अमेरिकी अखबार ने किया दावा, इस सच को छिपा रहा है भारत

‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा कि भारत सरकार का कहना है कि वो बाकी देशों की तुलना में कोरोना से बेहतर तरीके से लड़ रहा है।

Last Modified:
Monday, 20 July, 2020
Newspaper

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 10 लाख  को भी पार कर गई है, जिसके चलते भारत दूसरे नंबर पर पहुंचने वाला है। लेकिन फिर भी भारत पर आरोप लग रहे हैं कि वह कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा छिपा रहा है। यह दावा अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने किया है।

अखबार के मुताबिक, भारत कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा छुपा रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि जब भारत के चार बड़े शहरों से मार्च और जून के बीच हुई मौतों का आंकड़ा मांगा गया, तो सिर्फ मुंबई ने ही सही आंकड़ा उपलब्ध करवाया, जबकि कोलकाता ने तो कोई आंकड़ा दिया ही नहीं।  

‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा कि भारत सरकार का कहना है कि वो बाकी देशों की तुलना में कोरोना से बेहतर तरीके से लड़ रहा है। लेकिन भारत की एक बड़ी जनसंख्या गांवों और छोटे शहरों में रहती है। इन स्थानों पर स्वास्थ्य सुविधाएं बड़े शहरों की तुलना में ज्यादा अच्छी नहीं है।

अमेरिकी अखबार ने अपने दावे में कहा कि अमेरिका और ब्राजील में जब कोरोना के कुल मामले 10 लाख थे तो मौत की संख्या करीब 50 हजार हो चुकी थी, लेकिन कुल 10 लाख मामलों पर भारत में कोरोना से मौत का आंकड़ा 25 हजार रहा है।

‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा कि भारत में कई मौतें रिपोर्ट ही नहीं की जाती है। इसके अलावा भारत ने कहा है कि देश में कोरोना से कम मौत होने का कारण टीबी वैक्सीन और भारतीय लोगों में मौजूद इम्यूनिटी है, जबकि अमेरिकी एक्सपर्ट का मानना है कि इस थ्योरी का कोई प्रमाण अभी तक नहीं मिला है।

अखबार ने कहा है कि विकसित देशों में भी कोरोना से हुई मौतों के सही आंकड़ें नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में भारत में सही आंकड़ें मिलना वाकई में एक 'रहस्य' जैसे दिखाई पड़ रहा है। अखबार ने लिखा है कि जब तक किसी भी देश में सही आंकड़े न मिले, तब तक कोरोना से लड़ना आसान नहीं हो पाएगा।

मुंबई में हुई मौतें अखबार ने लिखा कि मुंबई में पिछले साल मई में 6832 लोगों की मौत हुई थी। वहीं इस साल मई में 12,963 मौतें हुई। अखबार ने लिखा कि इस साल मुंबई में 6131 अतिरिक्त लोगों की मौतें हुई। जबकि सिर्फ 2269 मौतों को कोरोना से हुई मौतों की लिस्ट में जोड़ा गया है। सामान्य दिनों में मौतें नहीं होती रिपोर्ट पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट के. श्रीनाथ रेड्डी ने कहा है कि भारत में नॉर्मल दिनों में 20 प्रतिशत मौतों को रिपोर्ट नहीं किया जाता है। ऐसे में माना जा सकता है कि कोरोना से हुई मौतें ऑफिशियल आंकड़ों से अधिक ही होंगी।

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जम्मू-कश्मीर में नियमों का पालन न करने पर कई अखबारों पर यूं गिरी गाज

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 34 अखबारों को अपनी सूची से बाहर कर दिया है।

Last Modified:
Monday, 18 January, 2021
kasmirnewspaper545

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 34 अखबारों को अपनी सूची से बाहर कर दिया है। वहीं सर्कुलेशन व प्रकाशन संबंधी अन्य दिशानिर्देशों का पालन न करने के चलते 13 अन्य अखबारों का विज्ञापन रोक दिया है। इसके अलावा, ‘कथित साहित्यिक चोरी’ और ‘दोषपूर्ण सामग्री’ के प्रकाशन की वजह से 17 अन्य समाचार प्रकाशनों को नोटिस जारी किए गए हैं।

न्यूज पोर्टल ‘दिप्रिंट’ की एक खबर के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों ने बताया कि केंद्रशासित प्रदेश के दर्जनों समाचारपत्रों के कामकाज का पता लगाने और जांच करने के लिए चार महीने चली लंबी कवायद के बाद 7 दिसंबर को यह फैसला लिया गया था। प्रदेश प्रशासन ने कहा कि उन्हें इन संगठनों के खिलाफ कथित रूप से कदाचार और विज्ञापन नीति का उल्लंघन किए जाने की शिकायतें मीडिया बिरादरी के भीतर से ही मिल रही थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 17 अखबार प्रकाशनों को जारी नोटिस में समाचार संगठनों से जून 2020 में जारी नई मीडिया नीति के मानकों का पालन करने को कहा गया है, जिसके तहत सरकार ‘फेक न्यूज, साहित्यिक चोरी और अनैतिक और राष्ट्रविरोधी सामग्री’ के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और मीडिया के अन्य स्वरूपों की सामग्री की जांच करती है।

‘दिप्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उसके पास आधिकारिक दस्तावेज मौजूद हैं, जो दिखाते हैं कि समिति ने इस बात को ध्यान में रखा कि कुछ अखबार मार्च 2020 से कोविड-19 महामारी के कारण अपने मुद्दों को नियमित रूप से प्रकाशित नहीं कर पाए हैं।

एक सरकारी अधिकारी ने ‘दिप्रिंट’ को बताया कि इसके बावजूद भी कई समाचार प्रकाशन कदाचार में लिप्त रहे हैं और अपनी प्रसार संख्या के बारे में गलत जानकारी देते रहे हैं। न्यूज पब्लिकेशन के खिलाफ कार्रवाई सरकार की तरफ से गठित समिति की तरफ से की गई व्यापक जांच और चार महीने लंबी कवायद के बाद की गई है।’

अधिकारी ने कहा, ‘2017-18 से ये पब्लिकेशन विज्ञापन नीति का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन कर रहे हैं और इन्होंने अपने प्रसार, स्वामित्व और प्रकाशन की गुणवत्ता से संबंधित मामलों में अधिकारियों को धोखा देने की कोशिश की है।’

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन पब्लिकेशन पर कार्रवाई की गई है उनमें राइजिंग कश्मीर, गैलेक्सी न्यूज़, कश्मीर इमेजेज और अपना जम्मू शामिल हैं। यह फैसला 15 मई 2020 को गठित सरकार की इम्पैनलमेंट कमेटी ने लिया, जिसमें वित्त विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

वहीं, जम्मू संभाग में मान्यता प्राप्त की सूची से बाहर होने वाले अखबारों में हिल पीपुल, नावीद, दैनिक कश्मीर टाइम्स, स्वर्ण स्मारिका, नई रोशनी, हाइट ऑफ लाइफ, जमीर-ए-खल्क, गैलेक्सी न्यूज़, अपना जम्मू, द अर्थ न्यूज और लोक शक्ति जैसे थोड़े-बहुत नामी अखबार शामिल हैं।

प्रसार संबंधी आंकड़ों में हेराफेरी के कारण विगरस न्यूज, स्टेट मॉनीटर और ट्रेड एंड जॉब आदि को सरकार ने सूची से बाहर किया है। कश्मीर में वादी गुलपीश, सदाकत-ए-रहबर, हक नवाज और सद-रंग सेहर सहित आठ समाचार पत्रों के प्रेस पर रोक लगाई गई है।

वहीं, सूची से बाहर किए गए जाने-माने पब्लिकेशन में कश्मीर इमेजेज का जम्मू संस्करण भी शामिल है, जिसने जनवरी 2018 के बाद से एक भी संस्करण प्रकाशित नहीं किया है। इसी तरह दिसंबर 2019 से अखबार की प्रतियां संयुक्त निदेशक के कार्यालय न भेजने के कारण राइजिंग कश्मीर के जम्मू संस्करण के लिए विज्ञापन बंद कर दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक अधिकारी ने ‘दिप्रिंट’ को बताया कि सरकार ने यह कार्रवाई अखबारों के आकार या नाम के आधार पर नहीं बल्कि कथित कदाचार के कारण की है।

एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि प्रसार पर गलत आंकड़े देना, वास्तविक स्वामित्व के बारे में जानकारी छिपाना और छपी सामग्री, कागज की गुणवत्ता (रंगीन अखबारों को अधिक सरकारी धन मिलता है), इंटरनेट या अन्य समाचार पत्रों से प्रकाशन सामग्री की चोरी जैसे कुछ ऐसे कथित उल्लंघन थे जो जांच के दौरान सामने आए।

जांच से जुड़े रहे एक अन्य सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘अखबारों की प्रसार संख्या की जांच के लिए हमारी टीमों ने कई जगहों जैसे अखबार के स्टैंड और वेंडर्स की दुकानों पर छापे मारे और हमने पाया कि कुछ समाचार पत्र केवल सरकारी रिकॉर्ड में ही मौजूद थे। कुछ ऐसे अखबार भी पाए गए जिनकी केवल एक प्रति छापकर सूचना विभाग को भेजी गई थी।’

रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में 164 प्रतिष्ठित प्रकाशन सूचीबद्ध हैं, जिनमें अखबार, मैगजीन, साप्ताहिक और पाक्षिक पत्र-पत्रिकाएं शामिल हैं। इनमें 41 अंग्रेजी दैनिक, 59 उर्दू दैनिक और 56 अंग्रेजी और उर्दू सप्ताहिक हैं।

जम्मू में 84 अंग्रेजी दैनिक, 31 उर्दू और 24 हिंदी दैनिक, 14 बहुभाषी (हिंदी/डोगरी) सप्ताहिक, 37 उर्दू सप्ताहिक और 30 अंग्रेजी सप्ताहिक सहित 248 प्रकाशन सूचीबद्ध हैं।

अब तक, जम्मू में 24 न्यूज पब्लिकेशन को सूची से बाहर किया गया है, 17 को नई मीडिया नीति 2020 अपनाने के लिए नोटिस भेजा गया है और पांच का विज्ञापन निलंबित किया गया है। वहीं, कश्मीर में 10 अखबारों को सूची से बाहर किया गया है और आठ अन्य के विज्ञापन निलंबित कर दिए गए हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव की नेताजी सुभाष चंद्र की यात्रा पर नई किताब

सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर गहन शोध के बाद एक किताब लिखी है, जिसका नाम ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
Subhash5454

सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर गहन शोध के बाद एक किताब लिखी है, जिसका नाम ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ है। इसे संवाद प्रकाशन, मेरठ ने प्रकाशित किया है।

23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की जन्मतिथि है। देश इस साल उनकी 125वीं जन्मशती मना रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने इस साल नेताजी की याद में कई आयोजन लगातार करने की योजना की घोषणा भी की है।

पिछले 07 दशकों में सुभाष चंद्र बोस को लेकर न जाने कितने सवाल उठे हैं। 18 अगस्त 1945 को नेताजी का निधन तायहोकु में एक हवाई हादसे में बताया गया, लेकिन देश ने कभी इस पर विश्वास नहीं किया। नेताजी का निधन हमेशा रहस्य की परतों में लिपटा रहा। सुभाष चंद्र बोस के निधन से जुड़े रहस्य की जांच के लिए तीन आयोग बने। दो आयोगों यानि शाहनवाज खान और जस्टिस जीडी खोसला आयोग ने कहा कि नेताजी का निधन तायहोकु में हवाई हादसे में हो गया, लेकिन 90 के दशक के आखिर में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गठित जस्टिस मनोज कुमार मुखर्जी आयोग ने कहा, उनका निधन हवाई हादसे में नहीं हुआ था।

50 के दशक में बने पहले जांच आयोग के सदस्य रहे सुभाष के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस ने बाद में खुद को आयोग की जांच रिपोर्ट से अलग कर अपनी असहमति रिपोर्ट तैयार की, जिसे उन्होंने अक्टूबर 1956 में जारी किया। इस रिपोर्ट में उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सुभाष किसी हवाई हादसे के शिकार नहीं हुए बल्कि जिंदा बच गए। जापान के उच्च सैन्य अधिकारियों ने खुद उन्हें सुरक्षित जापान से निकालकर सोवियत संघ की सीमा तक पहुंचना सुनिश्चित किया।

अलग-अलग देशों की आला खुफिया एजेंसियों ने अपने तरीकों से इस तारीख से जुड़ी सच्चाई को खंगालने की कोशिश की। कुछ स्वतंत्र जांच भी हुई। कई देशों में हजारों पेजों की गोपनीय फाइलें बनीं। तमाम किताबें लिखीं गईं। रहस्य ऐसा जो सुलझा भी लगता है और अनसुलझा भी। हकीकत ये है कि 18 अगस्त 1945 के बाद सुभाष कभी सामने नहीं आए।

बहुत से लोग 80 के दशक तक दावा करते रहे कि उन्होंने नेताजी को देखा है। अयोध्या में रहने वाले गुमनामी बाबा को बेशक सुभाष मानने वालों की कमी नहीं। दो और बाबाओं के सुभाष होने की चर्चाएं खूब फैली, उसमें शॉलमारी आश्रम के स्वामी शारदानंद और मध्य प्रदेश में ग्वालियर के करीब नागदा के स्वामी ज्योर्तिमय को नेताजी माना गया।

जब देश आजाद हो रहा था, तब कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं को भी लगता था कि नेताजी जिंदा हैं। ये माना गया कि वो सोवियत संघ पहुंच गए हैं। महफूज हैं। बस एक शख्स था, जो कह रहा था कि नेताजी ने उसके सामने अस्पताल में आखिरी सांसें ली हैं, वो थे आजादी के बाद पाकिस्तान में जाकर बस गए कर्नल हबीब उर रहमान।

सुभाष की अज्ञात यात्रा बहुत रहस्यपूर्ण और कौतुहल लिए है। लेखक संजय श्रीवास्तव की नई किताब ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ उसी ओर देखने की कोशिश है। सुभाष पर उपजने वाले तमाम सवालों का जवाब खोजने के साथ तीनों जांच आयोगों की रिपोर्ट, बडे़ भाई सुरेश चंद्र बोस की अहसमति रिपोर्ट को विस्तार से पहली बार दिया गया है।

ये काफी तथ्यपरक और शोधपूर्ण तरीके से लिखी किताब है, जो सुभाष ही नहीं बल्कि उनके जीवन से जुड़े लोगों और सवालों पर नजर दौड़ाती है। सुभाष की अज्ञात यात्रा आज भी अज्ञात है।

किताब - सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा

लेखक - संजय श्रीवास्तव

संवाद प्रकाशन, मेरठ

मूल्य 300 रुपए (पेपर बैक)

(अमेजन पर उपलब्ध)

पेज -288

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

वरिष्ठ पत्रकार व पायनियर हिंदी की रेजिडेंट एडिटर ऊषा श्रीवास्तव का निधन

वरिष्ठ पत्रकार व पायनियर हिंदी की रेजिडेंट एडिटर ऊषा श्रीवास्तव का शनिवार को निधन हो गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 January, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 January, 2021
Usha5454

वरिष्ठ पत्रकार व पायनियर हिंदी की रेजिडेंट एडिटर ऊषा श्रीवास्तव का शनिवार की सुबह निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं और उनका इलाज दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में चल रहा था।

उनके निधन की जानकारी ‘द पॉयनियर’ ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल के जरिए दी।

'द पायनियर' से पहले ऊषा श्रीवास्तव अमर उजाला के साथ नेशनल ब्यूरो में कार्यरत थीं।  

दुःख की इस घड़ी में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘पायनियर हिंदी की संपादक और वरिष्ठ पत्रकार उषा श्रीवास्तव जी को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और परिजनों को संबल दे। ॐ शांति।’

 

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस ने वित्तमंत्री को लिखा लेटर, रखीं ये मांगें

‘द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस’ के प्रेजिडेंट बी श्रीनिवासन का कहना है कि इन मांगों को माने जाने से ‘बीमार’ मैगजीन इंडस्ट्री को काफी मदद मिलेगी

Last Modified:
Friday, 15 January, 2021
AIM

‘द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस’ (AIM) ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर अपनी मांगों से उन्हें अवगत कराया है। इसके साथ ही ‘AIM’ ने इंडस्ट्री के लिए केंद्रीय बजट 2021 में इन मांगों पर विचार करने का अनुरोध किया है।  

वित्तमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है, ‘कोविड-19 ने मैगजीन इंडस्ट्री को काफी प्रभावित किया है। महामारी ने इस इंडस्ट्री के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर काफी विपरीत असर डाला है। इसके कारण एडवर्टाइजर्स ने अपने विज्ञापन खर्चों में भी काफी कटौती की है। इसके अलावा अखबारों और मैगजींस के द्वारा  कोरोनावायरस के फैलने की फर्जी खबरें भी सोशल मीडिया पर काफी चलीं। इन फर्जी खबरों से भी इंडस्ट्री को काफी नुकसान हुआ।’

इस संकट की ओर केंद्र का ध्यान लाने और उद्योग को स्थिरता की राह पर वापस लाने के उद्देश्य से वित्तमंत्री को लिखे गए पत्र में ‘AIM’ के प्रेजिडेंट बी श्रीनिवासन ने जीएसटी में छूट देने, आयात किए जाने वाले कागज से कस्टम ड्यूटी हटाने और सरकारी विज्ञापनों में ज्यादा हिस्सेदारी देने की मांग की है।  

अपने पत्र में बी श्रीनिवासन का कहना है छपे हुए अखबार और मैगजींस की बिक्री पर कोई भी टैक्स लागू नहीं है। यह एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा है जो लगातार सरकारों द्वारा समाचार और सूचनाओं के प्रसार पर वित्तीय बोझ को दूर करने के लिए है। जबकि, अखबारों और मैगजींस की प्रिंटिंग पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगा हुआ है, जो छोटे और मध्यम पब्लिशर्स पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में एसोसिएशन ने सरकार से अखबारों/मैगजींस की प्रिंटिग और प्रॉडक्शन में जीएसटी से छूट देने की मांग की है।  

बी श्रीनिवासन का यह भी कहना है कि केंद्रीय बजट 2019 में न्यूज प्रिंट के आयात (import) पर दस प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाने से इंडस्ट्री पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। बी श्रीनिवासन ने गुजारिश की है कि सरकार को न्यूज प्रिंट के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को समाप्त कर देना चाहिए।

बी. श्रीनिवासन के अनुसार, ‘स्टैंडर्ड न्यूज (SNP) का घरेलू उत्पादन मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है, जबकि ग्लैज्ड न्यूजप्रिंट (GNP) और लाइटवेट कोटेड पेपर (LWC) का प्रॉडक्शन घरेलू स्तर (Indigenously) पर नहीं किया जा रहा है। ऐसे में यह तर्क देना कि कस्मट ड्यूटी घरेलू इंडस्ट्री को बचाने के लिए लगाई गई है, गलत है।’

इंडस्ट्री के निरंतर संरक्षण के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए ‘AIM’ ने सरकारी विज्ञापन खर्च में मैगजींस को ज्यादा हिस्सेदारी देने की मांग की है। यह खर्च सीमा इस समय एक प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर कुल विज्ञापन बजट का कम से कम 10 प्रतिशत करने की मांग की गई है।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने सरकार से मैगजीन इंडस्ट्री को तीन साल के लिए टैक्स से छूट देने पर विचार करने की मांग भी की है। इसके अलावा भी सरकार के समक्ष कुछ अन्य मांगें रखी गई हैं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

HT ने कुणाल प्रधान पर जताया और अधिक भरोसा, अब दी ये जिम्मेदारी

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ सुकुमार रंगनाथन ने कुणाल प्रधान के प्रमोशन की घोषणा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
Kunal Pradhan

‘हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स’ (Hindustan Times) प्रबंधन ने वरिष्ठ पत्रकार कुणाल प्रधान को अखबार के मैनेजिंग एडिटर के पद पर प्रमोट किया है। अपनी नई भूमिका में कुणाल ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के सभी एडिशंस की देखरेख करेंगे और दिल्ली व एनसीआर एडिशंस का प्रबंधन करना जारी रखेंगे।

फॉरेन अफेयर्स एडिटर्स और फॉरेन करेसपॉन्डेंट के साथ-साथ सभी रेजिडेंट्स एडिटर्स अब कुणाल प्रधान को रिपोर्ट करेंगे। इसके साथ ही डेस्क, रीराइट डेस्क, स्पेशल प्रोजेक्ट एडिटर्स, हेल्थ टीम, एचटी नेक्स्ट और लीगल व स्पोर्ट्स ब्यूरो उन्हें रिपोर्ट करना जारी रखेंगे।

इस बारे में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के एडिटर-इन-चीफ सुकुमार रंगनाथन का कहना है, ‘कुणाल प्रधान को अखबार के मैनेजिंग एडिटर के पद पर प्रमोट करने की घोषणा करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है। कुणाल हमारे साथ वर्ष 2016 से जुड़े हुए हैं और मेट्रो सेक्शन व दिल्ली एडिशन संभाल चुके हैं। गुरुग्राम एडिशन की लॉन्चिंग और एचटी री-डिजायन प्रोजेक्ट में प्रमुख भूमिका निभाने वाले लोगों में कुणाल प्रधान का नाम भी शामिल है। मैं कुणाल प्रधान को उनकी नई भूमिका के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

विराट-अनुष्का को लेकर अखबार की वायरल होती खबर कितनी सच-कितनी झूठ, जानें यहां

वायरल होती खबरों में कहा गया कि अखबार ने पहले पेज पर जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की जगह इन दोनों की तस्वीर छाप दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 January, 2021
viralnews-virat665

खुद को ‘सबसे आगे’ करार देने की कोशिश में कई बार ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जो ताउम्र सालती रहती हैं। 12 जनवरी को एक अखबार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दरअसल, 11 जनवरी को अनुष्का शर्मा और विराट कोहली पेरेंट्स बने। अनुष्का ने मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में बेटी को जन्म दिया, जिसके बाद से फैंस और तमाम सितारें उन्हें बधाइयां दे रहे हैं। टीवी हो या फिर अखबार, हर कहीं अनुष्का शर्मा और विराट कोहली के पेरेंट्स बनने की खबर छाई हुई है। इस बीच प्रसिद्ध अंग्रेजी अखबार जमकर ट्रोल होने लगा। कहा जा रहा था कि इस अंग्रेजी अखबार ने फ्रंट पेज पर ही अनुष्का शर्मा और विराट कोहली को आतंकवादी बता दिया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस अखबार का नाम 'द हिटवाड' बताया गया।

वायरल होती खबरों में कहा गया कि अखबार ने पहले पेज पर जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की जगह इन दोनों की तस्वीर छाप दी है। सोशल मीडिया पर तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसके बाद तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए जब हमने सर्च किया कि क्या यह अखबार का रियल पेज है या फिर किसी ने उसे एडिट कर दिया है, तो सर्च करने पर हमें अखबार का ई-पेपर का रियल पेज मिला, जो 12 जनवरी का है, जिसे देखने पर यह पता चलता है कि यह वायरल होती खबर सच नहीं है। दोनों ही खबर अलग-अलग प्रकाशित की गई है। हमारी पड़ताल में पता चला कि अखबार से गलती नहीं हुई है। ई-पेपर का लिंक आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं-

https://www.ehitavada.com/index.php?edition=RMpage&date=2021-01-12&page=4

सोशल मीडिया पर जैसे ही ये फोटो शेयर की गई तो लोगों ने तुरंत इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। लोग अखबार की इस गलती पर लगातार अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे घटिया मजाक कह रहे हैं। अगले दिन का पेपर सर्च करने पर भी हमें किसी तरह की कोई गलती जैसी खबर देखने को नहीं मिली, यानी अखबार से गलती नहीं हुई है और न ही इस वायरल होती खबर पर उसने अपनी कोई प्रतिक्रिया दी है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

यूपी सरकार के काम की तारीफ में विदेशी मैगजीन में छपा आर्टिकल, जानें सच

अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक पत्रिका में छपे आलेख को लेकर यह अफवाह फैल गई कि विदेशों में भी योगी सरकार के कोरोना नियंत्रण की तारीफ हो रही है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 07 January, 2021
Last Modified:
Thursday, 07 January, 2021
CM-YOgi

अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक पत्रिका में छपे आलेख को लेकर यह अफवाह फैल गई कि विदेशों में भी योगी सरकार के कोरोना नियंत्रण की तारीफ हो रही है। इस खबर को कई मीडिया संस्थानों ने भी प्रकाशित किया। खबर थी कि अंतरराष्ट्रीय पत्रिका टाइम मैगजीन (Time Magazine) में कोरोना काल में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम की तारीफ में तीन पन्नों का लेख प्रकाशित हुआ है, लेकिन यह हकीकत नहीं है।

दरअसल, फैक्ट चेक में पता चला है कि टाइम मैगजीन ने ऐसा कोई लेख प्रकाशित नहीं किया है, बल्कि यह एक प्रायोजित आलेख (Sponsored Content) है, या यूं कहें कि पत्रिका में छपा यह आलेख यूपी सरकार द्वारा दिए गए विज्ञापन का एक प्रारूप था। इसकी पुष्टि www.boomlive.in ने अपने फैक्ट चेक में की है।

टाइम मैगजीन में तीन पन्नों में छपे इस लेख पर न तो किसी रिपोर्टर का नाम लिखा है और न ही मैगजीन की कंटेंट-लिस्ट में ही इस लेख के शीर्षक का जिक्र है। यही नहीं, मैगजीन में जिस पन्ने पर यह लेख प्रकाशित किया गया है, उसके ऊपर 'कंटेंट फ्रॉम उत्तर प्रदेश' (Content From Uttar Pradesh) लिखा हुआ है। यानी यह टाइम मैगजीन के संपादकीय विभाग द्वारा प्रकाशित लेख नहीं है। इसलिए इसमें मैगजीन के किसी रिपोर्टर का नाम भी नहीं है। इस लेख में कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के बाद भी जिस तरह से कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए वह सभी के लिए अतुलनीय उदहारण है।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

राजकमल प्रकाशन समूह ने नियुक्त किए दो कमीशनिंग एडिटर्स

मनोज कुमार पांडेय और धर्मेंद्र सुशांत की नियुक्ति क्रमश: लोकभारती और राधाकृष्ण के लिए की गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 06 January, 2021
Last Modified:
Wednesday, 06 January, 2021
Manoj Kumar Pandey Dharmendra Sushant

देश के प्रमुख प्रकाशन संस्थान ‘राजकमल प्रकाशन’ समूह ने दो कमीशनिंग एडिटर्स नियुक्त किए हैं। इसके तहत मनोज कुमार पांडेय और धर्मेंद्र सुशांत की नियुक्ति क्रमश: लोकभारती प्रकाशन और राधाकृष्ण प्रकाशन के लिए की गई है। बता दें कि ये दोनों प्रकाशन एक अरसे से राजकमल प्रकाशन समूह में शामिल हैं, लेकिन इनका अपना अस्तित्व और अपनी खासियत है। किसी भी पब्लिशिंग हाउस को आगे बढाने की जिम्मेदारी कमीशनिंग एडिटर्स के कंधों पर होती है।

जाने-माने लेखक मनोज कुमार पांडेय लंबे समय तक महात्मा गांधी इंटरनेशनल हिंदी यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट ‘हिंदी समय’ (Hindi Samay) की एडिटोरियल टीम का हिस्सा रहे हैं। वे हाल ही में प्रकाशित अपने नवीनतम कहानी संग्रह ‘बदलता हुआ देश’ से चर्चा में हैं। उनकी कई कहानियों के नाट्य-मंचन हुए हैं। कुछ पर फिल्में भी बनी हैं। कहानीकार होने के साथ-साथ मनोज कुमार कई उल्लेखनीय किताबों का संपादन भी कर चुके हैं।  

वहीं, धर्मेंद्र सुशांत लंबे समय से साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। वे कई प्रकाशनों में अंशकालिक संपादक तो रहे ही हैं, कुछ समय 'समकालीन जनमत' पत्रिका से भी जुड़े रहे हैं। 'प्रभात ख़बर' से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले सुशांत 'हिंदुस्तान' अखबार की संपादकीय टीम में लंबी पारी खेल चुके हैं। एक पुस्तक समीक्षक के रूप में भी उनकी खास पहचान है।

राजकमल प्रकाशन समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक माहेश्वरी ने कमीशनिंग एडिटर्स के तौर पर नई पारी शुरू करने को लेकर मनोज कुमार पांडेय और धर्मेंद्र सुशांत को बधाई दी है। अशोक माहेश्वरी का कहना है कि मनोज कुमार पांडेय और धर्मेंद्र सुशांत इन पब्लिकेशंस की विशिष्टता और महत्व के बारे में पाठकों को परिचित कराने में मदद करेंगे।

वहीं, राजकमल प्रकाशन समूह के एडिटोरियल डायरेक्टर सत्यानंद निरुपम का कहना है कि हिंदी पब्लिकेशंस को बदलते समय के साथ सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करना होगा, नए पाठकों को हिंदी से जोड़े रखना होगा और संपादकीय टीम को पाठकों की विविधता को पहचानना होगा।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

हिन्दुस्तान को अलविदा कह युवा पत्रकार सौरभ गुप्ता ने तलाशी नई मंजिल

युवा पत्रकार सौरभ गुप्ता ने हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ में अपनी करीब छह साल पुरानी पारी को विराम दे दिया है।

Last Modified:
Monday, 04 January, 2021
Sourabh Gupta

युवा पत्रकार सौरभ गुप्ता ने हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ में अपनी करीब छह साल पुरानी पारी को विराम दे दिया है। वह दिल्ली-एनसीआर में चीफ रिपोर्टर (स्पोर्ट्स) के तौर पर कार्यरत थे। उन्होंने अपना नया सफर अब ‘राजस्थान पत्रिका’ के साथ शुरू किया है। उन्होंने जयपुर में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर जॉइन किया है। वह यहां स्पोर्ट्स की कमान संभालेंगे।

दिल्ली के रहने वाले सौरभ गुप्ता को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 14 साल का अनुभव है। ‘हिन्दुस्तान’ से पहले उन्होंने ‘अमर उजाला’ में करीब आठ साल तक काम किया है। कई राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में उनके आर्टिकल प्रकाशित होते रहते हैं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो सौरभ गुप्ता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के अलावा वाईएमसीए से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। समाचार4मीडिया की ओर से सौरभ गुप्ता को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जानिए, उतार-चढ़ावों के बीच कैसा रहा साल 2020 में प्रिंट मीडिया का ‘सफर’

साल भर तमाम उतार-चढ़ावों के बीच प्रिंट मीडिया एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है और तमाम अन्य बिजनेस की तरह नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 31 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 31 December, 2020
Print Media

साल भर तमाम उतार-चढ़ावों के बीच प्रिंट मीडिया एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है और तमाम अन्य बिजनेस की तरह नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय में जब प्रिंट मीडिया पुनरुत्थान की ओर बढ़ रहा है, इस ग्रोथ में क्षेत्रीय समाचार पत्र अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

साल 2020 की शुरुआत तमाम अखबारों के लिए खराब रही, क्योंकि कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के कारण उनका सर्कुलेशन काफी बाधित हुआ। मुंबई और दिल्ली जैसे कई बड़े मार्केट्स में तमाम अखबार पब्लिशिंग रोकने पर मजबूर हो गए।  

इसका सीधा नतीजा विज्ञापन बिलों पर पड़ा और इसके परिणामस्वरूप इस सेक्टर को काफी नुकसान हुआ, जो 2019-20 की आखिरी तिमाही में ही नहीं बल्कि नए वित्त वर्ष की लगातार दो तिमाहियों में भी दिखाई दिया।

इस महामारी ने देश में पहले से ही परेशानियों से जूझ रही न्यूजपेपर इंडस्ट्री की समस्या और बढ़ा दी। सिर्फ छोटे ब्रैंड्स ही नहीं, बल्कि इस इंडस्ट्री के बड़े प्लेयर्स को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा।  

बिजनेस इंटेलीजेंस फर्म ‘टोफलर’ (Tofler)  द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) ने 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए 451.63 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्शाया, जबकि इससे पहले वित्तीय वर्ष में इसे 484.27 करोड़ रुपये का कुल लाभ हुआ था।

 कंपनी का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू भी  6,155.32 रुपये से घटकर 5,367.88 करोड़ रुपये रह गया। पब्लिकेशंस की बिक्री से मिलने वाले रेवेन्यू में भी गिरावट आई और यह 656.09 करोड़ रुपये से घटकर 629.96 करोड़ रुपये पर आ गया। सर्कुलेशन में कमी और विज्ञापनदाताओं की गैरमौजूदगी के कारण न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए मार्केट काफी समय तक सूखा रहा। लेकिन प्रिंट ने मजबूती से लड़ाई की और वापसी की।  

अप्रैल की बात करें तो स्थिति को देखते हुए तमाम अखबारों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू की, इसके साथ ही जब सरकार ने अखबारों को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में शामिल किया तो प्रिंट पब्लिकेशंस को फिर मजबूती मिली। दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, ईनाडु, हिन्दुस्तान, पत्रिका ग्रुप, अमर उजाला, डेली थांथी, साक्षी, डेक्कन हेराल्ड, हिन्दुस्तान टाइम्स और दिव्य भास्कर समेत तमाम अखबारों ने अप्रैल के दूसरे हफ्ते में संयुक्त रूप से एक स्टेटमेंट जारी कर बताया कि फरवरी के आधार पर अखबारों का वितरण किस तरह 75 से 90 प्रतिशत तक स्थिर हो गया। अगले महीने ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे’ (IRS) के आंकड़े आए। इसमें रीजनल अखबारों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा और उन्होंने इस सेक्टर की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई।  

मई में जारी इंडियन रीडरशिप सर्वे की रिपोर्ट 2019 की पिछली तीन तिमाही यानी पहली (Q1), दूसरी (Q2) और तीसरी तिमाही (Q3) के साथ चौथी तिमाही के ताजा आंकड़ों के औसत पर आधारित था। इससे पता चला कि विभिन्न केंद्रों पर रीडरशिप में कमी आई है। हालांकि, गहनता से अध्ययन करने पर स्पष्ट हुआ कि मेट्रो शहरों के बाहर रीजनल एरिया में पब्लिशर्स की ग्रोथ ज्यादा हुई।  

कुछ प्रादेशिक अखबारों की टोटल रीडरशिप (total readership) में बढ़ोतरी देखी गई, जबकि कुछ की एवरेज इश्यू रीडरशिप (average issue readership) में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, देश के कुछ लोकप्रिय ब्रैंड्स जैसे अमर उजाला, लोकमत, दैनिक थांथी ने दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की।

जुलाई में सरकार ने सरकारी विज्ञापनों के लिए नई गाइडलाइंस जारी कीं। प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति 2020 जिसे सरकारी विज्ञापनों की व्यापक संभव कवरेज के लिए तैयार किया गया था, भारतीय भाषा के दैनिक समाचार पत्रों के लिए फायदेमंद साबित हुई। क्योंकि इसमें विज्ञापन स्पेस (ad space) भी बढ़ाकर 50 से 80 प्रतिशत कर दिया गया। इसके अलावा नई पॉलिसी में प्रिंट में विज्ञापन का संतुलित डिस्ट्रीब्यूशन तय किया गया।   

एक अगस्त 2020 से प्रभावी इन गाइडलाइंस में कहा गया है कि सरकार के सभी मंत्रालय या विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त निकाय और सोसायटीज, केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सभी शैक्षणिक संस्थान अपने डिस्पले विज्ञापनों को ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ के माध्यम से देंगे। इन गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि विज्ञापनों को जारी करते समय बीओसी सर्कुलेशन, भाषा, कवरेज क्षेत्र और पाठकों जैसे कारकों की विभिन्न श्रेणियों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करेगी।

जुलाई में प्रिंट की ओर एडवर्टाइजर्स फिर वापस आना शुरू हुए, जिसकी इंडस्ट्री को काफी जरूरत थी। हालांकि, रिकवरी की रफ्तार टियर-दो और टियर-तीन शहरों में अधिक थी। टैम एडेक्स (Tam AdEx) के डाटा के अनुसार, प्रिंट पर वापसी करने वाले विज्ञापनदाताओं में 75 प्रतिशत हिंदी और अंग्रेजी भाषा के थे।  

राज्यों की हिस्सेदारी की बात करें तो 17 प्रतिशत ऐड वॉल्यूम शेयर के साथ उत्तर प्रदेश इस लिस्ट में सबसे ऊपर था, इसके बाद 10 प्रतिशत शेयर के साथ महाराष्ट्र और इसके बाद कर्नाटक व तमिलनाडु का नंबर था।  

टैम डाटा के अनुसार, अप्रैल से जून की अवधि में 189 कैटेगरीज में 28000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स और 31300 से ज्यादा ब्रैंड्स ने खासतौर पर प्रिंट के लिए विज्ञापन दिया। एडवर्टाइजर्स की वापसी के कारण 13 अगस्त को दैनिक भास्कर ने अपने भोपाल एडिशन को 72 पेज का निकाला। इस दौरान दैनिक भास्कर में जिन सेक्टर्स के विज्ञापन दिए गए, उनमें रियल एस्टेट, इलेक्ट्रॉनिक ड्यूरेबल्स, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी शामिल रहे। इस पब्लिकेशन को सरकारी विज्ञापन भी प्राप्त हुए। अगस्त के पहले सप्ताह से टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे तमाम प्रमुख मार्केट्स में 30-40 से ज्यादा पेजों का अखबार पब्लिश करना शुरू कर दिया।  

पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट 2020 के मिड ईयर रिव्यू के अनुसार, विज्ञापन देने वालों में एफएमसीजी, ऑटो और एजुकेशन जैसी कैटेगरीज आगे रहीं और वर्ष 2020 की पहली छमाही में प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में इनका योगदान करीब 45 प्रतिशत रहा, जो वर्ष 2019 में 38 प्रतिशत था।   

प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में एजुकेशन सेक्टर 16 प्रतिशत शेयर के साथ एफएमसीजी सेक्टर से आगे निकल गया। एफएमसीजी सेक्टर 15 प्रतिशत शेयर के साथ दूसरे स्थान पर आ गया। प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में ऑटो इंडस्ट्री 14 प्रतिशत शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रही।

फेस्टिव सीजन प्रिंट के लिए काफी अच्छा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान टेलिविजन न्यूज को लेकर चल रहीं तमाम तरह की बहस ने भी प्रिंट को लाभ पहुंचाने में और मदद की।  टैम एडेक्स डाटा के अनुसार, अन्य किसी ट्रेडिशनल मीडिया की तुलना में प्रिंट मीडिया को वर्ष 2019 और वर्ष 2020 दोनों में अक्टूबर से नवंबर के बीच काफी ज्यादा एडवर्टाइजर्स मिले। टीवी में इस साल अक्टूबर से नवंबर के बीच जहां 3400 एडवर्टाइजर्स मिले और रेडियो में इन एडवर्टाइजर्स की संख्या 2800 से कम थी, वहीं इसी अवधि में प्रिंट को 30900 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स मिले।

हालांकि, साल के अंत से प्रिंट का रेवेन्यू बढ़ना शुरू हुआ है, लेकिन इंडस्ट्री के लिए इससे बुरा समय नहीं हो सकता, जब नुकसान के चलते उन्हें काफी कॉस्ट कटिंग करनी पड़ी। इसके परिणामस्वरूप कई लोगों को नौकरी से हटाया गया अथवा उनकी सैलरी में कटौती करनी पड़ी।

समाचार4मीडिया की नवीनतम खबरें अब आपको हमारे नए वॉट्सऐप नंबर (9958894163) से मिलेंगी। हमारी इस सेवा को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए इस नंबर को आप अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव करें।
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए