होम / प्रिंट / वकील के खिलाफ अपमानजनक लेख लिखना संपादक को पड़ा भारी, भुगतनी होगी ये सजा
वकील के खिलाफ अपमानजनक लेख लिखना संपादक को पड़ा भारी, भुगतनी होगी ये सजा
सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ साप्ताहिक अखबार के संपादक डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी को किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
एक वकील के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक लेख लिखना संपादक को इस कदर भारी पड़ गया कि उन्हें अब एक महीने जेल की सजा भुगतनी होगी। दरअसल, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ साप्ताहिक अखबार के संपादक डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी को किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। उन्हें एक वकील के खिलाफ मानहानिकारक लेखों के लिए कारावास की सजा सुनाई गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि एक महीने की जेल एक उदार सजा है।
चीफ जस्टिस एन.वी. रमण, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट ने शेट्टी की याचिका को केवल आंशिक रूप से अनुमति दी थी और उनकी सजा को एक वर्ष से घटाकर एक महीना कर दिया था। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील संजय एम नुली से कहा कि उन्हें सजा भुगतने दें। पीठ ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, 'आपने किसी को 'तीसरे दर्जे का वकील' कहा। आप इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हो और दावा करते हो कि तुम पत्रकार हो। यह किस तरह की पत्रकारिता है?
चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच में शामिल जस्टिस हिमा कोहली ने कहा, 'अपने लेख की भाषा देखो।' सजा को 'उदार' बताते हुए सीजेआई ने कहा, 'यह पीत पत्रकारिता है। यह उदारता है कि केवल एक महीने की कैद दी गई है।'
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि हाई कोर्ट के आदेश ने प्रेस की स्वतंत्रता और जानने के अधिकार का उल्लंघन किया है, जिसे संविधान के अनुच्छेद-19 (1) (ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आंतरिक हिस्से के रूप में मान्यता दी गई है।
याचिकाकर्ता कन्नड़ साप्ताहिक अखबार ‘तुंगा वर्थे’ के मालिक, प्रकाशक व संपादक हैं। 2008 में वकील टीएन रत्नराज के खिलाफ लेखों की एक श्रृंखला प्रकाशित की थी और वकील के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था।
टैग्स पत्रकार अखबार चैनल सुप्रीम कोर्ट संपादक डी.ए.स विश्वनाथ शेट्टी