ट्विटर को रास नहीं आया विकास भदौरिया का ये ट्वीट, हटाने पर किया मजबूर

एबीपी न्यूज के पत्रकार ने ट्विटर के इस कदम को उनकी कलम तोड़ने और मुंह बंद करने की कोशिश के साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी की हत्या करार दिया

Last Modified:
Friday, 11 October, 2019
Vikas Bhadauria

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए अक्सर ट्वीट डिलीट करने का दवाब डालने के आरोप लगते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एबीपी न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया ने ट्विटर पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं। यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तमाम लोग विकास भदौरिया के पक्ष में आ गए हैं और ट्विटर की आलोचना हो रही है।

अपने इस ट्वीट में विकास भदौरिया ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुए तिहरे हत्याकांड के बारे एक ट्वीट किया था। दरअसल, कुछ अज्ञात बदमाशों ने मुर्शिदाबाद में 35 वर्षीय आरएसएस कार्यकर्ता बंधु प्रकाश के साथ उनकी तीस वर्षीय गर्भवती पत्नी ब्यूटी पाल और आठ साल के बेटे अंगन की निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी।

विकास भदौरिया ने इस बारे में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए घटना से जुड़ी कुछ फोटोज भी शेयर की थीं। आरोप है कि ट्विटर ने उन्हें यह ट्वीट डिलीट करने पर मजबूर किया। इस बारे में विकास भदौरिया ने शुक्रवार को ट्वीट कर बताया कि किस तरह उनकी कलम को तोड़ने और मुंह बंद करने की कोशिश की जा रही है।  

इससे पहले ट्विटर ने विकास भदौरिया से मुर्शिदाबाद की घटना को लेकर किए गए अपने ट्वीट को हटाने को कहा था। ट्विटर का कहना था कि इस पोस्ट से ट्विटर द्वारा तय किए गए नियमों का उल्लंघन हुआ है। मुर्शिदाबाद की घटना को लेकर विकास भदौरिया द्वारा किए गए ट्वीट और उसके बाद ट्विटर द्वारा किस तरह इसे नियमों का उल्लंघन बताया गया, वह आप यहां देख सकते हैं। हालांकि विकास भदौरिया द्वारा घटना से जुड़ी कुछ फोटोज भी शेयर की गई थीं, जिन्हें अब हटा दिया गया है।

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ANI के ब्यूरो चीफ कर बैठे ऐसा ट्वीट, ‘फजीहत’ के बाद मांगनी पड़ी माफी

न्यूज एजेंसी ‘एशियन न्यूज इंटरनेशनल’ (ANI) के ब्यूरो चीफ नवीन कपूर एक खबर को लेकर आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Sunday, 12 September, 2021
Last Modified:
Sunday, 12 September, 2021
Naveen Kapoor Tweet

न्यूज एजेंसी ‘एशियन न्यूज इंटरनेशनल’ (ANI) के नेशनल ब्यूरो चीफ नवीन कपूर एक खबर को लेकर आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, उन्होंने एक ट्वीट में अफगान राजनेता डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला के गिरफ्तार होने और उन्हें अज्ञात जगह पर लेकर जाने की बात कही थी। उनके इस ट्वीट के बारे में जब चर्चा होने लगी तो खुद डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने ट्वीट कर इस खबर को भ्रामक बता दिया। डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि उनके बारे में चलाई जा रही यह न्यूज पूरी तरह से आधारहीन है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि पत्रकारिता में फैक्ट्स को चेक कर लेना चाहिए। मैं इन खबरों का खंडन करता हूं। डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला के इस ट्वीट के बाद आलोचक नवीन कपूर की आलोचना करने लगे।

हालांकि नवीन कपूर ने भी एक ट्वीट कर माफी मांग ली है। नवीन कपूर ने ट्वीट करते हुए लिखा,  ‘मुझे यह न्यूज एक विश्वसनीय सूत्र से ही मिली, लेकिन शायद उसने मुझे बहका दिया। जैसे ही मुझे मेरी गलती के बारे में पता चला मैंने उसे हटा दिया है। मुझे खुशी है कि आप स्वस्थ हैं।

आपको बता दें कि अब पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा है और ऐसे में आए दिन किसी न किसी की हत्या की न्यूज़ आती रहती है लेकिन समाचार4 मीडिया का मानना है कि खबर जब तक पुख्ता नहीं हो, उसे पब्लिश नहीं करना चाहिए।

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भारत में डिजिटल न्यूज स्टार्टअप के लिए गूगल ने शुरू किया प्रोत्साहन कार्यक्रम

टेक कंपनी गूगल ने गुरुवार को देश में स्वतंत्र स्थानीय या एकल विषय पर केंद्रित पत्रकारिता संगठनों के लिए एक प्रोत्साहन कार्यक्रम की घोषणा की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 10 September, 2021
Last Modified:
Friday, 10 September, 2021
Google

टेक कंपनी गूगल ने गुरुवार को देश में स्वतंत्र स्थानीय या एकल विषय पर केंद्रित पत्रकारिता संगठनों के लिए एक प्रोत्साहन कार्यक्रम ‘जीएनआई स्टार्टअप लैब इंडिया’ (Google News Initiative Startups Lab India) की घोषणा की।

अपनी जीएनआई पहल के तहत गूगल न्यूज चार महीने का कार्यक्रम शुरू करेगी, जो स्वतंत्र स्थानीय या एकल विषय पर केंद्रित पत्रकारिता संगठनों को गहन शिक्षण, कौशल प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के जरिए वित्तीय तथा परिचालन स्थिरता हासिल करने में मदद करेगा।

गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि इकोस ( Echos) (एक वैश्विक नवाचार प्रयोगशाला) और डिजीपब न्यूज इंडिया फाउंडेशन (DIGIPUB News India Foundation) के साथ साझेदारी में बनाया गया जीएनआई स्टार्टअप लैब इंडिया (GNI Startups Lab India) कार्यक्रम स्थानीय और वंचित समुदायों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली पत्रकारिता की मदद करेगा।

ब्लॉग पोस्ट के मुताबिक सभी भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाले समाचार संगठन स्टार्टअप कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन 18 अक्टूबर 2021 तक किया जा सकता है और भारत में पहले समूह के रूप में 10 स्वतंत्र डिजिटल समाचार प्रकाशकों का चयन किया जाएगा।

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सोशल मीडिया पर परोसे जा रहे फर्जी कंटेंट को लेकर SC ने जताई चिंता, कही ये बात

देश में जिस तेजी से वेब पोर्टल, यू-ट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के जरिये सांप्रदायिकता फैलाई जा रही है, उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 03 September, 2021
Last Modified:
Friday, 03 September, 2021
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देश में जिस तेजी से वेब पोर्टल, यू-ट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के जरिये सांप्रदायिकता फैलाई जा रही है, उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। एक मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को कोर्ट ने कहा कि इस तरह की मीडिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। वे अपनी पसंद की कोई भी चीज प्रकाशित-प्रसारित कर सकते हैं।

चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि वह बिना किसी जिम्मेदारी के आम लोगों, जजों और संस्थाओं को बदनाम करने वाली खबरें चलाते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट के आधार के बारे में पूछे जाने पर वे जवाब नहीं देंगे।

कोर्ट ने कहा कि यदि आप यू-ट्यूब पर जाते हैं तो पाएंगे कि वहां कितनी फर्जी खबरें और विकृतियां हैं? वहां कोई नियंत्रण नहीं है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह इस पर लगाम लगाने के लिए वेब पोर्टल और अन्य संगठनों पर जवाबदेही तय करने के बारे में वास्तव में गंभीर है।

बता दें कि पीठ ने ये टिप्पणियां जमीयत उलेमा-ए-हिंद सहित अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाओं में केंद्र सरकार को फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने और मीडिया के एक वर्ग के खिलाफ सांप्रदायिक नफरत परोसने व कट्टरता फैलाने के लिए सख्त कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इस मामले में पहले ही कोर्ट सरकार से यह कह चुका है कि उसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए फेक न्यूज फैलाने पर नियंत्रण की व्यवस्था बनानी चाहिए। गुरुवार को सरकार की तरफ से जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और समय की मांग की गई। इसी दौरान कोर्ट ने यू-ट्यूब चैनल और सोशल मीडिया का भी मसला उठा दिया।

सॉलिसीटर जनरल के अलावा मामले में एक पक्ष के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने भी इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों पर नियंत्रण के लिए पहले से केबल टीवी रेगुलेशन एक्ट, 1995 है। उसी के तहत तब्लीगी जमात मामले में याचिकाकर्ता कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लेकिन वेब मीडिया अभी भी स्वच्छंद है।

वहीं, सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि वेब और सोशल मीडिया पर आवंछित गतिविधियों पर नियंत्रण के 'इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स, 2021' बनाया गया है। लेकिन इसके प्रावधानों को अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने दिल्ली, बॉम्बे, मद्रास, कलकत्ता और केरल हाई कोर्ट में चुनौती दे दी है। कुछ मामलों में हाई कोर्ट ने मीडिया के खिलाफ कार्रवाई पर रोक भी लगा दी है। मेहता ने निवेदन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सभी मामलों की सुप्रीम कोर्ट में एक साथ सुनवाई के लिए आवेदन दिया है। कोर्ट उसे जल्द सुने।

इस दौरान मामले के एक याचिकाकर्ता ने अपनी प्रार्थना को संशोधित कर दोबारा दाखिल करने का निवेदन किया, ताकि आज कही जा रही बातों पर भी आगे चर्चा हो सके। कोर्ट ने इसकी अनुमति देते हुए सुनवाई 6 हफ्ते के लिए टाल दी।

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फेसबुक के इस प्रोग्राम के लिए चुनी गई NewsMobile

फेसबुक एक्सेलेरेटर एक ग्लोबल बिजनेस ट्रेनिंग प्रोग्राम है, जिसे 2018 में लोकल न्यूज पब्लिशर्स को फलने-फूलने और स्थायी व्यवसाय बनाने में मदद करने के लिए लॉन्च किया गया था।

Last Modified:
Monday, 30 August, 2021
Facebook

‘न्यूजमोबाइल’ (NewsMobile) को ‘फेसबुक’ की प्रतिष्ठित वैश्विक एक्सेलेरेटर चुनौती (global accelerator challenge) के लिए दुनिया के शीर्ष फैक्ट चेकर्स में से चुना गया है। फेसबुक जर्नलिज्म प्रोजेक्ट दस सप्ताह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अक्टूबर 2021 की शुरुआत में लॉन्च करेगा। इसे दर्शकों को जोड़े रखने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह एक्सेलेरेटर चैलेंज फैक्ट चेक करने वाले संगठनों को नया करने, विशेषज्ञों तथा एक-दूसरे से सीखने और फेसबुक पर और उसके बाहर अपने व्यवसाय को बेहतर बनाने के लिए नई रणनीतियों पर सहयोग करने के लिए एक साथ लाएगा।

इस बारे में ‘न्यूजमोबाइल’ के फाउंडर और एडिटर-इन-चीफ सौरभ शुक्ला का कहना है, ‘न्यूजमोबाइल को उस काम पर गर्व है, जो हमारी टीम ने महामारी के दौरान कोविड और वैक्सीन के बारे में गलत सूचनाओं को फैलने से रोकने के प्रयास के रूप में किया है। एक्सेलेरेटर प्रोग्राम हमें अपने फैक्ट-चेकिंग ऑपरेशंस को बढ़ाने के लिए स्किल सीखने में मदद करेगा और गलत सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए बड़ा प्रभाव डालने में भी हमारी मदद करेगा। हम इस कार्यक्रम के द्वारा फेसबुक टीम और वैश्विक प्रशिक्षकों के साथ काम करने के लिए उत्साहित हैं और इस अवसर के लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।’

बता दें कि फेसबुक एक्सेलेरेटर एक ग्लोबल बिजनेस ट्रेनिंग प्रोग्राम है, जिसे 2018 में लोकल न्यूज पब्लिशर्स को फलने-फूलने और स्थायी व्यवसाय बनाने में मदद करने के लिए लॉन्च किया गया था।

वहीं, इस बारे में फेसबुक की न्यूज इंटीग्रिटी पार्टनरशिप्स लीड (News Integrity Partnerships Lead) ‘केरेन गोल्डश्लेगर’ (Keren Goldshlager) का कहना है, ‘हम जानते हैं कि गलत सूचनाओं के खिलाफ लड़ाई में न केवल भ्रामक सामग्री के प्रसार को कम करना महत्वपूर्ण है, बल्कि सही जानकारी को भी बढ़ाना अहम है। एक्सेलेरेटर हमें इस मिशन में हमारे स्वतंत्र फैक्ट चेकिंग पार्टनर्स का सपोर्ट करने में सक्षम करेगा क्योंकि वे ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने और अपने पाठकों के साथ गहराई से जुड़ने की कोशिश करते हैं।’

एक्सेलेरेटर कार्यक्रम का नेतृत्व ‘ब्लू इंजन कोलैबोरेटिव‘ (Blue Engine Collaborative) द्वारा किया जाता है। यह मिशन-संचालित सलाहकारों और सलाहकारों का एक संघ है, जो डिजिटल दर्शकों के विकास और राजस्व को चलाने पर केंद्रित है, जिसकी स्थापना ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘टेक्सास ट्रिब्यून’ के एक पूर्व एग्जिक्यूटिव टिम ग्रिग्स (Tim Griggs) ने की थी।

ग्रिग्स का कहना है, ‘फैक्ट चेक करने वाले संगठन और उनका काम हमारे समाज और वैश्विक समुदाय को सूचित करने और उन्हें मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। हम इन टीमों के साथ काम करने के लिए बहुत उत्साहित हैं जो पाठकों तक सच्चाई पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।‘

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मौलाना नोमानी से बोलीं रूबिका लियाकत, चले जाएं अफगानिस्तान, टिकट का पैसा मैं भरूंगी

भारत में ही कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो तालिबान के हिमायती हैं और उनकी जीत पर खुशी मना रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 19 August, 2021
Last Modified:
Thursday, 19 August, 2021
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एक तरफ अफगानिस्तान में तालिबान जैसे क्रूर आतंकी संगठन का कब्जा हो गया है, जिसके बाद पूरी दुनिया को चिंता सताने लगी है। पूरी दुनिया का मानना है कि इससे आने वाले दिनों में आतंकवाद में इजाफा हो सकता है। लेकिन इसके बावजूद भारत में ही कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो तालिबान के हिमायती हैं और उनकी जीत पर खुशी मना रहे हैं।

भारतीय मुसलमानों के बड़े संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी ने तालिबान को जीत की मुबारकबाद दी है. इतना ही नहीं नोमानी ने तालिबान को सलाम भी किया है.

दरअसल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खलीलुर रहमान सज्जाद नोमानी ने तालिबान को जीत की मुबारकबाद दी है। इतना ही नहीं नोमानी ने तालिबान को सलाम भी किया है। उन्होंने तालिबान को लेकर कहा कि हिंदी मुसलमान आपको सैल्यूट करता है। न्यूज24 में सीनियर एंकर मानक गुप्ता ने उनका ये वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है।

इसी पर एबीपी न्यूज की सीनियर एंकर रुबिका लियाकत ने मौलाना को खरी खोटी सुना दी। उन्होंने लिखा, मौलाना साहब आपकी तालीबान को लेकर बेइंतहा मुहब्बत देखते हुए आपके लिए एक बंपर ऑफर मेरे मन में आया है- आपको एक पल उनसे दूर नहीं रहना चाहिए आपकी अफगानिस्तान की टिकट का पैसा मैं भरूंगी। ये मौलाना सिर्फ अकेले नहीं है इससे पहले स्वरा भास्कर भी हिन्दुओं की तुलना तालिबान से कर चुकी हैं।

 

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हिन्दू आतंकवाद शब्द पर भड़के सीनियर न्यूज एंकर अमिश देवगन, कही ये बड़ी बात

अफगानिस्तान की धरती पर एक बार फिर भूचाल आया हुआ है। दरअसल अमेरिका ने अपनी सेनाएं अफगानिस्तान से हटा ली है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 18 August, 2021
Last Modified:
Wednesday, 18 August, 2021
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अफगानिस्तान की धरती पर एक बार फिर भूचाल आया हुआ है। दरअसल अमेरिका ने अपनी सेनाएं अफगानिस्तान से हटा ली है और उसके बाद कुछ ही दिनों के अंदर देश के बड़े हिस्से पर ‘तालिबान’ का कब्जा हो गया है। राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग चुके हैं और उनका कोई पता नहीं है। वहीं अमेरिका और भारत जैसे देश अपने राजनियकों और नागरिकों को लगातार वहां से निकाल रहे है। इसी बीच ट्विटर पर तालिबान को लेकर बहस छिड़ी हुई है।

दरअसल कई लोग तालिबान का विरोध तो कर रहे है, लेकिन उसकी तुलना हिन्दू आतंकवाद से कर रहे है। इसी बीच अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने एक ऐसा ट्वीट कर दिया जिससे कई लोगों को ठेस पहुंची।उन्होंने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि हम तालिबान आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं कर सकते, लेकिन उसी के साथ उन्होंने हिन्दू आतंकवाद को भी जोड़ दिया।

उनके इसी ट्वीट पर ‘न्यूज18 इंडिया’ (हिंदी) के मैनेजिंग एडिटर और ‘आर-पार’ के होस्ट अमिश देवगन ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने ट्वीट को रीट्वीट करते हुए पूछा कि हिन्दू आतंकवाद से इस धरती का कौन सा हिस्सा प्रभावित है जरा बताएं? इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि ये तो हिन्दुस्तान है इसलिए आप ऐसे शब्दों के इस्तेमाल करने के बाद भी आराम से एन्जॉय कर सकती हैं, क्यूंकि ये देश सहिष्णु है। देखा जाए तो अफगानिस्तान में जो तालिबान कर रहा है उसकी तुलना हिन्दू आतंकवाद से करना इस देश की एकता और अखंडता के साथ एक क्रूर मजाक है।

साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि हमारे देश में बैठकर कुछ लोग तालिबान को कवर फायर देते हैं। जब देश हित की बात हो तो यही लोग तख्तियां हाथ में लेकर CAA, NRC और तीन तलाक का विरोध करते हैं। 370 पर छातियां पीटते हैं। इस गैंग को बुरहान वानी, याकूब मेनन याद आते हैं लेकिन विक्रम बतरा कैप्टन कालिया का नाम तक याद नहीं हैं।

 

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इस बड़ी वजह से Twitter ने दो न्यूज एजेंसियों से मिलाया हाथ

तमाम उपायों के बाद भी फेक न्यूज (Fake News) पर पूरी तरह से लगाम नहीं लग पा रही है। ऐसे में यह मुद्दा काफी चिंता का विषय बना हुआ है।

Last Modified:
Tuesday, 03 August, 2021
Twitter

तमाम उपायों के बाद भी फेक न्यूज (Fake News) पर पूरी तरह से लगाम नहीं लग पा रही है। ऐसे में यह मुद्दा काफी चिंता का विषय बना हुआ है। अपने प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए अब माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘ट्विटर’ (Twitter) ने न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' (Reuters) और एसोसिएटेड प्रेस (एपी) से हाथ मिलाया है। इस करार के तहत ये दोनों एजेंसियां ट्विटर को उन न्यूज स्टोरीज के बारे में अधिक पृष्ठभूमि (background) और संदर्भ (context) प्रदान करने में सहायता करेंगी, जिनके वायरल होने की संभावना है।

इस बारे में एक ब्लॉग पोस्ट में ट्विटर का कहना है, ‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि जब लोग तमाम जानकारियों के लिए ट्विटर पर आएं तो उन्हें आसानी से विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध हों। ट्विटर इस दिशा में लगातार प्रयत्नशील है कि लोगों को रोजाना देश-दुनिया में हो रहे घटनाक्रमों के बारे में तेजी से विश्वसनीय सूचनाएं और विचारों को समय से उपलब्ध कराया जाए।’

ट्विटर के अनुसार, ‘किसी न्यूज के वायरल होने के बाद उस मुद्दे से निपटने के बजाय ट्विटर इस पार्टनरशिप के जरिये लोगों को पहले से ही उन न्यूज स्टोरीज के बारे में अधिक पृष्ठभूमि (background) और संदर्भ (context) प्रदान करने में सहायता मिलेगी।’

वर्तमान में ट्विटर की क्यूरेशन टीम लोगों को ट्विटर पर दिखाई देने वाली जानकारी के बारे में सूचित विकल्प बनाने के लिए संदर्भ देती है। इस बारे में ट्विटर का कहना है, ‘जब ट्विटर पर बड़े पैमाने पर या तेजी से बातचीत (conversations) होती है तो यह विवादास्पद,  संवेदनशील अथवा संभावित रूप से भ्रामक जानकारी हो सकती है, ऐसे में ट्विटर की क्यूरेशन टीम स्रोत और विश्वसनीय स्रोतों से प्रासंगिक संदर्भ को ऊपर उठाती है।‘ इस पार्टनरशिप के जरिये यूजर्स अब अतिरिक्त संदर्भ और विश्वसनीय जानकारी को ट्रेंड्स, एक्प्लोरर, सर्च, प्रॉम्ट्स और लेबल्स टैब पर देख सकेंगे।

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नए IT नियमों का पालन न करने पर ट्विटर को फटकार, कोर्ट ने दिया अंतिम मौका

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्विटर के उस हलफनामे पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें कहा गया है कि उसने मुख्य अनुपालन अधिकारी और शिकायत अधिकारी को 'आकस्मिक कार्यकर्ता' नियुक्त किया है।

Last Modified:
Thursday, 29 July, 2021
Twitter

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्विटर के उस हलफनामे पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें कहा गया है कि उसने मुख्य अनुपालन अधिकारी और शिकायत अधिकारी को 'आकस्मिक कार्यकर्ता' नियुक्त किया है। नाखुशी जताते हुए न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की एकल पीठ ने कहा कि माइक्रोब्लॉगिंग साइट ने नए आईटी नियमों (New IT Rules 2021) की अवहेलना है, क्योंकि ट्विटर ने इसका पालन नहीं किया है।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि नियमों के अनुसार सीसीओ के तौर पर प्रबंधन के एक अहम व्यक्ति या एक वरिष्ठ कर्मचारी को नियुक्त करना अनिवार्य है, जबकि ट्विटर ने अपने हलफनामे में कहा कि उसने तीसरी पार्टी के ठेकेदार के जरिए एक अस्थायी कर्मचारी नियुक्त किया है।

अदालत ने कहा, 'सीसीओ ने अपने हलफनामे में स्पष्ट कहा है कि वह एक कर्मचारी नहीं है। यह अपने आप में नियम के खिलाफ है। नियम को लेकर कुछ गंभीरता होनी चाहिए।'

उच्च न्यायालय ने कहा कि उसे ट्विटर के अस्थायी कर्मचारी’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कुछ आपत्ति है, खासतौर से तब जब यह पता नहीं है कि तीसरी पार्टी का ठेकेदार कौन है।

न्यायाधीश ने ट्विटर से कहा, 'अस्थायी कर्मचारी क्या होता है? मुझे नहीं पता इसका क्या मतलब होगा। मुझे इस शब्द से दिक्कत है। अस्थायी फिर तीसरी पार्टी का ठेकेदार। क्या है यह? मैं हलफनामे से खुश नहीं हूं।' अदालत ने कहा कि ट्विटर का हलफनामा अस्वीकार्य है और उसने उसे नियमों का पूरी तरह पालन करने के लिए कहा।

अदालत ने कहा, 'एक बेहतर हलफनामा दायर करिए। यह स्वीकार्य नहीं है। मैं आपको काफी अवसर दे रही हूं लेकिन यह उम्मीद मत करिए कि अदालत ऐसा करती रहेगी। तीसरी पार्टी के ठेकेदार का नाम बताइए और अस्थायी को स्पष्ट कीजिए।'

उच्च न्यायालय ने ट्विटर को एक सप्ताह के भीतर बेहतर हलफनामा दाखिल करने का अंतिम मौका दिया है। अदालत ने ट्विटर को न केवल सीसीओ की नियुक्ति से जुड़ी सभी जानकारियां देने को कहा बल्कि निवासी शिकायत अधिकारी (आरजीओ) की जानकारी देने के भी निर्देश दिए। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा कि एक नोडल संपर्क व्यक्ति अभी तक क्यों नियुक्त नहीं किया गया और कब तक इस पद पर नियुक्ति होगी। इस मामले पर अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी।

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कंटेंट क्रिएटर्स को कुछ इस तरह सपोर्ट करेगी फेसबुक

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस योजना में उन क्रिएटर्स को भुगतान करने के लिए बोनस कार्यक्रम शामिल होंगे, जिन्होंने इंस्टाग्राम समेत इसके ऐप्स पर कुछ मील के पत्थर हासिल किए हैं

Last Modified:
Thursday, 15 July, 2021
Facebook

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ (Facebook) कंटेंट क्रिएटर्स को सपोर्ट करने के लिए इस साल के अंत तक एक बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश करेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह खबर सामने आई है।

इन रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसबुक का यह कदम ‘टिकटॉक‘ (TikTok) व ‘यूट्यूब‘ (YouTube) जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

बताया जाता है कि इस योजना में उन क्रिएटर्स को भुगतान करने के लिए बोनस कार्यक्रम शामिल होंगे, जिन्होंने फोटो-शेयरिंग नेटवर्क इंस्टाग्राम सहित इसके ऐप पर कुछ मील के पत्थर हासिल किए हों। इंस्टाग्राम के बोनस कार्यक्रमों में ‘रील्स’ (Reels) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहन राशि शामिल होगी।

बता दें कि तमाम बड़े टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। ‘टिकटॉक’ ने क्रिएटर्स को सपोर्ट करने के लिए तीन साल में दो बिलियन डॉलर खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है। 

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फेसबुक इंडिया के MD की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, कही ये बात

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने 24 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

Last Modified:
Friday, 09 July, 2021
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सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली विधानसभा की समिति के समन के खिलाफ ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) के एमडी अजीत मोहन द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अजीत मोहन ने दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति द्वारा जारी समन पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

न्यायमूर्ति एसके कौल, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने फेसबुक इंडिया के प्रमुख द्वारा चुनौती को ‘अपरिपक्व’ (premature) कहा है। सुप्रीम कोर्ट की इस खंडपीठ ने अजीत मोहन को शांति और सद्भाव समिति के समक्ष पेश होने के लिए कहा है।

वहीं, पीठ ने यह भी कहा कि समिति अभियोजन एजेंसी (prosecuting agency) की भूमिका नहीं निभा सकती है। पीठ का कहना था कि दिल्ली विधानसभा की शांति समिति को कानून व्यवस्था सहित ऐसे कई मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, जो केंद्र सरकार के अंतर्गत आते हैं। पीठ का कहना है, ‘चूंकि यह दंगों का मामाला है, इसलिए सातवीं अनुसूची के तहत संघ के किसी भी क्षेत्र में प्रवेश किए बिना विधानसभा इस मुद्दे पर गौर कर सकती है।‘

इसके साथ ही पीठ ने आरोपपत्र में फेसबुक को सह-आरोपी बनाने के बारे में समिति द्वारा दिए गए कुछ बयानों पर भी आपत्ति जताई है, जो इसके दायरे से बाहर है।

बता दें कि दिल्ली विधानसभा की शांति समिति ने इन लोगों को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामलों में गवाह के रूप में अपने सामने पेश न होने पर समन जारी किए थे। ये समन पिछले साल 10 और 18 सितंबर को जारी किए गए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने 24 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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