राजदीप सरदेसाई के बारे में नेता ने कही ऐसी बात, भड़क उठे पत्रकार

किसी विषय पर दो लोगों के विचार अलग हो सकते हैं, यह स्वाभाविक है, लेकिन जब बात पत्रकारों की आती है तो यह ‘स्वाभाविक’ एकदम से ‘अस्वाभाविक’ हो जाता है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 27 December, 2019
Last Modified:
Friday, 27 December, 2019
Rajdeep sardesai

किसी एक विषय पर दो लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं, यह स्वाभाविक है। लेकिन जब बात पत्रकारों की आती है तो यह ‘स्वाभाविक’ एकदम से ‘अस्वाभाविक’ हो जाता है। लोग यह तक भूल जाते हैं कि पत्रकार भी उनकी तरह इंसान हैं। नागरिकता संशोधन कानून पर फिलहाल कुछ ऐसा ही माहौल है। वरिष्ठ पत्रकार और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। वजह महज इतनी है कि उन्होंने डिटेंशन सेंटर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावे पर सवाल उठाये। हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी को भी कठघरे में खड़ा किया, लेकिन मोदी के दावे पर सवाल उठाना अधिकांश लोगों को पसंद नहीं आया।

राजदीप ने अपने ‘माय टेक’ शो में सीएए और एनआरसी को लेकर चल रही राजनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि इस सियासत में सत्य पराजित हुआ है। इसके अलावा उन्होंने सीएए को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के संबंध में भी एक ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा ‘सीएए विरोधी हर रैली में मैंने तिरंगा और महात्मा गांधी की फोटो देखी, जबकि कानून के समर्थकों की रैली में तिरंगे के साथ-साथ भगवा झंडा भी दिखाई दिया। इस बारे में सोचें।’

राजदीप ने अपने विचार व्यक्त किये, लेकिन यह कुछ सोशल मीडिया यूजर्स को नागवार गुजरा। भाजपा की नेशनल इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी टीम के इंचार्ज अमित मालवीय ने तो राजदीप के खिलाफ ऑनलाइन पोल ही शुरू कर डाला। इस पोल में उन्होंने पूछा कि क्या राजदीप सरदेसाई को आईएसआईएस का पीआर संभालना चाहिए? हालांकि, राजदीप ने मालवीय को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने जवाबी ट्वीट में कहा ‘मेरे मित्र, इस बेशर्मी भरे भड़काऊ अभियान को आगे बढ़ाएं। मेरा नया साल का संकल्प शांत रहना है! आपका नववर्ष शांतिपूर्ण और खुशहाल हो।’

वहीं, कई पत्रकारों ने अमित मालवीय को अपने इस असभ्य पोल के लिए आड़े हाथ लिया। ‘न्यूज24’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर मानक गुप्ता ने मालवीय से पूछा,‘राजदीप ने कब आईएसआई या किसी अन्य आतंकी संगठन का समर्थन किया और जब नहीं किया तो फिर ऐसे पोल का क्या औचित्य’?

वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में राजदीप के साथ ही एडिटर गिल्ड को टैग करते हुए लिखा ‘मालवीय को इसके लिए कोर्ट में घसीटा जाना चाहिए।’ इसी तरह ‘न्यूज24’ की एसोसिएट एडिटर साक्षी जोशी ने स्वाति के ट्वीट के जवाब में लिखा ‘और ऐसा तब हुआ जब उन्होंने असम के डिटेंशन सेंटर पर एक शो किया और लगातार भाजपा प्रवक्ता से पूछा कि पीएम झूठ क्यों बोलते हैं’!

‘द हिंदू’ की नेशनल एडिटर सुहासनी हैदर और ‘एनडीवी इंडिया’ के वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने भी राजदीप को निशाना बनाने वालों को निशाना बनाया। उमाशंकर ने पूछा है, ‘अमित मालवीय की मानसिक हालत दयनीय है। उन्हें मानसिक अस्पताल में ले जाने की जरूरत है। सवाल है कि इलाज कहां और कब संभव है?               

इस बारे में लोगों का मानना है कि पत्रकारों को भी यह अधिकार है कि वह सरकार के फैसले या किसी अन्य विषय पर अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं। यदि उनकी सोच या विचार आपकी सोच के विपरीत हैं, तो इसका यह मतलब नहीं कि आप उन्हें जिस भाषा में चाहें जवाब दें। आपके पास भी विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका सभ्य और शालीन होना चाहिए।

'माय टेक' में राजदीप सरदेसाई ने सीएए और एनआरसी को लेकर क्या कहा, वह आप यहां इस विडियो में देख सकते हैं-

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रोहित सरदाना ने की ANI की इस पहल की तारीफ, एक गाने से स्मिता प्रकाश ने दिया जवाब

कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए देश लॉकडाउन मोड में चल रहा है और आखिरी दिनों में इसे और भी ज्यादा सख्त कर दिया गया है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
rohit

कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए देश लॉकडाउन मोड में चल रहा है और आखिरी दिनों में इसे और भी ज्यादा सख्त कर दिया गया है। ऐसे में जिन लोगों को अपना फर्ज निभाने के लिए घरों से बाहर निकलना पड़ रहा है, वे पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। वैसे भी कोरोना से लड़ाई में सतर्कता ही बचाव है। मीडिया भी इसमें अपनी अहम भूमिका निभा रही है। इस दौरान सतर्कता बरतते हुए ज्यादातर रिपोर्टर्स कवरेज करते समय एक निश्चित दूरी बनाए हुए हैं। इनमें से तो कई ने माइक पर एक लंबी रॉड बांध ली है ताकि बाइट लेते समय उचित दूरी बनी रहे।    

वहीं इस बीच कोरोना के खिलाफ छेड़ी गई जंग के खिलाफ न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ (ANI) द्वारा  सुरक्षा को लेकर उठाये गए एक ऐहतियाती कदम की ‘आजतक’ के वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरदाना ने तारीफ की है, जिसके बाद उनके ट्वीट पर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।  दरअसल, वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए एएनआई ने अपने माइक को अब मास्क भी पहना दिया है। इसी मास्क वाली माइक की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए रोहित ने लिखा है, ‘गजब किया स्मिता प्रकाश जी, एएनआई के माइक को भी मास्क पहनाया है’। मौजूदा समय में यह संभवतः अपनी तरह का पहला प्रयोग है। इसलिए मास्क वाले माइक पर लोगों का ध्यान ज्यादा जा रहा है।

रोहित के ट्वीट का न्यूज एजेंसी की संपादक स्मिता प्रकाश ने जवाब दिया है। अपने पहले ट्वीट में उन्होंने पुरानी हिंदी फिल्म के गाने से मौजूदा हालत को हल्के-फुल्के अंदाज में समझाने का प्रयास किया है। उन्होंने लिखा है, ‘वक्त ने किया, ये भी एक सितम।’ इसके बाद उन्होंने लिखा है, ‘माइक को हर बाइट के बाद सैनेटाइज किया जाता है, लेकिन कई बार यूनिट अस्पताल से आ रही होती है या उसे वहां जाना होता है। इसलिए अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए ऐसा किया गया है।’

 

पत्रकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एएनआई द्वारा उठाये गए इस कदम की सराहना तो बनती है। वैसे, अमेरिका भी इससे कुछ सीख सकता है। जहां अमेरिकी जान का जोखिम होने के बावजूद मास्क को लेकर गंभीर नहीं हैं, वहीं हमारे यहां माइक को भी मास्क पहनाया जा रहा है।

 

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ITV नेटवर्क की पहल ने जीता पीएम मोदी का दिल, कहा- ...उत्साह बढ़ाने वाला विडियो

कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में देश ‘सामूहिक शक्ति’ का परिचय देने के लिए तैयार है। कोरोना के अंधकार को प्रकाश की ताकत से हराने की बात प्रधानमंत्री ने क्या कही, कि पूरा देश इस ओर एक साथ चल पड़ा है

Last Modified:
Sunday, 05 April, 2020
itv

कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में देश ‘सामूहिक शक्ति’ का परिचय देने के लिए तैयार है। कोरोना के अंधकार को प्रकाश की ताकत से हराने की बात प्रधानमंत्री ने क्या कही, कि पूरा देश इस ओर एक साथ चल पड़ा है। इसी कड़ी में पीएम मोदी के साथ मीडिया भी खड़ा नजर आ रहा है। ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के बाद पीएम मोदी ने ‘ITV नेटवर्क’ की पहल की तारीफ की है।

दरअसल, पीएम मोदी ने देशवासियों से एकजुटता का संदेश देकर सामूहिक संकल्प का प्रदर्शन करने के लिए रविवार रात दीये, मोमबत्ती जलाने की अपील की है , ताकि कोरोना वायरस के खिलाफ छेड़ी गई जंग में पूरा देश एक साथ खड़ा हो सके और कोई खुद को अकेला न महसूस कर सके। लिहाजा इसी कड़ी में  ITV नेटवर्क के नेतृत्व में ‘इंडिया न्यूज’ ने बेहद ही अनूठा तरीका निकालकर लोगों से प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन देने की बात कही है।

दरअसल, ‘इंडिया न्यूज’ ने एक विडियो जारी किया है- ‘आओ मिलकर दिया जलाएं’ गीत के साथ, जो कि बेहद ही खूबसूरत है और इस गीत को मशहूर सूफी गायक कैलाश खैर ने अपनी आवाज दी है। यह विडियो लोगों को भी काफी पसंद आ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी जैसे ही इस विडियो को देखा-सुना, वो खुद को इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने से रोक नहीं पाए।   

पीएम मोदी ने लिखा, ‘कोरोना से लड़ने में मीडिया बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। कैलाश खेर की मधुर आवाज में इंडिया न्यूज का ये विडियो संदेश देशवासियों का उत्साह बढ़ाने वाला है। आओ मिलकर दीया जलाएं… #9pm9minute’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने विडियो संदेश में शुक्रवार को लोगों से अनुरोध किया था कि वे कोरोना वायरस को हराने में देश के 'सामूहिक संकल्प' का प्रदर्शन करने के लिए पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट के लिए अपने घरों की बत्ती बुझाएं और मोमबत्ती, दीये या मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट या टॉर्च जलाएं। पीएम ने कहा था कि हमें कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में 130 करोड़ देशवासियों के महासंकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है, इसलिये पांच अप्रैल, रविवार को रात नौ बजे मैं आप सबके नौ मिनट चाहता हूं। उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति जब एक-एक दिया जलाएगा तो प्रकाश की उस महाशक्ति का अहसास होगा, जिसमें यह उजागर होगा कि हम एक ही मकसद से एकजुट होकर लड़ रहे हैं।

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संकट की घड़ी में दीपक चौरसिया का यह ‘योगदान’ है सबसे अनूठा

मुश्किल समय में जो आपके साथ खड़ा हो वही सच्चा हितैषी कहलाता है। कोरोना से मुकाबले के लिए लोग बढ़-चढ़कर प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर रहे हैं

Last Modified:
Sunday, 05 April, 2020
deepak

मुश्किल समय में जो आपके साथ खड़ा हो वही सच्चा हितैषी कहलाता है। कोरोना से मुकाबले के लिए लोग बढ़-चढ़कर प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर रहे हैं। इसमें आम जनता से लेकर पत्रकार तक शामिल हैं। अब तक कई पत्रकार अपनी कमाई का कुछ हिस्सा इस जंग के नाम कर चुके हैं। उनमें से एक नाम दीपक चौरसिया का भी है।

हालांकि, चौरसिया का यह ‘सहयोग’ बाकियों से अलग और अनूठा है। वह इस लिहाज से कि इसमें उनके परिवार का प्रत्येक सदस्य शामिल है। ‘न्यूज नेशन’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने राहत कोष में जो राशि दान की है, उसमें उनके बच्चों की पॉकेट मनी भी है।

आमतौर पर बच्चे अपनी पॉकेट मनी में किसी को हाथ भी नहीं लगाने देते, लेकिन यदि इतनी छोटी उम्र में वह देशसेवा पर उसे न्यौछावर कर रहे हैं, तो इसके लिए उनकी परवरिश की सराहना बनती है। दीपक की पहचान खुद एक राष्ट्रवादी पत्रकार की है, ऐसे में जब कोरोना के मुकाबले के लिए सरकार आर्थिक मोर्चे पर स्वयं को मजबूत कर रही है उम्मीद थी कि दीपक भी अपनी ज़िम्मेदारी निभाएंगे और वह इस पर पूरी तरह खरे उतरे।

दीपक चौरसिया के साथ-साथ उनके पूरे परिवार ने इस मुश्किल घड़ी में सरकार का साथ दिया। चौरसिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस ‘सहयोग’ की जानकारी दी है। हालांकि, उन्होंने खुद आगे बढ़कर लोगों को यह नहीं बताया कि वह क्या दान कर रहे हैं। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके सहयोग के लिए धन्यवाद कहा, तब उसके जवाब में उन्होंने अपने परिवार के साथ इस लड़ाई में सरकार के साथ खड़े होने की बात कही।

पीएम के ट्वीट के जवाब में चौरसिया ने लिखा, ‘धन्यवाद @narendramodi जी, मैंने अपनी पत्नी अनसुइया और बेटियों के साथ मिलकर एक छोटा सा योगदान दिया है। बेटी आलोकिता (9) और बेटी अलंकृता (5) ने अपनी पॉकेट मनी और परिवार से मिलें उपहारों को #PMCaresFunds में दिए है। इस लड़ाई में देश का बच्चा बच्चा आपके साथ खड़ा है’।

दीपक के इस जवाबी ट्वीट को भाजपा नेता संबित पात्रा ने री-ट्वीट किया है। पात्रा खुद भी पत्रकारों से दान की अपील कर रहे हैं। उनकी अपील पर कुछ पत्रकार आगे भी आये हैं, लेकिन जिस तरह से पूरे चौरसिया परिवार ने राहत कोष में दान करके देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाई है उसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।     

ये भी पढ़ें- वरिष्ठ नेता संबित पात्रा ने 5 पत्रकारों से किया संपर्क, रूबिका लियाकत ने निभाया वादा

ये भी पढ़ें- चित्रा त्रिपाठी ने जगाई थी अलख, अब कोरोना से लड़ाई में कई पत्रकार आये आगे​​​​​​​

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चित्रा त्रिपाठी ने जगाई थी अलख, अब कोरोना से लड़ाई में कई पत्रकार आये आगे

कोरोना से मुकाबले में सरकार के हाथ मजबूत करने वालों में मीडियाकर्मी भी शामिल हो गए हैं। हाल ही में कुछ पत्रकारों ने प्रधानमंत्री राहत कोष में सहयोग राशि दान की।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
CHITRA

कोरोना से मुकाबले में सरकार के हाथ मजबूत करने वालों में मीडियाकर्मी भी शामिल हो गए हैं। हाल ही में कुछ पत्रकारों ने प्रधानमंत्री राहत कोष में सहयोग राशि दान की। खबरों के जरिये देशवासियों तक सटीक जानकारी पहुंचाने वालों का इस तरह मदद के लिए आगे आना सराहनीय है, लेकिन इस ‘सराहनीय’ कार्य की शुरुआत श्रेय आजतक की डिप्टी एडिटर चित्रा त्रिपाठी को दिया जाना चाहिए।

चित्रा ने इस लड़ाई में अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए किसी अपील का इंतजार नहीं किया, उन्होंने बस दान के महत्व को समझा और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा कोरोना से जंग के नाम कर दिया। चित्रा त्रिपाठी ने 26 मार्च को प्रधानमंत्री राहत कोष में डोनेशन दिया था। इस बारे में ट्विटर पर जानकारी देते हुए उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य दान को सार्वजानिक करके वाह-वाही बंटोरने का नहीं बल्कि दूसरों को इसके लिए प्रोत्साहित करना है।

आजतक की डिप्टी एडिटर द्वारा तब जगाई गई अलख का असर अब बाकी मीडियाकर्मियों पर भी दिखाई देने लगा है। यह बात अलग है कि उन्होंने इस ‘असर’ को दर्शाने के लिए ‘अपील’ के आने का इंतजार किया। दूसरे शब्दों में कहें तो कई पत्रकारों ने भाजपा नेता संबित पात्रा की अपील के बाद मदद का हाथ आगे बढ़ाया।

भाजपा नेता ने देश के प्रमुख पांच पत्रकारों से व्यक्तिगत रूप से महामारी से लड़ाई में सहयोग की अपील की थी, जिसमें ‘एबीपी न्यूज’ की पत्रकार रूबिका लियाकत का नाम भी शामिल था। इसके बाद पत्रकारों ने एक-एक करके अपील पर अमल किया और सहयोग राशि दान की। हालांकि, ज्यादातर पत्रकारों ने इसका खुलासा नहीं किया कि वे कितना डोनेशन दे रहे हैं।

ये भी पढ़ें- वरिष्ठ नेता संबित पात्रा ने 5 पत्रकारों से किया संपर्क, रूबिका लियाकत ने निभाया वादा

संबित पात्रा ने अपनी अपील में सभी पत्रकारों को व्यक्तिगत रूप से टैग भी किया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी अपील पत्रकारों तक पहुंची है। मसलन, ‘इंडिया टीवी’ के सुशांत सिन्हा को टैग करते हुए उन्होंने लिखा, ‘न केवल बतौर पत्रकार और @indiatvnews के जाने माने एंकर के रूप में अपितु सोशल मीडिया में भी अपनी अलग पहचान रखने वाले सुशांत सिन्हा से बात हुई। #PMCARES को सराहते हुए सुशांत भाई ने इस कोष में योगदान देने की बात कही है। मैं उनको धन्यवाद देता हूं।’

सुशांत द्वारा डोनेशन की पुष्टि करने के बाद पात्रा ने उन्हें धन्यवाद भी दिया। अपने ट्वीट में पात्रा ने लिखा, ‘धन्यवाद भाई, आपने #PMCaresFunds में योगदान दे न केवल एक बड़े दिल का परिचय दिया है अपितु लाखों को प्रेरणा दी है’। इसी तरह भाजपा नेता ने दूसरे पत्रकारों को भी धन्यवाद दिया।

अधिकांश पत्रकारों ने जहां अपील पर किये गए दान की राशि को सार्वजानिक करने में संकोच किया, वहीं चित्रा त्रिपाठी ने बाकायदा चेक की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट करके यह बताया था कि वह कोरोना से लड़ाई में कितनी राशि दान कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष में एक लाख रुपए डोनेट किये हैं। इस संबंध में अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा था, ‘देश के सामने बड़ा संकट है, ऐसे में हमारी छोटी सी कोशिश कुछ लोगों को बड़ी राहत दे सकती है। PM रिलीफ़ फंड में मैं एक लाख रुपये दे रही हूं। इसे बताने का मकसद सिर्फ ये है कि आप भी अगर सक्षम हैं तो छोटी सी कोशिश जरूर करें’।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस मुश्किल घड़ी में मदद के लिए उठने वाला हर हाथ तारीफ का हकदार है, लेकिन अपील का इंतजार किये बिना स्वेच्छा से यदि ऐसा किया जाए उसकी एक अलग ही बात होती है और इसलिए चित्रा त्रिपाठी की सराहना की जानी चाहिए।  

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वरिष्ठ नेता संबित पात्रा ने 5 पत्रकारों से किया संपर्क, रूबिका लियाकत ने निभाया वादा

कोरोना से मुकाबले के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा है। फिल्मी सितारों से लेकर आम जनता तक प्रधानमंत्री राहत कोष में दान दे रहे हैं, ताकि इस लड़ाई में धन की कमी बाधा न बने

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
rubika liya

कोरोना से मुकाबले के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा है। फिल्मी सितारों से लेकर आम जनता तक प्रधानमंत्री राहत कोष में दान दे रहे हैं, ताकि इस लड़ाई में धन की कमी बाधा न बने। सरकार की तरफ से भी लोगों से ज्यादा से ज्यादा सहायता करने की अपील की जा रही है। साथ ही भाजपा नेता भी अपने स्तर पर प्रयासों में जुटे हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत संबित पात्रा ने देश के पांच पत्रकारों से संपर्क किया है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर इसकी जानकारी दी है।

पात्रा ने लिखा है, ‘मैंने देश के पांच शीर्ष पत्रकारों से बात की और उनसे पीएमकेयर में सहयोग करने को कहा। सभी ने मुझे भरोसा दिलाया कि वे कोरोना से इस लड़ाई में सरकार के साथ हैं। मैं अलग-अलग ट्वीट में उन पत्रकारों नाम बताते हुए उनसे पुन: सहयोग की अपील करूंगा।’

अपने इस ट्वीट में भाजपा नेता ने ‘एबीपी न्यूज’ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत को टैग किया है। यानी उन्होंने जिन पांच पत्रकारों से बात की है, उसमें पहला नाम रूबिका का है।

पात्रा के ट्वीट के जवाब में रूबिका ने उन्हें बताया है कि वे पीएमकेयर को सहयोग राशि पहले ही दान कर चुकी हैं। ‘एबीपी न्यूज’ की पत्रकार ने लिखा है, ‘धन्यवाद डॉक्टर पात्रा, जैसा कि मैंने आपसे वादा किया था, मैंने पीएमकेयर में डोनेशन दे दिया है।’

इसके बाद रूबिका ने लोगों से भी बढ़-चढ़कर इसका हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने आगे लिखा है, ‘मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई। आप सब भले ही ट्विटर पर हैं, लेकिन मेरा परिवार हैं। इसलिए हक से कह रही हूं आगे आइए देश को आपकी जरूरत है। अपने सामर्थ्य के हिसाब से जो बन पड़े दीजिए’।

रूबिका लियाकत सोशल मीडिया पर उन लोगों की तारीफ भी कर रही हैं, जो इस संकट की घड़ी में सकरार के साथ खड़े हैं, फिर वे चाहे कितनी भी राशि क्यों न डोनेट करें।

अंशु नंदन नामक एक यूजर ने 101 रुपए दान करने के लिए साथ लिखा है कि मैं एक स्टूडेंट हूं और जितना हो सका, मैंने डोनेट किया। इस पर रूबिका ने उसकी तारीफ करते हुए कहा, ‘अंशु शुक्रिया, बूंद-बूंद से सागर बनता है। आपका ये योगदान बहुत कीमती है’।

 

 

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है संदीप चौधरी का ‘सबसे बड़ा सवाल’, जानें क्यों?

सोशल मीडिया पर यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि समुदाय विशेष वायरस से मुकाबले की सरकारी तैयारियों को पलीता लगाने में जुटा है। कुछ मीडिया संस्थान भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
sandeep

कोरोना के खौफ के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में हुए तबलीगी जमात कार्यक्रम को साम्प्रदायिक चश्मे से देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि समुदाय विशेष वायरस से मुकाबले की सरकारी तैयारियों को पलीता लगाने में जुटा है। कुछ मीडिया संस्थान भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, न्यूज़24 के वरिष्ठ पत्रकार संदीप चौधरी ने एक अलग तस्वीर पेश करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि ‘तबलीगी जमात’ की आड़ में धर्म की राजनीति उचित नहीं, क्योंकि जिस दौरान यह कार्यक्रम चल रहा था, उस वक्त मंदिरों में भी भीड़ उमड़ रही थी। कई वरिष्ठ पत्रकार इसके लिए संदीप की सराहना कर रहे हैं, वहीं, विरोध करने वालों की भी अच्छी खासी तादाद है।

दरअसल, संदीप ने अपने चर्चित शो ‘सबसे बड़ा सवाल’ में तबलीगी जमात का मुद्दा उठाया था, जिसमें उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि आखिर किसकी नाकामी से निजामुद्दीन में इतने बड़े पैमाने पर लोग जुटे। इस चर्चा में विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ, आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडे और यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह बतौर अतिथि उपस्थित थे। संदीप ने सबसे पहला सवाल शाहनवाज हुसैन से पूछा, जिसका वह कोई सीधा जवाब नहीं दे सके। उन्होंने पूछा, ‘आपके दिल्ली भाजपा अध्यक्ष इसे साजिश करार दे रहे हैं, क्या आप इससे सहमत हैं’? इसके जवाब में शाहनवाज कभी पीएम मोदी, तो कभी यहां-वहां की बातें करते रहे। काफी देर तक भाजपा प्रवक्ता से कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला तो संदीप चौधरी ने उन्हें रोकते हुए कोरोना की क्रोनोलॉजी समझानी शुरू की। हालांकि, इससे पहले उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तबलीगी जमात कार्यक्रम में भीड़ का जुटना, देश में संक्रमण के खतरे को बढ़ाने जैसा था। उन्होंने आगे कहा, ’13 मार्च को देश का स्वास्थ्य मंत्रालय कहता है कि कोरोना से घबराने की ज़रूरत नहीं है। 13 से मार्च 15 तक डेढ़ हजार लोग थे निजामुद्दीन में, तो 16 मार्च तक सिद्धि विनायक मंदिर बंद नहीं था। 16 तक उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बंद नहीं था, 17 मार्च तक शिर्डी का साईंबाबा मंदिर बंद नहीं था। 18 मर्च तक वैष्णो देवी का मंदिर बंद नहीं था, 20 मार्च तक काशी विश्वनाथ का मंदिर बंद नहीं था। 19 तारीख को प्रधानमंत्री पहली बार सोशल डिस्टेसिंग की बात करते हैं, और आप सबकुछ निजामुद्दीन पर डाल देंगे, हमारी व्यवस्था क्या है’?

संदीप चौधरी के अपनी बात खत्म करते ही शाहनवाज फिर सरकार की तैयारियों पर बोलने लगे। लेकिन सीधे सवाल का घुमावदार जवाब चौधरी को पसंद नहीं आया और वह फिर से क्रोनोलॉजी पर लौट आये। उन्होंने कहा, ’23 मार्च तक संसद चली, उसमें दुष्यंत भी मौजूद थे, जो पॉजिटिव पाई गईं कनिका कपूर की पार्टी में थे, 23 को ही मध्यप्रदेश में शपथ ग्रहण होता है, जहां 300 लोग मौजूद होते हैं। उनमें कोरोना पॉजिटिव लोग भी थे, आप उन पर सवाल नहीं उठाएंगे’? हालांकि, इतने सब के बाद भी शाहनवाज सवाल का सीधा जवाब देने से बचते रहे।

चौधरी का यह विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ओम थानवी ने संदीप चौधरी की तारीफ करते हुए फेसबुक पर लिखा है, ‘यह साहस है पत्रकारिता का, संदीप चौधरी जैसे लोग हमारे मीडिया में कितने हैं, जो भीड़ के मानस की परवाह न करते हुए हल्ले का दूसरा पहलू भी देख पाते हैं’? इसी तरह कई अन्य पत्रकारों ने भी इस बड़े मुद्दे की एक अलग तस्वीर पेश करने के लिए संदीप की सराहना की है। हालांकि, एनडीटीवी के विदेश मामलों के संपादक उमाशंकर सिंह की सोच कुछ जुदा है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर संदीप चौधरी का विडियो पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘संदीप के शो के इस टुकड़े को मैंने भी देखा। जुटने वाली हर भीड़ पर सवाल उठाना बिल्कुल सटीक है लेकिन एक की गलती को दूसरे की गलती से नहीं काटा जा सकता। संदीप की ये मंशा भी नहीं होगी। लेकिन जो लोग इसे सिर्फ़ इसलिए शेयर कर रहे हैं कि ये ‘मरकज़ की गलती का जवाब’ है, वे भी बीमार हैं’। जिसके जवाब में वरिष्ठ पत्रकार अजित अंजुम ने कहा है, ‘सहमत, अगर उन जगहों पर भी कोई हादसा होता तो सवाल उठते। जब और जहां घटना होती तो बात वहीं से शुरू होती है। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि #TablighiJamaat की लापरवाही और मौलाना की जहालत वाली तकरीर के आधार पर #CoronaJihad और #biojihad ट्रेंड कराकर पूरी कौम पर चोट करना कट्टरता है।’  

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अजीत अंजुम ने क्यों कहा, ‘...तो मैं देशद्रोही ही सही’

लॉकडाउन के बीच पलायन करते मजदूरों के कई विडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनमें से कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें देखकर आंखें नम हो जाएं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
ajit-anjum

लॉकडाउन के बीच पलायन करते मजदूरों के कई विडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनमें से कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें देखकर आंखें नम हो जाएं। मजदूरों के इस हाल को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया और कई पत्रकारों ने उनकी व्यथा को शब्दों के जरिये लोगों के सामने रखने का प्रयास किया। इस ‘प्रयास’ में वरिष्ठ पत्रकार व ‘इंडिया टीवी’ के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम भी शामिल रहे। उन्होंने ट्विटर पर इस विषय में कई ट्वीट किये।

इसके अलावा, मीडिया के कुछ वॉट्सऐप ग्रुप पर उन्होंने मजदूरों का दर्द बयां करती एक कविता भी शेयर की, जिसे संजय कुंदन ने लिखा है और दिलीप गुप्ता ने आवाज दी है। इस कविता में जो विडियो इस्तेमाल किया गया है, उसे अजीत अंजुम ने शूट किया है। उन्हें उम्मीद थी कि लोग खासकर, पत्रकार मजदूरों के दर्द को समझने का प्रयास करेंगे, लेकिन हुआ इसके एकदम उलट।

एक वरिष्ठ पत्रकार, जो अजीत अंजुम के दोस्त भी हैं, उन्होंने कविता पर कड़ी आपत्ति जताई। इतना ही नहीं, उन्होंने पलायन की बात करने वालों को देशद्रोही भी करार दे डाला। इस मुद्दे को लेकर अंजुम और उनके दोस्त के बीच ग्रुप पर तीखी बहस भी हुई। अंजुम ने खुद इस बारे में अपने यूट्यूब चैनल पर बताया है। हालांकि, उन्होंने उन्हें देशद्रोही ठहराने वाले पत्रकार का नाम उजागर नहीं किया है। उन्होंने हैरानी भी जताई कि कैसे कोई पत्रकार इतने संवेदनशील मुद्दे पर आंखें मूंदे रह सकता है और दूसरों को देशद्रोही करार दे सकता है?

अपने विडियो में अजीत अंजुम ने यह भी साफ किया है कि क्यों उनके जैसे लोगों को बेवजह निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा, ‘आजकल यह हो गया है कि जो प्रधानमंत्री मोदी के ऐलान या उनकी योजनाओं को थोड़ा भी डेंट करता हो या उनकी घोषणाओं की कमियों को उजागर करता हो, वह देशद्रोही हो जाता है। वहां तक तो ठीक है, लेकिन आज देशद्रोही इसलिए कहा गया कि मजदूरों की बात हो रही है। मजदूरों की बात हुई, तो सरकार की नाकामी की बात हुई। मोदी ने जो लॉकडाउन का ऐलान किया उसकी कुछ खामियां थीं, जिनकी वजह से मजदूर सड़कों पर आये या उन्हें रोकने की जो कोशिश सरकारों द्वारा होनी चाहिए थी वो नहीं हो सकी। अब इन सबका गुस्सा हम जैसे पत्रकारों पर निकाला जा रहा है।’

वैसे अजीत अंजुम ही अकेले नहीं हैं, जिन्होंने पलायन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को कठघरे में खड़ा किया है। कई अन्य वरिष्ठ पत्रकारों का भी यही मानना है कि लॉकडाउन से पूर्व पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। हालांकि, यह बात अलग है कि ज़्यादातर लोगों की सोच इसके विपरीत है। वे मानते हैं कि पलायन को बेवजह मुद्दा बनाया जा रहा है, ताकि लॉकडाउन को असफल करार दिया जा सके। यही वजह है कि जब कोई पलायन की बात करता है, तो उसे निशाना बनाना शुरू हो जाता है।     

यहां सुनिए वो कविता-

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शेखर गुप्ता के ‘कल’ पर जोस कोवाको की कॉमेडी मचा रही धमाल

लॉकडाउन के मौसम में यदि आप किराना या सब्जी की होम डिलीवरी के लिए फोन लगाते हैं, तो अव्वल तो फोन लगेगा नहीं और यदि लग भी गया तो जवाब होगा ‘अभी संभव नहीं है, कल देखते हैं’।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
shekhar gupta

लॉकडाउन के मौसम में यदि आप किराना या सब्जी की होम डिलीवरी के लिए फोन लगाते हैं, तो अव्वल तो फोन लगेगा नहीं और यदि लग भी गया तो जवाब होगा ‘अभी संभव नहीं है, कल देखते हैं’। इस सामान्य किंतु परेशान करने वाले जवाब को कॉमेडियन जोस कोवाको ने एक अनोखे अंदाज में पेश किया है। अंदाज कुछ ऐसा है कि आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे।

वरिष्ठ पत्रकार और ‘द प्रिंट’ के संस्थापक शेखर गुप्ता तो जोस की इस कॉमेडी से इतना प्रभावित हुए कि उसे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट ही कर दिया। वैसे, शेखर गुप्ता के प्रभावित होने की एक वजह उनका अप्रत्यक्ष रूप से कॉमेडी का हिस्सा होना भी है। दरअसल, जोस कोवाको ने शेखर के पुराने विडियो को इस्तेमाल करके अपना कॉमेडी विडियो तैयार किया है। इस विडियो में शेखर आने वाले कल के बारे में बात कर रहे हैं और जोस ने यह बताने का प्रयास किया है कि वो कल कभी आता ही नहीं है। यानी अगर आप होम डिलीवरी के लिए फोन करेंगे, तो जिस कल की बात की जायेगी, ये वही कभी न आने वाला ‘कल’ होगा।

शेखर गुप्ता ने जोस के विडियो को शेयर करते हुए लिखा है, ‘दोस्तों आप मुझे धन्यवाद कहेंगे, क्योंकि मैंने आपको इस माहौल में हंसने का मौका दिया है। मैंने अब तक सैंकड़ों मीम देखे हैं, लेकिन इसके जैसा कोई नहीं लगा’।

इस विडियो में दिखा गया है कि जोस कोवाको एक सब्जी विक्रेता से होम डिलीवरी की बात करते हैं और जवाब में शेखर के संपादित विडियो को प्ले किया जाता है, जिसमें वह ‘कल’ की बात करते हैं। जोस दूसरे विडियो के साथ इसी तरह एडिटिंग करके कॉमेडी करने के लिए पहचाने जाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे को लेकर भी उनका कॉमेडी विडियो काफी वायरल हुआ था। इस विडियो में वे एक कॉल सेंटर के प्रतिनधि के किरदार में नजर आये थे और डोनाल्ड ट्रंप को कुछ प्रश्न कर रहे थे।      

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कोरोना से बुरी तरह प्रभावित मीडिया इंडस्ट्री की Facebook यूं कर रही मदद

भारत समेत पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। दुनियाभर के वैज्ञानिक और सरकारें इस जानलेवा वायरस को हराने की कोशिशों में जुटी हैं।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
Facebook

भारत समेत पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। दुनियाभर के वैज्ञानिक और सरकारें इस जानलेवा वायरस को हराने की कोशिशों में जुटी हैं। वहीं सभी संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर लोगों को राहत पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। इसी कड़ी में अब सोशल मीडिया की अग्रणी कंपनी फेसबुक भी मदद के लिए आगे आई है।  

इस मुश्किल दौर में फेसबुक ने अमेरिका की न्यूज इंडस्ट्री को 10 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद देने की पेशकश की है। फेसबुक ने सोमवार को कहा कि वह वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह प्रभावित मीडिया संस्थानों को 10 करोड डॉलर की मदद देगा। उसने कहा कि परेशानी के समय में भरोसेमंद सूचना देने के लिए इसकी जरूरत है। 

इसके लिए फेसबुक ने एक फंड बनाया है, जिसमें जर्नलिज्म प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय खबरों के लिए इंडस्ट्री को 25 मिलियन यानी 2.5 करोड़ डॉलर दिए जाएंगे। इस इमरजेंसी फंड का मकसद मुख्य तौर पर महामारी के दौर में न्यूज इंडस्ट्री को मदद पहुंचाना है।

इसके अलावा फेसबुक ने 75 मिलियन डॉलर यानी 7.5 करोड़ डॉलर दूसरे मार्केटिंग खर्चों के लिए देने का ऐलान किया है। इस सहायता राशि के तहत पहले चरण की मदद अमेरिका और कनाडा के 50 न्यूजरूम को दी जा चुकी है। इसके अलावा पब्लिशर्स, फेसबुक द्वारा दी गई मदद के जरिए कोरोना वायरस की कवरेज को पूरा कर रहे हैं, इसमें उनके यात्रा के खर्चे, रिमोट कार्य की क्षमताओं और फ्री-लांस रिपोर्टर्स की हायरिंग का काम शामिल है जिनके जरिए इस समय में कोरोना वायरस की विस्तृत कवरेज की जा रही है।

इसके अलावा फेसबुक ने एलान किया है कि वो इस मुश्किल समय में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों को मदद कर रहा है और इन देशों में पब्लिशर्स को सहायता राशि मुहैया करा रहा है।

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ट्रोलर्स के निशाने पर आया NDTV, चीन से कुछ यूं जोड़कर कराया गया ट्रेंड

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ‘एनडीटीवी’ की एक अलग छवि है। कुछ इसे निष्पक्ष मानते हैं, तो कुछ को लगता है कि उसका फोकस सरकार विरोधी खबरों पर रहता है।

Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
NDTV

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ‘एनडीटीवी’ की एक अलग छवि है। कुछ इसे निष्पक्ष मानते हैं, तो कुछ को लगता है कि उसका फोकस सरकार विरोधी खबरों पर रहता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर ‘एनडीटीवी’ अकसर ट्रेंड करता रहता है। फिलहाल ट्विटर पर उसके खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। #NDTVirus नाम के इस कैंपेन में लोग तरह-तरह से मीडिया हाउस के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहे हैं।

दरअसल, इस अभियान की शुरुआत काफी हद तक निहा मसीह नामक पत्रकार के उस ट्वीट से हुई, जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस को चीनीवायरस कहने को जातिवादी करार दिया है। उन्होंने लिखा है ‘भारत में सभी को शर्म आनी चाहिए। कोरोना वायरस को चीनी वायरस करार देना जातिवादी और घिनौना है।’ निहा ने अपने ट्विटर पर अपने बारे में बताया है कि वह विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए काम कर चुकी हैं, जिसमें एनडीटीवी का भी नाम है। बस इसी वजह से लोगों का एनडीटीवी के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। 

 

#NDTVirus का हिस्सा बनने वाले यूजर्स का कहना है कि एनडीटीवी चीन के इशारों पर काम कर रहा है। मिथुन नामक एक यूजर ने लिखा है, चीन ने कथित रूप से अपना दुष्प्रचार फैलाने के लिए मीडिया को खरीदा है और एनडीटीवी भी इसका हिस्सा है। इसलिए, मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि आप अपने हर ट्वीट में हैशटैग #ChinaVirus #NDTVirus का उपयोग करें’।

साथ ही चैनल की कुछ ऐसी खबरों को भी शेयर किये जा रहा है, जिसमें चीनी सरकार का कोरोना को लेकर बयान है। इसके अलावा, एनडीटीवी का एक ट्वीट भी उसके लिए परेशानी का सबब बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल किये जा रहे इस ट्वीट में सरकार के राहत पैकेज की राशि को 1.7 करोड़ बताया गया है, जबकि असल में यह राशि 1.7 लाख करोड़ है। हालांकि चैनल का ट्वीट असली है या उससे छेड़छाड़ की गई है, कहना मुश्किल है, क्योंकि एनडीटीवी के ट्विटर पेज पर ढूंढने पर फिलहाल यह ट्वीट नहीं मिला है, पर जो ट्वीट मिला है उसे नीचे पढ़ सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि कोरोना वायरस के खौफ के बीच ‘एनडीटीवी’ के खिलाफ छेड़ा गया यह अभियान अभी चलता रहेगा। 

 

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