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PMAR रिपोर्ट: 2024 में दक्षिण भारतीय अखबारों का प्रिंट विज्ञापन में 19% योगदान
2024 का वर्ष दक्षिण भारतीय प्रिंट प्रकाशनों के लिए सहनशक्ति का रहा, जहां ऐड वॉल्यूम (ad volume) में विभिन्न भाषाओं में मिश्रित रुझान देखने को मिले।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 year ago
2024 का वर्ष दक्षिण भारतीय प्रिंट प्रकाशनों के लिए सहनशक्ति का रहा, जहां ऐड वॉल्यूम (ad volume) में विभिन्न भाषाओं में मिश्रित रुझान देखने को मिले। तमिल अखबारों में ऐड वॉल्यूम में मामूली 1% वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कन्नड़ प्रकाशनों ने पिछले वर्ष के स्तर को बनाए रखा। हालांकि, तेलुगु और मलयालम अखबारों में क्रमशः 10% और 8% की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बता दें कि यह जानकारी हाल ही में जारी Pitch Madison Advertising Report 2025 के जरिए सामने आई है।
रिपोर्ट इस गिरावट का मुख्य कारण इन क्षेत्रों में कमजोर बाजार स्थितियों को बताती है, जिससे विज्ञापनदाताओं के विश्वास और बजट पर असर पड़ा हो सकता है।
यदि कुल प्रिंट ऐड वॉल्यूम में योगदान की बात करें, तो कन्नड़ अखबारों की हिस्सेदारी 5% पर स्थिर रही, जबकि तमिल की हिस्सेदारी 1% बढ़कर 6% हो गई। वहीं, तेलुगु और मलयालम अखबारों की हिस्सेदारी 1% कम होकर क्रमशः 5% और 3% रह गई— 2023 की तुलना में 2024 में।
भारत में कुल प्रिंट सेक्टर में 2024 में ऐड वॉल्यूम में कोई वृद्धि नहीं हुई। हालांकि, पहली तिमाही (Q1) में वॉल्यूम में 16% की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन इसके बाद की तिमाहियों में गिरावट देखी गई— Q2 में 6%, Q3 में 9% और Q4 में 1% की कमी 2023 की तुलना में।
दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर भाषाओं में ऐड वॉल्यूम में स्थिरता या गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके विपरीत, 2024 में प्रिंट सेक्टर ने 5% राजस्व वृद्धि दर्ज की। प्रिंट सेक्टर ने 2024 में ₹20,272 करोड़ का एडेक्स (AdEx) दर्ज किया, जो पांच साल बाद पहली बार प्री-कोविड स्तर को पार करने में सफल रहा। लगातार दूसरे वर्ष, प्रिंट ने भारत में कुल विज्ञापन खर्च (AdEx) में अपनी 19% की हिस्सेदारी बनाए रखी।
इससे संकेत मिलता है कि वॉल्यूम में गिरावट या स्थिरता के बावजूद, उच्च विज्ञापन दरों और प्रीमियम प्राइसिंग रणनीतियों ने प्रकाशकों को लाभ बनाए रखने में मदद की। विज्ञापनदाता अब हाई-इंपैक्ट प्लेसमेंट्स, प्रीमियम स्लॉट्स और टार्गेटेड रीजनल कैंपेन में अधिक निवेश करने के लिए तैयार दिख रहे हैं, जिससे प्रिंट मीडिया का विश्वसनीय माध्यम के रूप में महत्व बरकरार है।
दक्षिण भारत के कुल ऐड वॉल्यूम में स्थिरता यह दर्शाती है कि, चुनौतियों के बावजूद, क्षेत्रीय प्रिंट मीडिया विज्ञापनदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। खासतौर पर FMCG, रिटेल और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर अब भी स्थानीय स्तर पर उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए प्रिंट विज्ञापन पर निवेश कर रहे हैं।
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