विनीता यादव के अनुसार, यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि उस सामाजिक चुप्पी के खिलाफ एक दस्तावेज है, जिसे तोड़ना आज भी असहज माना जाता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।