बिजनेस अखबार mint से जुड़े श्रुतिजीत केके, मिली यह जिम्मेदारी

श्रुतिजीत ने यह जिम्मेदारी विनय कामत की जगह संभाली है, जिन्होंने सितंबर में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 16 November, 2020
Last Modified:
Monday, 16 November, 2020
Sruthijith

वरिष्ठ पत्रकार श्रुतिजीत केके (Sruthijith KK) ने अंग्रेजी के बिजनेस अखबार ‘मिंट’ (Mint) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने यहां पर बतौर एडिटर-इन-चीफ जॉइन किया है। उन्होंने विनय कामत की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है, जिन्होंने सितंबर में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।  

बता दें कि मिंट के साथ श्रुतिजीत की यह दूसरी पारी है। वर्ष 2007 में जब यह अखबार लॉन्च हुआ था, तब वह इसकी फाउंडिंग टीम के मेंबर थे। उन्होंने इसके रिपोर्टर के तौर पर भी काम किया था।

श्रुतिजीत को प्रिंट के साथ डिजिटल में काम करने का अनुभव है। पूर्व में वह ‘ईटी मैगजीन’ (ET Magazine), ‘हफपोस्ट’ (HuffPost) के इंडिया एडिशन के साथ भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह ‘एप्पल इंक’ (Apple Inc) में इंडिया ऐप के स्टोर एडिटर के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

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जानिए, 2.5 लाख से ज्यादा अखबारों के टाइटल किए निरस्त वाली खबर का सच

सोशल मीडिया पर ये खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे मीडिया जगत में हड़कंप मच गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
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Friday, 20 November, 2020
newspaper

मोदी सरकार ने पिछले एक साल की जांच के बाद ढाई लाख से अधिक अखबारों के टाइटल निरस्त कर दिए हैं, साथ ही सैंकड़ों अखबारों को डीएवीपी की सूची से बाहर कर दिया है। सोशल मीडिया पर ये खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे मीडिया जगत में हड़कंप मच गया, जिसके बाद जल्द । भारत सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक (PIB Fact Check) ने इस खबर की हकीकत बताई।

पीआईबी फैक्ट चेक ने बताया कि यह दावा फर्जी है। केंद्र सरकार द्वारा ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

इस फेक न्यूज में यह दावा किया गया कि भारत सरकार ने 269556 समाचार पत्रों का टाइटल निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि 804 अखबारों को डीएवीपी ने विज्ञापन सूची से बाहर कर दिया है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम को पुरानी सारी गड़बड़ी की जांच के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही इसमें अपात्र अखबारों और मैगजींस को सरकारी विज्ञापन देने की शिकायतों की जांच भी शामिल है। इसमें गड़बड़ी पाए जाने पर रिकवरी और कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी हैं।  

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कोरोना के कारण हुई छंटनी, मंथली के बजाय अब हर तीन महीने में छपेगी यह मैगजीन

कोरोना का कहर भारत सहित पूरी दुनिया की मीडिया इंडस्ट्री पर भी देखने को मिला है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 20 November, 2020
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Friday, 20 November, 2020
Magazine

कोरोना का कहर भारत सहित पूरी दुनिया की मीडिया इंडस्ट्री पर भी देखने को मिला है। आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कई अखबारों के सर्कुलेशन में कमी की गई, तो कुछ ने बंद भी हो गए। कई मीडिया कंपनियों ने आर्थिक बोझ को कम करने के लिए छंटनी भी की। इसी कड़ी में अब कैलिफोर्निया से प्रकाशित होने वाली ‘सी मैगजीन’ का नाम भी अब जुड़ गया है।

मीडिया पर कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव को देखते हुए मैगजीन प्रबंधन को कुछ कठिन व्यावसायिक निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 15 साल पुरानी यह मैगजीन अपनी स्थापना के बाद से अब मंथली की बजाय क्वॉर्टर्ली प्रिंट पब्लिकेशन मॉडल अपनाने जा रही है।

आउटपुट में कमी के अलावा इस मैगजीन को छंटनी के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिनमें इसके फैशन डायरेक्टर सहित लगभग चार लोग शामिल हैं। इन लोगों को पिछले हफ्ते ही जाने के लिए कह दिया गया है। वही स्टाफ में कई लोगों को मैगजीन के साथ जुड़े रहने के लिए फ्रीलांस काम करने का ऑफर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्वॉर्टर्ली पब्लिकेशन अगले साल 2021 से शुरू होगा और पहला इसका इश्यू कुछ विशेष होगा। सी मैगजीन में पहले से ही कम लोग काम करते हैं, जिनमें से करीब एक दर्जन लोग संपादकीय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं मैगजीन फ्रीलांस या अंशकालिक आधार पर कई लोग अपना योगदान देते हैं।  

गौरतलब है कि कोरोना महामारी का असर कई मीडिया कंपनियों पर भी पड़ा है। ‘कैलिफोर्निया संडे’ मैगजीन पूरी तरह से बंद हो गई है। ओपरा विनफ्रे की हर्स्ट मैगजीन ‘ओ’ भी क्वॉर्टर्ली मैगजीन हो गई है। प्लेब्वॉय ने भी अपना प्रिंट एडिशन बंद किया है। वहीं ‘द अटलांटिक’ (The Atlantic) ने इस साल की शुरुआत में विज्ञापन और लाइव इवेंट के नुकसान का हवाला देते हुए अपने स्टॉफ से करीब 20 प्रतिशत लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।  

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दिव्य भास्कर ने निकाला 160 पेज का मेगा एडिशन

‘दैनिक भास्कर’ समूह के गुजराती भाषा के अखबार ‘दिव्य भास्कर’ ने राजकोट एडिशन की 14वीं वर्षगांठ को मनाने के लिए दो पार्ट में 160 पेज का मेगा एडिशन पब्लिश किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 09 November, 2020
Last Modified:
Monday, 09 November, 2020
Divya Bhaskar

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) समूह के गुजराती भाषा के अखबार ‘दिव्य भास्कर’ (Divya Bhaskar) ने राजकोट एडिशन की 14वीं वर्षगांठ को मनाने के लिए दो पार्ट में 160 पेज का मेगा एडिशन पब्लिश किया। इससे पहले समूह शिमला में 144 पेज, इंदौर में 128 पेज, बीकानेर में 130 पेज, अहमदाबाद में 80 पेज, भोपाल में 72 पेज, उज्जैन में 60 पेज और होशंगाबाद में 60 पेज के स्पेशल एडिशंस निकाल चुका है।  

‘कोरानावायरस’ (कोविड-19) ने तमाम भारतीयों के सामने बहुत चुनौतियां पेश की हैं और उनके जीवन पर इस महामारी का बहुत प्रभाव पड़ा है। इस स्पेशल एडिशन का उद्देश्य इन चुनौतियों के बीच पैदा हुए नए अवसरों को सामने लेकर आना है। इस एडिशन की थीम में बताया गया है कि वर्ष 2030 में राजकोट कैसा होगा और इस चुनौतीपूर्ण समय में सामने आए विभिन्न अवसरों को सकारात्मक तरीके से सामने रखा गया है।

राजकोट के स्पेशल एडिशन के बारे में गुजरात के बिजनेस हेड संजीव चौहान का कहना है, ‘इस साल और उस समय में जब दुनिया महामारी के प्रभावों से उबर रही है, यह एडिशन पाठकों के बीच आशा और सकारात्मकता पैदा कर रहा है। बाजार की स्थिति के बीच यह बिजनेस कम्युनिट के साथ-साथ खरीदारों में विश्वास पैदा करने की दिशा में उठाया गया शानदार कदम है।’

वहीं, सौराष्ट्र और कच्छ के रीजनल हेड जयदीप मेहता का कहना है, ‘राजकोट एडिशन की 14वीं वर्षगांठ को मनाने के लिए निकाला गया यह मेगा एडिशन पाठकों को श्रेष्ठ देने के दिव्य भास्कर के अपने संकल्प को दोहराता है। यह हमारे पाठकों और व्यापार सहयोगियों के विश्वास और समर्थन के बिना संभव नहीं था, जो हमें चुनौती से निपटने और नए मील के पत्थर स्थापित करने के लिए मार्गदर्शन और प्रेरित करते हैं।’

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बसों से उतारकर नष्ट कर दीं अखबार की 6000 कॉपियां, संपादक ने जताया ये संदेह

ये अखबार त्रिपुरा के तीन जिलों में बांटने के लिए भेजे जा रहे थे। पुलिस ने इस घटना में शामिल लोगों की तलाश का काम शुरू कर दिया है।

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Published - Monday, 09 November, 2020
Last Modified:
Monday, 09 November, 2020
Newspapers

त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में शनिवार को कुछ लोगों ने बसों पर लदीं प्रादेशिक अखबार ‘प्रतिवादी कलम’ (Pratibadi Kalam) की तकरीबन छह हजार कॉपियां छीन लीं और उन्हें नष्ट कर दिया। ये अखबार त्रिपुरा के तीन जिलों में बांटने के लिए भेजे जा रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अखबार में राज्य के कृषि विभाग में कथित भ्रष्टाचार की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थीं। त्रिपुरा पुलिस का कहना है कि इस मामले में राधाकिशोरपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है और इस घटना के जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा रही है।

दैनिक ‘प्रतिबादी कलम’ के संपादक अनोल रॉय चौधरी का कहना है, ‘संदेह है कि अखबार द्वारा कथित तौर पर 150 करोड़ रुपये के कृषि घोटाले पर पिछले तीन दिनों में कई खबरों की एक श्रृंखला पब्लिश करने के कारण यह हमला हुआ है। हमने जो रिपोर्ट पब्लिश की थीं, उनमें अन्य लोगों के साथ कृषि मंत्री प्रणजीत एस. राय (Pranajit Singha Roy) का नाम भी सामने आया था।’

अनोल रॉय चौधरी के अनुसार, उदयपुर में अखबार की करीब छह हजार कॉपियां छीन ली गईं और उनमें से आधे से ज्यादा को जला दिया गया व ढेर सारी कॉपियों को फाड़कर इधर-उधर फेंक दिया गया। अपनी शिकायत में चौधरी ने राजू मजूमदार नाम के व्यक्ति समेत 11 लोगों को अखबार की कॉपियां फाड़ने और जलाने की इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि शनिवार को अन्य जगहों पर जा रहीं अखबारों की कॉपियां भी रोकी गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और इस घटना में शामिल लोगों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अगरतला प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने पुलिस उप-महानिरीक्षक सौमित्र धर से मुलाकात कर इस घटना के लिए दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। 

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फेस्टिव सीजन में प्रिंट मीडिया ने कुछ यूं पकड़ी ‘रफ्तार’

टैम एडेक्स के नवीनतम डाटा के अनुसार, इस साल अप्रैल के मुकाबले अगस्त में प्रतिदिन औसत रूप से विज्ञापन में 5.7 गुना तक की बढ़ोतरी देखी गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 31 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 31 October, 2020
Print Media

टीवी न्यूज को लेकर चल रही तमाम तरह की बहस और फेस्टिव सीजन के बीच प्रिंट मीडिया इस सीजन में एडवर्टाइजर्स की पहली पसंद बनता जा रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त से कुछ प्रमुख मीडिया संस्थानों द्वारा 50 पेज से ज्यादा के एडिशंस निकाले गए हैं। इसका मतलब साफ है कि प्रिंट की वापसी हो चुकी है। सितंबर से विज्ञापन रेवेन्यू बढ़ने के साथ ही सर्कुलेशन और बेहतर हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले अखबारों ने अब अपना 75 प्रतिशत बिजनेस वॉल्यूम हासिल कर लिया है।   

सर्कुलेशन और विज्ञापन

टैम एडेक्स (TAM AdEx) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल के मुकाबले अगस्त में प्रतिदिन औसत रूप से विज्ञापन में 5.7 गुना तक की बढ़ोतरी देखी गई है। जुलाई से सितंबर के बीच प्रिंट पर विज्ञापन दे रहीं पांच प्रमुख कैटेगरीज में कार, मल्टीपल कोर्सेज, टू-व्हीलर, रियल एस्टेट और ओटीसी प्रॉडक्ट्स की विस्तृत श्रंखला शामिल रही। अप्रैल से जून के बीच टॉप-5 कैटेगरीज में विज्ञापन वॉल्यूम 21 प्रतिशत के मुकाबले जुलाई और सितंबर के बीच यह 33 प्रतिशत रहा।

इस बारे में मैल्कम राफेल (Malcolm Raphael), SVP and Head, Creative Strategy and Planning, Times Response (BCCL), the creative & media planning unit of BCCL का कहना है, ‘लंबे समय तक लॉकडाउन के बावजूद हम आशावादी हैं और यही कारण है कि ऐड वॉल्यूम और रेवेन्यू महीना दर महीना बढ़ रहा है। फेस्टिव सीजन न सिर्फ मीडिया के लिए बल्कि तमाम अन्य कैटेगरीज के लिए महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान कंज्यूमर्स सबसे ज्यादा खर्च करते हैं और यह ब्रैंड्स के लिए त्योहारी भावनाओं को भुनाने का महत्वपूर्ण समय होता है। पिछले 40 दिन की बढ़त से यही प्रतिबिंबित हो रहा है। तमाम चुनौतियों के बावजूद ब्रैंड्स सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रहे हैं।’

अखबारों का सर्कुलेशन वापस ट्रैक पर आ रहा है और बड़े प्लेयर्स ने सकारात्मक ट्रेंड देखना शुरू कर दिया है। पिछले हफ्ते ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ (DB Corp Limited) ने अपने तिमाही नतीजों की घोषणा की थी। इसमें बताया था कि जुलाई से सर्कुलेशन बढ़ा है।

इस बारे में ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल का कहना है, ‘हालांकि पहली तिमाही में हमारे परिणाम में जरूर कुछ व्यवधान देखने को मिला है, लेकिन यह बताना महत्वपूर्ण है कि लगभग सभी मापदंडों में चाहे वह परिचालन हो, एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू हो अथवा सर्कुलेशन, जुलाई के बाद से हमने इनमें सुधार देखा है और यह लगातार आगे बढ़ रहा है। हमें यह बताते हुए खुशी है कि हमारा प्रदर्शन अब कोविड-19 के पहले के स्तर के नजदीक आ रहा है।’

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अपने 100 साल के इतिहास में TIME मैगजीन ने उठाया ये कदम

दुनियाभर में मशहूर अमेरिका की राजनीतिक पत्रिका 'टाइम' (TIME) ने अपने 100 साल के इतिहास में पहली बार एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी वजह से यह मैगजीन चर्चाओं में है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2020
TimeMagazine

दुनियाभर में मशहूर अमेरिका की राजनीतिक पत्रिका 'टाइम' (TIME) ने अपने 100 साल के इतिहास में पहली बार एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी वजह से यह मैगजीन चर्चाओं में है। दरअसल, टाइम मैगजीन ने अपने कवर पेज का लोगो बदला है। टाइम ने नवंबर के डबल इश्यू का लोगो VOTE कर दिया है। मैगजीन ने अमेरिका नागरिकों से राष्ट्रपति चुनाव में वोट करने की अपील की है।

मैगजीन का कवर डिजाइन शेपर्ड फेयरी ने तैयार किया है। शेपर्ड ने ही 2008 के चुनावों में मशहूर HOPE पोस्टर तैयार किया था और इसमें बराक ओबामा को राष्ट्रपति के तौर पर उम्मीद बताया गया था। नया एडिशन 3 नवंबर को होने वाले चुनावों से पहले बाजार में आएगा। मैगजीन के कवर पर महिला मास्क पहने नजर आ रही है। मास्क पर बैलेट बॉक्स है और इस पर भी वोट प्रिंट किया गया है। कवर के बारे में फेलसेंथल ने कहा कि इसमें जो महिला है, वह जानती है कि महामारी के समय लोकतंत्र के सामने ज्यादा परेशानियां हैं, फिर भी वह अपनी आवाज उठाने और इसे वोटिंग के जरिए ताकत देने के लिए संकल्पित है।

वहीं टाइम मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ और सीईओ फेलसेंथल ने लोगों से आधुनिक इतिहास के सबसे विभाजित करने वाले और अहम राष्ट्रपति चुनावों में अमेरिकी नागरिकों से वोट की अपील की। एक नोट में फेलसेंथल ने रीडर्स के लिए लिखा, ‘एक साल की पीड़ा, कठिनाई और उथल-पुथल के बाद अब हमारे पास पीढ़ियों में एक बार आने वाला मौका है, ताकि हम अपनी लय को बदल सकें। फेलसेंथल ने कवर का लोगो बदलने के बारे में भी बताया कि ऐतिहासिक तौर पर हम ऐसा निर्णय लेने जा रहे हैं, जो शायद ही कभी किसी ने बैलेट बॉक्स के जरिए लिया होगा। हमने करीब 100 साल के अपने इतिहास में पहली बार अपना यूएस एडिशन का लोगो बदला है, वो भी इस बेहद जरूरी संदेश के साथ कि लोग अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करें।

बता दें कि अमेरिका में चुनाव इस साल 3 नवंबर को होने जा रहे हैं। इस बार कई बड़ी चुनौतियों के बीच चुनाव हो रहा है। कोरोना के चलते 2.20 लाख से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं बेरोजगारी का दर भी काफी बढ़ गया है।  

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इस पहल के साथ एक मंच पर आए तमाम बड़े अखबार

न्यूज चैनल्स की रेटिंग और उग्र सामग्री को लेकर पिछले कुछ दिनों से तमाम चर्चाएं और बहस छिड़ी हुई हैं।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Print Media

न्यूज चैनल्स की रेटिंग और उग्र सामग्री को लेकर पिछले कुछ दिनों से तमाम चर्चाएं और बहस छिड़ी हुई हैं। इन सबके बीच टीवी न्यूज पर चुटकी लेते हुए प्रिंट मीडिया के बड़े नाम जैसे-‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ और ‘दैनिक भास्कर’ ने हाल ही में संयुक्त रूप से एक कैंपेन ‘प्रिंट इज प्रूफ’ (Print is Proof) चलाया। ‘News to inform not to entertain’ शीर्षक से चलाए गए इस कैंपेन में इन अखबारों ने एक मजबूत मैसेज दिया।

कैंपेन के साथ दिए नोट में इन अखबारों ने लिखा, ‘जागरूक और सुशिक्षित समाज को तैयार करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। इसमें सत्यापित तथ्यों, अच्छी तरह से शोध किए गए आंकड़ों और निष्पक्ष दृष्टिकोणों को प्रस्तुत करना शामिल है। हमें लगता है कि ये उन स्टोरीज पर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए पर्याप्त हैं जो वास्तव में मायने रखती हैं। इनमें सनसनीखेज स्टोरी नहीं है और कोई नाटकीय एंकरिंग नहीं है, क्योंकि हम इस बात को भलीभांति जानते हैं कि आप अपने न्यूज सोर्स (इंटेग्रिटी) से क्या उम्मीद रखते हैं।’

इस कैंपेन के बारे में ‘दैनिक भास्‍कर’ ग्रुप की चीफ कॉरपोरेट मार्केटिंग ऑफिसर काकून सेठी का कहना है, ‘प्रिंट इज प्रूफ दैनिक भास्कर की पहल है। दैनिक भास्कर ग्रुप की देश के सभी प्रमुख पब्लिशर्स के साथ हमेशा से भागीदारी रही है। इस बार भी यह पहल टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स और दैनिक भास्कर ग्रुप के साथ देशभर में चल रही है। ‘दैनिक जागरण’ ने भी अब हमारे साथ सहभागिता की है। अधिकांश पब्लिशर्स के जॉइन करने के साथ यह पहल जारी है।’

उन्होंने कहा, ‘आज के परिवेश में किसी भी माध्यम के लिए रिटर्न ऑफ इन्वेस्टमेंट (ROI) के प्रदर्शन के साथ विश्वास और विश्वसनीयता ज्यादा महत्वपूर्ण है। हमारा मिशन एक जागरूक समाज बनाना है, इसलिए हम ईमानदारी को बहुत गंभीरता से लेते हैं।’

सेठी के विचारों से सहमति जताते हुए ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ के डायरेक्टर (TOI & TIMS Brands) संजीव भार्गव का कहना है, ‘सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के प्रसार के अलावा टीआरपी को लेकर हुआ यह विवाद और सनसनी फैलाने वाली पत्रकारिता लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती है। न्यूज मीडिया को अपनी अखंडता बनाए रखते हुए एक जागरूक व सुशिक्षित समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। अखबार भी रोजाना यही करते हैं। हम शोध पर आधारित आंकड़े, सत्यापित तथ्य और निष्पक्ष दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं, जैसा कि हमारे रीडर्स हमसे उम्मीद रखते हैं। एक इंडस्ट्री के रूप में ‘प्रिंट इज प्रूफ’ कैंपेन रीडर्स के लिए हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।’

कैंपेन के अंतिम चरण में अखबारों ने मुद्रित शब्द (Printed Word) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डिजिटल मीडिया पर भी निशाना साधा है।

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इस अखबार का दफ्तर किया गया सील, संपादक ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

अखबार मालिकों का कहना है कि इस संबंध में पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और न किसी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
Newspaper

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में संपदा विभाग के अधिकारियों ने अंग्रेजी दैनिक ‘कश्मीर टाइम्स’ के दफ्तर को सोमवार को सील कर दिया। इस अखबार का कार्यालय प्रेस एन्क्लेव की एक सरकारी बिल्डिंग में आवंटित किया गया था। अखबार मालिकों का कहना है कि इस संबंध में पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और न किसी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।

‘कश्मीर टाइम्स’ की संपादक अनुराधा भसीन ने कहा, ‘श्रीनगर में हमारे दफ्तर पर कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ताला डाल दिया गया है। (आवंटन) रद्द करने या खाली करने का कोई नोटिस हमें नहीं दिया गया था।’

उन्होंने कहा, ‘हम संपदा विभाग गए और उनसे (कार्यालय खाली करने) इस संबंध में आदेश देने को कहा, लेकिन उन्होंने आदेश जारी नहीं किया। इसके बाद हमने अदालत का रुख किया लेकिन वहां से भी कोई आदेश नहीं आया।’

भसीन ने इस कदम को अपने खिलाफ  ‘प्रतिशोध’ बताया, क्योंकि वह सरकार के खिलाफ बोलीं थी और उन्होंने पिछले साल अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में मीडिया पर लगाई गईं पाबंदियों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

उन्होंने कहा, ‘पिछले साल जिस दिन मैं न्यायालय गई थी, उसी दिन कश्मीर टाइम्स को मिलने वाले राज्य सरकार के विज्ञापनों को रोक दिया गया था।’

‘कश्मीर टाइम्स’ का दफ्तर सील किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने मंगलवार को इस कदम की निंदा की। वहीं, लगभग एक दर्जन पत्रकारों के समूह ने अखबार के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए अपनी ओर से नि:शुल्क सेवा देने की पेशकश की।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘इससे पता चलता है कि क्यों हमारे कुछ ‘प्रतिष्ठित’ प्रकाशन सरकार के मुखपत्र बन गए हैं और केवल सरकार की प्रेस विज्ञप्तियां छाप रहे हैं। स्वतंत्र रिपोर्टिंग की कीमत तय प्रक्रिया का पालन किए बिना बेदखली है।’ 

माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने आरोप लगाया कि प्रशासन का यह बदले की राजनीति से उठाया गया कदम है और यह क्षेत्र में असंतोष की आवाज को दबाने का प्रयास है।

संपादक अनुराधा भसीन के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए पत्रकारों के एक समूह ने आरोप लगाया कि अखबार को दबाने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं जो खासकर पांच अगस्त के बाद से कश्मीर में स्वतंत्र प्रेस पर सरकार के प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज उठाने में अग्रणी रहा है। समूह ने बयान में कहा कि उनमें से कुछ अखबार की संपादकीय टीम को नि:शुल्क सेवा देने को तैयार हैं।

बता दें कि इस अंग्रेजी अखबार का मुख्यालय जम्मू में है और यह केंद्र शासित प्रदेश के दोनों क्षेत्रों से प्रकाशित होता है।

 

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जानें, किस तरह दैनिक भास्कर ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड

राजस्थान के मारवाड़ के ऐतिहासिक प्राचीन शहर बीकानेर, जो अपने अंतरराष्ट्रीय ब्रैंड बीकानेरी भुजिया के लिए प्रसिद्ध है

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
dainik-bhaskar

राजस्थान के मारवाड़ के ऐतिहासिक प्राचीन शहर बीकानेर, जो अपने अंतरराष्ट्रीय ब्रैंड बीकानेरी भुजिया के लिए प्रसिद्ध है, ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसे तोड़ने में कई साल लग सकते हैं।

अपनी 23वीं वर्षगांठ पर दैनिक भास्कर ने 130 पेजों का अखबार प्रकाशित किया है। इससे पहले इंदौर में दैनिक भास्कर ने 128 पेजों का एडिशन निकालकर मील का पत्थर स्थापित किया था, जिसमें भोपाल में 72 पेज, अहमदाबाद और रायपुर में 80 पेज, होशंगाबाद में 60 पेज और बिलासपुर में 54 पेज शामिल थे।  

आईएएनएस-सी वोटर मीडिया (IANS– C voter Media) के हालिया शोध के अनुसार, समाचार पत्रों के लिए सबसे भरोसेमंद माध्यम के रूप में 66.5% लोग अखबारों पर भरोसा करते हैं। लिहाजा 130 पेज के मेगा एडिशन के लिए एडवर्टाइजर्स की इतनी बड़ी भागीदारी यह सिद्ध भी करती है।

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सूचना प्रसारण मंत्री ने अखबारों की डोर-टू-डोर डिलीवरी को लेकर कही ये बात

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि आरडल्ब्यूए द्वारा लोगों के घरों में अखबारों की डोर-टू-डोर डिलीवरी रोकना सही नहीं है।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2020
Prakash Javadekar

केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि ‘रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन’ (आरडल्ब्यूए) समेत किसी भी निकाय द्वारा लोगों के घरों में अखबारों की डोर-टू-डोर डिलीवरी रोकना सही नहीं है।

‘टाइम्स नाउ’ (Times Now) को दिए एक इंटरव्यू में जावड़ेकर का कहना है कि वह रोजाना करीब 20 अखबार पढ़ते हैं और उन्हें इसमें कोई विशेष समस्या देखने को नहीं मिली है। जावड़ेकर का कहना है, ‘इसलिए कुछ आरडब्ल्यूए अथवा अन्य कुछ निकायों द्वारा अखबारों की डोर-टू-डोर डिलीवरी को रोका जाना सही नहीं है। उन्हें यह लोगों की पसंद पर छोड़ देना चाहिए कि वह अखबार पढ़ें या नहीं पढ़ें अथवा क्या पढ़ें।’  

हाउसिंग सोसाइटियों के शीर्ष निकाय भी इस ओर इशारा करते रहे हैं कि लोगों के घरों में अखबारों की डोर-टू-डोर डिलीवरी रोकना गैरकानूनी है। इस मामले में हाल ही में ‘महाराष्ट्र सोसाइटीज वेलफेयर एसोसिएशन’ (MahaSeWa), ‘द महाराष्ट्र हाउसिंग फेडरेशन’ और ‘द यूनाइटेड आरडब्ल्यूज जॉइंट एक्शन’ (URJA) बयान भी जारी कर चुके हैं। इन सभी निकायों का कहना है कि लोगों के घरों में अखबारों की डिलीवरी एक आवश्यक सेवा है और इस रोका नहीं जा सकता है।

उन्होंने आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों को इस सेवा में हस्तक्षेप न करने या सक्षम अधिकारियों के आदेशों का उल्लंघन न करने के लिए कहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में भी आरडब्ल्यूए के शीर्ष निकाय ने सभी आरडब्ल्यूए व हाउसिंग सोसाइटीज से लोगों के घरों में अखबारों की डोर-टू-डोर डिलीवरी न रोकने के लिए कहा है।

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