जानिए, उतार-चढ़ावों के बीच कैसा रहा साल 2020 में प्रिंट मीडिया का ‘सफर’

साल भर तमाम उतार-चढ़ावों के बीच प्रिंट मीडिया एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है और तमाम अन्य बिजनेस की तरह नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 31 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 31 December, 2020
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साल भर तमाम उतार-चढ़ावों के बीच प्रिंट मीडिया एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है और तमाम अन्य बिजनेस की तरह नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय में जब प्रिंट मीडिया पुनरुत्थान की ओर बढ़ रहा है, इस ग्रोथ में क्षेत्रीय समाचार पत्र अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

साल 2020 की शुरुआत तमाम अखबारों के लिए खराब रही, क्योंकि कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के कारण उनका सर्कुलेशन काफी बाधित हुआ। मुंबई और दिल्ली जैसे कई बड़े मार्केट्स में तमाम अखबार पब्लिशिंग रोकने पर मजबूर हो गए।  

इसका सीधा नतीजा विज्ञापन बिलों पर पड़ा और इसके परिणामस्वरूप इस सेक्टर को काफी नुकसान हुआ, जो 2019-20 की आखिरी तिमाही में ही नहीं बल्कि नए वित्त वर्ष की लगातार दो तिमाहियों में भी दिखाई दिया।

इस महामारी ने देश में पहले से ही परेशानियों से जूझ रही न्यूजपेपर इंडस्ट्री की समस्या और बढ़ा दी। सिर्फ छोटे ब्रैंड्स ही नहीं, बल्कि इस इंडस्ट्री के बड़े प्लेयर्स को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा।  

बिजनेस इंटेलीजेंस फर्म ‘टोफलर’ (Tofler)  द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) ने 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए 451.63 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्शाया, जबकि इससे पहले वित्तीय वर्ष में इसे 484.27 करोड़ रुपये का कुल लाभ हुआ था।

 कंपनी का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू भी  6,155.32 रुपये से घटकर 5,367.88 करोड़ रुपये रह गया। पब्लिकेशंस की बिक्री से मिलने वाले रेवेन्यू में भी गिरावट आई और यह 656.09 करोड़ रुपये से घटकर 629.96 करोड़ रुपये पर आ गया। सर्कुलेशन में कमी और विज्ञापनदाताओं की गैरमौजूदगी के कारण न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए मार्केट काफी समय तक सूखा रहा। लेकिन प्रिंट ने मजबूती से लड़ाई की और वापसी की।  

अप्रैल की बात करें तो स्थिति को देखते हुए तमाम अखबारों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू की, इसके साथ ही जब सरकार ने अखबारों को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में शामिल किया तो प्रिंट पब्लिकेशंस को फिर मजबूती मिली। दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, ईनाडु, हिन्दुस्तान, पत्रिका ग्रुप, अमर उजाला, डेली थांथी, साक्षी, डेक्कन हेराल्ड, हिन्दुस्तान टाइम्स और दिव्य भास्कर समेत तमाम अखबारों ने अप्रैल के दूसरे हफ्ते में संयुक्त रूप से एक स्टेटमेंट जारी कर बताया कि फरवरी के आधार पर अखबारों का वितरण किस तरह 75 से 90 प्रतिशत तक स्थिर हो गया। अगले महीने ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे’ (IRS) के आंकड़े आए। इसमें रीजनल अखबारों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा और उन्होंने इस सेक्टर की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई।  

मई में जारी इंडियन रीडरशिप सर्वे की रिपोर्ट 2019 की पिछली तीन तिमाही यानी पहली (Q1), दूसरी (Q2) और तीसरी तिमाही (Q3) के साथ चौथी तिमाही के ताजा आंकड़ों के औसत पर आधारित था। इससे पता चला कि विभिन्न केंद्रों पर रीडरशिप में कमी आई है। हालांकि, गहनता से अध्ययन करने पर स्पष्ट हुआ कि मेट्रो शहरों के बाहर रीजनल एरिया में पब्लिशर्स की ग्रोथ ज्यादा हुई।  

कुछ प्रादेशिक अखबारों की टोटल रीडरशिप (total readership) में बढ़ोतरी देखी गई, जबकि कुछ की एवरेज इश्यू रीडरशिप (average issue readership) में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, देश के कुछ लोकप्रिय ब्रैंड्स जैसे अमर उजाला, लोकमत, दैनिक थांथी ने दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की।

जुलाई में सरकार ने सरकारी विज्ञापनों के लिए नई गाइडलाइंस जारी कीं। प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति 2020 जिसे सरकारी विज्ञापनों की व्यापक संभव कवरेज के लिए तैयार किया गया था, भारतीय भाषा के दैनिक समाचार पत्रों के लिए फायदेमंद साबित हुई। क्योंकि इसमें विज्ञापन स्पेस (ad space) भी बढ़ाकर 50 से 80 प्रतिशत कर दिया गया। इसके अलावा नई पॉलिसी में प्रिंट में विज्ञापन का संतुलित डिस्ट्रीब्यूशन तय किया गया।   

एक अगस्त 2020 से प्रभावी इन गाइडलाइंस में कहा गया है कि सरकार के सभी मंत्रालय या विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त निकाय और सोसायटीज, केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सभी शैक्षणिक संस्थान अपने डिस्पले विज्ञापनों को ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ के माध्यम से देंगे। इन गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि विज्ञापनों को जारी करते समय बीओसी सर्कुलेशन, भाषा, कवरेज क्षेत्र और पाठकों जैसे कारकों की विभिन्न श्रेणियों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करेगी।

जुलाई में प्रिंट की ओर एडवर्टाइजर्स फिर वापस आना शुरू हुए, जिसकी इंडस्ट्री को काफी जरूरत थी। हालांकि, रिकवरी की रफ्तार टियर-दो और टियर-तीन शहरों में अधिक थी। टैम एडेक्स (Tam AdEx) के डाटा के अनुसार, प्रिंट पर वापसी करने वाले विज्ञापनदाताओं में 75 प्रतिशत हिंदी और अंग्रेजी भाषा के थे।  

राज्यों की हिस्सेदारी की बात करें तो 17 प्रतिशत ऐड वॉल्यूम शेयर के साथ उत्तर प्रदेश इस लिस्ट में सबसे ऊपर था, इसके बाद 10 प्रतिशत शेयर के साथ महाराष्ट्र और इसके बाद कर्नाटक व तमिलनाडु का नंबर था।  

टैम डाटा के अनुसार, अप्रैल से जून की अवधि में 189 कैटेगरीज में 28000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स और 31300 से ज्यादा ब्रैंड्स ने खासतौर पर प्रिंट के लिए विज्ञापन दिया। एडवर्टाइजर्स की वापसी के कारण 13 अगस्त को दैनिक भास्कर ने अपने भोपाल एडिशन को 72 पेज का निकाला। इस दौरान दैनिक भास्कर में जिन सेक्टर्स के विज्ञापन दिए गए, उनमें रियल एस्टेट, इलेक्ट्रॉनिक ड्यूरेबल्स, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी शामिल रहे। इस पब्लिकेशन को सरकारी विज्ञापन भी प्राप्त हुए। अगस्त के पहले सप्ताह से टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे तमाम प्रमुख मार्केट्स में 30-40 से ज्यादा पेजों का अखबार पब्लिश करना शुरू कर दिया।  

पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट 2020 के मिड ईयर रिव्यू के अनुसार, विज्ञापन देने वालों में एफएमसीजी, ऑटो और एजुकेशन जैसी कैटेगरीज आगे रहीं और वर्ष 2020 की पहली छमाही में प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में इनका योगदान करीब 45 प्रतिशत रहा, जो वर्ष 2019 में 38 प्रतिशत था।   

प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में एजुकेशन सेक्टर 16 प्रतिशत शेयर के साथ एफएमसीजी सेक्टर से आगे निकल गया। एफएमसीजी सेक्टर 15 प्रतिशत शेयर के साथ दूसरे स्थान पर आ गया। प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में ऑटो इंडस्ट्री 14 प्रतिशत शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रही।

फेस्टिव सीजन प्रिंट के लिए काफी अच्छा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान टेलिविजन न्यूज को लेकर चल रहीं तमाम तरह की बहस ने भी प्रिंट को लाभ पहुंचाने में और मदद की।  टैम एडेक्स डाटा के अनुसार, अन्य किसी ट्रेडिशनल मीडिया की तुलना में प्रिंट मीडिया को वर्ष 2019 और वर्ष 2020 दोनों में अक्टूबर से नवंबर के बीच काफी ज्यादा एडवर्टाइजर्स मिले। टीवी में इस साल अक्टूबर से नवंबर के बीच जहां 3400 एडवर्टाइजर्स मिले और रेडियो में इन एडवर्टाइजर्स की संख्या 2800 से कम थी, वहीं इसी अवधि में प्रिंट को 30900 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स मिले।

हालांकि, साल के अंत से प्रिंट का रेवेन्यू बढ़ना शुरू हुआ है, लेकिन इंडस्ट्री के लिए इससे बुरा समय नहीं हो सकता, जब नुकसान के चलते उन्हें काफी कॉस्ट कटिंग करनी पड़ी। इसके परिणामस्वरूप कई लोगों को नौकरी से हटाया गया अथवा उनकी सैलरी में कटौती करनी पड़ी।

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न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमतों के बीच डीबी कॉर्प के गिरीश अग्रवाल ने जताई ये उम्मीद

वित्तीय वर्ष 2023 की पहली तिमाही की अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल को संबोधित कर रहे थे ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ (D.B. Corp Ltd) के नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 18 August, 2022
Last Modified:
Thursday, 18 August, 2022
Girish Agarwal

‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ (D. B. Corp Ltd) के नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है कि तिमाही दर तिमाही (Q-o-Q) और साल दर साल (Y-o-Y) प्रदर्शन के आधार पर हमने इस साल की शुरुआत सभी क्षेत्रों में मजबूत स्थिति के साथ की है।

वित्तीय वर्ष 2023 की पहली तिमाही की अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल (earnings conference call) के दौरान गिरीश अग्रवाल का कहना था, ‘मेरा मानना है कि साल दर साल की जगह तिमाही दर तिमाही की बात करना ज्यादा सही है। इसका सीधा सा कारण है कि पिछले साल की पहली तिमाही पर कोविड का काफी प्रभाव था, इसलिए संख्याओं में ज्यादा ग्रोथ दिखाई देती है। लेकिन मैं कहूंगा कि हमें इसकी तुलना तिमाही दर तिमाही करने की जरूरत है। इसके साथ ही हमें पिछले साल की बजाय वर्ष 2019-20 की तिमाही से अपनी तुलना करनी चाहिए।‘

अग्रवाल का कहना था कि कंपनी को उम्मीद है कि इस गति से प्रिंट सेक्टर वित्तीय वर्ष 2020 के मुकाबले विकास के मामले में संतोषजनक स्तर पर पहुंच जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कैसे बाजार में उनकी मजबूत स्थिति ने उन्हें विभिन्न प्रकार के एडवर्टाइजर्स को आकर्षित करने में मदद की है। इनमें ट्रेडिशनल कैटेगरी जैसे रियल एस्टेट, ज्वेलरी, एजुकेशन के साथ-साथ ई-कॉमर्स, स्टार्ट अप और फिनटेक जैसे नए सेक्टर्स भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘हम हाइपर लोकल विज्ञापन कैंपेन के लिए एडवर्टाइजर्स को एक मंच प्रदान करते हुए पुरस्कार विजेता स्पेशल एडिशन जैसी नई पहलों द्वारा अपने विज्ञापन फनल को मजबूत करना जारी रखेंगे।’

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और लागत अनुकूलन (Cost Optimization) पर अग्रवाल ने कहा, ‘जैसा कि हम पिछली कुछ तिमाहियों से इंगित कर रहे हैं, हमारा समान ध्यान यह सुनिश्चित करने पर रहा है कि हमारे विभिन्न लागत कटौती उपाय लंबे समय से चल रहे हैं। एक तरफ हम अपने राजस्व आधार (Revenue Base) को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं,  वहीं वित्तीय वर्ष 2020 की पहली तिमाही की तुलना में परिचालन लागत (Operating Cost) में लगभग छह प्रतिशत की बचत करने में भी कामयाब रहे हैं। हमारा मानना ​​है कि न्यूजप्रिंट (अखबारी कागज) की कीमतें अपने चरम पर हैं और हमें इस साल की तीसरी तिमाही से कुछ राहत मिलनी चाहिए।’

कोविड से पहले और अब अखबार की प्रतियों की तुलनात्मक संख्या के बारे में उन्होंने कहा इस तिमाही में हमारी 42 लाख कॉपियां हैं। गर्मियों की तिमाही आमतौर पर सामान्य से थोड़ा कम होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरी तिमाही में कॉपियों की संख्या में कोविड से पहले की तुलना में कुछ लाख की वृद्धि होगी। अभी यह संख्या कम है।

वहीं, ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल का कहना था, ‘मुद्रास्फीति के दबाव और घरेलू व वैश्विक बाजार में तमाम चुनौतियों के बावजूद समूह ने इस तिमाही में मजबूत परिणाम दिए हैं। हमने सर्कुलेशन और विज्ञापन दोनों में अच्छी वृद्धि देखी है।’

समूह के डिजिटल बिजनेस के बारे में उन्होंने कहा, ‘कंपनी अपने सभी ऐप में डेली एक्टिव यूजर बेस लगातार बढ़ा रही है। जनवरी 2020 में दो मिलियन से आठ गुना बढ़कर यह संख्या मई 2022 में लगभग 17 मिलियन हो गई है। प्रिंट में तो हम पहले से ही काफी मजबूत स्थिति में हैं और अब डिजिटल फॉर्मेट में भी हमारी दमदार मौजूदगी है।’

वहीं, रेडियो बिजनेस के बारे में उन्होंने कहा, ‘माई एफएम का कंटेंट दर्शकों को काफी पसंद है और इनोवेटिव कंटेंट क्रिएशन के माध्यम से यह श्रोताओं में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। इससे हमें बेहतर विज्ञापन दरें प्राप्त करने में भी मदद मिली है और हमें उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में इसमें और सुधार होगा।’

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तमाम आंदोलनों से रूबरू कराती वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री की इस पुस्तक ने दी 'दस्तक'

नई दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) के मल्टीपरपज हॉल में बुधवार की शाम आयोजित एक कार्यक्रम में इस पुस्तक को लॉन्च किया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 18 August, 2022
Last Modified:
Thursday, 18 August, 2022
Andolanjivi Book Launching

वरिष्ठ पत्रकार और ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री की पुस्तक ‘आंदोलनजीवी’ (किसान संघर्ष और आजाद भारत के जन आंदोलन) ने मार्केट में दस्तक दे दी है। नई दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) के मल्टीपरपज हॉल में बुधवार की शाम आयोजित एक कार्यक्रम में इस पुस्तक को लॉन्च किया गया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद और ‘जदयू’ के प्रधान महासचिव केसी त्यागी, पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ राजनेता जनार्दन द्विवेदी और वरिष्ठ पत्रकार (पद्मश्री) आलोक मेहता विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद रहे। इसके अलावा देश के कई प्रमुख आंदोलनों में अहम भूमिका निभा चुके डॉ. सत्येंद्र सिंह और रण सिंह आर्य भी मंचासीन अतिथियों में शामिल रहे। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन किन्हीं कारणोंवश वह नहीं आ सके।

‘पाखी’ पब्लिशिंग हाउस की ओर से प्रकाशित 'आंदोलनजीवी' की लॉन्चिंग के मौके पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पुस्तक के लेखक विनोद अग्निहोत्री का कहना था कि यह पुस्तक देश में किसानों के आंदोलन की एक लंबी यात्रा का वृतांत प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का शीर्षक तमाम किसानों के उन संघर्षों के प्रति समर्पित है, जो देश की आजादी के बाद से अब तक हुए हैं। पुस्तक में हाल ही में हुए किसान आंदोलन की कहानी भी शामिल है। उन्होंने इस पुस्तक को लिखने का श्रेय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने सहयोगी रहे वरिष्ठ पत्रकारों और धर्मपत्नी अंजू पांडेय अग्निहोत्री को दिया।

'आंदोलनजीवी' का विमोचन करने के अवसर पर डॉ. मुरलीमनोहर जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल समझ आधारित उद्योगों का विकास हो रहा है, लेकिन कृषि पीछे छूट रही है। उन्होंने लोगों को सचेत करते हुए कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति से केवल देश ही नहीं, दुनिया के क़ई हिस्सों पर अस्तित्व का संकट मंडरा सकता है, इसलिए समय रहते हुए इसकी गंभीरता को समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को सम्मान दिए बिना किसी देश की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं रह सकती।

जनता दल (यूनाइटेड) के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि अपने पत्रकारिता और राजनीतिक जीवन में उन्होंने स्वयं कई आंदोलन किए हैं, लिहाजा इस तरह के आंदोलनों के महत्व को वह समझते हैं। उन्होंने कहा कि आज देश के कुछ पत्रकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के भी विरोध में आ गए हैं, लेकिन यह किसानों के लिए दुर्भाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि जब तक इस देश में आंदोलनजीवी रहेंगे, तब तक देश का लोकतंत्र जीवित रहेगा।

इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी का कहना था कि देश में हुए किसान आंदोलनों पर आंदोलनजीवी एक बेहतरीन पुस्तक है। इसे परिपक्व अनुभव के साथ बेहद उत्साह के साथ लिखा गया है। पुस्तक के शीर्षक कारण कई बार आंदोलनों के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की अपेक्षित चर्चा से छूट जाने का खतरा रहता है, लेकिन इससे आंदोलनों के चित्रण पर कोई असर नहीं पड़ा है और यही पुस्तक की सफलता है। उन्होंने कहा कि देश के कई अन्य महत्वपूर्ण आंदोलनों पर भी विस्तार के साथ लिखा जाना चाहिए।

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि देश ने आजादी से लेकर अब तक कई बड़े आंदोलन देखे हैं, इसके बाद भी देश के किसानों की समस्याओं का अंत नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि तमाम आंदोलनों के नाम पर कुछ लोग अपना लाभ उठाने की कोशिश करते आए हैं, आंदोलनजीवी जैसी पुस्तकों में इन लोगों के बारे में भी लिखा जाना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन ‘पाखी’ पब्लिशिंग हाउस की मुख्य कार्यकारी अधिकारी शोभा अक्षर ने किया। इस मौके पर भाजपा नेता वरुण गांधी, वरिष्ठ पत्रकार अकु श्रीवास्तव, आशुतोष और संतोष भारतीय समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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प्रभात खबर ने इस खास अंदाज में मनाया आदिवासी दिवस

आज 9 अगस्त है और पूरी दुनिया 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के रूप में मनाती है।

Last Modified:
Tuesday, 09 August, 2022
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आज 9 अगस्त है और पूरी दुनिया 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’ के रूप में मनाती है। वर्ष 1982 में शुरू हुई इस परंपरा का हर साल पालन किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र बड़े पैमाने पर इसका आयोजन करता है। इस बार विश्व आदिवासी दिवस की थीम 'पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसारण में स्वदेशी महिलाओं की भूमिका' रखा गया है।

बता दें कि कोविड-19 के चलते 2021 में कोई थीम जारी नहीं की गयी थी। 2021 में वर्ष 2020 की थीम को पुनः जारी कर दिया गया था। विश्व में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या लगभग 37 करोड़ है, जोकि पूरे विश्व की जनसंख्या 5 प्रतिशत हिस्सा है। दुनिया में 5000 आदिवासी समुदाय हैं, जिनकी सात हजार भाषाएं हैं।

वहीं, आज आदिवासी दिवस पर झारखंड से प्रकाशित हिंदी दैनिक अखबार ‘प्रभात खबर’ ने एक विशेष प्रस्तुति दी और अखबार के जरिए झारखंड की उन आदिवासी वीरांगनाओं को याद किया, जिन्होंने इस देश की मिट्टी को विदेशियों से बचाने के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए।   

यहां देखिए, 'प्रभात खबर' की ये विशेष प्रस्तुति:

 

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इस पत्रिका में आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर विवाद, संपादक के खिलाफ दर्ज FIR

एक पत्रिका में छपी भगवान शंकर और मां काली की आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

Last Modified:
Friday, 05 August, 2022
TheWeek5454

एक पत्रिका में छपी भगवान शंकर और मां काली की आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बीच यूपी के कानपुर में इस पत्रिका के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है।

दरअसल, मशहूर मलयालम पत्रिका ‘द वीक’ में 24 जुलाई के अंक में हिंदू देवी मां काली को लेकर एक लेख छापा गया है, लेकिन लेख में मां काली और भगवान शंकर की जो तस्वीर छापी गई है, उसे आपत्तिजनक बताया जा रहा है। आरोप है कि यह तस्वीर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है।

भाजपा नेता प्रकाश शर्मा ने मैगजीन के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी। इसमें उन्होंने लिखा है कि मैगजीन ने भगवान शिव और मां काली की आपत्तिजनक फोटो छापी है। इससे हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंची है। कोतवाली एसएचओ अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि मुकदमा दर्ज किया गया है, वहीं इसकी जांच की जा रही है।  

भगवान शंकर की यह आपत्तिजनक तस्वीर ‘द वीक’ पत्रिका के 24 जुलाई के अंक में पेज नंबर 62 और 63 में छपी हुई है। यह पूरा व्याख्यान माता काली के उस गुस्से के समय पर प्रकाशित किया गया है, जब उन्हें रोकने के लिए भगवान शंकर उनके पैरों के नीचे लेट गए थे। मगर तस्वीर में भगवान शंकर को आपत्तिजनक तरीके से निर्वस्त्र दर्शाया गया है, जिसे हिंदूवादी संगठन के लोग आपत्तिजनक बता रहे हैं।

हिंदूवादी नेता प्रकाश शर्मा ने इस पूरे मामले पर कानपुर कोतवाली में एक प्रार्थना पत्र दिया है, जिसमें ‘द वीक’ पत्रिका के संपादक और लेख लिखने वाले के साथ तस्वीर बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे मामले में कानपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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‘Hindustan Times’ में सोनल कालरा का कद बढ़ा, अब मिला यह पद

बता दें कि सोनल कालरा को पत्रकारिता में ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका समेत कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 03 August, 2022
Last Modified:
Wednesday, 03 August, 2022
Sonal Kalra

जानी-मानी पत्रकार और कॉलमिस्ट सोनल कालरा को अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) में चीफ मैनेजिंग एडिटर (एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल) के पद पर प्रमोट किया गया है।

इस बारे में जानकारी देते हुए सोनल कालरा ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘मुझे यह जानकारी शेयर करते हुए काफी खुशी हो रही है कि मुझे हिन्दुस्तान टाइम्स में चीफ मैनेजिंग एडिटर (एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल) के पद पर पदोन्नत किया गया है। मेरी बेहतरीन टीमों को धन्यवाद, जिनके बिना यहां तक पहुंचना संभव नहीं था। पांच साल पहले इसी तारीख को मैं मैनेजिंग एडिटर बनी थी।’ 

बता दें कि सोनल कालरा को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने इस अखबार की लाइफस्टाइल पहलों (Lifestyle initiatives) को आगे बढ़ाने में काफी अहम भूमिका निभाई है।

प्रसिद्ध लेखक और पॉडकास्टर सोनल कालरा के लोकप्रिय कॉलम 'A calmer you' को देश के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले स्वयं सहायता कॉलम (self-help columns) में स्थान दिया गया है। सोनल कालरा को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड समेत कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। 

अपने प्रमोशन के बारे में सोनल कालरा द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को आप यहां पढ़ सकते हैं।

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अब इस अखबार से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार आयुष्मान बरुआ, मिली बड़ी जिम्मेदारी

बरुआ इससे पहले ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) समूह के साथ जुड़े हुए थे और बेंगलुरु में इस समूह के अखबार ‘मिंट’ (Mint) में असिस्टेंट एडिटर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

Last Modified:
Tuesday, 02 August, 2022
Ayushman Baruah

वरिष्ठ पत्रकार आयुष्मान बरुआ ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ (Indian Express) समूह के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने इस समूह के बिजनेस अखबार ‘द फाइनेंसियल एक्सप्रेस' (The Financial Express) में बतौर एडिटर (टेक्नोलॉजी) जॉइन किया है।

बरुआ बेंगलुरु से अपना कामकाज संभालेंगे और इस अखबार की टेक्नोलॉजी कवरेज की जिम्मेदारी संभालेंगे। बता दें कि बरुआ इससे पहले ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) समूह के साथ जुड़े हुए थे और बेंगलुरु में इस समूह के अखबार ‘मिंट’ (Mint) में असिस्टेंट एडिटर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

आयुष्मान ने शिलॉन्ग के St. Anthony's College से मीडिया टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने बेंगलुरु के Commits Institute of Journalism and Mass Communication से मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।

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जानें, पिछले तीन वर्षों में भारत ने रूस से कितना न्यूजप्रिंट किया आयात

भारत में न्यूजप्रिंट की कुल मांग की तुलना में, रूस से भारत को न्यूजप्रिंट की आपूर्ति पर ज्यादा प्रभाव नहीं दिख रहा है।’

Last Modified:
Monday, 01 August, 2022
Newspaper Industry

सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने हाल ही में राज्यसभा को बताया, पिछले 3 वर्षों में रूस से न्यूजप्रिंट (अखबारी कागज) का आयात 34-39% के बीच रहा है। यह जानकारी उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है।

इस दौरान अनुराग ठाकुर ने बताया, ‘वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने सूचित किया है कि व्यापार के आयात संबंधी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 3 वर्षों में रूस से न्यूजप्रिंट का आयात 34-39 प्रतिशत के बीच है।’

उन्होंने यह भी बताया, ‘रूस से आयात की हिस्सेदारी की मात्रा में वर्ष 2020-21 और 2021-22 में मामूली वृद्धि हुई है। इसलिए, भारत में न्यूजप्रिंट की कुल मांग की तुलना में, रूस से भारत को न्यूजप्रिंट की आपूर्ति पर ज्यादा प्रभाव नहीं दिख रहा है।’

मंत्री ने यह भी कहा कि व्यापार के आयात संबंधी आंकड़ों के अनुसार, फिनलैंड से ग्लॉसी न्यूजप्रिंट (चमकदार अखबारी कागज) के आयात की मात्रा ज्यादा नहीं है।

इससे पहले, मंत्री ने लोकसभा में यह जानकारी दी थी कि न्यूजपेपर इंडस्ट्री द्वारा न्यूजप्रिंट के आयात में भारी गिरावट देखी गई है। वाणिज्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अनुराग ठाकुर ने बताया था कि वित्त वर्ष 2022 में न्यूजप्रिंट का आयात घटकर 597,766 किलोग्राम रह गया है, जो वित्त वर्ष 2021 में 648,620 किलोग्राम था। वित्त वर्ष 2018 में आयात 1,384,056 किलोग्राम था, इसके बाद वित्त वर्ष 2019 में 1,296,300 किलोग्राम और वित्त वर्ष 2020 में 1,296,354 किलोग्राम था।

वहीं, पिछले पांच वर्षों और चालू वित्तीय वर्ष के दौरान देश में न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए घरेलू उत्पादन, खपत और कागज की मांग के विवरण के बारे में पूछे जाने पर, ठाकुर ने कहा कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए इस तरह के डेटा का रखरखाव नहीं करता है।

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महामारी के दौर में घट गया अखबारी कागज का आयात, सरकार ने दिए ये आंकड़े

महामारी (कोविड-19) के दौर में पिछले दो वर्षों में न्यूजप्रिंट (अखबारी कागज) के आयात में करीब 50 प्रतिशत तक की कमी आई है।

Last Modified:
Wednesday, 27 July, 2022
Newspaper

महामारी (कोविड-19) के दौर में पिछले दो वर्षों में न्यूजप्रिंट (अखबारी कागज) के आयात में करीब 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। सरकार ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी है। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में न्यूजपेपर इंडस्ट्री ने 12,96,354 किलोग्राम न्यूजप्रिंट का आयात किया था, वहीं वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा घटकर करीब आधा 6,48,620 किलोग्राम रह गया।

लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2017-18 में न्यूजपेपर इंडस्ट्री द्वारा 13,84,056  किलोग्राम न्यूजप्रिंट का आयात किया गया, जबकि वर्ष 2020-21 में यह करीब 46 प्रतिशत घटकर 6,48,620 किलो रह गया। इसके बाद वर्ष 2021-21 में न्यूजप्रिंट का आयात और घटकर 5,97,766 किलो रह गया।

सूचना प्रसारण मंत्री ने बताया कि न्यूजप्रिंट पर दस प्रतिशत का सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) लगाया गया था, जिसे फरवरी 2020 में घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया था।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समाचार पत्र उद्योग से अखबारी कागज पर सीमा शुल्क में कमी/छूट के लिए तमाम आवेदन प्राप्त हुए थे। वित्त मंत्रालय द्वारा जांच के बाद शीमा शुल्क में कटौती का निर्णय लिया गया था।

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‘जन एक्सप्रेस’ अखबार से जुड़े पत्रकार डॉ. वैभव शर्मा, मिली अहम जिम्मेदारी

मूल रूप से एटा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले डॉ. वैभव शर्मा को मीडिया में काम करने का करीब 18 साल का अनुभव है।

Last Modified:
Wednesday, 27 July, 2022
Dr Vaibhav Sharma

हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’, झांसी में लंबे समय तक सिटी इंचार्ज व चीफ सब-एडिटर रहे पत्रकार डॉ. वैभव शर्मा को दैनिक ‘जन एक्सप्रेस‘ के राज्य मुख्यालय, लखनऊ पर विशेष संवाददाता की अहम जिम्मेदारी दी गई है।

समाचार4मीडिया से बातचीत में डॉ. वैभव शर्मा ने बताया कि पिछले 13 वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी दैनिक जन एक्सप्रेस के नेशनल हेड कमलेश फाइटर की संस्तुति पर संपादक अरुण कुमार त्रिपाठी ने उन्हें यह जिम्मदारी सौंपी है।

डॉ. वैभव शर्मा ने वर्ष 2003 में दैनिक ‘अमर उजाला’ से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर वर्ष 2006 से 2010 तक वह दैनिक ’हिन्दुस्तान’ में स्टाफ रिपोर्टर रहे। इसके बाद वह फिर ‘अमर उजाला’ से जुड़ गए और वर्ष 2010 से 2021 तक इस अखबार में सिटी इंचार्ज व चीफ सब-एडिटर की जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

डॉ. वैभव शर्मा को मीडिया में काम करने का करीब 18 साल का अनुभव है। मूल रूप से एटा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले डॉ. वैभव शर्मा ने आगरा से ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने आगरा में डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी से हिंदी में डॉक्टरेट की है।

डॉ. वैभव शर्मा ने पत्रकारिता की पढ़ाई दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से की है। समाचार4मीडिया की ओर से डॉ. वैभव शर्मा को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।   

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अब जाने-माने पब्लिकेशन ग्रुप ‘पुण्य नगरी’ से जुड़े पंकज बेलवारियार

पूर्व में वह बतौर नेशनल मार्केटिंग हेड ‘प्रभात खबर’ में भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा वह  ‘राजस्थान पत्रिका’ के मार्केटिंग हेड (नॉर्थ) भी रह चुके हैं।

Last Modified:
Tuesday, 26 July, 2022
PANKAJ BELWARIAR

तमाम मीडिया संस्थानों में प्रमुख पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके सीनियर मीडिया प्रोफेशनल पंकज बेलवारियार (Pankaj Belwariar) ने अब नई दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने ‘पुण्य नगरी ग्रुप’ (श्री अंबिका प्रिंटर्स एंड पब्लिकेशंस) में बतौर कॉरपोरेट मार्केटिंग हेड (नेशनल) जॉइन किया है। इससे पहले पंकज बेलवारियार कुछ महीनों से ‘Supank Consultancy’ में बतौर कंसल्टेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

पंकज बेलवारियार को इस क्षेत्र में काम करने का करीब तीन दशक का अनुभव है। पूर्व में वह बतौर नेशनल मार्केटिंग हेड ‘प्रभात खबर’ में भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा वह  ‘राजस्थान पत्रिका’ के मार्केटिंग हेड (नॉर्थ) भी रह चुके हैं।

‘राजस्थान पत्रिका’ से पूर्व बेलवारियार ‘साकाल मीडिया ग्रुप’ में वाइस प्रेजिडेंट (सेल्स) के पद पर भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं। इससे पहले वह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (पटना), ‘अमर उजाला’ और ‘मलयाला मनोरमा’ के साथ भी काम कर चुके हैं। फरवरी 2003 से 2009 तक वह यहां रीजनल जनरल मैनेजर के पद पर और फिर इसके बाद मार्च 2015 तक यहां सीनियर रीजनल जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे थे।

वह अप्रैल 1998 से 2003 तक रीजनल मैनेजर के तौर पर ‘अमर उजाला’ से भी जुड़े रहे हैं। जून 1995 से अप्रैल 1998 के बीच उन्होंने मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर अपना कार्यभार संभाला था। ‘अमर उजाला’ में शामिल होने से पहले बेलवारियार ने अगस्त 1991 से जून 1995 तक ‘टाइम्स टाइम्स ऑफ इंडिया’ के पटना/लखनऊ एडिशन के साथ काम किया। शुरुआती दौर में वह लखनऊ में सीनियर ऑफिसर के पद पर कार्यरत रहे, लेकिन सितंबर, 1992 में प्रमोशन मिलने के बाद उन्होंने जून 1995 तक पटना में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली।

बता दें कि ‘पुण्य नगरी’ समूह महाराष्ट्र का जाना-माना पब्लिकेशन है। करीब 22 साल पहले मुरलीधर सिंगोट (अब दिवंगत) द्वारा ‘पुण्य नगरी’ नाम से इसकी स्थापना की गई थी। अब इस समूह के तहत महाराष्ट्र में विभिन्न पांच भाषाओं में पांच अखबारों का प्रकाशन किया जाता है, जिनकी रीडरशिप दस मिलियन से भी ज्यादा है।

मराठी भाषा में यह समूह ‘पुण्यनगरी’ (PUNYANAGARI), ‘मुंबई चौफेर’ (Mumbai Choufer) और ‘आपला वार्ताहार’ (Aapla Vartahar) नाम से अखबार पब्लिश करता है। इस समूह के तहत कन्नड़ भाषा में  ‘कर्नाटक मल्ला’ (Karnatak Malla) नाम से भी अखबार का प्रकाशन किया जाता है। वहीं हिंदी में यह समूह ‘यशोभूमि’ (YASHOBHUMI) नाम से अखबार निकालता है, जिसे मुंबई में ‘यूपी का दूत‘ के नाम से भी जाना जाता है।

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