अपनी एडिटोरियल टीम को और मजबूती देने के लिए ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिया बड़ा फैसला

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लिया है, जिसमें बताया गया कि वह अपनी एडिटोरिलय टीम का विस्तार करेगी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 September, 2021
Last Modified:
Wednesday, 22 September, 2021
WashingtonPost8756

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लिया है, जिसमें बताया गया कि वह अपनी एडिटोरिलय टीम का विस्तार करेगी। मैनेजमेंट के इस फैसले के तहत वह अपनी टीम में 41 नए एडिटर्स की नियुक्ति करेगा। इनमें से दो एडिटर्स पेपर के मास्टहेड पर काम करेंगे।

सोमवार को अपने डिजिटल पोर्टल से इस बात की घोषणा की है। इसमें एग्जिक्यूटिव एडिटर सैली बुजबी (Sally Buzbee) और अखबार की बाकी लीडरशिप टीम ने कहा कि 41 एडिटर्स को नियुक्त करने से समय पर ब्रेकिंग न्यूज देने और खोजी कार्यों (investigative work) को करने की क्षमता बढ़ेगी। विजुअल रिपोर्ट्स और बेहतर होगी, जो दर्शकों को अपनी ओर खीच सकेंगी। ऐसे विषयों की कवरेज पर जोर होगा, जो युवाओं और अलग-अलग तरह के बहुत से पाठकों को जोड़ सकेंगी और साथ ही ऐसी नई चीजें विकसित की जा सकेंगी, जो डिजिटल पत्रकारिता के एक नए युग को परिभाषित कर सके।

इस मेल में यह भी बताया गया है कि इन नए एडिटर्स में दो एडिटर्स ऐसे होंगे जो न्यूजरूम की पॉलिसीज को रिफाइन करेंगे और उसे मेनटेन रखेंगे। वहीं एक रिक्रूटिंग एडिटर दो अन्य एडिटर्स के साथ मिलकर न्यूजरूम में चलने वाली भर्ती प्रक्रिया को संभालेंगे और उसे आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।

बुजबी ने कहा कि यह विस्तार नए सिरे को प्रदर्शित करता है कि वॉशिंगटन पोस्ट एक मजबूत न्यूज ऑर्गनाइजेशन है, जिसकी असीम महत्वाकांक्षाएं हैं, जिन्हें पूरा करने की क्षमता भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह आपकी सफलता है जो इस तरह से न्यूजरूम को मजबूत करने में सक्षम बनाती है। उम्मीद करते हैं कि आगे आने वाले महत्वपूर्ण कार्यो में भी आपके साथ जुड़कर हम अपने आप को गौरवान्वित महसूस करें।

बता दें कि सैली बुजबी वॉशिंगटन पोस्ट की पहली एग्जिक्यूटिव एडिटर हैं, जिन्हें इस साल मई में नियुक्त किया गया था।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में, वॉशिंगटन पोस्ट ने यह घोषणा की थी कि वह 2021 में 150 से अधिक पत्रकारों की नियुक्ति करेगा, जिससे उसकी कुल कर्मचारियों की संख्या 1000 से अधिक हो जाएगी।

सैली बुजबी व  बाकी लीडरशिप टीम की ये घोषणा आप यहां पढ़ सकते हैं-

The Washington Post announces the addition of 41 editing roles, including 2 masthead positions

Dear Colleagues,

We are delighted to announce a major expansion to accelerate our transformation into a fully 24/7 news organization and strengthen the leadership of the newsroom. The addition of 41 editing positions will grow our capacity to produce timely breaking news, revelatory enterprise and definitive investigative work; create visually rich stories that our audiences find compelling; cover topics that resonate with younger, more diverse readers; and develop innovations that will define a new era of digital journalism. The expansion will allow us to create a greater number of career paths across the newsroom and increase the number of journalists of color in editing roles.

We will add two new deputy managing editors to the masthead to work alongside Scott Vance and Barbara Vobejda in running the daily report, ensuring that a senior editor is in place to direct news coverage across our many platforms from 7 a.m. ET (when our new hub in London hands off to Washington) until late evening (when Washington hands off to Seoul). One DME will oversee the General Assignment, Morning Mix and Live Desk teams and serve as the day-to-day architect of our live-updates coverage. All four DMEs will work with other senior editors to ensure the quality and ambition of our enterprise offerings.

The expansion will create eight new positions for assignment editors – in Photo, National, Metro, Investigations, Design and Business – to strengthen coverage and reinforce colleagues who’ve been taxed by the unrelenting news cycle. We will also establish eight new positions for assistant editors, most of whom will work closely with assignment editors in overseeing coverage. We anticipate that these positions will create opportunities for people from many corners of the newsroom, with varied skills and backgrounds, to gain expertise in line editing and guiding a team of journalists. We will grow the MPE desk by hiring five multi-platform editors, in part to expand that team’s role in publishing on our digital platforms. We will create eight positions for breaking-news and weekend editors (including one supervising producer) in Video, Photo, National, Features and Business. The role of projects editor has become vital in fostering the collaboration and strategic thinking needed to execute our most ambitious journalism, so we will add two more of these positions in Design.

The initiative will establish three additional visual enterprise editors – one in Business, one who will focus on politics and one who will work with both the Health & Science and Climate & Environment teams – building on the success we have seen with this role in Foreign. That experiment has shown that adding a senior visual journalist to help lead coverage in a department can have a transformative effect.

The expansion will enable us to experiment further. We will establish a new high-level position in the Business department: audience strategy editor. Reporting to the department head, this journalist will help us deliver our coverage of business and tech in more innovative and strategic ways. We have often stressed the need for “durable” storytelling – FAQs, explainers and timelines that help readers get up to speed and stay up to date. This explanatory journalism is critical to our future, and we will create a position for an editor focused on this work in the Health & Science team as well as one for an editor who will be part of the Audience team and act as a resource throughout the newsroom.

This major investment in the newsroom will also fund new roles to carry out functions essential to a growing news organization. First, we will create two positions for standards editors who will refine and maintain newsroom policies, working closely and collaboratively with all our journalists to promote best practices and ensure that our work meets the high expectations of our audiences. And we will establish two roles devoted to recruiting – a senior editor and an assistant editor – to help us systematize the way we recruit, hire and onboard staffers. These roles are critical to the fulfillment of our strong commitment to diversity.

This expansion demonstrates anew that The Washington Post is an ascendant news organization, with boundless ambitions and a growing capacity to meet them. We hope you’ll join us in taking a moment to reflect on all we have accomplished – it is your success that enables the company to strengthen the newsroom in this way. We feel privileged to join you in the important work that lies ahead.

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प्रेस परिषद ने प्रिंट मीडिया को दी सलाह, कहा- ऐसी चीजों से बनाए दूरी

यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 20 January, 2022
Last Modified:
Thursday, 20 January, 2022
PCI

यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ऐसे में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले, भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने प्रिंट मीडिया को ‘पेड न्यूज’ प्रकाशित करने से बचने की सलाह दी है। साथ ही प्रिंट मीडिया से उसके द्वारा निर्धारित पत्रकारिता आचरण के मानदंडों का पालन करने की भी सलाह दी है।

प्रेस परिषद ने प्रिंट मीडिया से ऐसी कोई भी खबर या अन्य सामग्री नहीं छापने को कहा जो जन प्रतिनिधि अधिनियम 1951 का उल्लंघन करती हो।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 10 फरवरी से सात मार्च के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं और मतों की गिनती 10 मार्च को होगी।

पीसीआई ने एक बयान में कहा, ‘भारत में चुनाव हमारे लोकतंत्र की रीढ़ हैं और मीडिया पर सभी संबंधित जानकारी को जनता तक पहुंचाने की भारी जिम्मेदारी है।’

उसने चुनाव की कवरेज के संबंध में प्रिंट मीडिया को नौ बिंदुओं वाले परामर्श में कहा है, ‘भारतीय प्रेस परिषद मीडिया को सलाह देती है कि पेड न्यूज पर जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 126 और पत्रकारिता आचरण के मानदंड -2020 का उल्लंघन न करें।’

पीसीआई ने अपने परामर्श में प्रिंट मीडिया से निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सभी आदेशों और निर्देशों का पालन करने को कहा है जो समय-समय पर जारी किए जाते हैं।

परिषद ने प्रिंट मीडिया से कहा कि वह मतदान के अंतिम 48 घंटे के दौरान चुनाव से संबंधित किसी तरह की सामग्री का अखबारों में प्रकाशन नहीं करें और इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर जनप्रतिनिधि कानून की धारा 126 के तहत दो साल तक की सज़ा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

पीसीआई ने कहा कि कोई भी समाचार पत्र मतदान की अंतिम तारीख तक ‘एक्जिट-पोल’ सर्वेक्षण प्रकाशित नहीं करेगा, चाहे वे कितने भी वास्तविक क्यों न हों।

उसने कहा कि सांप्रदायिक या जाति के आधार पर चुनाव प्रचार नियमों के तहत प्रतिबंधित है और परिषद ने प्रिंट मीडिया को उन खबरों से बचने की सलाह दी जो धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर लोगों के बीच दुश्मनी या नफरत की भावनाओं को बढ़ावा देती हों।

उसने कहा कि मीडिया किसी भी उम्मीदवार या पार्टी के खिलाफ अपुष्ट आरोपों का प्रकाशन नहीं करे।

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वॉट्सऐप ग्रुप्स में दैनिक भास्कर समूह के ई-पेपर्स सर्कुलेट करने पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने वॉट्सऐप को दैनिक भास्कर के ई-पेपर प्रसारित करने वाले वॉट्सऐप समूहों को ब्लॉक या बंद करने का निर्देश दिया है। अब दो मई को होगी मामले की सुनवाई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 December, 2021
Last Modified:
Tuesday, 28 December, 2021
Dainik Bhaskar Group

दिल्ली हाईकोर्ट ने तमाम वॉट्सऐप ग्रुप्स के द्वारा ‘दैनिक भास्कर ग्रुप्स’ के अखबारों के ई-पेपर्स प्रसारित करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने वॉट्सऐप को निर्देशित किया है कि दैनिक भास्कर समूह के ई-पेपर्स प्रसारित करने वाले वॉट्सऐप ग्रुप्स को ब्लॉक किया जाए या उन्हें बंद किया जाए।

बता दें कि वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिये ई-पेपर्स को गैरकानूनी तरीके से प्रसारित करने के खिलाफ दैनिक भास्कर समूह ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने डीबी कॉर्प लिमिटेड (दैनिक भास्कर समूह) के पक्ष में अंतरिम आदेश पारित किया है। अब इस मामले में दो मई 2022 को सुनवाई होगी।

बताया जाता है कि अपने फैसले में हाई कोर्ट ने उन वॉट्सऐप ग्रुप्स के एडमिन को भी नोटिस जारी किया है, जो दैनिक भास्कर समूह के ई-पेपर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अवैध रूप से प्रसारित कर रहे हैं। इन वॉट्सऐप ग्रुप्स के एडमिन की पहचान उनके मोबाइल नंबर से हुई है। हाई कोर्ट ने केंद्रीय दूरसंचार विभाग और केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है।

गौरतलब है कि दैनिक भास्कर समूह सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिये अपनी आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल एप पर ई-पेपर्स देखने की सुविधा मुहैया कराता है। समूह का कहना है कि इन ई-पेपर्स को बिना पूर्व अनुमति के अन्य माध्यमों या प्लेटफार्म्स पर प्रसारित करना गैरकानूनी है।

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‘Indian Newspaper Society’ के प्रेजिडेंट बने मोहित जैन, कार्यकारिणी में शमिल हैं ये नाम

‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (The Economic Times) के मोहित जैन को ‘इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी’ (INS) का प्रेजिडेंट चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 27 December, 2021
Last Modified:
Monday, 27 December, 2021
INS Mohit Jain

‘द इकनॉमिक टाइम्स’ (The Economic Times) के मोहित जैन को ‘इंडियन न्‍यूजपेपर सोसायटी’ (INS) का प्रेजिडेंट चुना गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई ‘आईएनएस’ की 82वीं वार्षिक आम बैठक में यह निर्णय लिया गया। उन्हें ‘हेल्थ एंड द एंटीसैप्टिक’ (Health & The Antiseptic) के एल. आदिमूलम की जगह ये जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनका यह चुनाव वर्ष 2021-22 के लिए किया गया है।

इसके साथ ही ‘आईएनएस’ की नई कार्यकारिणी में ‘साक्षी’ के के. राजा प्रसाद रेड्डी को डिप्टी प्रेजिडेंट, ‘आज समाज’ के राकेश शर्मा को वाइस प्रेजिडेंट और ‘अमर उजाला’ के तन्मय माहेश्वरी को मानद कोषाध्यक्ष चुना गया है। वहीं मैरी पॉल को सेक्रेट्री-जनरल की जिम्मेदारी दी गई है।

इस मीटिंग के दौरान ए. आदिमूलम ने अखबारों के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ‘मीडिया काफी महत्वपूर्ण है। समाज के चौथे स्तंभ के रूप में अखबार लोकतंत्र के संरक्षक हैं। यह हमारे देश के साथ-साथ दुनिया में बड़े पैमाने पर होने वाली दैनिक घटनाओं के बारे में प्रामाणिक समाचारों के साथ जनता को अच्छी तरह से सूचित करते हैं।’

आदिमूलम ने कहा कि ‘आईएनएस’कुछ विचारों और उद्देश्यों के साथ स्थापित की गई थी। उन्होंने कहा, ‘अगर हम एक ही दृष्टि और उद्देश्य के साथ एकजुट होते हैं तो बड़े पैमाने पर उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।’

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इस राज्य में अखबार वितरकों की सरकार ने ली सुध, दिया ये तोहफा

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रदेश के अखबार वितरकों (हॉकर्स) को विशेष कोविड सहायता राशि प्रदान की।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 24 December, 2021
Last Modified:
Friday, 24 December, 2021
hawkers

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रदेश के अखबार वितरकों (Hawkers) को विशेष कोविड सहायता राशि प्रदान की। दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा करते हुए इन अखबार वितरकों के बैंक खाते में सहायता राशि ट्रांसफर की। साथ ही अखबार वितरकों को असंगठित सामाजिक सुरक्षा योजना में शामिल करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री के इस जनहित कदम का ओडिशा के तमाम अखबार वितरकों ने स्वागत करने के साथ ही उन्हें धन्यवाद भी दिया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल युग में भी अखबार की महत्ता कम नहीं हुई है और हॉकर, अखबार एवं पाठक के बीच का सेतु है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोविड महामारी में हर वर्ग के साथ अखबार वितरक भी प्रभावति हुए हैं। ऐसे में ओडिशा सरकार ने आज राज्य के अखबार वितरकों उनका हक प्रदान किया है। अखबार वितरकों को विशेष कोविड सहायता राशि प्रदान करने के साथ ही इन्हें सामाजिक सुरक्षा योजना में शामिल किया गया है। सूचना ए​वं जनसंपर्क विभाग की तरफ से प्रदेश में पंजीकृत 7300 अखबार वितरकों के खाते में 6 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड सहायता राशि के साथ अखबार वितरकों के लिए दुर्घटना संबन्धित मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए की सहायता राशि के साथ ही स्वभाविक मृत्यु होने पर 1 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। दुर्घटना के कारण पूरी तरह से अक्षम हो जाने वाले हॉकर को डेढ़ लाख रुपए की सहयाता सरकार की तरफ से देने की व्यवस्था की गई है। दुर्घटना में आंशिक रूप से घायल अखबार को 80 हजार रुपए और एक अंग गंवाने वाले व्यक्ति को 40 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के कारण आम लोगों की तरह अखबार वितरक भी आर्थिक असुविधा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सभी पंजीकृत हॉकर अर्थात अखबार वितरकों को हमारी सरकार ने यह सहायता राशि देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के राहत कोष से यह सहयाता राशि दी जाएगी। इसके अलावा अखबार वितरक को काम करने में असुविधा ना हो इसके लिए प्रत्येक जिले में वर्कसेड बनाया जाएगा। यह वर्कसेड गृह एवं नगर विकास विभाग की तरफ से तैयार किया जाएगा।

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India Today समूह से जुड़े युवा पत्रकार प्रशांत श्रीवास्तव, मिली यह जिम्मेदारी

युवा पत्रकार प्रशांत श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ समूह के साथ अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने ‘इंडिया टुडे‘ मैगजीन में बतौर स्पेशल करेसपॉन्डेंट (उत्तर प्रदेश ब्यूरो) जॉइन किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 20 December, 2021
Last Modified:
Monday, 20 December, 2021
Prashant Srivastava

युवा पत्रकार प्रशांत श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ (India Today)  समूह के साथ अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने ‘इंडिया टुडे‘ (India Today) मैगजीन में बतौर स्पेशल करेसपॉन्डेंट (उत्तर प्रदेश ब्यूरो) जॉइन किया है।

प्रशांत श्रीवास्तव इससे पहले करीब तीन साल से ‘द प्रिंट‘ (The Print) में बतौर स्टेट करेसपॉन्डेंट (उत्तर प्रदेश ब्यूरो) अपनी भूमिका निभा रहे थे।

मूल रूप से बरेली के रहने वाले प्रशांत श्रीवास्तव को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब आठ साल का अनुभव है। पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘न्यूज नेशन‘ (News Nation) के साथ की थी। इसके बाद वह ‘नवभारत टाइम्स’ (NBT) से जुड़ गए। फिर ‘राजस्थान पत्रिका‘ (Rajasthan Patrika) और ‘द प्रिंट‘ से होते हुए अब ‘इंडिया टुडे’ (India Today)  समूह में पहुंचे हैं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो प्रशांत श्रीवास्तव ने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और लखनऊ यूनिवर्सिटी से एमए (पॉलिटिकल साइंस) की डिग्री ली है। समाचार4मीडिया की ओर से प्रशांत श्रीवास्तव को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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वकील के खिलाफ अपमानजनक लेख लिखना संपादक को पड़ा भारी, भुगतनी होगी ये सजा

सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ साप्ताहिक अखबार के संपादक डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी को किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 18 December, 2021
Last Modified:
Saturday, 18 December, 2021
SC45

एक वकील के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक लेख लिखना संपादक को इस कदर भारी पड़ गया कि उन्हें अब एक महीने जेल की सजा भुगतनी होगी। दरअसल, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ साप्ताहिक अखबार के संपादक डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी को किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। उन्हें एक वकील के खिलाफ मानहानिकारक लेखों के लिए कारावास की सजा सुनाई गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि एक महीने की जेल एक उदार सजा है।

चीफ जस्टिस एन.वी. रमण, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। 

हाई कोर्ट ने शेट्टी की याचिका को केवल आंशिक रूप से अनुमति दी थी और उनकी सजा को एक वर्ष से घटाकर एक महीना कर दिया था। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील संजय एम नुली से कहा कि उन्हें सजा भुगतने दें। पीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, 'आपने किसी को 'तीसरे दर्जे का वकील' कहा। आप इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हो और दावा करते हो कि तुम पत्रकार हो। यह किस तरह की पत्रकारिता है?

चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच में शामिल जस्टिस हिमा कोहली ने कहा, 'अपने लेख की भाषा देखो।' सजा को 'उदार' बताते हुए सीजेआई ने कहा, 'यह पीत पत्रकारिता है। यह उदारता है कि केवल एक महीने की कैद दी गई है।'

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि हाई कोर्ट के आदेश ने प्रेस की स्वतंत्रता और जानने के अधिकार का उल्लंघन किया है, जिसे संविधान के अनुच्छेद-19 (1) (ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आंतरिक हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है।   

याचिकाकर्ता कन्नड़ साप्ताहिक अखबार ‘तुंगा वर्थे’ के मालिक, प्रकाशक व संपादक हैं। 2008 में वकील टीएन रत्नराज के खिलाफ लेखों की एक श्रृंखला प्रकाशित की थी और वकील के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था।

  

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भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले एडिटर ने किया रिटायरमेंट का ऐलान

अपने विवादित बयानों, लेखों और ट्वीट की वजह से वह हमेशा चर्चा में बने रहते थे। वह अकसर भारत को जंग की धमकी देता रहता था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 December, 2021
Last Modified:
Friday, 17 December, 2021
GlobalTimes8754

चीन में सरकार का मुखपत्र माने जाने वाले दैनिक अखबार ‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ के संपादक (एडिटर) हू शिजिन ने रिटायर होने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो (Vibo) पर किया।

शिजिन के वीबो पर दो करोड़ 40 लाख फॉलोवर हैं। उन्होंने कहा कि वह रिटायर भले ही हो रहे हैं लेकिन वह आगे भी अपनी विशेष टिप्पणी ग्लोबल टाइम्स में लिखते रहेंगे। हू शिजिन ने लिखा, 'मैं जारी रखूंगा... हर चीज मैं कम्युीनिस्टि पार्टी की खबरों के लिए करता रहूंगा।'

‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ चीन की सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का अखबार माना जाता है। कभी लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले हू शिजिन ‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ का एडिटर बनने के बाद जहरीले बयान देने लगा। शिजिन साल 2005 में ग्‍लोबल टाइम्‍स का एडिटर बना था। ग्‍लोबल टाइम्‍स और सोशल मीडिया के जरिए हू शिजिन ने चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में बहुत आक्रामक होकर चीन के झूठे राष्‍ट्रवाद को बढ़ावा देने का काम किया। भारत समेत दुनियाभर के देशों के खिलाफ हू शिजिन ट्विटर पर जहर उगलता रहता था। इसी वजह से उसे 'ट्रोल किंग' कहा जाता था।

हू शिजिन अपने विवादित बयानों, लेखों और ट्वीट की वजह से चर्चा में बने रहते थे। वह अकसर भारत को जंग की धमकी देता रहता था। एक ट्वीट में हू शिजिन ने कहा था, 'PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) ने पठारी इलाके में तिब्बत मिलिटरी कमांड की लाइव-फायर ड्रिल का वीडियो रिलीज किया। PLA ने हवाई टुड़कियों के साथ भी ड्रिल की। हां, ये सभी चीन-भारत के हालात की ओर लक्षित हैं। भारतीय सेना या तो उकसाना बंद करे या हारने के लिए तैयार रहें।'

शिजिन ने एक अन्‍य ट्वीट में कहा था, 'अगर पैंगॉन्ग झील में कोई विवाद है तो उसका अंत सिर्फ भारतीय सेना की नई हार में होगा। पैंगॉन्ग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन का वास्तविक नियंत्रण है। 1962 में चीन की सेना ने भारत की सेना को यहां हराया था। इस बार भारतीय सेना यथास्थिति को बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। मुझे उम्मीद है कि भारत वही गलती नहीं दोहराएगा।'

पिछले साल उन्‍होंने अमेरिका के साथ कोरोना के उत्‍पत्ति की जांच करने मांग करने पर ऑस्‍ट्रेलिया की तुलना जूते में चिपके च्यूइंग गम से की थी।

 

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'द पायनियर' मामले में इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं NCLAT में हुईं खारिज

नौ महीने से अधिक समय तक मामले की सुनवाई के बाद NCLAT ने आखिरकार सभी तीनों अपीलों को 'गैर-रखरखाव योग्य' मानते हुए खारिज कर दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 December, 2021
Last Modified:
Friday, 17 December, 2021
The Pioneer

‘नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल’ (NCLAT) ने गुरुवार को कुशान मिश्रा, प्रशांत तिवारी और नरेंद्र कुमार द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इन याचिकाओं में 19 जनवरी 2021 के ‘नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल’ (NCLT) के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसने ‘द पायनियर’ अखबार का प्रबंधन करने वाले बोर्ड को निलंबित कर दिया गया था।

इसका मतलब यह है कि अब सेंट्रल बैंक की अध्यक्षता में लेनदारों की समिति, जिसने कंपनी को नौ करोड़ रुपये का कर्ज दिया है, अब इसके परिचालन को टेकओवर कर लेगी और अखबार के लिए नए निवेशकों की तलाश करेगी।

बता दें कि पायनियर को प्रिंट और पब्लिश करने वाली कंपनी ‘CMYK Printech Limited’ के एडिटोरियल डायरेक्टर्स में से एक अमित गोयल ने 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के लिए ‘एनसीएलटी‘ का रुख किया था। जब चंदन मित्रा, उनके बेटे कुशान मिश्रा और अन्य पारिवारिक सदस्यों द्वारा संचालित इस कंपनी ने इस रकम का भुगतान करने से इनकार कर दिया तो ‘एनसीएलटी‘ ने बोर्ड को निलंबित कर कंपनी परिचालन के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया था।

इसके बाद चंदन मित्रा (जिनका सितंबर में निधन हो गया है), कुशान मित्रा, प्रशांत तिवारी और हरनंदन प्रकाशन के प्रकाशक नरेंद्र कुमार ने ‘एनसीएलटी‘ के आदेश को खारिज करने के लिए विभिन्न आधारों पर ‘एनसीएलएटी‘ में अपील दायर की थी।

नौ महीने से अधिक समय तक मामले की सुनवाई के बाद NCLAT ने आखिरकार सभी तीनों याचिकाओं को 'गैर-रखरखाव योग्य' (non maintainable) मानते हुए खारिज कर दिया है।

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बीट रिपोर्टिंग और एडिटिंग के अहम पहलुओं से रूबरू कराती इस किताब का हुआ विमोचन

ऑनलाइन रूप से हुए एक कार्यक्रम में तमाम शिक्षाविदों और पत्रकारों की मौजूदगी में इस बुक का विमोचन किया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 December, 2021
Last Modified:
Friday, 17 December, 2021
pro Surabhi Dahia

देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) में अंग्रेजी पत्रकारिता विभाग की कोर्स डायरेक्टर प्रोफेसर सुरभि दहिया और शंभु दास द्वारा संपादित किताब ‘बीट रिपोर्टिंग एंड एडिटिंग, डिजिटल युग में पत्रकारिता’ (Beat Reporting and Editing: Journalism in the Digital Age) लॉन्च हो गई है।

16 दिसंबर को ऑनलाइन रूप से हुए एक कार्यक्रम में तमाम शिक्षाविदों और पत्रकारों की मौजूदगी में इस बुक का विमोचन किया गया। इस मौके पर ‘बिजनेस स्टैंडर्ड‘ के संपादकीय निर्देशक, ए.के. भट्टाचार्य ने कहा कि यह पुस्तक 21वीं सदी के दूसरे दशक में पत्रकारिता की पृष्ठभूमि में परिचायक होगी। पत्रकारिता जगत में यह बहुचर्चित पुस्तक संरक्षित करने योग्य है और इसका जबरदस्त अभिलेखनीय मूल्य है।

वहीं, ‘बीएजी’ ग्रुप की चेयरपर्सन व मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराधा प्रसाद ने कहा कि पुस्तक ने उन्हें बहुत प्रभावित किया है, क्योंकि इसमें पत्रकारिता के व्यापक पहलुओं को शामिल किया गया है, जो उभरते पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

‘एच.टी’ के संपादक सुकुमार रंगनाथन का कहना था कि इस पुस्तक में मुख्य पत्रकारिता बीट्स, पत्रकारिता के नए रूपों को शामिल किया गया है और पत्रकारिता शिक्षा में ज्ञानावरोध को भरने के लिए चीजों को परिपेक्ष्य में रखा गया है।

इस मौके पर अन्य प्रख्यात प्रवक्ताओं में शामिल ‘आईआईएमसी‘ के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, ‘आई.ए.एम.सी.आर ‘ की उपाध्यक्ष प्रो. ऊषा रमन, बिल हिंचबर्गर, प्रो. सुनीलकांत बेहरा, विवेक मेहरा और सिद्धार्थ मिश्रा ने अकादमिक ज्ञान संग्रह के रूप में पुस्तक के दायरे के बारे में बात की और इसे नए युग की पत्रकारिता की बाइबल के रूप में संदर्भित किया।

किताब की संपादक प्रो. सुरभि दहिया और शंभु दास साहू का मानना है कि इस पुस्तक का उद्देश्य उभरते पत्रकारों को अपने संबंधित क्षेत्र में सीखने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए पत्रकारिता में विभिन्न विषयगत विशेषज्ञता से संबंधित उपकरणों और सर्वोत्तम अनुभवों को प्रकाशित करने का एक प्रयास है।

इस किताब में 48 अध्याय हैं। इसमें व्यापक रूप से ग्रामीण रिपोर्टिंग, कहानी कथन, फोटो पत्रकारिता और कार्टूनिंग, सोशल मीडिया रिपोर्टिंग, झूठी खबर और नकली समाचार, समाधान आधारित पत्रकारिता पर विशेष अध्यायों के अलावा रक्षा, राजनीति, न्यायालय, अपराध, खेल और मनोरंजन जैसे पारंपरिक बीट्स को व्यापक रूप से शामिल कर आने वाले समय को भी समाहित किया गया है। इस युग की पत्रकारिता और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस, ब्लोकचेन, बॉड्स, पोडकास्ट, मोबाइल पत्रकारिता, ड्रोन पत्रकारिता और भारत में डेटा पत्रकारिता जैसे विषयों को भी इसमें शामिल किया गया है।

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इस वजह से बिजनेस अखबार mint ने जताया अफसोस, जारी किया स्टेटमेंट

अंग्रेजी के बिजनेस अखबार ‘मिंट’ ने अपने वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन में लैंगिक विविधता सुनिश्चित नहीं कर पाने पर अफसोस जताते हुए एक स्टेटमेंट जारी किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 16 December, 2021
Last Modified:
Thursday, 16 December, 2021
mint

अंग्रेजी के बिजनेस अखबार ‘मिंट’ (Mint) ने अपने वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन (Annual Banking Conclave) में लैंगिक विविधता (Gender Diversity) यानी ज्यादा संख्या में महिला वक्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं कर पाने पर अफसोस जताते हुए एक स्टेटमेंट जारी किया है।

इस स्टेटमेंट में अखबार के एडिटर-इन-चीफ श्रुतिजीत केके (Sruthijith KK) का कहना है, ‘हमने गलती की। हमने मिंट के वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन में पैनलिस्टों के बीच लैंगिंक विविधता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं की। हालांकि, पैनल्स को तैयार करने के दौरान हमने कई महिला वक्ताओं को आमंत्रित किया, लेकिन जब उन्होंने मना कर दिया तो हमें प्रयास करना चाहिए था और अन्य उपलब्ध महिला वक्ताओं को तलाशने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए थी।’

इसके साथ ही स्टेटमेंट में यह भी कहा गया है, ‘हम जानते हैं कि इससे तमाम लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है और इस बात का हमें खेद है। इस तरह के आयोजनों में पैनल्स को तैयार करने अथवा वक्ताओं के चयन में हमारे पार्टनर्स और स्पॉन्सर की कोई भूमिका नहीं होती है।’

‘मिंट’ की ओर से जारी स्टेटमेंट को आप यहां पढ़ सकते हैं।

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