सेमीकंडक्टर मिशन को बढ़ावा: टाटा-ASML की रणनीतिक साझेदारी

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की ASML ने भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए साझेदारी की है। धोलेरा में बनने वाली भारत की पहली 300 मिमी चिप फैब यूनिट में ASML तकनीक उपलब्ध कराएगी।

Last Modified:
Monday, 18 May, 2026
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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) और नीदरलैंड की सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट निर्माता कंपनी एएसएमएल (ASML) ने भारत में चिप निर्माण को लेकर रणनीतिक साझेदारी की है। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की नीदरलैंड यात्रा के दौरान की गई।

इस साझेदारी के तहत एएसएमएल (ASML), गुजरात के धोलेरा में बन रही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) की 300 मिमी सेमीकंडक्टर फैब यूनिट की स्थापना और संचालन में तकनीकी सहयोग देगी। यह भारत की पहली कमर्शियल सेमीकंडक्टर वेफर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट होगी।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) इस प्रोजेक्ट में करीब 91,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। समझौते के तहत फैब यूनिट में एएसएमएल (ASML) की अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनों और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये मशीनें एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं।

दोनों कंपनियां लोकल टैलेंट ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी काम करेंगी। इसके साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा ताकि लंबे समय तक फैब यूनिट का सफल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) के CEO और MD रणधीर ठाकुर (Randhir Thakur) ने कहा कि एएसएमएल (ASML) की लिथोग्राफी एक्सपर्टाइज भारत में मजबूत और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन तैयार करने में मदद करेगी।

वहीं एएसएमएल (ASML) के CEO क्रिस्टोफ फुके (Christophe Fouquet) ने कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता सेमीकंडक्टर सेक्टर वैश्विक स्तर पर बड़ी संभावनाएं रखता है और कंपनी भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है।

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यू ट्यूब का बड़ा कदम: अब डीपफेक वीडियो पर लगेगी लगाम

यूट्यूब (YouTube) ने एक नया AI टूल सभी वयस्क यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया है। यह फीचर Deepfake और AI-जनरेटेड चेहरे वाले फर्जी वीडियो पहचानने में मदद करेगा।

Last Modified:
Monday, 18 May, 2026
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इंटरनेट पर तेजी से बढ़ रहे डीपफेक (Deepfake) और फर्जी वीडियो के खतरे के बीच यूट्यूब (YouTube) ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपने “Likeness Detection Program” का दायरा बढ़ाते हुए इसे अब 18 साल से अधिक उम्र के सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध कर दिया है। इस नए फीचर की मदद से यूजर्स यह पता लगा सकेंगे कि कहीं उनकी अनुमति के बिना किसी वीडियो में उनका AI-जनरेटेड चेहरा या हमशक्ल तो इस्तेमाल नहीं किया गया है।

अगर ऐसा पाया जाता है, तो यूजर उस कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी कर सकेंगे। यूट्यूब (YouTube) का यह सिस्टम काफी हद तक उसके लोकप्रिय Content ID टूल की तरह काम करता है। फर्क सिर्फ इतना है कि जहां Content ID कॉपीराइट ऑडियो और वीडियो की पहचान करता है, वहीं नया टूल किसी व्यक्ति के चेहरे और उसकी “लाइकनेस” की पहचान करेगा।

अब तक यह सुविधा केवल बड़े क्रिएटर्स, पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों तक सीमित थी। लेकिन अब कंपनी ने इसे आम यूजर्स के लिए भी रोलआउट कर दिया है। यूट्यूब (YouTube) के प्रवक्ता जैक मैलोन (Jack Malone) के अनुसार, कंपनी चाहती है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद हर यूजर और क्रिएटर को समान सुरक्षा मिले।

हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह टूल उन वीडियो को भी पहचान सकता है जिनमें किसी व्यक्ति का असली चेहरा हो, लेकिन वे AI-जनरेटेड न हों। ऐसे मामलों में वीडियो को Privacy Policy के तहत हटाना जरूरी नहीं होगा।

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'Meta' छोड़ 'Google' पहुंचीं ऋषा मागू: संभालेंगी बड़ी जिम्मेदारी

ऋषा मागू ने Meta छोड़कर Google जॉइन किया है। वह Google में Director, Communications & Public Affairs की जिम्मेदारी संभालेंगी। उन्हें 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

Last Modified:
Saturday, 16 May, 2026
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ऋषा मागू (Risha Magu) ने टेक दिग्गज Google के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने कंपनी में Director, Communications & Public Affairs के पद पर जॉइन किया है। इससे पहले वह करीब चार वर्षों तक Meta में Director Communications - Policy & Innovation (India) के तौर पर कार्यरत थीं। ऋषा ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए इस नई शुरुआत की जानकारी साझा की। उन्होंने Meta में अपने अनुभव को “bold iteration” यानी लगातार नए प्रयोगों और बदलावों से भरा सफर बताया।

उन्होंने लिखा कि 2020 में महामारी के दौरान Facebook (अब Meta) से जुड़ने के बाद उन्होंने करीब से देखा कि Instagram क्रिएटर्स के बिजनेस और कम्युनिटीज बनाने का माध्यम बना, WhatsApp ने छोटे कारोबारियों को ग्राहकों से जोड़ने का तरीका बदला और Ray-Ban Meta Glasses जैसे इनोवेशन ने टेक्नोलॉजी को नई दिशा दी।

ऋषा ने अपने सहयोगियों, मेंटर्स और दोस्तों का आभार जताते हुए कहा कि Meta का अनुभव उनके करियर का अहम हिस्सा रहेगा। Google जॉइन करने पर उन्होंने कहा कि आज टेक्नोलॉजी जिस तेजी से लोगों की जिंदगी बदल रही है, उसमें Google जैसी कंपनियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने नई चुनौतियों और अवसरों को लेकर उत्साह भी जताया।

ऋषा मागू को कंज्यूमर टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। Meta से पहले वह HMD Global, Microsoft India और Nokia India जैसी कंपनियों में भी काम कर चुकी हैं।

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मुफ्त में नहीं मिलेगा पूरा 15GB स्टोरेज: Google ने बदले अकाउंट नियम

Google ने नए अकाउंट्स के लिए फ्री क्लाउड स्टोरेज पॉलिसी बदल दी है। अब डिफॉल्ट रूप से 5GB स्टोरेज मिलेगी, जबकि 15GB पाने के लिए यूजर्स को मोबाइल नंबर लिंक करना होगा।

Last Modified:
Saturday, 16 May, 2026
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टेक दिग्गज गूगल (Google) ने अपने फ्री क्लाउड स्टोरेज नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब नए गूगल अकाउंट बनाने वाले यूजर्स को डिफॉल्ट रूप से केवल 5GB फ्री स्टोरेज मिलेगी। पहले कंपनी हर नए अकाउंट पर 15GB क्लाउड स्टोरेज मुफ्त देती थी। हालांकि यूजर्स अभी भी 15GB स्टोरेज हासिल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए अब गूगल ने मोबाइल नंबर लिंक करना अनिवार्य कर दिया है।

यानी अकाउंट में फोन नंबर जोड़ने के बाद ही अतिरिक्त 10GB स्टोरेज उपलब्ध होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बदलाव फिलहाल केवल नए अकाउंट्स पर लागू किया गया है। पुराने यूजर्स के लिए अभी भी 15GB फ्री स्टोरेज का पुराना नियम जारी रहेगा और उन्हें तुरंत मोबाइल नंबर लिंक करने की जरूरत नहीं है। बताया जा रहा है कि गूगल ने यह बदलाव मार्च 2026 में बैकएंड स्तर पर लागू कर दिया था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे नए यूजर्स को दिखाई देने लगा है।

कंपनी के इस फैसले के पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला, स्टोरेज और मेमोरी हार्डवेयर की बढ़ती लागत, जिससे ज्यादा फ्री स्टोरेज देना महंगा होता जा रहा है। दूसरा, फर्जी अकाउंट्स पर रोक लगाना। दरअसल, कई लोग अतिरिक्त मुफ्त स्टोरेज पाने के लिए कई फेक गूगल अकाउंट बनाते थे। अब मोबाइल नंबर लिंक की शर्त से कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि 15GB स्टोरेज का लाभ केवल वास्तविक यूजर्स को ही मिले।

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आयुष मंत्रालय का बड़ा कदम: डॉक्टर-मरीज बातचीत से AI बनाएगा मेडिकल पर्ची

आयुष मंत्रालय और डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन ने AI आधारित बहुभाषी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समझौता किया है। इसके तहत आयुष से जुड़ी जानकारी 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएगी।

Last Modified:
Friday, 15 May, 2026
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भारत में आयुष (AYUSH) ज्ञान प्रणाली को बहुभाषी और डिजिटल रूप से अधिक सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत आने वाले डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (Digital India Bhashini Division-DIBD) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से आयुष से जुड़ी जानकारी का तेज अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन करना है।

इस पहल को “भाषिणी राज्यम - एक भाषिणी सहयोगी कार्यक्रम” नाम दिया गया है। इसके तहत आयुष ग्रिड पोर्टल और डिजिटल एप्लिकेशन्स को भाषिणी के राष्ट्रीय भाषा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जाएगा। इससे आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी से जुड़ी जानकारी संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो सकेगी।

समझौते पर आयुष मंत्रालय के निदेशक डॉ. सुबोध कुमार और भाषिणी के CEO अमिताभ नाग ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान कई AI टूल्स का प्रदर्शन भी किया गया। इनमें डॉक्टर और मरीज की बहुभाषी बातचीत को सुनकर तुरंत मेडिकल पर्ची तैयार करने वाला AI सिस्टम प्रमुख रहा।

इसके अलावा ‘श्रुतलेख’ नामक रियल-टाइम ट्रांसक्रिप्शन टूल, आवाज से CV बनाने की तकनीक और प्राचीन भारतीय पांडुलिपियों को डिजिटाइज करने वाले समाधान भी प्रस्तुत किए गए। आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने कहा कि यह पहल खासकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकती है, जहां भाषा अक्सर इलाज और संवाद में बाधा बनती है।

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अश्लील ऐप्स पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, Google-Apple को निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने Google और Apple को अश्लील और वल्गर कंटेंट वाले ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कंटेंट से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने गूगल (Google) और एपल (Apple) को उनके ऐप प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद अश्लील और वल्गर कंटेंट वाले मोबाइल एप्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर इस तरह की सामग्री से “पूरी एक पीढ़ी को बर्बाद होने” की अनुमति नहीं दी जा सकती।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब अश्लील सामग्री फैलाने की खुली छूट नहीं हो सकता। कोर्ट ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली स्वतंत्रता की भी सीमाएं हैं।

यह मामला रुबिका थापा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) और एपल ऐप स्टोर (Apple App Store) पर उपलब्ध उन ऐप्स पर रोक लगाने की मांग की गई है, जो कथित तौर पर अश्लील लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए यूजर्स को आकर्षित करते हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि इन ऐप्स तक बच्चों की पहुंच बेहद आसान है और इनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग तथा हनी-ट्रैप जैसे अपराधों में भी हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई विदेशी ऐप्स भारतीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।

मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार, Google, Apple और CERT-In को नोटिस जारी कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

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'Meta Layoff 2026': नौकरी जाने पर एंप्लॉयीज को मिलेगा बड़ा पैकेज

Meta ने 20 मई को करीब 8 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी का फैसला लिया है। कंपनी ने प्रभावित एंप्लॉयीज के लिए सैलरी, हेल्थ केयर और नई नौकरी तलाशने में मदद समेत कई सुविधाओं की घोषणा की है।

Last Modified:
Wednesday, 13 May, 2026
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दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में जारी छंटनी के दौर के बीच Meta ने भी करीब 8 हजार एंप्लॉयीज को नौकरी से निकालने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह संख्या कंपनी के कुल वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत मानी जा रही है। छंटनी की प्रक्रिया 20 मई से शुरू होगी।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, Meta की चीफ पीपल ऑफिसर जेनेल गेल (Janelle Gale) ने एंप्लॉयीज को भेजे गए इंटरनल मेमो में इस फैसले की जानकारी दी। कंपनी का कहना है कि वह अब छोटे, तेज और AI आधारित टीम मॉडल पर फोकस कर रही है, जिसके चलते कई पद खत्म किए जा रहे हैं।

Meta ने प्रभावित एंप्लॉयीज के लिए सेवरेंस पैकेज की भी घोषणा की है। अमेरिका में नौकरी गंवाने वाले एंप्लॉयीज को 16 हफ्तों की बेसिक सैलरी दी जाएगी। इसके अलावा कंपनी में जितने साल उन्होंने काम किया है, हर साल के बदले दो हफ्तों की अतिरिक्त सैलरी भी मिलेगी।

कंपनी ने यह भी कहा है कि अमेरिका में प्रभावित एंप्लॉयीज और उनके परिवारों का 18 महीने तक हेल्थ केयर खर्च उठाया जाएगा। वहीं दूसरे देशों में काम कर रहे एंप्लॉयीज को स्थानीय नियमों के अनुसार समान सुविधाएं दी जाएंगी। Meta नई नौकरी तलाशने में मदद और जरूरत पड़ने पर इमिग्रेशन सपोर्ट भी उपलब्ध कराएगी। कंपनी ने एंप्लॉयीज से अपना पर्सनल ईमेल अपडेट रखने को कहा है, ताकि छंटनी से जुड़ी जानकारी सीधे भेजी जा सके।

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'Dua Lipa' ने 'Samsung' पर ठोका $15 मिलियन का मुकदमा

पॉप स्टार दुआ लीपा ने Samsung Electronics पर बिना अनुमति उनकी तस्वीर इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है। गायिका ने कम से कम 15 मिलियन डॉलर हर्जाने की मांग की है।

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
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पॉप स्टार दुआ लीपा (Dua Lipa) ने Samsung Electronics के खिलाफ कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। गायिका का आरोप है कि कंपनी ने उनकी तस्वीर का इस्तेमाल बिना अनुमति टीवी पैकेजिंग पर किया, जिससे ऐसा संदेश गया कि वह 'Samsung' उत्पादों का समर्थन करती हैं।

मुकदमे में दुआ लीपा ने कम से कम 15 मिलियन डॉलर के हर्जाने की मांग की है। इसमें कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और पब्लिसिटी राइट्स के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, Samsung ने ‘Dua Lipa - Backstage at Austin City Limits, 2024’ नामक कॉपीराइटेड तस्वीर का इस्तेमाल टीवी के कार्डबोर्ड बॉक्स पर किया। यह पैकेजिंग रिटेल स्टोर्स में बेची जा रही थी।

दुआ लीपा की कानूनी टीम का कहना है कि उन्हें जून 2025 में इस कथित उल्लंघन की जानकारी मिली थी, जिसके बाद Samsung से तस्वीर हटाने को कहा गया। आरोप है कि कंपनी ने इसके बावजूद उसी पैकेजिंग का इस्तेमाल जारी रखा। 'Samsung Electronics' ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। वहीं दुआ लीपा की कानूनी टीम की ओर से भी अतिरिक्त बयान जारी नहीं किया गया है।

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IPRS केस में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 'Vodafone Idea' के खिलाफ दिया फैसला

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा है कि Vodafone Idea केवल म्यूजिक कंपनियों के लाइसेंस के आधार पर कॉलर ट्यून सेवा नहीं चला सकती। गीत, संगीत और लिरिक्स के लिए अलग से IPRS की अनुमति जरूरी होगी।

Last Modified:
Monday, 11 May, 2026
Vodafone Idea IPRS

वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) को कॉलर ट्यून और रिंगटोन सेवाओं से जुड़े कॉपीराइट मामले में बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) ने अपने अहम फैसले में कहा है कि टेलीकॉम कंपनी केवल साउंड रिकॉर्डिंग कंपनियों के साथ हुए समझौतों के आधार पर गानों को कॉलर ट्यून के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकती।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोडाफोन आइडिया को भारतीय परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी (Indian Performing Right Society - IPRS) से गीत और संगीत से जुड़े मूल साहित्यिक एवं संगीत अधिकारों के लिए अलग अनुमति लेनी होगी।

यह विवाद वोडाफोन आइडिया की उन वैल्यू-ऐडेड सेवाओं को लेकर था, जिनमें ग्राहक फिल्मी और गैर-फिल्मी गानों को कॉलर ट्यून के रूप में सेट कर सकते हैं। कंपनी का तर्क था कि सारेगामा इंडिया (Saregama India) के साथ उसके लाइसेंस समझौते पर्याप्त हैं, क्योंकि कंपनी साउंड रिकॉर्डिंग अधिकारों की मालिक है।

हालांकि कोर्ट ने कहा कि भारतीय कॉपीराइट कानून के तहत गीत, संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग अलग-अलग कॉपीराइट श्रेणियां हैं। केवल साउंड रिकॉर्डिंग का अधिकार होने से गीत और संगीत के अधिकार स्वतः शामिल नहीं हो जाते। कोर्ट ने 2012 के कॉपीराइट संशोधन का भी हवाला दिया, जिसके तहत साहित्यिक और संगीत रचनाकारों को उनके कार्यों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रॉयल्टी का अधिकार दिया गया है। फैसले को टेलीकॉम और म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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ChatGPT में नया फीचर: खतरे की स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति तक पहुंचेगी सूचना

OpenAI ने ChatGPT में एक नया सेफ्टी फीचर “ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट” (Trusted Contact) शुरू किया है।

Last Modified:
Saturday, 09 May, 2026
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OpenAI ने ChatGPT में एक नया सेफ्टी फीचर “ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट” (Trusted Contact) शुरू किया है। यह फीचर उन यूजर्स के लिए बनाया गया है, जिनकी बातचीत के दौरान सिस्टम को आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर चिंता महसूस होती है। ऐसे मामलों में यूजर द्वारा चुने गए किसी भरोसेमंद व्यक्ति को अलर्ट भेजा जा सकता है।

यह फीचर 7 मई 2026 से दुनिया भर में 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के ChatGPT यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, दक्षिण कोरिया में इसे 19 साल या उससे अधिक उम्र के यूजर्स इस्तेमाल कर सकेंगे। फिलहाल यह केवल पर्सनल ChatGPT अकाउंट्स के लिए उपलब्ध है। बिजनेस, एंटरप्राइज और एजुकेशन वर्कस्पेस में यह फीचर नहीं मिलेगा। कंपनी का कहना है कि आने वाले हफ्तों में इसे और ज्यादा क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।

इस फीचर को एक्टिव करने के लिए यूजर को ChatGPT सेटिंग्स में जाकर किसी भरोसेमंद व्यक्ति को चुनना होगा। यह व्यक्ति दोस्त, परिवार का सदस्य या केयरगिवर हो सकता है। इसके बाद ChatGPT उस व्यक्ति को ईमेल, SMS, WhatsApp या इन-ऐप मैसेज के जरिए निमंत्रण भेजेगा। अगर वह व्यक्ति एक हफ्ते के भीतर निमंत्रण स्वीकार कर लेता है, तभी यह फीचर एक्टिव होगा। अगर निमंत्रण ठुकरा दिया जाता है, तो यूजर किसी दूसरे व्यक्ति को चुन सकता है। दोनों में से कोई भी कभी भी इस कनेक्शन को खत्म कर सकता है।

कंपनी के मुताबिक, अगर ChatGPT की ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग किसी बातचीत में गंभीर आत्म-हानि का संकेत पकड़ती है, तो सबसे पहले यूजर को बताया जाएगा कि उनके Trusted Contact को अलर्ट भेजा जा सकता है। साथ ही यूजर को मदद लेने के विकल्प भी सुझाए जाएंगे। इसके बाद प्रशिक्षित मानव रिव्यूअर्स उस बातचीत की जांच करेंगे। अगर उन्हें मामला गंभीर लगता है, तो Trusted Contact को छोटा सा अलर्ट भेजा जाएगा।

यह फीचर ऐसे समय आया है, जब ChatGPT के करीब 90 करोड़ साप्ताहिक यूजर्स हैं और AI प्लेटफॉर्म्स की सेफ्टी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सितंबर 2025 में OpenAI ने टीन अकाउंट्स के लिए पैरेंटल कंट्रोल्स भी शुरू किए थे।

दरअसल, नवंबर 2025 में OpenAI के खिलाफ सात मुकदमे दायर किए गए थे। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने GPT-4o को समय से पहले लॉन्च कर दिया, जबकि अंदरूनी स्तर पर इसके व्यवहार को लेकर चेतावनियां दी गई थीं। आरोपों में यह भी कहा गया कि ChatGPT में ऐसे फीचर्स जोड़े गए, जो लोगों को भावनात्मक रूप से AI पर निर्भर बना सकते थे।

मुकदमों में दावा किया गया कि कंपनी के पास खतरनाक बातचीत को पहचानने, यूजर्स को हेल्पलाइन या संकट सहायता की तरफ भेजने और संदेशों को मानव समीक्षा के लिए फ्लैग करने की तकनीकी क्षमता थी, लेकिन इन सुरक्षा उपायों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

OpenAI का कहना है कि वह डॉक्टर्स, रिसर्चर्स और पॉलिसी मेकर्स के साथ मिलकर AI सेफ्टी पर लगातार काम कर रही है, ताकि जरूरतमंद लोगों को बेहतर सहायता मिल सके और AI सिस्टम अकेले काम न करें।

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'Amazon Ads' और 'LinkedIn' की नई साझेदारी: जानें क्यों है खास

Amazon Ads और LinkedIn ने नई साझेदारी की घोषणा की है। इसके तहत विज्ञापनदाता अब Amazon DSP के जरिए LinkedIn के प्रोफेशनल ऑडियंस डेटा का इस्तेमाल Connected TV विज्ञापनों में कर सकेंगे।

Last Modified:
Saturday, 09 May, 2026
Amazon Ads

एमेजॉन ऐड्स (Amazon Ads) और लिंक्डइन (LinkedIn) ने नई साझेदारी की घोषणा की है, जिसके तहत विज्ञापनदाता अब Amazon DSP के जरिए LinkedIn के Connected TV (CTV) Ads तक पहुंच बना सकेंगे। इस सहयोग का उद्देश्य ब्रैंड्स को प्रोफेशनल और B2B ऑडियंस तक ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।

नई व्यवस्था के तहत LinkedIn अपने फर्स्ट-पार्टी ऑडियंस सिग्नल्स जैसे जॉब टाइटल, इंडस्ट्री और सीनियरिटी डेटा को Microsoft Monetize के माध्यम से स्ट्रीमिंग टीवी इन्वेंट्री से जोड़ेगा। इससे अमेरिका में विज्ञापनदाता प्रीमियम स्ट्रीमिंग टीवी चैनलों पर B2B दर्शकों को आसानी से टारगेट कर सकेंगे।

कंपनियों के अनुसार, जो मार्केटर्स पहले से Amazon DSP का इस्तेमाल Connected TV, डिस्प्ले, ऑनलाइन वीडियो और ऑडियो कैंपेन के लिए कर रहे हैं, वे अब LinkedIn Ads ऑडियंस को भी उसी कैंपेन में जोड़ सकेंगे। इससे अलग-अलग मीडिया बाय की जरूरत कम होगी।

Amazon Ads में डायरेक्टर ऑफ ओम्नीचैनल सप्लाई क्रिस कोनेटा ने कहा कि विज्ञापनदाता अब ज्यादा प्रभावी तरीके से अपने ब्रैंड के लिए महत्वपूर्ण ऑडियंस तक पहुंचना चाहते हैं। वहीं LinkedIn के डेविड रोटर ने कहा कि आज B2B मार्केटिंग में स्ट्रीमिंग टीवी तेजी से अहम माध्यम बन रहा है। 

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