंड कर रहा था, अब ‘#indiawithdeepakchaurasia’ ऊपर आ गया है।

‘एनडीटीवी इंडिया’ के अखिलेश शर्मा और ‘आजतक’ के रोहित सरदाना सहित कई पत्रकारों ने दीपक के समर्थन में ट्वीट किये हैं। अखिलेश ने लिखा है, ‘वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने कई हाईप्रोफाइल मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाया है। उन्हें अपने काम के लिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए’।

वहीं, रोहित ने ट्वीट किया है, ‘पत्रकार अपना काम करता है, कानून अपना। उसके लिए घर/परिवार को धमकियां देना या सोशल मीडिया पर रोज ट्रेंड चलवा कर गालियां दिलवाना कौन सी न्याय की लड़ाई है’?

'एबीपी न्यूज' की एंकर रूबिका लियाकत ने दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी की मांग करने वालों को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे लोगों को इलाज की जरूरत है।

वहीं, 'आजतक' की मशहूर एंकर चित्रा त्रिपाठी ने भी फर्जी बाबाओं की गिरफ्तारी में मीडिया के योगदान को बताते हुए दीपक चौरसिया को समर्थन दिया है। उनका भी कहना है कि ईमानदार पत्रकारों को इस तरह निशाना बनाया जाना ठीक नहीं है।

'आजतक' के वरिष्ठ पत्रकार संजीव पालीवाल ने भी ऐसे फर्जी बाबाओं का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकारों की जरूरत पर बल दिया है। 

'टीवी9 भारतवर्ष' की सीनियर एंकर सुमैरा खान का कहना है कि पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए। यह कतई स्वीकार्य नहीं है। पत्रकार अपना काम कर रहे हैं और इस तरह उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

इधर, सोशल मीडिया पर दीपक चौरसिया के समर्थन में उतरे लोगों का कहना है कि दीपक चौरसिया ने मीडिया में अपना एक अलग मुकाम स्थापित किया है। उनकी धारधार रिपोर्टिंग और सच को खोज निकालने की लालसा की बदौलत कई ऐसे मामलों को अंजाम तक पहुंचाया जा सका है, जो शायद तारीखों के फेर में ही उलझे रहते। लिहाजा, उन्हें ऐसे मामले को लेकर निशाना बनाना पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। लोगों का यह भी कहना है कि अगर पत्रकारों को सच दिखाने के लिए गालियां और धमकियां मिलेंगी, तो फिर सच कहने का साहस कौन दिखा पाएगा? 

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हरियाणा में मंत्रियों को लेकर सही साबित हुआ इस टीवी पत्रकार का दावा

14 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह से ठीक 24 घंटे पहले कर दिया था इन नामों का खुलासा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 15 November, 2019
Last Modified:
Friday, 15 November, 2019
Journalist

हरियाणा में जब से ‘भारतीय जनता पार्टी’ (बीजेपी) और ‘जननायक जनता पार्टी’ (जेजेपी) की संयुक्त सरकार बनी थी मंत्रियों के नाम और विभागों के बंटवारे को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे थे। ऐसे में 14 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह हुआ और उससे ठीक 24 घंटे पहले एक टीवी पत्रकार ने इन कैबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के नामों का खुलासा कर दिया। ये टीवी पत्रकार हैं ‘टोटल टीवी’ के ब्यूरो चीफ विनोद लांबा। 17 दिन तक कशमकश में रहने के बाद फाइनली खट्टर-दुष्यंत की सरकार ने अपने मंत्रियों को शपथ दिलवाई। कुल 10 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, जिनमें से छह कैबिनेट और चार राज्य मंत्री हैं। अब मंत्रियों की कुल संख्या 12 हो गई है।

विनोद लांबा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में इनमें से नौ नए मंत्रियों के नाम एक दिन पहले ही लिख दिए थे। उन्होंने मंत्रियों के नाम बताए थे-अनिल विज, कंवरपाल गुर्जर, मूल चंद्र शर्मा, रणजीत सिंह चौटाला, जेपी दलाल, बनवारी लाल, ओम प्रकाश यादव, कमलेश ढांडा और संदीप सिंह।

जब मंत्रियों की शपथ से पहले नामों का खुलासा हुआ तो यही सारे नाम थे। अनिल विज को इस बार गृह मंत्रालय दिया गया है, साथ में स्वास्थ्य विभाग समेत सात विभाग दिए गए हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर को शिक्षा, वन, पर्यटन के साथ पांच विभागों दिए गए हैं। पंडित मूलचंद शर्मा को परिवहन, अवैध खनन समेत चार विभाग मिले हैं। जेपी दलाल को कृषि एवं पशुपालन समेत चार विभागों की जिम्मेदारी मिली है। पूर्व मंत्री डॉ. बनवारी लाल को इस सरकार में सहकारिता एवं एससी-बीसी कल्याण विभाग मिला है।

जो चार राज्य मंत्री बनाए गए हैं, उनमें से दो जेजेपी के और दो बीजेपी के हैं। ओम प्रकाश यादव को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, महिला विधायक कमलेश ढांडा को महिला एवं बाल विकास, अनूप धानक को श्रम एवं रोजगार और हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह को खेल विभाग दिया गया है। कैबिनेट मंत्री बनाए गए रणजीत चौटाला निर्दलीय जीतकर आए हैं।

विनोद लांबा इससे पहले ‘इंडिया न्यूज’ में स्पोर्ट्स के रिपोर्टर रहे हैं। ‘इंडिया न्यूज’ में रहने के दौरान ही कई बार उन्होंने पॉलिटिकल बीट पर भी काम किया था, फिर पूरी तरह से पॉलिटिक्स के मैदान में उतर गए। वह फिलहाल ‘टोटल टीवी’ के दिल्ली ब्यूरो चीफ के तौर पर काम कर रहे हैं  और  हरियाणा देख रहे हैं।

विनोद लांबा द्वारा अपनी फेसबुक वॉल पर 13 नवंबर को इस बारे में की गई पोस्ट का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं।

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रूबिका लियाकत ने यूं खुद को बचाया, बयां की आपबीती

अपने साथ हुई घटना को रूबिका लियाकत ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
Rubika liyaquat

आज के दौर में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बीच कई ऐसे पेमेंट ऐप भी आ गए हैं, जिनसे पेमेंट करना काफी आसान हो गया है। लेकिन, इसके साथ ही फर्जीवाड़े के मामले भी आए दिन सामने आ रहे हैं। जरा सी लापरवाही अथवा थोड़े से लालच में आकर लोग ऑनलाइन ठगी के शिकार हो जाते हैं।

पिछले दिनों ‘एबीपी न्यूज’ की एंकर रूबिका लियाकत भी इसी तरह की ठगी का शिकार होते-होते बचीं। वो तो उन्होंने समझदारी दिखाई और खुद को ठगे जाने से बचा लिया, लेकिन कई लोग इन ठगों की बातों में आ जाते हैं और अपना नुकसान करवा बैठते हैं। रूबिका की तरह लोग भी यदि थोड़ा सतर्क रहें तो वे इस तरह की ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं।

अपने साथ हुए मामले को लेकर रूबिका लियाकत ने एक ट्वीट भी किया है। इस ट्वीट में उन्होंने कहा है, मुझे एक मैसेज आया कि पेटीएम आपके पेटीएम अमाउंट को कुछ देर में होल्ड कर देगा। अपना केवाईसी  पूरा करें। पेटीएम ऑफिस का नंबर 7865027323 है। इस मैसेज के बाद 9851498982 से मुझे कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने मुझे केवाईसी के लिए एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। जब मैंने उससे इस बारे में कुछ सवाल पूछे तो उसने उनका जवाब नहीं दिया और गालियां देते हुए कॉल काट दी। मुझे उन लोगों की चिंता है, जिन्होंने यह ऐप डाउनलोड किया होगा।‘

रुबिका के ट्वीट पर कई ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इन लोगों का कहना है कि उन्हें भी इस तरह के केवाईसी को लेकर फर्जी कॉल और फर्जी मैसेज आए हैं।

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