तरुण तेजपाल ने वकीलों का यूं जताया आभार, कहा- अब टूटी जिंदगी को ठीक करूंगा

गोवा की जिला अदालत ने शुक्रवार 21 मई को 8 साल पुराने रेप मामले में तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी कर दिया है।

Last Modified:
Friday, 21 May, 2021
Tejpal5454

गोवा की जिला अदालत ने शुक्रवार 21 मई को 8 साल पुराने रेप मामले में तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बरी कर दिया है। तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ पर 2013 में गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में अपनी महिला सहयोगी का शारीरिक शोषण करने का आरोप था। तरुण तेजपाल की बेटी ने पिता के बरी होने के बाद उनका बयान जारी किया।

बरी होने के बाद तरुण तेजपाल ने अपने एक बयान में पहले अपने एक वकील राजीव गोम्स की कोरोना से हुई मौत पर दुख जताया और उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गोम्स एक शानदार वकील थे, जिनका राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त करियर रहा। तेजपाल ने गोम्स की तारीफ करते हुए कहा, ‘मेरी जिंदगी और सम्मान को वापस दिलाने में किसी ने इतनी मुश्किल लड़ाई नहीं लड़ी, जितनी राजीव ने अपने बेहतरीन अनुभव से लड़ी।’

तेजपाल ने बताया, ‘राजीव मुझसे कहते थे कि वे सिर्फ पैसे का मजा लेते हैं, वे इसके लिए काम नहीं करते। वे हमेशा कहते थे कि उन्हें भगवान ने बेकसूरों की लड़ाई लड़ने के लिए भेजा है।’ उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि एक परिवार के तौर पर हम हमेशा राजीव के कर्जदार रहेंगे। हम उनकी पत्नी शेरिल और बेटे शॉन के प्रति भी संवेदनाएं प्रकट करते हैं। कोई भी क्लाइंट अपने लिए राजीव से बेहतर वकील की उम्मीद नहीं कर सकता।

तेजपाल ने अपने बयान में कहा, ‘नवंबर 2013 में मेरी एक सहयोगी ने शारीरिक शोषण करने का मुझपर गलत आरोप लगाए थे। आज गोवा के ट्रायल कोर्ट के एडिशनल सेशल जज क्षमा जोशी ने मुझे बाइज्जत बरी कर दिया है। ऐसे मुश्किल समय में जब लोगों में साहस नहीं है उन्होंने सच का साथ दिया, इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं।’

तेजपाल ने बताया कि उन पर लगे झूठे आरोपों की वजह से पिछले साढ़े सात साल उनके परिवार के लिए दर्दनाक रहे। इन झूठें आरोपों की वजह से उनके निजी, पेशेवर और सार्वजनिक जीवन के हर पहलू पर असर पड़ा। इसके बावजूद हमने गोवा पुलिस के साथ पूरी तरह सहयोग किया और सैकड़ों सुनवाई के बाद हमने कानून के हर सिद्धांत का पालन किया।

तेजपाल ने पिछले 8 साल में अपनी सहायता के लिए आगे आने वाले वकीलों का भी शुक्रिया जताया। उन्होंने बताया कि कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, प्रमोद दुबे समेत कई वकीलों ने उनकी मदद की। तरुण तेजपाल ने आगे अपील करते हुए कहा कि उनके परिवार की निजता का सम्मान किया जाना चाहिए। इस दौरान वे अपनी टूटी जिंदगियों को ठीक करने की कोशिश करेंगे।

आप उनके बयान को अंग्रेजी भाषा में नीचे पढ़ सकते हैं- 

Seldom does a long-fought for vindication arrive hand-in-hand with profound heartbreak. Last week my trial lawyer, Rajeev Gomes, died of Covid. Dynamic and brilliant,  at 47 he was on the brink of a scintillating career as a criminal lawyer at the national level.

No person fought harder, and with greater skill, to reclaim my life and reputation.  Rajeev used to say to me, 'I enjoy money but I don't work for it. I believe god put me on earth to fight for the innocent.' As a family we owe Rajeev Gomes a profound and permanent debt. And we grieve alongside his wife Cheryl and his young son Sean. No client can ever hope for a better lawyer than Rajeev. The ever-struggling wheel of justice has lost a solid spoke. 

In November 2013 I was falsely accused of sexual assault by a colleague. Today the Hon’ble Trial Court of  Additional Sessions Judge Kshama Joshi, in Goa, has honourably acquitted me. In an awfully vitiated age, where ordinary courage has become rare, I thank her for standing by the truth. 

The past seven-and-a-half  years have been traumatic for my family as we have dealt with the catastrophic fallout of these false allegations on every aspect of our personal, professional and public lives. We have felt the boot of the state, but through it all we have co-operated fully with the Goa police and the legal system,  through hundreds of court proceedings. We have unwaveringly followed every mandate of due procedure and abided by every principle of law as laid down in the Constitution. We have also endeavoured to uphold every norm of decency expected in a case like this. 

It is with profound respect that I thank this court for its rigorous, impartial and fair trial and for its thorough examination of the CCTV footage and other empirical material on record.

In these 8 years a host of outstanding lawyers came to our aid, and we owe them all a deep debt, prime among them Pramod Dubey, Aamir Khan, Ankur Chawla, Amit Desai, Kapil Sibal, Salman Khurshid, Aman Lekhi, Sandeep Kapoor, Raian Karanjewala, and Shrikant Shivade. 

I also thank scores of family members and friends who kept the faith and stood by us through these dark years. 

I wish to make no further statement at this time and request my family's privacy be respected, as we try and reclaim our broken lives. I will make a comprehensive statement at an appropriate time in the future.

Tarun J Tejpal 

   

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विवादों में घिरी यह ऑनलाइन मैगजीन, पब्लिश की भगवान शिव की आपत्तिजनक फोटो

आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से जुड़ी एक ऑनलाइन मैगजीन विवादों में है। दरअसल मैगजीन के फ्रंट पर भगवान शिव की एक फोटो को प्रकाशित किया गया है, जिसका सिर गायब है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 24 November, 2021
Last Modified:
Wednesday, 24 November, 2021
Magazine

आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से जुड़ी एक ऑनलाइन मैगजीन विवादों में है। दरअसल मैगजीन के फ्रंट पर भगवान शिव की एक फोटो को प्रकाशित किया गया है, जिसका सिर गायब है। इस प्रोपेगैंडा मैगजीन का नाम 'वॉयस ऑफ हिंद' है।

बता दें कि भगवान शिव के सिर की जगह पर संगठन का झंडा लगाया गया है और नीचे लिखा है ‘इट इज टाइम टू ब्रेक द फॉल्स गॉड्स’ अर्थात 'झूठे भगवानों को खत्म करने का समय आ चुका है।' वैसे यह मूर्ति कर्नाटक में उत्तर कन्नड़ जिले के मुरुदेश्वर शहर के समुद्र तट पर स्थित 123 फीट ऊंची प्रसिद्ध शिव प्रतिमा जैसी प्रतीत हो रही है। यह एक बेहद प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। इस तस्वीर को लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं जो कई जगह तनाव का कारण भी बन रही है।

खुद को एनालिस्ट बताने वाले अंशुल सक्सेना ने ट्विटर पर सबसे पहले यह फोटो शेयर की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेयर की गई इस फोटो ने कर्नाटक में सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील तटीय जिले उत्तर कन्नड़ में तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑनलाइन मैगजीन कवर में भगवान शिव की इस तरह की फोटो को लेकर हिंदू संगठन गुस्से में हैं। स्थिति को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने मुरुदेश्वर मंदिर की सुरक्षा कड़ी कर दी है। मुरुदेश्वर तटीय शहर भटकल शहर के बहुत करीब स्थित है, जो भारतीय खुफिया एजेंसियों की लगातार निगरानी में है।

बता दें कि आतंकी यासीन भटकल इसी शहर का रहने वाला है।

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115 साल पुराने अखबार पर लगा प्रतिबंध, जानिए इसके पीछे की वजह

बेलारूस के सबसे पुराने अखबार को मंगलवार को प्रतिबंधित कर दिया गया और वह भी तब जब वह अपनी स्थापना की 115वीं वर्षगांठ मना रहा था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 24 November, 2021
Last Modified:
Wednesday, 24 November, 2021
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बेलारूस के सबसे पुराने अखबार को मंगलवार को प्रतिबंधित कर दिया गया और वह भी तब जब वह अपनी स्थापना की 115वीं वर्षगांठ मना रहा था। इसे स्वतंत्र मीडिया पर सरकार की कठोर कार्रवाई का ताजा उदाहरण माना जा रहा है।

समाचार पत्र ‘नशा निवा’ को मिन्स्क में केन्द्रीय जिला अदालत ने कट्टरपंथी बताते हुए अवैध घोषित किया। अदालत ने सूचना मंत्रालय के अनुरोध पर यह कार्रवाई की। ‘नशा निवा’ की किसी भी सामग्री को प्रसारित या प्रचारित करने वाले को सात साल तक की कैद हो सकती है।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, बेलारूस के अधिकारियों ने ऑनलाइन समाचार पत्र को जुलाई में बंद कर दिया था और उसके मुख्य संपादक याहोर मार्टसिनोविच और पत्रकार एंड्री स्कर्को को गिरफ्तार कर लिया था। वे अब भी हिरासत में हैं। वैसे ‘नशा निवा’ समाचार पत्र को ऑनलाइन प्रकाशित करने वाले अधिकतर पत्रकारों ने देश छोड़ दिया है।

बताते चलें कि बेलारूस के करीब 29 पत्रकार हिरासत में हैं, जो या तो अपनी सजा काट रहे हैं या अपने मुकदमे की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।

‘बेलारूस पत्रकार संघ’ के प्रमुख आंद्रेई बास्टुनेट्स ने कहा, ‘अधिकारियों द्वारा सभी को कट्टरपंथी बताकर, बेलारूस के स्वतंत्र मीडिया को तबाह करना जारी है। बेलारूस में स्थिति क्यूबा तथा ईरान से भी बदतर है और उत्तर कोरिया के मानदंडों के करीब पहुंच रही है।’

उन्होंने कहा कि ‘नशा निवा’ का राष्ट्रीय विरासत के हिस्से के रूप में स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में व्यापक रूप से उल्लेख किया गया है। अभी यह तुरंत स्पष्ट नहीं है कि इस पर प्रतिबंध के बाद बेलारूस के अधिकारी स्थिति को कैसे संभालेंगे।

गौरतलब है कि ‘नशा निवा’ ने बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर खबरें दी हैं, जो अगस्त 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद अलेक्सांद्र लुकाशेंको के छठी बार राष्ट्रपति का कार्यकाल संभालने के बाद शुरू हुए थे। विपक्ष और पश्चिम ने राष्ट्रपति चुनाव में धांधली होने की बात कही है।

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पत्रकार नवनीत मिश्रा ने 'राजस्थान पत्रिका' से किया नई पारी का आगाज, निभाएंगे यह जिम्मेदारी

राजनीतिक रिपोर्टिंग में गहरी रुचि रखने वाले युवा पत्रकार नवनीत मिश्रा ने ‘राजस्थान पत्रिका’ (Rajasthan Patrika) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 17 November, 2021
Last Modified:
Wednesday, 17 November, 2021
Navneet Mishra

राजनीतिक रिपोर्टिंग में गहरी रुचि रखने वाले युवा पत्रकार नवनीत मिश्रा ने ‘राजस्थान पत्रिका’ (Rajasthan Patrika) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने ‘राजस्थान पत्रिका’ के दिल्ली स्थित नेशनल ब्यूरो में बतौर स्पेशल करेसपॉन्डेंट जॉइन किया है। यहां पर वह बीजेपी/आरएसएस और केंद्र सरकार से जुड़े मामले कवर करेंगे।

‘राजस्थान पत्रिका’ से पूर्व नवनीत मिश्रा करीब दो साल से बतौर प्रिंसिपल पॉलिटिकल करेसपॉन्डेंट न्यूज एजेंसी ‘आईएएनएस’ (IANS) में अपनी भूमिका निभा रहे थे। ‘आईएएनएस’ में भी उनके पास सरकार/पीएमओ/बीजेपी जैसी प्रमुख बीट थीं। उन्होंने संघ और बीजेपी से जुड़ीं कई खबरें ब्रेक कीं।

मूल रूप से जौनपुर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले नवनीत मिश्रा को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब दस साल का अनुभव है। इस दौरान वह ‘आजतक‘ और ‘एनडीटीवी‘ की डिजिटल टीम समेत ‘जनसत्ता‘, दैनिक जागरण‘ और ‘अमर उजाला‘ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा वह ‘इंडिया संवाद’ वेबसाइट में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो नवनीत मिश्रा ने जौनपुर की ‘वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल यूनिवर्सिटी’ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। समाचार4मीडिया की ओर से नवनीत मिश्रा को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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नेहरू जी की जयंती पर ‘नेशनल हेराल्ड’ ने लॉन्च किया ये एडिशन

यह पब्लिकेशन वर्ष 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा एक दैनिक समाचार पत्र और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अगुआ के रूप में शुरू किया गया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 13 November, 2021
Last Modified:
Saturday, 13 November, 2021
National Herald

अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ (National Herald) ने अपना मुंबई संस्करण लॉन्च किया है। अखबार के मुंबई एडिशन को इसके संस्थापक और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की 132वीं जयंती के मौके पर लॉन्च किया गया है।

बता दें कि यह पब्लिकेशन वर्ष 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा एक दैनिक समाचार पत्र और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अगुआ के रूप में शुरू किया गया था। ‘नेशनल हेराल्ड’ ग्रुप में हिंदी में ‘नवजीवन’ (Navjivan) और उर्दू में ‘कौमी आवाज’ (QAUMI AWAZ) अखबार शामिल हैं।

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दैनिक भास्कर’ को बाय बोलकर अब इस अखबार से जुड़े पत्रकार विवेक मिश्रा

पत्रकार विवेक मिश्रा ने ‘दैनिक भास्कर’ को अलविदा कह दिया है। वह इस अखबार के रोहतक एडिशन में करीब पांच साल से बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्यरत थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 11 November, 2021
Last Modified:
Thursday, 11 November, 2021
Vivek Mishra

पत्रकार विवेक मिश्रा ने ‘दैनिक भास्कर’ को अलविदा कह दिया है। वह इस अखबार के रोहतक एडिशन में करीब पांच साल से बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्यरत थे। विवेक मिश्रा ने अब ‘दैनिक जागरण’ कानपुर के साथ अपने नए सफर का आगाज किया है।

बता दें कि विवेक मिश्रा ने करीब पांच साल पहले ‘राजस्थान पत्रिका‘ के सतना एडिशन से इस्तीफा देकर ‘दैनिक भास्कर‘ से नई शुरुआत की थी। ‘दैनिक भास्कर’ में अपनी पारी के दौरान विवेक मिश्रा ने रोहतक PGI को कवर कर हरियाणा के शीर्ष हेल्थ रिपोर्टर के रूप में अपना मुकाम बनाया। उन्होंने कोविड-19 के दौरान वार्ड से भास्कर live के लिए रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही कई स्टिंग आपरेशन को भी अंजाम दिया।

मूल रूप से कानपुर के रहने वाले विवेक मिश्रा करीब 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न मीडिया घरानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (Rajarshi Tandon Open University) से पत्रकारिता में पीजी करने के बाद विवेक ने साल 2009 में गृह जनपद कानपुर से निकलने वाले सांध्य अखबार ‘कंपूमेल’ के साथ बतौर रिपोर्टर अपने करियर की शुरुआत की थी।

इसके बाद उन्होंने ‘पॉयनियर‘ (हिंदी) और वर्ष 2012 में आगरा से प्रकाशित ‘द सी एक्सप्रेस’ में काम किया। एक वर्ष बाद उन्होंने कानपुर में ‘जनसंदेश टाइम्स’ जॉइन कर लिया और इस दौरान उन्होंने रेलवे, एजुकेशन, मेडिकल व खेल बीट संभाली। ‘राजस्थान पत्रिका‘ के सतना एडिशन से साल 2014 में बतौर संवाददाता जुड़े विवेक ने यहां एजुकेशन बीट संभालने के साथ ही रेलवे से भी जुड़ी कई बड़ी व तथ्यात्मक खबरों को ब्रेक किया था। फिर ‘दैनिक भास्कर‘ होते हुए उन्होंने अब ‘दैनिक जागरण‘ के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी नई पारी का आगाज किया है। समाचार4मीडिया की ओर से विवेक मिश्रा को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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सर्वोच्च नेता से संबंधित चित्र प्रकाशित करना अखबार को पड़ा महंगा, लगी पाबंदी

ईरान के न्यायिक अधिकारियों ने सोमवार को एक अखबार पर कथित रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 09 November, 2021
Last Modified:
Tuesday, 09 November, 2021
Newspaper

ईरान के न्यायिक अधिकारियों ने सोमवार को एक अखबार पर कथित रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि अखबार ने अपने पहले पन्ने पर सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामनेई जैसे दिखने वाले हाथ का ग्राफिक चित्र बनाया दिया था। चित्र में खामनेई के हाथ जैसे दिखने वाले हाथ से ईरान की गरीबी रेखा को बनाते दिखाया गया था।

गौरतलब है कि देश की गिरती अर्थव्यवस्था पर यहां की जनता का आक्रोश बढ़ता ही रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की मीडिया की निगरानी करने वाली संस्था ने दैनिक अखबार ‘केलिद’ को बंद कर दिया है क्योंकि शनिवार को उक्त अखबार के पहले पृष्ठ पर एक आलेख छापा गया था जिसका शीर्षक था ‘गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते लाखों ईरानी।’

शीर्षक के नीचे एक चित्र बनाया गया था, जिसमें एक व्यक्ति ने अपने बाएं हाथ में कलम पकड़ी हुई है और वह लाल रंग की रेखा खींच रहा है जिसके नीचे आम जनता को दर्शाया गया है। यह ग्राफिक खामनेई के एक पुराने चित्र से मेल खाता है जिसमें वह अपने बाएं हाथ से कागज के एक टुकड़े पर कुछ लिख रहे हैं और उनकी एक अंगुली में अंगूठी है जो वह अकसर पहनते हैं।

वर्ष 1981 में हुई बमबारी के बाद से उनका दाया हाथ काम नहीं करता। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने कहा कि केलिद को बंद कर दिया गया है। इसका कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। केलिद की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अखबार की वेबसाइट भी बंद कर दी गई है।

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नहीं रहे जागरण ग्रुप के चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्ता, नेताओं-पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि

‘जागरण समूह’ (Jagran Group) के चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्ता का शुक्रवार को निधन हो गया है

Last Modified:
Friday, 15 October, 2021
YogendraMohanGupta454.jpg

‘जागरण समूह’ (Jagran Group) के चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्ता का शुक्रवार को निधन हो गया है। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। योगेंद्र मोहन गुप्ता की अंत्येष्टि शनिवार को कानपुर में भैरवघाट में होगी।

दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह को ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ ही कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी उनका काफी योगदान रहा। लक्ष्मीदेवी ललित कला अकादमी की स्थापना का श्रेय उन्हें ही जाता है। राष्ट्रीय के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी साहित्य और कला प्रेमियों को उन्होंने हमेशा ही बढ़ावा दिया। 

योगेंद्र मोहन गुप्ता एक कवि भी थे। उनकी कई पुस्तकें भी प्रकाशित हुईं। पत्रकारिता में एडवर्टाइजिंग को उन्होंने नई विधा दी। योगेन्द्र मोहन के निधन पर केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम राजनीतिक हस्तियों, पत्रकारों, साहित्यकारों और उद्योगपतियों ने उन्हें श्र्द्धांजलि दी है।

 

 

 

 

 

 

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मीडिया में आ रहे बड़े बदलावों से रूबरू कराएगा BW Businessworld का यह अंक

बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) के आगामी अंक में इसके बारे में और विस्तार से जानकारी दी गई है और देश में मीडियाटेक्नोलॉजी पर फोकस किया गया है।

Last Modified:
Friday, 15 October, 2021
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मीडिया के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी की काफी अहम भूमिका है, लेकिन इसका असली फायदा सिर्फ वही लोग उठा सकते हैं, जो टेक्नोलॉजी को कंटेंट, कल्चर, कॉमर्स, अंतरक्रियाशीलता (interactivity) और मीडियाटेक के इस युग में प्रमुख प्लेटफॉर्म के संयोजन के रूप में बेहतर तरीके से इसका इस्तेमाल करना जानते हों। बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) का अगला अंक इसी स्ट्रैटेजी पर केंद्रित है।

वर्ष 2020 की बात करें तो भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर ने $877.8 मिलियन डॉलर का निवेश जुटाया। यह इस लिहाज से काफी उल्लेखनीय कहा जा सकता है कि महामारी के कारण इस सेक्टर को इस दौरान काफी विरोधाभासी स्थितियों का सामना करना पड़ा। एक तरफ तो कुछ बड़े मीडिया संस्थानों को अप्रत्याशित मंदी का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ ने काफी तेजी से सफलता का सफर तय किया, अन्यथा इस स्थिति को हासिल करने में उन्हें काफी वर्षों लग जाते। भारत में इस तरह के मीडिया बिजनेस के आगे बढ़ने का एक ही कारण था कि वे सभी टेक्नोलॉजी केंद्रित मीडिया प्लेटफॉर्म्स थे।

कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया तो कुछ में लाखों का निवेश हुआ। निवेश हासिल करने वालों में ‘मोहल्ला टेक’ (Mohalla Tech) कंपनी के स्वामित्व वाला शॉर्ट वीडियो ऐप ‘Moj‘ और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्स ‘शेयरचैट‘ (ShareChat), ‘डेली हंट‘ (Daily Hunt) का शॉर्ट वीडियो ऐप ‘जोश’ (Josh) और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू किया गया ‘कू’ (Koo) आदि शामिल हैं। भारत में डिजिटल का उदय देश के लिए अपना घरेलू मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने के अवसर को और मजबूती प्रदान कर रहा है। जो इस फील्ड में अपना स्थान बनाने की प्रतिस्पर्धा में हैं, वे सोशल, कॉमर्स, कंटेंट और कल्चर को भी इसमें शामिल कर रहे हैं, जिसकी भारतीय एंटरप्रिन्योर्स को अच्छी समझ है। इस स्ट्रैटेजी से वे अब तक सफल हो रहे हैं। 

देश की सबसे पुरानी बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) के आगामी अंक (issue) में इसके बारे में और विस्तार से जानकारी दी गई है और देश में मीडियाटेक्नोलॉजी पर फोकस किया गया है। प्रसिद्ध कहावत है कि 'कंटेंट इज किंग बट डिस्ट्रीब्यूशन इज गॉड'  (Content is King but Distribution is God), लेकिन इस अंक में इस बात पर भी रोशनी डाली गई है कि कैसे इस तरह की विचारधारा एक ऐसी दुनिया में बदल गई है जहां टेलीविजन को व्यक्तिगत स्क्रीन (personal screens) में बदला जा रहा है। कंटेंट की प्राथमिकताओं की बात करें तो आजकल कंज्यूमर्स के लिए पसंदीदा भाषाएं और वीडियो पहली पसंद बन रही है, फिर चाहे वे ऑनलाइन शॉपिंग ही क्यों न कर रहे हों।

इस बारे में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना है, ‘ मीडिया ही ऑरिजनल ‘डायरेक्ट टू कस्टमर’ (D2C) है। यहीं पर दुनिया के सबसे ज्यादा खर्च करने वालों को अपने कंज्यूमर्स तक पहुंचने के लिए अपना पैसा लगाना पड़ा। समय के साथ, टेक्नोलॉजी ने तमाम बैरियर्स को तोड़ दिए हैं और कई संयोजन (combinations) बनाए हैं, लेकिन मीडिया की ताकत केवल बढ़ी है। इस क्षेत्र ने उन विघटनकर्ताओं (disruptors) का उदय देखा है जिन्होंने नए मॉडल पेश किए हैं। मार्केट के गैप को दूर करने के अवसर पैदा किए हैं और इस प्रक्रिया में मीडिया की परिभाषा पहले से विकसित हुई है।’

गेमिंग और सोशल कॉमर्स आज मीडिया का उतना ही हिस्सा हैं, जितना कि ‘ओवर द टॉप’(ओटीटी) या शॉर्ट वीडियो कंटेंट प्लेटफॉर्म। यह व्यापक स्पेक्ट्रम भारत को, एक प्रड्यूसर और कंज्यूमर दोनों के रूप में कंटेंट का दिग्गज बनाता है और इसे आगे बढ़ाता है।

मैगजीन के इस अंक में देश के टॉप मीडियाटेक स्टार्ट-अप्स और प्रतिष्ठित मीडिया घरानों के विचारों को शामिल किया जाएगा, जिनके पास भविष्य के अनुकूल खुद को ढालने के लिए टेक्नोलॉजी है। इस अंक में इंडस्ट्री के विचारों, नए मीडिया मुद्रीकरण के रुझानों और मीडिया परिदृश्य में बड़े बदलावों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा इस अंक में इस बात पर भी बारीकी से प्रकाश डाला जाएगा कि वर्तमान में और महामारी के बाद के भारत में मीडिया टेक्नोलॉजी कैसे एक बहुत बड़ा और अच्छा अवसर है।

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वीर सावरकर के व्यक्तित्व को सही मायनों में रेखांकित करती है ये किताब: डॉ. मोहन भागवत

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की जिंदगी के अनछुए पन्नों से रूबरू कराने के लिए वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक उदय माहूरकर व चिरायु पंडित ने एक किताब लिखी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 October, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 October, 2021
Veer Savarkar Book Launching

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की जिंदगी के अनछुए पन्नों से रूबरू कराने के लिए वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक उदय माहूरकर (Uday Mahurkar) व चिरायु पंडित ने एक किताब लिखी है। ‘वीर सावरकर- द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन’ शीर्षक से लिखी गई इस किताब की लॉन्चिंग 12 अक्टूबर की शाम करीब साढ़े चार बजे नई दिल्ली स्थित ‘डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर‘ में की गई।

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुए एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ‘ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इस किताब को लॉन्च किया। बता दें कि यह किताब ‘रूपा पब्लिकेशंस इंडिया’ की ओर से प्रकाशित की गई है।

कार्यक्रम में किताब के लेखक उदय माहूरकर ने कहा, ‘यह किताब क्रांतिकारी सावरकर के बारे में कम, देशभक्त सावरकर के बारे में अधिक बातें कहती है। उन्होंने हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना की, जिसमें उन्होंने साफ़ कहा था कि सभी धर्मों को स्वतंत्र रूप से रहने की इजाजत है, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अल्पसंख्यक किसी परेशानी का सामना करता है तो सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।’

वहीं, किताब के सह लेखक चिरायु पंडित ने कहा, ‘वीर सावरकर का जीवन स्वतंत्रता संग्राम की जीती-जागती गाथा रहा है, वह देशभक्ति की एक जीवंत मिसाल हैं। इस किताब का सह-लेखक बनाने के लिए मैं माहूरकर जी का आजीवन ऋणी रहूंगा।’

इस दौरान केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘वीर सावरकर जैसे नायक के बारे में लिखना-पढ़ना कोई आसान काम नहीं है। सावरकर के जीवन के इतने आयाम हैं कि उन्हें एक किताब में समाहित करना चुनौती भरा काम है, जिसे इस पुस्तक के लेखकों ने बाखूबी निभाया है। मैं उदय माहूरकर व चिरायु पंडित को धन्यवाद देता हूं कि पुस्तक के बारे में सही जानकारी लोगों को मिल पाएगी। अटल जी ने भी सावरकर को तेज, त्याग और तप की प्रतिमूर्ति कहा था।’

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मोहन भागवत ने कहा, ‘आज वीर सावरकर के बारे में सही जानकारी का अभाव है, ये हमें स्वीकार करना होगा। आज सावरकर के जिन सिद्धांतों को देश की सबसे अधिक आवश्यकता है, उससे हमें रूबरू करवाने का काम ये पुस्तक करती है। जब इस देश को आजादी मिली, उसके बाद सावरकर को बदनाम करने की मुहिम चली और बड़ी तेजी से चली। लेकिन यह सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, अब अगला लक्ष्य विवेकानंद, दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद हैं। भारत की जो वास्तविक राष्ट्रीयता है, वो इन महापुरुषों में समाहित है। इन्हीं तीन लोगों के विचारों के कारण सावरकर इतने बड़े देशभक्त बने।’

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अखबार के सर्कुलेशन में गड़बड़ी कर सरकार से ऐंठे विज्ञापन, CBI ने दर्ज किया केस

अखबार के सर्कुलेशन के आंकड़ों में धोखाधड़ी कर सरकार से विज्ञापन ऐंठने का मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है।

Last Modified:
Friday, 08 October, 2021
Newspaper

अखबार के सर्कुलेशन के आंकड़ों में धोखाधड़ी कर सरकार से विज्ञापन ऐंठने का मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोपी तीन अखबार मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इनमें से दो सिवनी और एक जबलपुर का निवासी है।

सीबीआई की वेबसाइट पर अपलोड की गयी प्राथमिकी के अनुसार, तीन अखबारों के प्रकाशकों/ मालिकों के खिलाफ चार अक्टूबर को जबलपुर में मामला दर्ज किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले में शिकायत हिमांशु कौशल नाम के एक शख्स ने 13 अगस्त 2021 को सीबीआई के जबलपुर कार्यालय में की थी। अपनी शिकायत में हिमांशु ने इन अखबार मालिकों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी और धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए थे।

कौशल ने अपनी शिकायत में कहा कि अखबारों के प्रसार के संबंध में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की फर्जी रिपोर्ट के आधार पर इन अखबारों को भारत सरकार की एजेंसी विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) पिछले कई वर्षों से लाखों रुपए के विज्ञापन मिल रहे थे। डीएवीपी अब आउटरीच एंड कम्युनिकेशन ब्यूरो (बीओसी) के तौर पर जाना जाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राथमिकी में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ये तीनों दैनिक समाचार पत्र छोटी श्रेणी के समाचार पत्र थे लेकिन उन्होंने अपनी फर्जी प्रसार संख्या दिखाकर मध्यम श्रेणी में पंजीकरण करा लिया था। इसके पीछे कारण यह है कि छोटे और मध्यम श्रेणी के समाचार पत्रों के लिए विज्ञापन दरें अलग-अलग हैं और मध्यम श्रेणी के लिए बजट का प्रावधान लगभग दोगुना है।

वहीं, सीबीआई ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया आरोपी व्यक्तियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों का असली दस्तावेजों के तौर पर इस्तेमाल करने और आपराधिक कदाचार का खुलासा हुआ है। इसलिए आरोपियों के खिलाफ यह प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

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