निजी क्षेत्र के तमाम सम्मानित नागरिक, राजनेता और व्यापारी शिक्षा के क्षेत्र के लिए अपना योगदान देते थे। बड़ी-बड़ी संस्थाएं खड़ी करते थे, किंतु सोच में व्यापार नहीं सेवा का भाव होता था।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
जरूरी नहीं कि अगर आपको स्कूल में कठोर शिक्षक मिले तो आप भी उनके जैसे ही बनें। वह समय अलग था, यह समय अलग है। हर पीढ़ी, पिछली पीढ़ी से अलग होती है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago