सप्रे जी पत्रकारिता के ऐसे पूर्वज हैं, जिन्होंने महात्मा गांधी से भी कई बरस पहले पूर्ण स्वराज और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अभियान छेड़ा था।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
तमाम अखबारों को देखें, टीवी चैनल्स के पर्दों पर देखें या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के कंटेंट पर नजर दौड़ाएं तो पाते हैं कि उन्मादी बयानों को प्रमुखता देकर पत्रकारिता ने भी अपने को कठघरे में खड़ा कर लिया है।
राजेश बादल 2 years ago
वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. वेदप्रताप वैदिक के आकस्मिक निधन पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
ऐसा तो कभी नही हुआ। भारतीय लोकतंत्र की एक बुजुर्ग पार्टी करीब करीब साल भर से खुले आम मीडिया को कटघरे में खड़ा कर रही है। पत्रकारों और संपादकों के पास उसका कोई उत्तर नहीं है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
अनुचित है। घोर आपत्तिजनक। इसे तो कोई भी सभ्य लोकतंत्र और समाज स्वीकार नहीं करेगा। किसी पत्रकारिता संस्थान पर इस तरह की कार्रवाई बदले की ही मानी जाएगी।
राजेश बादल 3 years ago
पत्रकारों के लिए वकील या डॉक्टर की तरह पेशेवर डिग्री कितनी जरूरी है? यह सवाल दशकों से भारतीय पत्रकारिता और बौद्धिक गलियारों में तैरता रहा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
स्वभाव से मैं कभी भी निराशावादी नहीं रहा। जिंदगी में कई बार आशा और निराशा के दौर आए और चले गए, लेकिन यह साल जिस तरह पत्रकारिता और पत्रकारों को बांटकर जा रहा है, वह अवसाद बढ़ाने वाला है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
एनडीटीवी के बारे में कल मैंने जो टिप्पणी की, उस पर अनेक मित्रों ने कहा कि इसमें रवीश कुमार का जिक्र होना चाहिए था।
राजेश बादल 3 years ago
संस्था के नाम पर भले ही एनडीटीवी (NDTV) मौजूद रहे, लेकिन पत्रकारिता के क्षेत्र में अनेक सुनहरे अध्याय लिखने वाले इस संस्थान का विलोप हो रहा है।
राजेश बादल 3 years ago
स्वस्थ पत्रकारिता को समर्पित पत्रकारों के लिए ऐसे फैसले बड़े दुख भरे होते हैं। जो दुनिया भर के लिए लड़ते हैं, उनके लिए कोई नही लड़ता।
राजेश बादल 3 years ago