वित्तीय वर्ष 2022 की चौथी तिमाही की अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल को संबोधित कर रहे थे ‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ (D.B. Corp Ltd) के नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ (D. B. Corp Ltd) के नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है कि विज्ञापन के लिहाज से यह साल और यह तिमाही उनके लिए काफी अच्छे रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2022 की चौथी तिमाही की अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल (earnings conference call) के दौरान गिरीश अग्रवाल का कहना था, ‘हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सरकारी रेवेन्यू में कुछ कमी और 2019-2020 में चुनावी बिलिंग को छोड़ दें तो चौथी तिमाही में प्रिंट एडवर्टाइजिंग रिकवरी करते हुए पूरी तरह से 2019 के बराबर हो गया है।‘
अग्रवाल के अनुसार, अप्रैल 2019 की तुलना में इस साल अप्रैल में प्रिंट एडवर्टाइजिंग ने अच्छी ग्रोथ दर्ज की है। उन्होंने कहा, ‘मैं इस साल के परिणामों की तुलना वर्ष 2019 के साथ इसलिए कर रहा हूं, क्योंकि पिछले दो साल तो कोविड से बुरी तरह प्रभावित रहे हैं। हमने इस अप्रैल में अपनी विज्ञापन दरों में भी वृद्धि की है और मुझे विश्वास है कि इससे हमें रेवेन्यू बढ़ाने में मदद मिलेगी।‘
इसके साथ ही नए सेक्टर नए क्षेत्र और कैंपेन की तलाश में हैं और नए जमाने के प्लेयर्स नॉन मेट्रो मार्केट की ओर देख रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘टियर-2 और टियर-3 शहरों में एडवर्टाइजर्स के भाषाई अखबारों को देखने के नजरिये में बदलाव आया है, जिससे निश्चित तौर पर हमें फायदा हो रहा है।’
हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, उपभोक्ताओं के विश्वास को भुनाने के लिए विज्ञापनदाता पारंपरिक विज्ञापन माध्यमों को पसंद करते हैं। अग्रवाल के अनुसार, हालांकि इस स्टडी में यह भी उल्लेख किया गया है कि पारंपरिक विज्ञापन सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन यह विकास की ओर अग्रसर हैं क्योंकि विज्ञापनदाता भी ऐसे विज्ञापनों को पसंद करते हैं जो अधिक प्रभावी और प्रभावशाली हों।
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और लागत अनुकूलन (cost optimization) पर अग्रवाल ने कहा कि वे स्थायी लागत अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखते हैं और इसलिए उन्हें अपने मार्जिन में परिणामी सुधार नजर आएगा। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान, उन्होंने प्रिंट बिजनेस की परिचालन लागत (operating costs) में लगभग 185 करोड़ रुपये की बचत की और विश्लेषकों को संकेत दिया कि इनमें से लगभग 50% बचत टिकाऊ थी।
सर्कुलेशन और कॉपियों में आई कमी के बारे में अग्रवाल ने कहा, ‘वित्तीय वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में 45 लाख कॉपियां बिकीं, जबकि वित्तीय वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में 42.76 लाख कॉपियां बेची गईं। इससे स्पष्ट है कि इसमें महज पांच से छह प्रतिशत की गिरावट हुई है।’
उन्होंने कहा, ‘यदि मैं कोविड से पहले की बात भी करूं तो कॉपियों के सर्कुलेशन में 10 से 12 प्रतिशत की कमी देखी गई। इसका कारण यह था कि अधिकांश घरों ने अखबार मंगाना बंद कर दिया था। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और होटल्स आदि में भी कॉपियां काफी हद तक बंद कर दी गई थीं। हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि कैसे उन नंबरों को वापस लाया जाए, लेकिन सच कहूं तो अधिकांश कार्यालयों में कॉपियां फिर से शुरू नहीं हो पाई हैं और यह एक स्थायी नुकसान की तरह लगता है।’
डिजिटल बिजनेस के बारे में ‘डीबी कॉर्प’ (DB Corp) के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने कहा कि वे निवेश की एक केंद्रित रणनीति को लागू करके डिजिटल बिजनेस को बढ़ा रहे हैं जो स्थायी आधार पर मजबूत विकास दिखा रहा है।
उन्होंने कहा, ’हमने कंटेंट और टेक्नोलॉजी दोनों के दृष्टिकोण से भारतीय बाजार के लिए हाई क्वालिटी वाले कंटेंट और सर्वोत्तम न्यूज प्रॉडक्ट के वितरण में एक मल्टीमॉडल लीडर होने के दृष्टिकोण का पालन किया है। कॉमस्कोर (Comscore) के नवीनतम परिणामों के अनुसार, दैनिक भास्कर समूह के ऐप के मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या मार्च 2022 में बढ़कर 17 मिलियन से अधिक हो गई जो जनवरी 2020 में केवल दो मिलियन थी। हम अपने एक्टिव यूजर की संख्या में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि का प्रदर्शन कर रहे हैं। हमने दैनिक औसत ई-समाचार पत्र डाउनलोड में एक मिलियन से अधिक का आंकड़ा प्राप्त करने के महत्वपूर्ण मील के पत्थर को भी पार कर लिया है।’
पवन अग्रवाल के अनुसार, ‘सच करीब से दिखता है, टैगलाइन के साथ हमने एक ब्रैंड कैंपेन भी लॉन्च किया, जिसमें दैनिक भास्कर की उच्च गुणवत्ता वाली विश्वसनीय पत्रकारिता के मूल्यों और मुख्य पेशकशों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें स्थानीय और गहन समाचारों पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इस कैंपेन के ब्रैंड एंबेसडर पंकज त्रिपाठी थे, जिनका हमारे मुख्य मार्केट्स (Core Markets) और हमारे ब्रैंड मूल्यों (लोकल और ट्रस्ट) के साथ बहुत मजबूत संबंध है।’
रेडियो बिजनेस के बारे में उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022 के दौरान रेवेन्यू साल दर साल (y-o-y) 35 प्रतिशत बढ़कर 1,122 मिलियन रुपये हो गया है। इस साल तमाम सेक्टर्स जैसे-रियल एस्टेट, एफएमसीजी, बैंकिंग, राज्य सरकार और लाइफ स्टाइल से ग्रोथ अच्छी देखी गई। वित्तीय वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में रेडियो डिवीजन से 303 मिलियन रुपये का रेवेन्यू आया, जो साल दर साल के आधार पर 9.2 प्रतिशत अधिक है। हाल ही में दरों में बढ़ोतरी के साथ हमें उम्मीद है कि रेडियो अच्छा प्रदर्शन करेगा।
सम्भाव मीडिया (Sambhaav Media Limited) की 36वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के शेयरधारकों ने रखे गए दोनों प्रस्तावों को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
सम्भाव मीडिया की AGM में दोनों प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी, 99.99% वोट पड़े पक्ष में
सम्भाव मीडिया (Sambhaav Media Limited) की 36वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के शेयरधारकों ने रखे गए दोनों प्रस्तावों को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। AGM का आयोजन 13 अगस्त 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए किया गया था।
कंपनी के मुताबिक, 6 अगस्त 2026 की कट-ऑफ डेट के आधार पर कुल 27,016 शेयरधारक वोटिंग के लिए पात्र थे। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 7 और पब्लिक कैटेगरी के 30 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।
इन दोनों प्रस्तावों को मिली मंजूरी
पहला प्रस्ताव-
AGM में पहला प्रस्ताव कंपनी के 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय परिणामों को स्वीकार करने और मंजूर करने से जुड़ा था। इसमें बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट, कैश फ्लो स्टेटमेंट के साथ ऑडिटर्स और डायरेक्टर्स की रिपोर्ट को अपनाना शामिल था।
इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 11,92,59,567 वोट पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ 17,072 वोट आए। इस तरह कुल वैध वोटों में करीब 99.99% वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे। प्रस्ताव को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई।
दूसरा प्रस्ताव-
दूसरा प्रस्ताव जगदीश पावरा (DIN: 02203198) को डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने से संबंधित था। जगदीश पावरा कंपनी के उन डायरेक्टर्स में शामिल हैं, जो रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे थे और दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र थे।
इस प्रस्ताव को भी शेयरधारकों का जबरदस्त समर्थन मिला। इसके पक्ष में 11,92,59,567 वोट पड़े, जबकि 17,072 वोट इसके खिलाफ रहे। यानी करीब 99.99% वैध वोट प्रस्ताव के पक्ष में पड़े।
जगदीश पावरा गुजरात यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा इंजीनियर हैं। उन्हें कॉरपोरेट और टेक्निकल क्षेत्र में लंबे समय से काम करने का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टेक्निकल फील्ड से की थी।
शुरुआत में उन्होंने इंस्टॉलेशन ऑफिसर के तौर पर काम किया, जहां वह टीवी ट्रांसमीटर, रेडियो एफएम ट्रांसमीटर, रेडियो स्टूडियो और टीवी स्टूडियो की स्थापना से जुड़े प्रोजेक्ट्स को संभालते थे। इसके अलावा उन्हें मीडिया से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी विभागों से जरूरी मंजूरियां लेने, सोर्सिंग और लायजनिंग का भी अच्छा अनुभव है।
मीडिया इंडस्ट्री में उनकी अच्छी पकड़ है और उन्होंने अलग-अलग तरह की व्यावसायिक गतिविधियों में भी काम किया है। उन्हें भारत में टीवी चैनल और एफएम रेडियो चैनल स्थापित करने और ब्रॉडकास्टिंग मीडिया से जुड़े प्रोजेक्ट्स की अच्छी समझ है।
जगदीश पावरा कई कंपनियों के साथ निदेशक के तौर पर भी जुड़े हुए हैं। इनमें Ved Technoserve India Private Limited में Whole-Time Director, Ahmedabad Radio and Mast Services Private Limited और Neri Hydro Projects Private Limited शामिल हैं।
कुल 11.92 करोड़ से ज्यादा वोट पड़े
कंपनी की ओर से जारी वोटिंग डिटेल के मुताबिक, AGM में कुल 11,92,76,639 वोट पड़े। इनमें से 11,92,59,567 वोट पक्ष में और 17,072 वोट विरोध में थे। कुल वोटिंग प्रतिशत कंपनी के बकाया शेयरों के मुकाबले 62.41% रहा।
प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के पास कुल 12,02,73,982 शेयर थे, जिनमें से 11,33,75,982 शेयरों के लिए वोटिंग हुई। प्रमोटर ग्रुप के सभी वोट प्रस्तावों के पक्ष में रहे।
पब्लिक नॉन-इंस्टीट्यूशनल शेयरधारकों की ओर से 59,00,657 वोट पड़े। इनमें 58,83,585 वोट प्रस्तावों के पक्ष में, जबकि 17,072 वोट विरोध में रहे। पब्लिक इंस्टीट्यूशनल शेयरधारकों की ओर से वोटिंग नहीं हुई।
स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट में भी प्रस्ताव पास
कंपनी के लिए स्क्रूटिनाइजर की भूमिका निभाने वाली Umesh Ved & Associates, Company Secretaries ने अपनी रिपोर्ट में भी दोनों प्रस्तावों को जरूरी बहुमत से पास घोषित किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान की गई ई-वोटिंग के नतीजों को कंपनी के रिकॉर्ड और रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंट के रिकॉर्ड से मिलाकर देखा गया। वोटों को AGM खत्म होने के बाद अनब्लॉक किया गया।
स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट में कहा गया कि AGM के नोटिस में शामिल दोनों प्रस्ताव आवश्यक बहुमत के साथ पास हो गए हैं।
AGM में ऑनलाइन हुई वोटिंग
सम्भाव मीडिया की 36वीं AGM 13 अगस्त 2026 को सुबह 11:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आयोजित हुई। शेयरधारकों के लिए रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा 10 अगस्त 2026 सुबह 9 बजे से 12 अगस्त 2026 शाम 5 बजे तक उपलब्ध थी।
AGM के दौरान उन शेयरधारकों को भी ई-वोटिंग की सुविधा दी गई, जिन्होंने पहले रिमोट ई-वोटिंग के जरिए अपना वोट नहीं डाला था।
कुल मिलाकर, सम्भाव मीडिया के शेयरधारकों ने कंपनी के वित्तीय खातों को मंजूरी देने और जगदीश पावरा की डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्ति, दोनों प्रस्तावों पर लगभग सर्वसम्मति से मुहर लगा दी।
हिंदुस्तान टाइम्स के एडिटर-इन-चीफ रहे सुकुमार रंगनाथन का नेतृत्व सिर्फ संपादकीय फैसलों तक सीमित नहीं रहा। उनकी सादगी, निष्पक्षता और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता ने अलग पहचान बनाई।
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Samachar4media Bureau
हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) के एडिटर-इन-चीफ पद से सुकुमार रंगनाथन (Sukumar Ranganathan) के हटने की खबर ने मीडिया जगत में कई लोगों को चौंकाया है। हालांकि, उनके जाने का यह दौर उनके करीब से काम करने वाले लोगों के लिए उनके नेतृत्व, सोच और पत्रकारिता के मूल्यों को याद करने का अवसर भी है।
पिछले चार वर्षों से सुकुमार रंगनाथन ई4एम इंग्लिश जर्नलिज्म 40 अंडर 40 अवॉर्ड्स (e4m English Journalism 40 Under 40 Awards) की जूरी के अध्यक्ष रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि यह सम्मान केवल हर साल 40 नाम पूरे करने की औपचारिक प्रक्रिया बनकर न रह जाए।
उनके नेतृत्व में जूरी ने हमेशा काम की गुणवत्ता को संख्या से ऊपर रखा। हर साल 40 पत्रकारों को सम्मान देने की परंपरा के बावजूद उन्हीं उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिनका काम तय मानकों पर खरा उतरा। अब तक सबसे ज्यादा 26 पत्रकार चुने गए, जबकि इस साल यह संख्या सिर्फ 17 रही। यह अंतर अपने आप में बताता है कि सुकुमार के लिए सम्मान की विश्वसनीयता कितनी महत्वपूर्ण थी।
जूरी की जिम्मेदारी को वह बेहद गंभीरता से लेते थे। हर उम्मीदवार की प्रोफाइल और उसके काम को ध्यान से पढ़ना, जरूरी बातें नोट करना और बैठकों में उनसे जुड़े छोटे-छोटे पहलुओं को याद रखना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। कई बार चयन प्रक्रिया महीनों तक चलती थी, लेकिन अगली बैठक में भी उन्हें पिछली चर्चाओं, सवालों और तर्कों की पूरी जानकारी रहती थी।
उनकी खासियत सिर्फ पेशेवर गंभीरता तक सीमित नहीं थी। इतने बड़े पद पर रहने के बावजूद उनकी सादगी और विनम्रता हमेशा लोगों के बीच चर्चा का विषय रही। व्यस्त कार्यक्रम हो या किसी आयोजन में देरी, उन्होंने कभी अपने पद या कद को सामने नहीं रखा। वह सहजता और धैर्य के साथ लोगों से मिलते और बातचीत करते रहे।
हिंदुस्तान टाइम्स में उनका कार्यकाल संपादकीय दृष्टि, संस्थान निर्माण और पत्रकारिता में बौद्धिक कठोरता के लिए याद किया जाएगा। उनका प्रभाव केवल उन खबरों और संपादकीय फैसलों तक सीमित नहीं रहेगा, जिनका उन्होंने नेतृत्व किया, बल्कि उस कार्यसंस्कृति में भी दिखाई देगा, जिसे उन्होंने अपने आसपास विकसित किया।
सुकुमार रंगनाथन की पत्रकारिता की सबसे बड़ी पहचान शायद यही रही कि उन्होंने उत्कृष्टता को केवल एक शब्द नहीं माना। उन्होंने अपने काम और फैसलों के जरिए यह दिखाया कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता, ईमानदारी, विनम्रता और गुणवत्ता से समझौता किए बिना भी नेतृत्व किया जा सकता है।
न्यूजपेपर इंडस्ट्री ने भले ही विज्ञापन दरें बढ़ाने की जरूरत पर एकजुट होकर अपनी बात रखी हो, लेकिन जब वास्तव में विज्ञापनदाताओं से ज्यादा पैसा लेने की बात आई है, तो पब्लिशर्स काफी सावधानी बरत रहे हैं।
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Samachar4media Bureau
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत की न्यूजपेपर इंडस्ट्री ने भले ही विज्ञापन दरें बढ़ाने की जरूरत पर एकजुट होकर अपनी बात रखी हो, लेकिन जब वास्तव में विज्ञापनदाताओं से ज्यादा पैसा लेने की बात आई है, तो पब्लिशर्स काफी सावधानी बरत रहे हैं।
इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) ने 22 जुलाई को अपने सदस्यों को 1 अगस्त से विज्ञापनों पर 15% सरचार्ज लगाने की सलाह दी थी। इसके 12 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ज्यादातर बड़े अंग्रेजी, हिंदी और रीजनल पब्लिशर्स ने इसे लागू नहीं किया है। यह हिचकिचाहट प्रिंट मीडिया के सामने मौजूद एक पुराने संकट को दिखाती है। बढ़ती लागत से मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन प्रतिस्पर्धी विज्ञापन मार्केट में दरें बढ़ाने से पब्लिशर्स को वही कारोबार खोने का डर है, जिसे वे बचाना चाहते हैं।
INS ने यह सलाह 22 जुलाई को जारी की थी। इससे पहले 17 जुलाई को हुई उसकी एग्जिक्यूटिव कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। INS ने घरेलू और आयातित न्यूजप्रिंट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और लगातार बढ़ते ऑपरेशनल खर्च का हवाला दिया था। इस सिफारिश का मकसद पब्लिशर्स को मिलकर अपनी बढ़ी हुई लागत का कम से कम कुछ हिस्सा विज्ञापनदाताओं तक पहुंचाने का एक तरीका देना था।
लेकिन मार्केट में इसका असर सीमित ही दिखाई दिया है। एक वरिष्ठ पब्लिशिंग एग्जिक्यूटिव ने कहा, “मार्केट की स्थिति मुश्किल है, प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है और विज्ञापनदाताओं की ओर से दबाव भी है। इसलिए हमने कुछ और समय तक इसे लागू नहीं करने का फैसला किया है।” यह बयान बताता है कि पब्लिशर्स ऐसे समय में दरें बढ़ाने से क्यों बच रहे हैं, जब विज्ञापन से मिलने वाले हर अतिरिक्त रुपये के लिए भी कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
'एक्सचेंज4मीडिया' ने सभी प्रमुख अंग्रेजी और हिंदी प्रकाशनों से संपर्क किया। ऑफ द रिकॉर्ड उन्होंने माना कि उन्होंने अभी तक इसे लागू नहीं किया है।
'द हिंदू' ने भी अभी तक सरचार्ज लागू नहीं किया है। चेन्नई स्थित इस ग्रुप के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सुंदर कोंडूर ने इसकी पुष्टि की।
'मातृभूमि' के मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार ने कहा कि ग्रुप ने अब तक सरचार्ज लागू नहीं किया है। उन्होंने बताया कि केरल में भी अखबारों ने बड़े पैमाने पर इसे लागू करने से फिलहाल दूरी बनाए रखी है।
एक प्रमुख मैगजीन पब्लिकेशन के एमडी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यह सरचार्ज मैगजीन के मुकाबले अखबारों के लिए ज्यादा प्रासंगिक है, क्योंकि दोनों के लागत ढांचे और मार्केट की स्थिति अलग-अलग है।
INS के प्रेजिडेंट विवेक गुप्ता ने बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया।
त्योहारी सीजन ने बढ़ाई मुश्किल
रीजनल पब्लिशर्स के लिए इस समय को लेकर एक और चुनौती सामने आई है। पब्लिशर्स का कहना है कि ओणम (16-26 अगस्त), जो केरल के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, ने इस समय को और संवेदनशील बना दिया है।
ओणम भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत का संकेत माना जाता है। इसके बाद रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, नवरात्र और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। यह समय रीजनल मीडिया के लिए विज्ञापन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान रिटेल, ऑटो, ज्वेलरी, FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और स्थानीय कारोबारों से जुड़े विज्ञापनदाता अपनी मौजूदगी बढ़ाते हैं।
एक प्रमुख पब्लिशर ने कहा, “ज्यादातर विज्ञापनदाता त्योहारी सीजन के दौरान भारी डिस्काउंट चाहते हैं। यह लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। ऐसे समय में हम रेट बढ़ाने की मांग करने की स्थिति में नहीं हैं, भले ही मौजूदा हालात इसकी जरूरत बता रहे हों।”
पब्लिशर्स के सामने जोखिम साफ है। 15% की बढ़ोतरी से हर विज्ञापन से होने वाली कमाई बढ़ सकती है, लेकिन इससे बातचीत, ज्यादा डिस्काउंट की मांग या विज्ञापन बजट को दूसरी जगह ले जाने की स्थिति भी बन सकती है। और यह ठीक उसी समय हो सकता है जब पब्लिशर्स विज्ञापन की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं।
INS की सिफारिश पर अलग-अलग पब्लिशर्स का अलग-अलग रुख एक बड़ी समस्या को सामने लाता है। लागत का दबाव सभी पर समान है, लेकिन सभी पब्लिशर्स के पास विज्ञापन दरें बढ़ाने की एक जैसी क्षमता नहीं है।
मार्केट कुछ और संकेत दे रहा है
पब्लिशर्स की हिचकिचाहट यह भी दिखाती है कि ज्यादा कमाई की उनकी जरूरत और मार्केट की ज्यादा कीमत चुकाने की इच्छा के बीच कितना बड़ा अंतर है।
पब्लिशर्स कई सालों से यह कहते रहे हैं कि विज्ञापन दरें न्यूजप्रिंट, प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की बढ़ती लागत के हिसाब से नहीं बढ़ी हैं। लेकिन जब भी किसी पब्लिशर ने अकेले विज्ञापन दरें बढ़ाने की कोशिश की है, उसे अक्सर विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के विरोध का सामना करना पड़ा है। INS की सलाह इसी लंबे समय से चली आ रही समस्या के लिए पब्लिशर्स को एक साथ लाने की कोशिश थी।
लेकिन एक साथ इरादा जाहिर करने का मतलब यह नहीं है कि सभी के पास कीमत बढ़ाने की ताकत भी एक जैसी हो। एक प्रमुख FMCG कंपनी के CMO ने कहा, “अखबार और टीवी मीडिया स्पेस की खरीद-बिक्री डिमांड और सप्लाई के आधार पर होती है। यहां दरें मार्केट तय करता है, पब्लिशर्स की संस्था नहीं।”
मार्केटर्स का कहना है कि विज्ञापन की दरें पाठकों की संख्या, सर्कुलेशन, मार्केट में स्थिति, उपलब्ध इन्वेंट्री, किसी कैटेगरी की मांग और विज्ञापनदाता के साथ रिश्ते जैसे कई फैक्टर के आधार पर तय होती हैं। किसी राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक, बड़े हिंदी अखबार और किसी रीजनल प्रकाशन के पास 15% की बढ़ोतरी को विज्ञापनदाताओं पर डालने की समान क्षमता जरूरी नहीं है। INS की सलाह सामने आने के बाद विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों की ओर से यह एक प्रमुख चिंता थी।
एक विज्ञापन एग्जिक्यूटिव ने कहा, “अगर कोई पब्लिकेशन अपनी ऑडियंस की क्वालिटी, रीडरशिप, कंटेंट और असर के आधार पर ज्यादा कीमत को सही साबित कर सकता है, तो मीडिया बायर्स उसके लिए भुगतान करेंगे। लेकिन कीमत तय करना आदर्श रूप से खरीदार और विक्रेता के बीच का फैसला होना चाहिए, न कि किसी तीसरे पक्ष की ओर से तय किया जाना चाहिए।”
इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की गैरमौजूदगी ने इस पूरी बातचीत को और मुश्किल बना दिया है। पिछले IRS को करीब सात साल हो चुके हैं। इसके बावजूद विज्ञापनदाताओं के पास ऐसा कोई सर्वमान्य रीडरशिप करेंसी नहीं है, जिसके आधार पर अलग-अलग प्रकाशनों की ऑडियंस के आकार, क्वालिटी और अतिरिक्त पहुंच की तुलना की जा सके। डाबर इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट, हेड ऑफ मीडिया और हेड ऑफ ब्रांड एक्टिवेशंस राजीव दुबे ने भी कहा है कि इससे प्रिंट मीडिया के लिए ज्यादा दरों को सही ठहराना मुश्किल होता है।
हालांकि पब्लिशर्स का इसके उलट तर्क है कि उनकी कारोबारी वैल्यू को सिर्फ एक रीडरशिप नंबर से नहीं आंका जा सकता। पाठकों का भरोसा, एडिटोरियल प्रभाव, प्रीमियम माहौल और बड़े आयोजनों या महत्वपूर्ण घटनाओं के आसपास प्रभाव पैदा करने की क्षमता भी उनकी वैल्यू का हिस्सा है।
INS के प्रेजिडेंट विवेक गुप्ता ने भी इन्हीं आधारों पर सरचार्ज का बचाव किया है। इससे पहले एक्सचेंज4मीडिया के साथ बातचीत में उन्होंने 15% सरचार्ज को स्थायी बढ़ोतरी के बजाय एक अस्थायी उपाय बताया था। उनका तर्क था कि जब अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं, तो अखबारों से यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वे महंगाई से बढ़ी लागत को खुद ही वहन करते रहें।
विवेक गुप्ता ने कहा था, “अगर युद्ध और दूसरी ऐसी परिस्थितियां, जिन्होंने हमें इस स्थिति में पहुंचाया है, सामान्य हो जाती हैं और कीमतें नीचे आती हैं, तो हम सरचार्ज को हटा सकते हैं। यह स्थायी सरचार्ज नहीं है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि INS पब्लिशर्स के लिए एक फैसिलिटेटर और गाइड के रूप में काम कर रही है, न कि उनकी कीमतें तय कर रही है।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड के बोर्ड ने कंपनी के चार पूर्णकालिक निदेशकों को एक बार फिर पांच साल के लिए नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
जागरण प्रकाशन लिमिटेड के बोर्ड ने कंपनी के चार पूर्णकालिक निदेशकों को एक बार फिर पांच साल के लिए नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। बोर्ड की 12 अगस्त 2026 को हुई बैठक में धीरेंद्र मोहन गुप्ता, सुनील गुप्ता, संजय गुप्ता और शैलेश गुप्ता की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। हालांकि, इन नियुक्तियों के लिए अब शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी।
इन चारों की मौजूदा अवधि 30 सितंबर 2026 को खत्म हो रही है। प्रस्तावित पुनर्नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से अगले पांच साल के लिए होगी।
धीरेंद्र मोहन गुप्ता को 60 साल से ज्यादा का प्रिंट मीडिया अनुभव
धीरेंद्र मोहन गुप्ता की उम्र 82 साल है और उनके पास प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 60 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की है। वह महेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं।
सुनील गुप्ता 64 साल के हैं। उन्होंने कॉमर्स में बैचलर और मास्टर डिग्री हासिल की है। उनके पास प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 45 साल से ज्यादा का अनुभव है।
संजय गुप्ता और शैलेश गुप्ता की भी होगी पुनर्नियुक्ति
संजय गुप्ता की उम्र 63 साल है और उन्होंने साइंस में बैचलर डिग्री हासिल की है। उनके पास प्रिंट मीडिया क्षेत्र में 45 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह संदीप गुप्ता के भाई हैं।
वहीं, शैलेश गुप्ता 57 साल के हैं और उनके पास कॉमर्स में बैचलर की डिग्री है। उन्हें प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह महेंद्र मोहन गुप्ता के बेटे हैं।
1 अक्टूबर से शुरू होगा नया कार्यकाल
कंपनी के मुताबिक, चारों पूर्णकालिक निदेशकों की नई पांच साल की अवधि 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। यह फैसला कंपनी की नामांकन और पारिश्रमिक समिति व ऑडिट समिति की सिफारिश के आधार पर लिया गया है।
हालांकि, अंतिम नियुक्ति के लिए कंपनी के शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेना जरूरी होगा।
करीब 2 घंटे में खत्म हुई बोर्ड मीटिंग
जागरण प्रकाशन के बोर्ड की बैठक 12 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई और 3:35 बजे खत्म हुई। बैठक में चारों पूर्णकालिक निदेशकों की पुनर्नियुक्ति के अलावा कंपनी से जुड़े अन्य मामलों पर भी विचार किया गया।
इस फैसले से कंपनी के शीर्ष प्रबंधन में मौजूदा नेतृत्व की निरंतरता बनी रहने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब प्रिंट मीडिया कंपनियां डिजिटल विस्तार और बदलते मीडिया कारोबार के बीच अपनी रणनीति को लगातार मजबूत कर रही हैं।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं।
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Vikas Saxena
जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के स्टैंडअलोन कारोबार में रेवेन्यू और विज्ञापन से होने वाली कमाई में अच्छी बढ़त देखने को मिली है, लेकिन दूसरी आय में बड़ी कमी के चलते मुनाफे पर दबाव रहा। वहीं, कंसोलिडेटेड आधार पर कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट करीब 10 फीसदी बढ़ा है।
स्टैंडअलोन रेवेन्यू 11 फीसदी बढ़ा
कंपनी का स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग रेवेन्यू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 442.27 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 398.13 करोड़ रुपये से 11.1 फीसदी ज्यादा है।
विज्ञापन से होने वाली कमाई में और तेज बढ़ोतरी हुई। कंपनी का एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू 14.5 फीसदी बढ़कर 289.23 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल की पहली तिमाही में यह 252.64 करोड़ रुपये था।
सर्कुलेशन रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा और 82.42 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 82.30 करोड़ रुपये था। दूसरी ओर, अन्य ऑपरेटिंग रेवेन्यू 11.8 फीसदी बढ़कर 70.62 करोड़ रुपये हो गया।
डिजिटल रेवेन्यू में 32.6 फीसदी की बढ़ोतरी
जागरण प्रकाशन के डिजिटल कारोबार ने इस तिमाही में मजबूत ग्रोथ दर्ज की। डिजिटल रेवेन्यू 32.6 फीसदी बढ़कर 23.38 करोड़ रुपये हो गया। Q1FY26 में यह 17.64 करोड़ रुपये था।
यानी कंपनी के लिए डिजिटल कारोबार लगातार एक महत्वपूर्ण ग्रोथ एरिया बन रहा है।
स्टैंडअलोन मुनाफे में गिरावट
रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग प्रॉफिट 61.52 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 64.70 करोड़ रुपये था।
कंपनी की दूसरी आय में भी बड़ी गिरावट आई। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह 23.60 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल 44.53 करोड़ रुपये थी। कंपनी ने बताया कि पिछले साल की दूसरी आय में 23.85 करोड़ रुपये की Keyman Insurance Policy की maturity proceeds शामिल थी।
इस वजह से स्टैंडअलोन प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 94.73 करोड़ रुपये से घटकर 70.16 करोड़ रुपये और टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) 71.35 करोड़ रुपये से घटकर 53.50 करोड़ रुपये रह गया।
कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8.5 फीसदी बढ़ा
पूरे ग्रुप के कंसोलिडेटेड नतीजों की बात करें तो ऑपरेटिंग रेवेन्यू 8.5 फीसदी बढ़कर 499.35 करोड़ रुपये हो गया। Q1FY26 में यह 460.05 करोड़ रुपये था।
कंसोलिडेटेड विज्ञापन रेवेन्यू भी 14 फीसदी बढ़कर 299.25 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 262.52 करोड़ रुपये था।
कंसोलिडेटेड डिजिटल रेवेन्यू 30.8 फीसदी बढ़कर 24.58 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, सर्कुलेशन रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा और 84.78 करोड़ रुपये रहा।
ऑपरेटिंग प्रॉफिट 9.8 फीसदी बढ़ा
कंपनी के कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट में अच्छी बढ़त रही। यह 9.8 फीसदी बढ़कर 70.03 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 63.79 करोड़ रुपये था।
हालांकि, दूसरी आय घटने के कारण कंसोलिडेटेड PBT 90.37 करोड़ रुपये से घटकर 81.02 करोड़ रुपये और PAT 66.76 करोड़ रुपये से घटकर 61.23 करोड़ रुपये रह गया।
Dainik Jagran की कमाई बढ़ी, लेकिन ऑपरेटिंग प्रॉफिट घटा
कंपनी के प्रमुख अखबार Dainik Jagran का वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ऑपरेटिंग रेवेन्यू 314.15 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह 286.35 करोड़ रुपये था।
हालांकि, इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट 63.14 करोड़ रुपये से घटकर 59.84 करोड़ रुपये रह गया। ऑपरेटिंग मार्जिन भी 22.05 फीसदी से घटकर 19.05 फीसदी रहा।
अन्य पब्लिकेशंस का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 54.45 करोड़ रुपये रहा, लेकिन इस कारोबार में 2.04 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग घाटा हुआ।
Radio City के कारोबार में सुधार
जागरण प्रकाशन के रेडियो कारोबार Music Broadcast Limited, जो Radio City चलाती है, ने इस तिमाही में अच्छा सुधार दिखाया।
रेडियो का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 44.54 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 49.32 करोड़ रुपये था। हालांकि, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 0.94 करोड़ रुपये से बढ़कर 8.92 करोड़ रुपये हो गया।
इसका ऑपरेटिंग मार्जिन भी 1.90 फीसदी से बढ़कर 20.03 फीसदी हो गया।
डिजिटल कारोबार अभी भी घाटे में
डिजिटल प्रिंट कारोबार का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 18.80 करोड़ रुपये से बढ़कर 24.58 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, कारोबार अभी भी घाटे में है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में डिजिटल कारोबार को 3.07 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग घाटा हुआ। पिछले साल इसी तिमाही में यह घाटा 4.69 करोड़ रुपये था। यानी घाटा कम हुआ है।
डिजिटल पहुंच भी मजबूत
कंपनी के मुताबिक, जागरण न्यू मीडिया की न्यूज और इंफॉर्मेशन कैटेगरी में करीब 4.8 करोड़ यूनिक विजिटर्स रहे। वहीं, Hindi News and Information Category में Jagran.com के करीब 3.6 करोड़ कुल यूनीक विजटर्स और एजुकेशन कैटेगरी में JagranJosh.com के करीब 70 लाख कुल यूनीक विजटर्स रहे।
ये आंकड़े जून 2026 के Comscore MMX Multi-Platform डेटा पर आधारित हैं।
जागरण प्रकाशन के पास प्रिंट, रेडियो, डिजिटल, आउटडोर विज्ञापन, प्रमोशनल मार्केटिंग और इवेंट मैनेजमेंट समेत मीडिया कारोबार की कई श्रेणियां हैं। कंपनी के मुताबिक, उसका ग्रुप 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 5 भाषाओं में 8 पब्लिकेशन प्रकाशित करता है और रेडियो कारोबार के तहत 39 FM स्टेशन संचालित करता है।
कंपनी की क्रेडिट रेटिंग की बात करें तो CRISIL ने जागरण प्रकाशन की लॉन्ग और मीडियम टर्म रेटिंग AA+ Stable और शॉर्ट टर्म रेटिंग A1+ पर बरकरार रखी है।
HT Media Group के लिए पहली तिमाही में विज्ञापन कारोबार ने अच्छी रफ्तार दिखाई है, लेकिन महंगा न्यूजप्रिंट कंपनी के प्रिंट बिजनेस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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Vikas Saxena
HT Media: न्यूजप्रिंट की कीमतें $650-700 प्रति टन पर पहुंचीं, Piyush Gupta बोले- शायद पीक पर पहुंच चुका है दबाव
HT Media Group के लिए पहली तिमाही में विज्ञापन कारोबार ने अच्छी रफ्तार दिखाई है, लेकिन महंगा न्यूजप्रिंट कंपनी के प्रिंट बिजनेस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। 5 अगस्त को वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही को लेकर हुई अर्निंग्स वेबिनार में ग्रुप CFO पीयूष गुप्ता ने कहा कि न्यूजप्रिंट कंपनी के प्रिंट बिजनेस की सबसे बड़ी लागत है और इसकी कीमत करीब 650-700 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है।
हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यूजप्रिंट की कीमतें अब अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं और आगे चलकर इनमें कमी आ सकती है। अगर कीमतें मौजूदा स्तर से ज्यादा नहीं बढ़ती हैं तो कंपनी अपने प्रिंट बिजनेस के मौजूदा ऑपरेटिंग मार्जिन को बनाए रखने में सक्षम हो सकती है।
प्रिंट बिजनेस की कमाई 16% बढ़ी
वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में HT Media के प्रिंट बिजनेस का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 16% बढ़कर 376 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 324 करोड़ रुपये के आसपास था। प्रिंट में विज्ञापन राजस्व 15% बढ़कर 295 करोड़ रुपये रहा, जबकि सर्कुलेशन रेवेन्यू करीब 52 करोड़ रुपये रहा। प्रिंट का ऑपरेटिंग EBITDA बढ़कर 50 करोड़ रुपये हो गया और ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन करीब 13% रहा।
पीयूष गुप्ता ने बताया कि ऊंची कमोडिटी लागत के बावजूद प्रिंट बिजनेस ने 13% का मार्जिन हासिल किया है।
न्यूजप्रिंट सबसे बड़ी लागत
पीयूष गुप्ता के मुताबिक न्यूजप्रिंट प्रिंट बिजनेस की सबसे बड़ी लागत है। इसकी कीमत के हिसाब से यह कंपनी के कुल बिल ऑफ मैटेरियल में करीब 25% से 40% तक हिस्सा रख सकता है। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान सप्लाई चेन में दिक्कतों के कारण न्यूजप्रिंट की कीमतें काफी ऊपर चली गई थीं। इसके बाद कीमतों में बड़ी गिरावट आई, लेकिन अब फिर से इसमें तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
उनके मुताबिक मौजूदा कीमत करीब 650-700 डॉलर प्रति मीट्रिक टन है और यह कोविड के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
डॉलर ने बढ़ाई परेशानी
न्यूजप्रिंट की बढ़ी कीमत के साथ-साथ रुपये की कमजोरी ने भी कंपनी की लागत पर दबाव बढ़ाया है। पीयूष गुप्ता ने कहा कि न्यूजप्रिंट की कीमत अमेरिकी डॉलर में तय होती है। ऐसे में अगर न्यूजप्रिंट महंगा हो और डॉलर भी मजबूत हो, तो कंपनी पर दोहरा दबाव पड़ता है।
उन्होंने हालांकि उम्मीद जताई कि न्यूजप्रिंट की कीमतें अब पीक पर हैं और आगे चलकर नीचे आ सकती हैं।
Q2 में न्यूजप्रिंट की कीमत थोड़ी ज्यादा
एचटी मीडिया ग्रुप के ग्रुप डिप्टी सीएफओ अन्ना अब्राहम ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में न्यूजप्रिंट की कीमत पहली तिमाही के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही का वास्तविक मार्जिन इस बात पर भी निर्भर करेगा कि किस तरह के विज्ञापन मिलते हैं और कंपनी को विज्ञापन से कितना यील्ड मिलता है। अगर विज्ञापन से मिलने वाला बेहतर रेट न्यूजप्रिंट की बढ़ी लागत की भरपाई कर देता है तो मार्जिन पर दबाव सीमित रह सकता है।
13% प्रिंट EBITDA मार्जिन को मान सकते हैं बेसलाइन
जब एक निवेशक ने पूछा कि क्या 13% का प्रिंट EBITDA मार्जिन बाकी साल के लिए बेसलाइन माना जा सकता है, तो पीयूष गुप्ता ने कहा कि मॉडलिंग के लिहाज से इसे एक उचित अनुमान माना जा सकता है।
हालांकि उन्होंने चेताया कि कमोडिटी और डॉलर की कीमतों में बड़ा बदलाव हुआ तो मार्जिन पर असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए अगर डॉलर 100 रुपये तक पहुंच जाए और न्यूजप्रिंट 700 डॉलर प्रति टन तक चला जाए, तो मार्जिन में गिरावट आ सकती है।
अखबारों की कवर प्राइस बढ़ाना आसान नहीं
न्यूजप्रिंट महंगा होने की स्थिति में अखबारों की कवर प्राइस बढ़ाने के सवाल पर मैनेजमेंट ने कहा कि यह आसान विकल्प नहीं है। अन्ना अब्राहम ने कहा कि हिंदी अखबारों की कीमत फिलहाल ठीक स्तर पर है। पिछले समय में कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सभी प्रकाशकों ने कीमतें बढ़ाई हैं। ऐसे में आगे और कीमत बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।
कंपनी ऐसे समय में बिना प्रोडक्ट और रीच से समझौता किए वॉल्यूम से जुड़े कदम उठा सकती है, लेकिन कवर प्राइस बढ़ाना उसके लिए बड़ा लीवर नहीं है।
विज्ञापन राजस्व में 15% की ग्रोथ, कीमत बढ़ाने का बड़ा योगदान
पहली तिमाही में प्रिंट विज्ञापन राजस्व में करीब 15% की बढ़ोतरी को लेकर भी सवाल पूछा गया।
अन्ना अब्राहम ने बताया कि कमर्शियल विज्ञापन के मामले में वॉल्यूम काफी हद तक स्थिर रहा, लेकिन यील्ड में सुधार हुआ। यानी कंपनी को विज्ञापन की समान या मिलती-जुलती मात्रा पर बेहतर रेट हासिल हुआ।
सरकारी विज्ञापन में वॉल्यूम और कीमत दोनों का योगदान रहा। सरकार ने पिछले साल नवंबर में सभी प्रकाशनों के लिए विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी की थी।
पीयूष गुप्ता ने कहा कि कंपनी पिछले काफी समय से यील्ड सुधारने पर फोकस कर रही है और इस तिमाही में इसका असर साफ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि 15% की विज्ञापन ग्रोथ में प्राइसिंग और यील्ड सुधार का बड़ा योगदान है। साथ ही वॉल्यूम भी काफी हद तक मजबूत रहा।
HT English की सर्कुलेशन ग्रोथ में कीमत का बड़ा रोल
HT English की सर्कुलेशन रेवेन्यू में करीब 14% की बढ़ोतरी पर भी सवाल पूछा गया। मैनेजमेंट ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि अखबार की कॉपी संख्या में 14% की वृद्धि हुई है।
अन्ना अब्राहम ने बताया कि यह मुख्य रूप से प्राइसिंग और सब्सक्रिप्शन तथा लाइन कॉपी के मिक्स का असर है।
पीयूष गुप्ता ने कहा कि प्रतिशत बड़ा दिखाई दे सकता है, लेकिन वास्तविक रकम में बदलाव बहुत बड़ा नहीं है। कंपनी प्रमुख इंग्लिश स्पीकिंग मार्केट्स में अपनी कॉपी शेयर को लगभग स्थिर रखने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि कंपनी फिलहाल कॉपी की संख्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं कर रही है और मौजूदा प्रतिस्पर्धी माहौल में यही steady-state circulation आगे भी रहने की उम्मीद है।
कर्मचारी लागत में भी कटौती
कॉन्फ्रेंस कॉल में कर्मचारी लागत घटने पर भी चर्चा हुई। एक निवेशक ने बताया कि कंसोलिडेटेड लेवल पर कर्मचारी लागत पिछले साल के करीब 111 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 99 करोड़ रुपये रह गई है।
इस पर पीयूष गुप्ता ने बताया कि कंपनी पिछले कुछ समय से खर्च कम करने और कामकाज को ज्यादा कुशल बनाने पर जोर दे रही है। इसी के तहत कर्मचारियों और टीम स्ट्रक्चर को कारोबार की जरूरत के हिसाब से व्यवस्थित किया गया है, जिसका असर कर्मचारी लागत में कमी के रूप में दिखा है।
कंपनी पिछले कुछ समय से संगठन को ज्यादा कुशल बनाने और लागत को नियंत्रित करने पर काम कर रही है। यह बदलाव HT Media और HMVL दोनों स्तरों पर दिखाई दे रहा है।
Q1 में HT Media का कुल रेवेन्यू 15% बढ़ा
कॉन्फ्रेंस कॉल में पीयूष गुप्ता ने बताया कि Q1 FY27 में कंपनी का कुल रेवेन्यू करीब 15% बढ़कर 497 करोड़ रुपये रहा। वहीं EBITDA करीब तीन गुना बढ़कर 90 करोड़ रुपये हो गया और EBITDA मार्जिन में करीब 12 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ।
कंपनी का PAT बढ़कर 47 करोड़ रुपये रहा और PAT मार्जिन करीब 9% पहुंच गया।
मैनेजमेंट ने कहा कि लागत पर लगातार नियंत्रण और ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस में सुधार से कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी मजबूत हुई है।
प्रिंट अभी भी कारोबार का सबसे बड़ा आधार
कंपनी के चेयरपर्सन के संदेश का हवाला देते हुए अन्ना अब्राहम ने कहा कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत स्थिर रही है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में साल-दर-साल बढ़ोतरी हुई और मुनाफे में भी सुधार हुआ।
प्रिंट कारोबार अभी भी कंपनी का मुख्य आधार बना हुआ है। विज्ञापन राजस्व बढ़ा है और सर्कुलेशन राजस्व भी मजबूत बना हुआ है। हालांकि कंपनी के लिए महंगा न्यूजप्रिंट, कमजोर रुपया और ग्लोबल सप्लाई चेन में अनिश्चितता आगे भी चिंता के विषय हैं।
कंपनी को आगे भी अच्छे नतीजों की उम्मीद
कॉल के अंत में पीयूष गुप्ता ने कहा कि कंपनी पहली तिमाही के नतीजों से खुश है और उम्मीद करती है कि आने वाली तिमाहियों में भी इस प्रदर्शन को दोहराया जा सके। हालांकि उन्होंने साफ किया कि कंपनी की ओर से कोई औपचारिक फॉरवर्ड गाइडेंस नहीं दी जा रही है। फिर भी, मौजूदा प्रदर्शन और संभावित परिस्थितियों को देखते हुए मैनेजमेंट को आगे भी अच्छे नतीजे आने की उम्मीद है।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने FMCG क्षेत्र की कंपनी RD Retail India Private Limited में 32.5 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
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Vikas Saxena
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने FMCG क्षेत्र की कंपनी RD Retail India Private Limited में 32.5 करोड़ रुपये का निवेश किया है। कंपनी ने अपने पास मौजूद वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलकर RD Retail के 3,927 शेयर हासिल किए हैं। यह जानकारी कंपनी ने 10 अगस्त 2026 को शेयर बाजारों को दी।
कंपनी के मुताबिक, उसने RD Retail में रखे 3,250 वारंट को इक्विटी शेयरों में बदला, जिसकी कुल कीमत 32.5 करोड़ रुपये है। इस रूपांतरण के बाद RD Retail में HMVL की हिस्सेदारी करीब 3.8% हो गई है।
FMCG कारोबार में करती है RD Retail
RD Retail India Private Limited की शुरुआत 2012 में हुई थी और इसका मुख्यालय दिल्ली में है। कंपनी दिल्ली-एनसीआर में रिटेलर्स को प्रमुख FMCG उत्पाद उपलब्ध कराने वाले बी2बी मार्केटप्लेस के तौर पर काम करती है।
कंपनी के कारोबार में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2024-25 में RD Retail का टर्नओवर 77.28 करोड़ रुपये रहा। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में यह 59.04 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022-23 में 68.19 करोड़ रुपये था।
भविष्य में रिटर्न हासिल करने का लक्ष्य
HMVL ने बताया कि RD Retail में निवेश का उद्देश्य भविष्य में पूंजी पर रिटर्न हासिल करना है। साथ ही कंपनी अपने पास मौजूद मीडिया संपत्तियों का फायदा उठाकर इस निवेश का बेहतर इस्तेमाल करना चाहती है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निवेश किसी संबंधित पक्ष के लेनदेन के तहत नहीं आता है और प्रमोटर, प्रमोटर समूह या समूह की कंपनियों की RD Retail में कोई हिस्सेदारी या हित नहीं है।
इस निवेश के लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं है। शेयरों का अधिग्रहण नकद भुगतान के जरिए वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलकर किया गया है।
एचटी मीडिया (HT Media Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी के 95.30 करोड़ रुपये के वारंट इश्यू को मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
एचटी मीडिया (HT Media Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी के 95.30 करोड़ रुपये के वारंट इश्यू को मंजूरी दे दी है। 7 अगस्त 2026 को हुई कंपनी की असाधारण आम बैठक (EGM) में यह प्रस्ताव 88.75% वोटों के साथ पास हो गया।
मिली जानकारी के मुताबिक, इस वारंट इश्यू से जुटाई जाने वाली राशि में से 90 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि 5.30 करोड़ रुपये सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों पर खर्च किए जाएंगे। कंपनी का उद्देश्य अपने कर्ज का बोझ कम करना और वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाना है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर शेयरधारकों की राय बंटी हुई नजर आई। प्रमोटर समूह ने 100% वोट इसके पक्ष में दिए, जबकि सार्वजनिक (पब्लिक) शेयरधारकों के 98.71% वोट इसके विरोध में पड़े। इसके बावजूद प्रमोटर समूह के समर्थन के चलते प्रस्ताव आसानी से पारित हो गया।
इस मंजूरी के तहत कंपनी 3.87 करोड़ से अधिक वारंट 24.57 रुपये प्रति वारंट की कीमत पर जारी करेगी। इनमें प्रमोटर कंपनी Hindustan Times Limited के अलावा कुछ अन्य निवेशकों को भी वारंट आवंटित किए जाएंगे।
कंपनी के अनुसार, इस कदम से कर्ज कम करने में मदद मिलेगी और बैलेंस शीट पहले से अधिक मजबूत होगी। हालांकि, पब्लिक शेयरधारकों के भारी विरोध से यह भी साफ है कि वारंट इश्यू की कीमत और इससे होने वाले संभावित शेयर डाइल्यूशन को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बनी हुई है।
DB Corp Limited ने अपनी 30वीं वार्षिक आम बैठक की तारीख का ऐलान कर दिया है। कंपनी की AGM 2 सितंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-वीडियो माध्यम के जरिए आयोजित की जाएगी।
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Vikas Saxena
DB Corp Limited ने अपनी 30वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) की तारीख का ऐलान कर दिया है। कंपनी की AGM 2 सितंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) और अन्य ऑडियो-वीडियो माध्यम (OAVM) के जरिए आयोजित की जाएगी।
कंपनी ने शेयरधारकों को जानकारी देते हुए बताया कि AGM से पहले रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। ई-वोटिंग 29 अगस्त सुबह 9 बजे से शुरू होकर 1 सितंबर शाम 5 बजे तक चलेगी। जिन शेयरधारकों के पास 26 अगस्त 2026 तक कंपनी के शेयर होंगे, वही मतदान के पात्र होंगे।
कंपनी ने शेयरधारकों से 21 अगस्त तक अपना ई-मेल पता डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (DP) के साथ अपडेट करने की अपील की है, ताकि उन्हें ई-वोटिंग से जुड़ी सभी जानकारी समय पर मिल सके।
इस AGM में कई अहम प्रस्तावों पर शेयरधारकों की मंजूरी मांगी जाएगी। इनमें सुधीर अग्रवाल को 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2031 तक अगले पांच वर्षों के लिए फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी, कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक की पुष्टि और रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे पवन अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति पर भी फैसला लिया जाएगा।
DB Corp ने हाल ही में वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी किए थे। कंपनी की आय में हल्की बढ़ोतरी हुई, लेकिन मुनाफे पर दबाव देखने को मिला। इसके बावजूद कंपनी ने शेयरधारकों के लिए 7 रुपये प्रति शेयर (70%) के इक्विटी डिविडेंड की भी घोषणा की है। AGM में इन सभी महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर शेयरधारकों की राय ली जाएगी।
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 2013 के रेप मामले में तहलका (Tehelka) के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) को दोषी ठहराते हुए ट्रायल कोर्ट का बरी करने वाला फैसला पलट दिया।
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Samachar4media Bureau
तहलका (Tehelka) पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) को वर्ष 2013 के चर्चित रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की गोवा बेंच से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मापुसा (Mapusa) की ट्रायल कोर्ट द्वारा वर्ष 2021 में दिए गए बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया है।
जस्टिस डॉ. नीला गोखले (Justice Dr. Neela Gokhale) और जस्टिस अमित जमसांडेकर (Justice Amit Jamadar) की खंडपीठ ने गोवा सरकार की अपील स्वीकार करते हुए तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code-IPC) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत रेप, यौन उत्पीड़न और अन्य संबंधित अपराधों का दोषी ठहराया।
फैसला सुनाए जाने के समय तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे। उनके वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा (Abad Ponda) ने अदालत से सजा सुनाते समय नरमी बरतने और आदेश पर आठ सप्ताह की रोक लगाने का अनुरोध किया, ताकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपील दायर की जा सके। स्वयं तरुण तेजपाल ने भी अपनी उम्र 62 वर्ष बताते हुए अदालत से रियायत की अपील की।
अब अदालत दोपहर 2:30 बजे सजा की अवधि का ऐलान करेगी। यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित THiNK Fest के दौरान एक जूनियर महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। 2021 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, लेकिन गोवा सरकार की अपील पर हाई कोर्ट ने अब उस फैसले को पलट दिया है।