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विदेश मंत्रालय ने प्रसार भारती की इस खबर को बताया गलत
जैसे ही इस बात की जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय को लगी, तत्काल प्रभाव से मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए ट्वीट किया
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में बीते दिनों हुए दंगों को लेकर की गलत रिपोर्टिंग को लेकर अब एक विदेशी पत्रकार पर एक्शन लिया जा रहा है। यह जानकारी नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक ट्विटर पेज के जरिए दी। प्रसार भारती ने एक के बाद एक ट्वीट कर ये दावा किया कि सरकार ने भारत में रह रहे ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के साउथ ईस्ट एशिया के डिप्टी ब्यूरो चीफ एरिक बॉलमेन को दिल्ली दंगो की गलत रिपोर्टिंग का दोषी पाया है, जिसके बाद उन्हें वापस डिपोर्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
हालाकिं दावा यह भी किया गया कि इस मामले में विदेश मंत्रालय ने अमेरिका स्थित भारतीय एंबेसी को लिखा है कि वह इस मामले को तत्काल देखें। प्रसार भारती के ट्वीट के मुताबिक उनके ‘भारत विरोधी व्यवहार’ के चलते ऐसी मांग की गई है।
हालांकि जैसे ही इस बात की जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय को लगी, तत्काल प्रभाव से मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए ट्वीट किया कि ‘एक व्यक्ति ने सरकारी प्लेटफॉर्म पर एरिक बेलमेन के खिलाफ एक ऑनलाइन शिकायत दर्ज करायी थी। इस शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारी को तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन भारत से भेजने संबंधी कोई निर्देश पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
A complaint was registered against @EricBellmanWSJ, @WSJIndia by a private individual on Government's Online Grievance Redressal platform. Referring the complaint to related office is a routine matter as per standard procedure. No such decision on deportation has been taken by us
— Raveesh Kumar (@MEAIndia) March 13, 2020
वहीं, प्रसार भारती ने अपने ट्वीट में यह भी दावा किया कि दिल्ली हिंसा के दौरान मारे गए आईबी अफसर अंकित शर्मा से जुड़ी गलत खबर फैलाने के आरोप में वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
गौरतलब है कि दिल्ली हिंसा की गलत रिपोर्टिंग करने को लेकर इससे पहले दो भारतीय न्यूज चैनलों पर भी कार्रवाई हो चुकी है। ये दोनों चैनल (एशियानेट न्यूज और मीडिया वन) मलयाली भाषा के थे, जिन पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया था। यह रोक ऐसी खबरों को लेकर लगाई गई थी जो देश में 'सांप्रदायिक विद्वेष को बढ़ावा दे सकती थी। हालांकि सरकार ने अपना फैसला बदलते हुए 48 घंटे से पहले ही इन चैनलों पर से प्रतिबंध हटा लिया था। जानकारी के मुताबिक, दोनों चैनलों ने मंत्रालय को पत्र लिखकर प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया था जिसके बाद रोक हटाई गई थी।
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