Linkedin यूजर्स के लिए बहुत काम का है ये नया फीचर, जानें कैसे

तीन साल पहले फेसबुक ने भी जारी किया था ऐसा ही फीचर

Last Modified:
Thursday, 09 May, 2019
Linkedin

सोशल नेटवर्किग साइट ‘लिंक्डइन’ (Linkedin) ने अपना यूजर बेस बढ़ाने के लिए नई कवायद की है। दरअसल, ‘लिंक्डइन’ ने अपने यूजर्स के लिए अब नया फीचर जारी किया है। यह फीचर फेसबुक के फीचर की तरह है, जिसमें किसी भी पोस्ट को लाइक करने के साथ आप उसमें अपना रिएक्शन भी शामिल कर सकते हैं।

इसके लिए ‘लिंक्डइन’ की ओर से ‘लाइक’ (Like) के अलावा अब चार नए रिएक्शन ‘लव’ (Love), ‘सेलिब्रेट’(Celebrate), ‘इनसाइटफुल’ (Insightful) और ‘क्यूरियस’ (Curious) जोड़े गए हैं। यानी आप कोई भी पोस्ट पसंद आने पर अपने हिसाब से उस पर अपना रिएक्शन दे सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ किसी भी पोस्ट पर नजर आने वाले लाइक बटन को कुछ देर दबाकर रखना होगा, जिसके बाद ये सभी रिएक्शन दिखाई देने लगेंगे, जिसके बाद आप अपनी मर्जी से कोई भी रिएक्शन चुन सकते हैं।

गौरतलब है कि फेसबुक भी यूजर्स की पसंद को ध्यान में रखते हुए करीब तीन साल पहले ऐसा ही फीचर लेकर आई थी। माना जा रहा है कि मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपने यूजर्स को आकर्षित करने के लिए ही ‘लिंक्डइन’ की ओर से ये नए रिएक्शन जोड़े गए हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए भारी पड़ गया ये तरीका, पहुंचे हवालात

बेंगलुरु पुलिस ने सात यू-ट्यूबर्स को किया गिरफ्तार, बाद में थाने से मिली जमानत

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
Arrest

भूत-प्रेत का वेश धारण कर लोगों को डराने वाले सात यू-ट्यूबर्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का है। पकड़े गए यू-ट्यूबर्स सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए डरावना मेकअप कर और उसी तरह के कपड़े पहनकर न सिर्फ रात में लोगों को डराते थे, बल्कि विडियो भी शूट कर लेते थे।

इसके बाद ये इन विडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लोगों के ज्यादा से ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट लेते थे। पुलिस के अनुसार, इन सभी को जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें थाने से ही जमानत दे दी गई।

पकड़े गए सभी यू-ट्यूबर्स की पहचान शान मलिक, निवाद, सैम्युअल मोहम्मद, मोहम्मद अख्यूब, शाकिब, सयैद नाबील व युसूफ अहमद के तौर पर हुई है | इन्होंने ‘कूकी पीडिया’ (Kooky Pedia) नाम से यू-ट्यूब चैनल बना रखा है।

पकड़े गए लोग किस तरह लोगों को डराते थे, उसका विडियो आप यहां देख सकते हैं-

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

महिला पत्रकार ने कर दिया ऐसा ट्वीट, पुलिस ने दी कार्रवाई की चेतावनी

कई विदेशी पब्लिकेशंस से जुड़ी यह महिला पहले भी सोशल मीडिया पर हो चुकी हैं ट्रोल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 09 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 09 November, 2019
Rana Ayyub

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूर्व इस बारे में एक ट्वीट करने पर महिला पत्रकार राणा अयूब पुलिस के निशाने पर आ गईं। राणा अयूब के इस ट्वीट पर अमेठी पुलिस ने न सिर्फ उन्हें ट्वीट हटाने को कहा बल्कि कार्रवाई की चेतावनी भी दी। बता दें कि शुक्रवार को राणा अयूब ने अपने ट्वीट में लिखा था, ‘भारत के लिए कल का दिन बहुत बड़ा है। मुसलमानों के लिए आस्था की स्मारक बाबरी मस्जिद को छह दिसंबर 1992 को ढहा दिया गया था।‘ राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर टिप्पणी करने के साथ ही राणा अयूब ने अपने ट्वीट में यह उम्मीद भी जताई थी कि कल देश उन्हें निराश नहीं करेगा।

इसके बाद अमेठी पुलिस ने इस ट्वीट को ‘पॉलिटिकल कमेंट’ बताते हुए राणा अयूब से इसे डिलीट करने को कहा। अपने ट्वीट में अमेठी पुलिस का कहना था, ‘इस ट्वीट को तुरंत डिलीट करें नहीं तो पुलिस द्वारा आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’ बता दें कि कई विदेशी पब्लिकेशंस के लिए काम कर रहीं राणा अयूब पहले भी सोशल मीडिया पर ट्रोल हो चुकी हैं।

राणा अयूब द्वारा किए गए ट्वीट और अमेठी पुलिस द्वारा दी गई चेतावनी का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं-

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सोशल मीडिया के बारे में इस तरह की खबरों पर आगे आई पुलिस, जारी किया ये लेटर

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के अपेक्षित फैसले के मद्देनजर पुलिस काफी सतर्कता से उठा रही है कदम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 04 November, 2019
Last Modified:
Monday, 04 November, 2019
Social Media

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के अपेक्षित फैसले के मद्देनजर वहां की पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के बारे में चल रही खबरों का खंडन किया है। इसके साथ ही अयोध्या पुलिस ने ये भी साफ कर दिया है कि धार्मिक सौहार्द्र बिगाड़ने वालों के खिलाफ कठोर करवाई होगी। वहीं, उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओ.पी. सिंह ने कहा है कि अयोध्या मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।

अयोध्या पुलिस की  सोशल मीडिया सेल की ओर से जारी पत्र की कॉपी आप यहां देख सकते हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

इस बड़ी वजह से फेसबुक ने 200 मीडिया संस्थानों से मिलाया हाथ

इस योजना पर तीन मिलियन डॉलर तक का खर्च कर रही है सोशल मीडिया क्षेत्र की यह दिग्गज कंपनी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 01 November, 2019
Last Modified:
Friday, 01 November, 2019
Facebook

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ ने अपने प्लेटफॉर्म पर ‘न्यूज टैब’ (news tab) के लिए 200 मीडिया संस्थानों के साथ करार किया है। इस न्यूज टैब में दिन भर की प्रमुख राष्ट्रीय स्टोरीज पर फोकस किया जाएगा। बताया जाता है कि हेडलाइंस और न्यूज आर्टिकल के लाइसेंस के लिए फेसबुक तीन मिलियन डॉलर का भुगतान करेगी।

इस बारे में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का कहना है, ‘दो चीजों को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं। इनमें पहली अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज टैब शुरू करने को लेकर है और दूसरी न्यूज पब्लिशर्स के साथ बिजनेस पार्टनरशिप के बारे में है। मुझे लगता है कि यह पार्टनरशिप लंबी चल सकती है।’

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसबुक ने कहा है कि वह जल्द ही भारत में अपनी पेमेंट सर्विस ‘वॉट्सऐप पे’ (WhatsApp Pay) शुरू करेगी। हालांकि, जुकरबर्ग ने अभी इसकी लॉन्चिंग के बारे में कोई समय सीमा नहीं दी है। जुकरबर्ग का कहना है, ‘इस बारे में भारत में हमारा परीक्षण चल रहा है। परीक्षण से पता चलता है कि काफी लोग इसे इस्तेमाल करना चाहते हैं। हमें उम्मीद है कि हम भारत में जल्द ही यह सर्विस शुरू कर देंगे।’

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

ये चार पत्रकार भी हुए वॉट्सऐप जासूसी कांड के ‘शिकार’

‘वॉट्सऐप’ द्वारा किए गए इस खुलासे के बाद यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 01 November, 2019
Last Modified:
Friday, 01 November, 2019
whatsapp

लोकसभा चुनावों के दौरान पत्रकारों की जासूसी को लेकर किए गए ‘वॉट्सऐप’ (Whatsapp) के खुलासे के बाद यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल, वॉट्सऐप ने खुलासा किया है कि 2019 के आम चुनावों के दौरान भारत में कई शिक्षाविदों, वकीलों, पत्रकारों और दलित कार्यकर्ताओं की जासूसी के लिए ‘पेगासस’ (PEGASUS) नामक इजरायली स्पाईवेयर का इस्तेमाल किया गया था।

टोरंटों यूनिवर्सिटी की साइबर सिक्योरिटी लैब ‘सिटीजन लैब’ ने हैकिंग के इस मामले की जांच में वॉट्सऐप की मदद की थी। हालांकि, वॉट्सऐप ने उन लोगों के नाम और सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया था, जिनके फोन की निगरानी की गई, लेकिन अब धीरे-धीरे यह नाम सामने आने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जो लोग इस जासूसी का शिकार हुए, उनमें चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय समेत चार पत्रकार भी शामिल थे।  

यह भी पढ़ें: वॉट्सऐप का बड़ा खुलासा, लोकसभा चुनाव में इस तरह हुई पत्रकारों की जासूसी

समाचार4मीडिया डॉट कॉम से लोकसभा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय का कहना है कि उन्हें 28 को पहले एक विदेशी लगने वाले नंबर से फोन आया, पर संदिग्ध नंबर लगने की वजह से उन्होंने उसे नहीं उठाया। फिर उसके बाद उन्हें उसी नंबर से वॉट्सऐप मेसेज मिला था, जिसमें संभावित हैक के बारे में बताया गया था। संतोष भारतीय के अनुसार, सिटीजन लैब के सदस्य द्वारा भेजे गए संदेश को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया था। उस समय उन्हें लगा था कि हैकर ने ये संदेश भेजा है। उन्हें ये मेसेज मिले थे

My name is John Scott-Railton, I am the Senior Researcher at the Citizen Lab at the University of Toronto in Canada. The Citizen Lab works on tracking internet threats against civil society.

 I'm a little bit familiar with who you are, based on our research into an ongoing case, and this message concerns a specific cyber risk that we believe that you faced earlier this year

 I encourage you to use google figure out more about me and the Citizen Lab if you are suspicious. Our website is www.citizenlab.ca and my official e-mail if you would like to verify that I am real is jsr@citizenlab.ca

 We should set up a time to talk. Again I apologize for the strangeness of such a contact, and understand that it may make you suspicious of me. Unfortunately there is no better way to do this kind of thing. I am more than happy to help you verify my identity before we talk more, if you prefer.

संतोष भारतीय के अनुसार, ‘मैं कोई बड़ा पत्रकार नहीं हूं। फिर मुझे क्यों निशाना बनाया गया, यह मेरी समझ से परे है। मुझे लगता है कि शायद निष्पक्ष पत्रकारिता करने वालों को निशाना बनाया गया है।’

संतोष भारतीय की जासूसी की बात जब ट्विटर पर आई तो कई लोगों ने उन्हें एंटी नेशनल कह ट्रोल करना शुरू कर दिया, इस पर संतोष भारतीय कहते हैं कि अगर मैं एंटी नेशनल हूं तो फिर अजीत डोभाल, राजनाथ सिंह या फिर अमित शाह भी एंटी नेशनल है। मैंने भी इन्हीं सबकी तरह देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए काम किया है। जेपी के साथ दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ी है। क्या आधार कार्ड, कश्मीर और लोकसभा चुनावों में मेरा द्वारा पत्रकारिता करते हुए सरकार पर सवाल उठाना एंटी नेशनल एक्टिविटी है? उन्होंने कहा कि मुझसे सरकार को क्या डर है, मैं तो अदना पत्रकार हूं।

संतोष भारतीय के अलावा जासूसी के शिकार हुए लोगों में बीबीसी के पूर्व पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी का नाम भी सामने आ रहा है। शुभ्रांशु चौधरी इन दिनों छत्तीसगढ़ में बतौर एक्टिविस्ट काम कर रहे हैं। ‘चौथी दुनिया’ की खबर के मुताबिक, सिटिजन लैब ने उन्हें भी इस जासूसी के बारे में जानकारी दी थी। शुभ्रांशु ने बताया कि चूंकि वे बस्तर में शांति बहाली की दिशा में जुटे हुए हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया। 

बताया जा रहा है कि ‘जी मीडिया’ के अंग्रेजी न्यूज चैनल विऑन (WION) में काम कर रहे पत्रकार सिद्धांत सिब्बल भी पेगासस ’नामक इस स्पाईवेयर का शिकार हुए हैं। वहीं, इस स्पाईवेयर का शिकार हुए लोगों में स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा का नाम भी सामने आ रहा है। राजीव शर्मा के अनुसार, इस बारे में सिटीजन लैब की ओर से उन्हें भी कुछ समय पूर्व फोन आया था। फोन करने वाले ने मार्च से मई के बीच उनका फोन सर्विलांस पर होने की जानकारी दी थी। राजीव शर्मा का यह भी कहना है कि सिटीजन लैब की ओर से उन्हें फोन बदलने का सुझाव भी दिया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जानें, लोगों ने क्यों कहा ‘थैंक यू अरुण पुरी’

31 अक्टूबर को पूरे दिन थैंक यू अरुण पुरी के हैशटैग के साथ सैकड़ों ट्वीट किए गए, इनमें आजतक और इंडिया टुडे की आलोचना भी की गई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 01 November, 2019
Last Modified:
Friday, 01 November, 2019
Aroon Purie

जिस वक्त देश सरदार पटेल की जयंती मना रहा था, उस वक्त ट्विटर पर एक और ट्रेंड बड़ी तेजी से चल रहा था और वह था #ThankYouAroonPurie। जो लोग नहीं जानते कि अरुण पुरी कौन हैं, वह जान लें कि आजतक, इंडिया टुडे समूह के वही सर्वेसर्वा हैं। ऐसे में लोग यह जरूर जानना चाहेंगे कि लोग उन्हें थैंक यू क्यों लिख रहे थे। यह बड़ा ही दिलचस्प मामला है। दरअसल, लोग उन्हें इसलिए थैंक यू लिख रहे थे, क्योंकि ट्वीट करने वाले लोगों के मुताबिक अरुण पुरी ने अपने चैनल ‘आजतक’ पर हिंदू-मुस्लिम की जो डिबेट होती हैं, उन्हें कम करने का फैसला लिया है।

31 अक्टूबर को पूरे दिन थैंक यू अरुण पुरी के हैशटैग के साथ सैकड़ों ट्वीट किए गए। इसके बहाने न केवल अरुण पूरी को थैंक यू कहा गया, बल्कि आजतक और इंडिया टुडे ग्रुप की आलोचना भी की गई कि वह हिंदू-मुस्लिम डिबेट को बढ़ावा देता है। ऐसे में बहुत से लोगों ने उनके कई राष्ट्रवादी मिजाज के एंकर्स को नौकरी से निकालने की शर्त रखते हुए कहा, ‘मैं तभी कहूंगा- थैंक यू अरुण पुरी।’

इस हैशटैग के साथ इंडिया टुडे पत्रिका के पूर्व संपादक दिलीप मंडल का एक ट्वीट भी वायरल हो रहा था,  जो आजकल दलित विचारक के रूप में स्थापित हो चुके हैं और संघ-मोदी विरोधी के रूप में भी। उन्होंने इस हैशटैग के साथ कई ट्वीट किए। जिनमें से प्रमुख ट्वीट यह है- ‘देश के सबसे बड़े हिंदी न्यूज चैनल आजतक के मालिक अरुण पुरी ने खुद हस्तक्षेप करके आदेश दिया है कि चैनल पर हिंदू-मुस्लिम के भड़काऊ कार्यक्रम कम किए जाएं। इसका असर कल से दिखेगा, इस हैशटैग को चलाएं #ThankYouAroonPurie।’

दिलीप मंडल के ट्वीट के बाद इस हैशटैग पर तमाम ट्वीट्स होते रहे और इनमें कई राष्ट्रवादी छवि के एंकर्स को भी निशाने पर लिया गया। कई लोगों ने अरुण पुरी की तारीफ की तो कई लोगों ने आजतक, इंडिया टुडे ग्रुप की आलोचना भी की। ऐसे में यह पता नहीं चल पाया कि अरुण पुरी ने ऐसा कोई आदेश आजतक या इंडिया टुडे ग्रुप के किसी चैनल की एडिटोरियल टीम को दिया भी है या नहीं या केवल कयास के आधार पर ही दिलीप मंडल और बाकी लोग इस ट्वीट को कर रहे हैं।

यह भी हो सकता है कि दिलीप मंडल का एजेंडा ये साबित करने का हो कि आजतक पर हिंदू-मुस्लिम डिबेट को ही टीआरपी के लिए प्राथमिकता दी जाती है। इस मुद्दे पर अभी तक टीवी टुडे ग्रुप का कोई भी बयान नहीं आया है, अगर कुछ आता है तो आपको अपडेट जरूर करेंगे।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

राजनीतिक विज्ञापनों को लेकर ट्विटर ने लिया बड़ा फैसला

ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने दी इस बारे में जानकारी, 15 नवंबर को पूरी पॉलिसी का किया जाएगा खुलासा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 31 October, 2019
Last Modified:
Thursday, 31 October, 2019
Twitter

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ‘ट्विटर’ (Twitter) ने कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर 22 नवंबर से राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगा देगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने इसकी घोषणा की है। डोर्सी ने एक ट्वीट में कहा है, ‘हमने वैश्विक स्तर पर ट्विटर पर सभी राजनीतिक विज्ञापनों को रोकने का निर्णय लिया है। हमारा मानना है कि राजनीतिक संदेश लोगों तक अवश्य पहुंचना चाहिए,  लेकिन उसे खरीदा नहीं जाना चाहिए। क्यों? ये हैं कुछ कारण।’

डोर्सी के अनुसार, ’एक राजनीतिक संदेश तब लोगों तक पहुंचता है, जब लोग किसी अकाउंट को फॉलो करते हैं या संदेश को रिट्वीट करते हैं। लेकिन विज्ञापन के कारण लोगों तक जबरन यह राजनीतिक संदेश पहुंचता है। हमारा मानना है कि इस निर्णय का पैसे को लेकर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।‘ एक अन्य ट्वीट में डोर्सी का कहना है, ‘यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला नहीं है बल्कि यह राजनीतिक संदेश की पहुंच बढ़ाने के लिए भुगतान का मामला है।’ इस निर्णय के बारे में ट्विटर 15 नवंबर को अपनी पूरी पॉलिसी का खुलासा करेगा।

ट्विटर का यह कदम फेसबुक के सीईओ मार्ग जुकरबर्ग के उस निर्णय के विपरीत है, जिसमें जुकरबर्ग ने कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक नहीं लगाएंगे। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार एलिजाबेथ वॉरन फेसबुक पर झूठे राजनीतिक विज्ञापन चला रही हैं, ताकि यह उजागर किया जा सके कि यह प्लेटफॉर्म राजनेताओं को अपने मंच पर झूठ बोलने की कथित रूप से अनुमति कैसे देता है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

वॉट्सऐप का बड़ा खुलासा, लोकसभा चुनाव में इस तरह हुई पत्रकारों की जासूसी

फिलहाल वॉट्सऐप ने उन लोगों के नाम और सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है, जिनके फोन को ‘हाईजैक’ किया गया था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 31 October, 2019
Last Modified:
Thursday, 31 October, 2019
Whatsapp

एक बेहद चौंकाने वाले खुलासे में वॉट्सऐप ने कथित तौर पर पुष्टि की है कि भारत में कई शिक्षाविदों, वकीलों, पत्रकारों और दलित कार्यकर्ताओं की जासूसी के लिए ‘पेगासस ’नामक इजरायली स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जासूसी 2019 के आम चुनावों के दौरान की गई।

‘पेगासस’ इजरायल के एनएसओ ग्रुप द्वारा साइबर जासूसी के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, वॉट्सऐप ने उन लोगों के नाम और सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है, जिनके फोन को हाईजैक किया गया था। कंपनी ने यह दावा जरूर किया है कि उसने संबंधित उपयोगकर्ताओं से संपर्क करके उन्हें सूचित कर दिया था कि उनके हैंडसेट की निगरानी की जा रही थी।

यह खबर फेसबुक के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप द्वारा इजरायल स्थित कंपनी के खिलाफ अमेरिकी संघीय अदालत में मुकदमा दायर करने के कुछ ही दिनों बाद आई है। वॉट्सऐप ने आरोप लगाया है कि इजरायली समूह ने दुनिया भर में लगभग 1,400 वॉट्सऐप उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए ‘पेगासस’ स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया।

वॉट्सऐप ने अदालत को यह भी बताया कि ‘पेगासस’ सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल आईओएस, एंड्रॉयड और ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले स्मार्टफोन को हाईजैक करने के लिए किया गया था। सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी ने इस साल मई में अपने उपयोगकर्ताओं को ऐप को अपग्रेड करने के लिए कहा था, ताकि उस सुरक्षा संबंधी कमी को दूर किया जा सके जो ऐसे मेलवेयर को स्मार्टफोन में प्रवेश करने देती है, जिसका इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह दुर्भावनापूर्ण कोड 29 अप्रैल से 10 मई तक वॉट्सऐप सर्वर के माध्यम से प्रसारित किया गया।

बताया जाता है कि ‘पेगासस’ एनएसओ ग्रुप द्वारा बनाया गया एक वॉट्सऐप स्पाइवेयर है, जिसे हैंडसेट की जासूसी के लिए इस्तेमाल किया गया था। दावा किया गया है कि वॉट्सऐप पर मिस्ड विडियो कॉल से भी ‘पेगासस’ को उपयोगकर्ताओं के स्मार्टफोन तक पहुंच मिल सकती है। इतना ही नहीं, मिस्ड विडियो कॉल से ऑपरेटर स्मार्टफोन मालिक की जानकारी के बिना उसका फोन खोल सकता है और स्पाइवेयर इंस्टॉल कर सकता है।

पेगासस के चलते हैकर ने उपयोगकर्ता के पासवर्ड, संपर्क, कैलेंडर ईवेंट, टेक्स्ट संदेश और यहां तक कि मैसेजिंग ऐप्स पर वॉयस कॉल सहित सभी डेटा को एक्सेस किया। रिपोर्टों के अनुसार, एनएसओ समूह का दावा है कि उसने ‘पेगासस’ को केवल सरकारी एजेंसियों को बेचा है और यह मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों सहित किसी की जासूसी के लिए डिजायन नहीं किया गया है।

वॉट्सऐप द्वारा किए गए खुलासे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल इस मामले पर संज्ञान लेते हुए सरकार को इस संबंध में जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया है। 

वहीं, इस खुलासे के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि सरकार वॉट्सऐप के द्वारा नागरिकों की निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित है। उन्होंने एक ट्वीट कर कहा कि सरकार ने इस मामले में वॉट्सऐप से जवाब मांगा है कि वह किस तरह की सुरक्षा देते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने सक्रियता दिखाते हुए वॉट्सऐप से जवाब मांगा है। वॉट्सऐप को जवाब देने के लिए चार नवंबर तक का समय दिया गया है। 

रविशंकर द्वारा किए गए ट्वीट को आप यहां पढ़ सकते हैं। 


 

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

बगदादी की मौत पर राजीव सचान को याद आई बरखा दत्त की ‘हेडमास्टर के बेटे’ वाली बात

द वॉशिंगटन पोस्ट द्वारा बगदादी के बारे में लगाए गए शीर्षक को लेकर सोशल मीडिया पर अखबार की जमकर हो रही है निंदा

Last Modified:
Monday, 28 October, 2019
Rajeev Sachan Barkha Dutt

अमेरिकी सेना की कार्रवाई में कुख्यात आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट का सरगना अबू बकर अल-बगदादी मारा गया। हालांकि, बगदादी के ठिकाने पर अमेरिका विशेष बलों की कार्रवाई में सेना का उद्देश्य उसे जिंदा पकड़ना था, लेकिन बगदादी ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने एक प्रेस कांफ्रेंस में रविवार को इसकी पुष्टि की। बगदादी की मौत के बाद उसे धार्मिक विद्वान बताए जाने पर जाने-माने अखबार ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ (The Washington Post) को काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, बगदादी की मौत को लेकर अखबार ने जो न्यूज पब्लिश की, उसका  शीर्षक था, ‘Abu Bakr al-Baghdadi austere religious scholar at helm fo Islamic State, dies at 48’ हिंदी में इसका मतलब है- कट्टर धार्मिक विद्वान अबू बकर अल बगदादी, जो कि इस्लामिक स्टेट का मुखिया था। वह 48 साल की उम्र में मार दिया गया है।

फिर क्या था, जैसे ही सोशल मीडिया पर यह खबर और उसका शीर्षक आया, तब लोग दंग रह गए। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग इसे जमकर ट्रोल करने लगे। हालांकि, कुछ देर बाद अखबार की तरफ से इस खबर की हेडलाइन बदल दी गई। एडिट कर इसे Abu Bakr al-Baghdadi, Islamic State’s terrorist-in-Chief, dies at 48 कर दिया गया, लेकिन तब तक यह मामला सोशल मीडिया में काफी फैल चुका था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अखबार की इस खबर में यह लाइन नेशनल सिक्योरिटी रिपोर्टर जोबी वारिक ने लिखी थी। बगदादी के लिए इस्तेमाल किए गए उनके शब्दों पर खूब हल्ला हुआ। टि्वटर पर रविवार रात से ही इसी कारण वाशिंगटन पोस्ट की निंदा हो रही है।

दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर इस मामले को लेकर एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने कहा है कि वाशिंगटन पोस्ट ने नीच-घिनौने अल बगदादी की मौत पर हमदर्दी जताकर ‘हेडमास्टर के बेटे’ की याद दिला दी !!#alBaghdadi

दरअसल, राजीव सचान ने इस ट्वीट को उस घटना से जोड़ा है, जब करीब तीन साल पहले जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बुरहान वानी मारा गया था, तब वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने भी कुछ इसी तरह की हेडिंग दी थी, जिसका काफी विरोध हुआ था। 

उस दौरान बरखा दत्त द्वारा किया गया ट्वीट आप यहां पढ़ सकते हैं।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

मीडिया वालों ने सोशल मीडिया के जरिये रोकी गोपाल कांडा की राह!

बीजेपी के कई नेताओं के साथ ही सोशल मीडिया पर सक्रिय पत्रकारों ने भी कांडा के खिलाफ खोल दिया था मोर्चा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 26 October, 2019
Last Modified:
Saturday, 26 October, 2019
Gopal Kanda

हाल ही में हरियाणा में हुए चुनाव के बाद राज्य में सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन देने आगे आए सिरसा से हरियाणा लोकहित पार्टी के विधायक गोपाल कांडा से पार्टी ने अब दूरी बना ली है। सिरसा से मात्र 602 वोटों से जीतने वाले 53 साल के गोपाल कांडा ने गुरुवार रात को बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की थी।

दरअसल, गोपाल कांडा को लेकर भाजपा के अंदर विरोध के स्वर उठने लगे थे। पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने बलात्कार एवं हत्या के आरोपित विधायक गोपाल कांडा का समर्थन लिए जाने की कोशिशों पर आपत्ति व्यक्त करते हुए पार्टी को सलाह दी थी कि वह सत्ता के लिए अपने नैतिक आधार को ना भूलें। यही नहीं, सोशल मीडिया पर पत्रकारों के एक वर्ग ने भी इसे लेकर तमाम सवाल उठाए थे।

दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान का अपने ट्विटर अकाउंट पर कहना था, ‘इससे शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता कि भाजपा गोपाल कांडा के समर्थन से सरकार बनाने जा रही है। ऐसा करने का मतलब है जानबूझकर जीती मक्खी निगलगना... और सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिरना। इसके अलावा उन्होंने एक अन्य ट्वीट में इस मामले को लेकर करारा कटाक्ष किया था।

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार टीवी पत्रकार और यूट्यूब चैनल ‘द फ्रंट’ (The Front) में बतौर संपादक राणा यशवंत ने भी ट्वीट कर गोपाल कांड द्वारा बीजेपी को समर्थन दिए जाने के मुद्दे पर कई सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि यदि सरकार बनाने के लिए बीजेपी को अमित शाह का समर्थन स्वीकार्य है तो बीजेपी से कमजोर कोई दूसरी पार्टी नहीं। 

‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के पूर्व संपादक विनोद कापड़ी ने भी इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया था।

वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजीत अंजुम ने भी एक ट्वीट कर इस मामले में करारा कटाक्ष किया था।

‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर रोहित सरदाना ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर इस मामले को लेकर ट्वीट किया था।

वरिष्ठ टीवी पत्रकार साक्षी जोशी भी इस मामले में पीछे नहीं रहीं। उन्होंने बीजेपी पर व्यंग्य कसते हुए कहा था कि जिसके खिलाफ पार्टी सड़कों पर उतरी थी, आज उसी गोपाल कांड के दाग अच्छे हैं, क्योंकि वे बीजेपी के नए नवेले वच्चे हैं।

माना जा रहा है कि तमाम लोगों समेत सोशल मीडिया पर पत्रकारों के एक वर्ग में भी विरोध के तीखे सुर दिखे तो बीजेपी आलाकमान ने बिना कांडा के ही सरकार बनाने का खाका खींचा। इसके बाद भाजपा ने कांडा से दूरी बनाते हुए ‘जननायक जनता पार्टी’ (जेजेपी) के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया। हरियाणा बीजेपी का कहना है कि गोपाल कांडा को सरकार में शामिल किए जाने का सवाल ही नहीं बनता है।

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2012 को एयर होस्टेस गीतिका शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी और सुसाइड नोट में लिखा था कि वह गोपाल कांडा से परेशान होकर अपनी जान दे रही है। उसने कांडा और उसके सहयोगी अरुणा चड्ढा पर भी परेशान करने के आरोप लगाया था। इस मामले में कांडा पर मुकदमा चल रहा है।

आप अपनी राय, सुझाव और खबरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। (हमें फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और यूट्यूब पर फॉलो करें)

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए