जानिए, उतार-चढ़ावों के बीच कैसा रहा साल 2020 में प्रिंट मीडिया का ‘सफर’

साल भर तमाम उतार-चढ़ावों के बीच प्रिंट मीडिया एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है और तमाम अन्य बिजनेस की तरह नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 31 December, 2020
Last Modified:
Thursday, 31 December, 2020
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साल भर तमाम उतार-चढ़ावों के बीच प्रिंट मीडिया एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है और तमाम अन्य बिजनेस की तरह नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे समय में जब प्रिंट मीडिया पुनरुत्थान की ओर बढ़ रहा है, इस ग्रोथ में क्षेत्रीय समाचार पत्र अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

साल 2020 की शुरुआत तमाम अखबारों के लिए खराब रही, क्योंकि कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के कारण उनका सर्कुलेशन काफी बाधित हुआ। मुंबई और दिल्ली जैसे कई बड़े मार्केट्स में तमाम अखबार पब्लिशिंग रोकने पर मजबूर हो गए।  

इसका सीधा नतीजा विज्ञापन बिलों पर पड़ा और इसके परिणामस्वरूप इस सेक्टर को काफी नुकसान हुआ, जो 2019-20 की आखिरी तिमाही में ही नहीं बल्कि नए वित्त वर्ष की लगातार दो तिमाहियों में भी दिखाई दिया।

इस महामारी ने देश में पहले से ही परेशानियों से जूझ रही न्यूजपेपर इंडस्ट्री की समस्या और बढ़ा दी। सिर्फ छोटे ब्रैंड्स ही नहीं, बल्कि इस इंडस्ट्री के बड़े प्लेयर्स को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा।  

बिजनेस इंटेलीजेंस फर्म ‘टोफलर’ (Tofler)  द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) ने 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए 451.63 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्शाया, जबकि इससे पहले वित्तीय वर्ष में इसे 484.27 करोड़ रुपये का कुल लाभ हुआ था।

 कंपनी का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू भी  6,155.32 रुपये से घटकर 5,367.88 करोड़ रुपये रह गया। पब्लिकेशंस की बिक्री से मिलने वाले रेवेन्यू में भी गिरावट आई और यह 656.09 करोड़ रुपये से घटकर 629.96 करोड़ रुपये पर आ गया। सर्कुलेशन में कमी और विज्ञापनदाताओं की गैरमौजूदगी के कारण न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए मार्केट काफी समय तक सूखा रहा। लेकिन प्रिंट ने मजबूती से लड़ाई की और वापसी की।  

अप्रैल की बात करें तो स्थिति को देखते हुए तमाम अखबारों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू की, इसके साथ ही जब सरकार ने अखबारों को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में शामिल किया तो प्रिंट पब्लिकेशंस को फिर मजबूती मिली। दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, ईनाडु, हिन्दुस्तान, पत्रिका ग्रुप, अमर उजाला, डेली थांथी, साक्षी, डेक्कन हेराल्ड, हिन्दुस्तान टाइम्स और दिव्य भास्कर समेत तमाम अखबारों ने अप्रैल के दूसरे हफ्ते में संयुक्त रूप से एक स्टेटमेंट जारी कर बताया कि फरवरी के आधार पर अखबारों का वितरण किस तरह 75 से 90 प्रतिशत तक स्थिर हो गया। अगले महीने ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे’ (IRS) के आंकड़े आए। इसमें रीजनल अखबारों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा और उन्होंने इस सेक्टर की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई।  

मई में जारी इंडियन रीडरशिप सर्वे की रिपोर्ट 2019 की पिछली तीन तिमाही यानी पहली (Q1), दूसरी (Q2) और तीसरी तिमाही (Q3) के साथ चौथी तिमाही के ताजा आंकड़ों के औसत पर आधारित था। इससे पता चला कि विभिन्न केंद्रों पर रीडरशिप में कमी आई है। हालांकि, गहनता से अध्ययन करने पर स्पष्ट हुआ कि मेट्रो शहरों के बाहर रीजनल एरिया में पब्लिशर्स की ग्रोथ ज्यादा हुई।  

कुछ प्रादेशिक अखबारों की टोटल रीडरशिप (total readership) में बढ़ोतरी देखी गई, जबकि कुछ की एवरेज इश्यू रीडरशिप (average issue readership) में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, देश के कुछ लोकप्रिय ब्रैंड्स जैसे अमर उजाला, लोकमत, दैनिक थांथी ने दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की।

जुलाई में सरकार ने सरकारी विज्ञापनों के लिए नई गाइडलाइंस जारी कीं। प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति 2020 जिसे सरकारी विज्ञापनों की व्यापक संभव कवरेज के लिए तैयार किया गया था, भारतीय भाषा के दैनिक समाचार पत्रों के लिए फायदेमंद साबित हुई। क्योंकि इसमें विज्ञापन स्पेस (ad space) भी बढ़ाकर 50 से 80 प्रतिशत कर दिया गया। इसके अलावा नई पॉलिसी में प्रिंट में विज्ञापन का संतुलित डिस्ट्रीब्यूशन तय किया गया।   

एक अगस्त 2020 से प्रभावी इन गाइडलाइंस में कहा गया है कि सरकार के सभी मंत्रालय या विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त निकाय और सोसायटीज, केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सभी शैक्षणिक संस्थान अपने डिस्पले विज्ञापनों को ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ के माध्यम से देंगे। इन गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि विज्ञापनों को जारी करते समय बीओसी सर्कुलेशन, भाषा, कवरेज क्षेत्र और पाठकों जैसे कारकों की विभिन्न श्रेणियों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करेगी।

जुलाई में प्रिंट की ओर एडवर्टाइजर्स फिर वापस आना शुरू हुए, जिसकी इंडस्ट्री को काफी जरूरत थी। हालांकि, रिकवरी की रफ्तार टियर-दो और टियर-तीन शहरों में अधिक थी। टैम एडेक्स (Tam AdEx) के डाटा के अनुसार, प्रिंट पर वापसी करने वाले विज्ञापनदाताओं में 75 प्रतिशत हिंदी और अंग्रेजी भाषा के थे।  

राज्यों की हिस्सेदारी की बात करें तो 17 प्रतिशत ऐड वॉल्यूम शेयर के साथ उत्तर प्रदेश इस लिस्ट में सबसे ऊपर था, इसके बाद 10 प्रतिशत शेयर के साथ महाराष्ट्र और इसके बाद कर्नाटक व तमिलनाडु का नंबर था।  

टैम डाटा के अनुसार, अप्रैल से जून की अवधि में 189 कैटेगरीज में 28000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स और 31300 से ज्यादा ब्रैंड्स ने खासतौर पर प्रिंट के लिए विज्ञापन दिया। एडवर्टाइजर्स की वापसी के कारण 13 अगस्त को दैनिक भास्कर ने अपने भोपाल एडिशन को 72 पेज का निकाला। इस दौरान दैनिक भास्कर में जिन सेक्टर्स के विज्ञापन दिए गए, उनमें रियल एस्टेट, इलेक्ट्रॉनिक ड्यूरेबल्स, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी शामिल रहे। इस पब्लिकेशन को सरकारी विज्ञापन भी प्राप्त हुए। अगस्त के पहले सप्ताह से टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे तमाम प्रमुख मार्केट्स में 30-40 से ज्यादा पेजों का अखबार पब्लिश करना शुरू कर दिया।  

पिच मैडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट 2020 के मिड ईयर रिव्यू के अनुसार, विज्ञापन देने वालों में एफएमसीजी, ऑटो और एजुकेशन जैसी कैटेगरीज आगे रहीं और वर्ष 2020 की पहली छमाही में प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में इनका योगदान करीब 45 प्रतिशत रहा, जो वर्ष 2019 में 38 प्रतिशत था।   

प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में एजुकेशन सेक्टर 16 प्रतिशत शेयर के साथ एफएमसीजी सेक्टर से आगे निकल गया। एफएमसीजी सेक्टर 15 प्रतिशत शेयर के साथ दूसरे स्थान पर आ गया। प्रिंट पर विज्ञापन खर्च के मामले में ऑटो इंडस्ट्री 14 प्रतिशत शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रही।

फेस्टिव सीजन प्रिंट के लिए काफी अच्छा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान टेलिविजन न्यूज को लेकर चल रहीं तमाम तरह की बहस ने भी प्रिंट को लाभ पहुंचाने में और मदद की।  टैम एडेक्स डाटा के अनुसार, अन्य किसी ट्रेडिशनल मीडिया की तुलना में प्रिंट मीडिया को वर्ष 2019 और वर्ष 2020 दोनों में अक्टूबर से नवंबर के बीच काफी ज्यादा एडवर्टाइजर्स मिले। टीवी में इस साल अक्टूबर से नवंबर के बीच जहां 3400 एडवर्टाइजर्स मिले और रेडियो में इन एडवर्टाइजर्स की संख्या 2800 से कम थी, वहीं इसी अवधि में प्रिंट को 30900 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स मिले।

हालांकि, साल के अंत से प्रिंट का रेवेन्यू बढ़ना शुरू हुआ है, लेकिन इंडस्ट्री के लिए इससे बुरा समय नहीं हो सकता, जब नुकसान के चलते उन्हें काफी कॉस्ट कटिंग करनी पड़ी। इसके परिणामस्वरूप कई लोगों को नौकरी से हटाया गया अथवा उनकी सैलरी में कटौती करनी पड़ी।

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नहीं रहे जागरण ग्रुप के चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्ता, नेताओं-पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि

‘जागरण समूह’ (Jagran Group) के चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्ता का शुक्रवार को निधन हो गया है

Last Modified:
Friday, 15 October, 2021
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‘जागरण समूह’ (Jagran Group) के चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्ता का शुक्रवार को निधन हो गया है। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। योगेंद्र मोहन गुप्ता की अंत्येष्टि शनिवार को कानपुर में भैरवघाट में होगी।

दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह को ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ ही कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी उनका काफी योगदान रहा। लक्ष्मीदेवी ललित कला अकादमी की स्थापना का श्रेय उन्हें ही जाता है। राष्ट्रीय के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी साहित्य और कला प्रेमियों को उन्होंने हमेशा ही बढ़ावा दिया। 

योगेंद्र मोहन गुप्ता एक कवि भी थे। उनकी कई पुस्तकें भी प्रकाशित हुईं। पत्रकारिता में एडवर्टाइजिंग को उन्होंने नई विधा दी। योगेन्द्र मोहन के निधन पर केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम राजनीतिक हस्तियों, पत्रकारों, साहित्यकारों और उद्योगपतियों ने उन्हें श्र्द्धांजलि दी है।

 

 

 

 

 

 

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मीडिया में आ रहे बड़े बदलावों से रूबरू कराएगा BW Businessworld का यह अंक

बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) के आगामी अंक में इसके बारे में और विस्तार से जानकारी दी गई है और देश में मीडियाटेक्नोलॉजी पर फोकस किया गया है।

Last Modified:
Friday, 15 October, 2021
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मीडिया के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी की काफी अहम भूमिका है, लेकिन इसका असली फायदा सिर्फ वही लोग उठा सकते हैं, जो टेक्नोलॉजी को कंटेंट, कल्चर, कॉमर्स, अंतरक्रियाशीलता (interactivity) और मीडियाटेक के इस युग में प्रमुख प्लेटफॉर्म के संयोजन के रूप में बेहतर तरीके से इसका इस्तेमाल करना जानते हों। बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) का अगला अंक इसी स्ट्रैटेजी पर केंद्रित है।

वर्ष 2020 की बात करें तो भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर ने $877.8 मिलियन डॉलर का निवेश जुटाया। यह इस लिहाज से काफी उल्लेखनीय कहा जा सकता है कि महामारी के कारण इस सेक्टर को इस दौरान काफी विरोधाभासी स्थितियों का सामना करना पड़ा। एक तरफ तो कुछ बड़े मीडिया संस्थानों को अप्रत्याशित मंदी का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ ने काफी तेजी से सफलता का सफर तय किया, अन्यथा इस स्थिति को हासिल करने में उन्हें काफी वर्षों लग जाते। भारत में इस तरह के मीडिया बिजनेस के आगे बढ़ने का एक ही कारण था कि वे सभी टेक्नोलॉजी केंद्रित मीडिया प्लेटफॉर्म्स थे।

कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया तो कुछ में लाखों का निवेश हुआ। निवेश हासिल करने वालों में ‘मोहल्ला टेक’ (Mohalla Tech) कंपनी के स्वामित्व वाला शॉर्ट वीडियो ऐप ‘Moj‘ और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्स ‘शेयरचैट‘ (ShareChat), ‘डेली हंट‘ (Daily Hunt) का शॉर्ट वीडियो ऐप ‘जोश’ (Josh) और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू किया गया ‘कू’ (Koo) आदि शामिल हैं। भारत में डिजिटल का उदय देश के लिए अपना घरेलू मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने के अवसर को और मजबूती प्रदान कर रहा है। जो इस फील्ड में अपना स्थान बनाने की प्रतिस्पर्धा में हैं, वे सोशल, कॉमर्स, कंटेंट और कल्चर को भी इसमें शामिल कर रहे हैं, जिसकी भारतीय एंटरप्रिन्योर्स को अच्छी समझ है। इस स्ट्रैटेजी से वे अब तक सफल हो रहे हैं। 

देश की सबसे पुरानी बिजनेस मैगजीन ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BW Businessworld) के आगामी अंक (issue) में इसके बारे में और विस्तार से जानकारी दी गई है और देश में मीडियाटेक्नोलॉजी पर फोकस किया गया है। प्रसिद्ध कहावत है कि 'कंटेंट इज किंग बट डिस्ट्रीब्यूशन इज गॉड'  (Content is King but Distribution is God), लेकिन इस अंक में इस बात पर भी रोशनी डाली गई है कि कैसे इस तरह की विचारधारा एक ऐसी दुनिया में बदल गई है जहां टेलीविजन को व्यक्तिगत स्क्रीन (personal screens) में बदला जा रहा है। कंटेंट की प्राथमिकताओं की बात करें तो आजकल कंज्यूमर्स के लिए पसंदीदा भाषाएं और वीडियो पहली पसंद बन रही है, फिर चाहे वे ऑनलाइन शॉपिंग ही क्यों न कर रहे हों।

इस बारे में ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा का कहना है, ‘ मीडिया ही ऑरिजनल ‘डायरेक्ट टू कस्टमर’ (D2C) है। यहीं पर दुनिया के सबसे ज्यादा खर्च करने वालों को अपने कंज्यूमर्स तक पहुंचने के लिए अपना पैसा लगाना पड़ा। समय के साथ, टेक्नोलॉजी ने तमाम बैरियर्स को तोड़ दिए हैं और कई संयोजन (combinations) बनाए हैं, लेकिन मीडिया की ताकत केवल बढ़ी है। इस क्षेत्र ने उन विघटनकर्ताओं (disruptors) का उदय देखा है जिन्होंने नए मॉडल पेश किए हैं। मार्केट के गैप को दूर करने के अवसर पैदा किए हैं और इस प्रक्रिया में मीडिया की परिभाषा पहले से विकसित हुई है।’

गेमिंग और सोशल कॉमर्स आज मीडिया का उतना ही हिस्सा हैं, जितना कि ‘ओवर द टॉप’(ओटीटी) या शॉर्ट वीडियो कंटेंट प्लेटफॉर्म। यह व्यापक स्पेक्ट्रम भारत को, एक प्रड्यूसर और कंज्यूमर दोनों के रूप में कंटेंट का दिग्गज बनाता है और इसे आगे बढ़ाता है।

मैगजीन के इस अंक में देश के टॉप मीडियाटेक स्टार्ट-अप्स और प्रतिष्ठित मीडिया घरानों के विचारों को शामिल किया जाएगा, जिनके पास भविष्य के अनुकूल खुद को ढालने के लिए टेक्नोलॉजी है। इस अंक में इंडस्ट्री के विचारों, नए मीडिया मुद्रीकरण के रुझानों और मीडिया परिदृश्य में बड़े बदलावों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा इस अंक में इस बात पर भी बारीकी से प्रकाश डाला जाएगा कि वर्तमान में और महामारी के बाद के भारत में मीडिया टेक्नोलॉजी कैसे एक बहुत बड़ा और अच्छा अवसर है।

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वीर सावरकर के व्यक्तित्व को सही मायनों में रेखांकित करती है ये किताब: डॉ. मोहन भागवत

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की जिंदगी के अनछुए पन्नों से रूबरू कराने के लिए वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक उदय माहूरकर व चिरायु पंडित ने एक किताब लिखी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 October, 2021
Last Modified:
Tuesday, 12 October, 2021
Veer Savarkar Book Launching

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की जिंदगी के अनछुए पन्नों से रूबरू कराने के लिए वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक उदय माहूरकर (Uday Mahurkar) व चिरायु पंडित ने एक किताब लिखी है। ‘वीर सावरकर- द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन’ शीर्षक से लिखी गई इस किताब की लॉन्चिंग 12 अक्टूबर की शाम करीब साढ़े चार बजे नई दिल्ली स्थित ‘डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर‘ में की गई।

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुए एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ‘ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इस किताब को लॉन्च किया। बता दें कि यह किताब ‘रूपा पब्लिकेशंस इंडिया’ की ओर से प्रकाशित की गई है।

कार्यक्रम में किताब के लेखक उदय माहूरकर ने कहा, ‘यह किताब क्रांतिकारी सावरकर के बारे में कम, देशभक्त सावरकर के बारे में अधिक बातें कहती है। उन्होंने हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना की, जिसमें उन्होंने साफ़ कहा था कि सभी धर्मों को स्वतंत्र रूप से रहने की इजाजत है, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अल्पसंख्यक किसी परेशानी का सामना करता है तो सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।’

वहीं, किताब के सह लेखक चिरायु पंडित ने कहा, ‘वीर सावरकर का जीवन स्वतंत्रता संग्राम की जीती-जागती गाथा रहा है, वह देशभक्ति की एक जीवंत मिसाल हैं। इस किताब का सह-लेखक बनाने के लिए मैं माहूरकर जी का आजीवन ऋणी रहूंगा।’

इस दौरान केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘वीर सावरकर जैसे नायक के बारे में लिखना-पढ़ना कोई आसान काम नहीं है। सावरकर के जीवन के इतने आयाम हैं कि उन्हें एक किताब में समाहित करना चुनौती भरा काम है, जिसे इस पुस्तक के लेखकों ने बाखूबी निभाया है। मैं उदय माहूरकर व चिरायु पंडित को धन्यवाद देता हूं कि पुस्तक के बारे में सही जानकारी लोगों को मिल पाएगी। अटल जी ने भी सावरकर को तेज, त्याग और तप की प्रतिमूर्ति कहा था।’

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मोहन भागवत ने कहा, ‘आज वीर सावरकर के बारे में सही जानकारी का अभाव है, ये हमें स्वीकार करना होगा। आज सावरकर के जिन सिद्धांतों को देश की सबसे अधिक आवश्यकता है, उससे हमें रूबरू करवाने का काम ये पुस्तक करती है। जब इस देश को आजादी मिली, उसके बाद सावरकर को बदनाम करने की मुहिम चली और बड़ी तेजी से चली। लेकिन यह सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, अब अगला लक्ष्य विवेकानंद, दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद हैं। भारत की जो वास्तविक राष्ट्रीयता है, वो इन महापुरुषों में समाहित है। इन्हीं तीन लोगों के विचारों के कारण सावरकर इतने बड़े देशभक्त बने।’

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अखबार के सर्कुलेशन में गड़बड़ी कर सरकार से ऐंठे विज्ञापन, CBI ने दर्ज किया केस

अखबार के सर्कुलेशन के आंकड़ों में धोखाधड़ी कर सरकार से विज्ञापन ऐंठने का मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है।

Last Modified:
Friday, 08 October, 2021
Newspaper

अखबार के सर्कुलेशन के आंकड़ों में धोखाधड़ी कर सरकार से विज्ञापन ऐंठने का मामला मध्य प्रदेश से सामने आया है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोपी तीन अखबार मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इनमें से दो सिवनी और एक जबलपुर का निवासी है।

सीबीआई की वेबसाइट पर अपलोड की गयी प्राथमिकी के अनुसार, तीन अखबारों के प्रकाशकों/ मालिकों के खिलाफ चार अक्टूबर को जबलपुर में मामला दर्ज किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले में शिकायत हिमांशु कौशल नाम के एक शख्स ने 13 अगस्त 2021 को सीबीआई के जबलपुर कार्यालय में की थी। अपनी शिकायत में हिमांशु ने इन अखबार मालिकों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी और धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए थे।

कौशल ने अपनी शिकायत में कहा कि अखबारों के प्रसार के संबंध में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की फर्जी रिपोर्ट के आधार पर इन अखबारों को भारत सरकार की एजेंसी विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) पिछले कई वर्षों से लाखों रुपए के विज्ञापन मिल रहे थे। डीएवीपी अब आउटरीच एंड कम्युनिकेशन ब्यूरो (बीओसी) के तौर पर जाना जाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राथमिकी में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ये तीनों दैनिक समाचार पत्र छोटी श्रेणी के समाचार पत्र थे लेकिन उन्होंने अपनी फर्जी प्रसार संख्या दिखाकर मध्यम श्रेणी में पंजीकरण करा लिया था। इसके पीछे कारण यह है कि छोटे और मध्यम श्रेणी के समाचार पत्रों के लिए विज्ञापन दरें अलग-अलग हैं और मध्यम श्रेणी के लिए बजट का प्रावधान लगभग दोगुना है।

वहीं, सीबीआई ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया आरोपी व्यक्तियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों का असली दस्तावेजों के तौर पर इस्तेमाल करने और आपराधिक कदाचार का खुलासा हुआ है। इसलिए आरोपियों के खिलाफ यह प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

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पत्रकार की गिरफ्तारी से नाराज अखबार ने बंद की अपनी एक शाखा

गोलीबारी की घटना में विपक्ष के एक समर्थक और एक सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई थी, जिसके बाद अखबार ने इस घटना के संबंध में एक खबर प्रकाशित की थी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 07 October, 2021
Last Modified:
Thursday, 07 October, 2021
newspaper

रूस के लोकप्रिय अखबार ‘कोम्सोमोलस्काया’ ने बेलारूस में अपनी शाखा को बंद कर दी है। दरअसल इसकी वजह उसके एक स्थानीय पत्रकार की गिरफ्तारी है, जिसने बीते मंगलवार को हुई गोलीबारी की एक घटना से संबंधित खबर प्रकाशित की थी।

बता दें कि गोलीबारी की घटना में विपक्ष के एक समर्थक और एक सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई थी, जिसके बाद अखबार ने इस घटना के संबंध में एक खबर प्रकाशित की थी। इसे लेकर बेलारूस के सूचना मंत्रालय ने गत बुधवार को अखबार की बेलारूस इकाई की वेबसाइट अवरुद्ध कर दी थी, जिसे रोजाना लगभग 20 हजार लोग देखते थे। इसके दो दिन बाद इसके पत्रकार हीनांद्ज मैजहेयका की गिरफ्तारी की खबर मिली।

और अब रूसी अखबार ने यह घोषणा कर दी कि उसने बेलारूस में अपनी शाखा को बंद कर दिया है। अखबार ने कहा कि पिछले साल में, खासकर पिछले एक सप्ताह में जो परिस्थितियां बनी हैं, उसके चलते उसे अपनी बेलारूस इकाई को बंद करने की घोषणा करनी पड़ी है।

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वीर सावरकर की जिंदगी के अनछुए पन्नों से रूबरू कराएगी ये किताब

12 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ‘ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत इस किताब को लॉन्च करेंगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 30 September, 2021
Last Modified:
Thursday, 30 September, 2021
Veer Savarkar Book

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की जिंदगी के अनछुए पन्नों से रूबरू कराने के लिए वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक उदय माहूरकर (Uday Mahurkar) व चिरायु पंडित ने एक किताब लिखी है। ‘वीर सावरकर- द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन’ शीर्षक से लिखी गई इस किताब  की लॉन्चिंग 12 अक्टूबर 2021 को की जाएगी।

यह किताब ‘रूपा पब्लिकेशंस इंडिया’ की ओर से प्रकाशित की गई है। इस किताब को नई दिल्ली स्थित ‘डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर‘ में 12 अक्टूबर की शाम करीब साढ़े चार बजे आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ‘ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत लॉन्च करेंगे। केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।

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RSS से जुड़ी मैगजीन ने की amazon की तीखी आलोचना, लगाया ये गंभीर आरोप

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों पर चलने वाली मैगजीन 'पांचजन्य' ने एक अमेरिकी कंपनी की तीखी आलोचना की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 28 September, 2021
Last Modified:
Tuesday, 28 September, 2021
paanchjanya5487

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों पर चलने वाली मैगजीन 'पांचजन्य' ने एक अमेरिकी कंपनी की तीखी आलोचना की है। 'पांचजन्य' ने अमेरिका की ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन (Amazon) को 'ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0' करार दिया है।

अपनी मैगजीन के ताजा संस्करण में 'पांचजन्य' ने एमेजॉन पर लेख लिखते हुए उसकी कड़ी आलोचना की है। लेख में लिखा है कि कंपनी ने अनुकूल सरकारी नीतियों के लिए रिश्वत के तौर पर करोड़ों रुपए का भुगतान किया है।

पांचजन्य ने 'ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0' के नाम से अपने लेख लिखा, ‘भारत पर 18वीं शताब्दी में कब्जा करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने जो कुछ किया, वही आज एमेजॉन की गतिविधियों में दिखाई देता है।’

मैगजीन ने यह दावा किया कि एमेजॉन भारतीय बाजार में अपना एकाधिकार स्थापित करना चाहता है और ऐसा करने के लिए ई-कॉमर्स कंपनी ने भारतीय नागरिकों की आर्थिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कब्जा करने के लिए पहल करना शुरू कर दिया है।

लेख में एमेजॉन के वीडियो मंच की भी कड़ी आलोचना की गयी है। लेख में लिखा गया है  कि वह अपने मंच पर ऐसी फिल्में और वेब सीरीज जारी कर रहा है, जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं।  बता दें कि मैगजीन का यह ताजा अंक 3 अक्टूबर को बाजार में आएगा।

वैसे अभी ये पता नहीं कि एमेजॉन ने रिश्वत कहां, कब और किसे दी। बस इतनी जानकारी है कि एमेजॉन लीगल फीस के रूप में 8500 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। ये सोचने वाली बात है कि ये पैसा आखिर जा कहां रहा है? कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ऐसा लगता है कि ये पूरी प्रणाली रिश्वत के लिए काम करती है। हालांकि भारत सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा था।
पांचजन्य में एमेजॉन के खिलाफ छपे लेख को लेकर कांग्रेस ने कहा कि इस ई-कॉमर्स कंपनी के खिलाफ लगे रिश्वतखोरी के आरोप गंभीर हैं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि एमेजॉन के बारे में आरएसएस का कुछ भी कहना अप्रासंगिक है, क्योंकि हाल के दिनों में उसके दोहरे मापदंड सामने आए हैं।

पवन खेड़ा ने कहा, ‘आरएसएस का कुछ भी कहना अप्रासंगिक है, लेकिन एमेजॉन का मुद्दा जो मेरे वरिष्ठ सहयोगी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी उठाया था, वो गंभीर है और इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।’

बता दें कि कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी पिछले दिनों अरोप लगाया था कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने पिछले दो साल में भारत में कानूनी शुल्क के नाम पर 8,546 करोड़ रुपए का भुगतान किया। अब सामने आया है कि यह पैसा तथाकथित रिश्वत के तौर पर दिया गया।    

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अपनी एडिटोरियल टीम को और मजबूती देने के लिए ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिया बड़ा फैसला

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लिया है, जिसमें बताया गया कि वह अपनी एडिटोरिलय टीम का विस्तार करेगी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 September, 2021
Last Modified:
Wednesday, 22 September, 2021
WashingtonPost8756

अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लिया है, जिसमें बताया गया कि वह अपनी एडिटोरिलय टीम का विस्तार करेगी। मैनेजमेंट के इस फैसले के तहत वह अपनी टीम में 41 नए एडिटर्स की नियुक्ति करेगा। इनमें से दो एडिटर्स पेपर के मास्टहेड पर काम करेंगे।

सोमवार को अपने डिजिटल पोर्टल से इस बात की घोषणा की है। इसमें एग्जिक्यूटिव एडिटर सैली बुजबी (Sally Buzbee) और अखबार की बाकी लीडरशिप टीम ने कहा कि 41 एडिटर्स को नियुक्त करने से समय पर ब्रेकिंग न्यूज देने और खोजी कार्यों (investigative work) को करने की क्षमता बढ़ेगी। विजुअल रिपोर्ट्स और बेहतर होगी, जो दर्शकों को अपनी ओर खीच सकेंगी। ऐसे विषयों की कवरेज पर जोर होगा, जो युवाओं और अलग-अलग तरह के बहुत से पाठकों को जोड़ सकेंगी और साथ ही ऐसी नई चीजें विकसित की जा सकेंगी, जो डिजिटल पत्रकारिता के एक नए युग को परिभाषित कर सके।

इस मेल में यह भी बताया गया है कि इन नए एडिटर्स में दो एडिटर्स ऐसे होंगे जो न्यूजरूम की पॉलिसीज को रिफाइन करेंगे और उसे मेनटेन रखेंगे। वहीं एक रिक्रूटिंग एडिटर दो अन्य एडिटर्स के साथ मिलकर न्यूजरूम में चलने वाली भर्ती प्रक्रिया को संभालेंगे और उसे आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।

बुजबी ने कहा कि यह विस्तार नए सिरे को प्रदर्शित करता है कि वॉशिंगटन पोस्ट एक मजबूत न्यूज ऑर्गनाइजेशन है, जिसकी असीम महत्वाकांक्षाएं हैं, जिन्हें पूरा करने की क्षमता भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह आपकी सफलता है जो इस तरह से न्यूजरूम को मजबूत करने में सक्षम बनाती है। उम्मीद करते हैं कि आगे आने वाले महत्वपूर्ण कार्यो में भी आपके साथ जुड़कर हम अपने आप को गौरवान्वित महसूस करें।

बता दें कि सैली बुजबी वॉशिंगटन पोस्ट की पहली एग्जिक्यूटिव एडिटर हैं, जिन्हें इस साल मई में नियुक्त किया गया था।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में, वॉशिंगटन पोस्ट ने यह घोषणा की थी कि वह 2021 में 150 से अधिक पत्रकारों की नियुक्ति करेगा, जिससे उसकी कुल कर्मचारियों की संख्या 1000 से अधिक हो जाएगी।

सैली बुजबी व  बाकी लीडरशिप टीम की ये घोषणा आप यहां पढ़ सकते हैं-

The Washington Post announces the addition of 41 editing roles, including 2 masthead positions

Dear Colleagues,

We are delighted to announce a major expansion to accelerate our transformation into a fully 24/7 news organization and strengthen the leadership of the newsroom. The addition of 41 editing positions will grow our capacity to produce timely breaking news, revelatory enterprise and definitive investigative work; create visually rich stories that our audiences find compelling; cover topics that resonate with younger, more diverse readers; and develop innovations that will define a new era of digital journalism. The expansion will allow us to create a greater number of career paths across the newsroom and increase the number of journalists of color in editing roles.

We will add two new deputy managing editors to the masthead to work alongside Scott Vance and Barbara Vobejda in running the daily report, ensuring that a senior editor is in place to direct news coverage across our many platforms from 7 a.m. ET (when our new hub in London hands off to Washington) until late evening (when Washington hands off to Seoul). One DME will oversee the General Assignment, Morning Mix and Live Desk teams and serve as the day-to-day architect of our live-updates coverage. All four DMEs will work with other senior editors to ensure the quality and ambition of our enterprise offerings.

The expansion will create eight new positions for assignment editors – in Photo, National, Metro, Investigations, Design and Business – to strengthen coverage and reinforce colleagues who’ve been taxed by the unrelenting news cycle. We will also establish eight new positions for assistant editors, most of whom will work closely with assignment editors in overseeing coverage. We anticipate that these positions will create opportunities for people from many corners of the newsroom, with varied skills and backgrounds, to gain expertise in line editing and guiding a team of journalists. We will grow the MPE desk by hiring five multi-platform editors, in part to expand that team’s role in publishing on our digital platforms. We will create eight positions for breaking-news and weekend editors (including one supervising producer) in Video, Photo, National, Features and Business. The role of projects editor has become vital in fostering the collaboration and strategic thinking needed to execute our most ambitious journalism, so we will add two more of these positions in Design.

The initiative will establish three additional visual enterprise editors – one in Business, one who will focus on politics and one who will work with both the Health & Science and Climate & Environment teams – building on the success we have seen with this role in Foreign. That experiment has shown that adding a senior visual journalist to help lead coverage in a department can have a transformative effect.

The expansion will enable us to experiment further. We will establish a new high-level position in the Business department: audience strategy editor. Reporting to the department head, this journalist will help us deliver our coverage of business and tech in more innovative and strategic ways. We have often stressed the need for “durable” storytelling – FAQs, explainers and timelines that help readers get up to speed and stay up to date. This explanatory journalism is critical to our future, and we will create a position for an editor focused on this work in the Health & Science team as well as one for an editor who will be part of the Audience team and act as a resource throughout the newsroom.

This major investment in the newsroom will also fund new roles to carry out functions essential to a growing news organization. First, we will create two positions for standards editors who will refine and maintain newsroom policies, working closely and collaboratively with all our journalists to promote best practices and ensure that our work meets the high expectations of our audiences. And we will establish two roles devoted to recruiting – a senior editor and an assistant editor – to help us systematize the way we recruit, hire and onboard staffers. These roles are critical to the fulfillment of our strong commitment to diversity.

This expansion demonstrates anew that The Washington Post is an ascendant news organization, with boundless ambitions and a growing capacity to meet them. We hope you’ll join us in taking a moment to reflect on all we have accomplished – it is your success that enables the company to strengthen the newsroom in this way. We feel privileged to join you in the important work that lies ahead.

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दैनिक भास्कर ने बिहार में ऐसे लोगों को किया सम्मानित

दैनिक भास्कर के कार्यक्रम में ऐसे लोगों को राज्य के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गौरव सम्मान से सम्मानित किया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 20 September, 2021
Last Modified:
Monday, 20 September, 2021
dainikBhaskar5487

दैनिक भास्कर ने बिहार में उन लोगों को स्मृति-चिह्न और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया है, जिन लोगों ने कोरोना काल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में एक्टिव रहकर राज्य का मान बढ़ाया है। ऐसे लोगों को राज्य के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गौरव सम्मान से सम्मानित किया।

कार्यक्रम का आयोजन पटना के होटल मौर्या में किया गया। इस अवसर पर बिहार-झारखंड-महाराष्ट्र के सीईओ निशिथ जैन, बिहार-झारखंड के सौरेन्द्र चटर्जी, स्टेट एडिटर सतीश कुमार, गवर्नमेंट वर्टिकल हेट अभय सिन्हा मौजूद रहे। वहीं, तारकिशोर प्रसाद और मंगल पांडेय को अंग वस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

इस दौरान उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि हम सब खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। सामाजिक सरोकारों से जुड़े वैसे लोगों का सम्मान किया जा रहा है, जिन्होंने जान की बाजी लगाकर कोरोना संक्रमण के कालखंड में लोगों की मदद की। विकसित राष्ट्र भी जब परेशानी में थे, उस समय हमारे चिकित्सक, गैर चिकित्सकीय कार्य में लगे लोग, समाज सेवा मे लगे लोग और दैनिक भास्कर ने बड़ी भूमिका निभायी। जब भी देश संक्रमण काल से गुजरा है, बिहार ने बिहारीपन दिखाया है और हमेशा खड़ा रहा है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिन पर बिहार पूरे देश में कोरोना टीकाकरण में एक नंबर पर रहा। 33 लाख से अधिक टीकाकरण हुआ। स्वास्थ्य मंत्री के नाते जब मेरा कानों में यह खबर आती थी कि समाज में टीकाकरण का उत्साहजनक माहौल नहीं बन पा रहा है तो समस्या दिखाई पड़ने लगी, यह भी खबर आती थी कि टीका तो उपलब्ध है पर लोग सेंटर पर नहीं आ रहे हैं। इसके बाद हमलोगों ने जागरुकता अभियान चलाया। जन जागरण के अभियान में प्रबुद्ध जनों का बड़ा योगदान रहा। एक अच्छी खबर आपको यह देना चाहता हूं कि आज बिहार के अंदर 5 करोड़ टीकाकरण के आंकड़े को हम प्राप्त कर लेंगे। चार करोड़ 99 लाख 55 हजार से आगे बढ़ चुके हैं।

सोशल एक्टिविस्ट पद्मश्री सुधा वर्गीज, लेखिका पद्मश्री उषा किरण खान, महावीर मंदिर के सचिव आचार्य किशोर कुणाल, सोशल एक्टिविस्ट विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा, सोशल एक्टिविस्ट मुकेश हिसारिया, कार्डियो सर्जन व नवरस स्कूल ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के फाउंडर डॉ. अजीत प्रधान, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष व शिक्षाविद् डॉ. अनिल सुलभ, सोशल एक्टिविस्ट विजय कुमार, सोशल एक्टिविस्ट ऑक्सीजन मैन गौरव राय, लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत, डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक व सीईओ शरत विवेक सागर, इन्वेंशन मैन व हॉकी कोच योगेश कुमार, सोशल एक्टिविस्ट वीणा गुप्ता, सोशल एक्टिविस्ट अमृता सिंहा, सोशल एक्टिविस्ट पल्लवी सिंहा, एनवायरमेंट एक्टिविस्ट राजेश कुमार सुमन, सोशल एक्टिविस्ट विवेक विश्वास आदि सम्मानित किए गए।

इनके अलावा डॉ. दिव्यांशु शर्मा, डॉ. अयूब आलम, डॉ. विजयेश कुमार, डॉ. एच.एन. भारद्वाज, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. अमित कुमार दास, डॉ. तेज नारायण, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. डी. के शर्मा, डॉ. प्रभात रंजन, डॉ. कुमार राजेश रंजन, डॉ. संजीत कुमार, डॉ. धीरज कुमार, डॉ. पीयूष अग्रवाल, डॉ. प्रभाष सिंह, कुमार दिव्यांशु, पीयूष केशव, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, रुपेश कुमार, आनंद राज , डॉ. उमेश प्रसाद गुप्ता, सुमित कुमार, सौरभ सिंह, डॉ. सुजीत सिंह परमार, एस. के मंडल, अविनाश कुमार, डॉ. विजय पांडेय, डॉ. मधेश्वर सिंह, संजीव मिश्रा, दीनानाथ कुमार, इंजीनियर ब्रजेश्वर ठाकुर, रितेश कुमार झा, राहुल कुमार सिंह, संजीव श्रीवास्तव, नीरज कुमार, मोहन के. गुप्ता, अरुण के. सिंह, कृष्ण मोहन मिश्रा, परमहंस यादव, सुनीता देवी, कीनू कुमार, रोहन मेहता, आशुतोष कुमार द्विवेदी, मो. रेयाज आलम, नरेन्द्र कुमार, मनीष चंद्रा, प्रिंस कुमार, शशि रंजन, रणविजय सिंह, रंजीत रंजन, धर्मेन्द्र यादव सम्मानित किए गए।

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स्थानीय संपादक निर्मलेंदु साहा ने ‘दैनिक भास्कर’ से ली विदाई, आगामी सफर पर की बात

हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ नोएडा के स्थानीय संपादक निर्मलेंदु साहा ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 31 अगस्त, 2021 इस समूह में उनका आखिरी दिन था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 17 September, 2021
Last Modified:
Friday, 17 September, 2021
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हिंदी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ नोएडा के स्थानीय संपादक निर्मलेंदु साहा ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 31 अगस्त, 2021 इस समूह में उनका आखिरी दिन था। वे पिछले डेढ़ साल से दैनिक भास्कर समूह के साथ जुड़े हुए थे।

समाचार4मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल का उनका अनुभव बेहद ही अच्छा रहा। उन्हें अपने 45 साल के करियर में बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने कहा कि हर इंसान पत्रकारिता के स्कूल से ही कुछ न कुछ सीखता है, मैंने भी सीखा।

अपने आगामी करियर के बारे में बताते हुए कहा कि वे फिलहाल भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को हजारों नगमे देने वाले मोहम्मद रफी यानी रफी साहब पर 1500 पेजों की एक किताब लिख रहे हैं, जोकि लगभग पूरी हो चुकी है, पर इसका संपादन का काम चल रहा है। फिलहाल अभी उनका पूरा फोकस किताब पर रहेगा, ताकि जल्द से जल्द इसे लाया जा सके।

कुछ वरिष्ठ पत्रकारों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि आज मैं जहां पर हूं, कई संपादकों और वरिष्ठ पत्रकारों के मार्गदर्शन से हूं। इनमें दिनेश चंद्र श्रीवास्तव, राजेंद्र माथुर, एसपी सिंह का नाम जरूर लेना चाहूंगा, क्योंकि दिनेश चंद्र श्रीवास्तव से मेरी पहली मुलाकात ‘अक्षरभारत’ में हुई, जोकि एक बेहतरीन इंसान थे। फिर मेरी मुलाकात संस्कारी व्यक्तित्व के धनी रहे राजेंद्र माथुर साहब से हुई, जिन्हें भूल पाना मेरे लिए संभव नहीं है। फिर मिले एसपी सिंह, जिन्हें संपादकों के भीष्म पितामह कहिए या फिर टेलीविजन पत्रकारिता के शिखर पुरुष, कम ही होगा। वह एक अच्छे इंसान के साथ-साथ एक पथप्रदर्शन भी थे और आज पत्रकारों के मार्गदर्शक हैं।

बता दें कि निर्मलेंदु साहा ने ‘एबीपी न्यूज’ से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद वे 'नवभारत टाइम्स', 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण', 'न्यूज24', ‘पी7’ न्यूज चैनल और फिर ‘दैनिक भास्कर’ से जुड़े। उन्होंने ‘अक्षरभारत’ और ‘हमवतन’ साप्ताहिक को लॉन्च कराने में अपना योगदान दिया।

इस दौरान उन्होंने अपने सभी शुभचिंतकों को प्रणाम किया है।

  

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