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सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव की नेताजी सुभाष चंद्र की यात्रा पर नई किताब
सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर गहन शोध के बाद एक किताब लिखी है, जिसका नाम ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
सीनियर जर्नलिस्ट संजय श्रीवास्तव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर गहन शोध के बाद एक किताब लिखी है, जिसका नाम ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ है। इसे संवाद प्रकाशन, मेरठ ने प्रकाशित किया है।
23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की जन्मतिथि है। देश इस साल उनकी 125वीं जन्मशती मना रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने इस साल नेताजी की याद में कई आयोजन लगातार करने की योजना की घोषणा भी की है।
पिछले 07 दशकों में सुभाष चंद्र बोस को लेकर न जाने कितने सवाल उठे हैं। 18 अगस्त 1945 को नेताजी का निधन तायहोकु में एक हवाई हादसे में बताया गया, लेकिन देश ने कभी इस पर विश्वास नहीं किया। नेताजी का निधन हमेशा रहस्य की परतों में लिपटा रहा। सुभाष चंद्र बोस के निधन से जुड़े रहस्य की जांच के लिए तीन आयोग बने। दो आयोगों यानि शाहनवाज खान और जस्टिस जीडी खोसला आयोग ने कहा कि नेताजी का निधन तायहोकु में हवाई हादसे में हो गया, लेकिन 90 के दशक के आखिर में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गठित जस्टिस मनोज कुमार मुखर्जी आयोग ने कहा, उनका निधन हवाई हादसे में नहीं हुआ था।
50 के दशक में बने पहले जांच आयोग के सदस्य रहे सुभाष के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस ने बाद में खुद को आयोग की जांच रिपोर्ट से अलग कर अपनी असहमति रिपोर्ट तैयार की, जिसे उन्होंने अक्टूबर 1956 में जारी किया। इस रिपोर्ट में उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सुभाष किसी हवाई हादसे के शिकार नहीं हुए बल्कि जिंदा बच गए। जापान के उच्च सैन्य अधिकारियों ने खुद उन्हें सुरक्षित जापान से निकालकर सोवियत संघ की सीमा तक पहुंचना सुनिश्चित किया।
अलग-अलग देशों की आला खुफिया एजेंसियों ने अपने तरीकों से इस तारीख से जुड़ी सच्चाई को खंगालने की कोशिश की। कुछ स्वतंत्र जांच भी हुई। कई देशों में हजारों पेजों की गोपनीय फाइलें बनीं। तमाम किताबें लिखीं गईं। रहस्य ऐसा जो सुलझा भी लगता है और अनसुलझा भी। हकीकत ये है कि 18 अगस्त 1945 के बाद सुभाष कभी सामने नहीं आए।
बहुत से लोग 80 के दशक तक दावा करते रहे कि उन्होंने नेताजी को देखा है। अयोध्या में रहने वाले गुमनामी बाबा को बेशक सुभाष मानने वालों की कमी नहीं। दो और बाबाओं के सुभाष होने की चर्चाएं खूब फैली, उसमें शॉलमारी आश्रम के स्वामी शारदानंद और मध्य प्रदेश में ग्वालियर के करीब नागदा के स्वामी ज्योर्तिमय को नेताजी माना गया।
जब देश आजाद हो रहा था, तब कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं को भी लगता था कि नेताजी जिंदा हैं। ये माना गया कि वो सोवियत संघ पहुंच गए हैं। महफूज हैं। बस एक शख्स था, जो कह रहा था कि नेताजी ने उसके सामने अस्पताल में आखिरी सांसें ली हैं, वो थे आजादी के बाद पाकिस्तान में जाकर बस गए कर्नल हबीब उर रहमान।
सुभाष की अज्ञात यात्रा बहुत रहस्यपूर्ण और कौतुहल लिए है। लेखक संजय श्रीवास्तव की नई किताब ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ उसी ओर देखने की कोशिश है। सुभाष पर उपजने वाले तमाम सवालों का जवाब खोजने के साथ तीनों जांच आयोगों की रिपोर्ट, बडे़ भाई सुरेश चंद्र बोस की अहसमति रिपोर्ट को विस्तार से पहली बार दिया गया है।
ये काफी तथ्यपरक और शोधपूर्ण तरीके से लिखी किताब है, जो सुभाष ही नहीं बल्कि उनके जीवन से जुड़े लोगों और सवालों पर नजर दौड़ाती है। सुभाष की अज्ञात यात्रा आज भी अज्ञात है।
किताब - सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा
लेखक - संजय श्रीवास्तव
संवाद प्रकाशन, मेरठ
मूल्य 300 रुपए (पेपर बैक)
(अमेजन पर उपलब्ध)
पेज -288
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