बिजनेस स्टैंडर्ड (BS) के पत्रकारों पर भी 'संकट', इस्तीफों का दौर शुरू 

ऑटो, टेक्सटाइल समेत कई सेक्टर्स में मंदी की खबरों को प्रकाशित कर रहा मीडिया सेक्टर भी इससे अछूता नहीं रह पा रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 10 September, 2019
Last Modified:
Tuesday, 10 September, 2019
Business Standard

ऑटो, टेक्सटाइल समेत कई सेक्टर्स में मंदी की खबरों को प्रकाशित कर रहा मीडिया सेक्टर भी इससे अछूता नहीं रह पा रहा है। कई मीडिया हाउसेज से छंटनी की खबरों के बीच अब बिजनेस न्यूजपेपर बिजनेस स्टैंडर्ड भी मंदी की चपेट मे आ गया है। बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़-दो साल से लगातार खर्चों को कम करने की मुहिम में जुड़े संस्थान ने अब कई पत्रकारों से रिजाइन मांगा है। वरिष्ठ पद पर आसीन कई नामी पत्रकारो के रिजाइन के बाद से संस्थान में काफी उथल-पुथल है।

इसी बीच बीएस में सीनियर एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत नितिन सेठी ने अपना इस्तीफे की औपचारिक घोषणा भी कर दी है। करीद डेढ़ साल से बीएम में कार्यरत नितिन की ये संस्थान के साथ दूसरी पारी थी। वे इससे पहले भी इसी पद पर जून 2014 से 2017 तक बीएस का हिस्सा रह चुके हैं। अपनी दोनों पारियों के बीच वे 9 महीने के लिए डेप्युटी एडिटर के पद स्क्रॉल मीडिया से जुड़ गए थे। वे टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिंदू और डाउन टू अर्थ मैगजीन के साथ भी काम कर चुके हैं।

अपने इस्तीफे की घोषणा उन्होंने सोशल मीडिया पर करते हुए उन्होंने कुछ इस तरह लिखा है...
I have resigned from the Business Standard with immediate effect. 
2. Here is a link to, more than a 100 stories, more than a hundred thousand words, of investigations, deep dives, analysis, exclusives, long form and opinion I wrote during the short stint. 
https://lnkd.in/f7w_jka 
3. It was particularly great to team up with some of my young and brilliant colleagues at Business Standard. Without them many investigations and deep dives would have never come through with such clarity and at such speed. Several would have never seen the light of the day  without these collaborations.  
4. I would like to believe, we let the facts lead us. We said it straight and never buried facts in the safety of a fake balance. We said it without fear. We did not let go. In the process, I learnt a lot.     
5. Thank you for reading and following. Support reportage, however you can. It forms the substratum of journalism. Revealing facts that the powerful do not want citizens to know.
 

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फ्रंट पेज पर अखबारों में आज किन खबरों को मिली प्रमुखता, पढ़ें यहां

हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला में आज तीसरा जबकि नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर में पांचवा पेज फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Newspapers

दिल्ली की हवा बद से बदतर होती जा रही है। आम जनता से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इसे लेकर चिंतित है, लेकिन हमारे सांसदों के लिए शायद यह गंभीर मुद्दा नहीं। शायद यही वजह है कि इस विषय पर होने वाली अहम बैठक से गौतम गंभीर और हेमा मालिनी नदारद रहे। दिल्ली के हेल्थ इमरजेंसी से जूझने के बीच क्रिकेट की पिच से सियासत की गलियों में कदम रखने वाले गंभीर की इंदौरी पोहा-जलेबी का लुत्फ उठाते तस्वीर कल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। आज अधिकांश अखबारों ने इसे प्रमुखता से जगह दी है।

आज शुरुआत हिन्दुस्तान से करते हैं। अखबार ने भारी विज्ञापनों के चलते तीसरे पेज को फ्रंट का दर्जा दिया गया है। हालांकि, यहां भी पांच बड़ी खबरें ही आ सकी हैं। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, जिसे काफी अच्छे से नेताओं और अफसरों पर कटाक्ष करते हुए लगाया गया है। इसके साथ ही गौतम की जलेबी का लुत्फ उठाते हुए फोटो भी चस्पा की गई है। महाराष्ट्र की सियासत को भी पेज पर रखा गया है है। नए फार्मूले के तहत मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा और कांग्रेस एवं राकांपा भी सरकार में अहम भूमिका निभाएंगे।

वहीं, उपभोक्ता व्यय में गिरावट और सरकार का आंकड़े जारी करने से इनकार भी फ्रंट पेज पर है। इसके अलावा क्रिकेटर मयंक अग्रवाल की उपलब्धि और नागरिकता बिल को भी तवज्जो दी गई है। मोदी सरकार सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता बिल पेश कर सकती है। वहीं, एंकर में श्याम सुमन की बाईलाइन स्टोरी है, जिन्होंने चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई के आखिरी कार्यदिवस के बारे में बताया है। 

अमर उजाला में भी आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, जिसमें सांसद गौतम गंभीर की पोहा-जलेबी का लुत्फ उठाती तस्वीर भी है। इसके पास ही मयंक अग्रवाल की उपलब्धि को फोटो के रूप में लगाया गया है। इंदौर में बांग्लादेश के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच में दोहरा शतक लगाने के साथ ही मयंक ने इस मामले में डॉन ब्रैडमैन को पीछे छोड़ दिया है। सबरीमाला मंदिर विवाद पर जस्टिस नरीमन द्वारा केंद्र को लगाई गई फटकार को भी अखबार ने प्रमुखता से जगह दी है।

इसके अलावा, दिल्ली नगर निगम का बजट, पुलिस-वकील भिड़ंत सहित वित्तमंत्री का बयान भी पेज पर है। दिल्ली नगर निगम के बजट में संपत्ति कर की दरों में इजाफा किये जाने के आसार हैं। वहीं, हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आक्रामक हुए वकीलों ने हड़ताल समाप्त कर ली है। वहीं, वित्तमंत्री ने सरकार की तैयारियों के बारे में बताते हुए कहा है कि बैंकों में जमा राशि पर एक लाख से ज्यादा बीमा मिल सकता है। एंकर में रक्षामंत्री के अरुणाचल दौरे से चीन को लगी ‘मिर्ची’ से जुड़ा समाचार है। राजधानी, शताब्दी और दुरंतों में महंगे हुए खान-पान को अखबार ने संक्षिप्त में जगह दी है। चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई की विदाई की खबर फ्रंट पेज पर नहीं है।

अब रुख करते हैं नवभारत टाइम्स का। अखबार में आज विज्ञापनों की बहार है। इस वजह से पांचवें पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, जिसे गौतम गंभीर की फोटो के साथ आकर्षक अंदाज में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को भी अखबार ने तवज्जो दी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की विदाई को फोटो और रंगीन बैकग्राउंड के साथ पेज पर रखा गया है। एंकर में रेलवे के महंगे हुए खानपान को जगह मिली है। तीन अन्य खबर एक-एक कॉलम में हैं। मसलन, सेप्टिक टैंक की फ्री सफाई, काम पर लौटे वकील और राहुल गांधी के खिलाफ 100 करोड़ के टैक्स का मामला फिर खोला जाएगा। यानी कांग्रेस के युवराज की भी मुश्किलें बढ़ना तय है।

वहीं, दैनिक जागरण को देखें तो यहां भी तीसरा पेज फ्रंट पेज है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है, लेकिन इसमें गौतम गंभीर की फोटो को जगह नहीं दी गई है। ‘सोनिया एवं राहुल गांधी के खिलाफ 100 करोड़ रुपए टैक्स का मामला’ इस खबर को अखबार ने प्रमुखता के साथ लीड के पास ही लगाया है। महाराष्ट्र के सियासी संकट को अपेक्षाकृत काफी बड़ी जगह दी गई है, यदि इसे छोटा लगाया जाता तो कई दूसरी महत्वपूर्ण खबरों को भी फ्रंट पेज पर स्थान मिल सकता था। चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई की विदाई को सबसे नीचे दो कॉलम में रखा गया है। ट्रेनों में महंगे खान-पान को अखबार ने संक्षिप्त में लगाया है।

सबसे आखिर में आज दैनिक भास्कर का रुख करते हैं। चार फुल पेज विज्ञापनों के चलते पांचवें पेज को फ्रंट पेज का दर्जा दिया गया है। लीड दिल्ली की जहरीली हवा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि दिल्ली में चीन जैसे एयर प्यूरीफायर लगाये जाएं। लीड में ही गौतम गंभीर की प्रदूषण पर ‘गंभीरता’ दर्शाती तस्वीर भी है। पेज पर दूसरी प्रमुख खबर के रूप में एक रिपोर्ट को लगाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि उपभोक्ता खर्च में चार दशक बाद गिरावट आई है। हालांकि सरकार आंकड़े जारी करने को तैयार नहीं है। पेज पर जनता की जेब को प्रभावित करने वाला एक समाचार भी है। रेलवे ने राजधानी, शताब्दी और दुरंतों ट्रेनों के खान-पान को काफी महंगा कर दिया है।

महाराष्ट्र की सियासत और दिल्ली विधानसभा चुनाव से जुड़ी अखिलेश कुमार की बाईलाइन स्टोरी को भी पेज पर जगह मिली है। शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस में सरकार बनाने पर सहमति हो गई है, सभी दलों ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। वहीं, अखिलेश बता रहे हैं कि जिन ईवीएम को लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल किया गया था, उनसे ही दिल्ली विधानसभा चुनाव कराये जाएंगे। एंकर में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की विदाई से जुड़ी पवन कुमार की बाईलाइन खबर है। अखबार ने फ्रंट पेज पर क्रिकेटर मयंक अग्रवाल की उपलब्धि को फोटो के रूप में स्थान दिया है। दोहरा शतक जड़ने के मामले में मयंक अब ब्रैडमैन से आगे निकल गए हैं।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: ले-आउट की नजर से देखें तो आज ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘हिन्दुस्तान’ ने सीमित जगह में भी काफी अच्छा फ्रंट पेज तैयार किया है।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी अखबारों ने अच्छा काम किया है। खासकर लीड के मामले में ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिन्दुस्तान’ और ‘दैनिक भास्कर’ अव्वल हैं।     

3: कलात्मक शीर्षक का टोटा आज भी अखबारों में दिखाई दे रहा है।

4: खबरों के लिहाज से फ्रंट पेज देखें तो ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘दैनिक जागरण’ ने जहां क्रिकेटर मयंक की उपलब्धि को जगह नहीं दी है, वहीं राहुल और सोनिया गांधी की खबर को पेज पर लगाकर सबसे आगे निकल गए हैं। वहीं ‘अमर उजाला’ से चीफ जस्टिस की खबर के मामले में चूक हुई है।

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देखें, आज के प्रमुख अखबारों के फ्रंट पेज

आज दैनिक जागरण में जहां दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं, वहीं हिन्दुस्तान में जैकेट विज्ञापन की वजह से तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Friday, 15 November, 2019
Last Modified:
Friday, 15 November, 2019
Newspapers

भारतीय राजनीति में राफेल की अहमियत कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि, देश की सर्वोच्च अदालत दूसरी बार भी यह साफ कर चुकी है कि मोदी सरकार इस मामले में पाक-साफ है, लेकिन कांग्रेस अपने रुख पर कायम है। इस खबर को आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से उठाया है। आज सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की। फ्रंट पेज की शुरुआत सात कॉलम टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें दिल्ली की जहरीली हवा पर बच्चों की पीएम से गुहार को लगाया गया है। इस खबर का शीर्षक ‘बच्चों ने पीएम मोदी से कही मन की बात, हमें साफ हवा चाहिए’ आकर्षक है। लीड, राफेल है। सुप्रीम कोर्ट ने लड़ाकू विमान सौदे की जांच वाली पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। साथ ही ‘चौकीदार चोर है’ के लिए राहुल गांधी को फटकार भी लगाई है।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के संबंध में दायर याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ फैसला लेगी। इस खबर को भी प्रमुखता के साथ दो कॉलम में रखा गया है। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के 16 बागी विधायक भाजपाई हो गए हैं। इस खबर को भी पेज पर जगह मिली है। वहीं, पेज पर सबसे नीचे दो कॉलम में किसी जमाने में आइंस्टीन को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन का समाचार है। खबर में यह भी बताया गया है कि उनके शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई।

अब नवभारत टाइम्स का रुख करें तो फ्रंट पेज पर आज भी ज्यादा जगह नहीं है। लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसे लड़ाकू विमान और उदास मुद्रा में बैठे राहुल गांधी की फोटो के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर सबरीमाला मंदिर है। सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ मंदिर सहित मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर भी फैसला सुनाएगी। वहीं, जेएनयू विवाद और दिल्ली के प्रदूषण को डेढ़-डेढ़ कॉलम जगह मिली है। गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन सहित कुछ खबरों को सिंगल में लगाया गया है।

आज दैनिक जागरण ने दो फ्रंट पेज बनाये हैं। पहले पेज पर आधा पेज विज्ञापन है और लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसे पूरे आठ कॉलम लगाया गया है। लीड में ही सबरीमाला मंदिर विवाद और अनुच्छेद 370 को भी रखा गया है। जहां सबरीमाला मामला सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच के हवाले किया गया है, वहीं कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।

दूसरे फ्रंट पेज को देखें तो यहां लीड जहरीली हवा है। दूसरी प्रमुख खबर ब्रिक्स सम्मलेन में पीएम मोदी का बयान है। इसके साथ ही संजय मिश्र की बाईलाइन खबर को भी पेज पर जगह मिली है। मिश्र बता रहे हैं कि कांग्रेस ने शिवसेना के सामने कौन सी शर्त रखी है। गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन का समाचार सबसे नीचे दो कॉलम में है।

दैनिक भास्कर की बात करें तो आज भी मास्टहेड में प्रयोग किया गया है। बाल दिवस पर प्रदूषण के चलते घरों में कैद रहे बच्चों की व्यथा को ‘बाल विवश’ शीर्षक के साथ बयां किया गया है। नि:संदेह यह अच्छा प्रयास है, लेकिन पेज कल जैसा ही नजर आ रहा है, क्योंकि कल भी इसी थीम पर मास्टहेड तैयार किया गया था। लीड राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला है,  जिसे दो लाइन के शीर्षक के साथ विस्तार से समझाया गया है। सबरीमाला मंदिर से जुड़ी खबर को भी प्रमुखता मिली है।

वहीं, महाराष्ट्र के सियासी संकट को भी पेज पर रखा गया है। शिवसेना और राकांपा समझौते के करीब आ गए हैं। इसके अलावा, पेज पर वोडाफोन एवं एयरटेल को हुए घाटे और जमीयत उलेमा ए हिंद का बयान है। देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन का कहना है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन नहीं लेनी चाहिए। एंकर में गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के निधन के समाचार को लगाया गया है।

आखिर में आज हिन्दुस्तान का रुख करते हैं। अखबार में जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरा पेज फ्रंट पेज है। लीड राफेल है, जिसे ‘राफेल पर फिर खिंची तलवारें’ शीर्षक के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर के रूप में पेज पर दिल्ली का प्रदूषण है। बादलों के चलते बढ़ी धुंध के आज से छंटने की उम्मीद है। वहीं, क्रिकेटर अश्विन की उपलब्धि को फोटो के साथ रखा गया है। बांग्लादेश के साथ मैच में अपने प्रदर्शन के साथ ही अश्विन ने घरेलू मैदान पर तेजी से विकेट लेने के मामले में कुंबले को पीछे छोड़ दिया है।

महाराष्ट्र की सियासत के साथ ही कर्नाटक के बागी विधायकों के भाजपा का दामन थामने की खबर को पेज पर जगह मिली है। इसके अलावा, सबरीमाला मंदिर और जेएनयू में विवेकानंद की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने के प्रयास से जुड़ी खबरों को दो-दो कॉलम में रखा गया है। एंकर में केके उपाध्याय की बाईलाइन स्टोरी है, जिसमें उन्होंने गणितज्ञ विशिष्ट नारायण सिंह के जीवन से जुड़ी बातों पर प्रकाश डाला है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: ले-आउट की बात करें तो आज ‘अमर उजाला’ और ‘दैनिक भास्कर’ अव्वल नजर आ रहे हैं, जबकि ‘हिन्दुस्तान’ का फ्रंट पेज काफी भरा-भरा दिखाई दे रहा है।

2: खबरों की प्रस्तुति में ‘दैनिक भास्कर’, ‘अमर उजाला’ के साथ ‘नवभारत टाइम्स’ बेहतर है। ‘हिन्दुस्तान’ ने भी लीड को अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है, लेकिन बाकी खबरें उतनी आकर्षक दिखाई नहीं दे रहीं।     

3: कलात्मक शीर्षक ‘अमर उजाला’ और ‘नवभारत टाइम्स’ में हैं। ‘अमर उजाला’ ने जहां टॉप बॉक्स की हेडलाइन में प्रयोग किया है, वहीं ‘नवभारत टाइम्स’ ने लीड की।

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आज क्रिएटिव है दैनिक भास्कर का फ्रंट पेज, अमर उजाला का भी अच्छा प्रयास

जैकेट विज्ञापन के चलते आज हिन्दुस्तान में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
Newspapers

दिल्ली का प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस नकारात्मक खबर के साथ सकारात्मक खबर यह है कि चीफ जस्टिस के कार्यालय से भी ‘सूचना के अधिकार’ (RTI) के तहत अब जानकारी मांगी जा सकेगी। इन दोनों खबरों को दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अधिकांश अखबारों ने प्रमुखता से उठाया है। आज शुरुआत नवभारत टाइम्स से करते हैं। फ्रंट पेज पर एक बड़ा विज्ञापन है, लेकिन हमेशा की तरह ज्यादा से ज्यादा समाचारों को पेज पर रखने का सराहनीय प्रयास किया गया है। लीड सूचना का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि चीफ जस्टिस का दफ्तर भी आरटीआई के दायरे में आएगा।

दूसरी बड़ी खबर जहरीली हवा है। दिल्ली में प्रदूषण के चलते इमरजेंसी जैसी स्थिति बन गई है। स्कूल-कॉलेजों को दो दिनों के लिए बंद किया गया है। उधर, महाराष्ट्र के सियासी संकट को लेकर अमित शाह के बयान को भी तवज्जो मिली है। शाह का कहना है कि जब चुनाव पूर्व ही यह साफ कर दिया गया था कि देवेन्द्र फडनवीस ही सीएम होंगे, तब शिवसेना ने विरोध क्यों नहीं किया? इसके अलावा, पेज पर पांच सिंगल खबरें हैं। इनमें जेएनयू में फीस वृद्धि का फैसला वापस, वोडाफोन नहीं छोड़ेगी भारत और दिल्ली में कैब ड्राइवर बनकर लूटपाट प्रमुख हैं।

अब दैनिक जागरण का रुख करें तो फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। लीड सूचना का अधिकार है, जिसे ‘कुछ शर्तों के साथ अब सीजेआई का दफ्तर भी आरटीआई के दायरे में’ शीर्षक तले विस्तार से लगाया गया है। दिल्ली की जहरीली हवा पेज पर दूसरी बड़ी खबर के रूप में मौजूद है। कर्नाटक के बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत मिली है और इस राहत को ‘दैनिक जागरण’ ने प्रमुखता के साथ जगह दी है। तत्कालीन स्पीकर ने 17 विधायकों को अयोग्य करार दिया था। कोर्ट ने इस फैसले को तो सही माना, लेकिन विधायकों को उपचुनाव लड़ने की इजाजत दे दी। इसके अलावा, कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान की पैंतरेबाजी भी पेज पर है। वहीं,जेएनयू में फीस वृद्धि वापस सहित कुछ समाचारों को संक्षिप्त में रखा गया है।

आज दैनिक भास्कर का फ्रंट पेज कुछ अलग ही नजर आ रहा है। सबसे पहली बात जो पाठकों को आकर्षित करती है, वो है बाल दिवस और दिल्ली के प्रदूषण को एक साथ मास्ट हेड में दर्शाने की कला। ‘दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में दो दिन की छुट्टी, बच्चे पहली बार बाल दिवस घर पर मनाएंगे’ शीर्षक के साथ मास्टहेड में लगी यह खबर सरकारी व्यवस्थाओं पर करारी चोट करती है। बाल दिवस पर मास्टहेड तो अधिकांश अखबारों ने लगाया है, लेकिन ‘दैनिक भास्कर’ दो कदम आगे है।

लीड सूचना का अधिकार है, जिसे काफी विस्तार से समझाया गया है। इसी में कर्नाटक के 17 बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी रखा गया है। महाराष्ट्र के सियासी संकट के बीच उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेताओं की मुलाकात को पेज पर प्रमुखता मिली है। लता मंगेशकर से जुड़े समाचार को भी पेज पर रखा गया है। उनकी तबीयत नाजुक बनी हुई है। इसके अलावा, अयोध्या के कायाकल्प को लेकर योगी सरकार द्वारा तैयार किये गए ब्लूप्रिंट के बारे में बताती खबर दो कॉलम में हैं। साथ ही कुछ अन्य समाचारों को संक्षिप्त में जगह मिली है।

उधर, हिन्दुस्तान में विज्ञापनों की भरमार है। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है और यहां भी आधा पेज विज्ञापन है। लीड चीफ जस्टिस दफ्तर का आरटीआई के दायरे में आना है, जिसे काफी विस्तार से पाठकों के समक्ष पेश किया गया है। दिल्ली का प्रदूषण दूसरी प्रमुख खबर है। अयोग्य विधायकों को सिंगल कॉलम में जगह मिली है, वहीं जेएनयू में फीस वृद्धि वापस और अमित शाह की दो टूक को दो-दो कॉलम में रखा गया है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने की सभी संभावनाएं समाप्त होने के बाद अब शाह ने शिवसेना पर निशाना साधा है। शाह का कहना है कि हमने पहले ही सीएम को लेकर स्थिति साफ कर दी थी, लिहाजा शिवसेना कि नई मांगें नहीं मानी जाएंगी।

सबसे आखिर में आज अमर उजाला की बात करते हैं। अखबार ने बाल दिवस के मौके पर टॉप में पूरे आठ कॉलम में एक प्रेरक स्टोरी लगाई है। इस स्टोरी में सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने बताया है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो समझ बढ़ाए और दिल से अमीर बनाए। अखबार ने लीड में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लगाया है। जिसमें चीफ जस्टिस दफ्तर का आरटीआई के दायरे में आना, कर्नाटक के बागी 17 विधायकों को उप चुनाव लड़ने की इजाजत देना और वित्त अधिनियम 2017 में बनाए गए नियम रद्द करने का फैसला शामिल है। दिल्ली के प्रदूषण को फोटो के साथ लीड के बगल में जगह मिली है। 29 से नर्सरी दाखिले की दौड़, कश्मीर में आतंकियों की गोलीबारी से कारोबारी की मौत और राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के लिए बिल से जुड़ी खबर भी पेज पर है। इसके अलावा एंकर में कुलभूषण जाधव को जगह मिली है। खबर के अनुसार, जाधव मामले के बाद पाकिस्तान अब सैन्य कानून में बदलाव कर सकता है।        

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज ‘नवभारत टाइम्स’ का फ्रंट पेज काफी आकर्षक नजर आ रहा है। हालांकि, आधे पेज पर ही खबर लग सकी हैं, लेकिन पेज को बेहद खूबसूरती से डिजायन किया गया है।

2: खबरों की प्रस्तुति में नि:संदेह आज की बाजी ‘दैनिक भास्कर’ के नाम रही है। ‘नवभारत टाइम्स’ ने लीड को भले ही ज्यादा आकर्षक अंदाज में सजाया है, लेकिन दिल्ली के प्रदूषण को बाल दिवस से जोड़ते हुए खबर को जिस तरह से ‘दैनिक भास्कर’ ने पेश किया है, वो काबिल-ए-तारीफ है।     

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज भी सभी अखबार एक जैसे हैं, यानी किसी ने हेडलाइन को लेकर प्रयोग नहीं किया है।

4: खबरों की बात करें तो ‘नवभारत टाइम्स’ को छोड़कर सभी अखबार लगभग एक समान हैं। ‘नवभारत टाइम्स’ से 17 बागी विधायकों की खबर के मामले में चूक हो गई है। वैसे, ‘दैनिक जागरण’ और ‘दैनिक भास्कर’ सबसे आगे कहे जा सकते हैं। ‘दैनिक भास्कर’ में जहां लता मंगेशकर की खबर फ्रंट पेज पर है, वहीं ‘दैनिक जागरण’ में कुलभूषण जाधव की।

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जानिए, किन मायनों में खास है अमित राजपूत की ये किताब

दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग स्थित पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उनके आवास पर सौंपी किताब की पहली प्रति

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Amit Rajpoot

पत्रकार अमित राजपूत की किताब ‘अंतर्वेद प्रवरः गणेश शंकर विद्यार्थी’ का लोकार्पण शुक्रवार को किया गया। दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग स्थित पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उनके आवास पर अमित राजपूत ने अपनी किताब की पहली प्रति भेंट सौंपी।

इस मौके पर अमित राजपूत ने बताया कि इस किताब में गणेश शंकर विद्यार्थी से जुड़ी उन बातों को शामिल किया गया है, जो अब तक लोगों के सामने नहीं आई हैं। यही नहीं, आजादी के बाद गणेशजी के प्रभावों से जुड़ी कई राजनीतिक घटनाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

किताब के लोकार्पण के मौके पर अमित राजपूत के साथ शैलेन्द्र भदौरिया, वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी शंकर बाजपेयी और भारतीय जनसंचार के पूर्व महानिदेशक व वरिष्ठ पत्रकार केजी सुरेश, राजीव तिवारी, राजश्री त्रिवेदी और हर्ष कुमार मिश्र सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी और विद्वान शामिल रहे।

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तिरंगे का अपमान कर बैठा अखबार, अब उठ रहे सवाल

‘स्वदेशी जागरण मंच’ के राष्ट्रीय संयोजक अश्वनी महाजन ने उठाया यह मुद्दा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
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‘स्वदेशी जागरण मंच’ के राष्ट्रीय संयोजक हैं अश्वनी महाजन। अश्वनी महाजन ने दो-तीन दिन पहले एक अखबार की खबर के लिंक के साथ ट्वीट किया। उन्होंने ट्विटर को टैग करते हुए शिकायत की कि यह ट्विटर हैंडल हमारे देश के झंडे का अपमान कर रहा है। उसके बाद से वह ट्वीट वायरल होता चला गया। ‌ दरअसल वह अखबार था ‘फाइनेंसियल टाइम्स’ (Financial Times) और खबर थी पीएम नरेंद्र मोदी की नीतियों पर एक आलोचनात्मक कॉलम। इसमें फोटो की जगह लगा हुआ था तिरंगा, जिसमें चक्र को कई टुकड़ों में दिखाया गया था।

‘फाइनेंसियल टाइम्स’ के चीफ फॉरेन कॉलमिस्ट गिडियोन‌ रैचमैन (GIDEON RACHMAN)  हर हफ्ते दुनिया भर की हस्तियों से जुड़ा अपना एक कॉलम ' द रैचमैन रिव्यू' लिखते हैं। इस बार उनके निशाने पर थे पीएम मोदी। कॉलम की हेडिंग थी-'India's Narendra Modi has had a free pass from the West for too long।'

इस कॉलम में उन्होंने नरेंद्र मोदी की दुनिया भर के नेताओं से मुलाकातों के बाद जो छवि बनी है, उस पर तो चर्चा की ही, नरेंद्र मोदी का दूसरा चेहरा भी दिखाने की कोशिश की कि कैसे उनकी अल्पसंख्यक विरोधी नीतियों की वजह से, अनुच्छेद 370 हटाने की वजह से देश-दुनिया में आलोचना होती है।

यहां तक तो शायद कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन उस कॉलम के साथ एक ग्राफिकल फोटो लगाई गई, जिसमें तिरंगा बना हुआ था और तिरंगे के बीच के चक्र को तोड़कर कई भागों में बांट दिया गया था। हालांकि, चित्र सांकेतिक था और खबर के मिजाज को बता रहा था, लेकिन कानून के मुताबिक अब नेशनल फ्लैग के साथ कोई भी तोड़-मरोड़ नहीं कर सकते हैं और इसी को लेकर अश्विनी महाजन ने मुद्दा बना दिया।

‘फाइनेंसियल टाइम्स’ को भी शायद अपनी गलती महसूस हुई और उस तस्वीर की जगह मोदी का एक फोटो लगा दिया लेकिन लोगों ने तिरंगे की वो तस्वीर सेव कर ली थी। अब उन्हें ऐतराज है कि क्यों अखबार ने माफी नहीं मांगी और न ही खेद जताया। केवल तस्वीर बदलकर इतिश्री कर दी। ऐसे में लोग सोशल मीडिया पर 1971 के ऑनर एक्ट के मुताबिक अखबार पर एक्शन लेने की मांग कर रहे हैं।

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अयोध्या मामले पर नेशनल हेराल्ड ने लिख दिया कुछ ऐसा, अब मांगनी पड़ी माफी

भारतीय जनता पार्टी के विरोध जताने पर अखबार के एडिटर-इन-चीफ ने ट्वीट कर कहा, लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
National Herald Newspaper

अयोध्या मामले में शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपने एक आर्टिकल को लेकर कांग्रेस के स्वामित्व वाले अंग्रेजी अखबार ‘नेशनल हेराल्ड’ (National Herald) ने माफी मांग ली है। इस बारे में अखबार के एडिटर-इन-चीफ की ओर से कहा गया है, ‘Why a devout Hindu will never pray at the Ram Temple in Ayodhya शीर्षक से पब्लिश आर्टिकल से यदि किसी व्यक्ति अथवा समूह की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो इसके लिए हम माफी मांगते हैं। लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था।’

इसके साथ ही माफीनामे में यह भी कहा गया है, ‘अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का हम पूरा सम्मान करते हैं। इस आर्टिकल में जो विचार रखे गए हैं, वो लेखक के निजी विचार हैं और उनका 'नेशनल हेराल्ड' के विचारों से कोई नाता नहीं है।’

बता दें कि ‘नेशनल हेराल्ड’ के इस आर्टिकल में सुप्रीम कोर्ट की तुलना पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से की गई थी। आर्टिकल में दावा किया गया था कि यह फैसला पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की याद दिलाता है, जिसने वहां के तत्कालीन गवर्नर जनरल गुलाम मुहम्मद को कथित तौर पर अवैध कार्य की अनुमति दे दी थी। आर्टिकल में यह भी कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने वही फैसला दिया है, जो  विश्व हिंदू परिषद् और भारतीय जनता पार्टी चाह रहे थे। हालांकि, अब अखबार ने माफी मांगने के साथ ही वेबसाइट से इस आर्टिकल को हटा दिया है।

'नेशनल हेराल्ड' में छपे आर्टिकल की हेडिंग का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं-

 

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इस अखबार की नजर में मक्खन जैसी हैं गाजियाबाद की सड़कें, आप क्या कहते हैं?

सोशल मीडिया पर सीएम साहब को हकीकत और छलावे के बीच का अंतर समझा रहे हैं लोग

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
Press

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर आपकी गाड़ी भले ही हिचकोले खाती चल रही हो, लेकिन सरकार की नजर में सबकुछ ठीक है। वैसे बदहाल सड़कों को ‘खुशहाल’ बताने में मीडिया भी पीछे नहीं है। उसे भी लगता है कि सपा का ‘उत्तम प्रदेश’ योगीराज में ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ बन गया है। हालांकि, पूरा का पूरा मीडिया आंख बंद करके एक दिशा में दौड़ा जा रहा है, ऐसा भी नहीं है। कुछ को सड़कों के गड्ढे भी दिखते हैं, लेकिन सरकार उन्हें देखना नहीं चाहती।

फिलहाल सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय द्वारा किए गए एक ट्वीट को लेकर चर्चा चल रही है। वैसे इसे चर्चा से ज्यादा कटाक्ष कहना बेहतर होगा, क्योंकि लोग सीएम साहब को हकीकत और छलावे के बीच का अंतर समझा रहे हैं। अब आपको भी यह सवाल बेचैन कर रहा होगा कि आखिर हमारे सीएम साहब ने ऐसा क्या लिख दिया। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार सड़कों को गड्ढों से शत प्रतिशत मुक्त करने के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है, झटका लगा क्या? कुछ ऐसा ही झटका सोशल मीडिया यूजर्स को लगा, जब उन्होंने सीएम ऑफिस का वह ट्वीट पढ़ा, जिसमें लिखा था, ‘सूबे की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान में मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी शत प्रतिशत सफल रहे हैं। एक तरह से सूबे के विकास का यह एक ऐसा फेस है, जिससे लगता है कि उत्तर प्रदेश की बराबरी में और कौन होगा’।

इस झटके की तीव्रता तब और बढ़ गई, जब ट्वीट के साथ पोस्ट किये गए एक अखबार की कटिंग पर नजर गई। अखबार का नाम है दैनिक ‘हिंट’, जो सरकार को पसंद आने वाले शब्दों में यह बयां कर रहा है कि सूबे खासकर गाजियाबाद की सड़कें मक्खन जैसी हो गई हैं। ये संपादकीय अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है।

दैनिक ‘हिंट’ में छपे इस संपादकीय को आप यहां पढ़ सकते हैं-

संभव है अखबार ने जमीनी हकीकत जानी हो। उसके पत्रकारों ने गड्ढों वाली सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाई हों, तब इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया हो कि ‘सबकुछ ठीक’ है, लेकिन जनता को सबकुछ ठीक नहीं लग रहा। यही वजह है कि ट्विटर यूजर्स खबर लिखने वाले और सरकार के बाशिंदों को प्रदेश की सड़कों की असल स्थिति जानने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। क्या दोनों में से कोई यह चैलेंज लेगा? यह देखने वाली बात होगी।

अब जरा पढ़ लेते हैं कि लोगों को नाराज करने वाली खबर का मजमून आखिर है क्या। तो शंभूनाथ शुक्ल का पहले पेज पर प्रकाशित संपादकीय कहता है, ‘योगीजी ने जो कहा, किया...गाजियाबाद शहर में गलियों की वे सड़कें, जो वर्षों से टूटी-फूटी पड़ी थीं, और जिन पर इतने खड्डे थे कि दिन में भी लोग गिरते-पड़ते चल पाते थे, वे सब अपने योगीजी कि कृपा से ऐसी हो गई हैं कि अब लोग उन पर फर्राटा भरते हुए निकलते हैं।’ वैसे, सरकार की तारीफ यहीं खत्म नहीं होती और भी बहुत कुछ कहा गया है, लेकिन सार समझने के लिए इतना काफी है।

गाजियाबाद से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘हिंट’ का यह तारीफी संदेश बदहाल सड़कों की मार झेल रहे लोगों को कुछ ऐसा लगा, जैसे-अपने फिसल जाने पर खिलखिलाकर हंसते दूसरों को देखकर लगता है। लिहाजा, उन्होंने भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने केवल शब्दबाण ही नहीं दागे, बल्कि साक्ष्य स्वरूप तस्वीरें भी चस्पा कीं, ताकि खबर लिखने वाले को भी समझ आ जाए कि जिन सड़कों की बातें कही गई हैं, वो न सपा के ‘उत्तम प्रदेश’ में थीं और न ही योगी के ‘सर्वोत्तम प्रदेश’ में हैं।

अनगपाल सिंह नामक यूजर ने सीएम को टैग करते हुए लिखा है, ‘आपको झूठी जानकारी दी जा रही है। यदि हकीकत देखनी है तो एक बार गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के De-Notified709b हाईवे पर आएं। यहां आठ किलोमीटर टुकडे की हालत भयंकर बनी हुई है। हर तरफ गंदगी, अतिक्रमण, गड्डे, धूल-मिट्टी, ट्रैफिक जाम है।’

वहीं दिनेश यादव ने लिखा है, ‘आओ भाजपाइयों रायबरेली घुमाएं, शरीर के सारे बल निकल जाएंगे, इतने गड्ढे हैं, यही पता नही चलता कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।’ जिस पर कटाक्ष करते हुए ओंकार नाथ यादव ने ट्वीट दागा है, ‘भाई-जब गड्ढ़े का विकास हुआ तो तालाब बन गया' गड्ढा कहां रह गया? उसका तो तालाब नाम हो गया. योगी जी की बात मे सच्चाई हैँ! गड्ढा मुक्त सड़क’।

ये महज कुछ उदाहरण हैं कि किस तरह लोगों को दैनिक ‘हिंट’ का यह संपादकीय पसंद नहीं आया, जिसे अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने लिखा है। आम जनता के अलावा, राजनेताओं ने भी इस संपादकीय पर तीखे बाण चलाये। इस दौड़ में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह सबसे आगे रहे। आईपी सिंह ने सीएम कार्यालय के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘कैसा ‘ओछा’ अखबार चुना है @myogiadityanath जी को खुश करने के लिए। इस अखबार का संपादक भी इसे नहीं पढ़ता होगा। व्यक्ति नहीं तो सीएम पद की ही इज्जत रखते। मुख्यमंत्री का मजाक उनका ही आधिकारिक अकाउंट बना रहा है। बाकियों ने झूठ छापने से मना कर दिया?’

हालांकि, विरोध में अव्वल आने की जद्दोजहद में आईपी सिंह जिन शब्दों का प्रयोग कर बैठे, वो भी ट्विटर यूजर्स को नागवार गुजरे हैं। कई लोगों ने उन्हें भाषा पर संयम रखने की नसीहत दी है। 

 

 

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कैसे रहे प्रमुख हिंदी अखबारों के फ्रंट पेज, पढ़ें यहां

अमर उजाला के फ्रंट पेज पर आज कोई विज्ञापन नहीं है। हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, जबकि दैनिक भास्कर में फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन है।

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Monday, 11 November, 2019
Last Modified:
Monday, 11 November, 2019
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राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब सरकार आगे की प्रक्रिया तय करने में जुट गई है। इसी तैयारी को दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने प्रमुखता से लगाया है। शुरुआत आज ‘दैनिक भास्कर’ से करते हैं। अखबार के फ्रंट पेज पर नजर डालें तो लीड अयोध्या है। जिसे ‘राम मंदिर की नींव हिंदू नववर्ष या रामनवमी पर’ शीर्षक के साथ टॉप के छह कॉलम में सजाया गया है। इसके पास ही बांग्लादेश पर टीम इंडिया की जीत को फोटो के साथ रखा गया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन के समाचार को दैनिक भास्कर ने दो कॉलम में लगाया है।

इसके अलावा, महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को भी प्रमुखता मिली है। वहीं, नवजोत सिंह सिद्धू की नई परेशानी भी पेज पर है। हालांकि, इस परेशानी को खुद सिद्धू ने ही आमंत्रित किया है। सिद्धू साहब ने फिर से अपने क्रिकेटर मित्र और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं और उनके इस पाक प्रेम पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है। साथ ही देश की पहली प्राइवेट ट्रेन ‘तेजस’ की कमाई भी सिंगल के रूप में पेज पर है। ‘तेजस’ ने एक महीने में 70 लाख रुपए कमाए हैं।

आज ‘हिन्दुस्तान’ में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस फ्रंट पेज पर भी दो बड़े विज्ञापन हैं, लेकिन फिर भी अच्छी-खासी खबरों की गुंजाइश बन गई है। लीड अयोध्या है, जिसके मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट का गठन इसी महीने किया जाएगा। पेज पर अयोध्या फैसले के बाद देश में कायम सद्भावना को दर्शाती एक फोटो भी है। जुलूस-ए-मोहम्मदी के मौके पर कानपुर में हिंदुओं ने फूल बरसाकर मुस्लिमों का स्वागत किया। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन की खबर के साथ ही महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को भी प्रमुखता से जगह दी गई है। इसके अलावा, वकीलों का हड़ताली हठ और महिला क्रिकेटर शैफाली की उपलब्धि को भी ‘हिन्दुस्तान’ ने फ्रंट पेज पर रखा है।

वहीं, अमर उजाला में फ्रंट पेज पर एक भी विज्ञापन नहीं होने की वजह से अखबार की टीम को मनमुताबिक ढंग से पेज सजाने का पूरा मौका मिला। टॉप बॉक्स में ‘भाईचारे का संदेश देगा राम मंदिर पर बनने वाला ट्रस्ट’ शीर्षक के साथ अयोध्या को रखा गया है। अपनी बाईलाइन में हिमांशु मिश्र ने बताया है कि ट्रस्ट में मुस्लिम प्रतिनिधित्व भी संभव है। इसके पास ही पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन का समाचार है। चुनाव आयोग की असल ताकत का अहसास शेषन ने ही कराया था। लीड महाराष्ट्र का सियासी संग्राम है। भाजपा और शिवसेना के औपचारिक रिश्ते का आखिरकार अंत होता नजर आ रहा है। शिवसेना अपने पुराने सहयोगी को 'तलाक' देकर नया साथी तलाश रही है। 

बांग्लादेश से सीरीज जीतने वाली टीम इंडिया को भी फ्रंट पेज पर जगह मिली है। इसके साथ ही महिला क्रिकेटर शैफाली की उपलब्धि को भी लगाया गया है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए टी-20 में 49 गेंदों में 73 रन बनाये हैं। स्विस बैंक में 1955 से अब तक 3500 खाते निष्क्रिय पड़े हैं, जिनमें से 10 से ज्यादा भारतीयों के भी हैं। इस खबर को प्रमुखता के साथ लगाया गया है। वहीं, वकील-पुलिस विवाद फिर सुर्खियों में है। निचली अदालतों में वकील आज से फिर कामकाज ठप करेंगे। एंकर में दिल्ली की बिगड़ती हवा है। खबर बताती है कि ऑड-ईवन से छूट मिलते ही राजधानी की हवा फिर से खराब हो गई। इसके अलावा, पेज पर अयोध्या फैसले को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट डालने वाले 90 लोगों की गिरफ्तारी का समाचार भी है।

अब ‘नवभारत टाइम्स’ की बात करें तो फ्रंट पेज पर काफी विज्ञापन है। लीड अयोध्या है, जिसे 'राम नवमी से पहले मंदिर का शिलान्यास' शीर्षक से पूरे सात कॉलम में लगाया गया है। इसमें ट्रस्ट की रूपरेखा तैयार करने के पीएम के निर्देश के साथ ही कार्यशाला में शुरू होने वाले काम को रखा गया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के निधन की खबर को भी फ्रंट पेज पर जगह दी गई है। बांग्लादेश पर भारत की जीत से जुड़े क्रिकेट के समाचार को भी फोटो के साथ पेज पर रखा गया है। अखबार ने महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को दो कॉलम में लगाया है, वहीं पेज पर करतारपुर से जुड़ी खबर भी है। कुछ समाचार संक्षिप्त में भी हैं।

आखिर में अब ‘दैनिक जागरण’ का रुख करते हैं। अखबार में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस फ्रंट पेज पर दो बड़े विज्ञापन हैं। खास बात यह है कि आज इस अखबार ने महज दो-तीन खबरों में फ्रंट पेज समाप्त करने का प्रयास नहीं किया है। पेज पर चार बड़ी और दो सिंगल खबरें लगाई हैं। लीड अयोध्या है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की धर्मगुरुओं के साथ हुई बैठक की फोटो के साथ लगाया गया है। दूसरी बड़ी खबर महाराष्ट्र का सियासी संग्राम है। भाजपा के पीछे हटने के बाद अब राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार बनाने का न्यौता दिया है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर छह लोगों की मौत, एच1 वीजा धारक भारतीयों को अमेरिका द्वारा मिली छूट, टीएन शेषन का निधन और बांग्लादेश पर टीम इंडिया की जीत का समाचार भी पेज पर है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: सबसे पहले बात लेआउट की। ‘अमर उजाला’ को छोड़कर बाकी सभी अखबारों में लगभग आधा पेज विज्ञापन है, इसलिए ले-आउट पर ज्यादा कुछ कहना संभव नहीं। फिर भी ‘दैनिक जागरण’ को छोड़कर सभी के फ्रंट पेज आकर्षक दिखाई दे रहे हैं।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘दैनिक भास्कर’ बेहतर हैं। हालांकि, ‘अमर उजाला’ का फ्रंट पेज भी अच्छा लग रहा है, लेकिन पहले जैसा नहीं है।

3: कलात्मक शीर्षक पर आज किसी भी अखबार ने जोर नहीं दिया है।

4: खबरों की बात करें तो ‘सभी अखबार लगभग एक समान हैं। 

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अयोध्या पर 'सुप्रीम' फैसले को लेकर आज अखबारों में कुछ यूं रही कवरेज

आज अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान ने फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं लिया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Sunday, 10 November, 2019
Last Modified:
Sunday, 10 November, 2019
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अयोध्या विवाद आखिरकार सुलझ गया है। लंबे समय से अदालती कार्यवाही में उलझी विवादित जमीन के ‘असली मालिक’ की पहचान सुप्रीम कोर्ट ने कर दी है। खास बात यह है कि इस ऐतिहासिक फैसले को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया है। फैसला सामने आने के बाद जिस तरह का सौहार्दपूर्ण माहौल देश में देखने को मिला, वह अपने आप में अहम है। इस अहम दिन की मीडिया ने भी खास तैयारी की थी, जिसके परिणाम आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों में नजर आ रहे हैं। आमतौर पर महत्वपूर्ण अवसरों पर अखबारों के फ्रंट पेज विज्ञापनों से पटे रहते हैं। कंपनियों को भी ऐसे ही मौकों की तलाश रहती है, लेकिन अयोध्या के ऐतिहासिक फैसले को विस्तार से पाठकों तक पहुंचाने के लिए अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान ने फ्रंट पेज पर कोई विज्ञापन नहीं लिया है, जो काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि, शेष अहम खबरों के लिए बनाये गए दूसरे फ्रंट पेज पर जरूर कुछ अखबारों में विज्ञापन हैं। 

शुरुआत करते हैं हिन्दुस्तान से। लीड को एक तरह से मास्टहेड से ही शुरू कर दिया गया है। यानी अखबार के ‘लोगो’ के बैकग्राउंड में अयोध्या की बड़ी फोटो है, जिसके नीचे ‘राम मंदिर का रास्ता साफ’ शीर्षक तले खबर को लगाया गया है। फैसले से जुड़ी चार प्रमुख बातों को अलग से रेखांकित किया गया है, ताकि एक ही नजर में पाठकों को फैसला समझ आ जाए। हिंदू-मुस्लिम पक्षों की प्रतिक्रिया, पीएम मोदी सहित प्रमुख हस्तियों के बयान के साथ फैसले पर टिकी यूपी सरकार की निगाहों को भी पेज पर रखा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कंट्रोल रूम में बैठकर सुरक्षा संबंधी तैयारियों की समीक्षा करते रहे। एंकर में हेमंत श्रीवास्तव और आदर्श शुक्ल की बाईलाइन है, जिन्होंने फैसले के बाद अयोध्या के हालातों पर अपनी कलम चलाई है। इसके अलावा, पांचवें पेज को भी फ्रंट पेज बनाया गया है, जिसकी लीड भी अयोध्या है। ‘मस्जिद के लिए मुनासिब भूमि मिले’ शीर्षक के साथ लीड में मुस्लिम पक्ष से जुड़े फैसले को विस्तार से समझाया गया है। श्रद्धालुओं का पहला जत्था करतारपुर रवाना, इस समाचार को भी पेज पर जगह दी गई है।

अब रुख करते हैं अमर उजाला का। फ्रंट पेज की शुरुआत 30 साल पुराने फोटो से की गई है। हालांकि, इसे मास्टहेड से लगाने के बजाय मास्टहेड को छोटा कर दिया गया है। इस फोटो ने पेज को इसलिए भी खास बना दिया है, क्योंकि 30 वर्ष पूर्व 9 नवंबर को ही रामजन्मभूमि का शिलान्यास हुआ था और 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। लीड का शीर्षक है ‘रामलला विराजमान’ और इसमें सभी महत्वपूर्ण बातों को अलग से रेखांकित किया गया है।

'अमर उजाला' ने ‘हिन्दुस्तान’ से इतर लीड में फैसला सुनाने वाले जजों की फोटो को भी जगह दी है। इसके साथ ही दोनों पक्षों सहित प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रियाओं को भी रखा गया है। पांचवें पेज पर बने दूसरे फ्रंट पेज के टॉप बॉक्स पर अयोध्या के फैसले पर पीएम मोदी के बयान को सजाया गया है। जिसका शीर्षक है ‘आज ही बर्लिन की दीवार गिरी थी, यह तारीख साथ बढ़ने की सीख’। इसके साथ ही अयोध्या पर पाकिस्तान की बौखलाहट भी पेज पर है। पाक के विदेशमंत्री कुरैशी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मोदी सरकार की कट्टरता को झलकाता है। हालांकि, भारत ने भी कुरैशी को करार जवाब दिया है। लीड करतारपुर रवाना हुआ श्रद्धालुओं का पहला जत्था है। इसके अलावा, पेज पर महाराष्ट्र का सियासी संग्राम, फरीदाबाद में परिवार की हत्या और एंकर में दिल्ली के प्रदूषण को लगाया गया है।

नवभारत टाइम्स ने ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नई’ शीर्षक के साथ लीड अयोध्या फैसले को लगाया है। लीड में सद्भावना की मिसाल दर्शाती दो तस्वीरें हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर फैसले से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को भी जगह मिली है। इसके अलावा, फैसले के सियासी और सामाजिक असर को भी समझाने का खूबसूरत प्रयास किया गया है। सबसे नीचे अहम सवालों पर कोर्ट के जवाब हैं।

दूसरे फ्रंट पेज की लीड भी अयोध्या है, जिसे आकर्षक शीर्षक ‘मंदिर निर्माण के वास्ते, कोर्ट ने तय किए रास्ते’ के साथ फोटो सहित रखा गया है। करतारपुर गलियारे के उद्घाटन और अयोध्या पर पाकिस्तानी बौखलाहट को पेज पर बड़ी जगह मिली है। साथ ही फैसले पर मुस्लिम पक्ष की अलग-अलग राय से भी पाठकों को रूबरू कराया गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जहां फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने के संकेत दिए हैं, वहीं, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने फैसले को चुनौती देने से इनकार किया है।

वहीं, दैनिक जागरण की बात करें तो खूबसूरत इलस्ट्रेशन के साथ लीड को सजाया गया है। इसमें भगवान राम और प्रस्तावित मंदिर नजर आ रहे हैं। शीर्षक ‘श्रीराम’ तले खबर को विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा गया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि बड़े-बड़े पैरा के बजाय पॉइंटर को तवज्जो दी गई है। इसी में प्रमुख हस्तियों की प्रतिक्रिया भी शामिल है।

दूसरे फ्रंट पेज पर भी अयोध्या ही लीड है। खबर का शीर्षक ‘मंदिर वहीं बनेगा’ है, जो हिंदू पक्ष की सालों पुरानी इच्छा को दर्शाता है। फैसले पर मुस्लिम पक्ष में मतभेद और वरिष्ठ वकील परासरन की दलीलों को भी पेज पर रखा गया है। परासरन ने अदालत के समक्ष जो दलीलें रखी थीं, उन्हीं के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। एंकर में करतारपुर गलियारे का उद्घाटन है, जिसे आकर्षक हेडलाइन ’72 साल की अरदास पूरी, करतारपुर साहिब के हुए दर्शन’ के साथ मोदी-मनमोहन की फोटो सहित सजाया गया है।

आखिर में दैनिक भास्कर को देखें तो अखबार ने आज ‘रामलला ही विराजमान’ शीर्षक के साथ लीड को सजाया है। यह शीर्षक ‘अमर उजाला’ से काफी मिलता जुलता है। फैसले की 4 बड़ी बातों को अलग से रेखांकित किया गया है। इसके अलावा, फैसला सुनाने वाले जजों की प्रतिक्रिया को फोटो के साथ रखा गया है।

दैनिक भास्कर ने थोड़ा आगे बढ़ते हुए यह भी बताने का प्रयास किया है कि कितने कारीगर लगाने से कितने वर्षों में मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। लीड में फोटो के बजाय प्रस्तावित राम मंदिर का इलस्ट्रेशन लगाया गया है। इसके साथ ही एएसआई की उस रिपोर्ट को भी पाठकों के समक्ष रखा गया है, जिसने फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: आज सबसे पहले बात कलात्मक शीर्षक की। प्रयोग सभी अखबारों ने किये हैं, लेकिन ताज ‘नवभारत टाइम्स’ को पहनाया जा सकता है। पहले पेज की हेडलाइन है ‘मंदिर वहीं, मस्जिद नई’ जो दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करती है। कम शब्दों में पूरी बात कहने का इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। दूसरे पेज की हेडिंग ‘मंदिर निर्माण के वास्ते, कोर्ट ने तय किये रास्ते’ तुकबंदी दर्शाती है।   

2: लेआउट के लिहाज से ‘दैनिक भास्कर’ बेहतर नजर आ रहा है। अखबार का फ्रंट पेज काफी खुला-खुला है।

3: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो सभी अखबारों ने बेहतरीन काम किया है, लेकिन ‘अमर उजाला’ थोड़ा आगे है। लीड की प्रस्तुति काफी आकर्षक दिखाई दे रही है।

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आज कुछ ऐसे नजर आ रहे हैं प्रमुख अखबारों के फ्रंट पेज

विज्ञापनों की अधिकता की वजह से नवभारत टाइम्स में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं जबकि हिन्दुस्तान में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Friday, 08 November, 2019
Last Modified:
Friday, 08 November, 2019
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दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों ने आज अयोध्या विवाद और पाकिस्तान की पैंतरेबाजी को प्रमुखता से लगाया है। अयोध्या विवाद में जहां कभी भी फैसला आ सकता है, वहीं पाकिस्तानी सेना ने करतारपुर जाने वाले भारतीयों के लिए पासपोर्ट अनिवार्य कर दिया है। आज सबसे पहले बात करते हैं अमर उजाला की। लीड पाकिस्तान है, जिसे चार कॉलम में सजाया गया है और इसी में मनमोहन सिंह की करतारपुर यात्रा को भी जगह मिली है। पाकिस्तान में सेना बड़ी है या सरकार, यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है। इमरान खान सरकार ने पासपोर्ट की अनिवार्यता से इनकार किया है, जबकि सेना चाहती है कि भारतीयों को पासपोर्ट के बिना एंट्री न मिले। अब इस लड़ाई में जीत किसकी होती है, ये तो वक्त ही बताएगा।

दूसरी बड़ी खबर के रूप में अयोध्या विवाद है, जिसका शीर्षक है ‘अयोध्या पर फैसले की घड़ी, गृहमंत्रालय ने राज्यों को किया अलर्ट’। वहीं, घाटी के मुद्दे को कोर्ट में ले जाना कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को बेहद भारी पड़ा है। अदालत ने उन्हें जमकर फटकार लगाते हुए पूछा है कि क्या दंगा भड़कने के बाद प्रतिबंध लगाए जाते? इस खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से लगाया है, जबकि कश्मीर में बर्फबारी को फोटो के रूप में जगह मिली है। दुःख की बात यह है कि बर्फबारी में दो जवानों सहित सात लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा, वकील-पुलिस कांड का एक और विडियो सामने आया है, जिससे जुड़ी खबर को दो कॉलम में रखा गया है। खबर के अनुसार, डीसीपी मोनिका भारद्वाज के साथ बदसलूकी की गई थी। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे की मुश्किलों को भी पेज पर जगह मिली है। ईडी ने अपने आरोपपत्र में बताया है कि राहुल पुरी ने हेलीकाप्टर घोटाले के आरोपितों को धमकाया था। एंकर में नेपाली गुस्से को रखा गया है। दरअसल, नेपाल ने भारत के नए नक्शे पर एतराज जताते हुए उत्तराखंड के कुछ हिस्सों पर दावा किया है। इसके अलावा, भारत-बांग्लादेश टी-20 में रोहित शर्मा की धमाकेदार पारी की खबर को पहले कॉलम में लगाया गया है।

अब रुख करते हैं दैनिक जागरण का। लीड करतारपुर पर पाकिस्तानी पैंतरेबाजी है, जिसे छह कॉलम में करतारपुर गुरुद्वारे की फोटो के साथ लगाया गया है। अयोध्या पर गृह मंत्रालय की एडवाइजरी सिंगल कॉलम बॉक्स में है। महाराष्ट्र के सियासी संग्राम को आज भी बड़ी जगह मिली है, साथ ही गुलाम नबी को मिली कोर्ट की फटकार को भी प्रमुखता से लगाया गया है। दैनिक जागरण ने क्रिकेट को संक्षिप्त में भी जगह नहीं दी है, हालांकि कमलनाथ के भांजे से जुड़ी खबर को जरूर पेज पर रखा गया है।

दैनिक भास्कर की बात करें तो पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें अयोध्या मामले को रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले सरकार ने नफरत फैलाने वाले 20 लाख वॉट्सऐप ग्रुप बंद कराये हैं। लीड महाराष्ट्र का सियासी संग्राम है। यदि राज्य में भाजपा-शिवसेना का झगड़ा नहीं सुलझा तो राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ सकता है, क्योंकि नई सरकार के गठन के लिए महज दो दिन ही शेष हैं। दैनिक भास्कर ने क्रिकेट को काफी तवज्जो दी है। हालांकि, इसमें सिर्फ पुरुष टीम ही नहीं महिला खिलाड़ी मंधाना की उपलब्धि को भी जगह मिली है। स्मृति मंधाना सबसे तेज रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। उन्होंने 21 पारियों में 2000 रन बनाकर विराट कोहली को भी पीछे छोड़ दिया है। वहीं, रोहित शर्मा ने बांग्लादेश के खिलाफ मैच में धमाकेदार पारी खेली और इस तरह वह टी-20 में 25 हजार से ज्यादा रन बनाने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।

करतारपुर विवाद को पेज के सेकंड हाफ में रखा गया है। इसके अलावा, वकील-पुलिस विवाद, कश्मीर में बर्फ़बारी, पाकिस्तान में हिंदू छात्रा से दुष्कर्म और नीरव मोदी की धमकी को भी पेज पर जगह मिली है। पाक में 16 सितंबर को जिस हिंदू छात्रा की हत्या हॉस्टल में की गई थी, उसके साथ दुष्कर्म की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई है। वहीं, नीरव मोदी ने कहा है कि यदि उसे भारत भेजा जाता है तो वो खुदकुशी कर लेगा। एंकर में दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट है। इसमें बताया गया है कि किस तरह पाकिस्तानी एजेंसी सेवानिवृत्त सैनिकों के फर्जी प्रोफाइल बनाकर फैजियों को फंसा रही है।

आज नवभारत टाइम्स में विज्ञापनों की भरमार है, जिस वजह से दो फ्रंट पेज बनाये गए हैं। पहले फ्रंट पेज की बात करें तो टॉप बॉक्स में वकील-पुलिस विवाद सुलझाने की नाकाम कोशिश को रखा गया है, जबकि लीड करतारपुर पर पाकिस्तान की पैंतरेबाजी है। हाई कोर्ट के आदेश पर वकील और पुलिस के बीच बातचीत से विवाद निपटाने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं बनी। दूसरे फ्रंट पेज पर टॉप बॉक्स में फोटो न्यूज हैं। पहली फोटो दिल्ली के प्रदूषण को दर्शाती है और दूसरी कश्मीर की बर्फबारी की है। लीड सबसे अलग रियल एस्टेट सेक्टर को मिली राहत में कटौती है। सरकार ने साफ किया है कि कोर्ट में जिन बिल्डरों पर केस चल रहा है, उन्हें राहत नहीं मिलेगी। यानी आम्रपाली, यूनिटेक और जेपी के प्रोजेक्ट के लिए पैसे नहीं मिलेंगे।

इसके नीचे तीन खबरों को एक-एक कॉलम में लगाया गया है। इनमें अयोध्या विवाद, महाराष्ट्र का सियासी संकट और दिल्ली हवाईअड्डे पर यात्रियों को मिली सुविधा शामिल है। अब यात्रियों को जांच के लिए अपने लैपटॉप को बैग से बाहर नहीं निकालना पड़ेगा। वहीं, एंकर में एक विवादस्पद विज्ञापन है। दरअसल आईआरसीटीसी से जुड़े एक निजी ठेकेदार ने रेलवे में नौकरियों के संबंध में एक विज्ञापन जारी किया, जिसमें कहा गया कि आवेदक अग्रवाल वैश्य समाज के होने चाहिए। अब जातिगत आधार पर इस तरह नौकरियां बांटी जाएंगी तो हंगामा लाजमी है। बात जब बढ़ी तो फटकार का दौर शुरू हुआ और ठेकेदार को माफी मांगनी पड़ी। वहीं, भारत-बांग्लादेश मैच को संक्षिप्त में जगह मिली है। नवभारत टाइम्स के पहले फ्रंट पेज पर आधा पेज विज्ञापन होने के कारण खबरों वाला भाग ही शो हो रहा है, इसलिए यहां पर खबरों वाले भाग को ही लगाया गया है जबकि दूसरा फ्रंट पेज पूरा शो हो रहा है। 

आखिर में आज हिन्दुस्तान को देखें तो अखबार में विज्ञापनों के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। लीड अयोध्या है, जबकि दिल्ली में मिली सस्ती प्याज को दूसरी बड़ी खबर की तरह पेश किया गया है। राजधानी में कल कई जगहों पर सस्ती प्याज उपलब्ध कराई गई, जिसे लेने के लिए लोगों की कतारें लगी रहीं। करतारपुर विवाद को भी अखबार ने प्रमुखता से रखा है, साथ ही महाराष्ट्र का सियासी संग्राम भी पेज पर है। महारष्ट्र में शिवसेना और भाजपा का रिश्ता 'तलाक' के मोड़ पर पहुंच चुका है और सबकी निगाहें अब राज्यपाल पर हैं। वैसे, ये कोई पहला मौका नहीं हैं। दोनों पार्टियां पहले भी आपस में लड़ती रही हैं। दिल्ली की जहरीली हवा को आज एंकर में रखा गया है। खबर के अनुसार, बारिश के बावजूद दिल्ली को प्रदूषण से राहत नहीं मिली है। इसके अलावा, पेज पर चार सिंगल समाचार हैं, लेकिन क्रिकेट और कमलनाथ के भांजे को जगह नहीं मिली है।

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के नजरिये से आज अमर उजाला अव्वल है, वहीं नवभारत टाइम्स ने भी सीमित जगह में अच्छा फ्रंट पेज तैयार किया है। दैनिक भास्कर की बात करें तो फ्रंट पेज बीते कुछ दिनों से टाइप्ड दिखाई दे रहा है। खासकर, बॉटम में कुछ नया करने का प्रयास नहीं किया जा रहा। कभी एंकर और दो कॉलम या उनके बीच में सिंगल बस यही रहता है।

2: खबरों की प्रस्तुति में जरूर दैनिक भास्कर का नंबर अमर उजाला के साथ आता है। दोनों ही अखबारों ने बेहद खूबसूरती से फ्रंट पेज पर खबरों को सजाया है।

3: कलात्मक शीर्षक के मामले में आज सभी अखबार एक जैसे हैं, किसी ने भी हेडलाइन में कोई प्रयोग नहीं किया है।

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