दिल्ली हिंसा की जांच कर रही समिति ने इस वजह से फेसबुक इंडिया को जारी किया समन

दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। इसी की जांच कर रही  दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति ने फेसबुक इंडिया को समन जारी किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 02 November, 2021
Last Modified:
Tuesday, 02 November, 2021
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दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। इसी की जांच कर रही  दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति ने फेसबुक इंडिया को समन जारी किया है और दो नवंबर को अपने एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को उसके समक्ष पेश होने को कहा है। शांति एवं सदभाव समिति के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

बयान में कहा गया है कि चूंकि फेसबुक के दिल्ली में लाखों यूजर्स हैं, इसलिए उसे उच्चतम न्यायालय के आठ जुलाई 2021 के अनुसार समन जारी किया गया है। न्यायालय ने कहा था कि समिति के पास सदस्यों और गैर-सदस्यों को अपने सामने पेश होने का निर्देश देने की शक्ति है।

बयान में कहा गया है कि समिति असामंजस्य पैदा करने और शांति को प्रभावित कर सकने वाले ‘झूठे तथा दुर्भावनापूर्ण संदेशों के प्रसार को रोकने में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका’ पर चर्चा करना चाहती है।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 23 से 26 फरवरी 2020 के बीच नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। 

समिति, इस हिंसा की जांच कर रही है, ताकि हालात को शांत करने और धार्मिक समुदायों, भाषाई समुदायों या सामाजिक समूहों के बीच सद्भाव बहाल करने के लिए उपयुक्त उपायों की सिफारिश की जा सके।

इस मामले में ‌समिति ने अध्यक्ष राघव चड्ढा के माध्यम से पहले सात अत्यंत महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ की है, जिनमें पत्रकारों, पूर्व नौकरशाहों और सहित कई व्यक्तियों को सुना गया है। इनमें प्रख्यात पत्रकार और लेखक परंजॉय गुहा ठाकुरता, डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता निखिल पाहवा, वरिष्ठ पत्रकार अवेश तिवारी, प्रख्यात स्वतंत्र और खोजी पत्रकार कुणाल पुरोहित, न्यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ, ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा और फेसबुक इंक के पूर्व कर्मचारी मार्क एस लक्की शामिल हैं। यह लोग समिति के समक्ष उपस्थित हुए और बहुमूल्य साक्ष्य एवं सुझाव प्रस्तुत किये।

समिति ने मीडिया को कार्यवाही में भाग लेने के लिए आमंत्रित करने और कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने का निर्णय लिया है। पूरी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी।

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बार-बार याचिका दायर करने पर दिल्ली HC ने फेसबुक को लगायी फटकार

इस मामले में फेसबुक की याचिका तीसरी बार खारिज हुई है। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने फटकार लगाते हुए कहा कि ‘मुकदमा दायर करने के अवसरों’ का कुछ अंत होना चाहिए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 29 September, 2022
Delhi HC

दिल्ली हाई कोर्ट ने फेसबुक इंडिया की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा अपनी कंपनी वॉट्सऐप की 2021 की निजता नीति (प्राइवेसी पॉलिसी) की जांच के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

बता दें कि इस मामले में कंपनी की याचिका तीसरी बार खारिज हुई है। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने फटकार लगाते हुए और यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि ‘मुकदमा दायर करने के अवसरों’ का कुछ अंत होना चाहिए।

फेसबुक इंडिया ने अगस्त में हाई कोर्ट की एक खंडपीठ द्वारा संबंधित मामले में अपील को खारिज करने के बाद एकल न्यायाधीश की पीठ का रुख किया था।

खंडपीठ ने 25 अगस्त को वॉट्सऐप और फेसबुक की उन अपीलों को खारिज कर दिया था, जो सीसीआई के आदेश से की जा रही जांच को चुनौती देने के अनुरोध को खारिज करने विरोध में दायर की गई थी।

इस मामले की ताजा सुनवाई में न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि सीसीआई जांच को चुनौती देने वाली फेसबुक इंक की याचिका को खंडपीठ पहले ही खारिज कर चुकी है।

हाई कोर्ट ने याचिका निरस्त करते कहा, ‘आप अब अचानक उठे और आदेश को चुनौती दें रहे हैं। अब बहुत हो गया है। ‘मुकदमेबाजी के लिए अवसरों’ का कुछ अंत होना चाहिए।’

पिछले साल अप्रैल में, हाई कोर्ट की एकल न्यायाधीश की पीठ ने सीसीआई द्वारा निर्देशित जांच को रोकने से इनकार कर दिया था और वॉट्सऐप और फेसबुक (अब ‘मेटा’) की याचिका खारिज कर दी थी।

जनवरी 2021 में वॉट्सऐप की नई निजता नीति (प्राइवेसी पॉलिसी) की सीसीआई ने जांच की घोषणा की थी और कहा था कि इस नीति के जरिए वॉट्सऐप यूजर्स का ऐसा डेटा जमा कर सकता है, जिसका उपयोग भारत में बाजार की स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने में हो सकता है।

इस पर वॉट्सऐप का कहना था कि सीसीआई यह जांच नहीं कर सकता, नीति भी अभी लागू नहीं की जा रही है। इसके लिए भारत का डेटा संरक्षण कानून बनने और संबंधित मामलों में सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेशों का इंतजार किया जाएगा।

फेसबुक का तर्क था कि यह जांच सीसीआई का क्षेत्र नहीं है, भले ही उसे कंपनियों के खिलाफ कोई ठोस सामग्री प्रथम दृष्टया मिली हो।

सीसीआई का पक्ष था कि वह कंपनी की निजता नीति की नहीं, बल्कि वॉट्सऐप व फेसबुक द्वारा यूजर्स की जानकारियों को स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के आरोपों की जांच कर रहा है।

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गूगल इंडिया में पब्लिक पॉलिसी की हेड अर्चना गुलाटी ने दिया इस्तीफा

दिग्गज टेक कंपनी गूगल इंडिया में पब्लिक पॉलिसी की हेड अर्चना गुलाटी ने यहां जॉइनिंग के पांच महीने बाद ही कथित तौर पर इस्तीफा दे दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 27 September, 2022
Archana45781

दिग्गज टेक कंपनी गूगल इंडिया में पब्लिक पॉलिसी की हेड अर्चना गुलाटी ने यहां जॉइनिंग के पांच महीने बाद ही कथित तौर पर इस्तीफा दे दिया है। फिलहाल उनके इस्तीफे के कारणों का तत्काल पता नहीं चल पाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्चना गुलाटी का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब गूगल के खिलाफ दो मामलों में कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) का फैसला आने वाला है।

अर्चना गुलाटी का यह इस्तीफा ऐसे समय में समय गूगल के खिलाफ दो मामलों में कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) का फैसला आने वाला है। गूगल भारत में कई अविश्वास के मामलों और टेक सेक्टर से जुड़े सख्त नियमों का सामना कर रहा है। इस समय CCI की स्मार्ट टीवी मार्केट में गूगल के कारोबार करने के तरीके, इसके एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम और साथ ही इसके इन-ऐप पेमेंट सिस्टम पर कड़ी नजर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल के खिलाफ कम से दो मामलों में CCI जल्द फैसला सुनाने वाली है।

गूगल में आने से पहले वह लंबे समय तक भारत सरकार की कर्मचारी थीं।  गुलाटी इससे पहले केंद्र सरकार के थिंक-टैंक कहे जाने वाले नीति आयोग में काम करती थीं। मार्च 2021 तक नीति आयोग में वह डिजिटल कम्युनिकेशंस की जॉइंट सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रही थीं। वह भारतीय सिविल सेवा के 1989 बैच की अधिकारी हैं और अब रिटायर हो चुकीं हैं। 

इससे पहले वह 2014 से 2016 के बीच, कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के मर्जर एंड एक्विजिशन डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिशियल के रूप में सेवाएं दे रही थीं।

गूगल सहित कई बड़ी टेक कंपनियों ने हाल में भारत सरकार के कई पूर्व-अधिकारियों को हायर किया है। दरअसल टेक कंपनियां इस समय केंद्र सरकार कड़े डेटा और प्राइवेसी नियमों के साथ-साथ CCI की जांच का भी सामना कर रही हैं, लिहाजा इतने नाजुक मौके पर गूगल की इंडिया पॉलिसी हेड का इस्तीफा कंपनी के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है। 

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कांग्रेस में चल रही उठापटक पर मिलिंद खांडेकर का सवाल-गहलोत को ‘रेस’ से बाहर कौन कर रहा है?

पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले सीएम अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 27 September, 2022
Milind Khandekar

कांग्रेस पार्टी आगामी अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले राजस्थान में सीएम बदलना चाहती थी लेकिन पार्टी की इन कोशिशों को करारा धक्का लगा है। दरअसल पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले सीएम अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था। 

इसी कारण पार्टी ने राज्य में सीएम बदलने के लिए विधायक दल की बैठक का भी एलान किया लेकिन एक हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच सीएम गहलोत का समर्थन कर रहे 90 से अधिक विधायकों के इस्तीफे हो गए। 

पार्टी आलाकमान ने इस पुरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से लिया है और अब ये माना जा रहा है कि अशोक गहलोत अब शायद ही कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बन पाएंगे। 

इस पुरे मसले पर वरिष्ठ पत्रकार और ‘तक चैनल्स‘ (इंडिया टुडे ग्रुप) के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने एक ट्वीट कर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ' वैसे गहलोत ने ख़ुद कहा था कि राहुल गांधी नहीं माने तो वो ख़ुद कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे. जयराम रमेश ने कहा कि कोई भी चुनाव लड़ सकता है फिर गहलोत को रेस से बाहर कौन कर रहा है या ये कोई और तय कर रहा है कि कौन कौन लड़ेगा?'

मिलिंद खांडेकर के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते है।

 

 

 

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हिजाब पहनने की सलाह देने वाले को रुबिका लियाकत ने दिया ये करारा जवाब

राजस्थान में सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच का मनमुटाव अब जगजाहिर हो गया है। ऐसे में अब कांग्रेस पार्टी की एकता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 27 September, 2022
Journalist Rubika Liyaquat

एक तरफ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी 'भारत जोड़ों यात्रा' पर है वहीं दूसरी तरफ राजस्थान में सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच का मनमुटाव अब जगजाहिर हो गया है। ऐसे में अब कांग्रेस पार्टी की एकता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। 

माना तो यह भी जा रहा है कि जिस तरह गहलोत गुट के विधायकों ने आधी रात को इस्तीफा दिया उसके बाद अब सीएम गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के आसार कम हो गए हैं। 

इस मसले पर 'एबीपी न्यूज' की सीनियर एंकर रुबिका लियाकत ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, 'भारत जुड़ा हुआ है और अनंतकाल तक जुड़ा रहेगा। फिलहाल पार्टी जोड़ने पर ताकत लगानी चाहिए।' उनका यह ट्वीट कांग्रेस नेता दीपक भाटी को रास नहीं आया। 

उन्होंने ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, 'थोड़ा ABP न्यूज का चश्मा उतार कर हिजाब पहन कर बहन, जरा बाहर तो निकलो। किसी स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाओ तो जान जाओगे।'

उनके इस ट्वीट पर रुबिका लियाकत ने भी पलटवार कर जवाब दिया। उन्होंने लिखा, 'दीपक जी आपकी अक्ल पर पड़े पर्दे को हटा दूं और बता दूं, मैं भारत की रहने वाली हूं, ईरान की नहीं। मेरे देश में बहन-बेटियां हिजाब में नहीं, घमंड में रहती हैं, किसी फरमान से नहीं, आजादी से चलती हैं। 

रुबिका लियाकत के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

 

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सरकार ने 10 यूट्यूब चैनलों से 1 करोड़ से अधिक व्यूज वाले वीडियो को किया ब्लॉक

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक बार फिर फर्जी न्यूज के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, इस कवायद के तहत सरकार ने 10 यू-ट्यूब चैनलों से 45 वीडियो को ब्लॉक कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 27 September, 2022
youtube5465

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक बार फिर फर्जी न्यूज के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, इस कवायद के तहत सरकार ने 10 यू-ट्यूब चैनलों से 45 वीडियो को ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई धार्मिक नफरत फैलाने, फर्जी खबरों को प्रसारित करने और सनसनीखेज थंबनेल का कथित इस्तेमाल करने पर की गयी है।

बता दें कि थंबनेल में तस्वीरें या कंटेंट होता हैं, जिसके जरिए वीडियो में दिखाई जाने वाली विषय वस्तु की संक्षिप्त जानकारी आकर्षक तरीके से पेश की जाती है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, चैनलों को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों-2021 के तहत ब्लॉक किया गया है।

बयान में कहा गया है कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यू-ट्यूब को 10  यू-ट्यूब चैनलों से 45 वीडियो को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। ब्लॉक वीडियो को 1 करोड़ 30 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है और उनमें दावा किया गया है कि सरकार ने कुछ समुदायों के धार्मिक अधिकार छीन लिए हैं। 

वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने एक ट्वीट कर लिखा, 'सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 10 यूट्यूब चैनलों को देश के खिलाफ जहर उगलने वाले, भ्रामक खबरों के माध्यम से मित्र देशों के साथ सम्बंधों को ख़राब करने का प्रयास करने के लिए प्रतिबंध लगाकर उन्हें सस्पेंड कर दिया है। राष्ट्रहित में ये पहले भी किया है, आगे भी करेंगे।'

 

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने बताया कि कंटेंट में धार्मिक समुदायों के बीच घृणा फैलाने के इरादे से फर्जी खबरें और ऐसी क्लिपिंग डाली गयी हैं, जिनमें फेरबदल किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के वीडियो में सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने और देश में सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने की क्षमता पाई गई।

मंत्रालय ने आगे कहा कि कुछ वीडियो में अग्निपथ योजना, सशस्त्र सेनाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र और कश्मीर के बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही थी। इनमें दी गयी विषय वस्तु झूठी और सुरक्षा तथा मित्र देशों के साथ संबंधों के मद्देनजर काफी संवेदशील है।

इससे पहले भी केंद्र सरकार कई यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई कर चुकी है। पिछले महीने अगस्त में पाकिस्तान से संचालित एक चैनल समेत 8 यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था।

 

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वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कांग्रेस से पूछा सवाल- धोखा कौन दे रहा है?

25 सितंबर को प्रस्तावित विधायक दल की बैठक रद्द कर दी गई वही गहलोत समर्थित 90 से अधिक विधायकों ने अपने इस्तीफे दे दिए है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
Last Modified:
Monday, 26 September, 2022
Alok Mehta

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से पहले कांग्रेस की एकता को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष चुनाव से पहले राजस्थान में सीएम बदलना चाहती है। इस बीच वर्तमान में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है, ऐसे में उन्हें सीएम का पद छोड़ना पड़ेगा। हालांकि,आलाकमान की सीएम बदलने की ये कोशिश सफल होने की बजाय विफल होती हुई दिखाई दे रही है। 

आपको बता दें कि 25 सितंबर को प्रस्तावित विधायक दल की बैठक पर कोई सहमति नहीं बन पाने के कारण बैठक रद्द कर दी गई थी, वहीं गहलोत समर्थित 90 से अधिक विधायकों ने अपने इस्तीफे दे दिए हैं, जोकि बिल्कुल भी यह नहीं चाहते कि सचिन पायलट किसी भी हाल में सीएम बनें। ऐसे में दिल्ली हाईकमान के सामने राज्य में पार्टी को बचाने का संकट खड़ा हो गया है। 

इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने ट्वीट कर कांग्रेस पार्टी को नसीहत दी है। उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा, 'कांग्रेस में नव क्रांति जयपुर के क़िले से । विधायकों ने आला कमान की पसंद को खुले आम ठुकराकर इस्तीफ़े तक की धमकी दे दी। लेकिन सवाल यह भी कि गांधी परिवार सचिन को तीन साल से सत्ता सौंपने का वायदा क्यों करता रहा? धोखा कौन किसको दे रहा, देश से पहले पार्टी प्रदेश कैसे जुड़ेगा? '

आलोक मेहता के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

 

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पाकिस्तान में चल रहा जबरन धर्मांतरण का 'खेल', ब्रजेश कुमार सिंह ने पूछा ये बड़ा सवाल

एक भारत देश है जिसने कभी अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को नहीं छोड़ा और एक पाकिस्तान है जिसने कभी लोकतंत्र का महत्व ही नहीं समझा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
Last Modified:
Monday, 26 September, 2022
Brajesh Kumar Singh

साल 1947 में भारतवर्ष ने अंग्रेज़ों से आजादी पाई और किन्ही कारणों से भारत और पाकिस्तान नाम से 2 राष्ट्र बने। एक भारत देश है जिसने कभी अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को नहीं छोड़ा और एक पाकिस्तान है जिसने कभी लोकतंत्र का महत्व ही नहीं समझा। 

धर्म के नाम पर बने इस देश में अल्पसंख्यकों के लिए कोई रहम नहीं है। पिछले 75 सालों को देखे तो पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लगभग खत्म कर दिए गए है और जो बचे है उन्हें जबरन धर्मांतरण की आग में झोंका जा रहा है। दूसरी और भारत में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी न सिर्फ बढ़ी है बल्कि उन्हें संविधान के तहत सारे अधिकार दिए गए है। 

पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने होने के बाद भी कुछ बुद्धिजीवी उस देश से बातचीत की वकालत करते है। ऐसे लोगों से ‘नेटवर्क18’ के ग्रुप इंटीग्रेशन और कंवर्जेंस के एडिटर व वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश कुमार सिंह ने बड़ा सवाल पूछा है।

उन्होंने अपने ट्वीट में एक खबर शेयर की और पूछा कि, कोई दिन ऐसा नहीं जाता, जब पाकिस्तान से हिंदू विवाहित महिलाओं, युवतियों और यहां तक कि बच्चियों का भी ज़बरदस्ती धर्मांतरण कर उन्हें मुस्लिम बीबी के तौर पर घर में नहीं बिठा लेते, भले ही ये पीड़िताएं चिल्लाती रह जाएँ, उनका परिवार थानों- अदालतों के चक्कर लगाता रह जाए! फिर सद्भाव कैसे? 

 ब्रजेश कुमार सिंह के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं। 

 

 

 

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वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कांग्रेस को दिया 2024 की 'जंग' में जीत का ये 'मूलमंत्र'

वर्तमान में ऐसी पूरी संभावना है कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत कांग्रेस के अगले अध्यक्ष हो सकते है, इसका एक बड़ा कारण उनका सोनिया गांधी की पसंद होना भी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
Last Modified:
Monday, 26 September, 2022
sumit awasthi

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दरअसल, साल 2020 में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने जिस तरह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने चुनौती खड़ी कर दी थी कुछ वैसा ही आज सचिन पायलट के साथ हो रहा है। दरअसल, अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। 

वर्तमान में ऐसी पूरी संभावना है कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत कांग्रेस के अगले अध्यक्ष हो सकते है, इसका एक बड़ा कारण उनका सोनिया गांधी की पसंद होना भी है। ऐसे में 'एक व्यक्ति, एक पद' सिद्धांत के तहत गहलोत को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। 

गहलोत खेमा किसी भी कीमत पर सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहता। इसीलिए दबाव बनाने के लिए 90 से ज्यादा विधायकों ने स्पीकर को अपने इस्तीफे भी सौंप दिए। इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ पत्रकार व सीनियर एंकर सुमित अवस्थी ने भी ट्वीट कर अपनी राय व्यक्त की है।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ' अगर आज भी सचिन पायलट को कमान नहीं सौंपी जाती है तो राजस्थान में पार्टी टूट जायेगी। चुनाव एक साल ही दूर हैं। अशोक गहलोत पार्टी अध्यक्ष और सचिन पायलट को राज्य में कमान। ये कॉम्बिनेशन ही 2024 की जंग के पहले कांग्रेस पार्टी के लिये एकमात्र विन-विन फ़ार्मूला बचा दिखता है।'

सुमित अवस्थी के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं। 

 

 

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कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक 'घमासान' को लेकर पत्रकार अखिलेश शर्मा ने उठाया ये बड़ा सवाल

रात को दिल्ली आलाकमान से आदेश आया की आज ही कोई निर्णय ले लेकिन 12 घंटे से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पार्टी असमंजस में दिखाई दे रही है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
Last Modified:
Monday, 26 September, 2022
ashok gahlot

वीरों की धरती कहे जाने वाली राजस्थान की भूमि से कांग्रेस के लिए एक ऐसा सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है, जिसकी गूंज दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है। दरअसल, एक बार फिर से सचिन पायलट को झटका लगता दिख रहा है। इस बार ऐसा दिखाई दे रहा था कि बड़ी आसानी से सचिन सीएम बन जाएंगे, लेकिन सीएम गहलोत के समर्थन में खड़े विधायकों ने ऐसा हल्ला बोला कि कल विधायक दल की बैठक ही नहीं हो पायी। 

गहलोत खेमा किसी भी कीमत पर सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहता। इसीलिए दबाव बनाने के लिए 90 से ज्यादा विधायकों ने स्पीकर को अपने इस्तीफे भी सौंप दिए। रात को दिल्ली आलाकमान से आदेश आया कि आज ही कोई निर्णय ले, लेकिन 12 घंटे से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पार्टी असमंजस में दिखाई दे रही है। 

इस पूरी घटना पर एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार और 2 दशक के भी अधिक समय से राजनीति कवर कर रहे अखिलेश शर्मा ने ट्वीट कर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'राजस्थान में नया सीएम चुनने की बात तब आती जब गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद सीएम पद से इस्तीफा देते। गहलोत ने तो अभी पर्चा तक नहीं भरा। चुनाव से पहले ही संभावित परिणाम को लेकर कदम उठा लिया गया। विधायक दल की बैठक बुला कर विद्रोह आमंत्रित क्यों किया गया? 

 अखिलेश शर्मा के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं। 

 

 

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अखिलेश शर्मा बोले-इन देश विरोधी ताकतों को इसी तरह फौलादी कदमों से कुचलने की जरूरत है

यह छापेमारी टेरर फंडिंग से जुड़ी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की गतिविधियों में शामिल और धरना प्रदर्शन करने वाले लोगों पर की गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 22 September, 2022
akhilesh sharma ndtv

नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने आज सुबह 11 राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह छापेमारी PFI से जुड़े लोगों पर की गई है, जिसमें 11 राज्यों से 106 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह छापेमारी टेरर फंडिंग से जुड़ी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की गतिविधियों में शामिल और धरना प्रदर्शन करने वाले लोगों पर की गई है। 

बड़ी बात यह है कि केरल के मंजेरी में PFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा दिल्ली PFI हेड परवेज अहमद के घर भी छापेमारी कर उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। इतना ही नहीं PFI के पूर्व कोषाध्यक्ष नदीम की भी बाराबंकी से गिरफ्तारी की गई है। 

यह छापेमारी केरल में बड़े पैमाने पर हुई है। केरल से सबसे ज्यादा 22 लोगों की गिरफ्तारी हुई है इसके अलावा महाराष्ट्र और कर्नाटक से 20, तमिलनाडु से 10, असम से 9, उत्तर प्रदेश से 8, आंध्र प्रदेश से 5, दिल्ली और पुडुचेरी से 3 जबकि राजस्थान से 2 लोगों को हिरासत में लिया गया है। 

इस छापेमारी पर वरिष्ठ पत्रकार और एनडीटीवी के एग्जिक्यूटिव एडिटर अखिलेश शर्मा ने अपनी राय व्यक्त करते हुए सरकार की तारीफ़ की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'आतंकवाद, नक्सलवाद और कट्टरपंथी ताक़तों के खिलाफ कार्रवाई में पिछले कुछ महीनों में अचानक तेज़ी आई है और इसका सीधा सकारात्मक असर आंतरिक सुरक्षा पर दिखने लगा है। इन देश विरोधी ताक़तों को इसी तरह फ़ौलादी कदमों से कुचलने और जड़ से समाप्त करने की आवश्यकता है।'

उनके द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं।

 

 

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