हकीकत यह है कि कई जगह ग्राम प्रधानों ने इस योजना को अपनी मर्जी से निजी काम कराने का साधन बना लिया, और मनरेगा की वजह से खेती के लिए मजदूर भी कम मिलने लगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।