सोशल मीडिया पर घिरे वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, यूं मानी गलती

‘द प्रिंट’ की इस खबर पर प्रोफेसर शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और न्यूज पोर्टल के पत्रकार के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो भी जारी किया

Last Modified:
Monday, 06 January, 2020
Shekhar Gupta

‘द प्रिंट’ की एक खबर को लेकर वेबसाइट के एडिटर-इन-चीफ और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता मुश्किल में घिर गए हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने खबर में हुई गलती पर खेद प्रकट किया, लेकिन इसका कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है। प्रोफेसर वशी मंत शर्मा ने शेखर गुप्ता की माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, आईआईटी कानपुर के जिस प्रोफेसर ने फैज की नज्म ‘हम देखेंगे‘ गाने वाले छात्रों के खिलाफ पिछले महीने शिकायत दर्ज कराई थी, वह वशी शर्मा ही हैं। शेखर गुप्ता के न्यूजपोर्टल ‘द प्रिंट’ ने इस संबंध में हाल ही में एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसमें प्रोफेसर को ‘लव जिहाद’ और मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा गया था कि वह दलितों के उत्थान के भी पक्षधर नहीं हैं।

‘द प्रिंट’ की इस खबर पर प्रोफेसर शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई और न्यूज पोर्टल के पत्रकार के साथ अपनी बातचीत का ऑडियो भी जारी किया। शर्मा ने अपने ट्वीट में शेखर गुप्ता, खबर लिखने वाले प्रशांत श्रीवास्तव और उन्नति शर्मा को टैग करते हुए लिखा, ‘मैं आपके रिपोर्टर के साथ बातचीत का अनकट ऑडियो पोस्ट कर रहा हूं, कृपया ध्यान से सुनें और जो लिखा गया है उससे तुलना करें।’ प्रोफेसर वशी मंत शर्मा ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये, जिसके बाद शेखर गुप्ता आगे आये और उन्होंने खबर में हुई गलती के लिए खेद प्रकट किया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ‘आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर वशी मंत शर्मा के प्रोफाइल में हमने गलती से उन्हें भी ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, जो दलित उत्थान की निंदा करता है। हम इस गलती पर खेद प्रकट करते हुए उनसे माफी मांगते हैं’।

हालांकि, शेखर गुप्ता की माफी का प्रोफेसर पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। शेखर को जवाबी ट्वीट में वशी मंत शर्मा ने कहा, ‘शेखर गुप्ता मुझे आपकी माफी स्वीकार नहीं है। आपने तब माफी मांगी, जब मैंने आपके पत्रकार के साथ अपनी बातचीत सामने लाकर आपका झूठ उजागर किया।’

इसके साथ ही प्रोफेसर ने ‘द प्रिंट’ की खबर में अपने ऊपर लगे प्रत्येक आरोप की सफाई भी दी है। सोशल मीडिया पर ‘इस गलती’ के लिए द प्रिंट और शेखर गुप्ता को निशाना बनाया जा रहा है। पेशे से वकील अनिरुद्ध नामक यूजर ने तो प्रोफेसर को शेखर गुप्ता पर केस करने की सलाह दी है।   

‘द प्रिंट’ द्वारा भूल सुधार के बाद प्रकाशित की गई स्टोरी आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं:

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वरिष्ठ नेता संबित पात्रा ने 5 पत्रकारों से किया संपर्क, रूबिका लियाकत ने निभाया वादा

कोरोना से मुकाबले के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा है। फिल्मी सितारों से लेकर आम जनता तक प्रधानमंत्री राहत कोष में दान दे रहे हैं, ताकि इस लड़ाई में धन की कमी बाधा न बने

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
rubika liya

कोरोना से मुकाबले के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा है। फिल्मी सितारों से लेकर आम जनता तक प्रधानमंत्री राहत कोष में दान दे रहे हैं, ताकि इस लड़ाई में धन की कमी बाधा न बने। सरकार की तरफ से भी लोगों से ज्यादा से ज्यादा सहायता करने की अपील की जा रही है। साथ ही भाजपा नेता भी अपने स्तर पर प्रयासों में जुटे हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत संबित पात्रा ने देश के पांच पत्रकारों से संपर्क किया है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर इसकी जानकारी दी है।

पात्रा ने लिखा है, ‘मैंने देश के पांच शीर्ष पत्रकारों से बात की और उनसे पीएमकेयर में सहयोग करने को कहा। सभी ने मुझे भरोसा दिलाया कि वे कोरोना से इस लड़ाई में सरकार के साथ हैं। मैं अलग-अलग ट्वीट में उन पत्रकारों नाम बताते हुए उनसे पुन: सहयोग की अपील करूंगा।’

अपने इस ट्वीट में भाजपा नेता ने ‘एबीपी न्यूज’ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत को टैग किया है। यानी उन्होंने जिन पांच पत्रकारों से बात की है, उसमें पहला नाम रूबिका का है।

पात्रा के ट्वीट के जवाब में रूबिका ने उन्हें बताया है कि वे पीएमकेयर को सहयोग राशि पहले ही दान कर चुकी हैं। ‘एबीपी न्यूज’ की पत्रकार ने लिखा है, ‘धन्यवाद डॉक्टर पात्रा, जैसा कि मैंने आपसे वादा किया था, मैंने पीएमकेयर में डोनेशन दे दिया है।’

इसके बाद रूबिका ने लोगों से भी बढ़-चढ़कर इसका हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने आगे लिखा है, ‘मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई। आप सब भले ही ट्विटर पर हैं, लेकिन मेरा परिवार हैं। इसलिए हक से कह रही हूं आगे आइए देश को आपकी जरूरत है। अपने सामर्थ्य के हिसाब से जो बन पड़े दीजिए’।

रूबिका लियाकत सोशल मीडिया पर उन लोगों की तारीफ भी कर रही हैं, जो इस संकट की घड़ी में सकरार के साथ खड़े हैं, फिर वे चाहे कितनी भी राशि क्यों न डोनेट करें।

अंशु नंदन नामक एक यूजर ने 101 रुपए दान करने के लिए साथ लिखा है कि मैं एक स्टूडेंट हूं और जितना हो सका, मैंने डोनेट किया। इस पर रूबिका ने उसकी तारीफ करते हुए कहा, ‘अंशु शुक्रिया, बूंद-बूंद से सागर बनता है। आपका ये योगदान बहुत कीमती है’।

 

 

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है संदीप चौधरी का ‘सबसे बड़ा सवाल’, जानें क्यों?

सोशल मीडिया पर यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि समुदाय विशेष वायरस से मुकाबले की सरकारी तैयारियों को पलीता लगाने में जुटा है। कुछ मीडिया संस्थान भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
sandeep

कोरोना के खौफ के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में हुए तबलीगी जमात कार्यक्रम को साम्प्रदायिक चश्मे से देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि समुदाय विशेष वायरस से मुकाबले की सरकारी तैयारियों को पलीता लगाने में जुटा है। कुछ मीडिया संस्थान भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, न्यूज़24 के वरिष्ठ पत्रकार संदीप चौधरी ने एक अलग तस्वीर पेश करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि ‘तबलीगी जमात’ की आड़ में धर्म की राजनीति उचित नहीं, क्योंकि जिस दौरान यह कार्यक्रम चल रहा था, उस वक्त मंदिरों में भी भीड़ उमड़ रही थी। कई वरिष्ठ पत्रकार इसके लिए संदीप की सराहना कर रहे हैं, वहीं, विरोध करने वालों की भी अच्छी खासी तादाद है।

दरअसल, संदीप ने अपने चर्चित शो ‘सबसे बड़ा सवाल’ में तबलीगी जमात का मुद्दा उठाया था, जिसमें उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि आखिर किसकी नाकामी से निजामुद्दीन में इतने बड़े पैमाने पर लोग जुटे। इस चर्चा में विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ, आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडे और यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह बतौर अतिथि उपस्थित थे। संदीप ने सबसे पहला सवाल शाहनवाज हुसैन से पूछा, जिसका वह कोई सीधा जवाब नहीं दे सके। उन्होंने पूछा, ‘आपके दिल्ली भाजपा अध्यक्ष इसे साजिश करार दे रहे हैं, क्या आप इससे सहमत हैं’? इसके जवाब में शाहनवाज कभी पीएम मोदी, तो कभी यहां-वहां की बातें करते रहे। काफी देर तक भाजपा प्रवक्ता से कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला तो संदीप चौधरी ने उन्हें रोकते हुए कोरोना की क्रोनोलॉजी समझानी शुरू की। हालांकि, इससे पहले उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तबलीगी जमात कार्यक्रम में भीड़ का जुटना, देश में संक्रमण के खतरे को बढ़ाने जैसा था। उन्होंने आगे कहा, ’13 मार्च को देश का स्वास्थ्य मंत्रालय कहता है कि कोरोना से घबराने की ज़रूरत नहीं है। 13 से मार्च 15 तक डेढ़ हजार लोग थे निजामुद्दीन में, तो 16 मार्च तक सिद्धि विनायक मंदिर बंद नहीं था। 16 तक उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बंद नहीं था, 17 मार्च तक शिर्डी का साईंबाबा मंदिर बंद नहीं था। 18 मर्च तक वैष्णो देवी का मंदिर बंद नहीं था, 20 मार्च तक काशी विश्वनाथ का मंदिर बंद नहीं था। 19 तारीख को प्रधानमंत्री पहली बार सोशल डिस्टेसिंग की बात करते हैं, और आप सबकुछ निजामुद्दीन पर डाल देंगे, हमारी व्यवस्था क्या है’?

संदीप चौधरी के अपनी बात खत्म करते ही शाहनवाज फिर सरकार की तैयारियों पर बोलने लगे। लेकिन सीधे सवाल का घुमावदार जवाब चौधरी को पसंद नहीं आया और वह फिर से क्रोनोलॉजी पर लौट आये। उन्होंने कहा, ’23 मार्च तक संसद चली, उसमें दुष्यंत भी मौजूद थे, जो पॉजिटिव पाई गईं कनिका कपूर की पार्टी में थे, 23 को ही मध्यप्रदेश में शपथ ग्रहण होता है, जहां 300 लोग मौजूद होते हैं। उनमें कोरोना पॉजिटिव लोग भी थे, आप उन पर सवाल नहीं उठाएंगे’? हालांकि, इतने सब के बाद भी शाहनवाज सवाल का सीधा जवाब देने से बचते रहे।

चौधरी का यह विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ओम थानवी ने संदीप चौधरी की तारीफ करते हुए फेसबुक पर लिखा है, ‘यह साहस है पत्रकारिता का, संदीप चौधरी जैसे लोग हमारे मीडिया में कितने हैं, जो भीड़ के मानस की परवाह न करते हुए हल्ले का दूसरा पहलू भी देख पाते हैं’? इसी तरह कई अन्य पत्रकारों ने भी इस बड़े मुद्दे की एक अलग तस्वीर पेश करने के लिए संदीप की सराहना की है। हालांकि, एनडीटीवी के विदेश मामलों के संपादक उमाशंकर सिंह की सोच कुछ जुदा है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर संदीप चौधरी का विडियो पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘संदीप के शो के इस टुकड़े को मैंने भी देखा। जुटने वाली हर भीड़ पर सवाल उठाना बिल्कुल सटीक है लेकिन एक की गलती को दूसरे की गलती से नहीं काटा जा सकता। संदीप की ये मंशा भी नहीं होगी। लेकिन जो लोग इसे सिर्फ़ इसलिए शेयर कर रहे हैं कि ये ‘मरकज़ की गलती का जवाब’ है, वे भी बीमार हैं’। जिसके जवाब में वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम ने कहा है, ‘सहमत, अगर उन जगहों पर भी कोई हादसा होता तो सवाल उठते। जब और जहां घटना होती तो बात वहीं से शुरू होती है। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि #TablighiJamaat की लापरवाही और मौलाना की जहालत वाली तकरीर के आधार पर #CoronaJihad और #biojihad ट्रेंड कराकर पूरी कौम पर चोट करना कट्टरता है।’  

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अजीत अंजुम ने क्यों कहा, ‘...तो मैं देशद्रोही ही सही’

लॉकडाउन के बीच पलायन करते मजदूरों के कई विडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनमें से कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें देखकर आंखें नम हो जाएं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
ajit-anjum

लॉकडाउन के बीच पलायन करते मजदूरों के कई विडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनमें से कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें देखकर आंखें नम हो जाएं। मजदूरों के इस हाल को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया और कई पत्रकारों ने उनकी व्यथा को शब्दों के जरिये लोगों के सामने रखने का प्रयास किया। इस ‘प्रयास’ में वरिष्ठ पत्रकार व ‘इंडिया टीवी’ के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम भी शामिल रहे। उन्होंने ट्विटर पर इस विषय में कई ट्वीट किये।

इसके अलावा, मीडिया के कुछ वॉट्सऐप ग्रुप पर उन्होंने मजदूरों का दर्द बयां करती एक कविता भी शेयर की, जिसे संजय कुंदन ने लिखा है और दिलीप गुप्ता ने आवाज दी है। इस कविता में जो विडियो इस्तेमाल किया गया है, उसे अजीत अंजुम ने शूट किया है। उन्हें उम्मीद थी कि लोग खासकर, पत्रकार मजदूरों के दर्द को समझने का प्रयास करेंगे, लेकिन हुआ इसके एकदम उलट।

एक वरिष्ठ पत्रकार, जो अजीत अंजुम के दोस्त भी हैं, उन्होंने कविता पर कड़ी आपत्ति जताई। इतना ही नहीं, उन्होंने पलायन की बात करने वालों को देशद्रोही भी करार दे डाला। इस मुद्दे को लेकर अंजुम और उनके दोस्त के बीच ग्रुप पर तीखी बहस भी हुई। अंजुम ने खुद इस बारे में अपने यूट्यूब चैनल पर बताया है। हालांकि, उन्होंने उन्हें देशद्रोही ठहराने वाले पत्रकार का नाम उजागर नहीं किया है। उन्होंने हैरानी भी जताई कि कैसे कोई पत्रकार इतने संवेदनशील मुद्दे पर आंखें मूंदे रह सकता है और दूसरों को देशद्रोही करार दे सकता है?

अपने विडियो में अजीत अंजुम ने यह भी साफ किया है कि क्यों उनके जैसे लोगों को बेवजह निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा, ‘आजकल यह हो गया है कि जो प्रधानमंत्री मोदी के ऐलान या उनकी योजनाओं को थोड़ा भी डेंट करता हो या उनकी घोषणाओं की कमियों को उजागर करता हो, वह देशद्रोही हो जाता है। वहां तक तो ठीक है, लेकिन आज देशद्रोही इसलिए कहा गया कि मजदूरों की बात हो रही है। मजदूरों की बात हुई, तो सरकार की नाकामी की बात हुई। मोदी ने जो लॉकडाउन का ऐलान किया उसकी कुछ खामियां थीं, जिनकी वजह से मजदूर सड़कों पर आये या उन्हें रोकने की जो कोशिश सरकारों द्वारा होनी चाहिए थी वो नहीं हो सकी। अब इन सबका गुस्सा हम जैसे पत्रकारों पर निकाला जा रहा है।’

वैसे अजीत अंजुम ही अकेले नहीं हैं, जिन्होंने पलायन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को कठघरे में खड़ा किया है। कई अन्य वरिष्ठ पत्रकारों का भी यही मानना है कि लॉकडाउन से पूर्व पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। हालांकि, यह बात अलग है कि ज़्यादातर लोगों की सोच इसके विपरीत है। वे मानते हैं कि पलायन को बेवजह मुद्दा बनाया जा रहा है, ताकि लॉकडाउन को असफल करार दिया जा सके। यही वजह है कि जब कोई पलायन की बात करता है, तो उसे निशाना बनाना शुरू हो जाता है।     

यहां सुनिए वो कविता-

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शेखर गुप्ता के ‘कल’ पर जोस कोवाको की कॉमेडी मचा रही धमाल

लॉकडाउन के मौसम में यदि आप किराना या सब्जी की होम डिलीवरी के लिए फोन लगाते हैं, तो अव्वल तो फोन लगेगा नहीं और यदि लग भी गया तो जवाब होगा ‘अभी संभव नहीं है, कल देखते हैं’।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
shekhar gupta

लॉकडाउन के मौसम में यदि आप किराना या सब्जी की होम डिलीवरी के लिए फोन लगाते हैं, तो अव्वल तो फोन लगेगा नहीं और यदि लग भी गया तो जवाब होगा ‘अभी संभव नहीं है, कल देखते हैं’। इस सामान्य किंतु परेशान करने वाले जवाब को कॉमेडियन जोस कोवाको ने एक अनोखे अंदाज में पेश किया है। अंदाज कुछ ऐसा है कि आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे।

वरिष्ठ पत्रकार और ‘द प्रिंट’ के संस्थापक शेखर गुप्ता तो जोस की इस कॉमेडी से इतना प्रभावित हुए कि उसे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट ही कर दिया। वैसे, शेखर गुप्ता के प्रभावित होने की एक वजह उनका अप्रत्यक्ष रूप से कॉमेडी का हिस्सा होना भी है। दरअसल, जोस कोवाको ने शेखर के पुराने विडियो को इस्तेमाल करके अपना कॉमेडी विडियो तैयार किया है। इस विडियो में शेखर आने वाले कल के बारे में बात कर रहे हैं और जोस ने यह बताने का प्रयास किया है कि वो कल कभी आता ही नहीं है। यानी अगर आप होम डिलीवरी के लिए फोन करेंगे, तो जिस कल की बात की जायेगी, ये वही कभी न आने वाला ‘कल’ होगा।

शेखर गुप्ता ने जोस के विडियो को शेयर करते हुए लिखा है, ‘दोस्तों आप मुझे धन्यवाद कहेंगे, क्योंकि मैंने आपको इस माहौल में हंसने का मौका दिया है। मैंने अब तक सैंकड़ों मीम देखे हैं, लेकिन इसके जैसा कोई नहीं लगा’।

इस विडियो में दिखा गया है कि जोस कोवाको एक सब्जी विक्रेता से होम डिलीवरी की बात करते हैं और जवाब में शेखर के संपादित विडियो को प्ले किया जाता है, जिसमें वह ‘कल’ की बात करते हैं। जोस दूसरे विडियो के साथ इसी तरह एडिटिंग करके कॉमेडी करने के लिए पहचाने जाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे को लेकर भी उनका कॉमेडी विडियो काफी वायरल हुआ था। इस विडियो में वे एक कॉल सेंटर के प्रतिनधि के किरदार में नजर आये थे और डोनाल्ड ट्रंप को कुछ प्रश्न कर रहे थे।      

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कोरोना से बुरी तरह प्रभावित मीडिया इंडस्ट्री की Facebook यूं कर रही मदद

भारत समेत पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। दुनियाभर के वैज्ञानिक और सरकारें इस जानलेवा वायरस को हराने की कोशिशों में जुटी हैं।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
Facebook

भारत समेत पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। दुनियाभर के वैज्ञानिक और सरकारें इस जानलेवा वायरस को हराने की कोशिशों में जुटी हैं। वहीं सभी संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर लोगों को राहत पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। इसी कड़ी में अब सोशल मीडिया की अग्रणी कंपनी फेसबुक भी मदद के लिए आगे आई है।  

इस मुश्किल दौर में फेसबुक ने अमेरिका की न्यूज इंडस्ट्री को 10 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद देने की पेशकश की है। फेसबुक ने सोमवार को कहा कि वह वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह प्रभावित मीडिया संस्थानों को 10 करोड डॉलर की मदद देगा। उसने कहा कि परेशानी के समय में भरोसेमंद सूचना देने के लिए इसकी जरूरत है। 

इसके लिए फेसबुक ने एक फंड बनाया है, जिसमें जर्नलिज्म प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय खबरों के लिए इंडस्ट्री को 25 मिलियन यानी 2.5 करोड़ डॉलर दिए जाएंगे। इस इमरजेंसी फंड का मकसद मुख्य तौर पर महामारी के दौर में न्यूज इंडस्ट्री को मदद पहुंचाना है।

इसके अलावा फेसबुक ने 75 मिलियन डॉलर यानी 7.5 करोड़ डॉलर दूसरे मार्केटिंग खर्चों के लिए देने का ऐलान किया है। इस सहायता राशि के तहत पहले चरण की मदद अमेरिका और कनाडा के 50 न्यूजरूम को दी जा चुकी है। इसके अलावा पब्लिशर्स, फेसबुक द्वारा दी गई मदद के जरिए कोरोना वायरस की कवरेज को पूरा कर रहे हैं, इसमें उनके यात्रा के खर्चे, रिमोट कार्य की क्षमताओं और फ्री-लांस रिपोर्टर्स की हायरिंग का काम शामिल है जिनके जरिए इस समय में कोरोना वायरस की विस्तृत कवरेज की जा रही है।

इसके अलावा फेसबुक ने एलान किया है कि वो इस मुश्किल समय में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों को मदद कर रहा है और इन देशों में पब्लिशर्स को सहायता राशि मुहैया करा रहा है।

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ट्रोलर्स के निशाने पर आया NDTV, चीन से कुछ यूं जोड़कर कराया गया ट्रेंड

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ‘एनडीटीवी’ की एक अलग छवि है। कुछ इसे निष्पक्ष मानते हैं, तो कुछ को लगता है कि उसका फोकस सरकार विरोधी खबरों पर रहता है।

Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
NDTV

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ‘एनडीटीवी’ की एक अलग छवि है। कुछ इसे निष्पक्ष मानते हैं, तो कुछ को लगता है कि उसका फोकस सरकार विरोधी खबरों पर रहता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर ‘एनडीटीवी’ अकसर ट्रेंड करता रहता है। फिलहाल ट्विटर पर उसके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। #NDTVirus नाम के इस कैंपेन में लोग तरह-तरह से मीडिया हाउस के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहे हैं।

दरअसल, इस अभियान की शुरुआत काफी हद तक निहा मसीह नामक पत्रकार के उस ट्वीट से हुई, जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस को चीनीवायरस कहने को जातिवादी करार दिया है। उन्होंने लिखा है ‘भारत में सभी को शर्म आनी चाहिए। कोरोना वायरस को चीनी वायरस करार देना जातिवादी और घिनौना है।’ निहा ने अपने ट्विटर पर अपने बारे में बताया है कि वह विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए काम कर चुकी हैं, जिसमें एनडीटीवी का भी नाम है। बस इसी वजह से लोगों का एनडीटीवी के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। 

 

#NDTVirus का हिस्सा बनने वाले यूजर्स का कहना है कि एनडीटीवी चीन के इशारों पर काम कर रहा है। मिथुन नामक एक यूजर ने लिखा है, चीन ने कथित रूप से अपना दुष्प्रचार फैलाने के लिए मीडिया को खरीदा है और एनडीटीवी भी इसका हिस्सा है। इसलिए, मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि आप अपने हर ट्वीट में हैशटैग #ChinaVirus #NDTVirus का उपयोग करें’।

साथ ही चैनल की कुछ ऐसी खबरों को भी शेयर किये जा रहा है, जिसमें चीनी सरकार का कोरोना को लेकर बयान है। इसके अलावा, एनडीटीवी का एक ट्वीट भी उसके लिए परेशानी का सबब बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल किये जा रहे इस ट्वीट में सरकार के राहत पैकेज की राशि को 1.7 करोड़ बताया गया है, जबकि असल में यह राशि 1.7 लाख करोड़ है। हालांकि चैनल का ट्वीट असली है या उससे छेड़छाड़ की गई है, कहना मुश्किल है, क्योंकि एनडीटीवी के ट्विटर पेज पर ढूंढने पर फिलहाल यह ट्वीट नहीं मिला है, पर जो ट्वीट मिला है उसे नीचे पढ़ सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि कोरोना वायरस के खौफ के बीच ‘एनडीटीवी’ के खिलाफ छेड़ा गया यह अभियान अभी चलता रहेगा। 

 

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फेसबुक और रिलायंस जियो को लेकर सामने आई ये बड़ी खबर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह काफी बड़ी डील होगी, जिसकी कीमत लाखों डॉलर्स में होगी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
Facebook Jio

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट ‘फेसबुक’ मुकेश अंबानी के स्‍वामित्‍व वाली देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी 'रिलायंस जियो' में 10 प्रतिशत की भागीदारी खरीद सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह काफी बड़ी डील होगी, जिसकी कीमत लाखों डॉलर्स में होगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच इस सौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा था, लेकिन कोरोना वायरस को लेकर चल रहे संकट के चलते यह डील फिलहाल परवान नहीं चढ़ पाई है। एक खबर यह भी है कि जियो की बात फेसबुक के अलावा गुगल से भी चल रही है। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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कोरोना को लेकर छेड़ी ABP न्यूज की मुहिम को लोगों ने किया पसंद, यूं निकला आगे

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए ‘एबीपी न्यूज’ सोशल मीडिया के जरिए अपने दर्शकों को लगातार जागरुक कर रहा है

Last Modified:
Saturday, 21 March, 2020
abp

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए ‘एबीपी न्यूज’ सोशल मीडिया के जरिए अपने दर्शकों को लगातार जागरुक कर रहा है और बता रहा है कि वायरस फैलने से रोकने के क्या उपाय हैं। लिहाजा इसके लिए चैनल ने सार्वजनिक जागरुकता अभियान ‘कोरोना को धोना’ छेड़ा हुआ है।

एबीपी न्यूज के मुताबिक, इस अभियान को लेकर सोशल मीडिया पेज पर उसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। जाने-माने दिग्गज जैसे कपिल देव और माननीय केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इस पहल के साथ जुड़े हुए हैं।

प्रेस रिलीज में ये दावा किया गया है कि कोविड-19 से जुड़ी किसी भी खबर के लिए, एबीपी न्यूज पिछले 30 दिनों से फेसबुक पर अग्रणी डोमेन बना हुआ है। (18 फरवरी से 18 मार्च 2020, स्रोत- crowdtangle.com) 5.42 मिलियन कुल इंटरैक्शन्स के साथ एबीपी न्यूज का फेसबुक पेज अपने निकट प्रतिद्वन्द्वियों में सबसे आगे हैं। विडियो व्यूज की बात करें तो एबीपी न्यूज के पेज को 132.79 मिलियन व्यूज मिले हैं, जो किसी भी अन्य विडियो व्यूज के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं। अभियान के विडियो सेगमेन्ट को यू-ट्यूब पर प्रोमोट किया गया है, जिसे दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है।

बता दें कि हाल ही में लॉन्च किया गया अभियान, एबीपी न्यूज के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को इस महामारी के बारे में जागरुक बना रहा है। अपने संदेश युक्त हैशटैग #CoronakoDhona साथ इस अभियान में विडियोज, सूचनाप्रद ब्लॉग्स और इस मुद्दे से जुड़े लेख शामिल हैं। विडियो अभियान में 13 शॉर्ट क्लिप्स शामिल हैं, जिसमें एबीपी न्यूज के 13 एंकर्स हाथ धोने के महत्व पर जागरुकता संदेश देते हैं। हाइजीन का संदेश देने वाला यह अभियान इस बात पर जोर देता है कि कैसे नियमित रूप से हाथ धोकर कोरोना वायरस से लड़ा जा सकता है।

एबीपी न्यूज के जाने माने एंकर जैसे अखिलेश आनंद, आदर्श झा, आस्था कौशिक, शोभना यादव, प्रतिमा मिश्रा, अनुराग मुस्कान, रूबिका लियाकत, शगुन शर्मा, सुमित अवस्थी, अदिति अरोड़ा, यासिर उस्मान, विकास भदौरिया और श्रीवर्धन त्रिवेदी इस जागरुकता संदेश को साझा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इस मौके पर एबीपी न्यूज नेटवर्क के सीईओ अविनाश पांडे ने कहा, ‘एक जिम्मेदार न्यूज चैनल होने के नाते, हमारा कर्तव्य है कि हम समाज कल्याण को सुनिश्चित करें। कोविड-19 ने दुनिया भर में डर का माहौल बना दिया है। जहां एक ओर पूरी दुनिया इस महामारी से लड़ रही है, वहीं इससे बचने के लिए जागरुकता और संवेदनशील रवैया अपनाना बहुत जरूरी है। इस अभियान के माध्यम से हम लोगों को वायरस के बारे में जरूरी जानकारी देकर उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में मदद करना चाहते हैं ताकि वे महामारी के चिंता और डर से बचें और रोकथाम के सही उपाय अपनाएं।’

 

 

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सोशल मीडिया के कलाकारों की ‘कलाकारी’ का शिकार बने राजदीप सरदेसाई

किसी विडियो को काट-छांटकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना और फिर अर्थ का अनर्थ करके संबंधित व्यक्ति को उससे जोड़ देना आजकल आम हो गया है।

Last Modified:
Monday, 16 March, 2020
rajdeep sardesai

किसी विडियो को काट-छांटकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना और फिर अर्थ का अनर्थ करके संबंधित व्यक्ति को उससे जोड़ देना आजकल आम हो गया है। खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी इसका सबसे ज्यादा शिकार हुए हैं। उनका आलू से सोना बनाने वाला भाषण इस कलाकारी का सबसे प्रमुख उदाहरण है। अब ऐसे ही कलाकारों ने वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘आजतक’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को परेशान कर डाला है।

दरअसल, राजदीप ने ‘द लल्लनटॉप’ के ‘नेता नगरी’ कार्यक्रम में शिरकत की थी। इसमें उन्होंने ‘हाथ’ का साथ छोड़कर ‘कमल’ थामने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के बारे में अपनी राय व्यक्त की थी। जो शायद कुछ लोगों को पसंद नहीं आई, इसलिए शो के छोटे-छोटे क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल करके यह दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है कि राजदीप को सिंधिया के भाजपा में जाने का बेहद दुःख है।

खुद को भाजपा समर्थक बताने वाले विभूति सिंह नामक यूजर ने ऐसी ही एक क्लिपिंग पोस्ट की है, जिसमें राजदीप को कांग्रेस का आधिकारिक प्रवक्ता बताया गया है। साथ ही सिंह ने लिखा है ‘मैं आपका दर्द समझता हूं राजदीप जी, अब देवदास मत बन जाइएगा।’

इस ट्वीट का राजदीप सरदेसाई ने भी करारा जवाब दिया है। उन्होंने लिखा है, ‘मुझे दर्द तब होता है जब भारतीय धर्म के नाम पर एक-दूसरे की हत्या करते हैं और जिन लोगों के हाथ बेगुनाहों के खून से सने होते हैं, वे या तो बच निकलते हैं या बड़े नेता बन जाते हैं।’

राजदीप इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में कहा, ‘नेता नगरी कार्यक्रम के बाद IT सेल और वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी पूरे ओवरड्राइव में है! 30-30 सेकंड के विडियो शेयर कर रहे हैं! काश इसी जोश से यह लोग कोरोना वायरस पर फोकस करते! पूरा शो यहां देखें’! इस ट्वीट को लगभग 400 बार रीट्वीट किया जा चुका है।

राजदीप ने ‘नेता नगरी’ कार्यक्रम के बाद आने वाले संदेशों का जिक्र भी सोशल मीडिया पर किया है। उन्होंने लिखा है, ‘पिछले एक घंटे से वॉट्सऐप फौज मेरे वॉट्सऐप पर लगातार मैसेज डाल रही है, क्योंकि मैंने दिल्ली दंगों को लेकर नेता नगरी में सरकार पर कुछ सवाल उठाए! फिर पता चला कि मेरा फ़ोन नम्बर RW की इंटरनेट सेल ने सोशल मीडिया पर डालकर फौज को कहा आप इन्हें मैसेज करते रहिए’!

राजदीप के साथ ही और भी कई पत्रकारों को इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ता है। एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के पुराने विडियो भी नए-नए रूप में सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं, जिसके माध्यम से यह दर्शाने का प्रयास किया जाता है कि उनकी पत्रकारिता पक्षपातपूर्ण है। वैसे यदि आप मध्यप्रदेश के सियासी संकट को गहराई से समझना चाहते हैं, तो ‘नेता नगरी’ का यह एपिसोड देख सकते हैं।   

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निशाना साध रहे लोगों को सुधीर चौधरी ने कुछ यूं दिया जवाब

जी न्यूज के (ZEE NEWS) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और कोशिश करते हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा फॉलोअर्स के टच में रहे

Last Modified:
Saturday, 14 March, 2020
sudhir

जी न्यूज के (ZEE NEWS) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और कोशिश करते हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा फॉलोअर्स के टच में रहें और उनके सवालों का जवाब भी दें। अपनी इसी कोशिश के दौरान इस बार उन्होंने उन लोगों पर तीखा हमला किया है, जिन्होंने डीएनए कार्यक्रम में किए उनके खुलासे को लेकर उन पर निशाना साधा था।

सुधीर चौधरी ने अपने एक ट्वीट के जरिये कहा कि किसी पत्रकार के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार ये है कि जब जमीन से जुड़े लोग उस मुहिम से जुड़ जाएं, जब देश के लोग कहें कि आपने सच दिखाया और ये अभियान बन जाए। अंग्रेजी बोलने वाले सत्ता के दरबारी पत्रकार और सिलेब्रिटी क्या कहते हैं, इसकी परवाह हमने कभी नहीं की।

दरसअसल, सुधीर चौधरी का ये ट्वीट बॉलिवुड के म्यूजिक डायरेक्टर विशाल ददलानी और वरिष्ठ टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई द्वारा उन पर उठाए गए सवालों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।   

बता दें कि विशाल ददलानी ने हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी पर तीखा हमला करते हुए उनकी तुलना कीटाणु से की। इतना ही नहीं उन्होंने मुंबई और दिल्ली पुलिस से सुधीर चौधरी की गिरफ्तारी की भी मांग की।

दरअसल हाल ही में अपने ‘डीएनए’ शो में सुधीर चौधरी ने जेहाद पर एक कार्यक्रम किया था, जिसमें उन्होंने जेहाद के अलग-अलग रूप गिनवाए थे। इसी को लेकर विशाल ने उन पर निशाना साधा है। वहीं इससे पहले वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई भी सुधीर चौधरी के इस खुलासे पर अपनी प्रतिक्रिया देने से खुद को नहीं रोक पाए थे।

राजदीप सरदेसाई ने सुधीर चौधरी के शो पर सवाल खड़े करते हुए अपने ट्वीट में लिखा था, ‘इस चैनल द्वारा दैनिक आधार पर फैलाई जा रही अकथनीय सांप्रदायिक घृणा चौंकाने वाली, शर्मनाक और खतरनाक है। और यह वही चैनल है, जिसका समर्थन सरकार के ही एक सांसद करते हैं! क्या सत्ता में मौजूद कोई व्यक्ति इस पर ध्यान देगा, और इस गंदगी को रोक पाएगा? या इसे आगे बढ़ाएगा?'

हालांकि कुछ ही घंटों बाद इस ट्वीट के जवाब में सुधीर चौधरी ने राजदीप के ट्वीट को ही शेयर करते हुए सीधे और स्पष्ट शब्दों में लिखा, ‘हमने जेहाद का सच दिखाया तो ‘मीडिया के जेहादी’ भड़क गए। गुजरात दंगों को बेच-बेचकर पद्म पुरस्कार पाने वाले ये दरबारी पत्रकार पिछली सरकारों के एजेंट बनकर दर्शकों को झूठ दिखाते रहे। अब सच इनसे देखा नहीं जा रहा। हैरान हूं, इन्हें अब भी रोजगार मिल जाता है। हिंदू आतंकवाद ठीक, जेहाद गलत?‘

गौरतलब है कि सुधीर चौधरी ने 11 मार्च को अपने प्राइमटाइम कार्यक्रम ‘डीएनए’ (DNA) में चौंकाने वाला खुलासा किया था कि कैसे हमारे देश में लव जेहाद की तरह जमीन जेहाद भी हो रहा है। उन्होंने बताया था कि जम्मू-कश्मीर ही वह राज्य है, जहां पिछले 17 वर्षो के दौरान इस घोटाले को अंजाम दिया गया। यहां ‘रोशनी एक्ट’ नाम के एक कानून के तहत सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों को ही जमीन का असली मालिक बना दिया गया।  

हालांकि उनके इसी खुलासे के बाद देश के वरिष्ठ पत्रकारों, कलाकारों और बुद्धजीवियों ने उन पर सवाल उठाए थे। हालांकि सोशल मीडिया में कुछ लोग सुधीर चौधरी का समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग विरोध में हैं।

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