नए कानून के बाद BBC, CNN, ब्लूमबर्ग समेत कई मीडिया कंपनियों ने रूस में रोका कामकाज

रूस के यूक्रेन पर हमले अभी भी जारी हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेक न्यूज फैलाने से रोकने के लिए रूस शुक्रवार को नया कानून लेकर आया है।

Last Modified:
Saturday, 05 March, 2022
putin5445

रूस के यूक्रेन पर हमले अभी भी जारी हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेक न्यूज फैलाने से रोकने के लिए रूस शुक्रवार को नया कानून लेकर आया है। संसद में पास इस नए कानून के तहत सशस्त्र बलों के खिलाफ जानबूझकर फर्जी खबरें फैलाने पर 15 साल तक जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।

वहीं दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेक न्यूज फैलाने से रोकने के लिए लाए गए रूस के नए कानून को मीडिया की स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी), कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन (सीबीसी) और अमेरिका स्थित ब्लूमबर्ग न्यूज, सीबीएस न्यूज, एबीसी न्यूज और सीएनएन ने रूस में अपने पत्रकारों का कामकाज अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक नए कानून पर हस्ताक्षर किया है जिसके बाद सीबीएस न्यूज रूस से बाहर निकलने वाला लेटेस्ट मीडिया आउटलेट बन गया है।  

शुक्रवार को, सीबीएस न्यूज के प्रवक्ता ने कहा कि आउटलेट वर्तमान में रूस से प्रसारित नहीं हो रहा था, क्योंकि हम पारित किए गए नए मीडिया कानूनों को देखते हुए अपनी टीम के लिए परिस्थितियों की निगरानी कर रहे हैं।

रूसी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका व उसके पश्चिमी यूरोपीय सहयोगियों द्वारा रूसी लोगों के बीच झगड़ा कराने और जंग के दौरान रूसी सेना के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद रूस की संसद में नया कानून पारित किया गया, जिसके बाद ब्लूमबर्ग न्यूज, कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन और बीबीसी ने कहा कि वे वहां अपने पत्रकारों के काम को फिलहाल के लिए निलंबित कर रहे हैं।

बीबीसी ने शुक्रवार को कहा कि रूस के एक नया कानून लाने के बाद उसके पास रूस में अपने पत्रकारों का कामकाज अस्थायी रूप से निलंबित करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने कहा कि यह कानून ‘स्वतंत्र पत्रकारिता की प्रक्रिया का अपराधीकरण करता प्रतीत’ होता है और बीबीसी स्टाफ की सुरक्षा ‘सर्वोपरि’ है। उन्होंने कहा कि रूस में बीबीसी समाचार सेवा रूस के बाहर से काम करना जारी रखेगी।

बीबीसी न्यूज के एक अंतरिम निदेशक जोनाथन मुनरो ने कहा कि बीबीसी रूस से पत्रकारों को बाहर नहीं निकाल रहा है, बल्कि नए कानून के प्रभाव का आकलन कर रहा है।

कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कार्पोरेशन (सीबीएस) ने कहा कि उसने रूस में ग्राउंड रिपोर्टिंग को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है ताकि वह नए कानून पर स्पष्टता की मांग कर सके।

सीबीसी ने एक बयान में कहा कि वह कानून के बारे में बहुत चिंतित है, जो यूक्रेन और रूस में मौजूदा स्थिति पर स्वतंत्र रिपोर्टिंग को अपराधीकरण करने के लिए प्रतीत होता है।

अमेरिका स्थित ब्लूमबर्ग न्यूज ने कहा कि वह रूस के अंदर अपने पत्रकारों के काम को भी अस्थायी रूप से निलंबित कर रहा है। ब्लूमबर्ग के एडिटर-इन-चीफ जॉन मिकलेथवेट ने एक बयान में कहा कि आपराधिक संहिता में बदलाव देश के अंदर सामान्य पत्रकारिता के किसी भी प्रकार को जारी रखना असंभव बनाता है।

वहीं, सीएनएन के एक प्रवक्ता ने कहा कि नेटवर्क रूस में प्रसारण बंद कर देगा, जबकि हम स्थिति का मूल्यांकन करना जारी रखेंगे।

एबीसी न्यूज, जिसके रूस में कई संवाददाता काम कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि रूस में पारित नए सेंसरशिप कानून के कारण, एबीसी न्यूज सहित कुछ पश्चिमी नेटवर्क आज रात देश से प्रसारित नहीं हो रहे हैं। हम स्थिति का आकलन करना और निर्धारित करना जारी रखेंगे कि क्या इसका मतलब जमीन पर हमारी टीमों की सुरक्षा के लिए है।

वहीं अब यूक्रेन के साथ जारी जंग के बीच रूस ने फेसबुक के साथ-साथ ट्विटर और यूट्यूब को भी देश में बैन कर दिया है। रूस का आरोप है कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स रूसी मीडिया कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहे थे। उधर, फेसबुक का कहना है कि रूस ने इस प्रतिबंध से लाखों लोगों को विश्वसनीय जानकारी से वंचित कर दिया है। 

रूस सरकार की सेंसरशिप एजेंसी रोसकोम्नाडजोर (Roskomnadzor) का कहना है अक्टूबर 2020 से फेसबुक द्वारा रूसी मीडिया के खिलाफ भेदभाव के 26 मामले सामने आए हैं, जिसमें आरटी और आरआईए न्यूज एजेंसी जैसे सरकार समर्थित चैनलों के अकाउंट्स की पहुंच (Reach) घटाने का आरोप है।

रूस में लगे इस बैन पर फेसबुक व इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta के वैश्विक मामलों के प्रमुख निक क्लेग ने कहा कि कंपनी अपनी सेवाओं को बहाल करने के लिए वह सब कुछ करना जारी रखेगी, जो वह कर सकती है।

गौरतलब है कि यूक्रेन के साथ युद्ध की शुरुआत के दूसरे दिन यानी 25 फरवरी को रूस ने फेसबुक पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया गया था। रूस की सरकारी एजेंसी रोसकोम्नाडजोर का आरोप था कि फेसबुक ने रूस के सरकारी के मीडिया आउटलेट्स के पेजों को अपने प्लेटफॉर्म पर बैन कर दिया था। जब रूस की ओर से इस प्रतिबंध को हटाने की मांग की गई, तो फेसबुक ने मांग को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद पहले रूस ने फेसबुक पर आंशिक रूप से बैन लगाया और अब इसे पूरी तरह ब्लॉक कर दिया।

शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ की गई इस कार्रवाई के साथ ही रूस ने अमेरिकी सरकार द्वारा वित्त पोषित ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ और ‘रेडियो फ्री यूरोप’/’रेडियो लिबर्टी’, जर्मन प्रसारक ‘डॉयचे वेले’ और लातविया स्थित वेबसाइट ‘मेडुजा’ को भी ब्लॉक कर दिया। रूसी भाषा में समाचार प्रकाशित करने वाले विदेशी आउटलेट्स के खिलाफ सरकार की व्यापक कार्रवाई ने पुतिन के तेवर साफ कर दिए हैं। रूस लगातार इस बात का आरोप लगाता रहा है कि यूक्रेन पर आक्रमण के बारे में घरेलू दर्शकों को गलत सूचना दी जा रही है।

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दिग्विजय सिंह नहीं लड़ेंगे अध्यक्ष पद का चुनाव, राहुल कंवल ने खोला ये राज

कर्नाटक के कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को जिस तरह से बड़े नेताओं का साथ मिल रहा है, उससे स्पष्ट है कि वो आसानी से चुनाव जीत जाएंगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 30 September, 2022
Last Modified:
Friday, 30 September, 2022
Journalist Rahul Kanwal

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को लेकर अब तस्वीर साफ होती जा रही है। दरअसल आज कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अचानक से चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है। उनकी जगह अब कर्नाटक के दलित नेता, सदन में कांग्रेस के चेहरे मल्लिकार्जुन खड़गे चुनाव लड़ेंगे। मल्लिकार्जुन खड़गे को सीनियर नेताओं का लगातार समर्थन मिल रहा है, दिग्विजय सिंह के नामांकन न दाखिल करने के बाद अब अशोक गहलोत भी उनके समर्थन में आ गए हैं। 

कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर अब मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच मुकाबला है और ऐसा माना जा रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे का अगला कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय है। कर्नाटक के कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को जिस तरह से बड़े नेताओं का साथ मिल रहा है उससे स्पष्ट है कि वो आसानी से चुनाव जीत जाएंगे। 

दिग्विजय सिंह के अचानक चुनाव से बाहर हो जाने के बाद लोग तमाम कयास लगा रहे हैं। इसी मुद्दे पर 'इंडिया टुडे' के सीनियर एंकर राहुल कंवल ने भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'गहलोत के विश्वासघात के बाद, गांधी परिवार दिग्विजय जैसे स्वतंत्र विचार वाले व्यक्ति पर कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए भरोसा नहीं कर सकता है। उनके पास इतना मजबूत व्यक्तित्व है कि 10 जनपथ या 12 तुगलक द्वारा रिमोट से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। इसलिए गांधी परिवार एक 80 वर्षीय वफादार पर भरोसा दिखा रहा है। '

राहुल कंवल के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

 

 

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कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ेंगे सीएम गहलोत, राणा यशवंत ने कही ये बड़ी बात

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सीएम गहलोत सोनिया गांधी से मिले और उनसे माफी भी मांगी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 30 September, 2022
Last Modified:
Friday, 30 September, 2022
Journalist Rana Yashwant,

राजनीति को संभावनाओं का खेल ऐसे ही नहीं कहा जाता है, वर्तमान में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत पर ये पंक्ति सटीक बैठ रही है। दरअसल एक सप्ताह पहले तक उनका कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था। वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की वह पहली पसंद थे, लेकिन राजस्थान में गहलोत समर्थक विधायकों ने सचिन पायलट को लेकर बयानबाजी की उससे सीएम गहलोत की छवि को नुकसान पहुंचा है। 

अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले कांग्रेस राज्य में सीएम बदलना चाहती थी, लेकिन उसी शाम कांग्रेस के 92 विधायकों ने स्पीकर को अपना इस्तीफा दे दिया और विधायक दल की बैठक रद्द हो गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सीएम गहलोत सोनिया गांधी से मिले और उनसे माफी भी मांगी। इसी बीच उन्होंने ऐलान किया कि वह अब कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं। 

इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर 'इंडिया न्यूज' के मैनेजिंग एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने ट्वीट कर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, अशोक गहलोत ने दिया तो शह था, लेकिन हो गई मात। बिसात पर चाल को सामने वाले की दो चाल सोचकर ही चली जाती है, मगर सामने वाला कभी-कभी बहुत आगे की सोचकर तैयार बैठा रहता है। एक ही चाल में गेम ओवर हो जाता है और यही हुआ। 

राणा यशवंत के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

 

 

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तीसरे मोर्चे की कवायद शुरू, अभिषेक उपाध्याय ने मायावती को लेकर कही ये बड़ी बात

इस समय बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद करने में जुटे हुए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 30 September, 2022
Last Modified:
Friday, 30 September, 2022
Abhishek Upadhyay

देश में अभी आम चुनाव में काफी समय बाकी है, लेकिन विपक्षी दल अभी से मोदी सरकार को हटाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इस समय बीजेपी सबसे मजबूत पार्टी है और बीजेपी गठबंधन साल 2014 से ही सत्ता में विराजमान है। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में भी इस समय बीजेपी अजेय है और खुद पीएम मोदी बनारस से सांसद हैं। 

इस समय बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद करने में जुटे हुए हैं। हालांकि इतने दलों के लोगों को वह कैसे एक मंच पर लाएंगे ये बड़ा सवाल है! दूसरी और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस के मुताबिक उनके सहयोग के बिना मोदी सरकार को हटाना असंभव है, लेकिन वह बाकी दलों को कैसे संतुष्ट करेगी, इस पर अभी संशय बना हुआ है। 

इस पूरी कवायद पर एबीपी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने एक ट्वीट कर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने लिखा, 'विपक्षी दलों में आज भी बसपा सुप्रीमो बहन मायावती से बड़ा विनिंग कॉम्बिनेशन किसी के पास नहीं।  दलित+मुस्लिम+ब्राह्मण का उनका ब्रह्मास्त्र किसी भी राजनीतिक समीकरण की चूलें हिला सकता है। सवाल सिर्फ ये है कि आखिर बहन जी इतनी खामोश क्यों हैं? 

अभिषेक उपाध्याय के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

 

 

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अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे सीएम गहलोत, सुधीर चौधरी ने उठाया ये बड़ा सवाल

राजस्थान में सचिन पायलट को सीएम बनाने की चर्चाओं के बीच राजस्‍थान के 92 विधायकों के इस्‍तीफे हो गए थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 30 September, 2022
Last Modified:
Friday, 30 September, 2022
Sudhir Chowdhary

राजस्थान की राजनीति हर दिन नए मोड़ लेती जा रही है। वर्तमान सीएम अशोक गहलोत ने दिल्ली आकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मीटिंग कर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वो अब कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं। इसके अलावा राजस्‍थान के सीएम ने कहा कि विधायक दल की बैठक नहीं होने के संदर्भ में उन्होंने सोनिया गांधी से माफी भी मांगी है। 

दरअसल राजस्थान में सचिन पायलट को सीएम बनाने की चर्चाओं के बीच राजस्‍थान के 92 विधायकों के इस्‍तीफे हो गए थे। वह हर हाल में सचिन पायलट को सीएम बनते हुए नहीं देखना चाहते, वहीं सचिन पायलट ने भी सोनिया गांधी से मुलाकात कर अपनी बात उनके सामने रखी है। 

इस पूरे घटनाक्रम पर हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' के सलाहकार संपादक व प्राइम टाइम एंकर सुधीर चौधरी ने भी एक ट्वीट किया है, जो चर्चा में है। उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा, 'राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने निर्णय लिया है कि वह अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन सीएम बने रहेंगे। आगे सुधीर चौधरी ने सवाल खड़ा करते हुए पूछा की वह सीएम आखिरकार कब तक बने रहेंगे? '

सुधीर चौधरी के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं- 

 

 

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बार-बार याचिका दायर करने पर दिल्ली HC ने फेसबुक को लगायी फटकार

इस मामले में फेसबुक की याचिका तीसरी बार खारिज हुई है। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने फटकार लगाते हुए कहा कि ‘मुकदमा दायर करने के अवसरों’ का कुछ अंत होना चाहिए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 29 September, 2022
Delhi HC

दिल्ली हाई कोर्ट ने फेसबुक इंडिया की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा अपनी कंपनी वॉट्सऐप की 2021 की निजता नीति (प्राइवेसी पॉलिसी) की जांच के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

बता दें कि इस मामले में कंपनी की याचिका तीसरी बार खारिज हुई है। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने फटकार लगाते हुए और यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि ‘मुकदमा दायर करने के अवसरों’ का कुछ अंत होना चाहिए।

फेसबुक इंडिया ने अगस्त में हाई कोर्ट की एक खंडपीठ द्वारा संबंधित मामले में अपील को खारिज करने के बाद एकल न्यायाधीश की पीठ का रुख किया था।

खंडपीठ ने 25 अगस्त को वॉट्सऐप और फेसबुक की उन अपीलों को खारिज कर दिया था, जो सीसीआई के आदेश से की जा रही जांच को चुनौती देने के अनुरोध को खारिज करने विरोध में दायर की गई थी।

इस मामले की ताजा सुनवाई में न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि सीसीआई जांच को चुनौती देने वाली फेसबुक इंक की याचिका को खंडपीठ पहले ही खारिज कर चुकी है।

हाई कोर्ट ने याचिका निरस्त करते कहा, ‘आप अब अचानक उठे और आदेश को चुनौती दें रहे हैं। अब बहुत हो गया है। ‘मुकदमेबाजी के लिए अवसरों’ का कुछ अंत होना चाहिए।’

पिछले साल अप्रैल में, हाई कोर्ट की एकल न्यायाधीश की पीठ ने सीसीआई द्वारा निर्देशित जांच को रोकने से इनकार कर दिया था और वॉट्सऐप और फेसबुक (अब ‘मेटा’) की याचिका खारिज कर दी थी।

जनवरी 2021 में वॉट्सऐप की नई निजता नीति (प्राइवेसी पॉलिसी) की सीसीआई ने जांच की घोषणा की थी और कहा था कि इस नीति के जरिए वॉट्सऐप यूजर्स का ऐसा डेटा जमा कर सकता है, जिसका उपयोग भारत में बाजार की स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने में हो सकता है।

इस पर वॉट्सऐप का कहना था कि सीसीआई यह जांच नहीं कर सकता, नीति भी अभी लागू नहीं की जा रही है। इसके लिए भारत का डेटा संरक्षण कानून बनने और संबंधित मामलों में सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेशों का इंतजार किया जाएगा।

फेसबुक का तर्क था कि यह जांच सीसीआई का क्षेत्र नहीं है, भले ही उसे कंपनियों के खिलाफ कोई ठोस सामग्री प्रथम दृष्टया मिली हो।

सीसीआई का पक्ष था कि वह कंपनी की निजता नीति की नहीं, बल्कि वॉट्सऐप व फेसबुक द्वारा यूजर्स की जानकारियों को स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के आरोपों की जांच कर रहा है।

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गूगल इंडिया में पब्लिक पॉलिसी की हेड अर्चना गुलाटी ने दिया इस्तीफा

दिग्गज टेक कंपनी गूगल इंडिया में पब्लिक पॉलिसी की हेड अर्चना गुलाटी ने यहां जॉइनिंग के पांच महीने बाद ही कथित तौर पर इस्तीफा दे दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 27 September, 2022
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दिग्गज टेक कंपनी गूगल इंडिया में पब्लिक पॉलिसी की हेड अर्चना गुलाटी ने यहां जॉइनिंग के पांच महीने बाद ही कथित तौर पर इस्तीफा दे दिया है। फिलहाल उनके इस्तीफे के कारणों का तत्काल पता नहीं चल पाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्चना गुलाटी का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब गूगल के खिलाफ दो मामलों में कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) का फैसला आने वाला है।

अर्चना गुलाटी का यह इस्तीफा ऐसे समय में समय गूगल के खिलाफ दो मामलों में कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) का फैसला आने वाला है। गूगल भारत में कई अविश्वास के मामलों और टेक सेक्टर से जुड़े सख्त नियमों का सामना कर रहा है। इस समय CCI की स्मार्ट टीवी मार्केट में गूगल के कारोबार करने के तरीके, इसके एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम और साथ ही इसके इन-ऐप पेमेंट सिस्टम पर कड़ी नजर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल के खिलाफ कम से दो मामलों में CCI जल्द फैसला सुनाने वाली है।

गूगल में आने से पहले वह लंबे समय तक भारत सरकार की कर्मचारी थीं।  गुलाटी इससे पहले केंद्र सरकार के थिंक-टैंक कहे जाने वाले नीति आयोग में काम करती थीं। मार्च 2021 तक नीति आयोग में वह डिजिटल कम्युनिकेशंस की जॉइंट सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रही थीं। वह भारतीय सिविल सेवा के 1989 बैच की अधिकारी हैं और अब रिटायर हो चुकीं हैं। 

इससे पहले वह 2014 से 2016 के बीच, कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के मर्जर एंड एक्विजिशन डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिशियल के रूप में सेवाएं दे रही थीं।

गूगल सहित कई बड़ी टेक कंपनियों ने हाल में भारत सरकार के कई पूर्व-अधिकारियों को हायर किया है। दरअसल टेक कंपनियां इस समय केंद्र सरकार कड़े डेटा और प्राइवेसी नियमों के साथ-साथ CCI की जांच का भी सामना कर रही हैं, लिहाजा इतने नाजुक मौके पर गूगल की इंडिया पॉलिसी हेड का इस्तीफा कंपनी के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है। 

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कांग्रेस में चल रही उठापटक पर मिलिंद खांडेकर का सवाल-गहलोत को ‘रेस’ से बाहर कौन कर रहा है?

पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले सीएम अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 27 September, 2022
Milind Khandekar

कांग्रेस पार्टी आगामी अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले राजस्थान में सीएम बदलना चाहती थी लेकिन पार्टी की इन कोशिशों को करारा धक्का लगा है। दरअसल पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले सीएम अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था। 

इसी कारण पार्टी ने राज्य में सीएम बदलने के लिए विधायक दल की बैठक का भी एलान किया लेकिन एक हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच सीएम गहलोत का समर्थन कर रहे 90 से अधिक विधायकों के इस्तीफे हो गए। 

पार्टी आलाकमान ने इस पुरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से लिया है और अब ये माना जा रहा है कि अशोक गहलोत अब शायद ही कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बन पाएंगे। 

इस पुरे मसले पर वरिष्ठ पत्रकार और ‘तक चैनल्स‘ (इंडिया टुडे ग्रुप) के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने एक ट्वीट कर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ' वैसे गहलोत ने ख़ुद कहा था कि राहुल गांधी नहीं माने तो वो ख़ुद कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे. जयराम रमेश ने कहा कि कोई भी चुनाव लड़ सकता है फिर गहलोत को रेस से बाहर कौन कर रहा है या ये कोई और तय कर रहा है कि कौन कौन लड़ेगा?'

मिलिंद खांडेकर के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते है।

 

 

 

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हिजाब पहनने की सलाह देने वाले को रुबिका लियाकत ने दिया ये करारा जवाब

राजस्थान में सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच का मनमुटाव अब जगजाहिर हो गया है। ऐसे में अब कांग्रेस पार्टी की एकता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 27 September, 2022
Journalist Rubika Liyaquat

एक तरफ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी 'भारत जोड़ों यात्रा' पर है वहीं दूसरी तरफ राजस्थान में सीएम गहलोत और सचिन पायलट के बीच का मनमुटाव अब जगजाहिर हो गया है। ऐसे में अब कांग्रेस पार्टी की एकता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। 

माना तो यह भी जा रहा है कि जिस तरह गहलोत गुट के विधायकों ने आधी रात को इस्तीफा दिया उसके बाद अब सीएम गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के आसार कम हो गए हैं। 

इस मसले पर 'एबीपी न्यूज' की सीनियर एंकर रुबिका लियाकत ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, 'भारत जुड़ा हुआ है और अनंतकाल तक जुड़ा रहेगा। फिलहाल पार्टी जोड़ने पर ताकत लगानी चाहिए।' उनका यह ट्वीट कांग्रेस नेता दीपक भाटी को रास नहीं आया। 

उन्होंने ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, 'थोड़ा ABP न्यूज का चश्मा उतार कर हिजाब पहन कर बहन, जरा बाहर तो निकलो। किसी स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय जाओ तो जान जाओगे।'

उनके इस ट्वीट पर रुबिका लियाकत ने भी पलटवार कर जवाब दिया। उन्होंने लिखा, 'दीपक जी आपकी अक्ल पर पड़े पर्दे को हटा दूं और बता दूं, मैं भारत की रहने वाली हूं, ईरान की नहीं। मेरे देश में बहन-बेटियां हिजाब में नहीं, घमंड में रहती हैं, किसी फरमान से नहीं, आजादी से चलती हैं। 

रुबिका लियाकत के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

 

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सरकार ने 10 यूट्यूब चैनलों से 1 करोड़ से अधिक व्यूज वाले वीडियो को किया ब्लॉक

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक बार फिर फर्जी न्यूज के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, इस कवायद के तहत सरकार ने 10 यू-ट्यूब चैनलों से 45 वीडियो को ब्लॉक कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 27 September, 2022
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सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक बार फिर फर्जी न्यूज के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, इस कवायद के तहत सरकार ने 10 यू-ट्यूब चैनलों से 45 वीडियो को ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई धार्मिक नफरत फैलाने, फर्जी खबरों को प्रसारित करने और सनसनीखेज थंबनेल का कथित इस्तेमाल करने पर की गयी है।

बता दें कि थंबनेल में तस्वीरें या कंटेंट होता हैं, जिसके जरिए वीडियो में दिखाई जाने वाली विषय वस्तु की संक्षिप्त जानकारी आकर्षक तरीके से पेश की जाती है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, चैनलों को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों-2021 के तहत ब्लॉक किया गया है।

बयान में कहा गया है कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यू-ट्यूब को 10  यू-ट्यूब चैनलों से 45 वीडियो को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। ब्लॉक वीडियो को 1 करोड़ 30 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है और उनमें दावा किया गया है कि सरकार ने कुछ समुदायों के धार्मिक अधिकार छीन लिए हैं। 

वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने एक ट्वीट कर लिखा, 'सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 10 यूट्यूब चैनलों को देश के खिलाफ जहर उगलने वाले, भ्रामक खबरों के माध्यम से मित्र देशों के साथ सम्बंधों को ख़राब करने का प्रयास करने के लिए प्रतिबंध लगाकर उन्हें सस्पेंड कर दिया है। राष्ट्रहित में ये पहले भी किया है, आगे भी करेंगे।'

 

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने बताया कि कंटेंट में धार्मिक समुदायों के बीच घृणा फैलाने के इरादे से फर्जी खबरें और ऐसी क्लिपिंग डाली गयी हैं, जिनमें फेरबदल किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के वीडियो में सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने और देश में सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने की क्षमता पाई गई।

मंत्रालय ने आगे कहा कि कुछ वीडियो में अग्निपथ योजना, सशस्त्र सेनाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र और कश्मीर के बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही थी। इनमें दी गयी विषय वस्तु झूठी और सुरक्षा तथा मित्र देशों के साथ संबंधों के मद्देनजर काफी संवेदशील है।

इससे पहले भी केंद्र सरकार कई यूट्यूब चैनल पर कार्रवाई कर चुकी है। पिछले महीने अगस्त में पाकिस्तान से संचालित एक चैनल समेत 8 यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया था।

 

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वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कांग्रेस से पूछा सवाल- धोखा कौन दे रहा है?

25 सितंबर को प्रस्तावित विधायक दल की बैठक रद्द कर दी गई वही गहलोत समर्थित 90 से अधिक विधायकों ने अपने इस्तीफे दे दिए है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
Last Modified:
Monday, 26 September, 2022
Alok Mehta

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से पहले कांग्रेस की एकता को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष चुनाव से पहले राजस्थान में सीएम बदलना चाहती है। इस बीच वर्तमान में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है, ऐसे में उन्हें सीएम का पद छोड़ना पड़ेगा। हालांकि,आलाकमान की सीएम बदलने की ये कोशिश सफल होने की बजाय विफल होती हुई दिखाई दे रही है। 

आपको बता दें कि 25 सितंबर को प्रस्तावित विधायक दल की बैठक पर कोई सहमति नहीं बन पाने के कारण बैठक रद्द कर दी गई थी, वहीं गहलोत समर्थित 90 से अधिक विधायकों ने अपने इस्तीफे दे दिए हैं, जोकि बिल्कुल भी यह नहीं चाहते कि सचिन पायलट किसी भी हाल में सीएम बनें। ऐसे में दिल्ली हाईकमान के सामने राज्य में पार्टी को बचाने का संकट खड़ा हो गया है। 

इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने ट्वीट कर कांग्रेस पार्टी को नसीहत दी है। उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा, 'कांग्रेस में नव क्रांति जयपुर के क़िले से । विधायकों ने आला कमान की पसंद को खुले आम ठुकराकर इस्तीफ़े तक की धमकी दे दी। लेकिन सवाल यह भी कि गांधी परिवार सचिन को तीन साल से सत्ता सौंपने का वायदा क्यों करता रहा? धोखा कौन किसको दे रहा, देश से पहले पार्टी प्रदेश कैसे जुड़ेगा? '

आलोक मेहता के द्वारा किए गए इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-

 

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