आज इन खबरों को मिली अखबारों के फ्रंट पेज पर जगह

अमर उजाला में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, जबकि नवोदय टाइम्स में आज फ्रंट पेज पर कोई बड़ा विज्ञापन नहीं है

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 31 August, 2019
Last Modified:
Saturday, 31 August, 2019
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मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को गति देने के लिए कुछ बड़े फैसले लिए हैं। अब इनका परिणाम क्या होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन अखबारों की अच्छी आर्थिक स्थिति के इंडिकेटर यानी विज्ञापनों की, दिल्ली से प्रकाशित होने वाले प्रमुख समाचार पत्रों में आज भी भरमार है। आज सबसे पहले अमर उजाला की बात करें तो फ्रंट पेज पर पूरे पेज का विज्ञापन है, जिसकी वजह से तीसरे पेज को फ्रंट बनाया गया है। अखबार ने पूरे सात कॉलम में लगभग आधे पेज तक लीड को जगह दी है। ‘महाविलय...अब सिर्फ 12 सरकारी बैंक’ शीर्षक के साथ लीड को इस अंदाज में पेश किया गया है कि पाठक एक नजर में ही सब कुछ समझ जाए। आज ही मांग भी यही है। अधिकांश लोग पूरी खबर पढ़ने में विश्वास नहीं रखते। वे न्यूज का केवल वही भाग देखते हैं, जो उन्हें जरूरी लगता है, इसलिए अखबार प्रेजेंटेशन पर ज्यादा जोर देने लगे हैं।

लीड में ही जीडीपी की गिरावट को रखा गया है, जो छह साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। यौन शोषण का आरोप झेल रहे पूर्व मंत्री चिन्मयानंद दूसरी बड़ी खबर के रूप में पेज पर हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सख्त रुख अपना रहा है। इस समाचार के पास ही चिदंबरम की मुश्किलों से जुड़ी खबर को डेढ़ कॉलम में जगह मिली है, वह तीन दिन और सीबीआई की हिरासत में रहेंगे। सीबीआई ने देशभर में 150 जगह छापे मारे हैं, अमर उजाला ने इस न्यूज को अपने प्रिय डॉटेड बॉक्स में दो कॉलम उतारा है। एंकर में अयोध्या विवाद की सुनवाई को रखा गया है। हिंदू पक्षकार का तर्क है कि इस्लाम में बाबरी मस्जिद वैध नहीं है।

आज नवोदय टाइम्स का फ्रंट पेज देखें तो इस पर कोई बड़ा विज्ञापन नहीं है। अखबार ने सभी अखबारों से अलग जीडीपी में गिरावट और बैंकों में विलय को एक समान तवज्जो दी है। पहले चार कॉलम में छह साल में सबसे निचले स्तर पर आई जीडीपी को रखा गया है और इसके बाद के चार कॉलम बैंकों के विलय के नाम हैं। नवोदय टाइम्स में पिछले कुछ दिनों से लीड को लेकर सकारात्मक प्रयोग देखने को मिल रहे हैं। यौन शोषण के आरोपित पूर्व मंत्री चिन्मयानंद और चिदंबरम की मुश्किलों को प्रमुखता से लगाया गया है। पाक सेना की ना-पाक हरकतें भी डीप दो कॉलम में हैं। इसके अलावा, बिहार में पान मसाले पर पाबंदी और पीएम मोदी के प्रधान सचिव से जुड़े समाचार को पेज पर जगह मिली है। एंकर में पुष्पेंद्र मिश्रा की स्टोरी है, जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह मेधावी छात्र को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।     

वहीं, नवभारत टाइम्स में आज विज्ञापन का आलम यह है कि पांचवें पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है और इस पर भी काफी विज्ञापन है। नवभारत ने ‘विकास’ की सुस्ती को लीड बनाया है और बैंकों के विलय को पैकेज के रूप में दो कॉलम में रखा गया है। इसके अलावा पेज पर पाकिस्तान में सिख युवती के धर्मांतरण से जुड़ा वह समाचार भी है, जो कल से ही सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। इसके अलावा  इस पेज पर चिन्मयानंद से जुड़ी तीन कॉलम खबर के साथ ही कुछ सिंगल खबरें हैं। इसके साथ ही दो कॉलम में फोटो फीचर के रूप में कलर स्क्रीन में लगी एक खबर में बताया गया है कि कैसे एक बच्ची को फ्रैक्चर होने पर प्लास्टर करने के लिए सरकारी अस्पताल में उसकी गुड़िया का 'इलाज' किया गया, तब बच्ची चुप हुई।

यदि हम दैनिक जागरण को देखें तो अखबार में आज जैकेट विज्ञापन है और तीसरा पेज फ्रंट पेज बनाया गया है। अमर उजाला की तरह जागरण ने भी बैंकों के विलय की खबर को तवज्जो दी है और जीडीपी में गिरावट को नीचे अलग से लगाया है। ‘विलय से बलवान बनेंगे सरकारी बैंक’ शीर्षक के साथ लीड की प्रस्तुति आकर्षक है। इसके पास ही दो कॉलम में सीबीआई के देशभर में छापे का समाचार है। पेज पर चौथी और एकमात्र खबर आज आने वाली एनआरसी की अंतिम सूची है, जिसे एंकर में सजाया गया है।

अब हिन्दुस्तान का रुख करते हैं। यहां जैकेट विज्ञापन है और तीसरे पेज को फ्रंट पेज का रूप दिया गया है। लीड अर्थव्यवस्था है, लेकिन बैंकों के विलय के बजाय जीडीपी की गिरावट को प्रमुखता दी गई है। ‘संकट: आर्थिक विकास दर पांच फीसदी पर टिकी’ शीर्षक तले गिरावट के असर और आशंका को भी बतौर ग्राफिक्स दर्शाया गया है। बैंकों का विलय इसके बाद है। लीड के पास ही दो-दो कॉलम में तीन खबरों को रखा गया है। पहली इमरान खान की नई चाल, दूसरी पूर्व मंत्री चिन्मयानंद और तीसरी बिहार में शराब के बाद अब पान मसाले पर भी रोक। यह कहना गलत नहीं होगा कि हिन्दुस्तान इस तरह से डीसी लगाने को लेकर टाइप्ड होता जा रहा है। सीबीआई छापे के साथ ही एनआरसी की अंतिम सूची से जुड़ी खबर को भी प्रमुखता के साथ जगह दी गई है। एंकर में काम की खबर है, जिसे आज सबसे ज्यादा पढ़ा जाएगा। ‘कल से बदल जाएंगे यातायात, बीमा और कर से जुड़े नियम’ हेडलाइन के साथ नियमों में बदलाव को समझाया गया है।

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'अग्रदूत' समाचार समूह की स्वर्ण जयंती पर PM मोदी ने कही ये बात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को ‘अग्रदूत’ समाचार समूह के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन किया।

Last Modified:
Thursday, 07 July, 2022
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को ‘अग्रदूत’ समाचार समूह के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन किया। पीएम मोदी 6 जुलाई को करीब शाम साढ़े चार बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

बता दें कि ‘अग्रदूत’ असम का प्रमुख अखबार है। इसकी शुरुआत द्वि-साप्ताहिक अखबार के रूप में हुई थी और इसकी स्थापना असम के वरिष्ठ पत्रकार कनक सेन डेका ने की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डेका जी के मार्गदर्शन में दैनिक अग्रदूत ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। इमरजेंसी के दौरान भी जब लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला हुआ, तब भी दैनिक अग्रदूत और डेका जी ने पत्रकारीय मूल्यों से समझौता नहीं किया। बीते कुछ दिनों से असम बाढ़ के रूप में बड़ी चुनौती और कठिनाइयों का सामना भी कर रहा है। असम के अनेक जिलों में सामान्य जीवन बहुत अधिक प्रभावित हुआ है। हिमंता जी और उनकी टीम राहत और बचाव के लिए दिनरात बहुत मेहनत कर रही है। मैं मुख्यमंत्री और अन्य के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रहा हूं।

उन्होंने कहा कि मैं आज असम के लोगों और अग्रदूत के पाठकों को ये भरोसा दिलाता हूं कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर, लोगों की मुश्किलें कम करने में जुटी हैं। दैनिक अग्रदूत के पिछले 50 वर्षों की यात्रा असम में हुए बदलाव की कहानी सुनाती है। उन्होंने कहा कि जन आंदोलनों ने इस बदलाव को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। जन आंदोलनों ने असम की सांस्कृतिक विरासत और असमिया गौरव की रक्षा की और अब जन भागीदारी की बदौलत असम विकास की नई गाथा लिख रहा है।

उन्होंने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड में भारतीय भाषाओं के विस्तार को रोका गया और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, रिसर्च को इक्का-दुक्का भाषाओं तक सीमित कर दिया गया। भारत के बहुत बड़े वर्ग की उन भाषाओं तक, उस ज्ञान तक पहुंच ही नहीं था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत डिजिटल ज्ञान की बदौलत 21वीं सदी में चौथी औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा, ‘हमारा जोर अपनी भाषाओं में ज्ञान उपलब्ध कराने पर है। इसलिए, हम राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन पर काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी मातृ भाषाओं को बढ़ावा दिया है।’ उन्होंने कहा कि सभी भारतीयों को इंटरनेट से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हर किसी को इंटरनेट से जोड़ना जरूरी है। यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की हमारी पहल को सफल बनाने में मदद करेगा।’ 

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियान में हमारे मीडिया ने जो सकारात्मक भूमिका निभाई है, उसकी पूरे देश और दुनिया में आज भी सराहना होती है। इसी तरह, अमृत महोत्सव में देश के संकल्पों में भी आप भागीदार बन सकते हैं।

बता दें कि इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा उपस्थित रहे। वह ‘अग्रदूत’ की स्वर्ण जयंती समारोह समिति के मुख्य संरक्षक थे।

‘अग्रदूत’ की शुरुआत असमिया भाषा में एक द्वि-साप्ताहिक के रूप में हुई थी, लेकिन वर्ष 1995 में इसका नियमित दैनिक समाचार पत्र के रूप में प्रकाशन शुरू हुआ। इसने असम की एक विश्वसनीय और प्रभावशाली आवाज के रूप में अपनी पहचान बनायी है।

यहां, देखिए और सुनिए क्या कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने-

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युवा खेल पत्रकार उमेश राजपूत ने ‘दैनिक जागरण’ को कहा अलविदा

वह छह साल से ज्यादा समय से इस अखबार के नोएडा स्थित कार्यालय में कार्यरत थे और स्पोर्ट्स डेस्क पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

Last Modified:
Wednesday, 06 July, 2022
Umesh Rajput

युवा खेल पत्रकार उमेश राजपूत ने ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagarn) को अलविदा कह दिया है। वह छह साल से ज्यादा समय से इस अखबार के नोएडा स्थित कार्यालय में कार्यरत थे और स्पोर्ट्स डेस्क पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। समाचार4मीडिया से बातचीत में उमेश राजपूत ने बताया कि वह जल्द ही अपनी नई पारी शुरू करेंगे और वहां जॉइन करने के बाद इसके नाम का खुलासा करेंगे।

बता दें कि उमेश राजपूत मूल रूप से मथुरा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं, लेकिन उनकी अधिकांश पढ़ाई-लिखाई मथुरा के साथ ही मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर में हुई है। ग्वालियर की जीवाजी (Jiwaji) यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट उमेश राजपूत ने ‘लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान’ (LNIPE), ग्वालियर से स्पोर्ट्स जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा भी किया है। उन्होंने हिसार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री भी हासिल की।

उमेश राजपूत ने वर्ष 2003 में ग्वालियर में एक केवल न्यूज चैनल के साथ अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की। बाद में मुरैना में अपने साथियों के साथ मिलकर केबल न्यूज चैनल भी शुरू किया। बाद में पत्रकारिता की डिग्री हासिल करने के लिए उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता से दो साल का ब्रेक लिया। इस दौरान विभिन्न समाचार पत्र और पत्रिकाओं में खेल से जुड़े उनके लेख प्रकाशित होते रहे। उन्होंने वर्ष 2008 में ‘डीडी न्यूज’ में स्पोर्ट्स डेस्क पर इंटर्नशिप के साथ सक्रिय पत्रकारिता में वापसी की। इसके बाद वह ‘प्रसार भारती‘ के साथ जुड़ गए थे। यहां उन्होंने ‘ऑल इंडिया रेडियो‘ और ‘डीडी स्पोर्ट्स‘ के साथ काम किया।

‘दैनिक जागरण’ से पहले वह ‘नवभारत टाइम्स’ के दिल्ली और मुंबई ऑफिस में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा ‘द सी एक्सप्रेस’ (Sea Express), आगरा और ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar), कोटा में भी कार्य कर चुके हैं। समाचार4मीडिया की ओर से उमेश राजपूत को उनके नए सफर के लिए अग्रिम शुभकामनाएं।

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राष्ट्रीय विमर्श के अहम पहलुओं के बारे में बतातीं अरुण आनंद की दो नई किताबों ने दी ‘दस्तक’

दिल्ली में रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इन किताबों का विमोचन किया।

Last Modified:
Saturday, 02 July, 2022
Arun Anand Book Launching

जाने-माने लेखक, प्रखर वक्ता और वरिष्ठ पत्रकार अरुण आनंद की नवीनतम दो किताबों 'द तालिबान: वॉर एंड रिलीजन इन अफगानिस्तान' (The Taliban: War and Religion in Afghanistan)  और ‘द फॉरगॉटन हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ (The Forgotten History of India) ने मार्केट में दस्तक दे दी है।

इन दोनों किताबों की लॉन्चिंग एक जुलाई को दिल्ली में रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में हुई। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे से होने वाले कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इन किताबों को लॉन्च किया।

‘प्रभात प्रकाशन‘ की ओर से आयोजित किए जाने वाले इस कार्यक्रम में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ (Guest of Honour) के रूप में ‘इंडिया फाउंडेशन’ के डायरेक्टर कैप्टन आलोक बंसल, और ‘सुप्रीम कोर्ट’ के सीनियर एडवोकेट अमन सिन्हा शामिल रहे। कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कंवल जीत सिंह ढिल्लों भी शामिल रहे।

इस किताब के बारे में पुस्तक के लेखक अरुण आनंद ने बताया कि 'द तालिबान: वॉर एंड रिलीजन इन अफगानिस्तान' तालिबान के बनने, उसके सफाए और फिर से सिर उठाने के बारे में है जबकि ‘द फॉरगॉटन हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ में इतिहास के उन तथ्यों के बारे में बताया गया है, जो कभी सामने ही नहीं आए और जिनके बारे में लोगों को जानने की जरूरत है।

देश के कई प्रमुख समाचार-पत्रों, समाचार एजेंसियों व टी.वी. समाचार चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके अरुण भारतीय राजनीति के विविध पक्षों के गहन विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई पक्षों पर उनके शोधपरक लेख प्रकाशित हुए हैं। अंग्रेजी, हिंदी व फ्रेंच पर समान अधिकार रखने वाले अरुण अंग्रेजी में एक उपन्यास व भारतीय मूल के नोबल पुरस्कार विजेताओं की जीवनियों का संकलन प्रकाशित कर चुके हैं।

इसके अलावा तीन पुस्तकों का अनुवाद अंग्रेजी से हिंदी में कर चुके हैं, जिसमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पुस्तक ‘ऑडेसिटी ऑफ होप’ का हिंदी अनुवाद ‘आशा का सवेरा’ भी शामिल है। अरुण आनंद को करीब तीन दशक का अनुभव है। पूर्व में उन्होंने  दो पुस्तकें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तथा एक किताब रामजन्मभूमि पर लिखी है। फिलहाल उनकी दो नई पुस्तकें चर्चा में हैं, जिनकी एक जुलाई को लॉन्चिंग हुई है।

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'The New Indian Express' में एडिटर बनीं वरिष्ठ पत्रकार सांत्वना भट्टाचार्य

वह इस समूह से करीब 12 साल से जुड़ी हुई हैं। वह दिसंबर 2020 से कर्नाटक में रेजिडेंट एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं।

Last Modified:
Friday, 01 July, 2022
Santwana

जानी-मानी पत्रकार सांत्वना भट्टाचार्य को अंग्रेजी अखबार ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (The New Indian Express) का नया एडिटर नियुक्त किया गया है। बता दें कि वह इस समूह से करीब 12 साल से जुड़ी हुई हैं। वह दिसंबर 2020 से कर्नाटक में रेजिडेंट एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं। इससे पहले वह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ (Indian Express) में बतौर पॉलिटिकल एडिटर कार्यरत थीं।

भट्टाचार्य को प्रिंट मीडिया में काम करने का 25 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह करीब दो साल तक ‘इंडिया टुडे’ (India Today) समूह में भी अपनी पारी खेल चुकी हैं। इसके अलावा भी वह तमाम प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।

सांत्वना भट्टाचार्य मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं। उनका जन्म और पढ़ाई-लिखाई कोलकाता में हुई है। पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने कोलकाता में ‘द फाइनेंसियल’ (The Financial Express) से की थीं। हालांकि, वह यहां करीब एक साल तक ही कार्यरत रहीं और इसके बाद दिल्ली शिफ्ट हो गईं।

समाचार4मीडिया से बातचीत में सांत्वना भट्टाचार्य ने बताया कि बाल श्रम (चाइल्ड लेबर) पर की गई उनकी स्टोरी काफी चर्चित रही थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया था। उनकी यह स्टोरी बाल श्रम के खिलाफ मुहिम में मील का पत्थर साबित हुई। उन्होंने नीतिगत मामलों, संसद, राजनीति व चुनावों को भी लंबे समय तक कवर किया है। इसके अलावा उन्होंने कई बड़ी स्टोरी भी ब्रेक की हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार अरुण आनंद की दो किताबों की लॉन्चिंग एक जुलाई को

दिल्ली में रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में आयोजित कार्यक्रम में होगी इन किताबों की लॉन्चिंग

Last Modified:
Monday, 27 June, 2022
Book Launching

जाने माने लेखक, प्रखर वक्ता और वरिष्ठ पत्रकार अरुण आनंद की नवीनतम दो किताबें 'द तालिबान: वॉर एंड रिलीजन इन अफगानिस्तान' (The Taliban: War and Religion in Afghanistan)  और ‘द फॉरगॉटन हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ (The Forgotten History of India) लॉन्चिंग के लिए तैयार हैं।

इन दोनों किताबों की लॉन्चिंग एक जुलाई को दिल्ली में रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हॉल में की जाएगी। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे से होने वाले कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर इन किताबों को लॉन्च करेंगे।

‘प्रभात प्रकाशन‘ की ओर से आयोजित किए जाने वाले इस कार्यक्रम में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ (Guest of Honour) के रूप में ‘इंडिया फाउंडेशन’ के डायरेक्टर कैप्टन आलोक बंसल और ‘सुप्रीम कोर्ट’ के सीनियर एडवोकेट अमन सिन्हा शामिल रहेंगे।

 

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नहीं रहे ‘कुमुदम’ पत्रिका के संपादक प्रिया कल्याणरमन

साप्ताहिक पत्रिका ‘कुमुदम’ के संपादक व वरिष्ठ पत्रकार प्रिया कल्याणरमन का चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

Last Modified:
Friday, 24 June, 2022
Priya4512

साप्ताहिक पत्रिका ‘कुमुदम’ के संपादक व वरिष्ठ पत्रकार प्रिया कल्याणरमन का चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 56 साल के थे। वे कुमुदम समूह को तीन दशकों से भी अधिक समय से अपनी सेंवाए दे रहे थे। प्रिया कल्याणरमन को ‘रामचंद्रन’ के नाम से भी जाना जाता है।

प्रिया कल्याणरमन नागपट्टिनम जिले के रहने वाले हैं और उनकी पत्नी राजा सियामाला एक लेखिका हैं। प्रिया कल्याणरमन का एक बेटा और एक बेटी है। उन्होंने अपना उपनाम अपने पिता और माता के नाम पर रखा। कॉलेज से स्नातक होने के बाद, उन्होंने सरकारी नौकरी को ठुकरा दिया और 21 साल की उम्र में कुमुथम साप्ताहिक पत्रिका में एक पत्रकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। बाद में वे इस पत्रिका के संपादक बनें और कई वर्षों तक सेंवाएं दी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने वरिष्ठ पत्रकार प्रिया कल्याणरमन यानी कि ‘रामचंद्रन’ के निधन पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना और सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि रामचंद्रन (55) ने कुमुदम समूह में तीन दशकों से अधिक समय तक काम किया है।

स्टालिन ने कहा, ‘आज दिल का दौरा पड़ने से प्रिया कल्याणरमन के आकस्मिक निधन पर मुझे गहरा दुख हुआ है। उनका निधन पत्रकारिता के लिए एक बड़ी क्षति है।’

उन्होंने यहां एक बयान में कहा, ‘मैं शोक संतप्त परिवार, मीडिया मित्रों और कुमुदम के कर्मचारियों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।’

अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के नेता टी.टी.वी दिनाकरन ने भी रामचंद्रन के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘मुझे यह जानकर दुख हुआ कि कुमुदम के संपादक प्रिया कल्याणरमन का निधन हो गया है। मैं उनके परिवार, दोस्तों और मीडिया समुदाय के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।’

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वन भूमि घोटाला: जांच में प्रिंट-टीवी के 15 पत्रकार शामिल, नामों का नहीं हुआ खुलासा!

पंजाब के मोहाली जिले के अधीन आने वाले कुछ क्षेत्रों में रसूखदार और नेताओं के बड़े-बड़े फार्म हाउस जांच के दायरे में हैं।

Last Modified:
Thursday, 23 June, 2022
crime45

पंजाब के मोहाली जिले के अधीन आने वाले कुछ क्षेत्रों में रसूखदार और नेताओं के बड़े-बड़े फार्म हाउस जांच के दायरे में हैं। पंजाब की आप सरकार इन इलाकों में वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है कि आखिरकार जंगलात विभाग यानी वन विभाग की जमीन और पहाड़ों को काटकर कैसे इन इलाकों में बड़े-बड़े फार्म हाउस बनाए गए। इसी कड़ी में पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत, फारेस्ट विभाग के अधिकारी (डीएफओ) गुरमनप्रीत सिंह, एक पत्रकार कमलजीत सिंह व कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) की एक रिपोर्ट की मानें तो गिरफ्तार संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) गुरमनप्रीत सिंह ने 15 टीवी और प्रिंट पत्रकारों को नामजद किया है, जिन्होंने घोटाले के तहत मोहाली जिले के अधीन आने वाले क्षेत्र करोरान, मिर्जापुर और सिसवान गांवों में वन भूमि खरीदी।

पंजाब के विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि गिरफ्तार पंजाब के पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत से पूछताछ में इस घोटाले में कई आईएएस, आईएफएस और पीसीएस अधिकारियों के शामिल होने बात सामने आयी थी। साथ ही पूछताछ में यह भी पता चला कि पत्रकारों और प्रशासनिक अधिकारियों दोनों ने या तो फॉर्महाउस के लिए सस्ती वन भूमि खरीदी या इसकी जंगल की लकड़ी को लाखों रुपए में बेच दिया।

विजिलेंस ब्यूरो ने पूछताछ में सामने आए पत्रकारों व अधिकारियों के नामों को फिलहाल अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है, क्योंकि वह इनके खिलाफ और अधिक सबूत जुटा रही है।

विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर TOI को बताया कि चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित टीवी और प्रिंट मीडिया हाउस के ये पत्रकार यहां के अधिकारियों के साथ मिलकर वन भूमि की खरीद-फरोख्त के साथ-साथ जंगल की लकड़ियों की बिक्री से लाभ कमा चुके हैं। सिसवान, मिर्जापुर और करोरान में कई मामलों की जांच चल रही है। सिसवान, मिर्जापुर और करोरान में इससे जुड़े कई मामलों की जांच चल रही है।

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Times ग्रुप को बाय बोलकर अब इस अखबार से जुड़े युवा पत्रकार सिलवेस्टर तमांग

युवा पत्रकार सिलवेस्टर तमांग ने ‘टाइम्स ग्रुप’ में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब साढ़े तीन साल से इस ग्रुप की डिजिटल बिजनेस कंपनी ‘टाइम्स इंटरनेट’ में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

Last Modified:
Wednesday, 22 June, 2022
Sylvester Tamang

युवा पत्रकार सिलवेस्टर तमांग (Sylvester Tamang) ने ‘टाइम्स ग्रुप’ (Times Group) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब साढ़े तीन साल से इस ग्रुप की डिजिटल बिजनेस कंपनी ‘टाइम्स इंटरनेट’ (Times Internet) में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

सिलवेस्टर तमांग ने अब अपनी नई पारी की शुरुआत ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) से की है। उन्होंने दिल्ली में बतौर असिस्टेंट एडिटर जॉइन किया है।

तमांग को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब नौ साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों में काम किया है। उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत अंग्रेजी अखबार ‘मिलेनियम पोस्ट’ (Millennium Post) से की थी। अब तक वह ‘डीडी न्यूज’ (DD News), ‘सीएनएन-न्यूज18’ (CNN-News 18), ‘जी’ (Zee) और  ‘एनडीटीवी’ (NDTV) जैसे प्रमुख मीडिया प्रतिष्ठानों में अपनी भूमिकाएं निभा चुके हैं।

मूल रूप से दार्जिलिंग के रहने वाले सिलवेस्टर तमांग का जन्म और पढ़ाई-लिखाई दिल्ली से हुई है। दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएट सिलवेस्टर तमांग ने ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म की पढ़ाई की है।

समाचार4मीडिया की ओर से सिलवेस्टर तमांग को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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‘मुंबई समाचार’ की 200वीं वर्षगांठ में शामिल हुए PM मोदी, कही ये बात

200 सालों से लगातार प्रकाशित होने वाले गुजराती दैनिक अखबार ‘मुंबई समाचार’ के द्विशताब्दी महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए।

Last Modified:
Tuesday, 14 June, 2022
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200 सालों से लगातार प्रकाशित होने वाले गुजराती दैनिक अखबार ‘मुंबई समाचार’ के द्विशताब्दी महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। यह कार्यक्रम मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के जियो वर्ल्ड सेंटर में आयोजित किया गया।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मुंबई समाचार जब शुरू हुआ था, तब गुलामी का अंधेरा घना हो रहा था। ऐसे कालखंड में गुजराती जैसी भारतीय भाषा में अखबार निकालना इतना आसान नहीं था। मुंबई समाचार ने उस दौर में भाषाई पत्रकारिता को विस्तार दिया।

वहीं, मुंबई समाचार की 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पीएम मोदी ने विशेष डाक टिकट लॉन्च किया। इस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल रहे। यहां एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जहां आगंतुक 18वीं सदी की अखबार छपाई मशीन देखने पहुंचे।

इस दौरान पीएम मोदी ‘मुंबई समाचार’ के 200 साल के सफर पर एक किताब और वीडियो फिल्म का भी विमोचन किया।

‘मुंबई समाचार’ ने दो महामारियों, दो विश्व युद्धों, कपड़ा और व्यापारिक केंद्र से वित्तीय व फिल्म उद्योग की राजधानी तक कई अवतारों में बदले इस शहर के विकास को देखा है। ‘मुंबई समाचार’ के निदेशक होर्मुसजी कामा ने कहा कि 20 साल पहले अखबार ने शोध किया और पाया कि यह भारत का सबसे पुराना सक्रिय प्रकाशन और दुनिया का चौथा सबसे पुराना प्रकाशन है।

‘बॉम्बे समाचार’ (पूर्व का नाम) 1822 में एक साप्ताहिक के रूप में शुरू हुआ था। शुरुआत में पाठकों को इस अखबार के जरिए जहाजों की आवाजाही और वस्तुओं के बारे में जानकारी दी जाती थी। धीरे-धीरे व्यापार पर ध्यान देने के साथ शहर के बारे में अन्य जानकारी दी जाने लगी।

पारसी विद्वान फरदुनजी मर्जबान ने बांग्ला अखबार ‘समाचार दर्पण’ शुरू होने के चार साल बाद इसका प्रकाशन शुरू किया, जो भारत में प्रकाशित होने वाला दूसरा गैर-अंग्रेजी समाचार पत्र बन गया। फिर इसका नाम ‘मुम्बिना समाचार’ रखा गया। शुरुआती 10 वर्षों में यह साप्ताहिक था, फिर यह द्वि-साप्ताहिक बना और 1855 से दैनिक अखबार बन गया। वर्ष 1933 में कामा परिवार के पास इस अखबार का मालिकाना हक आया।

वीडियो के जरिए देखें क्या कुछ कहा पीएम मोदी ने-

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‘अमर उजाला’ में कई संपादकों के कार्यक्षेत्र बदले

हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’ (Amar Ujala) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। दरअसल, खबर यह है कि यहां कई संपादकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है।

Last Modified:
Monday, 13 June, 2022
Amar Ujala

हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’ (Amar Ujala) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। दरअसल, खबर यह है कि यहां कई संपादकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। इन बदलावों के तहत आगरा संस्करण में संपादक विनोद पुरोहित का तबादला कानपुर किया गया है। जल्द ही वह वहां जॉइन करेंगे। देहरादून के न्यूज एडिटर कुमार अतुल को अलीगढ़ में संपादक बना कर भेजा गया है। अभी तक अलीगढ़ यूनिट की जिम्मेदारी विनोद पुरोहित ही संभाल रहे थे। 

इसके साथ ही बतौर संपादक कानपुर में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे विजय त्रिपाठी को लखनऊ में राजीव सिंह की जगह संपादक बनाकर भेजा गया है। उन्होंने वहां जॉइन भी कर लिया है। बता दें कि लखनऊ के संपादक राजीव सिंह सेवानिवृत्त हो गए हैं। सूत्रों से मिली खबर के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद भी राजीव सिंह अमर उजाला समूह से जुड़े रहेंगे और उन्हें नोएडा में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है।

पिछले दिनों हिंदी दैनिक ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran) की आगरा यूनिट में न्यूज एडिटर पद से इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ पत्रकार नवीन पटेल को अमर उजाला, प्रयागराज का नया एडिटर नियुक्त किया गया है। नई व्यवस्था के तहत उन्होंने अपना कार्यभार ग्रहण भी कर लिया है।

इसके अलावा खबर यह भी है कि अमर उजाला, नोएडा के स्थानीय संपादक भूपेंद्र कुमार को आगरा भेजा जा रहा है। अंदरखाने के सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार, इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के संपादक मनोज मिश्रा को नोएडा में भूपेंद्र कुमार की जगह भेजा जा रहा है। हालांकि, प्रबंधन की ओर से आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।  

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