हामिद अंसारी को लेकर ट्वीट पर घिरीं आरफा खानम, मिला ये 'दिलचस्प' जवाब

इन दिनों 'द वायर' में सीनियर एडिटर के पद पर कार्यरत हैं आरफा खानम

Last Modified:
Tuesday, 30 July, 2019
Arfa Khanum

आरफा खानम लम्बे अरसे तक एनडीटीवी का जाना पहचाना चेहरा रही हैं। कांग्रेस राज में राज्य सभा टीवी में भी उन्होंने काम किया और अब 'द वायर' में सीनियर एडिटर हैं। ऐसे में लगातार राइट विंग खासतौर पर संघ-बीजेपी से जुड़े लोगों को निशाने पर रखना उनकी आदत में शुमार रहा है। लेकिन पिछले एक महीने में प्रोग्रेसिव मुस्लिम लीडर आरिफ मोहम्मद खान ने उनकी दो-दो बार उनकी इसी आदत के चलते खिंचाई की है। एक बार कैमरे पर और अब ट्विटर पर।

पिछले दिनों जब आरिफ मोहम्मद खान का ये बयान आया था कि कभी पीवी नरसिंह राव ने उनसे कहा था कि मुसलमान खुद को गटर में ही रखना चाहते हैं तो हम क्या करें?, इसको लेकर आरफा खानम उनका इंटरव्यू करने पहुंचीं और कई मुद्दों पर आरिफ खान ने उनके विचारों को लेकर जमकर अपनी बात कही। वो इंटरव्यू सोशल मीडिया पर छोटे-छोटे हिस्सों में कटकर वायरल हो गया था।

दरअसल आरिफ मोहम्मद खान उन चुनिंदा मुस्लिम नेताओं में से हैं, जो इस्लाम को लेकर दकियानूसी सोच नहीं रखते हैं और वो भारत में बहुसंख्यक हिंदुओं की भावनाओं को ख्याल रखते हुए इस्लाम के प्रोगेसिव विचारों को आगे रखते आए हैं। ऐसे में जब आरफा खानम ने दो-तीन रोज पहले एक और ट्वीट किया और लोगों से पूछा कि पूर्व राष्ट्रपति कलाम और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी में क्या फर्क है? क्यों एक की तारीफ होती है और दूसरा खलनायक है? राइट विंग को किस तरह का मुसलमान पसंद है? तो आरिफ मोहम्मद खान फिर मैदान में आ गए उन्हें जवाब देने।

आरफा खानम ने ट्वीट किया था-

कई लोगों ने आरफा की इस बात पर ऐतराज किया, लेकिन सबसे दिलचस्प जवाब आरिफ खान की तरफ से आया। उन्होंने आरिफा के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, 'Kalam was a Indian first and Hamid is a Muslim first. One more thing I'm also a Indian First.. Jay Hind.'

हालांकि उनका ये एकाउंट वैरीफाइड नहीं है, लेकिन इस ट्वीट को साढ़े पांच हजार लोग रिट्वीट कर चुके हैं और 16 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। दरअसल एक रॉ ऑफिसर ने जब से हामिद अंसारी के इराकी राजदूत के तौर पर कार्यकाल के दौरान उन पर तमाम आरोप लगाए हैं, हामिद ने सफाई तक नहीं दी है। इसी के चलते वो लगातार सोशल मीडिया में निशाने पर हैं। जो भी हो, अब आरिफ खान ने भी हामिद अंसारी को तो निशाने पर ले ही लिया है, आरफा खानम की भी फिर से बोलती बंद कर दी है।

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सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सरकार लाने जा रही है ये नियम!

देश में पिछले दिनों फेक न्यूज के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसके चलते कई लोगों को अपनी जान से हाथ तक धोना पड़ा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 06 December, 2019
Last Modified:
Friday, 06 December, 2019
Social Media

सोशल मीडिया पर बढ़ते फेक न्यूज के मामलों से निपटने के लिए सरकार तमाम कवायद में जुटी हुई है। इसी कवायद के तहत सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों को अब अपना वेरिफिकेशन कराना पड़ सकता है। ‘अमर उजाला’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक संसद के मौजूदा सत्र में सरकार इसको लेकर एक विधेयक पेश करने वाली है। इस विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद वॉट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसे ऐप का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपना ‘केवाईसी’ (नो योर कस्टमर) कराना होगा।

इस रिपोर्ट के अनुसार, यूजर्स अपना केवाईसी आसानी से करा सकें, इसके लिए कंपनियों को अपने यहां सिस्टम तैयार करना पड़ेगा। केवाईसी के लिए पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या फिर पासपोर्ट जैसे सरकारी डॉक्यूमेंट दिए जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस तरह से सोशल मीडिया पर चल रहे तमाम फर्जी अकाउंट्स पर रोक लग सकेगी। गौरतलब है कि फेक न्यूज की समस्या से सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के तमाम देश जूझ रहे हैं। अपने देश में पिछले दिनों फेक न्यूज के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसके चलते कई लोगों को अपनी जान से हाथ तक धोना पड़ा है।

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न्यूज फेक है या सही, अब ऐसे कर सकते हैं कंफर्म

भारत समेत दुनिया के तमाम देश फेक न्यूज की समस्या से जूझ रहे हैं। तमाम कवायद के बावजूद यह परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 28 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 28 November, 2019
Fake News

आज के दौर में फेक न्यूज के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। भारत समेत दुनिया के तमाम देश फेक न्यूज की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इससे निपटने के प्रयास नहीं किए जा रहे, लेकिन तमाम कवायद के बावजूद यह समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है।

ऐसे में जब वॉट्सऐप पर कोई न्यूज मिलती है तो अधिकांशत: आशंका रहती है कि क्या यह न्यूज सही है? कहीं यह फर्जी तो नहीं? सिर्फ वॉट्सऐप ही नहीं, सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म्स जैसे-फेसबुक और ट्विटर पर मिलने वाली अधिकतर न्यूज को लेकर भी कई लोग उसके सही अथवा फेक होने की आशंका से घिरे रहते हैं।

इस तरह की समस्या से निजात दिलाने के लिए ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ (पीआईबी) ने कवायद शुरू की है। इसके तहत ‘पीआईबी’ ने एक ईमेल एड्रेस जारी किया है। ‘पीआईबी’ की ओर से जारी एक ट्वीट में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति को किसी सूचना/न्यूज के फेक होने की आशंका हो तो उसे ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। वह उस सूचना/न्यूज का स्नैपशॉट अथवा यूआरएल pibfactcheck@gmail.com पर भेज सकता है।

यहां इसे चेक कर पता लगाया जाएगा कि क्या ये फेक है अथवा सही है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। फेक्ट चेक यूनिट में 'पीआईबी' के अधिकारियों को शामिल करने के साथ ही कांट्रै्क्ट के आधार पर कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मॉनीटरिंग कर फेक न्यूज के बारे में पता लगाएंगे। पीआईबी की ओर से जारी ट्वीट में यह भी कहा गया है कि सिर्फ सरकारी विभागों/मंत्रालयों/सरकारी योजनाओं से संबंधित सूचना/न्यूज की ही चेकिंग की जाएगी।

पीआईबी द्वारा इस बारे में किए गए ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

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सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए भारी पड़ गया ये तरीका, पहुंचे हवालात

बेंगलुरु पुलिस ने सात यू-ट्यूबर्स को किया गिरफ्तार, बाद में थाने से मिली जमानत

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
Arrest

भूत-प्रेत का वेश धारण कर लोगों को डराने वाले सात यू-ट्यूबर्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का है। पकड़े गए यू-ट्यूबर्स सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए डरावना मेकअप कर और उसी तरह के कपड़े पहनकर न सिर्फ रात में लोगों को डराते थे, बल्कि विडियो भी शूट कर लेते थे।

इसके बाद ये इन विडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लोगों के ज्यादा से ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट लेते थे। पुलिस के अनुसार, इन सभी को जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें थाने से ही जमानत दे दी गई।

पकड़े गए सभी यू-ट्यूबर्स की पहचान शान मलिक, निवाद, सैम्युअल मोहम्मद, मोहम्मद अख्यूब, शाकिब, सयैद नाबील व युसूफ अहमद के तौर पर हुई है | इन्होंने ‘कूकी पीडिया’ (Kooky Pedia) नाम से यू-ट्यूब चैनल बना रखा है।

पकड़े गए लोग किस तरह लोगों को डराते थे, उसका विडियो आप यहां देख सकते हैं-

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महिला पत्रकार ने कर दिया ऐसा ट्वीट, पुलिस ने दी कार्रवाई की चेतावनी

कई विदेशी पब्लिकेशंस से जुड़ी यह महिला पहले भी सोशल मीडिया पर हो चुकी हैं ट्रोल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 09 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 09 November, 2019
Rana Ayyub

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूर्व इस बारे में एक ट्वीट करने पर महिला पत्रकार राणा अयूब पुलिस के निशाने पर आ गईं। राणा अयूब के इस ट्वीट पर अमेठी पुलिस ने न सिर्फ उन्हें ट्वीट हटाने को कहा बल्कि कार्रवाई की चेतावनी भी दी। बता दें कि शुक्रवार को राणा अयूब ने अपने ट्वीट में लिखा था, ‘भारत के लिए कल का दिन बहुत बड़ा है। मुसलमानों के लिए आस्था की स्मारक बाबरी मस्जिद को छह दिसंबर 1992 को ढहा दिया गया था।‘ राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर टिप्पणी करने के साथ ही राणा अयूब ने अपने ट्वीट में यह उम्मीद भी जताई थी कि कल देश उन्हें निराश नहीं करेगा।

इसके बाद अमेठी पुलिस ने इस ट्वीट को ‘पॉलिटिकल कमेंट’ बताते हुए राणा अयूब से इसे डिलीट करने को कहा। अपने ट्वीट में अमेठी पुलिस का कहना था, ‘इस ट्वीट को तुरंत डिलीट करें नहीं तो पुलिस द्वारा आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’ बता दें कि कई विदेशी पब्लिकेशंस के लिए काम कर रहीं राणा अयूब पहले भी सोशल मीडिया पर ट्रोल हो चुकी हैं।

राणा अयूब द्वारा किए गए ट्वीट और अमेठी पुलिस द्वारा दी गई चेतावनी का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं-

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सोशल मीडिया के बारे में इस तरह की खबरों पर आगे आई पुलिस, जारी किया ये लेटर

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के अपेक्षित फैसले के मद्देनजर पुलिस काफी सतर्कता से उठा रही है कदम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 04 November, 2019
Last Modified:
Monday, 04 November, 2019
Social Media

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के अपेक्षित फैसले के मद्देनजर वहां की पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के बारे में चल रही खबरों का खंडन किया है। इसके साथ ही अयोध्या पुलिस ने ये भी साफ कर दिया है कि धार्मिक सौहार्द्र बिगाड़ने वालों के खिलाफ कठोर करवाई होगी। वहीं, उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओ.पी. सिंह ने कहा है कि अयोध्या मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।

अयोध्या पुलिस की  सोशल मीडिया सेल की ओर से जारी पत्र की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।

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इस बड़ी वजह से फेसबुक ने 200 मीडिया संस्थानों से मिलाया हाथ

इस योजना पर तीन मिलियन डॉलर तक का खर्च कर रही है सोशल मीडिया क्षेत्र की यह दिग्गज कंपनी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 01 November, 2019
Last Modified:
Friday, 01 November, 2019
Facebook

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ ने अपने प्लेटफॉर्म पर ‘न्यूज टैब’ (news tab) के लिए 200 मीडिया संस्थानों के साथ करार किया है। इस न्यूज टैब में दिन भर की प्रमुख राष्ट्रीय स्टोरीज पर फोकस किया जाएगा। बताया जाता है कि हेडलाइंस और न्यूज आर्टिकल के लाइसेंस के लिए फेसबुक तीन मिलियन डॉलर का भुगतान करेगी।

इस बारे में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का कहना है, ‘दो चीजों को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं। इनमें पहली अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज टैब शुरू करने को लेकर है और दूसरी न्यूज पब्लिशर्स के साथ बिजनेस पार्टनरशिप के बारे में है। मुझे लगता है कि यह पार्टनरशिप लंबी चल सकती है।’

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसबुक ने कहा है कि वह जल्द ही भारत में अपनी पेमेंट सर्विस ‘वॉट्सऐप पे’ (WhatsApp Pay) शुरू करेगी। हालांकि, जुकरबर्ग ने अभी इसकी लॉन्चिंग के बारे में कोई समय सीमा नहीं दी है। जुकरबर्ग का कहना है, ‘इस बारे में भारत में हमारा परीक्षण चल रहा है। परीक्षण से पता चलता है कि काफी लोग इसे इस्तेमाल करना चाहते हैं। हमें उम्मीद है कि हम भारत में जल्द ही यह सर्विस शुरू कर देंगे।’

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ये चार पत्रकार भी हुए वॉट्सऐप जासूसी कांड के ‘शिकार’

‘वॉट्सऐप’ द्वारा किए गए इस खुलासे के बाद यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 01 November, 2019
Last Modified:
Friday, 01 November, 2019
whatsapp

लोकसभा चुनावों के दौरान पत्रकारों की जासूसी को लेकर किए गए ‘वॉट्सऐप’ (Whatsapp) के खुलासे के बाद यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल, वॉट्सऐप ने खुलासा किया है कि 2019 के आम चुनावों के दौरान भारत में कई शिक्षाविदों, वकीलों, पत्रकारों और दलित कार्यकर्ताओं की जासूसी के लिए ‘पेगासस’ (PEGASUS) नामक इजरायली स्पाईवेयर का इस्तेमाल किया गया था।

टोरंटों यूनिवर्सिटी की साइबर सिक्योरिटी लैब ‘सिटीजन लैब’ ने हैकिंग के इस मामले की जांच में वॉट्सऐप की मदद की थी। हालांकि, वॉट्सऐप ने उन लोगों के नाम और सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया था, जिनके फोन की निगरानी की गई, लेकिन अब धीरे-धीरे यह नाम सामने आने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जो लोग इस जासूसी का शिकार हुए, उनमें चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय समेत चार पत्रकार भी शामिल थे।  

यह भी पढ़ें: वॉट्सऐप का बड़ा खुलासा, लोकसभा चुनाव में इस तरह हुई पत्रकारों की जासूसी

समाचार4मीडिया डॉट कॉम से लोकसभा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय का कहना है कि उन्हें 28 को पहले एक विदेशी लगने वाले नंबर से फोन आया, पर संदिग्ध नंबर लगने की वजह से उन्होंने उसे नहीं उठाया। फिर उसके बाद उन्हें उसी नंबर से वॉट्सऐप मेसेज मिला था, जिसमें संभावित हैक के बारे में बताया गया था। संतोष भारतीय के अनुसार, सिटीजन लैब के सदस्य द्वारा भेजे गए संदेश को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया था। उस समय उन्हें लगा था कि हैकर ने ये संदेश भेजा है। उन्हें ये मेसेज मिले थे

My name is John Scott-Railton, I am the Senior Researcher at the Citizen Lab at the University of Toronto in Canada. The Citizen Lab works on tracking internet threats against civil society.

 I'm a little bit familiar with who you are, based on our research into an ongoing case, and this message concerns a specific cyber risk that we believe that you faced earlier this year

 I encourage you to use google figure out more about me and the Citizen Lab if you are suspicious. Our website is www.citizenlab.ca and my official e-mail if you would like to verify that I am real is jsr@citizenlab.ca

 We should set up a time to talk. Again I apologize for the strangeness of such a contact, and understand that it may make you suspicious of me. Unfortunately there is no better way to do this kind of thing. I am more than happy to help you verify my identity before we talk more, if you prefer.

संतोष भारतीय के अनुसार, ‘मैं कोई बड़ा पत्रकार नहीं हूं। फिर मुझे क्यों निशाना बनाया गया, यह मेरी समझ से परे है। मुझे लगता है कि शायद निष्पक्ष पत्रकारिता करने वालों को निशाना बनाया गया है।’

संतोष भारतीय की जासूसी की बात जब ट्विटर पर आई तो कई लोगों ने उन्हें एंटी नेशनल कह ट्रोल करना शुरू कर दिया, इस पर संतोष भारतीय कहते हैं कि अगर मैं एंटी नेशनल हूं तो फिर अजीत डोभाल, राजनाथ सिंह या फिर अमित शाह भी एंटी नेशनल है। मैंने भी इन्हीं सबकी तरह देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए काम किया है। जेपी के साथ दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ी है। क्या आधार कार्ड, कश्मीर और लोकसभा चुनावों में मेरा द्वारा पत्रकारिता करते हुए सरकार पर सवाल उठाना एंटी नेशनल एक्टिविटी है? उन्होंने कहा कि मुझसे सरकार को क्या डर है, मैं तो अदना पत्रकार हूं।

संतोष भारतीय के अलावा जासूसी के शिकार हुए लोगों में बीबीसी के पूर्व पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी का नाम भी सामने आ रहा है। शुभ्रांशु चौधरी इन दिनों छत्तीसगढ़ में बतौर एक्टिविस्ट काम कर रहे हैं। ‘चौथी दुनिया’ की खबर के मुताबिक, सिटिजन लैब ने उन्हें भी इस जासूसी के बारे में जानकारी दी थी। शुभ्रांशु ने बताया कि चूंकि वे बस्तर में शांति बहाली की दिशा में जुटे हुए हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया। 

बताया जा रहा है कि ‘जी मीडिया’ के अंग्रेजी न्यूज चैनल विऑन (WION) में काम कर रहे पत्रकार सिद्धांत सिब्बल भी पेगासस ’नामक इस स्पाईवेयर का शिकार हुए हैं। वहीं, इस स्पाईवेयर का शिकार हुए लोगों में स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा का नाम भी सामने आ रहा है। राजीव शर्मा के अनुसार, इस बारे में सिटीजन लैब की ओर से उन्हें भी कुछ समय पूर्व फोन आया था। फोन करने वाले ने मार्च से मई के बीच उनका फोन सर्विलांस पर होने की जानकारी दी थी। राजीव शर्मा का यह भी कहना है कि सिटीजन लैब की ओर से उन्हें फोन बदलने का सुझाव भी दिया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

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जानें, लोगों ने क्यों कहा ‘थैंक यू अरुण पुरी’

31 अक्टूबर को पूरे दिन थैंक यू अरुण पुरी के हैशटैग के साथ सैकड़ों ट्वीट किए गए, इनमें आजतक और इंडिया टुडे की आलोचना भी की गई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 01 November, 2019
Last Modified:
Friday, 01 November, 2019
Aroon Purie

जिस वक्त देश सरदार पटेल की जयंती मना रहा था, उस वक्त ट्विटर पर एक और ट्रेंड बड़ी तेजी से चल रहा था और वह था #ThankYouAroonPurie। जो लोग नहीं जानते कि अरुण पुरी कौन हैं, वह जान लें कि आजतक, इंडिया टुडे समूह के वही सर्वेसर्वा हैं। ऐसे में लोग यह जरूर जानना चाहेंगे कि लोग उन्हें थैंक यू क्यों लिख रहे थे। यह बड़ा ही दिलचस्प मामला है। दरअसल, लोग उन्हें इसलिए थैंक यू लिख रहे थे, क्योंकि ट्वीट करने वाले लोगों के मुताबिक अरुण पुरी ने अपने चैनल ‘आजतक’ पर हिंदू-मुस्लिम की जो डिबेट होती हैं, उन्हें कम करने का फैसला लिया है।

31 अक्टूबर को पूरे दिन थैंक यू अरुण पुरी के हैशटैग के साथ सैकड़ों ट्वीट किए गए। इसके बहाने न केवल अरुण पूरी को थैंक यू कहा गया, बल्कि आजतक और इंडिया टुडे ग्रुप की आलोचना भी की गई कि वह हिंदू-मुस्लिम डिबेट को बढ़ावा देता है। ऐसे में बहुत से लोगों ने उनके कई राष्ट्रवादी मिजाज के एंकर्स को नौकरी से निकालने की शर्त रखते हुए कहा, ‘मैं तभी कहूंगा- थैंक यू अरुण पुरी।’

इस हैशटैग के साथ इंडिया टुडे पत्रिका के पूर्व संपादक दिलीप मंडल का एक ट्वीट भी वायरल हो रहा था,  जो आजकल दलित विचारक के रूप में स्थापित हो चुके हैं और संघ-मोदी विरोधी के रूप में भी। उन्होंने इस हैशटैग के साथ कई ट्वीट किए। जिनमें से प्रमुख ट्वीट यह है- ‘देश के सबसे बड़े हिंदी न्यूज चैनल आजतक के मालिक अरुण पुरी ने खुद हस्तक्षेप करके आदेश दिया है कि चैनल पर हिंदू-मुस्लिम के भड़काऊ कार्यक्रम कम किए जाएं। इसका असर कल से दिखेगा, इस हैशटैग को चलाएं #ThankYouAroonPurie।’

दिलीप मंडल के ट्वीट के बाद इस हैशटैग पर तमाम ट्वीट्स होते रहे और इनमें कई राष्ट्रवादी छवि के एंकर्स को भी निशाने पर लिया गया। कई लोगों ने अरुण पुरी की तारीफ की तो कई लोगों ने आजतक, इंडिया टुडे ग्रुप की आलोचना भी की। ऐसे में यह पता नहीं चल पाया कि अरुण पुरी ने ऐसा कोई आदेश आजतक या इंडिया टुडे ग्रुप के किसी चैनल की एडिटोरियल टीम को दिया भी है या नहीं या केवल कयास के आधार पर ही दिलीप मंडल और बाकी लोग इस ट्वीट को कर रहे हैं।

यह भी हो सकता है कि दिलीप मंडल का एजेंडा ये साबित करने का हो कि आजतक पर हिंदू-मुस्लिम डिबेट को ही टीआरपी के लिए प्राथमिकता दी जाती है। इस मुद्दे पर अभी तक टीवी टुडे ग्रुप का कोई भी बयान नहीं आया है, अगर कुछ आता है तो आपको अपडेट जरूर करेंगे।

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राजनीतिक विज्ञापनों को लेकर ट्विटर ने लिया बड़ा फैसला

ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने दी इस बारे में जानकारी, 15 नवंबर को पूरी पॉलिसी का किया जाएगा खुलासा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 31 October, 2019
Last Modified:
Thursday, 31 October, 2019
Twitter

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ‘ट्विटर’ (Twitter) ने कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर 22 नवंबर से राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगा देगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने इसकी घोषणा की है। डोर्सी ने एक ट्वीट में कहा है, ‘हमने वैश्विक स्तर पर ट्विटर पर सभी राजनीतिक विज्ञापनों को रोकने का निर्णय लिया है। हमारा मानना है कि राजनीतिक संदेश लोगों तक अवश्य पहुंचना चाहिए,  लेकिन उसे खरीदा नहीं जाना चाहिए। क्यों? ये हैं कुछ कारण।’

डोर्सी के अनुसार, ’एक राजनीतिक संदेश तब लोगों तक पहुंचता है, जब लोग किसी अकाउंट को फॉलो करते हैं या संदेश को रिट्वीट करते हैं। लेकिन विज्ञापन के कारण लोगों तक जबरन यह राजनीतिक संदेश पहुंचता है। हमारा मानना है कि इस निर्णय का पैसे को लेकर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।‘ एक अन्य ट्वीट में डोर्सी का कहना है, ‘यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला नहीं है बल्कि यह राजनीतिक संदेश की पहुंच बढ़ाने के लिए भुगतान का मामला है।’ इस निर्णय के बारे में ट्विटर 15 नवंबर को अपनी पूरी पॉलिसी का खुलासा करेगा।

ट्विटर का यह कदम फेसबुक के सीईओ मार्ग जुकरबर्ग के उस निर्णय के विपरीत है, जिसमें जुकरबर्ग ने कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक नहीं लगाएंगे। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार एलिजाबेथ वॉरन फेसबुक पर झूठे राजनीतिक विज्ञापन चला रही हैं, ताकि यह उजागर किया जा सके कि यह प्लेटफॉर्म राजनेताओं को अपने मंच पर झूठ बोलने की कथित रूप से अनुमति कैसे देता है।

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वॉट्सऐप का बड़ा खुलासा, लोकसभा चुनाव में इस तरह हुई पत्रकारों की जासूसी

फिलहाल वॉट्सऐप ने उन लोगों के नाम और सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है, जिनके फोन को ‘हाईजैक’ किया गया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 31 October, 2019
Last Modified:
Thursday, 31 October, 2019
Whatsapp

एक बेहद चौंकाने वाले खुलासे में वॉट्सऐप ने कथित तौर पर पुष्टि की है कि भारत में कई शिक्षाविदों, वकीलों, पत्रकारों और दलित कार्यकर्ताओं की जासूसी के लिए ‘पेगासस ’नामक इजरायली स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जासूसी 2019 के आम चुनावों के दौरान की गई।

‘पेगासस’ इजरायल के एनएसओ ग्रुप द्वारा साइबर जासूसी के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, वॉट्सऐप ने उन लोगों के नाम और सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है, जिनके फोन को हाईजैक किया गया था। कंपनी ने यह दावा जरूर किया है कि उसने संबंधित उपयोगकर्ताओं से संपर्क करके उन्हें सूचित कर दिया था कि उनके हैंडसेट की निगरानी की जा रही थी।

यह खबर फेसबुक के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप द्वारा इजरायल स्थित कंपनी के खिलाफ अमेरिकी संघीय अदालत में मुकदमा दायर करने के कुछ ही दिनों बाद आई है। वॉट्सऐप ने आरोप लगाया है कि इजरायली समूह ने दुनिया भर में लगभग 1,400 वॉट्सऐप उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए ‘पेगासस’ स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया।

वॉट्सऐप ने अदालत को यह भी बताया कि ‘पेगासस’ सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल आईओएस, एंड्रॉयड और ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले स्मार्टफोन को हाईजैक करने के लिए किया गया था। सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी ने इस साल मई में अपने उपयोगकर्ताओं को ऐप को अपग्रेड करने के लिए कहा था, ताकि उस सुरक्षा संबंधी कमी को दूर किया जा सके जो ऐसे मेलवेयर को स्मार्टफोन में प्रवेश करने देती है, जिसका इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह दुर्भावनापूर्ण कोड 29 अप्रैल से 10 मई तक वॉट्सऐप सर्वर के माध्यम से प्रसारित किया गया।

बताया जाता है कि ‘पेगासस’ एनएसओ ग्रुप द्वारा बनाया गया एक वॉट्सऐप स्पाइवेयर है, जिसे हैंडसेट की जासूसी के लिए इस्तेमाल किया गया था। दावा किया गया है कि वॉट्सऐप पर मिस्ड विडियो कॉल से भी ‘पेगासस’ को उपयोगकर्ताओं के स्मार्टफोन तक पहुंच मिल सकती है। इतना ही नहीं, मिस्ड विडियो कॉल से ऑपरेटर स्मार्टफोन मालिक की जानकारी के बिना उसका फोन खोल सकता है और स्पाइवेयर इंस्टॉल कर सकता है।

पेगासस के चलते हैकर ने उपयोगकर्ता के पासवर्ड, संपर्क, कैलेंडर ईवेंट, टेक्स्ट संदेश और यहां तक कि मैसेजिंग ऐप्स पर वॉयस कॉल सहित सभी डेटा को एक्सेस किया। रिपोर्टों के अनुसार, एनएसओ समूह का दावा है कि उसने ‘पेगासस’ को केवल सरकारी एजेंसियों को बेचा है और यह मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों सहित किसी की जासूसी के लिए डिजायन नहीं किया गया है।

वॉट्सऐप द्वारा किए गए खुलासे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल इस मामले पर संज्ञान लेते हुए सरकार को इस संबंध में जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया है। 

वहीं, इस खुलासे के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि सरकार वॉट्सऐप के द्वारा नागरिकों की निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित है। उन्होंने एक ट्वीट कर कहा कि सरकार ने इस मामले में वॉट्सऐप से जवाब मांगा है कि वह किस तरह की सुरक्षा देते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने सक्रियता दिखाते हुए वॉट्सऐप से जवाब मांगा है। वॉट्सऐप को जवाब देने के लिए चार नवंबर तक का समय दिया गया है। 

रविशंकर द्वारा किए गए ट्वीट को आप यहां पढ़ सकते हैं। 


 

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